बवासीर (पाइल्स) के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Piles (Hemorrhoids) Causes, Symptoms and Home Remedies in Hindi

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बवासीर के बारे में अक्सर लोग खुलकर बात नहीं करते। उन्हें यह बीमारी शर्मिंदगी का कारण लगती है। वहीं, कई लोगों को लगता है कि बवासीर होने की वजह साफ-सफाई का ख्याल न रखना है, जबकि ऐसा नहीं है। यह बीमारी कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वजह से उत्पन्न हो सकती है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम विस्तार से बवासीर के बारे में बताएंगे। यहां आपको बवासीर के कारण, लक्षण और बवासीर का उपचार संबंधी आवश्यक जानकारी मिलेगी। लेख में बताए जाने वाले घरेलू नुस्खे इस समस्या से उबरने में मदद कर सकते हैं। साथ ही बवासीर के सटीक इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करना भी जरूरी है।

आगे बढ़ने से पहले चलिए जान लेते हैं कि बवासीर कहते किसे हैं।

बवासीर क्या है? – What are Piles in Hindi

बवासीर जिसे हेमोर्रोइड्स (Hemorrhoids) भी कहा जाता है। ये रक्त वाहिकाओं से भरे ऊतक (Tissue) होते हैं, जो गुदा (एनस) के अदंर और मलाशय (रेक्टम) के अंत में मौजूद होते हैं। यह मल त्याग को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। वहीं, बवासीर होने के बारे में बात की जाए, तो इसका मतलब होता है इन ऊतकों में सूजन होना, जिसकी वजह से ये बढ़ जाते हैं (1)। ऊतकों का इस प्रकार बढ़ना बवासीर के लक्षणों के रूप में कई दर्दनाक स्थितियों को जन्म देता है, जिनके बारे में आगे बताया गया है।

आइए, अब बवासीर के प्रकार पर एक नजर डाल लेते हैं। आगे हम पाइल्स का घरेलू उपचार भी बताएंगे, जिससे बवासीर के लक्षण को कम करने में मदद मिल सकती है।

बवासीर के प्रकार – Types of Piles (Hemorrhoids) in Hindi

बवासीर दो प्रकार के होते हैं। एक वो जो गुदे के अंदर होता और दूसरा वो जो गुदे के बाहर होता है। चलिए, इनके बारे में विस्तार से जान लेते हैं (2) (3)

  1. आंतरिक बवासीर (इंटरनल हेमोर्रोइड्स) : यह मलाशय (रेक्टम) के शुरुआत में और गुदा (एनस) के अंदर होता है। जब यहां ऊतक बड़े हो जाते हैं, तो ये बाहर निकल सकते हैं, जिसे प्रोलैप्स (Prolapse) कहा जाता है। आंतरिक बवासीर के दौरान सबसे आम समस्या मल त्याग के दौरान खून का बहना है।

आंतरिक बवासीर को आगे उनकी उपस्थिति और प्रोलैप्स की डिग्री के आधार पर कुछ इस तरह वर्गीकृत किया गया है :

  • ग्रेड-1: नॉन-प्रोलैप्सिंग बवासीर
  • ग्रेड-2: प्रोलैप्सिंग बवासीर (मल त्याग के दौरान जोर लगाने पर ऊतक का निकलना और फिर वापस जाना)
  • ग्रेड-3: प्रोलैप्सिंग बवासीर जिसमें सर्जरी की जरूरत पड़ती हो।
  • ग्रेड-4: नॉन-रिड्यूसबल प्रोलैप्सिंग बवासीर, जिसमें एक्यूट थ्रोम्बोस्ड (बढ़ हुई बवासीर, जिसमें बहुत सूजन और रक्त बहता है। साथ ही आगे चलकर रक्त के थक्के बनने लगता है), इंकार्सिरेटेड बवासीर (दर्दनाक और जलन पैदा करने वाली बवासीर) शामिल हैं।
  1. बाहरी बवासीर (एक्सटर्नल हेमोर्रोइड्स) : यह समस्या गुदा के बाहर होती है। इस पाइल्स के दौरान मल त्याग करने के बाद बवासीर प्रभावित हिस्से को साफ करने में कठिनाई हो सकती है। साथ ही अगर इस पाइल्स के दौरान बाहर रक्त का थक्का बन जाता है, तो यह बहुत दर्दनाक होता है। इसे थ्रोम्बोस्ड एक्सटर्नल हेमोर्रोइड्स कहा जाता है।

