अश्वगंधा के 24 फायदे, उपयोग और नुकसान – All About Ashwagandha in Hindi

Medically reviewed by Shivani Aswal Sharma, Nutritionist, Diabetes Educator, and Yoga Trainer
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अश्वगंधा का उपयोग सदियों से विश्वभर में उसके अनगिनत लाभ के कारण हो रहा है। वैज्ञानिक भी अश्वगंधा को गुणकारी औषधि मानते हैं। कहा जाता है कि अश्वगंधा व्यक्ति को स्वस्थ रखने में अहम योगदान निभा सकता है। इसी वजह से गुणों से भरपूर अश्वगंधा के फायदे के बारे में हम स्टाइलक्रेज के इस लेख में विस्तार से बता रहे हैं। बेशक, अश्वगंधा एक औषधि है, लेकिन इसकी मात्रा पर ध्यान देना भी जरूरी है। इसका कितना सेवन किया जाना चाहिए, इससे जुड़ी जानकारी भी यहां दी गई है। साथ ही अधिक सेवन से होने वाले अश्वगंधा के नुकसान के बारे में भी हम बता रहे हैं।

विस्तार से पढ़ें

सबसे पहले यह जान लेते हैं कि अश्वगंधा क्या होता है। इसके बाद हम अश्वगंधा चूर्ण के फायदे के बारे में बताएंगे।

अश्वगंधा क्या है – What is Ashwagandha

अश्वगंधा एक जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल प्राचीन काल से किया जाता रहा है। इस जड़ी-बूटी से अश्वगंधा चूर्ण, पाउडर और कैप्सूल बनाया जाता है। अश्वगंधा का वैज्ञानिक नाम विथानिया सोम्निफेरा (Withania somnifera) है। आम बोलचाल में इसे अश्वगंधा के साथ-साथ इंडियन जिनसेंग और इंडियन विंटर चेरी भी कहा जाता है। इसका पौधा 35-75 सेमी लंबा होता है। मुख्य रूप से इसकी खेती भारत के सूखे इलाकों में होती है, जैसे – मध्यप्रदेश, पंजाब, राजस्थान व गुजरात। इसे बहुतायत संख्या में चीन और नेपाल में भी उगाया जाता है। विश्वभर में इसकी 23 और भारत में दो प्रजातियां पाई जाती हैं (1)। आगे हम बताएंगे की अश्वगंधा चूर्ण से क्या होता है और अश्वगंधा के गुण क्या हैं।

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चलिए, अब विस्तार से अश्वगंधा के गुण पर एक नजर डाल लेते हैं। इसके बाद अश्वगंधा के फायदे के बारे में बताएंगे।

अश्वगंधा के औषधीय गुण

अश्वगंधा को संपूर्ण शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। अश्वगंधा के गुण में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटी स्ट्रेस, एंटीबैक्टीरियल एजेंट और इम्यून सिस्टम को बेहतर करना व अच्छी नींद शामिल हैं। इसके सेवन से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली बेहतर हो सकती है (2)

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (एनसीबीआई) की ओर से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अश्वगंधा का उपयोग इम्यूनिटी को बढ़ाने, पुरुषों में यौन व प्रजनन क्षमता को बेहतर करने और तनाव को कम करने के लिए भी किया जा सकता है (3) (4)

इसके अलावा, अश्वगंधा के औषधीय गुण में एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव भी शामिल है, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स को बनने से रोक सकता है (5)। इसके कारण एजिंग व अन्य बीमारियां कम हो सकती हैं (6)। अब लेख के अगले हिस्से में पढ़ें अश्वगंधा से क्या क्या लाभ होता है।

आगे है और जानकारी

अगले भाग में जानिए अश्वगंधा चूर्ण के फायदे क्या हैं। इसके बाद हम अश्वगंधा का सेवन कैसे करें और अश्वगंधा चूर्ण का उपयोग कैसे करें यह बताएंगे।

अश्वगंधा के फायदे – Benefits of Ashwagandha in Hindi

अश्वगंधा के गुण की वजह से इसके फायदे अनेक होते हैं। इसी वजह से हम आगे विस्तार से अश्वगंधा के फायदे बता रहे हैं। बस ध्यान दें कि अश्वगंधा व्यक्ति को स्वस्थ रखने में मदद करता है, लेकिन किसी गंभीर बीमारी होने पर इसपर निर्भर नहीं रहा जा सकता है। बीमारी से ग्रस्त होने पर चिकित्सकीय परीक्षण और इलाज करवाना जरूरी है। चलिए, अब आपके सवाल अश्वगंधा खाने से क्या होता है, उसका जवाब जानते हैं।

1. कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए अश्वगंधा चूर्ण के फायदे

अश्वगंधा चूर्ण का सेवन करने से टोटल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह एचडीएल (अच्छे कोलेस्ट्रॉल) की मात्रा को बढ़ाने में मदद कर सकता है। वर्ल्ड जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस के शोध में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि अश्वगंधा में हाइपोलिपिडेमिक प्रभाव होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में कुछ मदद कर सकता है (7)

