कार्पल टनल सिंड्रोम के कारण, लक्षण और इलाज – Carpal Tunnel Syndrome in Hindi

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कई बार लोगों को देर तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते समय हाथों में सून्नपन या कलाई में दर्द की शिकायत करते देखा जाता है। हालांकि, लोग इसे सामान्य समझकर अनदेखा भी कर जाते हैं, लेकिन अगर हाथों में तकलीफ बार-बार होने लगे, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। हाथों में लगातार असुविधा या दर्द, कार्पल टनल सिंड्रोम नामक स्थिति के कारण हो सकता है। कार्पल टनल सिंड्रोम की स्थिति वैसे तो गंभीर नहीं मानी जा सकती है, लेकिन कुछ कारकों में यह चिंताजनक हो सकती है। ऐसे में स्टाइलक्रेज के इस लेख से हम कार्पल टनल सिंड्रोम से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां साझा कर रहे हैं। तो कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण, कारण व इलाज के साथ-साथ इसके बचाव जानने के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।

लेख विस्तार से पढ़ें

सबसे पहले जानते हैं कि कार्पल टनल सिंड्रोम क्या है।

कार्पल टनल सिंड्रोम क्या है? – What is Carpal Tunnel Syndrome in Hindi

कार्पल टनल सिंड्रोम ऐसी स्थिति है, जिसमें मीडियन नर्व (Median Nerve) पर दबाव पड़ता है। मीडियन नर्व कंधे से लेकर कलाई तक जाने वाली मुख्य नस होती है। कलाई में मौजूद यह तंत्रिका हाथ के कार्य करने की क्रिया को नियंत्रित करती है और किसी भी चीज को महसूस करने की क्षमता प्रदान करती है। हमारी कलाई के जिस हिस्से से यह तंत्रिका हाथ में प्रवेश करती है उसे कार्पल टनल कहा जाता है। यह टनल संकीर्ण होती है और जब इसमें किसी प्रकार की सूजन होती है, तो यह तंत्रिका को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जब यह नस दब जाती है, तो कार्पल टनल सिंड्रोम की समस्या होती है (1)। लेख में आगे हम कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षणों की जानकारी देंगे।

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अब जानते हैं कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण के बारे में।

कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण – Symptoms of Carpal Tunnel Syndrome in Hindi

हो सकता है सबसे पहले कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण प्रभावित हाथ में सिर्फ रात में ही महसूस हो। उसके बाद धीरे-धीरे इसके लक्षण दूसरे हाथ में भी दिखाई दे सकते हैं और दिन में भी महसूस हो सकते हैं (2)। ये लक्षण क्या हैं, उसकी जानकारी हम नीचे बता रहे हैं। तो कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं (1) :

  • किसी चीज को पकड़ने से हाथ में असुविधा महसूस होना।
  • किसी एक या दोनों हाथों के अंगूठों में सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होना। कभी-कभी ऐसा हाथ की अन्य उंगलियों में भी महसूस हो सकता है।
  • हथेली में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस करना
  • प्रभावित हाथ में सुई जैसी चुभन महसूस होना।
  • हाथ में दर्द महसूस करना, जो कोहनी तक महसूस हो सकती है।
  • एक या दोनों हाथों और कलाईयों में दर्द की समस्या।
  • हाथों की उंगलियों को हिलाने में असुविधा महसूस करना या उंगलियों के बीच कार्य करने के तालमेल में परेशानी महसूस करना।
  • पकड़ कमजोर होना।
  • एक या दोनों हाथों में कमजोरी महसूस करना।
  • कार्पल टनल सिंड्रोम की स्थिति अगर गंभीर हो तो अंगूठे के नीचे की मांसपेशियों में कमजोरी की समस्या भी हो सकती है।

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कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षणों के बाद अब इसके कारणों पर भी चर्चा कर लेते हैं।

कार्पल टनल सिंड्रोम के कारण – Causes of Carpal Tunnel Syndrome in Hindi

किसी भी बीमारी के कारण के बारे में अगर पता हो, तो उसका इलाज करना आसान हो सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, हम यहां कार्पल टनल सिंड्रोम के कारण की जानकारी दे रहे हैं। कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण के बाद कार्पल टनल सिंड्रोम के कारण कुछ इस प्रकार हैं (3):

