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ब्रोंकाइटिस (श्वसनीशोथ) के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Bronchitis Symptoms and Home Remedies in Hindi

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ब्रोंकाइटिस (श्वसनीशोथ) के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Bronchitis Symptoms and Home Remedies in Hindi Hyderabd040-395603080 September 30, 2019

हर इंसान अपने स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहता है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर लोग डॉक्टर की सलाह जरूर लेते हैं, लेकिन सर्दी-जुकाम जैसी छोटी-मोटी समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। आगे चल कर यही छोटी-मोटी समस्याएं ब्रोंकाइटिस जैसी बड़ी बीमारी का कारण बन सकती हैं। ब्रोंकाइटिस को श्वसनीशोथ भी कहते हैं। यह समस्या श्वास नली में सूजन या उसमें म्यूकस यानी बलगम बनने के कारण होती है। अगर आपको तीन सप्ताह से अधिक खांसी और कफ की शिकायत है, तो ये ब्रोंकाइटिस के लक्षण हो सकते हैं (1)। ऐसे में आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

विषय सूची


स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ब्रोंकाइटिस क्या है और इसके लक्षण क्या हैं? साथ ही यह भी बताएंगे कि ब्रोंकाइटिस का इलाज किस प्रकार संभव है?

ब्रोंकाइटिस क्या है – What is Bronchitis in Hindi

श्वास नली को ब्रोंकाई या ब्रोंकियल नलियां कहते हैं। जब इन नलियों में संक्रमण, सूजन या इनमें बलगम बन जाती है, तो उस अवस्था को ब्रोंकाइटिस कहते हैं। ब्रोंकाइटिस के कारण खांसी की समस्या होती है और यह बलगम का रूप भी लेती है। सांस लेने में तकलीफ, हल्का बुखार और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं ब्रोंकाइटिस के लक्षण हो सकते हैं (2)। मुख्य रूप से ब्रोंकाइटिस दो प्रकार के होते हैं : तीव्र या एलर्जिक ब्रोंकाइटिस (acute Bronchitis) और दीर्घकालीन या क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस (Chronic Bronchitis)।

  1. तीव्र या एलर्जिक ब्रोंकाइटिस – यह वायरस या बैक्टीरिया की वजह से फैलता है और एलर्जी के कारण भी होता है। आमतौर पर यह कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन संक्रमण की समस्या दूर होने के बाद भी आपको कुछ दिनों तक खांसी की समस्या रह सकती है (2)।
  1. क्रोनिक ब्रोंकाइटिस – यह एक प्रकार का क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव डिजीज (COPD) यानी फेफड़ों से संबंधित समस्या है, जिसकी वजह से सांस लेने में समस्या होती है। इसके कारण श्वास नली में अधिक मात्रा में बलगम भी बनती है (3)।

ब्रोंकाइटिस क्या है इस बारे में तो आप जान ही गए हैं, आगे इस लेख में हम आपको ब्रोंकाइटिस के कारणों के बारे में बता रहे हैं।

ब्रोंकाइटिस के कारण – Causes of Bronchitis in Hindi

अगर किसी बीमारी के फैलने के कारणों को जान लिया जाए, तो उससे बचना और भी आसान हो सकता है। आर्टिकल के इस भाग में हम आपको ब्रोंकाइटिस के कारण बता रहे हैं, ताकि आप भविष्य में इसके खतरे से बचे सकें।

  • एलर्जिक ब्रोंकाइटिस या एक्यूट ब्रोंकाइटिस आमतौर पर उसी वायरस के कारण होता है, जिससे सर्दी और जुकाम होता है।
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या हवा के माध्यम से इस वायरस के फैलने की आशंका अधिक होती है (2)।
  • प्रदूषित हवा और धूम्रपान मुख्यतः दो ऐसे कारण हैं, जो क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस की वजह बनते हैं।
  • धूल-मिट्टी वाले वातावरण में अधिक समय तक रहने से भी क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है (3)।