एक अन्य शोध में कहा गया है कि अश्वगंधा टोटल कोलेस्ट्रॉल के साथ ही एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को भी कम करने में मदद कर सकता है। रिसर्च में कहा गया है कि अश्वगंधा 30 दिन में अपना लिपिड लोवरिंग प्रभाव दिखा सकता है (8)

2. अनिद्रा के लिए अश्वगंधा पाउडर के फायदे

नींद न आने की समस्या से जूझ रहे लोग डॉक्टर की सलाह पर अश्वगंधा का सेवन कर सकते हैं। यह हम नहीं बल्कि 2017 में जापान की त्सुकुबा यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट द्वारा किए गए एक रिसर्च में कहा गया है। इस अध्ययन के अनुसार, अश्वगंंधा के पत्तों में ट्राएथिलीन ग्लाइकोल नामक यौगिक होता है, जो गहरी नींद में सोने में मदद कर सकता है। इस रिसर्च के आधार पर कहा जा सकता है कि अनिद्रा के शिकार लोगों के नींद की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए अश्वगंधा का सेवन किया जा सकता है (9)

3. तनाव के लिए अश्वगंधा पाउडर के लाभ

तनाव की समस्या कई बीमारियों का कारण बन सकती है। चूहों पर किए गए शोध के अनुसार, आयुर्वेदिक औषधि अश्वगंधा में मौजूद एंटी-स्ट्रेस गुण तनाव कम करके इसके कारण होने वाली बीमारियों से बचा सकता है (10)

अश्वगंधा में यह एंटी-स्ट्रेस प्रभाव सिटोइंडोसाइड्स (Sitoindosides) और एसाइलस्टरीग्लुकोसाइड्स (Acylsterylglucosides) नामक दो कंपाउंड की वजह से पाया जाता है (2)। ये अश्वगंधा के गुण तनाव से मुक्ति दिलाने में मदद कर सकते हैं। अब अगर आपसे कोई पूछे की अश्वगंधा के क्या फायदे हैं, तो उन्हें तनाव मुक्ति के बारे में जरूर बताएं।

4. यौन क्षमता में वृद्धि (Aphrodisiac) के लिए अश्वगंधा चूर्ण के फायदे

अश्वगंधा एक शक्तिवर्धक औषधि है, जो पुरुषों की यौन क्षमता को बेहतर कर वीर्य की गुणवत्ता में सुधार कर सकती है। 2010 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, अश्वगंधा का उपयोग करने से स्पर्म उत्तमता के साथ-साथ उसकी संख्या में भी वृद्धि हो सकती है। यह शोध स्ट्रेस (ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, केमिकल स्ट्रेस व मानसिक तनाव) के कारण कम हुई प्रजनन क्षमता पर किया गया है (11)

5. कैंसर से बचाव में अश्वगंधा पाउडर के फायदे

एनसीबीआई की ओर से प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध में कहा गया है कि अश्वगंधा में एंटी-ट्यूमर एजेंट होते हैं, जो ट्यूमर को पनपने से रोक सकते हैं। साथ ही अश्वगंधा बतौर कैंसर के इलाज के रूप में इस्तेमाल होने वाली कीमोथेरेपी के नकारात्मक प्रभाव को खत्म करने में मदद कर सकता है (12)

ध्यान रखें कि अश्वगंधा को सीधे तौर पर कैंसर को ठीक करने के लिए नहीं, बल्कि कैंसर से बचाव के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है (13)। अगर किसी को कैंसर है, तो उसे डॉक्टर से इलाज जरूर करवाना चाहिए। साथ ही मरीज डॉक्टर की सलाह पर अश्वगंधा का सेवन कर सकता है।

6. डायबिटीज में अश्वगंधा पाउडर के लाभ

आयुर्वेदिक औषधि अश्वगंधा के जरिए डायबिटीज से भी बचा जा सकता है। इसमें मौजूद हाइपोग्लाइमिक प्रभाव, ग्लूकोज की मात्रा को कम करने में सहायक हो सकता है। अश्वगंधा की जड़ और पत्तों को लेकर साल 2009 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मोल्यूकूलर साइंस ने डायबिटीज ग्रस्त चूहों पर एक अध्ययन किया। कुछ समय बाद चूहों पर इसका सकारात्मक परिवर्तन नजर आया। इसी वजह से कहा जा सकता है कि अश्वगंधा डायबिटीज से बचाव में उपयोगी हो सकता है (14)

7. इम्यूनिटी के लिए अश्वगंधा पाउडर खाने के फायदे

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर नहीं होगी, तो बीमारियों से लड़ना मुश्किल हो जाता है। विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, अश्वगंधा चूर्ण के उपयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार हो सकता है (15)। इसमें मौजूद इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव शरीर की जरूरत के हिसाब से प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव कर सकता है, जिससे रोगों से लड़ने में मदद मिल सकती है (2)। इसलिए, माना जाता है कि अश्वगंधा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

8. थायराइड के लिए

गले में मौजूद तितली के आकार की थायराइड ग्रंथि जरूरी हार्मोंस का निर्माण करती है। जब ये हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, तो शरीर का वजन कम या ज्यादा होने लगता है। इसके कारण कई अन्य तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इसी अवस्था को थायराइड कहते हैं (16) (17)