  • गठिया – गठिया, हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्या होती है। ऐसे में गठिया के विभिन्न प्रकार, विशेष रूप से रूमेटाइड अर्थराइटिस सूजन पैदा कर सकता है और कार्पल टनल सिंड्रोम का कारण बन सकता है।
  • प्रेगनेंसी – गर्भावस्था के दौरान हार्मोन के वजह से शरीर में अधिक तरल पदार्थ जमने के कारण तंत्रिका प्रभावित हो सकती है। जिस कारण गर्भावस्था में कार्पल टनल सिंड्रोम की समस्या हो सकती है। आमतौर पर, शिशु के जन्म के बाद यह समस्या ठीक हो सकती है।
  • जन्मजात कारक – कुछ लोगों में दूसरों की तुलना में जन्म से ही छोटी कार्पल टनल हो सकती है। ऐसे में यह भी एक कारण हो सकता है।
  • कलाई पर चोट – कलाई का फ्रैक्चर या किसी प्रकार की चोट जो तंत्रिका और कार्पल टनल के जगह को प्रभावित कर सकता है।

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चलिए अब जानते हैं कार्पल टनल सिंड्रोम के जोखिम कारकों के बारे में।

कार्पल टनल सिंड्रोम के जोखिम कारक – Risk Factors of Carpal Tunnel Syndrome in Hindi

कार्पल टनल सिंड्रोम के जोखिम कारक की बात की जाए, तो इनमें से कुछ कारक कार्पल टनल सिंड्रोम के कारणों से काफी हद तक मिलते-जुलते हैं। ऐसे ही कुछ कारकों की जानकारी हम यहां दे रहे हैं (1) (2):

  • शराब का सेवन।
  • बढ़ता वजन या मोटापा
  • उम्र भी कार्पल टनल सिंड्रोम होने का जोखिम कारक हो सकता है। कार्पल टनल सिंड्रोम की समस्या 30 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में अधिक देखी जा सकती है।
  • वहीं, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस समस्या का जोखिम तीन गुना अधिक होता है (4)। जिस आधार पर यह माना जा सकता है कि जेंडर भी इसके जोखिम कारकों में से एक हो सकता है।
  • कलाई में गठिया होना।
  • कलाई में सिस्ट या ट्यूमर होना।
  • संक्रमण होना।
  • गर्भावस्था या रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के दौरान शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ का जमा होना।
  • रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या होना।
  • शरीर में प्रोटीन का असामान्य रूप से जमा होना, जिसे एमिलॉयडोसिस (Amyloidosis) के तौर पर भी जाना जाता है। शरीर में जमा होने पर अंगों को खराब कर सकता है और उनके काम को प्रभावित कर सकता है (5)। कार्पल टनल सिंड्रोम का जोखिम कारक हो सकता है।
  • सिलाई, मैन्युफैक्चरिंग, साफ-सफाई या पैकिंग जैसे स्थानों में काम करने वाले लोगों में भी कार्पल टनल सिंड्रोम का जोखिम हो सकता है।

अभी और जानकारी बाकी है

लेख के इस भाग में हम कार्पल टनल सिंड्रोम के निदान के तरीकों के बारे में जानेंगे।

कार्पल टनल सिंड्रोम का निदान कैसे किया जा सकता है – Diagnosis of Carpal Tunnel Syndrome in Hindi

कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज करने से पहले इसके लक्षणों की पहचान जरूरी है। ऐसे में हम यहां कार्पल टनल सिंड्रोम के निदान से जुड़ी जानकारी साझा कर रहे हैं। नीचे बताए गए तरीकों से डॉक्टर कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण का निदान कर सकते हैं। ये तरिकें कुछ इस प्रकार हैं (1):

शारीरिक परीक्षण करना

सबसे पहले जानिए शारीरिक परीक्षण के बारे में, जो कुछ इस प्रकार हैं:

  • हाथ, कलाई या उंगली में सुन्नता की जांच कर सकते हैं।
  • किसी वस्तु पर हाथ की पकड़ कितनी मजबूत है इसकी जांच कर सकते हैं और इस आधार पर निदान कर सकते हैं।
  • कार्पल टनल सिंड्रोम के शारीरिक परीक्षण में टिनल साइन (Tinel sign) भी शामिल है। इस टेस्ट में चिकित्सक कलाई की मीडियन नर्व को दबाकर जांच करते हैं। इस दौरान व्यक्ति को कलाई से लेकर पूरे हाथ में दर्द हो सकता है।
  • फालेन टेस्ट (Phalen Test) के जरिए भी कार्पल टनल सिंड्रोम का निदान किया जा सकता है। इस टेस्ट के दौरान चिकित्सक कलाई को 60 सेकेंड के लिए आगे की तरफ मोड़ते हैं। इस दौरान हाथ में सुन्नता, झुनझुनाहट या कमजोरी जैसा अनुभव हो सकता है।

