दमा (अस्थमा) के कारण, लक्षण और घरेलू इलाज – Asthma Symptoms and Home Remedies in Hindi

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आधुनिकीकरण और बढ़ते प्रदूषण का नकारात्मक प्रभाव न सिर्फ वातावरण, बल्कि इंसान को भी बाहरी और आंतरिक रूप से प्रभावित कर रहा है। प्रदूषित वातावरण का सबसे बुरा असर श्वसन तंत्र (Respiratory System) पर पड़ता है, जिससे कई तरह की सांस संबंधी बीमारियां जन्म ले सकती हैं। इनमें से एक बड़ा नाम अस्थमा का है, जिसे दमा भी कहा जाता है। अस्थमा प्रदूषित वातावरण के साथ-साथ कई अन्य कारणों की वजह से भी हो सकता है, जिसकी जानकारी लेख में दी गई है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में जानिए अस्थमा, इसके कारण और इससे निजात पाने के सटीक घरेलू उपायों के बारे में।

शुरू करते हैं लेख :

चलिए, सबसे पहले अस्थमा क्या है? इस सवाल का जवाब जानते हैं।

क्या है दमा? – What is Asthma in Hindi

अस्थमा फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है, जिसमें सांस लेने में तकलीफ होती है। इस चिकित्सीय अवस्था में वायुमार्ग (Airways) संवेदनशील होकर सिकुड़ जाते हैं। वायुमार्ग के संकुचित होने से फेफड़ों तक ऑक्सीजन ठीक प्रकार से नहीं पहुंच पाती, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है और खांसी व सीने में जकड़न शुरू हो जाती है।

दमा किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह बीमारी सबसे ज्यादा बच्चों में देखी गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 24 मिलियन से ज्यादा लोग दमा रोग से पीड़ित हैं, जिनमें से 7 मिलियन बच्चे हैं (1)। आगे जानिए अस्थमा के कारण के बारे में।

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अस्थमा क्या है, जानने के बाद हम दमा के कारण क्या हो सकते हैं, इस बारे में बता रहे हैं।

दमा (अस्थमा) के कारण – Causes of Asthma Hindi

दमा तब अटैक करता है, जब सांस की नलियों में सूजन के साथ मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। इसके पीछे विभिन्न कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। नीचे जानिए अस्थमा के कारण (1) (2) –

  • आनुवंशिक रूप से मिलने वाली एलर्जी जिसे अटॉपी (Atopy) कहते हैं।
  • परिवार के सदस्य जिन्हें अस्थमा की बीमारी हो।
  • श्वसन तंत्र (Respiratory System) संबंधी संक्रमण।
  • तनाव के चलते।
  • धूल कणों के संपर्क में आने से।
  • एक्सरसाइज के कारण भी।
  • पालतू जानवर के झड़ते बाल और रूसी से।
  • वायु में रसायन की अधिकता से।
  • धूम्रपान करने से।
  • एस्पिरिन और एनएसएआईडीएस( NSAIDS) जैसी दवाइयों की वजह से।
  • मौसम में बदलाव होने से।

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अस्थमा के कारण जानने के बाद दमा के लक्षण को जानिए।

दमा के लक्षण – Symptoms of Asthma in Hindi

दमा के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए, उसकी पहचान के लिए उसके लक्षणों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसलिए, नीचे हम क्रमवार तरीके से दमा के लक्षण के बारे में बता रहे हैं (2)।

  • खांसी।
  • सांस लेने और छोड़ने के दौरान पसलियों के बीच की त्वचा का ऊपर और नीचे होना।
  • सांस लेने में तकलीफ, खासकर तब जब व्यायाम कर रहे हों।
  • सांस लेते वक्त घरघराहट का एहसास होना।

दमा के गंभीर लक्षण

  • होंठ और चेहरे का रंग नीला पड़ना
  • पल्स का तेज होना
  • चिंता का बढ़ना
  • पसीना आना
  • अस्थाई रूप से सांस जाना
  • छाती में दर्द और सख्त पन महसूस होना