थायराइड से ग्रस्त चूहों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित रूप से अश्वगंधा की जड़ को दवा के रूप में देने से थायराइड की कार्यप्रणाली में सुधार हो सकता है (18)। साथ ही हाइपोथायराइड (ऐसी स्थिति, जिसमें थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त थायराइड हार्मोन नहीं बनाती है) रोगियों पर हुए अध्ययन में भी अश्वगंधा को थायराइड के लिए लाभकारी माना गया है (19)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि थायराइड के दौरान डॉक्टर की सलाह पर अश्वगंधा का सेवन करना लाभकारी साबित हो सकता है।

9. आंखों की बीमारी के लिए अश्वगंधा खाने के फायदे

तेजी से लोग आंखों से जुड़ी बीमारियां का शिकार हो रहे हैं। मोतियाबिंद जैसी बीमारियों के मामले भी बढ़ने पर हैं (20) (21)। कई लोग मोतियाबिंद से अंंधे तक हो जाते हैं (22)। इसी संबंध में हैदराबाद के कुछ वैज्ञानिकों ने अश्वगंधा को लेकर शोध किया। उनके अनुसार, अश्वगंधा में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो मोतियाबिंद से लड़ने में मदद कर सकते हैं। अध्ययन में पाया गया है कि अश्वगंधा मोतियाबिंद के खिलाफ प्रभावशाली तरीके से काम कर सकता है। यह मोतियाबिंद को बढ़ने से रोकने में कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है (23)

10. अर्थराइटिस में अश्वगंधा पाउडर खाने के फायदे

अर्थराइटिस ऐसी पीड़ादायक बीमारी है, जिसमें मरीज का चलना-फिरना और उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है। इसी के मद्देनजर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चूहों पर 2014 में अश्वगंधा पर शोध किया गया। उस शोध में बताया गया है कि अश्वगंधा के औषधीय गुण एंटीइंफ्लेमेटरी की वजह से इसकी जड़ के रस से अर्थराइटिस के लक्षण कम हो सकते हैं। साथ ही र्थराइटिस के दर्द से भी आराम मिल सकता है (24) (25)

इसके अलावा, एनसीबीआई में मौजूद एक रिसर्च में कहा गया है कि अश्वगंधा और सिद्ध मकरध्वज का एक साथ सेवन करने से भी अर्थराइटिस की समस्या कम हो सकती है (26)। ध्यान दें कि अर्थराइटिस की गंभीर अवस्था में घरेलू नुस्खे के साथ-साथ डॉक्टरी इलाज भी जरूरी है।

11. याददाश्त के लिए अश्वगंधा खाने के फायदे

स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही और बदलती दिनचर्या तेजी से मस्तिष्क की कार्य क्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में जानवरों पर किए गए विभिन्न अध्ययनों में पाया गया कि अश्वगंधा मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और याददाश्त पर सकारात्मक असर डाल सकता है (27) (28)। जैसा कि हम ऊपर बता ही चुके हैं कि अश्वगंधा लेने से नींद भी अच्छी आ सकती है, जिससे मस्तिष्क को आराम मिलता है और वह बेहतर तरीके से काम कर सकता है (29)

12. मजबूत मांसपेशियांं

हड्डियों के साथ-साथ मांसपेशियोंं का मजबूत होना भी जरूरी है। मांसपेशियों के लिए अश्वगंधा का सेवन लाभकारी हो सकता है। इसके सेवन से मांसपेशियां मजबूत होने के साथ ही दिमाग और मांसपेशियों के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है। यही कारण है कि जिम जाने वाले और अखाड़े में अभ्यास करने वाले पहलवान भी अश्वगंधा के सप्लीमेंट्स लेते हैं (30)। फिलहाल, इस संबंध में और वैज्ञानिक शोध करने की बात कही गई है। इतना ही नहीं, अश्वगंधा कमजोरी के लिए और पैरों की मांसपेशियों की ताकत में सुधार कर सकता है। अश्वगंधा को न्यूरोमस्कुलर समन्वय को बेहतर करने के लिए भी इस जाना जाता है (31)

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13. संक्रमण से बचाव के लिए अश्वगंधा खाने के फायदे

लेख में बताई गई तमाम खूबियों के अलावा अश्वगंधा संक्रमण से भी निपटने में मदद कर सकता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया कि अश्वगंधा में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। यह गुण रोग जनक बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ने में मदद कर सकता है। अश्वगंधा की जड़ और पत्तों का रस साल्मोनेला (Salmonella) और ई.कॉली (Escherichia coli) नामक बैक्टीरिया के प्रभाव को कम कर सकता है। साल्मोनेला जीवाणु की वजह से आंत संबंधी समस्याएं और फूड पॉइजनिंग हो सकती है (32)

एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, अश्वगंधा एस्परगिलोसिस (Aspergillosis) नामक संक्रमण के खिलाफ प्रभावी माना गया है। यह इंफेक्शन फेफड़ों में और यह अन्य अंगों में भी संक्रमण पैदा कर प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है (33) (34)। ऐसे में कहा जा सकता है कि संक्रमण से बचने के लिए अश्वगंधा का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है।