ये तो थे ब्रोंकाइटिस होने के कारण। इस लेख में आगे हम ब्रोंकाइटिस के लक्षण बता रहे हैं।

ब्रोंकाइटिस के लक्षण – Symptoms of Bronchitis in Hindi 

ब्रोंकाइटिस के लक्षण बहुत ही साधारण होते हैं, जिन पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते हैं। अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण अधिक समय तक दिखें, तो शीघ्र अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से संपर्क करें (1)। ब्रोंकाइटिस का इलाज इससे और भी आसान हो सकता है और आप इससे बच सकते हैं।

  • सूखी या बलगम वाली खांसी
  • गला सूखना
  • सीने में दर्द
  • थकान
  • हल्का सिरदर्द
  • शरीर में हल्का दर्द या अकड़न
  • आंखों से पानी निकलना
  • हल्का बुखार

ब्रोंकाइटिस के घरेलू उपाय – Home Remedies for Bronchitis in Hindi 

ब्रोंकाइटिस के इलाज में घरेलू उपचार आपकी बहुत मदद कर सकते हैं, जिनके बारे में हम आगे इस लेख में बताने जा रहे हैं।

1. हल्दी

ब्रोंकाइटिस से राहत पाने के लिए हल्दी Pinit

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सामग्री : 
  • एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
  • एक गिलास दूध
बनाने और उपयोग करने की विधि :
  • हल्दी को दूध में डालकर अच्छी तरह से मिलाएं।
  • दूध गर्म करने के बाद उसे थोड़ा ठंडा होने दें।
  • गुनगुना होने के बाद इसे पी लें।
इसका सेवन कब करें? 

इसे आप दिन में दो या तीन बार पी सकते हैं।

कैसे है लाभदायक? 

सदियों से हल्दी का उपयोग श्वास संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए किया जा रहा है। हल्दी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो ब्रोंकाइटस के उपचार में लाभदायक हो सकते हैं। हल्दी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में उपयोगी साबित हो सकती है (4)।

नोट : अगर आपको पिताशय में पथरी, पीलिया और हाइपर एसिडिटी या अम्ल पित्त की शिकायत है, तो इसका सेवन न करें। इसका उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

2. शहद और लहसुन 

सामग्री : 
  • लहसुन की एक कली
  • एक छोटा चम्मच शहद
बनाने और उपयोग करने की विधि :
  • लहसुन को बारीक काटकर शहद में मिलाएं।
  • इस मिश्रण को सीधा निगल लें, ध्यान रहे इसे चबाना नहीं है।
इसका सेवन कब करें?

इसका सेवन आप दिन में दो बार कर सकते हैं।

कैसे है लाभदायक?

लहसुन में एलिसिन नामक तत्व पाया जाता है, जोकि एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है और किसी बीमारी को जल्दी ठीक करने में मदद करता है (5)। वहीं, दूसरी तरफ शहद सूजन कम करता है, हवा मार्ग को साफ करता है और चीजें निगलने में सहायता करता है (6)।

3. प्याज 

सामग्री : 
  • दो प्याज
  • एक साफ छोटा तौलिया
  • पानी
बनाने और उपयोग करने की विधि : 
  • प्याज को काटकर हल्का उबाल लें।
  • पानी से छानकर प्याज को तौलिये के बीच में रखें और इसको लपेट लें।
  • इसे 10 से 12 मिनट तक सीने पर रखें। ध्यान रहे कि प्याज अधिक गर्म न हो।
कब उपयोग करें?

इस प्रक्रिया को आप दिन में दो बार कर सकते हैं।

क्यों है उपयोगी?

