एथलीट फुट के कारण, लक्षण और इलाज – Athlete’s Foot Causes and Symptoms in Hindi

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चेहरे की त्वचा के साथ-साथ हाथ-पैरों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। अगर ऐसा न किया जाए तो कुछ गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। एथलीट फुट इन्हीं में से एक है। हो सकता है कई लोगों के लिए एथलीट फुट नाम नया हो। ऐसे में स्टाइलक्रेज का यह विशेष लेख, खासतौर पर एथलीट फुट रोग के कारण, लक्षण व इससे जुड़ी अन्य जानकारियां साझा करने के लिए लिखा गया है। तो एथलीट फुट के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी के लिए लेख को अंत पढ़ें।

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सबसे पहले बात करेंगे एथलीट फुट क्या है, इसके बाद इस रोग के लक्षण के बारे में जानेंगे।

एथलीट फुट क्या है? – What is Athlete’s Foot in Hindi

एथलीट फुट को टिनिया पेडिस (Tinea pedis) भी कहा जाता है। यह सामान्य तौर पर पैरों में होने वाला एक संक्रमण है, जो विभिन्न प्रकार के फंगी के कारण हो सकता है। वैसे ये फंगल इंफेक्शन पैर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है, पर ज्यादातर यह पैर की उंगलियों के बीच की जगह को प्रभावित करता है। एथलीट फुट की समस्या जब बढ़ जाती है तो ऐसे में त्वचा में दरारें या फिर पपड़ी निकलने लग सकती है। इसके अलावा त्वचा लाल हो जाती है और कई बार उसमें खुजली भी हो सकती है (1)

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एथलीट फुट क्या है, यह जानने के बाद अब बारी है एथलीट फुट के लक्षण जानने की।

एथलीट फुट के लक्षण – Symptoms of Athlete’s Foot in Hindi

ऐसे तो एथलीट फुट पैर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह ज्यादातर पैर की छोटी और उससे पहली उंगली के बीच होता है। ऐसे में एथलीट फुट होने पर व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं, पर हां ये बात भी ध्यान रहे कि जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति में समान लक्षण ही नजर आए। इसलिए आइए इनके लक्षणों के बारे में विस्तृत रूप से जानते हैं (2) (3)

  • लाल और खुजलीदार त्वचा।
  • प्रभावित जगह पर जलन या चुभने वाला दर्द होना।
  • फफोले होना जिससे तरल का रिसाव होना।
  • त्वचा का फटना।
  • त्वचा सफेद और मोटा होना।
  • त्वचा में सूजन होना।

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एथलीट फुट के लक्षण के बाद अब इस रोग के कारण व उसके जोखिम कारक के बारे में जानते हैं।

एथलीट फुट रोग के कारण और जोखिम कारक – Athlete’s Foot Causes and Risk factors in Hindi

एथलीट फुट आमतौर पर फंगस के कारण ही होता है। यह दरारों के जरिए त्वचा में प्रवेश कर जाते हैं। हालांकि ये फंगस घाव के माध्यम से भी त्वचा में प्रवेश कर सकते हैं (2)। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि यह फंगस संक्रमण होने का कारण या जोखिम कारक क्या हो सकते हैं, ताकि इससे बचा जा सके। तो लेख में नीचे पढ़ें एथलीट फुट के कारण व जोखिम कारक, जो कुछ इस प्रकार हैं (3):

  • बंद जूते पहनने से, खासकर अगर वे प्लास्टिक-लाइन वाले हों।
  • पैरों को लंबे समय तक गीला रखने से।
  • अगर पैरों में बहुत पसीना जम रहा हो।
  • त्वचा व नाखून पर किसी प्रकार की चोट लगने से।
  • शावर से।
  • स्विमिंग पुल से।
  • लॉकर रूम के फर्श से।

इनके अलावा, एथलीट फुट रोग के कुछ जोखिम कारक भी हैं, जिससे इसके होने की संभावना और ज्यादा बढ़ जाती है।

एथलीट फुट के जोखिम कारक

एथलीट फुट के जोखिम कारक कुछ इस प्रकार हैं (2):