14. हृदय रोग से बचाव के लिए अश्वगंधा के लाभ

अश्वगंधा में कार्डियोप्रोटेक्टिव प्रभाव होता है, जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। इस इफेक्ट का कारण अश्वगंधा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एपोप्टोटिक गतिविधि को माना जाता है। इसके  अलावा, अश्वगंधा में मौजूद हाइपोलिपिडेमिक प्रभाव कोलेस्ट्रॉल को कम करके हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इस रिसर्च में कहा गया है कि इन गतिविधियों के अलावा एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-प्लेटलेट, एंटीहाइपरटेंसिव, हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव भी हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं (7)

15. वजन कम करने के लिए अश्वगंधा खाने के फायदे

एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित एक शोध में अश्वगंधा की जड़ के अर्क का सेवन करने से भूख और वजन में कमी पाई गई। शोध में बताया गया है कि अश्वगंधा की जड़ का अर्क तनाव के मनोवैज्ञानिक लक्षणों में सुधार कर सकता है। यह तनाव और चिंता को कम कर भोजन की तीव्र इच्छा में कमी लाकर वजन को कम करने में सहायक हो सकता है। हालांकि, शोध में यह भी कहा गया है कि तनाव की वजह से बढ़ने वाले वजन को कम करने की अश्वगंधा की क्षमता को लेकर आगे और भी अध्ययन की जरूरत है (35)। यहां हम स्पष्ट कर दें कि वजन कम करने के लिए अश्वगंधा के साथ-साथ संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।

16. चिंता और अवसाद के लिए अश्वगंधा चूर्ण खाने के फायदे

अश्वगंधा पाउडर बेनिफिट्स में चिंता और अवसाद से बचाए रखना भी शामिल है। अश्वगंधा के बायोएक्टिव कंपाउंड्स में एंक्सियोलिटिक (Anxiolytic – एंग्जाइटी कम करने की दवा) और एंटी-डिप्रेसेंट जैसी क्रियाएं मिलती हैं। एक रिसर्च में कहा गया है कि 5 दिनों तक इसका सेवन करने से यह चिंता कम करने वाली दवा के जैसा प्रभाव दिखा सकता है। अश्वगंधा दिमाग के ट्राइबुलिन (मोनोमाइन ऑक्सिडेज इनहिबिटर) के स्तर को नियंत्रित कर सकता है, जो स्ट्रेस की वजह से बढ़ जाता है। इसी वजह से माना जाता है कि अश्वगंधा चिंता और अवसाद को कम करने में लाभदायक हो सकता है (36)

17. मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए अश्वगंधा के फायदे

जैसा कि हम ऊपर बता ही चुके हैं कि अश्वगंधा मस्तिष्क के विकार चिंता, अवसाद और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, हमने लेख में यह भी जिक्र किया है कि यह किस तरह से याददाश्त को बेहतर रखने में सहायक हो सकता है। इतना ही नहीं, मस्तिष्क के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अश्वगंधा लाभकारी है।

एक रिसर्च में बताया गया है कि अश्वगंधा में स्मृति सुधार प्रभाव होने के साथ ही कॉग्निशन को बढ़ाने की क्षमता भी होती है। कॉग्निशन कुछ महत्वपूर्ण मानसिक प्रक्रियाओं का सामूहिक नाम है। सरल भाषा में कहा जाए, तो अश्वगंधा विचारों, अनुभवों और इंद्रियों (Senses) के माध्यम से समझने की क्षमता से संबंधित  मानसिक क्रिया व प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, अश्वगंधा में मौजूद विथनोलाइड्स कंपाउंड तंत्रिका विकास (Neurite outgrowth) में मदद कर सकता है (36)

18. स्किन इंफ्लेमेशन के लिए अश्वगंधा चूर्ण खाने के फायदे

ऊपर लेख में हम बता चुके हैं कि अश्वगंधा में पर्याप्त मात्रा में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं (1)। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि यह त्वचा में आई सूजन को कम करने में मदद कर सकता है (37)। दरअसल, त्वचा में इंफेक्शन के लिए जिम्मेदार सबसे आम बैक्टिरिया स्टैफिलोकोकस ऑरियस है, जिसके इंफेक्शन की वजह से चेहरे में सूजन हो सकती है (38)। इस इंफेक्शन के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया बेअसर कर त्वचा की सूजन को अश्वगंधा में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण कम कर सकता है (39)। त्वचा में जहां सूजन है, वहां अश्वगंधा पेस्ट को लगाया जा सकता है।

19. एजिंग से बचाने में अश्वगंधा के लाभ

जैसा कि लेख के शुरुआत में बताया गया है कि अश्वगंधा में एंटीऑक्सीडेंट गुण होता है। इस लिहाज से यह त्वचा के लिए भी लाभकारी हो सकता है। एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़कर बढ़ती उम्र (एजिंग) के लक्षणों जैसे झुर्रियां व ढीली त्वचा को बचा सकता है (5) (6)

अश्वगंधा में मौजूद यह गुण सूरज की पराबैंगनी किरणों के कारण होने वाले कैंसर से बचाने में भी मदद कर सकता है (40) (41)। त्वचा के लिए अश्वगंधा का फेसपैक बनाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। नीचे हम अश्वगंधा के प्रयोग से फेस पैक बनाने की विधि बता रहे हैं।

