अष्टवक्रासन करने का तरीका और फायदे – Astavakrasana Steps And Benefits in Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन मास कम्युनिकेशन)

आज वैज्ञानिकों ने कई शोधों के माध्यम से इस बात की पुष्टि की है कि योग स्वास्थ्य और सेहत के लिए कितना अच्छा है। योग शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी बनाए रख सकता है। साथ ही हमें यह समझने की जरूरत है कि योग सिर्फ एक क्रिया नहीं है, यह कई योगासनों और मुद्राओं का मेल है। इन्हीं में से एक योग है अष्टवक्रासन। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम बता रहे हैं अच्छी सेहत के लिए अष्टवक्रासन करने के फायदे के बारे में। पूरी जानकारी के लिए लेख के अंत तक बने रहें।

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अष्टवक्रासन करने के फायदे जानने से पहले हम जानते हैं अष्टवक्रासन क्या है।

अष्टवक्रासन क्या है – What is Astavakrasana in hindi

आठ अंगों को फायदा पहुंचाने वाला अष्टावक्रसन तीन शब्दों से मिलकर बना है, अष्ट यानी आठ, वक्र यानी मुड़ा हुआ और आसन। इस आसन में शरीर को आठ स्थानों से मोड़कर घुमावदार संरचना बनाई जाती है यानी जब इस आसन का अभ्यास किया जाता है, तो शरीर आठ स्थानों से मुड़ जाता है, इसलिए इसे अष्टवक्रासन कहा जाता है। अष्टवक्रासन करने के फायदे सेहत के नजरिए से कई प्रकार के हैं, लेख में विस्तार से फायदे और अष्टवक्रासन करने का तरीका बता रहे हैं।

नाेट: अष्टवक्रासन पर वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए यहां पर दिए गए फायदों के लिए इस आसन को करने से पहले डॉक्टर और योग गुरु की सलाह जरूर लें।

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अष्टवक्रासन को जानने के बाद यहां हम बता रहे हैं अच्छे स्वास्थ्य के लिए अष्टवक्रासन करने के फायदे।

अष्टवक्रासन करने के फायदे – Benefits of Astavakrasana in hindi

योग कोई भी हो यदि उसे सही तरीके से किया गया, तो वह तन के साथ ही मन को भी स्वस्थ रखने में मददगार हो सकता है। ठीक वैसे है अष्टवक्रासन भी तन और मन को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकता है। यहां हम उन्हीं के बारे में बता रहे हैं।

1. मासिक धर्म में

नियमित रूप से अष्टवक्रासन करने वाली महिलाएं मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द में राहत महसूस कर सकती हैं। एक इंडोनेशियन रिसर्च के अनुसार अष्टवक्रासन पेट की मांसपेशियां को मजबूती प्रदान करता है (1)। इसका सकारात्मक रूप से असर मासिक धर्म के दौरान होने वाले पेट दर्द पर हो सकता है। हालांकि, यह पेट दर्द को दूर कर सकता है या नहीं इस विषय पर रिसर्च कार्य बाकी है।

2. तनाव को कम करे

अष्टवक्रासन करने के फायदे में तनाव की कमी को शामिल किया जा सकता है। कई प्रकार के योगों पर हुए रिसर्च, जिनमें अष्टवक्रासन भी शामिल था, इसके अनुसार जो भी ये योगासन करते हैं उनकी एकाग्रता बढ़ती है और वे अपने विचारों और भावनाओं को भी आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं। इस प्रकार योग तनाव के स्तर और मानसिक विकार के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है (2)।

3. कब्ज की समस्या

कब्ज की समस्या को कम करने के लिए भी अष्टवक्रासन योग करने के फायदे हो सकते हैं। अष्टावक्रसन का नियमित अभ्यास पाचन स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है और यह कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्या को रोकने में भी मदद कर सकता है। अष्टावक्रसन करते समय, यह पेट और आंतरिक आंत पर बहुत दबाव बनाता है और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है (1)। इससे मल त्याग में सुधार हो सकता है। हालांकि, इस विषय पर कोई शोध उपलब्ध नहीं है कि अष्टवक्रासन करने से कब्ज की समस्या में राहत मिल सकती है।

4. एसीडिटी को कम करे

कब्ज के साथ ही एसिडिटी की समस्या को कम करने के लिए भी अष्टवक्रासन फायदेमंद हो सकता है। जैसा कि हमने बताया अष्टावक्रसन करते समय, यह पेट और आंतरिक आंत पर बहुत दबाव बनाता है, जिससे पाचन रस और एंजाइम का उत्पादन बढ़ सकता है जो प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को पचाने में मदद कर सकता है। साथ ही पेट में मौजूद एसिड को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, एसिडिटी को कम करने के लिए अष्टवक्रासन करने के फायदे पर अभी शोध कार्य बाकी है।