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अब जानते हैं कि दमा रोग के कितने प्रकार होते हैं।

दमा (अस्थमा) के प्रकार – Types of Asthma in Hindi

अस्थमा विभिन्न कारणों और विभिन्न परिस्थितियों में विकसित हो सकता है। यही कारण है कि अस्थमा को निम्नलिखित रूप से वर्गीकृत किया जा सकता है। नीचे हम दमा रोग के प्रकार की चर्चा कर रहे हैं।

  1. एलर्जिक अस्थमा : जब प्रदूषित वातावरण के कारण एलर्जी पैदा करने वाला एलरजेन नामक तत्व शरीर में चला जाता है, तब एलर्जिक अस्थमा की स्थिति बन जाती है (3)।
  2. एक्सरसाइज इंड्यूज अस्थमा :  जब अस्थमा का कारण एक्सरसाइज या अन्य कोई शारीरिक गतिविधि बनती है, तो इसे एक्सरसाइज इंड्यूज अस्थमा कहा जाता है (4)।
  3. कफ वेरिएंट अस्थमा : इस प्रकार का अस्थमा आमतौर पर श्वसन संक्रमण के कारण होता है (5)।
  4. ऑक्यूपेशनल अस्थमा : जब अस्थमा किसी विशेष काम को करने से होता है, तो उसे ऑक्यूपेशनल अस्थमा कहा जाता है। ज्यादातर पशुपालक, किसान, नाई व लकड़ी का काम करने वाले इसकी चपेट में आते हैं (6)।

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दमा के लक्षण और दमा के कारण के बाद अब जानिए अस्थमा के लिए घरेलू नुस्खे।

दमा के घरेलू इलाज – 15 Effective Home Remedies for Asthma in Hindi

यहां हम अस्थमा के लिए घरेलू नुस्खे क्या हो सकते हैं, इस बारे में बताने जा रहे हैं। इससे पहले हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि लेख में बताए गए घरेलू उपाय अस्थमा का इलाज नहीं है, ये केवल समस्या से बचाव और इसके लक्षणों को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं। अब पढ़ें आगे –

1. शहद और हल्दी/ काली इलायची

सामग्री :

  • शहद – दो चम्मच
  • हल्दी – आधा चम्मच
  •  इलायची पाउडर –  आधा चम्मच (वैकल्पिक)

उपयोग करने का तरीका :

  • एक चम्मच शहद में हल्दी मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं।
  • इसके अलावा वैकल्पिक तौर पर शहद के साथ इलायची पाउडर का भी सेवन किया जा सकता है।
  •  रोजाना इसका सेवन किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

अस्थमा का इलाज करने के लिए शहद का उपयोग किया जा सकता है। सांस की समस्याओं के लिए शहद सबसे पुराना और सबसे प्राकृतिक उपचार है। शहद एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाला) और एंटी बैक्टीरियल गुणों समृद्ध होता है। ये गुण अस्थमा के समस्या में राहत पहुंचाने का काम कर सकते हैं (7)। वहीं, हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जो अस्थमा में राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है। दरअसल, करक्यूमिन में एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव पाया जाता है, जो वायु मार्ग की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, हल्दी कारगर एंटी बैक्टीरियल एजेंट के रूप में भी काम कर सकती है (8)। वहीं, इलायची में भी एंटी माइक्रोबियल गुण मौजूद होता है, जो बैक्टीरियल संक्रमण की वजह से होने वाले अस्थमा से बचाव में मददगार हो सकती है (9) (10)

2. अदरक

सामग्री :

  • अदरक (कद्दूकस किया हुआ) – 1 चम्मच
  • गर्म पानी – एक कप
  • शहद – आधा चम्मच

उपयोग करने का तरीका :