20. घाव भरने के लिए अश्वगंधा के लाभ

वैसे अश्वगंधा सीधे तौर पर घाव भरने में तो मदद नहीं कर सकता, लेकिन घाव में बैक्टीरिया को पनपने से रोक जरूर सकता है। दरअसल, इसमें मौजूद एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव घाव में पनपने वाले जीवाणुओं को खत्म करके इंफेक्शन के खतरे को रोक सकता हैं (42)। ऐसे में घाव गहरा नहीं होता और घाव ठीक होने के लिए लगने वाला समय कम हो सकता है (43)। घाव में इसका पेस्ट या फिर तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखें कि गहरा घाव होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। महज अश्वगंधा पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।

21. कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में सहायक

कोर्टिसोल (Cortisol) एक प्रकार का हार्मोन होता है, जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है। यह शारीरिक परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हार्मोंस में से एक है (44)। जब रक्त में इस हार्मोन का स्तर बढ़ता है, तो शरीर में फैट और स्ट्रेस का स्तर भी बढ़ने लगता है। इससे शरीर को विभिन्न प्रकार के नुकसान हो सकते हैं। इसलिए, कोर्टिसोल के स्तर को कम करना जरूरी है।

एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित एक के रिपोर्ट के मुताबिक, अश्वगंधा के प्रयोग से कोर्टिसोल को कम किया जा सकता है (45)। इसके लिए प्रतिदिन 3g से 6g तक अश्वगंधा के सप्लीमेंट्स ले सकते हैं (46)। ध्यान रखें कि इसका सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें। डॉक्टर शरीर की जरूरत के हिसाब से इसकी सटीक मात्रा और कब तक सेवन किया जाना है, इस बारे में बताएंगे।

22. बालों के लिए अश्वगंधा के फायदे

अश्वगंधा पाउडर बेनिफिट्स में बालों को स्वस्थ रखना और झड़ने से बचाना भी शामिल है। एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, आनुवंशिक कारण (Non-classical Adrenal Hyperplasia) व थाइरायड की वजह से झड़ रहे बालों को रोकने में अश्वगंधा मदद कर सकता है (47)। अश्वगंधा बालों के मेलेनेन को भी बढ़ा सकता है, जिसकी वजह से बालों का रंग बना रहता है (48)

23. डैंड्रफ में अश्वगंधा चूर्ण खाने के फायदे

कई बार स्ट्रेस और अच्छी नींद न आने की वजह से भी डैंड्रफ होने लगता है। दरअसल, ऐसा सेबोरेहिक (Seborrheic) डर्मेटाइटिस त्वचा विकार के दौरान हो सकता है। इसमें स्कैल्प में खुजली, लाल चकत्ते और डैंड्रफ होने लगता है (49)। ऐसे में अश्वगंधा में मौजूद एंटी-स्ट्रेस गुण लाभदायक हो सकता है। यह स्ट्रेस को खत्म करके डैंड्रफ दूर कर सकता है। साथ ही इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण भी सेबोरेहिक (Seborrheic) डर्मेटाइटिस को ठीक कर सकता है (2) (50)

24. समय से पहले बालों का सफेद होना

हर कोई चाहता है कि उनके बाल समय से पहले सफेद न हों। इस चाहत को अश्वगंधा से पूरा किया जा सकता है। यह आयुर्वेदिक औषधि बालों में मेलानिन के उत्पाद को बढ़ाती है। मेलेनिन एक प्रकार का पिगमेंट होता है, जो बालों के प्राकृतिक रंग को बनाए रखने में मदद करता है (51) (48)

बने रहें हमारे साथ

अश्वगंधा खाने से क्या होता है, यह तो आप जान गए हैं। अब अश्वगंधा के पोषक तत्वों के बारे में जानें। इसके बाद अश्वगंधा को कैसे खाएं, इस पर चर्चा करेंगे।

अश्वगंधा के पौष्टिक तत्व – Ashwagandha Nutritional Value in Hindi

अश्वगंधा के फायदे आप जान ही चुके हैं। अब अश्वगंधा पाउडर में मौजूद विभिन्न पोषक तत्वों में प्रति 100 ग्राम कितना मूल्य पाया जाता है, वो हम आपको नीचे टेबल के माध्यम से बता रहे हैं (52)

पोषक तत्वअश्वगंधा पाउडर (प्रति 100 ग्राम)
मॉइस्चर7.45%
ऐश4.41g
प्रोटीन3.9 g
फैट0.3g
क्रूड फाइबर32.3g
ऊर्जा245 Kcal
कार्बोहाइड्रेट49.9 g
आयरन3.3 mg
कैल्शियम23 mg
कुल कैरोटीन75.7 µg
विटामिन-सी3.7 mg

महत्वपूर्ण जानकारी नीचे है

अश्वगंधा के फायदे के बाद अश्वगंधा को कैसे खाएं, इस पर एक नजर डाल लेते हैं।

अश्वगंधा किस रूप में उपलब्ध है और इसका उपयोग कैसे करें – How to Use Ashwagandha in Hindi

