अस्थमा (दमा) के लिए योग मुद्रा – Yoga Mudra For Asthma in Hindi

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अस्थमा श्वसन तंत्र से जुड़ी एक गंभीर समस्या है, जिसमें वायुमार्ग की अंदर की दीवारों में सूजन आ जाती है। साथ ही वायुमार्ग सिकुड़ने लगते हैं। इस कारण सांस लेने में तकलीफ हो सकती है (1)। इस समस्या से बचने के लिए और इसके जोखिम को कम करने लिए योग एक कारगर तरीका हो सकता है। आइये, स्टाइलक्रेज के इस लेख में जानते हैं अस्थमा के लिए कुछ कारगर योग मुद्राएं। यहां आप अस्थमा के लिए योग मुद्राओं के सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि उन्हें करने का तरीका भी जान पाएंगे। तो चलिए, जानते हैं अस्थमा के जोखिम को करने वाली कुछ योग मुद्राएं।

नीचे जरूरी जानकारी है

सबसे पहले जानिए अस्थमा में योग किस तरह फायदेमंद हो सकता है।

कैसे अस्थमा में लाभदायक है योग मुद्रा – How Does Yoga Help with Asthma in Hindi

अस्थमा के लिए योग मुद्रा को अपनाना लाभदायक हो सकता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक अध्ययन में अस्थमा से जूझ रहे कुछ मरीजों को योग कराया गया। योग करने पर अस्थमा के रोगियों को दिन और रात में आने वाले अस्थमा अटैक में कमी देखी गई और साथ ही साथ ली जाने वाली दवाओं का इस्तेमाल भी कम हुआ। दरअसल, योग की मदद से श्वसन क्रिया को बेहतर किया जा सकता है। इससे कुछ हद तक दमा की समस्या में लाभ मिल सकता है (2)।

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आइये, अब दमा के लिए योग मुद्रा के विषय में जानकारी हासिल कर लेते हैं।

अस्थमा के लिए योग – Yoga For Asthma in Hindi

नीचे हम क्रमवार अस्थमा के लिए योग मुद्राएं बता रहे हैं। साथ ही इन्हें करने का आसान तरीका भी यहां बताया गया है। इनका नियमित अभ्यास अस्थमा के जोखिम को कम कर सकता है और साथ ही अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, योग किसी भी तरीके से अस्थमा का त्वरित इलाज नहीं है। अगर समस्या गंभीर है, तो डॉक्टरी उपचार करवाना जरूरी है। अब पढ़ें आगे :

1. अस्थमा मुद्रा (Asthma Mudra)

Yoga Mudra For Asthma in Hindi

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अस्थमा मुद्रा, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि यह योग मुद्रा अस्थमा से ही जुड़ी है। इसमें हाथों की उंगलियों की मुख्य भूमिका होती है। एक वैज्ञानिक अध्ययन में दिया है कि इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से अस्थमा की स्थिति में काफी हद तक सुधार हो सकता है। दरअसल, इस मुद्रा को करने पर अस्थमा के दौरान सांस लेने की क्रिया में सुधार किया जा सकता है (3)।

करने का तरीका :

  • सबसे पहले योग मैट को बिछाकर पद्मासन में बैठ जाएं।
  • अब नमस्कार करने की स्थिति में अपनी हथेलियों को आपस में मिलाएं।
  • अब अपने दोनों हाथों की मध्य उंगली (मिडिल फिंगर) को मोड़ते हुए उंगलियों की जड़ तक लाएं, जिससे दोनों उंगलियों के नाखुन एक दूसरे का स्पर्श करें।
  • अब दोनों मध्य उंगलियों (मिडिल फिंगर) की स्थिति को बरकरार रखते हुए एक दूसरे पर दबाव डालें।
  • ध्यान रहे, ऐसा करते वक्त अन्य उंगलियां सीधी रहें और हथेलियां आपस में चिपके नहीं।
  • इस मुद्रा को करीब 7 से 10 मिनट तक बनाए रखने की कोशिश करें।
  • बेहतर लाभ के लिए इस प्रक्रिया को प्रतिदिन दोहराएं।

सावधानियां : 

● अस्थमा की समस्या गंभीर होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही इसे करें।
● अगर किसी को बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही हो, तो इस योग को न करें।

2. ब्रोन्कियल मुद्रा (Bronchial Mudra)