  • कद्दूकस किए हुए अदरक को गर्म पानी में मिलाएं और पांच से सात मिनट के लिए पानी में रहने दें।
  • अब पानी को छान लें और शहद मिलाएं।
  • अब धीरे-धीरे इस हर्बल चाय को पिएं।
  • दिन में कई बार अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को चबा भी सकते हैं।
  • दिन में दो से तीन कप अदरक की चाय पिएं।

कैसे है फायदेमंद :

अदरक एक प्रसिद्ध जड़ी-बूटी है, जो अपने एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाती है। अदरक का सेवन श्वसन प्रणाली को स्वस्थ रखने का एक अच्छा तरीका हो सकता है। दरअसल, एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) के एक शोध में जिक्र मिलता है कि अदरक का उपयोग वायुमार्ग की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे अस्थमा की स्थिति में कुछ हद तक राहत मिल सकती है। अदरक के इस लाभ के पीछे एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव हो सकते हैं (11)

3. लहसुन

 सामग्री :

  • लहसुन की कलियां – 10-12
  • दूध – आधा कप

 उपयोग करने का तरीका :

  • लहसुन की कलियों को दूध में उबालें और हल्का ठंडा कर पिएं।
  • दिन में एक बार पिएं।

कैसे है फायदेमंद : 

अस्थमा में लहसुन का उपयोग भी फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, इसमें भी एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव पाया जाता है। इसमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव वायु मार्ग की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। इससे अस्थमा में आराम मिल सकता है। ऐसे में लहसुन का उपयोग अस्थमा होम रेमेडीज के रूप में किया जा सकता है (12)

4. अजवाइन

सामग्री :

  • आधा चम्मच अजवाइन
  • कप का एक तिहाई गुड़
  • कुछ तुलसी के पत्ते
  • आधा चम्मच अदरक पाउडर
  • एक लौंग
  • पांच काली मिर्च के दाने
  • आधा चम्मच हल्दी
  • आधा कप पानी 

उपयोग करने का तरीका :

  • इन सभी सामग्रियों को सॉस पैन में डालकर मिलाएं और कुछ मिनट तक अच्छी तरह उबालें।
  • फिर इस काढ़े को पिएं।
  • समस्या के दिनों में रोजाना इस काढ़े को दिन में दो बार पिएं। अगर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं दिखता है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। 

कैसे है फायदेमंद :

अस्थमा का सफल उपचार करने के लिए अजवाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है। नाक और गले के संक्रमण को दूर करने के लिए अजवाइन कारगर प्राकृतिक उपाय हो सकती है। दरअसल, एनसीबीआई के शोध में अस्थमा के लिए इसे उपयोगी माना गया है। इस लाभ के पीछे अजवाइन में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुणों का प्रभाव हो सकता है (13) 

5. हल्दी

सामग्री :

  • हल्दी पाउडर- 1/4 चम्मच
  • दूध – एक गिलास

 उपयोग करने का तरीका :

  • हल्दी को दूध में मिलाएं और पिएं।
  • 10-14 दिन तक रोज तीन-चार बार इस प्रक्रिया को किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

हल्दी का उपयोग भी अस्थमा के लिए लाभकारी माना जा सकता है। इसके विषय में हम ऊपर भी बता चुके हैं कि हल्दी में मौजूद खास तत्व करक्यूमिन, अस्थमा में लाभकारी परिणाम प्रदर्शित कर सकता है। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है, जिससे वायुमार्ग की सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, इसमें एंटीबैक्टीरियल प्रभाव भी पाया जाता है, जिससे बैक्टीरिया की वजह से होने दमा में कुछ हद तक राहत मिल सकती है (8)

6. एसेंशियल ऑयल

सामग्री : 

  • यूकेलिप्टस तेल
  • एक तौलिया
  • लैवेंडर तेल की पांच-छह बूंदें (वैकल्पिक)
  • एक कटोरी गर्म पानी (वैकल्पिक)

उपयोग करने का तरीका : 