लाल प्याज को एक्सपेक्टोरेंट (बलगम दूर करने की दवाई) के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता हैं (7)। एक्सपेक्टोरेंट श्वांस नली को साफ कर ब्रोंकाइटिस के खतरे को कम कर सकता है (8)।

[ पढ़े: Pyaz Ke Fayde in Hindi ]

4. एसेंशियल ऑयल

ब्रोंकाइटिस से राहत पाने के लिए एसेंशियल ऑयल Pinit

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सामग्री :
  • लैवेंडर तेल की चार बूंदें
  • दालचीनी के तेल की चार बूंदें
  • अजवायन के तेल की चार बूंदें
  • 2 से 3 छोटे चम्मच जैतून का तेल
बनाने और उपयोग करने की विधि :
  • सभी तेलों को अच्छी तरह से मिलाकर हल्का गर्म कर लें।
  • कुछ देर तक इस मिश्रण से अपनी छाती और पीठ की मालिश करें।
  • ध्यान रहे कि मालिश के बाद तेल को पोंछना नहीं है।
कब उपयोग करें?

ब्रोंकाइटिस से राहत पाने के लिए ऐसा प्रतिदिन सोने से पहले करें।

क्यों है उपयोगी?

लैवेंडर का तेल मस्तिष्क और शरीर के लिए अच्छा माना जाता है। इसमें एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं और यह अच्छी नींद में भी सहायक होता है (9) (10)। दालचीनी में एल्डिहाइड (aldehyde) होता है, जो एंटी-फंगल के रूप में कार्य करता है और श्वास नली के संक्रमण से बचाव कर सकता है (11)। अजवायन का तेल भी एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर होता है, जो संक्रमण से बचाने में सहायक हो सकता है (12) (13)।

5. गोल्डन सील 

सामग्री : 
  • एक से दो छोटे चम्मच गोल्डन सील की जड़
  • 1/4 कप पानी
बनाने और उपयोग करने की विधि : 
  • गोल्डन सील को पानी में डालकर 10 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें।
  • अब काढ़े को छानकर पीएं। ध्यान रहे कि काढ़ा अधिक गर्म न हो।
कब उपयोग करें?

आप दिन भर में इस काढ़े के तीन से चार कप पी सकते है

क्यों है उपयोगी?

गोल्डन सील कनाडा और पूर्वी अमरीका में पाई जाने वाली एक प्रकार की जड़ी-बूटी है। संक्रमण और सूजन जैसी समस्याओं के लिए गोल्डन सील का उपयोग सदियों से किया जा रहा है। गोल्डन सील के एंटी-बैक्टीरियल गुण बैक्टीरिया से लड़ने में कारगर साबित होते हैं (14)। ब्रोंकाइटिस के उपचार के लिए यह घरेलू नुस्खा बहुत ही लाभदायक है।

6. भाप 

सामग्री : 

  • एक बड़ा कटोरा पानी
  • तौलिया
बनाने और उपयोग करने की विधि :
  • पानी को उबाल लें और तौलिया से अपना सिर ढक कर भाप लें।
  • आप चाहें तो अपना पसंदीदा एसेंशियल ऑयल भी पानी में मिला सकते हैं।
  • 10 से 15 मिनट तक भाप लें।
कब उपयोग करें?

इस प्रक्रिया को आप दिन में दो बार कर सकते हैं।

क्यों है कारगर?

कुछ हद तक ब्रोंकाइटिस का इलाज भाप से भी संभव हो सकता है। भाप श्वास नली में बने बलगम को पिघलाकर शरीर से निकलने में मदद करते है। सांस की समस्या और घरघरहाट जैसी ब्रोंकाइटिस की अन्य समस्याओं से छुटकारा दिलाने में भी भाप फायदेमंद होती है (15)।

7. हर्बल-टी

ब्रोंकाइटिस से राहत पाने के लिए हर्बल-टी Pinit

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सामग्री : 
  • ½ चम्मच अदरक पाउडर
  • ½ चम्मच दालचीनी पाउडर
  • ½ चम्मच लौंंग पाउडर
  • एक कप गर्म पानी
बनाने और उपयोग करने की विधि :
  • सभी सामग्रियों को पानी में अच्छी तरह से घोल लें।
  • अब इस घोल को पी लें।
कब उपयोग करें?

ब्रोंकाइटिस से राहत के लिए ऐसा दो से तीन दिन तक करें।

क्यों है उपयोगी?

अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं (16), जो ब्रोन्कियल नली के सूजन को कम करने में सहायता कर सकते है। लौंग में भी एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं (17), जो ब्रोंकाइटिस से बचाव में मदद कर सकते हैं।

8. नीलगिरी का तेल

सामग्री :
  • नीलगिरी का तेल
  • एक रूमाल
बनाने और उपयोग करने की विधि :

अपने रूमाल पर कुछ बूंदें नीलगिरी तेल की गिराएं और इसे सूंघें।

कब उपयोग करें?

ऐसा प्रतिदिन करें।

क्यों है उपयोगी?

नीलगिरी की सुगंध बंद नाक, कफ और सिरदर्द जैसी समस्याओं से छुटकारा दिला सकती है। इस तेल के संबंध में कहा जाता है कि इसमें कीटाणुओं से लड़ने की क्षमता होती है और यह कफ दूर करने में सहायक होता है। इस तेल को सूंघने से श्वास मार्ग खुल जाता है (18)।

9. अदरक 

सामग्री :
  • थोड़ा-सा अदरक
  • एक कप पानी
  • चीनी और चाय पत्ती
बनाने और उपयोग करने की विधि : 
  • पानी में चाय पत्ती, चीनी और अदरक डालकर उबाल लें।
  • फिर कुछ देर के लिए इसे सामान्य होने दें।
  • जब पानी हल्का गुनगुना हो जाए, तो इसे छानकर पिएं।
कब उपयोग करें?

ऐसा आप दिन में दो से तीन बार कर सकते हैं।

क्यों है उपयोगी?

ब्रोंकाइटिस के इलाज में अदरक फायदेमंद हो सकता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो ब्रोन्कियल नली के सूजन को कम करने में सहायता प्रदान करते और इस प्रकार ब्रोंकाइटिस से बचाव में मदद कर सकते हैं (16)।

10. अजवायन 

सामग्री : 
  • ½ छोटा चम्मच अजवायन
  • एक कप गर्म पानी
बनाने और उपयोग करने की विधि :
  • गर्म पानी में अजवायन डालकर उसे चार से पांच मिनट तक के लिए छोड़ दें।
  • गुनगुना होने के बाद इसे छानकर पिएं।
  • आप चाहें तो इसमें शहद की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं।
कब उपयोग करें?

यह काढ़ा आप दिन में दो से तीन बार पी सकते हैं।

क्यों है उपयोगी?

अजवायन का उपयोग मसालों के अलावा औषधि के रूप में भी किया जाता है। अजवाइन में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया को मारकर ब्रोंकाइटिस से बचाव कर सकते हैं (12)।

11. अजवाइन का तेल

ब्रोंकाइटिस से राहत पाने के लिए अजवाइन का तेल Pinit

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सामग्री :
  • अजवाइन तेल की 5 से 10 बूंदें
  • लगभग आधा कप पानी
बनाने और उपयोग करने की विधि :
  • पानी में अजवाइन तेल को अच्छी तरह से मिला लें।
  • अब इस घोल को पी लें।
कब उपयोग करें?

इस घोल को दिन में दो बार तब तक पिएं, जब तक कि ब्रोंकाइटिस के लक्षण समाप्त नहीं हो जाते।

क्यों है उपयोगी?

अजवाइन एक प्रकार की एंटीबायोटिक है और ब्रोंकाइटिस के उपचार के रूप में सदियों से इसका उपयोग किया जा रहा है। यह एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल के रूप में कार्य करती है और सूजन की वजह से सीने में बलगम का जमाव होने से रोक सकती है (19, 20)।

12. इचिनेशिया

सामग्री :
  • थोड़े से इचिनेशिया के पत्ते
  • दो कप गर्म पानी
बनाने और उपयोग करने की विधि :
  • गर्म पानी में इचिनेशिया के पत्तों को डालकर 10 मिनट तक छोड़ दें।
  • गुनगुना होने के बाद इसे पिएं।
कब उपयोग करें?

