अल्जाइमर रोग : कारण, लक्षण और इलाज – Alzheimer’s Disease in Hindi

Written by

रोजमर्रा के कामकाज के दौरान छोटी-छोटी बातों को भूल जाना आम है। हां, अगर कोई अहम बातों को भी भूलने लगे, तो यह अल्जाइमर का लक्षण हो सकता है। इस बीमारी से पीड़ित लोग अपनों के साथ होते हुए भी नहीं होते, क्योंकि उनके दिमाग की तमाम बातें और यादें मिटने लगती हैं। अफसोस, इस भूलने की बीमारी यानी अल्जाइमर का कोई सटीक इलाज नहीं है (1)। यह बीमारी समय के साथ और गंभीर होती जाती है, लेकिन दवाई और अल्जाइमर रोग के घरेलू उपाय से इसके लक्षण को कुछ कम किया जा सकता है। इसी वजह से स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम अल्जाइमर रोग से जुड़ी सभी जानकारी लेकर आए हैं।

स्क्रॉल करके आगे पढ़ें

लेख के पहले भाग में हम बताएंगे कि अल्जाइमर रोग क्या होता है।

अल्जाइमर रोग क्या है – What is Alzheimer’s in Hindi

अल्जाइमर रोग न्यूरोलॉजिकल यानी दिमाग संबंधी विकार है। इसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं खत्म व नष्ट होने लगती हैं, जिससे याददाश्त और दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का सबसे आम प्रकार है। शुरुआती दौर में अल्जाइमर के लक्षण कम होते हैं, लेकिन समय के साथ यह समस्या गंभीर होती जाती है। आमतौर पर यह रोग 60 साल के बाद होता है (1)।

माना जाता है कि युवा लोगों को भी अल्जाइमर रोग होता है, लेकिन यह आम नहीं है। हालांकि, अभी भी अल्जाइमर डिजीज का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है, इसलिए वैज्ञानिक इस मामले में काफी शोध कर रहे हैं (2)। एक रिसर्च में यह भी सामने आया था कि अल्जाइमर रोग भी एक तरह की ऑटोइम्यून बीमारी हो सकती है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही न्यूरॉन्स को खत्म करने लगती है (3)।

पढ़ते रहें लेख

अल्जाइमर रोग क्या है, जानने के बाद अब आगे अल्जाइमर रोग के चरण पर एक नजर डाल लें।

अल्जाइमर रोग के चरण – Stages of Alzheimer’s in Hindi

व्यापक रूप से अल्जाइमर को 7 चरणों में विभाजित किया गया है। इन सभी सात स्टेज के बारे में हम यहां विस्तार से बता रहे हैं (4)।

स्टेज 1: नो कॉग्निटिव इंपेयरमेंट (No Cognitive Impairment)

इस दौरान स्मृति से संबंधित किसी तरह की समस्या नहीं होती। डॉक्टर भी इस स्टेज का पता नहीं लगा पाते, क्योंकि इस चरण के दौरान प्रभावित व्यक्ति में आमतौर पर कोई लक्षण नजर नहीं आते।

स्टेज 2: मामूली गिरावट (Very Mild Decline)

इस स्टेज में अल्जाइमर प्रभावित व्यक्ति को लगता है कि उसकी याददाश्त कम हो रही है और वह परिचित शब्दों, जगह और लोगों के नाम भूल रहा है। जैसे – चाबियां, चश्मा और अन्य रोजमर्रा की चीजों को रखने की जगह और दोस्तों के नाम भूलना।

स्टेज 3: माइल्ड कॉग्निटिव डिकलाइन (Mild Cognitive Decline)

इस स्टेज पर रोगी के मानसिक (संज्ञानात्मक) व्यवहार में बदलाव दिखने लगता है। व्यक्ति की याददाश्त और एकाग्रता कम होने लगती है। डॉक्टर परीक्षण के दौरान इस स्टेज का पता लगा सकते हैं। ऐसे मरीज परिवार व करीबी लोगों के नाम भूल जाते हैं और नए लोगों से मिलने पर उनका नाम याद नहीं रख पाते। साथ ही किसी भी प्लान को बनाने की क्षमता में कमी आने लगती है और वो सामान खोने या किसी गलत जगह पर रख देते हैं।

स्टेज 4: माडरेट कॉग्निटिव डिकलाइन (Moderate Cognitive Decline)