बाजार में आपको अश्वगंधा विभिन्न रूपों में मिल जाएगा, लेकिन सबसे ज्यादा यह पाउडर व चूर्ण के रूप में मिलता है। अश्वगंधा खाने का तरीका बहुत आसान है। शहद, पानी या फिर घी में मिलाकर अश्वगंधा चूर्ण का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, बाजार में या फिर ऑनलाइन अश्वगंधा चाय, अश्वगंधा कैप्सूल और अश्वगंधा का रस भी आसानी से मिल जाता है।

अगर अभी भी आपके जहन में सवाल उठ रहा है कि अश्वगंधा चूर्ण का उपयोग कैसे करें? तो इस संबंध में डॉक्टर से सलाह व परामर्श लिया जा सकता है। डॉक्टर व्यक्ति की समस्या और शारीरिक जरूरत के अनुसार अश्वगंधा का उपयोग करने की सलाह देंगे, क्योंकि अश्वगंधा के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। इसी वजह से अश्वगंधा चूर्ण के उपयोग का तरीका, खुराक और उसकी अवधि तीनों बातों का ख्याल रखा जाना चाहिए।

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अश्वगंधा खाने का तरीका, तो हम बता चुके हैं। अब अश्वगंधा को सुरक्षित रखने और चयन करने के टिप्स हम दे रहे हैं।

अश्वगंधा का चयन कैसे करें और लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?

अश्वगंधा का सेवन कैसे करें इसकी जानकारी, तो आपको मिल गई है। अब अश्वगंधा के चयन और उसे सुरक्षित रखने से जुड़े टिप्स हम बता रहे हैं।

  • अश्वगंधा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो हमेशा इसकी जड़ को ही खरीदें।
  • एक-दो महीने में ही इसका इस्तेमाल करना है, तो अश्वगंधा पाउडर भी खरीद सकते हैं। बैद्यनाथ और पतंजलि अश्वगंधा पाउडर बाजार में काफी प्रचलित है।
  • इसे खरीदते समय देख लें कि कहीं उसमें फंगस न लगी हों।
  • हमेशा पूरी तरह से सूखी हुई अश्वगंधा की जड़ ही खरीदें।
  • अश्वगंधा खरीदने के बाद इसे किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद करके रख दें। इससे वह नमी से बचा रहता है।
  • एयर टाइट कंटनेर न हो, तो जिप्पर बैग में भी अश्वगंधा को रखा जा सकता है।
  • अगर एक-दो महीने में ही अश्वगंधा का इस्तेमाल करना है, तो इसका पाउडर बनाकर एयर टाइट कंटेनर या बैग में आप रख सकते हैं।

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लेख के अगले भाग में हम अश्वगंधा पाउडर बनाने की विधि बता रहे हैं। 

अश्वगंधा का पाउडर बनाने की विधि

अश्वगंधा चूर्ण व पाउडर बनाने की विधि बेहद आसान है। इसके लिए चाहिए 100 ग्राम अश्वगंधा की जड़। आइए, अब नीचे जानते हैं अश्वगंधा चूर्ण बनाने की विधि के बारे में। 

  • सबसे पहले अश्वगंधा की जड़ को धूप में रखकर सूखा लें। अगर उसमें नमी होगी, तो वह निकल जाएगी।
  • अब देखें कि अश्वगंधा की जड़ का आकार कितना बड़ा है। अगर जड़ ज्यादा बड़ी लग रही है, तो उसके दो या तीन टुकड़े कर लें।
  • फिर मिक्सर में इसे डालकर तब तक पीसे जबतक यह महीन न हो जाए।
  • अगर घर में इमाम दस्ता है, तो आप उसमें भी अश्वगंधा की जड़ों को कूटकर चूर्ण व पाउडर तैयार कर सकते हैं।
  • अश्वगंधा पाउडर तैयार होने के बाद उसे एयर टाइट कंटेनर में डालकर रख दें।

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अब बात करते हैं अश्वगंधा के सेवन से जुड़ी सावधानियों के बारे में। 

अश्वगंधा लेने से पहले की सावधानियां

अश्वगंधा का सेवन करने से पहले इससे जुड़ी सावधानियों के बारे में पता होना भी जरूरी है, अन्यथा अश्वगंधा पाउडर साइड इफेक्ट्स का कारण भी बन सकता है। क्या हैं वो सावधानियां नीचे जानते हैं।

  • अश्वगंधा की तासीर गर्म होती है। इसी वजह से इसका सेवन अधिक मात्रा में करने से बचना चाहिए।
  • इसका सेवन लंबे समय तक नहीं किया जाना चाहिए। किसी विशेषज्ञ से राय लेकर इसकी मात्रा और सेवन के समय की जानकारी अवश्य लें।
  • आंत संबंधी परेशानी वाले व्यक्तियों को इसके सेवन से बचाने की सलाह दी जाती है (53) 

पढ़ते रहें 

अश्वगंधा का सेवन कैसे करें और इससे जुड़ी सावधानियों के बारे में बताने के बाद आगे हम अश्वगंधा की खुराक के बारे में बता रहे हैं। 