बवासीर के प्रकार के बाद आगे हम पाइल्स के कारण और जोखिम कारक के बारे में बता रहे हैं।

बवासीर (पाइल्स) के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk Factors of Piles in Hindi

बवासीर व पाइल्स के कारण और जोखिम कारक क्या हो सकते हैं, यह हम आपको नीचे बता रहे हैं (2) (3) (4) (5):  

  • कब्ज
  • गर्भावस्था
  • मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना।
  • अक्सर भारी वस्तुओं को उठाना।
  • लंबे समय तक बैठे रहना, खासकर शौचालय में।
  • कुछ बीमारियां, जैसे सिरोसिस (लिवर संबंधी बीमारी)
  • कम फाइबर वाले आहार का सेवन।
  • गुदा और मलाशय के ऊतकों का कमजोर होना, जो उम्र बढ़ने के साथ होता है।
  • बढ़ती उम्र।
  • मोटापा।

बवासीर के घरेलू उपचार से पहले इसके लक्षण पर एक नजर डाल लेते हैं।

बवासीर के लक्षण – Symptoms of Piles in Hindi 

माना जाता है कि बवासीर की समस्या अधिक कष्टदायक नहीं होती है, लेकिन अगर रक्त का थक्का बन जाता है, तो इनकी वजह से बहुत ज्यादा दर्द हो सकता है। नीचे हम आपको बवासीर की कुछ सामान्य लक्षणों के बारे में बता रहे हैं (3)

  • मलाशय से रक्त निकलना
  • गुदा (Anus) में खुजली
  • गुदा में दर्द होना, खासकर बैठते वक्त
  • मल त्याग के दौरान दर्द होना
  • गुदा के पास एक या उससे अधिक कठोर गांठ का बनना।

अब हम विस्तार से बवासीर के घरेलू उपाय के बारे में बात करेंगे। इसके बाद बवासीर का इलाज कैसे होता है, इसकी जानकारी भी देंगे।

बवासीर के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Piles (Bawaseer) in Hindi

नीचे हम आपको बवासीर के घरेलू उपाय बता रहे हैं, लेकिन इन उपचार को करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपको इनमें से किसी भी सामग्री से एलर्जी तो नहीं है। एक बार पैच टेस्ट करके देखा जा सकता है कि कहीं इसकी वजह से त्वचा में जलन या कुछ अन्य दुष्प्रभाव तो नजर नहीं आ रहे हैं।

1. सिट्ज बाथ (Sitz Bath)

सामग्री:
  • एक बाथ टब
  • गुनगुना पानी  
उपयोग का तरीका:
  • बाथ टब में लगभग तीन से चार इंच गुनगुना पानी डालें।
  • अब पाइल्स प्रभावित हिस्से को इसमें 10 से 15 मिनट के लिए डूबों कर रखें।
  • ध्यान रहे कि पानी में बाथ सोप, बबल बाथ या ऐसा कोई भी प्रोडक्ट न डालें।
  • दिन में दो से तीन बार इस उपाय को किया जा सकता है।
कैसे लाभदायक है:

सिट्ज बाथ एक प्रकार की थेरेपी है, जो गर्म पानी में एनस (गुदा) को डुबोकर की जाती है। माना जाता है कि इस बाथ के दौरान पाइल्स की वजह से होने वाले दर्द से राहत मिल सकती है। साथ ही पाइल्स के इलाज से संबंधित प्रक्रिया के बाद भी सिट्ज बाथ लेने की सलाह दी जाती है (3) (6)

2. विच हेजल (Witch Hazel)

सामग्री:
  • विच हेजल वॉटर
  • रूई (जितनी जरूरत हो)
उपयोग का तरीका:
  • रूई को विच हेजल के पानी में भिगोएं।
  • अब इसे अपने गुदा क्षेत्र पर कुछ मिनटों के लिए रखें।
  • दिन में तीन से चार यह उपाय किया जा सकता है।  
कैसे लाभदायक है:

विच हेजल में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी गुण की वजह से इसका उपयोग पाइल्स की वजह से होने वाली जलन और सूजन से राहत पाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इसको लेकर पर्याप्त शोध मौजूद नहीं हैं कि यह बवासीर के लक्षण को कम करने में फायदा करता है या नहीं। बवासीर का इलाज करने के लिए इस्तेमाल होने वाली क्रीम में भी विच हेजल का इस्तेमाल किया जा सकता है (7) (8)