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अस्थमा के लिए योग मुद्रा में ब्रोन्कियल मुद्रा भी शामिल है। इस मुद्रा को करने पर ब्रोंकाइटिस (ब्रोन्कियल ट्यूब की लाइनिंग में सूजन) और अस्थमा की स्थिति में सुधार हो सकता है। इससे जुड़े एक रिसर्च से पता चलता है कि इस योग मुद्रा से एक्यूट अस्थमा अटैक के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे अस्थमा के कारण होने वाले नुकसान से बचने में मदद मिल सकती है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि अस्थमा में ब्रोन्कियल मुद्रा लाभकारी हो सकती है (3)।

करने का तरीका : 

  • योग मैट बिछाकर पद्मासन में बैठ जाएं।
  • अपनी हथेलियों को पूरा खोलें।
  • अब कनिष्ठा उंगली (छोटी उंगली) को अपने अंगूठे की जड़ पर लगाएं।
  • इसके बाद अनामिका उंगली (रिंग फिंगर) को अंगूठे के ऊपरी जोड़ पर रखें।
  • बाद में अपनी मध्य उंगली (मिडिल फिंगर) को अंगूठे के सबसे ऊपरी सिरे से मिलाएं।
  • फिर अपनी तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) को बाहर की ओर फैलाएं।
  • इस स्थिति को करीब पांच मिनट तक बनाए रखने का प्रयास करें।
  • इस प्रक्रिया को प्रतिदिन दोहराएं।

सावधानियां : 

  • अगर किसी को सांस लेने में अत्यधिक समस्या हो रही है, तो वो डॉक्टर की सलाह पर ही इस योग मुद्रा को करें।
  • उच्च रक्तचाप के मरीज डॉक्टर की सलाह पर ही इस योग मुद्रा को करें।

3. पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra)

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पृथ्वी मुद्रा को अंग्रेजी भाषा में “जेस्चर ऑफ द अर्थ” के नाम से जाना जाता है। इसमें भी हाथों की उंगलियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दरअसल, ऐसा माना जाता है कि इस योग मुद्रा की मदद से सांसों की गति को सामान्य रखा जा सकता है। इससे अस्थमा के लक्षण कुछ हद तक कम हो सकते हैं। फिलहाल, इस बात को प्रमाणित करने के लिए कोई वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध नहीं है।

करने का तरीका : 

  • पृथ्वी मुद्रा को करने के लिए योग मैट पर सुखासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • अब अपनी हथेलियों को खोलें।
  • अब अपनी अनामिका उंगली (रिंग फिंगर) के ऊपरी भाग को अंगूठे के ऊपरी भाग से मिलाएं।
  • ध्यान रहे, इस मुद्रा में अनामिका (रिंग फिंगर) और अंगूठे के अलावा सारी उंगलियां पूरी खुली रहेंगी।
  • प्रतिदिन इस मुद्रा का 30 से 45 मिनट तक अभ्यास करें।

सावधानियां : 

  • सुखासन की मुद्रा में रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना पड़ता है। अगर ऐसा करने में किसी को तकलीफ हो रही है, तो अपने अनुसार बैठने की आरामदायक मुद्रा का चयन कर सकते हैं।
  • जिन लोगों को कफ की समस्या है, वो इस योग को न करें।

आगे और जानकारी है

4. लिंग मुद्रा (Linga Mudra)

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दमा के लिए योग मुद्रा को करने के बारे में सोच रहे हैं, तो लिंग मुद्रा एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। इस संबंध में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के अनुसार, इस मुद्रा से खांसी, सर्दी-जुकाम की समस्या और छाती में संक्रमण से राहत मिल सकती है। साथ ही यह उन लोगों के लिए भी लाभकारी हो सकती है, जो श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं। अस्थमा एक तरह की श्वसन संबंधी समस्या है। इस आधार पर माना जा सकता है कि लिंग मुद्रा इसमें कुछ हद तक लाभकारी हो सकती है (3)।

करने का तरीका :

  • लिंग मुद्रा को करने के लिए चटाई या योग मैट बिछा लें। इस पर पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। वहीं, इसे खड़े होकर भी किया जा सकता है।
  • अब दोनों हाथों को पास लाकर उंगलियों को इंटरलॉक कर लें।
  • इस स्थिति में बाएं हाथ का अंगूठा ऊपर की ओर रहेगा और दाएं हाथ का अंगूठा व तर्जनी उंगली के बीच से होकर बाहर निकल रहा हो।
  • इस मुद्रा में 5 मिनट तक बने रहें और नियमित रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • इस मुद्रा को 15 मिनट तक रुक रुक कर कर सकते हैं।