स्क्रीन टेस्ट करना

अब जानते हैं स्क्रीन टेस्ट से जुड़े परीक्षणों के बारे में:

  • एक्स-रे : कलाई में गठिया जैसी स्थितियों का पता लगाने के लिए डॉक्टर कलाई का एक्स-रे कराने का निर्देश दे सकते हैं।
  • इलेक्ट्रोमोग्राफी टेस्ट : इलेक्ट्रोमोग्राफी टेस्ट (Electromyography) से मांसपेशियों और उन्हें नियंत्रित करने वाली नसों की जांच की जा सकती है। इस टेस्ट के दौरान प्रभावित मांसपेशियों में एक पतली सुई डाली जाती है, जो सेंसर (इलेक्ट्रोड) होता है और एक मॉनीटर से जुड़ा होता है। टेस्ट के दौरान बिजली के हल्के झटके लगाए जाते हैं और फिर जिस गति से तंत्रिकाओं में इसका संचार होता है उसे मापा जाता है (6)।
  • नर्व कंडक्शन स्टडी : यह भी एक इलेक्ट्रोमोग्राफी टेस्ट के साथ किया जा सकता है। नर्व कंडक्शन स्टडी को नर्व कंडक्शन वेलोसिटी (Nerve Conduction Velocity) भी कहते हैं। इस टेस्ट को नर्व से जुड़ी क्षति की जांच करने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट के दौरान इलेक्ट्रोड नामक चिपकने वाले पैच को प्रभावित हिस्से की त्वचा पर लगाया जाता है। इसके बाद इलेक्ट्रोड के जरिए बहुत ही हल्का इलेक्ट्रिक झटका दिया जाता है, ताकि यह पता चल सके कि कितनी जल्दी नर्व से इलेक्ट्रिक सिग्नल गुजर रहे हैं। इस दौरान नर्व में होने वाले परिवर्तन को ग्राफ के जरिए देखा जाता है (7)।

नोट : इलेक्ट्रोमोग्राफी (ईएमजी) और नर्व कंडक्शन स्टडी दोनों ही टेस्ट मांसपेशियों और नसों में इलेक्ट्रिक सिग्नल की गतिविधि मापने में मदद करते हैं। ये टेस्ट अलग-अलग या एक साथ भी किए जा सकते हैं। अगर दोनों ही टेस्ट को कराना हो, तो नर्व कंडक्शन स्टडी को पहले कराने की सलाह दी जा सकती है (6)।

  • अल्ट्रासाउंड इमेजिंग और एमआरआई : अल्ट्रासाउंड और मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic resonance imaging) की मदद से कलाई की मीडियन नर्व में हुए आसामन्य बदलाव का पता लगाया जा सकता है (2)। हालांकि, हो सकता है कि यह कार्पल टनल सिंड्रोम के निदान में कुछ खास उपयोगी न हो। कार्पल टनल सिंड्रोम के निदान के तौर पर डॉक्टर कुछ और टेस्ट कराने की सलाह भी दे सकते हैं।

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कार्पल टनल सिंड्रोम के निदान के बाद अब कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाए, इस बारे में जानेंगे।

कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज – Treatment of Carpal Tunnel Syndrome in Hindi

कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण पता चलते ही इसके उपचार के विकल्पों को अपनाना जरूरी है। नीचे कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज कराने की प्रक्रिया विस्तार से दी गई है। इसमें डॉक्टर स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए नॉन सर्जिकल और सर्जरी दोनों ही तरह के सुझाव दे सकते हैं। तो यहां जानते हैं कि कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज किन-किन तरीकों से किया जा सकता है (2) :