अश्वगंधा की खुराक – Ashwagandha Dosage in Hindi

अश्वगंधा का सेवन कैसे करें, यह जानने के बाद अश्वगंधा का सेवन कितनी मात्रा में करना चाहिए, इसकी जानकारी होना भी जरूरी है। अश्वगंधा की सूखी जड़ की 3 से 6 ग्राम खुराक का सेवन किया जा सकता है (46)। वैसे, अश्वगंधा की खुराक प्रत्येक व्यक्ति की उम्र, सेहत, समस्या व अन्य कारणों पर भी निर्भर करती है। इसी वजह से डॉक्टर की सलाह के बिना अश्वगंधा का उपयोग न करें। इसके अलावा, बाजार में मिलने वाले अश्वगंधा सप्लीमेंट्स के पैकेट पर भी लिखा होता है कि अश्वगंधा कैसे खाना चाहिए। उस लिखे निर्देश का भी पालन किया जा सकता है। 

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अश्वगंधा कैसे खाना चाहिए और इसकी कितनी खुराक खाई जाए, यह तो आप जान गए हैं। अब जानते हैं कि अश्वगंधा को कहां से खरीदा जा सकता है।

अश्वगंधा कहां से खरीदें?

अश्वगंधा को लोकल मार्केट से खरीदा जा सकता है। यह आयुर्वेदिक जड़ी-बुटियों की दुकानों में आसानी से उपलब्ध होता है। आजकल बड़े-बड़े ग्रॉसरी स्टोर भी अश्वगंधा के पाउडर व इसकी जड़ के पैकेट रखते हैं। इसके अलावा, अश्वगंधा को ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है।

अब आर्टिकल के अगले भाग में हम अश्वगंधा के नुकसान के बारे में बता रहे हैं। 

अश्वगंधा के नुकसान – Side Effects of Ashwagandha in Hindi

अश्वगंधा चूर्ण के फायदे के साथ ही इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। अश्वगंधा के कारण शरीर को नुकसान इसकी अधिक मात्रा के कारण ही पहुंचता है। इसलिए, इसकी संयमित मात्रा का ही सेवन करना चाहिए। चलिए, अब जानते हैं कि अश्वगंधा के नुकसान क्या हैं (41)

  • अश्वगंधा की ज्यादा खुराक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल परेशानी, दस्त और उल्टी का कारण बन सकती है (53)
  • गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन करने से नुकसान हो सकते हैं। माना जाता है कि इसकी अधिक मात्रा गर्भपात का कारण बन सकती है।
  • केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में अवसाद पैदा हो सकता है। इसलिए, अश्वगंधा का सेवन करते समय शराब और अन्य मादक पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

प्रकृति ने हमें कई अनमोल उपहार दिए हैं और अश्वगंधा भी उन्हीं में से एक है। आप तमाम तरह की बीमारियों से बचने, शरीर की शक्ति बढ़ाने और वजन नियंत्रित करने के लिए अश्वगंधा का सेवन कर सकते हैं। साथ ही जवां और खूबसूरत दिखने में भी यह औषधि मदद कर सकती है। बेशक, यह गुणकारी औषधि है, लेकिन इसका लंबे समय तक किया गया सेवन हानिकारक हो सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञ से इसकी मात्रा व कितने समय तक लेना है, यह पूछ कर ही इसका सेवन शुरू करें। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

अश्वगंधा और शहद खाने के फायदे क्या हो सकते हैं?

अश्वगंधा और शहद के फायदे में स्मृति शक्ति का बढ़ना शामिल है। साथ ही अश्वगंधा और शहद खाने के फायदे में केंद्रीय तंत्रिका का बेहतर कार्य करना भी शामिल है। इसके अलावा, लेख में बताए गए अश्वगंधा के लाभ उठाने के लिए भी अश्वगंधा और शहद मिलाकर सेवन किया जा सकता है (54)। यह अश्वगंधा खाने का तरीका काफी प्रचलित है।

क्या अश्वगंधा के पत्ते खाना फायदेमंद है? हां, तो अश्वगंधा के पत्ते के फायदे क्या हैं?

अश्वगंधा के पत्तों में जीवाणुरोधी, एंटिफंगल और एंटीट्यूमर गतिविधियां पाई जाती हैं (54)। इसी वजह से अश्वगंधा की पत्तियों का सेवन फायदेमंद माना जाता है। अश्वगंधा के पत्ते के फायदे में बुखार ठीक होना भी शामिल है (2)

क्या अश्वगंधा को रोजान लेना सुरक्षित है?

हां, अश्वगंधा का सेवन रोजाना किया जा सकता है, लेकिन किसी निश्चित समय तक ही। उदाहरण स्वरूप – एंग्जायटी के लिए 6 हफ्ते, एजिंग के लिए एक साल। इसी तरह से इसके सेवन की अवधि को समस्या के आधार पर निश्चित किया जाता है (54)

अश्वगंधा को भोजन से पहले लेना चाहिए या बाद में?