  • इसका उपयोग करने के लिए साफ तौलिये पर तेल की कुछ बूंदें डालें और सोते समय तौलिये को अपने पास रख दें, ताकि तेल की सुगंध नाक तक पहुंचती रहे।
  • इसके अवाला, वैकल्पिक तौर पर गर्म पानी में लैवेंडर का तेल डालकर, पांच से दस मिनट के लिए उससे भाप भी ले सकते है।
  • आराम मिलने तक इस उपाय को कुछ दिनों तक दोहराया जा सकता है।  

कैसे है फायदेमंद : 

सांस लेने में दिक्कत के उपाय में इन तेलों को शामिल किया जा सकता है। बंद नाक से राहत दिलाने का यह सबसे अच्छा उपचार हो सकता है। यह उपाय ठीक से सांस लेने में मदद कर सकता है। यूकेलिप्टस तेल में एउकल्यप्टॉल नाम का महत्वपूर्ण तत्व पाया जाता है, जो नाक से बलगम को हटाने का काम कर सकता है (14)। वहीं, लैवेंडर का तेल वायु मार्ग की सूजन को कम करने और बलगम को नियंत्रित करने का काम कर सकता है। यह सुगंधित तेल आरामदायक नींद को भी बढ़ावा देता सकता है। लैवेंडर का तेल एक कारगर अस्थमा का इलाज हो सकता है (15)

7. कॉफी

 सामग्री :

  • एक कप गर्म कॉफी

 उपयोग करने का तरीका :

  • अपनी पसंदीदा कॉफी को बनाएं और गर्मा-गर्म पिएं।
  • रोजाना गर्म कॉफी पी सकते हैं। 

कैसे है फायदेमंद :

कॉफी पीना एक सटीक अस्थमा का इलाज हो सकता है, क्योंकि यह वायुमार्ग को आसान बनाने का काम कर सकती है। कॉफी में मौजूद कैफीन संकुचित वायु मार्ग को खोलने का काम कर सकता है (16)। इस आधार पर कॉफी को सांस लेने में दिक्कत के उपाय के तौर पर शामिल किया जा सकता है।

बने रहें हमारे साथ 

8. प्याज

सामग्री :

  •  कच्चा प्याज

 उपयोग करने का तरीका :

  • कच्चे प्याज को काटकर सलाद के रूप में भोजन के साथ खा सकते हैं।
  • प्रतिदिन इसका सेवन कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

अस्थमा ट्रीटमेंट के लिए प्याज के फायदे देखे जा सकते हैं। दरअसल, इससे जुड़े एनसीबीआई के एक शोध में प्याज के एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी अस्थमैटिक गुण के बारे में पता चलता है, जो अस्थमा में आराम पहुंचाने में मददगार हो सकते हैं (17)। 

9. आंवला

सामग्री :

  • एक मध्यम आकार का आंवला
  • आधा चम्मच अदरक का पाउडर
  • एक चम्मच शहद

उपयोग करने का तरीका :

  • सबसे पहले आंवले को पानी में उबाल लें, ताकि वह नर्म हो जाए।
  • अब उसका बीज निकाल कर गुदे का पेस्ट बना लें।
  • आंवले के पेस्ट में अदरक पाउडर और शहद मिलाएं।
  • लगभग तीन से पांच ग्राम इस मिश्रण का सेवन करें।
  • समस्या के दिनों में रोजाना दो बार आंवला का यह मिश्रण ले सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

आंवला का उपयोग भी अस्थमा में फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में दमा के लिए इसके उपयोग का जिक्र मिलता है। वहीं, इसी शोध में इसके एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाला) गुण का भी जिक्र मिलता है (18)।  ऐसे में हम कह सकते हैं कि घरेलू तरीके से दमा की बीमारी का इलाज करने के लिए आवंले का उपयोग किया जा सकता है।

10. सरसों का तेल

सामग्री :

  • सरसों का तेल – 1 से 2 चम्मच
  • कपूर – 1 से 2

उपयोग करने का तरीका :