इस दौरान व्यक्ति हाल ही में हुई घटनाओं को काफी हद तक भूल जाते हैं। इस स्टेज में किसी भी तरह का बिल भरने, पैसों से संबंधित कामों को करने की क्षमता में कमी आने लगती है। साथ ही खुद से जुड़ी हुई बीती बातों को व्यक्ति भूलने लगता है।

स्टेज 5: मॉडेरटली सीवियर कॉग्निटिव डिक्लाइन (Moderately Severe Cognitive Decline)

इस चरण में अल्जाइमर के लक्षण काफी ज्यादा दिखने लगते हैं। कई नई समस्याएं होने लगती हैं, जैसे मोबाइल नंबर, घर का पता, तारीख, महीना और मौसम को याद रखने में समस्या व गिनती भूलना आदि। इस स्टेज में व्यक्ति को अपना नाम और अपने घर परिवार वालों का नाम याद रहता है। साथ ही खाना खाने और शौचालय इस्तेमाल करने में कोई समस्या नहीं होती।

स्टेज 6: गंभीर गिरावट (Severe cognitive decline)

इस अवस्था में स्मृति से संबंधित समस्याएं इतनी गंभीर हो जाती हैं कि दैनिक गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं, जैसे कपड़े पहनना और बाथरूम इस्तेमाल करने में समस्या होना। सामान्य तौर पर इस दौरान व्यक्ति अपने घरवालों का नाम भूल जाता है, लेकिन अपना नाम याद रखता है और परिचितों को भी पहचान लेता है। इस स्टेज में नींद आने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

स्टेज 7: लेट स्टेज (Very severe cognitive decline)

अल्जाइमर डिजीज का यह अंतिम चरण होता है। इसमें व्यक्ति प्रतिक्रिया करने, बोलने और शरीर को नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है। हालांकि, कभी-कभी पीड़ित शब्द या छोटे-छोटे वाक्य बोल लेता है। इस दौरान व्यक्ति को खाने और शौचालय जाने में सहायता की जरूरत पड़ती है। साथ ही सहायता के बिना चलने, उठने व बैठने की क्षमता भी लगभग खत्म हो जाती है। इसके अलावा, मांसपेशियां भी कठोर होने लगती हैं और खाना निगलने में भी समस्या हो सकती है।

आगे लक्षण जानें

लेख के अगले हिस्से में हम बता रहे हैं कि अल्जाइमर रोग के लक्षण क्या-क्या हैं।

अल्जाइमर रोग के लक्षण – Symptoms of Alzheimer’s in Hindi

भूलने की बीमारी जिसकी वजह से हर दिन प्रभावित हो, वह सामान्य रूप से बढ़ती उम्र का हिस्सा नहीं है। यह अल्जाइमर का लक्षण हो सकता है। ऐसे में भूलने की बीमारी से घर में कोई भी जूझ रहा हो, तो सतर्क होना जरूरी है। नीचे हम कुछ संकेत व लक्षण बता रहे हैं, जिनके दिखते ही भूलने की बीमारी का इलाज करने के लिए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है (4)।

  • याददाश्त कम होना
  • परिवार के सदस्यों को पहचान न पाना
  • घर से संबंधित कार्य करने में परेशानी
  • कुछ भी बोलने व समझने में समस्या
  • समय और स्थान को लेकर भ्रम होना व पहचान न पाना
  • निर्णय लेने की क्षमता का कम व खत्म होना
  • सोचने की क्षमता में कमी या परेशानी
  • चीजों का खो जाना
  • बर्ताव में बदलाव
  • व्यक्तित्व में परिवर्तन
  • आत्मबल में कमी
  • दांत ब्रश करना और बालों को कंघी करना भूलना
  • समय के साथ चिंतित और आक्रामक व गुस्सैल होना

लेख में बने रहें

आर्टिकल के अगले हिस्से में हम अल्जाइमर रोग के कारण की जानकारी दे रहे हैं।

अल्जाइमर रोग के कारण – Causes of Alzheimer’s in Hindi

अल्जाइमर रोग का वैसे तो कोई सटीक कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन शोध से पता चलता है कि मस्तिष्क में कुछ परिवर्तन होने से ही अल्जाइमर रोग होता है (5)। इसके कुछ संभावित कारण ये हो सकते हैं।

  • मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम के नर्व सेल्स (तंत्रिका कोशिकाओं) का काम न करना व नष्ट होना (6)।
  • माना जाता है कि पूरी नींद न लेना भी आगे चलकर अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है (7)।
  • दिमाग में ताउ प्रोटीन (Tau protein) और बीटा-एमीलॉइड (β-Amyloid) अमीनो एसिड का जमा होना (7)।
  • न्यूरोपिल थ्रेड (असामान्य न्यूरॉनल प्रक्रियाएं) (8) ।
  • सिनैप्स लॉस (Synapse Loss) के कारण भी यह समस्या हो सकती है। सिनैप्स न्यूरॉनल जंक्शन होता है, जिनके माध्यम से न्यूरॉन्स एक दूसरे से संवाद करते हैं (8)।
  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी एक कारण हो सकता है (9)।

आगे और जानकारी है

चलिए, अब जानते हैं कि अल्जाइमर रोग के लिए घरेलू उपाय के तौर पर क्या इस्तेमाल किया जा सकता है।

अल्जाइमर रोग के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Alzheimer’s in Hindi

अल्जाइमर रोग का अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं है (1)। हां, कुछ घरेलू उपायों की मदद से अल्जाइमर के लक्षणों को कम किया जा सकता है। अल्जाइमर के घरेलू उपाय में ये शामिल हैं।

1. गिंको बाइलोबा (जिन्‍कगो)

सामग्री:

  • जिन्कगो बाइलोबा की पत्तियां या सप्लीमेंट

उपयोग करने का तरीका:

  • जिन्कगो बाइलोबा की पत्तियां को महीन पीस लें।
  • अब इस पेस्ट से आधा कप जूस निकालकर पी लें।
  • डॉक्टर की सलाह पर इसके सप्लीमेंट का भी सेवन किया जा सकता है।

कैसे लाभदायक है:

अल्जाइमर रोग के उपचार के लिए जिन्कगो बाइलोबा का इस्तेमाल किया जा सकता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, जिन्कगो बाइलोबा कॉग्निटिव फंक्शन यानी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार कर सकता है। इससे अल्जाइमर के इलाज में मदद मिल सकती है (10)। फिलहाल, अल्जाइमर को ठीक करने वाले गुण का पता लगाने के लिए जिन्कगो बाइलोबा पर और शोध करने की जरूरत है।

2. विटामिन-ई (Vitamin E)

सामग्री:

  • विटामिन-ई युक्त खाद्य पदार्थ या सप्लीमेंट

उपयोग करने का तरीका:

  • सीधे विटामिन-ई से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।
  • विटामिन-ई युक्त खाद्य पदार्थों में बादाम, सूरजमुखी के बीज, पालक, कीवी और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल हैं।
  • विटामिन-ई के अतिरिक्त सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं।

कैसे लाभदायक है:

अल्जाइमर की स्थिति में सुधार करने के लिए विटामिन ई सहायक साबित हो सकता है। इस संबंध में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में दिया हुआ है कि अल्जाइमर का एक कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी हो सकता है। ऐसे में अल्जाइमर के बचाव और इसके लक्षण को कम करने में विटामिन-ई अहम भूमिका निभा सकता है।

अल्जाइमर को लेकर की गई स्टडी के मुताबिक, विटामिन-ई न केवल ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को दूर करने में सक्षम है, बल्कि याददाश्त और मस्तिष्क स्वास्थ्य पर भी अच्छा असर डाल सकता है। विटामिन-ई युक्त खाद्य पदार्थों के अलावा, डॉक्टर की सलाह पर 3 से 15 mg तक के विटामिन-ई सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं (9)।

3. हल्दी

सामग्री:

  • एक चम्मच हल्दी पाउडर
  • एक गिलास गर्म दूध

उपयोग करने का तरीका:

  • एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिक्स कर लें।
  • इसे अच्छी तरह से मिलाएं और फिर पी लें।
  • इस मिश्रण का रोजाना एक बार सेवन किया सकता है।

कैसे लाभदायक है:

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन पॉलीफेनोल कंपाउंड अल्जाइमर के उपचार और रोकथाम में अहम भूमिका निभा सकता है। दरअसल, करक्यूमिन में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी व लिपोफिलिक प्रभाव होता है, जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार कर सकते हैं। साथ ही करक्यूमिन न्यूरॉन्स को नष्ट होने से रोककर याददाश्त में सुधार कर सकता है। इसी वजह से अल्जाइमर रोग के लक्षण को कम करने में हल्दी के उपयोग को सहायक माना जाता है। (11)।

4. ओमेगा-3 (Omega-3)

सामग्री:

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ व सप्लीमेंट

उपयोग करने का तरीका:

  • रोजाना ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त भोजन का सेवन करें।
  • ओमेगा-3 से भरपूर खाद्य पदार्थों में मछली, अलसी, अखरोट, सोया और चिया बीज शामिल हैं।
  • डॉक्टर की सलाह पर इसका सप्लीमेंट भी ले सकते हैं।

कैसे लाभदायक है:

ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क संबंधी कार्यों व गतिविधियों को बढ़ाने में मदद कर सकता है। जानवरों पर किए गए शोध के मुताबिक, यह फैटी एसिड बीटा-एमीलॉइड (न्यूरॉन में जमने वाला अमीनो एसिड) कम करने और अल्जाइमर रोग की वजह से न्यूरॉन्स को होने वाले नुकसान को रोक सकता है। इसी वजह से अल्जाइमर रोग के हल्के लक्षण नजर आने पर ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों के सेवन को फायदेमंद माना जाता है (12)।

5. नारियल तेल

सामग्री:

  • दो चम्मच नारियल तेल

उपयोग करने का तरीका:

  • इस तेल को खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इसके अलावा, नारियल तेल को हल्का गर्म करके सिर की मालिश भी कर सकते हैं।

कैसे लाभदायक है:

अल्जाइमर रोग से कुछ हद तक राहत पाने के लिए नारियल तेल का उपयोग भी किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश रिसर्च के अनुसार, नारियल तेल मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार कर सकता है। इससे अल्जाइमर के लक्षण को कम करने में सहायता मिल सकती है (13)। नारियल तेल का कौन-सा गुण इसमें मदद करता है, यह जानने के लिए अधिक वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।

पढ़ना जारी रखें

अल्जाइमर के घरेलू उपाय के बाद जानते हैं कि अल्जाइमर रोग का निदान कैसे किया जाता है।

अल्जाइमर रोग का निदान- Diagnosis of Alzheimer’s Disease in hindi

अल्जाइमर रोग का निदान मुश्किल होता है, लेकिन सही समय पर डॉक्टर की मदद से इस समस्या का पता लगाया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर निम्न निदान संबंधी सुझाव दे सकते हैं (5):

  • फिजिकल और तंत्रिका तंत्र की जांच से इसका निदान किया जा सकता है।
  • अल्जाइमर रोग का पता लगाने के लिए डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछ सकते हैं।
  • इस समस्या का निदान करने के लिए डॉक्टरी सलाह पर मेंटल फंक्शन टेस्ट यानी मानसिक कार्य संबंधी परीक्षण किया जा सकता है।
  • अल्जाइमर रोग का निदान सीटी स्कैन और एमआरआई से भी हो सकता है।
  • इसके अलावा, पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) स्कैन की भी सहायता ली जा सकती है।

जुड़े रहें हमारे साथ

आगे हम अल्जाइमर का इलाज किस तरह से किया जा सकता है, इससे जुड़ी जानकारी दे रहे हैं।

अल्जाइमर रोग का इलाज- Treatment of Alzheimer’s Disease in hindi

हम ऊपर ही बता चुके हैं कि अल्जाइमर रोग को ठीक करने का कोई इलाज नहीं है। हां, इसके लक्षण को कम करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाओं को लेने की सलाह दे सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (14)।

  • अल्जाइमर रोग के लक्षण को कम करने के लिए डॉक्टर कोलिनेस्टेरेज इनहिबिटर (Cholinesterase Inhibitors) दवाई लेने की सलाह दे सकते हैं।
  • इस समस्या के लक्षण के लिए डॉक्टर ग्लूटामेट केमिकल कंपाउंड को नियंत्रित करने वाली दवाई दे सकते हैं। दरअसल, अधिक मात्रा में ग्लूटामेट का उत्पादन होने से ब्रेन सेल्स डेड हो सकते हैं, जो अल्जाइमर का जोखिम बनता है।
  • अल्जाइमर के लक्षणों से राहत दिलाने के लिए डॉक्टर एन-मिथाइल डी-एस्पिरेट (एनएमडीए) एंटागोनिस्ट लेने की भी सलाह दे सकते हैं।