वैसे तो अश्वगंधा के सेवन का समय इस बात पर निर्भर करता है कि उसका सेवन किस फायदे के लिए किया जा रहा है। अगर अश्वगंधा की कैप्सूल व टेबलेट लेने के आदर्श समय की बात करें, तो वह खाना खाने के दो घंटे बाद का माना जाता है।

इसके अलावा, अश्वगंधा का सेवन सुबह और शाम किसी भी समय किया जा सकता है। दरअसल, इसे एडेप्टॉजन (Adaptogens) कहा जाता है। अर्थात, ऐसी गैर विषैली बूटी, जो शरीर को सभी प्रकार के तनाव से बचाने में मदद कर सकती है (55)। चाहें, तो इस विषय में डॉक्टरी परामर्श ले सकते हैं।

क्या मैं अश्वगंधा को खाली पेट ले सकती हूं?

हां, अश्वगंधा चूर्ण का सेवन खाली पेट किया जा सकता है। वैसे, खाली पेट अश्वगंधा के सेवन से संबंधित कोई रिसर्च उपलब्ध नहीं है, इसलिए अगर खाली पेट इसे लेने के बाद पेट में दर्द या अन्य समस्या हो, तो तुरंत का इसका सेवन बंद कर दें।

अश्वगंधा को असर दिखाने में कितना समय लगता है?

अश्वगंधा कितने दिन तक खाना चाहिए, यह सवाल अक्सर लोगों के जहन में आता है। मांसपेशियों की मजबूती और मसल्स मास को बढ़ाने में अश्वगंधा 8 हफ्ते का समय ले सकता है (30)। इसी तरह स्ट्रेस पर सकारात्मक असर दिखाने में भी अश्वगंधा को 8 सप्ताह लग सकते हैं (55)। हालांकि, इसके असर दिखाने का समय व्यक्ति के स्वास्थ्य और समस्या की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

क्या लंबे समय तक अश्वगंधा का सेवन सुरक्षित है?

नहीं, अश्वगंधा का उपयोग लंबे समय तक नहीं किया जाना चाहिए। जैसा कि हम ऊपर भी बता चुके हैं कि इसके सेवन की एक निश्चित अवधि तय करना जरूरी है। अधिक मात्रा और ज्यादा समय तक अश्वगंधा खाने से क्या होता है, यह आप ऊपर पढ़ सकते हैं।

अश्वगंधा तेल का उपयोग कैसे करें?

अश्वगंधा के तेल को मालिश करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या बच्चों के लिए अश्वगंधा फायदेमंद है?

हां, अश्वगंधा बच्चों के लिए भी फायदेमंद है। कुछ रिसर्च में इसका इस्तेमाल बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए भी किया गया है। आखिर में इसके अच्छे परिणाम भी देखे गए हैं (56)। इसके फायदे के लिए अश्वगंधा पाउडर का सेवन कैसे करें, यह आप ऊपर लेख में पढ़ सकते हैं।

अश्वगंधा पाउडर कैसे लेना चाहिए?

ऊपर अश्वगंधा पाउडर के उपयोग में हमने अश्वगंधा चूर्ण व पाउडर के इस्तेमाल का तरीका बताया है। वैसे, अश्वगंधा पाउडर को पानी, दूध या शहद के साथ आवश्यकतानुसार लिया जा सकता है।

क्या अश्वगंधा को सर्जरी से पहले लिया जा सकता है?

इस बारे में सर्जरी करने वाले डॉक्टर ही बेहतर बता सकते हैं, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस चीज की सर्जरी हो रही है और मरीज की स्थिति कैसी है। जैसा कि हम ऊपर बता ही चुके हैं कि अश्वगंधा के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं, इसलिए सर्जरी से पहले बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका सेवन न करें।

अश्वगंधा की तासीर कैसी होती है?

अश्वगंधा की तासीर गर्म होती है। इसी वजह से कहा जाता है कि इसका अधिक और लंबे समय तक सेवन नहीं किया जाना चाहिए।

 अश्वगंधा कैप्सूल के लाभ क्या हैं?

लेख में बताए गए सभी लाभ अश्वगंधा कैप्सूल खाने से भी मिल सकते हैं। हां, अश्वगंधा कैप्सूल के लाभ पाने के लिए भी संयमित मात्रा में ही इसे लेना होगा।

अश्वगंधा तेल के फायदे क्या हैं?

अश्वगंधा तेल अनिद्रा को दूर करने में मदद कर सकता है (57)। इसके अलावा, कमजोरी को दूर करने के लिए भी अश्वगंधा के तेल को फायदेमंद माना जाता है (58)

अश्वगंधा क्या काम करता है?

अश्वगंधा क्या काम करता है, इस सवाल का जवाब लेख में अश्वगंधा के फायदे भाग को पढ़कर आपको मिल जाएगा। लेख में बताए गए सभी फायदे इस सवाल का जवाब हैं।

59 संदर्भ (Sources) :

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vinita pangeni

विनिता पंगेनी ने एनएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में बीए ऑनर्स और एमए किया है। टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में काम करते हुए इन्हें करीब चार साल हो गए हैं। इन्हें उत्तराखंड के कई पॉलिटिकल लीडर और लोकल कलाकारों के इंटरव्यू लेना और लेखन का अनुभव है। विशेष कर इन्हें आम लोगों से जुड़ी रिपोर्ट्स करना और उस पर लेख लिखना पसंद है। इसके अलावा, इन्हें बाइक चलाना, नई जगह घूमना और नए लोगों से मिलकर उनके जीवन के अनुभव जानना अच्छा लगता है।

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