  •  सबसे पहले सरसों तेल में कपूर को मिला लें।
  • जब कपूर अच्छे से तेल में मिल जाए, तो इससे छाती की मालिश करें।
  • समस्या के दौरान प्रतिदिन इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद : 

सरसों के तेल भी अस्थमा में लाभकारी सिद्ध हो सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में इसे अस्थमा के विरुद्ध कारगर पाया गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि इसका उपयोग अस्थमा, एलर्जिक कोल्ड, अस्थमेटिक एक्जिमा (अस्थमा के कारण एक्जिमा की समस्या) से राहत देने का काम कर सकता है (19)। ऐसे में हम कह सकते हैं कि सांस की बीमारी का इलाज करने के लिए सरसों के तेल का उपयोग किया जा सकता है। फिलहाल, इस विषय में अभी और शोध किये जाने की आवश्यकता है।  

11. तुलसी

सामग्री :

  • तुलसी के पत्ते- 5 से 10
  • एक गिलास पानी  

उपयोग करने का तरीका :

  • पानी में तुलसी के पत्ते को डालकर उसे हल्का गुनगुना करके पिएं।
  • रोजाना इसका सेवन किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद : 

अस्थमा के लिए घरेलू नुस्खे में तुलसी के पत्ते भी शामिल हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि तुलसी के पत्तों का रोजाना सेवन अस्थमा के लक्षण को कम कर सकता है। इसके अलावा, इसमें एंटी इंफ्लामेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। वहीं, तुलसी का पत्ता कफ के इलाज में भी सहायक हो सकता है (20)

12. अंजीर

 सामग्री :

  •  सूखे अंजीर – 3 से 4

उपयोग करने का तरीका : 

  • एक कप पानी में सूखे हुए अंजीर को रात भर भिगोने के लिए छोड़ दें।
  • सुबह उठकर खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं।
  • रोजाना इसका सेवन किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

अंजीर को भी अस्थमा के लिए घरेलू नुस्खे में शामिल किया जा सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में सूखे अंजीर को अस्थमा के लिए कारगर माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि यह ब्रोन्कियल ट्यूबों (फेफड़ों तक सांस अंदर और बाहर करने में मदद करने वाली नलियां) से बलगम को निकालने में मदद कर सकता है, जिससे अस्थमा की स्थिति में कुछ हद तक राहत मिल सकती है (21)। हालांकि, इस लाभ के पीछे अंजीर के कौन से गुण काम करते हैं, इसे लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

13. सहजन

 सामग्री :

  • सहजन के बीज का पाउडर – 3 ग्राम

उपयोग करने का तरीका :

  • सहजन के बीज का पाउडर पानी के साथ सेवन कर सकते हैं।
  • समस्या के दौरान 3 सप्ताह तक इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • अगर कोई सकारात्मक प्रभाव न दिखे, तो डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

अस्थमा का सफल उपचार करने के लिए सहजन के बीज का चूर्ण भी कारगर हो सकता है। दरअसल, सहजन में एंटी अस्थमैटिक प्रभाव पाया जाता है, जो अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, सहजन श्वसन कार्यों में भी सुधार कर सकता है (22)

14. वासा

सामग्री :

  •  वासा (पाउडर) – 6 ग्राम

उपयोग करने का तरीका :

  • वासा पाउडर पानी के साथ सेवन कर सकते हैं।
  • समस्या के दौरान प्रतिदिन इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

दमा की बीमारी का इलाज वासा की मदद से भी किया जा सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में वासा युक्त हर्बल उत्पाद को अस्थमा के लिए कारगर पाया गया है। इस सामग्री में वासा को मुख्य सामग्री के रूप में प्रयोग किया गया है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि अस्थमा में वासा का इस्तेमाल राहत पहुंचाने का काम कर सकता है (23)। फिलहाल, इस विषय में अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

15. विटामिन

सामग्री :