नीचे भी पढ़ें

अल्जाइमर के रोगियों का किस तरह से ख्याल रखा जाना चाहिए, इसपर एक नजर डाल लेते हैं।

अल्जाइमर रोगी की देखभाल कैसे करें- How To Take Care Of An Alzheimer’s Patient in Hindi

अल्जाइमर की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति की देखभाल करने के लिए इन टिप्स को अपना सकते हैं। इससे अल्जाइमर की स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है (15)।

  • इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति के साथ समय बिताए और पुरानी बातों को लेकर उनसे चर्चा करें।
  • उनके गाड़ी चलने की क्षमता पर निगरानी रखें। हो सके तो एक ड्राइवर भी रख सकते हैं।
  • अल्जाइमर रोगियों को स्वस्थ आहार दें। इसके लिए हरी सब्जी और फल देना अच्छा होगा।
  • उनके दैनिक काम में मदद करें। जैसे कि शॉपिंग करने और दवाई लेने में।
  • अल्जाइमर रोगियों का समय -समय पर चेकअप करवाएं।
  • उन्हें भावनात्मक सपोर्ट दें।
  • लो फैट और अधिक ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त आहार दें।

आगे जरूरी जानकारी है

अब हम अल्जाइमर रोग के जोखिम कारकों के बारे में बता रहे हैं।

अल्जाइमर रोग के जोखिम कारक – Risk Factors of Alzheimer’s in Hindi

अल्जाइमर का जोखिम कारक सेरेब्रोवास्कुलर (Cerebrovascular) रोग भी है। यह रोग मरीज के मस्तिष्क और रक्त वाहिकाओं में खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोक सकता है। इसके अलावा, रक्त वाहिका से संबंधित वास्कुलोपैथी (Vasculopathies) नामक विकार होने पर भी अल्जाइमर होने का खतरा बढ़ जाता है। इन बीमारियों के साथ ही अल्जाइमर के अन्य जोखिम कारक कुछ इस प्रकार हैं (5) (16)।

  • उम्र का बढ़ना
  • सिर में किसी तरह की चोट का लगना
  • पर्यावरण का प्रभाव
  • मधुमेह
  • उच्च रक्तचाप
  • धूम्रपान और मोटापा
  • शरीर में अल्जाइमर रोग से जुड़े कुछ जीन का होना
  • महिलाओं को अल्जाइमर होना का ज्यादा खतरा होता है
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल की वजह से होने वाली हृदय और रक्त वाहिकाओं से संबंधित समस्या
  • परिवार या करीबी रिश्तेदारों में किसी का अल्जाइमर रोग से पीड़ित होना

अंत तक पढ़ें लेख

आगे हम अल्जाइमर रोग से बचाव करने के कुछ तरीकों के बारे में बता रहे हैं।

अल्जाइमर रोग से बचने के उपाय – Prevention Tips for Alzheimer’s in Hindi

भूलने की बीमारी का इलाज करवाने के साथ ही अल्जाइमर रोगियों के दिनचर्या में कुछ बदलाव भी करना जरूरी है। ये बदलाव शुरुआती स्टेज के अल्जाइमर रोग के लक्षण को कम करने के साथ ही स्वस्थ लोगों को इस बीमारी से बचा सकते हैं (17)।

  • नियमित व्यायाम और अन्य शारीरिक गतिविधियों करते रहें
  • ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम रखना
  • संतुलित और स्वस्थ आहार खासकर मेडिटेरेनियन यानी जीएम डाइट का सेवन करें
  • खाली समय में साइकलिंग, घुड़सवारी व स्विमिंग आदि करना
  • दिमाग से संबंधित गतिविधियों में हिस्सा लेना
  • सिर को चोट लगने से बचाए रखना
  • सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेना
  • डिप्रेशन व तनाव से बचना
  • धूम्रपान को छोड़ना
  • वजन को नियंत्रित रखना
  • अच्छी नींद लेना

अल्जाइमर से निपटना और इससे प्रभावित व्यक्ति को संभालना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में इस लेख में दी गई जानकारी की मदद से अल्जाइमर रोग को समझने और रोगी का ख्याल रखने के तरीके आप जान सकते हैं। हम समझते हैं कि प्रियजनों में अल्जाइमर रोग से संबंधित बदलाव को स्वीकार करना आसान नहीं, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में हार नहीं माननी चाहिए। आप आर्टिकल में दी गई जानकारी की सहायता से अल्जाइमर रोगी को भावनात्मक और मानसिक सहायता देकर उनके साथ खड़े रहें। साथ ही डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह को भी फॉलो करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अल्जाइमर के लिए डॉक्टर से कब संपर्क करें?