कार्पल टनल सिंड्रोम का नॉन सर्जिकल इलाज

  • स्प्लिंट लगाना : कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज करने के लिए डॉक्टर कलाई पर स्प्लिंट लगा सकते हैं। स्प्लिंट एक उपकरण है, जो कलाई का दर्द कम कर सकता है और कलाई को स्थिर रखने में भी मदद कर सकता है (8)।
  • दवाइयां : कार्पल टनल सिंड्रोम का उपचार करने के लिए डॉक्टर दर्द व सूजन से राहत दिलाने वाली दवाओं के सेवन की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा, मीडीयन नर्व में दबाव को कम करने वाली दवाइयों के सेवन का सुझाव भी दे सकते हैं। हालांकि, इन्हें कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज नहीं कह सकते हैं, ये सिर्फ कुछ हद तक इसके लक्षणों को कम कर सकते हैं।
  • एक्यूपंक्चर थेरेपी : कुछ मामलों में डॉक्टर एक्यूपंक्चर थेरेपी की भी सलाह दे सकते हैं। इससे दर्द में राहत मिल सकती है। मौजूद शोध यह बताते हैं कि एक्यूपंक्चर थेरेपी कार्पल टनल सिंड्रोम के कुछ लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकता है (9)। वहीं, योग का विकल्प दर्द को कम करने और पकड़ में सुधार करने में सहायक साबित पाया गया है।

अगर यहां बताए गए सामान्य उपचार से कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण कम नहीं होते हैं, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। जिसमें नीचे बताई गई विधियां शामिल हो सकती हैं:

सर्जरी से कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज

  • ओपन कार्पल टनल रिलीज : इस प्रक्रिया में सर्जन कलाई या हाथ पर चीरा लगाते हैं और कार्पल टनल को बड़ा करने के लिए और मीडियन नर्व पर दबाव को कम करने के लिए लिगामेंट को काटते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रभावित जगह पर टांके लगाए जाते हैं (3)। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सर्जन लोकल एनेस्थीशिया का इस्तेमाल कर सकते हैं ।
  • एंडोस्कोपिक सर्जरी : यह सर्जरी ओपन कार्पल टनल रिलीज सर्जरी की तुलना में जटिल हो सकती है। इस प्रक्रिया में सर्जन कलाई या हाथ पर आधे इंच तक एक या दो चीरा लगा सकते हैं। उसके बाद एक ट्यूब के माध्यम से इसमें छोटा कैमरा (एंडोस्कोप) डालते हैं। इसकी मदद से तंत्रिका, लिगामेंट और टेंडन को एक मॉनीटर पर देखा जाता है और फिर कार्पल लिगामेंट की सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी के बाद कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षणों से राहत मिल सकती है। वहीं कार्पल टनल सर्जरी के जख्म को ठीक होने में एक महीना लग सकता है (2)।

अंत तक पढ़ें

अब आखिरी में कार्पल टनल सिंड्रोम से बचने के उपाय जानते हैं।

कार्पल टनल सिंड्रोम से बचने के उपाय – Prevention Tips for Carpal Tunnel Syndrome in Hindi

कार्पल टनल सिंड्रोम से बचने के लिए शारीरिक तौर पर की जाने वाले कई दैनिक कार्यों में बदलाव लाना लाभकारी हो सकता है। इसके लिए यहां बताए गए उपाय किए जा सकते हैं (1)। हालांकि, ध्यान रखें कि ये उपाय इसके लक्षणों और जोखिम को कम कर सकते हैं। यह इसका उपचार नहीं हो सकते हैं।

  • सोते समय कलाई का इस्तेमाल तकीये की तरह न करें।
  • प्रभावित क्षेत्र पर कोल्ड और वॉर्म कंप्रेस का इस्तेमाल करने से इससे बचाव किया जा सकता है।
  • काम करते समय कलाई पर अधिक दबाव डालने से बचें।
  • कीबोर्ड पर टाइप करते समय ध्यान रखें कि कीबोर्ड पर कलाई ऊपर की ओर मुड़ी हुई न हो।
  • कंप्यूटर पर कार्य करते समय स्प्लिट कीबोर्ड, कीबोर्ड ट्रे, टाइपिंग पैड और कलाई के बैंड का उपयोग कर सकते हैं।
  • अगर टाइपिंग के दौरान झुनझुनी या दर्द महसूस हो, तो तुरंत इस तरह के काम से ब्रेक लें।
  • हाथों और कलाई के इस्तेमाल वाले कार्य करते समय थोड़ी-थोड़ी देर पर ब्रेक लें।
  • खेलते या अन्य गतिविधियां करते समय ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल ज्यादा न करें जिनमें वाइब्रेशन (कंपन) हो।
  • उन उपकरणों का उपयोग करें जो कलाई की चोट के जोखिम को कम करने में मदद करते हो।
  • कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षणों को बढ़ाने व इस तरह की स्थितियों का कारण बनने वाले शारीरिक गतिविधियों से बचने की कोशिश करें या उन्हें कम करने को कोशिश करें। वहीं, कलाई का अधिक इस्तेमाल होने वाले या कलाई पर जोर देने वाले खेल खेलने से बचें।