  • विटामिन-सी के सप्लीमेंट्स
  • विटामिन-डी के सप्लीमेंट्स

उपयोग करने का तरीका :

  • हर दिन विटामिन सप्लीमेंट्स का सेवन करें।
  • करीब एक महीने तक ये सप्लीमेंट्स ले सकते हैं।
  • अगर कोई सकारात्मक प्रभाव न दिखे, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

कैसे है फायदेमंद : 

अस्थमा के लक्षणों को कम करने में विटामिन-डी के सप्लीमेंट्स प्रभावी उपाय साबित हो सकते हैं। इसमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण दमा में राहत पहुंचाने में मददगार हो सकते हैं (24)। वहीं, विटामिन-सी के फायदे भी अस्थमा के इलाज में मदद कर सकते हैं। एनसीबीआई के एक शोध में जिक्र मिलता है कि विटामिन-सी का सेवन अस्थमा के अटैक के जोखिम को बहुत हद तक कम करने में मदद कर सकता है (25)

अंत तक पढ़ें

नीचे जानिए कुछ खाद्य पदार्थ, जो दमा के रोगियों के लिए अच्छे हो सकते हैं।

दमा (अस्थमा) के रोगियों के लिए सबसे अच्छा आहार क्या है – Diet Tips for Asthma in Hindi

अस्थमा की शिकायत वाले लोगों को ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए, जो कफ को कम करने में सहायक हो सकता है। जैसे – संतरा, पपीता, आम, अमरूद, हरी सब्जियां, गाजर व टमाटर (21)। नीचे हम कुछ अन्य पोषक तत्वों का जिक्र कर रहे हैं (26)

  • विटामिन ए – अगर किसी को सांस से संबंधित समस्या है, तो वैसे लोगों को विटामिन ए का सेवन करना चाहिए। प्रोविटामिन ए कैरोटीनॉयड और रेटिनॉल विटामिन ए के दो प्रमुख आहार स्रोत माने जाते हैं। इससे जुड़े शोध में बताया गया है कि विटामिन ए सूजन को कम करने की क्षमता रखता है। इसके लिए विटामिन-ए युक्त खाद्य-पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।
  • विटामिन सी – विटामिन सी (एस्कॉर्बिक एसिड), एक शक्तिशाली पानी में घुलनशील एंटीऑक्सीडेंट के रूप में जाना जाता है। यह विभिन्न फलों और सब्जियों में पाया जाता है। इसमें एंटी इंफ्लामेटरी गुण (सूजन को कम करने वाला) मौजूद होते हैं, जो अस्थमा में सहायक हो सकते हैं। शोध में यह भी बताया गया है कि विटामिन सी, कोलाइन कोलोराइड (choline chloride) और सेलेनियम (selenium) के साथ मिलकर एलर्जी के कारण होने वाली सांस संबंधी बीमारी के खिलाफ लड़ने में मदद कर सकता है। इसके लिए विटामिन-सी युक्त आहार ले सकते हैं।
  • विटामिन ई –  विटामिन ई में भी एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। ये गुण वायु मार्ग की सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इसके लिए विटामिन-ई युक्त खाद्य-पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।
  • ओमेगा 3 – ओमेगा 3 में भी एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो वायु मार्ग में होने वाले सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए ओमेगा 3 युक्त मछली का सेवन किया जा सकता है।

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आगे हम अस्थमा से बचाव के तरीकों को बता रहे हैं।

दमा (अस्थमा) से बचाव – Prevention Tips for Asthma in Hindi

हालांकि, अस्थमा को तुरंत रोकने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन डॉक्टर के साथ मिलकर अस्थमा अटैक से बचा सकता है। नीचे कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं, जिनकी मदद ली जा सकती है (2)