सावधानियां : 

  • जो लोग पित्त दोष से पीड़ित हैं, वो इस मुद्रा का अभ्यास न करें।
  • उच्च रक्तचाप वालों को इस मुद्रा को करने से बचना चाहिए।

5. सूर्य मुद्रा (Surya Mudra)

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अस्थमा के लिए योग मुद्रा की लिस्ट में सूर्य मुद्रा भी शामिल है। ऐसा माना जाता है कि इस योग को करने पर अस्थमा के लक्षण को कम करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इस बात की पुष्टि करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन का अभाव है। फिर भी, डॉक्टर और योग विशेषज्ञ की सलाह पर इस मुद्रा को किया जा सकता है।

करने का तरीका : 

  • इस मुद्रा को करने के लिए एक स्वच्छ स्थान पर योग मैट या चटाई बिछाकर पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • इस दौरान दोनों हाथों को सीधे घुटनों पर रखें और हथेलियां ऊपर की तरफ होनी चाहिए।
  • फिर दोनों हाथों की अनामिका उंगली को अंगूठे की जड़ पर लगाएं और अंगूठे को अनामिका उंगली के ऊपर रख दें।
  • साथ ही दोनों हाथों की बाकी उंगलियों को सीधा रखें।
  • इसके बाद आंखें बंद कर लें और श्वास पर ध्यान केंद्रित करें।
  • इस दौरान सांस लेने और छोड़ने की गति सामान्य होगी।
  • इस योग को रोजाना सुबह 15 मिनट तक कुछ सेकंड का ब्रेक लेकर कर सकते हैं।

सावधानियां:

  • गर्मी के दिनों में इसे अधिक देर तक करने से बचें। दरअसल, इससे शरीर में अधिक गर्मी उत्पन्न हो सकती है।
  •  उच्च रक्तचाप वाले इस योग मुद्रा को न करें। इससे रक्तचाप का स्तर बढ़ सकता है। हालांकि, इस बात की पुष्टि करने के लिए वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है।

दोस्तों, कई छोटी-बड़ी समस्याओं को दूर रखने और उनसे राहत पाने के लिए योग आपकी मदद कर सकता है। योग शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने का काम कर सकता है। ऐसे में अगर कोई अस्थमा से पीड़ित है, तो वो डॉक्टरी परामर्श और विशेषज्ञ की देखरेख में बताई गई योग मुद्राओं का अभ्यास कर सकता है। वहीं, लेख में बताई गई योग मुद्राओं से जुड़ी सावधानियों का पालन भी जरूर करें। हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। आप चाहें, तो इसे अन्य लोगों के साथ भी साझा कर सकते हैं।

अब आगे पढ़ें विषय से संबंधित कुछ सवालों के जवाब।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

क्या सूर्य नमस्कार अस्थमा के लिए अच्छा है?

जी हां, अस्थमा के लिए सूर्य नमस्कार अच्छा हो सकता है (4)।

क्या अस्थमा के दौरे से कोई मर सकता है?

जी हां, कुछ मामलों में अस्थमा के कारण मृत्यु हो सकती है (5)।

क्या अस्थमा के मरीज व्यायाम के साथ-साथ खेल सकते हैं?

अगर अस्थमा गंभीर नहीं है, तो कुछ व्यायाम और खेल को डॉक्टरी सलाह पर अपनी जीवनशैली में शामिल कर सकते हैं (6)। दरअसल, अधिक शारीरिक गतिविधि वाले खेल या व्यायाम से सांस फूल सकती है, जो कि अस्थमा के मरीज के लिए अच्छा नहीं होता है।

6 Sources

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भूपेंद्र वर्मा ने सेंट थॉमस कॉलेज से बीजेएमसी और एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी किया है। भूपेंद्र को लेखक के तौर पर फ्रीलांसिंग में काम करते 2 साल हो गए हैं। इनकी लिखी हुई कविताएं, गाने और रैप हर किसी को पसंद आते हैं। यह अपने लेखन और रैप करने के अनोखे स्टाइल की वजह से जाने जाते हैं। इन्होंने कुछ डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्टोरी और डायलॉग्स भी लिखे हैं। इन्हें संगीत सुनना, फिल्में देखना और घूमना पसंद है।

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