3. टी ट्री ऑयल

सामग्री: 
  • टी ट्री ऑयल की 2-3 बूंदें
  • एक चम्मच जैतून का तेल
उपयोग का तरीका:
  • टी ट्री ऑयल को जैतून के तेल में डालकर अच्छे से मिलाएं।
  • अब इस मिश्रण में रूई को डुबोकर प्रभावित हिस्से पर लगाएं।
कैसे लाभदायक है:

टी ट्री ऑयल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन कम करने के साथ ही दर्द से भी राहत दिला सकते हैं। साथ ही इसमें एंटीसेप्टिक गुण भी मौजूद होते हैं, जो पाइल्स के तीव्र लक्षणों को कम कर सकते हैं। इसके अलावा, टी-ट्री ऑयल में रोगाणुरोधी और जीवाणुरोधी गुण भी होते हैं, जो संक्रमण को रोकने में मदद कर सकते हैं (9) (10)। एक शुरुआती अध्ययन में यह भी पाया गया है कि टी ट्री ऑयल और हाइलूरोनिक (Hyaluronic) एसिड से बना जेल बवासीर का इलाज करने में प्रभावी हो सकता है (11)

4. एलोवेरा

सामग्री:
  • एलोवेरा जेल (आवश्यकतानुसार)   
उपयोग का तरीका:
  • एलोवेरा जेल को निकालकर बवासीर वाले हिस्से पर लगाएं।
  • 10 से 15 मिनट के लिए जेल को लगे रहने दें।
  • आप चाहें तो सुबह खाली पेट एक कप एलोवेरा जूस पी भी सकते हैं।
  • ऐसा रोजाना एक से दो बार किया जा सकता है।
कैसे लाभदायक है:

एलोवेरा में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सूजन और दर्द को दूर करने में लाभदायक हो सकते हैं (12)। हालांकि, बवासीर के लिए एलोवेरा जेल के इस्तेमाल को लेकर पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर  बायोटेक्नोलॉजी इंफोर्मेशन) ने एलोवेरा के टॉपिकल (त्वचा पर) इस्तेमाल को सुरक्षित बताया है (13)एलोवेरा का इस्तेमाल बवासीर की क्रीम में भी किया जा सकता है (14)। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, एलोवेरा क्रीम को पाइल्स के ऑपरेशन के बाद होने वाले दर्द को ठीक करने में भी मदद किया जा सकता है (15)

5. नारियल तेल

सामग्री:
  • वर्जिन नारियल का तेल (आवश्कतानुसार)  
उपयोग का तरीका:
  • साफ उंगलियों का उपयोग करते हुए प्रभावित क्षेत्र पर नारियल तेल लगाएं।
  • इसे दो से तीन बार लगाएं जब तक कि दर्द या गांठ गायब न हो जाएं।
कैसे लाभदायक है:

नारियल के तेल में एंटीइंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण होते हैं। यह दोनों गुण पाइल्स के दर्द को ठीक करने के साथ ही सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं (16)। इसके अलावा, नारियल के तेल में एंटीमाइक्रोबियल एजेंट भी मौजूद होते हैं, जो बैक्टिरिया को मारने और उन्हें पनपने से रोकने में मदद कर सकते हैं (17)। नारियल का तेल पाइल्स में लाभकारी हो सकता है या नहीं इसको लेकर अभी शोध की आवश्यकता है।

6. लहसुन

सामग्री:
  • तीन से चार लहसुन की कलियां
  • एक कप पानी
उपयोग का तरीका:
  • बाहरी बवासीर के लिए लहसुन की कलियां छीलकर 10 मिनट पानी में उबालें।
  • पानी को फ्रिज में रखें और ठंडा करें। इस पानी में रूई के टुकड़े को भिगोकर गुदा पर 10 से 15 मिनट के लिए रखें।
  • आंतरिक बवासीर के लिए एक लहसुन की कली को छीलकर कुचल लें। अब इसे मलाशय के अंदर रखकर रात भर के लिए छोड़ दें।
कैसे लाभदायक है:

माना जाता है कि लहसुन का इस्तेमाल बवासीर से राहत दिलाने में मदद कर सकता है (18)। दरअसल, लहसुन में मौजूद एलिसिन (Allicin) नामक कंपाउंड में एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं। ये गुण बवासीर के कुछ लक्षण जैसे सूजन और दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही बैक्टीरिया को पनपने से रोक सकते हैं। इसके अलावा, लहसुन में एंटीथ्रॉम्बोटिक (Antithrombotic) गुण भी पाए जाते हैं, जो पाइल्स की वजह से बनने वाले ब्लड क्लोट को होने रोक सकते हैं (19)। फिलहाल, बवासीर में लहसुन के लाभ को लेकर पर्याप्त शोध मौजूद नहीं हैं। बवासीर का घरेलू उपाय करने से पहले पैच टेस्ट कर लेना जरूरी है।

7. जात्यादि तेल (Jatyadi Oil)

सामग्री:
  • 5-6 बूंदें जात्यादि तेल
  • गुनगुना पानी
  • एक बाथ टब
उपयोग का तरीका:
  • एक-चौथाई बाथटब को गुनगुने पानी से भरें।
  • अब उसमें जात्यादि का तेल डालें।
  • पांच से छह मिनट इसमें प्रभावित हिस्से को भिगोएं।
कैसे लाभदायक है:

बवासीर और गुदा संबंधी परेशानी से राहत पाने के लिए अक्सर आयुर्वेदिक उपचार के तौर पर जात्यादि तेल का इस्तेमाल किया जाता है। यह बवासीर की वजह से होने वाली आंतरिक रक्तस्राव को रोकने में मदद कर सकता है। साथ ही इसमें घाव भरने के गुण भी मौजूद होते हैं, जो पाइल्स का इलाज होने के बाद घाव भरने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, यह बवासीर की वजह से होने वाले घाव को भरने और उन्हें विकसित होने से रोक सकता है (20)

8. फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ

बवासीर के दौरान होने वाली मुख्य समस्याओं में से एक है मल निकासी में होने वाली समस्या। स्टूल पास न होने वाली मुश्किल की वजह से रक्तस्राव भी होने लग जाता है। ऐसे में भोजन में पर्याप्त मात्रा में फाइबर को शामिल करना जरूरी हो जाता है। फाइबर युक्त आहार का सेवन करने से कब्ज की वजह से होने वाले बवासीर से थोड़ी राहत मिल सकती है। इसलिए, बवासीर के कारण होने वाली परेशानियों व समस्याओं से बचने के लिए एक दिन में करीब 30 से 35 ग्राम फाइबर का सेवन करना उचित माना जाता है। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ में सब्जियां, फल और साबुत अनाज लिया जा सकता है (21)

9. टी बैग्स

सामग्री:
  • एक से दो टी बैग
  • एक कप गर्म पानी
उपयोग का तरीका:
  • टी बैग को कुछ मिनटों के लिए एक कप गर्म पानी में भिगोएं।
  • अब इसे गर्म पानी से निकालकर चाय को गुनगुना होने दें।
  • फिर रूई के टुकड़े की मदद से इस चाय को प्रभावित हिस्से पर पांच से 10 मिनट के लिए लगाएं।
  • वैकल्पिक रूप से, कुछ मिनट के लिए टी बैग को फ्रिज में रखकर ठंडा करें।
  • अब इसे गुदा पर रख लें।
  • इस प्रक्रिया को रोजाना दो से तीन बार दोहराया जा सकता है।
कैसे लाभदायक है:

माना जाता है कि टी-बैग को गुदाद्वार पर रखने से खुजली और दर्द से थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, इसको लेकर कोई वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है। एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित एक शोध में कैमोमाइल को सूजन कम करने में लाभदायक पाया गया है (22)। ऐसे में पाइल्स से पीड़ित व्यक्ति इसके टी-बैग, पेस्ट और चाय का इस्तेमाल बवासीर से राहत पाने के लिए इस्तेमाल में ला सकते हैं।

10. काले बीज का तेल

सामग्री:
  • आधा चम्मच काले बीज का तेल
  • 1 चम्मच सिरका
उपयोग का तरीका:
  • सिरके में काले बीज का तेल डालकर अच्छे से मिलाएं।
  • अब इसे बवासीर प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  • कब्ज के लिए (जो कि बवासीर का कारण है) एक कप काली चाय में आधा चम्मच काले बीज का तेल मिलाकर पी लें।
  • काढ़े को (तेल के साथ) दिन में दो बार पिया जा सकता है।
कैसे लाभदायक है:

काले बीज के तेल में भी एंटी-इंफ्लेमेटरी, एनाल्जेसिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। ये गुण पाइल्स के लक्षणों जैसे- सूजन और दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं (23)। कलौंजी के तेल के साथ ही तिल के तेल को भी दोनों तरह के पाइल्स के लिए अच्छा माना जाता है (24)। बवासीर का घरेलू उपाय करने के लिए आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पाइल्स के लक्षण कुछ हद तक कम हो सकते हैं।