लेख में ऊपर बताए गए अल्जाइमर रोग के लक्षण नजर आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए। अल्जाइमर रोग का जितनी जल्दी पता चलता है, उतनी जल्दी इस रोग का निदान करके स्थिति को काबू करने में मदद मिल सकती है (5)।

अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया में अंतर

डेमेंटिया की स्थिति में स्मरण शक्ति कम होना, भ्रम, व्यक्तित्व में परिवर्तन और रोजमर्रा की गतिविधियों में परेशानी हो सकती है। डेमेंटिया के कई प्रकार होते हैं, जिनमें सबसे आम अल्जाइमर रोग है। डेमेंटिया की समस्या से जूझ रहे ज्यादातर लोगों को अल्जाइमर होता है। इन दोनों समस्याओं का संबंध याददाश्त से है (18)।

क्या अल्जाइमर के नए लक्षण अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को संभालने में परेशानी पैदा कर सकते हैं?

हां, अचानक दिखने वाले अल्जाइमर डिजीज के नए लक्षण – जैसे नाम को भूलना, निर्णय लेने में परेशानी, टूथब्रथ करना भूलने के कारण अन्य स्वास्थ्य स्थितियों का इलाज करने में मुश्किल हो सकती है (1)।

समय के साथ अल्जाइमर रोग कितना बढ़ेगा?

समय के साथ अल्जाइमर रोग और गंभीर हो सकता है, क्योंकि नए-नए लक्षण नजर आने लगते हैं। साथ ही ऐसा समय भी आ जाता है कि व्यक्ति कुछ भी बोलने और समझने की क्षमता को खो देता है। इस स्थिति के गंभीर होने की दर प्रत्येक रोगी पर निर्भर करती है। यह दर हर किसी में अलग-अलग हो सकती है (2)।

पीनट बटर की मदद से अल्जाइमर का पता कैसे लगा सकते हैं?

पीनट बटर की खुशबू के मदद से अल्जाइमर रोग का पता लगाने में मदद मिल सकता है। अगर अल्जाइमर रोग के लक्षण दिखाई देने वाले व्यक्ति को अगर पीनट बटर की खुशबू नहीं आती, तो माना जाता है कि उसे अल्जाइमर डिजीज है (19)।

अल्जाइमर रोगी कब तक जी सकते हैं?

अल्जाइमर रोग होने के 3 से 20 साल तक रोगी जी सकते हैं (5)।

क्या अल्जाइमर के मरीज बहुत सोते हैं?

नहीं, अल्जाइमर के मरीज को रात में नींद न आने की समस्या हो सकती है (5)।

अल्जाइमर के साथ एक व्यक्ति कैसा महसूस करता है?

अल्जाइमर रोग में व्यक्ति को अकेलापन महसूस हो सकता है। इस स्थिति में यादें कमजोर हो जाती हैं, जिससे कि वह लोगों को ठीक से नहीं पहचान पाता है।

Sources

Articles on StyleCraze are backed by verified information from peer-reviewed and academic research papers, reputed organizations, research institutions, and medical associations to ensure accuracy and relevance. Read our editorial policy to learn more.

Was this article helpful?
The following two tabs change content below.
आवृति गौतम ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। इन्होंने अपने करियर की शुरूआत डिजिटल मीडिया से ही की थी। इस क्षेत्र में इन्हें काम करते हुए दो वर्ष से ज्यादा हो गए हैं। आवृति को स्वास्थ्य विषयों पर लिखना और अलग-अलग विषयों पर विडियो बनाना खासा पसंद है। साथ ही इन्हें तरह-तरह की किताबें पढ़ने का, नई-नई जगहों पर घूमने का और गाने सुनने का भी शौक है।

ताज़े आलेख