  • एथलीट फुट आनुवंशिक हो सकता है (अगर परिवार में कुछ लोगों को यह समस्या है, तो परिवार के अन्य सदस्य को भी यह हो सकता है)।
  • जिन लोगों को पैर में ज्यादा पसीना होता है, तो उन्हें ये समस्या हो सकती है।
  • अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित है या फिर लंबे समय से दवा का प्रयोग कर रहा है, तो ऐसे लोगों का इम्यून पावर कमजोर हो जाता है, जिससे उन्हें यह समस्या हो सकती है।
  • कुछ खास तरह के स्पोर्ट्स करने वाले लोगों में, जैसे रनिंग या स्विंमिंग करने वाले लोगों में यह जोखिम बढ़ सकता है।

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इससे पहले कि एथलीट फुट का इलाज जानें, उससे पहले जानेंगे एथलीट फुट रोग का निदान कैसे किया जा सकता है।

एथलीट फुट रोग का निदान – Athlete’s Foot Diagnosis In Hindi

एथलीट फुट का इलाज होने के लिए इसका निदान करना आवश्यक है। इसलिए, डॉक्टर इसके निदान के लिए नीचे बताए गए सुझाव दे सकते हैं (3):

  • डॉक्टर प्रभावित जगह को देखकर, लक्षणों के बारे में जानकर और मेडिकल हिस्ट्री पूछकर इसका निदान कर सकते हैं।
  • फंगल संक्रमण की जांच के लिए डॉक्टर केओएच (KOH) टेस्ट कर सकते हैं। इस टेस्ट में जांच करने वाला व्यक्ति सूई या स्केलपेल ब्लेड का उपयोग करके प्रभावित त्वचा का थोड़ा हिस्सा लेकर उसका परीक्षण करता है।
  • डॉक्टर स्किन कल्चर टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। त्वचा या नाखूनों की समस्या पैदा करने वाले कीटाणुओं का पता लगाने के लिए यह टेस्ट किया जाता है।
  • स्किन बायोप्सी भी की जा सकती है। यह त्वचा के फंगस की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।

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एथलीट फुट रोग के निदान के बाद अब हम बात करेंगे एथलीट फुट के उपचार की।

एथलीट फुट का इलाज – Treatment of Athlete’s Foot in Hindi

एक बार जब एथलीट फुट का निदान हो जाए, तो अब बारी आती है एथलीट फुट के उपचार के बारे में जानने की। इसका इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है, डॉक्टर इसके इलाज को निम्न तरीके से कर सकते हैं (3) :

  • डॉक्टर ओवर-द-काउंटर एंटिफंगल पाउडर या क्रीम प्रेस्क्राइब कर सकते हैं।
  • अगर सूजन हो तो सूजन को कम करने की दवा दे सकते हैं।
  • लगाने के अलावा, कुछ गंभीर स्थितियों में डॉक्टर संक्रमण रोकने के लिए खाने की दवा भी दे सकते हैं।
  • इन्फेक्शन को दोबारा होने से बचाने के लिए डॉक्टर दवाइयों को कुछ हफ्तों तक लेने की सलाह दे सकते हैं।
  • इसके अलावा, डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव जैसे – साफ-सफाई का ध्यान रखना, पैरों को सूखा रखने और कॉटन के मोजे पहनने जैसी सलाह दे सकते हैं।

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एथलीट फुट में क्या खाना चाहिए – Foods to Eat for Athlete’s Foot in Hindi

जैसे कि हमने पहले ही यह जानकारी दी है कि एथलीट फुट फंगल इंफेक्शन के कारण होने वाली समस्या है। ऐसे में इससे राहत पाने के लिए दवा के साथ-साथ आहार का भी विशेष ध्यान रखना जरूरी है। ऐसे में इससे राहत पाने के लिए एंटी फंगल गुणों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन लाभकारी हो सकता है। ऐसे में नीचे हम एथलीट फुट में क्या खाएं और क्या न खाएं, इसकी जानकारी दे रहे हैं:

क्या खाएं :

सबसे पहले जानते हैं कि एथलीट फुट में किस प्रकार के खाद्य पदार्थों को डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है:

  • लहसुन – फंगल संक्रमण से राहत या बचाव के लिए खाने में लहसुन को शामिल कर सकते हैं। स्वास्थ्य के लिए लहसुन के फायदे कई सारे हैं। इसमें कई तरह के गुण मौजूद होते हैं और उन्हीं में से एक है एंटी फंगल गुण (4)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि फंगल संक्रमण से बचाव या राहत के लिए लहसुन को डाइट में शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।
  • दही – फंगल संक्रमण से बचाव या रोकथाम के लिए आहार में दही को शामिल कर सकते हैं। दरअसल, त्वचा के लिए दही लाभकारी है। दही को प्रोबायोटिक की लिस्ट में रखा गया है, जो त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए प्रभावकारी हो सकता है (5)
  • अंडा – एथलीट फुट के आहार में अंडे को भी शामिल किया जा सकता है। दरअसल, अंडे में एंटी फंगल गुण होने की बात सामने आई है (6)। ऐसे में फंगल संक्रमण में अंडे का सेवन लाभकारी हो सकता है।
  • सेब का सिरका – डाइट में सेब के सिरके को शामिल करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है। दरअसल, यह एंटी फंगल गुण प्रदर्शित कर फंगल संक्रमण के लिए उपयोगी हो सकता है (7)। सलाद में ड्रेसिंग के तौर पर सिरके को आहार में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अगर व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तो बेहतर है सेब के सिरके के उपयोग से पहले डॉक्टरी सलाह ली जाए।
  • नारियल तेल – फंगल संक्रमण से बचाव के लिए डाइट में नारियल तेल को भी आहार में शामिल किया जा सकता है। दरअसल, नारियल तेल में एंटी माइक्रोबियल और एंटी फंगल गुण होते हैं, जो फंगल संक्रमण से बचाव में प्रभावकारी हो सकते हैं (8)। ऐसे में सब्जी को भूनने के लिए या स्मूदी में नारियल तेल का उपयोग कर सकते हैं। खाना बनाने के नारियल तेल की खरीददारी बाजार व ऑनलाइन कर सकते हैं।

क्या नहीं खाएं

अब जानते हैं कि फंगल संक्रमण में किन चीजों से परहेज करना चाहिए (9) (10):

  • एक अध्ययन की मानें तो फंगल इंफेक्शन से संक्रमित व्यक्ति को अत्यधिक शक्कर वाले आहार नहीं लेना चाहिए। इससे फंगस के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में इस आधार पर कह सकते हैं कि ज्यादा मीठा, सोडा युक्त पेय पदार्थों से परहेज करें।
  • कोशिश करें कि ज्यादा तला भूना न खाएं, ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तो होते ही हैं साथ ही ये फंगल इंफेक्शन को भी बढ़ावा दे सकते हैं।
  • अल्कोहल युक्त पेय पदार्थों से दूर रहें।
  • धूम्रपान करने से बचें।

नोट : एथलीट फुट में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसकी जानकारी डॉक्टर एथलीट फुट के उपचार के दौरान साझा कर सकते हैं। इसके अलावा, व्यक्ति चाहे तो खुद भी डॉक्टर से इसकी सलाह ले सकता है।

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अब जानते हैं कि एथलीट फुट के लिए डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए।

एथलीट फुट के लिए डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

अब लेख के इस भाग में जानते हैं कि एथलीट फुट की समस्या में डॉक्टरी सलाह लेने की जरूरत कब पड़ सकती है (3)

  • अगर पैरों में सूजन हो, लाल धारियां या दर्द हो।
  • अगर प्रभावित जगह से मवाद या तरल निकले और बुखार हो।
  • घरेलू उपाय के बाद भी अगर 2 से 4 सप्ताह के भीतर एथलीट फुट के लक्षण न ठीक हो।