तो ये थे कार्पल टनल सिंड्रोम से जुड़ी कुछ जरूरी जानकरियां। अगर समय रहते इसके लक्षणों की पहचान की जाए और उचित उपचार किया जाए, तो इसकी समस्या से बचाव हो सकता है। हालांकि, यह एक ऐसी परेशानी है, जो उपचार के बाद दोबारा भी हो सकती है। ऐसे में यहां बताए गए टिप्स से इससे बचाव किया जा सकता है। उम्मीद करते हैं कि इस लेख में कार्पल टनल सिंड्रोम से जुड़ी जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। आगे हम इस विषय में पूछे गए कुछ जरूरी सवालों के जवाब भी साझा कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे कार्पल टनल सिंड्रोम है?

लेख में बताए गए कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षणों से आप इसका पता लगा सकते हैं। अगर यहां बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण आपको महसूस हो, तो इसकी पुष्टि करने के लिए आप डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।

अगर कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज न किया जाए तो क्या होगा?

जैसा कि इसकी स्थितियों और लक्षणों से पता चलता है कि यह हाथ के कार्यों को प्रभावित कर सकता है। अगर सही समय पर इसका उपचार नहीं किया जाएगा, तो इसके लक्षण अधिक गंभीर हो सकते है। जिसके कारण दैनिक कार्यों को करने में कई तरह की परेशानी हो सकती है।

कार्पल टनल की समस्या कब तक बनी रह सकती है?

जैसा कि लेख में बताया गया है कि गर्भावस्था, गठिया व जन्मजात कारकों के साथ ही कलाई में चोट लगना भी कार्पल टनल का कारण हो सकते हैं। इस आधार पर अगर देखा जाए, तो जब तक इसके कारकों का उचित उपचार न किया जाए, तब तक इसकी समस्या बनी रह सकती है। इतना ही नहीं, उपचार न करने की स्थिति में इसकी समस्या जीवन भर के लिए भी हो सकती है। वहीं, अगर इसकी सर्जरी की जाए, तो हाथ को ठीक होने में लगभग 4 हफ्ते लग सकते हैं (3)।

क्या कार्पल टनल सिंड्रोम के इलाज के लिए बर्फ फायदेमंद हो सकता है?

कोल्ड कंप्रेस कार्पल टनल सिंड्रोम के इलाज में उपयोगी हो सकता है (1)। हालांकि कोल्ड कंप्रेस का असर कार्पल टनल सिंड्रोम की गंभीरता पर भी निर्भर कर सकता है।

Sources

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  1. Carpal tunnel syndrome
    https://medlineplus.gov/ency/article/000433.htm
  2. Carpal Tunnel Syndrome Fact Sheet
    https://www.ninds.nih.gov/Disorders/Patient-Caregiver-Education/Fact-Sheets/Carpal-Tunnel-Syndrome-Fact-Sheet
  3. Carpal tunnel syndrome
    https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/ConditionsAndTreatments/carpal-tunnel-syndrome
  4. Carpal Tunnel Syndrome
    https://medlineplus.gov/carpaltunnelsyndrome.html
  5. Primary amyloidosis
    https://medlineplus.gov/ency/article/000533.htm
  6. Electromyography (EMG) and Nerve Conduction Studies
    https://medlineplus.gov/lab-tests/electromyography-emg-and-nerve-conduction-studies/
  7. Nerve conduction velocity
    https://medlineplus.gov/ency/article/003927.htm
  8. How to make a splint
    https://medlineplus.gov/ency/article/000040.htm
  9. Acupuncture in treatment of carpal tunnel syndrome: A randomized controlled trial study
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3523426/
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आवृति गौतम ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। इन्होंने अपने करियर की शुरूआत डिजिटल मीडिया से ही की थी। इस क्षेत्र में इन्हें काम करते हुए दो वर्ष से ज्यादा हो गए हैं। आवृति को स्वास्थ्य विषयों पर लिखना और अलग-अलग विषयों पर विडियो बनाना खासा पसंद है। साथ ही इन्हें तरह-तरह की किताबें पढ़ने का, नई-नई जगहों पर घूमने का और गाने सुनने का भी शौक है।

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