  • धूल के संपर्क में आने से बचें। इसके लिए बिस्तर पर एलर्जी प्रूफ बेडिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • रोजाना रूम की सफाई करें।
  • ऐसे डिटर्जेंट और सफाई सामग्री का उपयोग करें, जिसमें खुशबू न हो।
  • नमी के स्तर को कम रखें। साथ ही ध्यान रखें कि घर का कोई कोना लीक न कर रहा हो, ताकि फंगस न पनप पाए।
  • भोजन को हमेशा कंटेनर में रखें।
  • अगर किसी को पालतू जानवर से एलर्जी है, तो उसे बेडरूम में न आने दें। साथ ही कोशिश करें कि वह घर से बाहर रहे।
  • एयर कंडीशनर के फिल्टर को भी समय-समय पर बदलें।
  • धूम्रपान से दूर रहें।
  • जितना संभव हो धुएं से बचें।

बने रहें हमारे साथ

अब जानिए अस्थमा में डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए।

डॉक्टर से कब मिलें – When to see a doctor

हम यहां बता रहे हैं कि दमा रोग में डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए। जब भी किसी व्यक्ति को नीचे बताए गए लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए (2)

  • अगर एक अस्थमा अटैक में बताई गई दवा से अधिक दवा की आवश्यकता हो रही हो।
  • लक्षणों में किसी प्रकार का सुधार नहीं दिख रहा हो और वह बद से बदतर होते जा रहे हों।
  • बात करते समय सांस लेने में तकलीफ हो रही हो।
  • सीने में तेज दर्द हो रहा हो।
  • होठों और चेहरे का रंग नीला पड़ रहा हो।
  • सांस लेने में अधिक कठिनाई हो रही हो।
  • पल्स तेजी से बढ़ रहे हों।
  • सांस की तकलीफ के कारण चिंता बढ़ रही हो।

अभी बाकी है जानकारी

चलिए अब हम आपको दमा की बीमारी का इलाज बताते हैं।

अस्थमा ट्रीटमेंट – Asthma Treatment In Hindi

अस्थमा के लिए घरेलू नुस्खे और उससे बचाव के तरीकों को जानने के बाद हम आपको अस्थमा ट्रीटमेंट के बारे में बता रहे हैं। यहां हम एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी की चर्चा कर रहे हैं।

होम्योपैथिक ट्रीटमेंट : दमा की बीमारी का इलाज कई प्रकार की होम्योपैथिक दवाओं से किया जा सकता है। एनसीबाआई की शोध के मुताबिक, अस्थमा के लिए क्लासिकल होम्योपैथी (एक व्यक्ति के लक्षणों के अनुसार) या आइसोपैथी (जिस पदार्थ से एलर्जी होती है, उसी की मदद से इलाज जैसे – पराग) का उपयोग किया जा सकता है (27)

आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट : आयुर्वेद में दमा के इलाज के लिए कई प्रकार की औषधि हैं, जिसके सेवन की सलाह दी जाती है। इसमें पिप्पली, मधु (शहद), वासा, गौ-घृत (गाय का घी) इत्यादि का उपयोग शामिल है। ये सभी औषधियां सांस संबंधी बीमारियों के इलाज में सहायक हो सकती हैं (23)

एलोपैथिक ट्रीटमेंट : एलोपैथिक में अस्थमा ट्रीटमेंट तीन चरणों में किया जा सकता है। जिसमें शॉर्ट टर्म मेडिसिन, कंट्रोल मेडिसिन और इमरजेंसी केयर शामिल हैं (1)

  • शॉर्ट टर्म मेडिसिन : इन्हें तुरंत राहत देने वाली मेडिसिन भी कहा जाता है। ये अस्थमा के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद कर सकती हैं। इसमें ओरल और इंट्रावेनस कॉर्टिकोस्टेरॉइड जैसी दवाएं शामिल हैं।
  • कंट्रोल मेडिसिन : ये वायु मार्ग की सूजन को कम करने और उसे सिकुड़ने से रोकने में मदद करने वाली दवाइयां होती हैं, जो लंबे समय के लिए दी जाती है। इस प्रकार की दवाइयां उम्र के आधार पर दी जाती हैं। इनमें कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (Corticosteroids) और मास्ट सेल स्टेबलाइजर (एलर्जी को कम करने के लिए) आदि शामिल हैं।
  • इमरजेंसी केयर : यह उन लोगों के लिए होता है, जिन्हें अस्थमा का गंभीर दौरा पड़ता है। इसमें दवाइयों के साथ नेबुलाइजर (एक डिवाइस जो दवा को इनहेल करने में मदद करती है), ऑक्सीजन थेरेपी और वेंटिलेटर की सहायता ली जाती है।