लेख के अगले भाग में जानिए कि एथलीट फुट से बचाव कैसे कर सकते हैं।

एथलीट फुट से बचाव – Prevention Tips for Athlete’s Foot in Hindi

एथलीट फुट के कारण, लक्षण और इलाज के बाद अब बारी आती है इसके बचाव के बारे में जानने की। ऐसा क्या किया जाए कि एथलीट फुट न हो, इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम नीचे एथलीट फुट के बचाव से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं (11) (3) (1):

  • फर्श पर नंगे पैर चलने से बचे, जब भी संभव हो सैंडल पहनें।
  • पैरों को साफ और सूखा रखें।
  • नाखूनों को छोटा और साफ रखें।
  • उन कपड़ों से बने मोजे पहनना बंद करें जो आसानी से नहीं सूखते, जैसे कि नायलॉन।
  • साफ, कॉटन के मोजे पहनें।
  • मोजे और जूतों को नियमित तौर पर बदलते रहें।
  • साथ ही फुटवीयर को साफ रखें।
  • बंद फुटवीयर पहनने से बचें।
  • हवादार चप्पल पहनें।
  • अगर पहले कभी एथलीट फुट की समस्या रही हो, तो बीच-बीच में एंटी फंगल क्रीम, स्प्रे या पाउडर का उपयोग करते रहें।

इस लेख में दी गई जानकारी के अनुसार ये तो आप समझ ही गए होंगे कि एथलीट फुट के कारण, लक्षण और इलाज क्या हैं। इसलिए वक्त रहते एथलीट फुट के लक्षणों पर ध्यान दें। अगर एथलीट फुट के लक्षण कम न हो तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही कष्ट बढ़ा सकती है। साथ ही एथलीट फुट से बचाव के लिए साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। उम्मीद है यह लेख आपके लिए उपयोगी रहा होगा। इस लेख को अन्य लोगों के साथ भी जरूर शेयर करें, ताकि सभी को एथलीट फुट के लक्षण, कारण व अन्य जानकारी मिले।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगर एथलीट फुट का उपचार न किया जाए तो क्या होगा ?

एथलीट फुट एक फंगल इंफेक्शन है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है। जैसा कि हमने ऊपर भी बताया है कि ये रोग एक दूसरे से संपर्क में आने से फैल भी सकता है। अगर वक्त रहते इसका इलाज न किया जाए तो समस्या गंभीर तो हो ही सकती है, साथ ही एक इंसान से दूसरे व्यक्ति को भी हो सकती है।

क्या एथलीट फुट की समस्या में बेड पर भी मोजे पहनकर रहना चाहिए?

नहीं, एथलीट फुट की समस्या में जितना हो सके पैरो को हवा लगने देना चाहिए। इसलिए बंद जूते-चप्पल पहनने के लिए भी मनाही होती है (3)। ऐसे में यह बेड पर सोते या आराम करते वक्त भी लागू होती है। इसलिए, एथलीट फुट की समस्या में बेड पर मोजे न पहनें।

Sources

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  1. Hygiene-related Diseases
    https://www.cdc.gov/healthywater/hygiene/disease/athletes_foot.html
  2. Athlete’s foot: Overview
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK279549/
  3. Athlete’s foot
    https://medlineplus.gov/ency/article/000875.htm
  4. Garlic: a review of potential therapeutic effects
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4103721/
  5. Probiotics
    https://ods.od.nih.gov/factsheets/Probiotics-HealthProfessional/
  6. The antifungal properties of chicken egg cystatin against Candida yeast isolates showing different levels of azole resistance
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/19549107/
  7. Antifungal Activity of Apple Cider Vinegar on Candida Species Involved in Denture Stomatitis
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/25219289/
  8. In vitro antimicrobial properties of coconut oil on Candida species in Ibadan, Nigeria
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/17651080/
  9. Growth and acid production of Candida species in human saliva supplemented with glucose
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/3091791/
  10. The impact of cigarette/tobacco smoking on oral candidosis: an overview
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/16120112/
  11. Athlete’s Foot Also called: Tinea pedis
    https://medlineplus.gov/athletesfoot.html
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