11. ग्रीन टी

सामग्री:
  • एक से दो ग्रीन टी के बैग
  • एक कप गर्म पानी
  • 1/2 चम्मच शहद
  • 1/2 चम्मच नींबू का रस
उपयोग का तरीका:
  • ग्रीन टी बैग को एक-दो मिनट के लिए गर्म पानी में डालकर रखें।
  • अब टी बैग निकालकर इसमें शहद और नींबू मिलाएं।
  • आप दिन में दो से तीन बार पाइल्स प्रभावित क्षेत्र को इससे धो सकते हैं।
  • ग्रीन टी को शहद और नींबू के बिना भी उपयोग में लाया जा सकता है।
  • इसके अलावा, आप इस्तेमाल किए गए टी बैग को प्रभावित क्षेत्र पर कुछ मिनटों के लिए रख सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:

बवासीर के लक्षण से राहत पाने में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों को लाभदायक माना जाता है (25)। ग्रीन टी में ये दोनों गुण मौजूद होते हैं (26)। इसलिए, कहा जा सकता है कि ये गुण बवासीर के कुछ लक्षणों जैसे सूजन और दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, ग्रीन टी का इस्तेमाल पाइल्स में कितना लाभकारी हो सकता है, इसको लेकर कोई शोध मौजूद नहीं हैं।

बवासीर के लिए घरेलू उपाय के बाद हम पाइल्स के इलाज के बारे में बता रहे हैं।

बवासीर (पाइल्स) का इलाज – Treatment of Piles (Hemorrhoids) in Hindi

बवासीर के उपचार में शामिल हैं (3):

  • ओवर-द-काउंटर कॉर्टिकोस्टेरॉइड (Corticosteroid) जैसे, कोर्टिसोन। यह क्रीम दर्द और सूजन को कम करने के लिए दी जाती है।
  • लिडोकाइन (Lidocaine), दर्द को कम करने के लिए।
  • स्टूल सॉफ्टनर

चिकित्सक प्रक्रियाओं में निम्नलिखित उपचार शामिल हैं (27):

  • रबर बैंड लिगेशन (Rubber band ligation) : आंतरिक बवासीर का इलाज के लिए डॉक्टर इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं। आंतरिक बवासीर में रक्तस्राव और प्रोलैप्सिंगजैसी समस्या होती है। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर एक रबर बैंड पाइल्स के चारों ओर लगा देते हैं। यह बैंड रक्त की आपूर्ति को बंद कर देता है। इसकी मदद से रबर बैंड लगा हुआ हिस्सा करीबन एक हफ्ते में अलग हो जाता है। इस प्रक्रिया को खुद से करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
  • स्क्लेरोथेरेपी (Sclerotherapy) : इस थेरेपी के दौरान डॉक्टर आंतरिक बवासीर के इलाज के लिए एक घोल को इंजेक्ट करते हैं, जिससे अक्सर बवासीर वाला हिस्सा सिकुड़ जाता है।
  • इन्फ्रारेड फोटोकोगुलेशन (Infrared photocoagulation) : इस दौरान डॉक्टर एक ऐसे उपकरण का उपयोग करते हैं, जो सीधे आंतरिक बवासीर में इन्फ्रारेड लाइट डालता है। इसकी मदद से भी बवासीर वाली जगह सिकुड़ जाती है।
  • इलेक्ट्रोकोएग्यूलेशन (Electrocoagulation) : डॉक्टर इस दौरान एक उपकरण का उपयोग करके आंतरिक बवासीर में एक विद्युत प्रवाह भेजते हैं। विद्युत प्रवाह के कारण पाइल्स वाला हिस्सा सिकुड़ जाता है। 
  • हेमराहाइडेक्टोमी (Hemorrhoidectomy) : यह बवासीर की सर्जरी होती है, जिसे आंतरिक बवासीर के ऊतक को और प्रौलेप्सिंग को निकालने के लिए किया जाता है। यह तभी किया जाता है, जब दवाओं का असर बवासीर पर नहीं होता है। डॉक्टर इस उपचार से पहले मरीज को सर्जरी के दौरान बेहोश करने के लिए एनेस्थीसिया देते हैं।