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अष्टवक्रासन करने के फायदे के बाद हम यहां बता रहे हैं अष्टवक्रासन करने का तरीका।

अष्टवक्रासन करने का तरीका

अष्टवक्रासन करने का तरीका ना ही बहुत आसान है और ना ही बहुत जटिल फिर भी इसे किसी योग गुरू से पूछकर या उनके सामने किया जाए तो ही बेहतर रहेगा। हम यहां स्टेप बाय स्टेप अष्टवक्रासन करने का तरीका बता रहे हैं।

How-to-do-Ashtavakrasana

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  • सबसे पहले समतल जमीन पर योगा मैट बिछा कर उस पर सुखासन में बैठ जाएं।
  • अब अपने दोनों पैरों को आगे की ओर फैला लें।
  • अपने दौनों पैरों के अंगूठों को एक दूसरे में इंटरलॉक कर लें।
  • इसके बाद अपने दाएं हाथ को दोनों पैरों के बीच में डालें और हथेली को जमीन से लगा दें।
  • इसके बाद बांए हाथ को कंधे के समानांतर करके जमीन पर बाएं हाथ की हथेली को रखें।
  • ध्यान रहे कि दोनों हाथों में से एक हाथ दोनों पैरों की बीच में और दूसरा हाथ बाएं पैर के बाजू से जमीन पर रखना है।
  • अब धीरे-धीरे हाथों पर जोर देकर शरीर और पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करें।
  • जितना हो सकते अपने शरीर को ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करें।
  • ध्यान रहे कि हाथों पर जरूरत से ज्यादा दवाब नहीं डालें।
  • अब इस अवस्था में लंबी गहरी सांस लें और छोड़ें।
  • इसके बाद प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • इस प्रकार से इस प्रक्रिया को कम से कम 3 से 5 बार तक दोहराया जा सकता है।
  • शुरुआत में यह अभ्यास कठिन लग सकता है लेकिन नियमित रूप से करने पर इसे आसानी से किया जा सकता है।

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अष्टवक्रासन करने का तरीका जानने के बाद बारी है इसे करते समय ध्यान देने योग्य बातों को जानने की।

अष्टवक्रासन करने के लिए सावधानियां

अष्टवक्रासन को शुरुआत में करने पर यह एक जटिल आसन लग सकता है, लेकिन नियमित अभ्यास से इसे आसान किया जा सकता है। इसे करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे कि:

  • यदि कोई कलाई, कंधे या हाथ की चोट से पीड़ित है, तो इस मुद्रा को करने से बचें।
  • सुनिश्चित करें कि पेशेवर योग शिक्षक के मार्गदर्शन में इस योग मुद्रा का अभ्यास करें। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यदि इस मुद्रा को स्वयं करते हैं, तो अपने आप को चोटिल करने का जोखिम उठा सकते हैं।
  • यदि अपना दाहिना पैर उठाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है ताकि वह आपकी बांह पर आ जाए, तो अपने पैर की गति के लिए अपने लचीलेपन पर काम करना चाहिए।
  • मुद्रा में आने के लिए खुद को तनाव देने से बचें, इसके बजाय अपने शरीर को तैयार करने और इसे अष्टावक्रासन (आठ-कोण मुद्रा) के लिए मजबूत करने के लिए मारीचि की मुद्रा या मारीच्यासन जैसे आगे झुकने और खड़े होने का अभ्यास कर सकते हैं।

इस लेख के जरिए आप यह अच्छी तरह समझ गए होंगे कि अष्टावक्रासन किस तरह शारीरिक और मानसिक लाभ पहुंचा सकता है। वहीं, इन लाभ को प्राप्त करने के लिए अष्टावक्रासन करने का सही तरीका भी पता होना जरूरी है जिसके बारे में लेख में बताया जा चुका है। ध्यान रहे कि इस आसन काे सावधानीपूर्वक ही करना चाहिए नहीं तो गंभीर समस्या का कारण बन सकता है।

संदर्भ (Sources):

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  1. Yoga Asanas: Lifestyle Kesehatan di Masa New Normal
    https://ejournal.ihdn.ac.id/index.php/jyk/article/viewFile/1745/1421
  2. PENGARUH LATIHAN YOGA TERHADAP PENINGKATAN KUALITAS HIDUP
    https://journal.ugm.ac.id/buletinpsikologi/article/viewFile/11531/8597
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अनुज जोशी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। अनुज को प्रिंट... more

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