दोस्तों, अस्थमा एक घातक बीमारी है, इसलिए जरूरी है कि शुरुआती लक्षण नजर आते ही सही इलाज कराया जाए। उपचार के अभाव में दमा जानलेवा साबित हो सकता है। दमा और इसके लक्षणों के प्रति जितना सतर्क रहेंगे, यह बीमारी आपसे उतनी ही दूर रहेगी। इसलिए, अगर आप अपने या परिवार के अन्य सदस्य में अस्थमा के लक्षण देखते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। लेख में हमने सांस लेने में दिक्कत के उपाय भी बताए हैं, जिनका पालन आप कर सकते हैं। इसके अलावा, लेख में बताए गए इससे बचाव के तरीकों का भी पालन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

क्या अस्थमा ठीक हो सकता है?

नहीं, अस्थमा पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता है, लेकिन इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

क्या अस्थमा एक बीमारी है?

हां अस्थमा एक बीमारी है।

अस्थमा कैसे महसूस होता है?

अस्थमा महसूस करने के लिए इसके लक्षणों की जानकारी होना जरूरी है। इसकी चर्चा हमने लेख में विस्तार से की है।

क्या अस्थमा दूर हो सकता है?

अस्थमा को हमेशा के लिए दूर नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

मैं इनहेलर के बिना अपने अस्थमा को कैसे नियंत्रित कर सकता हूं?

इनहेलर के बिना अस्थमा को नियंत्रित करने से जुड़ी जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

अस्थमा की जटिलताएं क्या हैं?

अस्थमा की जटिलताएं निम्न प्रकार से हैं (2)

  • मृत्यु
  • शारीरिक गतीविधियों में भाग लेने की क्षमता में कमी।
  • ठीक प्रकार से नींद न आना
  • सांस लेने में ज्यादा तकलीफ

क्या आपको अचानक अस्थमा हो सकता है?

हां, अस्थमा अचानक हो सकता है।

अस्थमा के उपचार के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

अगर एलोपैथिक दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, तो उसके साइड इफेक्ट हो सकते हैं। जिसमें दिल की धड़कनों का तेज होना और झटके आना शामिल है (1)

अस्थमा को ठीक होने में कितना समय लगता है?

इससे जुड़ा कोई सटीक शोध उपलब्ध नहीं है। अच्छा होगा इस विषय में डॉक्टर से संपर्क किया जाए।

अस्थमा के उपचार का प्रभाव कितने समय तक रहता है?

अस्थमा के उपचार का प्रभाव उसकी खुराक और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।

अस्थमा की आयुर्वेदिक दवा क्या है?

इससे जुड़ी जानकारी आप ऊपर लेख में पढ़ सकते हैं।

क्या अस्थमा के लिए योग है?

हां, अस्थमा के लिए योग हैं। जैसे – सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और ध्यान (28)

28 संदर्भ (sources) :

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Aviriti Gautam

आवृति गौतम ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। इन्होंने अपने करियर की शुरूआत डिजिटल मीडिया से ही की थी। इस क्षेत्र में इन्हें काम करते हुए दो वर्ष से ज्यादा हो गए हैं। आवृति को स्वास्थ्य विषयों पर लिखना और अलग-अलग विषयों पर विडियो बनाना खासा पसंद है। साथ ही इन्हें तरह-तरह की किताबें पढ़ने का, नई-नई जगहों पर घूमने का और गाने सुनने का भी शौक है।

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