बवासीर का इलाज जानने के साथ ही इससे बचने के तरीकों के बारे में जान लेना भी जरूरी है। नीचे, हम बवासीर से बचाव करने के कुछ टिप्स बता रहे हैं।

बवासीर से बचाव  – Prevention Tips for Piles in Hindi

कब्ज की समस्या से दूर रहते हुए बवासीर से बचा जा सकता है। इसके लिए नीचे दिए गए टिप्स को आजमा सकते हैं (4) (28)

  • तरल पदार्थ का खूब सेवन करें।
  • फाइबर युक्त फल, सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन करें।
  • स्टूल सॉफ्टनर का उपयोग करें।
  • फाइबर सप्लीमेंट लें।
  • कब्ज को रोकने के लिए एक्सरसाइज करें।

लेख में हम बवासीर के लक्षण, कारण के बारे में बता चुके हैं। अगर किसी भी व्यक्ति को ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बवासीर का उपचार घर में भी किया जा सकता है, जो बवासीर के लक्षण को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन संपूर्ण इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करना उचित रहेगा। साथ ही समस्या गंभीर होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें। हां, बवासीर के घरेलू उपचार इससे कुछ हद तक राहत दिलाने में मदद जरूर कर सकते हैं। बवासीर की रोकथाम और इसके लक्षण को कम करने के लिए लेख में दिए गए बचाव के उपाय की सहायता ली जा सकती है। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बवासीर के लिए क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

नीचे हम बवासीर होने के बाद कौन से खाद्य पदार्थ को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए और किन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए यह बता रहे हैं (29):

बवासीर में क्या खाना चाहिए?

पाइल्स होने पर फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है। फाइबर से भरपूर फल, सब्जी और अनाज कुछ इस प्रकार हैं:

    • गेहूं से बने खाद्य पदार्थ
    • नाशपाती
    • सेब
    • रसभरी
    • सूखा आलूबुखारा
    • हरी मटर
    • शकरकंद
    • राजमा

क्या नहीं खाना चाहिए?

अगर बवासीर पुरानी कब्ज के कारण हुई है, तो ऐसे खाद्य पदार्थों को खाने से बचें, जिनमें बहुत कम या बिल्कुल भी फाइबर न हो। नीचे हम आपको बता रहे हैं किन खाद्य पदार्थों से आपको बचना चाहिए:

      • पनीर
      • चिप्स
      • फास्ट फूड
      • आइसक्रीम
      • मांस
      • पहले से तैयार खाद्य पदार्थ जैसे फ्रोजन (Frozon) फूड और स्नैक्स
      • प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, जैसे कि हॉट डॉग और माइक्रोवेव में बनने व गर्म किए जाने वाले खाद्य पदार्थ (पास्ता, पिज्जा या मैक्रोनी)।

बवासीर से राहत पाने के लिए सर्वश्रेष्ठ योगासन कौन से हैं?

नियमित रूप से योगाभ्यास करने से बवासीर के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। बवासीर (पाइल्स) से राहत पाने के लिए दैनिक रूप से इन योगासनों को किया जा सकता है (30) (31) (32) :

        • भुजंगासन (Cobra Pose)
        • धनुरासन (Bow pose)
        • मत्स्यासन (Fish Pose)
        • वज्रासन
        • सर्वांगासन

क्या बवासीर से पीड़ा होती है?

हां, बवासीर की वजह से पीड़ा हो सकती। विशेष रूप से तब जब मल निकासी की कोशिश की जाती है। ज्यादा जोर लगाने पर खून निकलने के साथ ही दर्द हो सकता है (5)

क्या बवासीर के कारण पेट में ऐंठन हो सकती है?

बवासीर में कुछ मरीज पेट में दर्द या ऐंठन महसूस कर करते हैं। ऐसा कब्ज के कारण हो सकता है।

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vinita pangeni

विनिता पंगेनी ने एनएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में बीए ऑनर्स और एमए किया है। टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में काम करते हुए इन्हें करीब चार साल हो गए हैं। इन्हें उत्तराखंड के कई पॉलिटिकल लीडर और लोकल कलाकारों के इंटरव्यू लेना और लेखन का अनुभव है। विशेष कर इन्हें आम लोगों से जुड़ी रिपोर्ट्स करना और उस पर लेख लिखना पसंद है। इसके अलावा, इन्हें बाइक चलाना, नई जगह घूमना और नए लोगों से मिलकर उनके जीवन के अनुभव जानना अच्छा लगता है।

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