कुछ दिनों तक इसे दिन में दो से तीन बार पिएं।

क्यों है उपयोगी?

इचिनेशिया उत्तरी अमेरिका में पाया जाने वाला एक प्रकार का फूल है। यह श्वास नली की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे इसमें होने वाले संक्रमण से बचा जा सकता है। उत्तरी अमेरीका में इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचने के लिए किया जाता है। यह कफ की समस्या से छुटकारा दिलाने में भी मददगार साबित हो सकता है (21)।

13. मुलीन

ब्रोंकाइटिस से राहत पाने के लिए मुलीन Pinit

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सामग्री : 
  • एक से दो छोटे चम्मच मुलीन के सूखे पत्ते
  • एक कप गर्म पानी
  • एक छोटा चम्मच शहद (आवश्यकतानुसार)
बनाने और उपयोग करने की विधि :
  • मुलीन को पानी में 10 से 15 मिनट तक डालकर छोड़ दें।
  • फिर पानी को छान लें और इसमें शहद मिलाकर पिएं।
कब उपयोग करें?

कुछ दिनों तक इस चाय के रोज दो से तीन कप पिएं।

क्यों है उपयोगी?

मुलीन एक प्रकार का औषधीय पौधा है। अधिकतर मुलीन का उपयोग श्वास संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो ब्रोंकाइटिस उपचार में इसे और भी सहायक बनाते हैं (22)।

 ब्रोंकाइटिस का घरेलू उपचार जानने के बाद चलिए अब इससे बचाव के बारे में जानते हैं।

ब्रोंकाइटिस से बचाव – Prevention Tips for Bronchitis in Hindi

ब्रोंकाइटिस से बचाव के लिए आपको निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए :

  • साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें।
  • धूम्रपान, रसायन, धूल-मिट्टी और प्रदूषित हवा से जितना हो सके बचने की कोशिश करें।
  • खांसी और छींक आने पर नाक व मुंह को अवश्य ढकें (23)।

कहते हैं जागरूकता किसी भी प्रकार की बीमारी से आपको बचा सकती है। ब्रोंकाइटिस का इलाज और इससे बचाव आपके सहयोग से ही संभव है। इस बीमारी के बारे में लोगों को बताने और सतर्क करने के लिए इस लेख को जितना हो सके दूसरे लोगों के साथ अवश्य शेयर करें। अगर आपके पास भी इससे संबंधित कोई जानकारी है, तो कमेंट के माध्यम में हमारे साथ साझा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस क्या है?

जब ब्रोंकाइटिस की समस्या लंबे समय तक रहती है, उस स्थिति को क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस कहते हैं। इस दौरान श्वास नली में अधिक मात्रा में बलगम बन जाती है, जो खांसी के माध्यम से शरीर से बाहर निकलती है। धूम्रपान क्रॉनिकल ब्रोंकाइटिस का मुख्य कारण है (3)।

वायरल ब्रोंकाइटस क्या है?

वायरल संक्रमण के माध्यम से होने वाले ब्रोंकाइटिस को वायरल ब्रोंकाइटिस कहते हैं। ब्रोंकाइटिस की यह समस्या ज्यादतर लोगों में देखी जा सकती है।

क्या ब्रोंकाइटिस संक्रामक है?

तीव्र या एलर्जिक ब्रोंकाइटिस वायरस या बैक्टीरिया के वजह से फैलता है। इस प्रकार के ब्रोंकाइटिस को संक्रामक कहा जा सकता है (2)। हालांकि, बात जब क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस की होती है, तो इसे संक्रामक नहीं कहा जा सकता है। यह केवल प्रदूषण और धूम्रपान के माध्यम से फैलता है (24)।

ब्रोंकाइटिस कब तक रहता है?

आमतौर पर एक्यूट ब्रोंकाइटिस दो से तीन सप्ताह तक रहता है, जबकि क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस लंबे समय तक टिका रह सकता है। ठीक होने के कुछ महीनों बाद भी क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस होने का खतरा रहता है।

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