चंदन के 8 बेहतरीन फायदे और नुकसान – Sandalwood Benefits and Side Effects in Hindi

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भारत में चंदन को पवित्र माना जाता है। आपने इसका इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान चंदन तिलक के रूप में जरूर देखा होगा। वहीं, इसके गुणों की वजह से त्वचा के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। हालांकि, कई लोग होंगे जिन्हें त्वचा के अलावा चंदन के फायदे शायद ज्यादा पता न हों। ऐसे में, स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम स्वास्थ्य के लिए चंदन के फायदे बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही चंदन के साइड इफेक्ट क्या हो सकते हैं, इस बारे में भी जानकारी दी जाएगी। चंदन के फायदे और इससे जुड़ी अन्य जानकारी के लिए जुड़े रहिये इस लेख से।

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सबसे पहले जानते हैं कि चंदन क्या होता है?

चंदन क्‍या है – What is Sandalwood in Hindi

अन्य पेड़ों की तरह ही चंदन का भी पेड़ होता है। यह सात्विक पेड़ के नाम से भी जाना जाता है। चंदन का वैज्ञानिक नाम संतलम एल्बम (Santalum album) है। यह छोटे से मध्यम आकार का वृक्ष है और यह भारत के विभिन्न जगहों पर मिलता है (1)। इसकी लकड़ी का उपयोग मूर्ति, साज-सज्जा की चीजों, हवन करने और अगरबत्ती बनाने के साथ-साथ अन्य कामों में भी उपयोग किया जाता है। वहीं, इसके तेल का उपयोग परफ्यूम और अरोमा थेरेपी के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है (2)।

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अब जानते हैं चंदन के प्रकारों के बारे में।

चंदन के प्रकार – Types of Sandalwood In Hindi

चंदन के कई प्रकार हैं, जिनमें से कुछ के बारे में हम नीचे जानकारी दे रहे हैं।

भारतीय चंदनयह चंदन का पेड़ 13-20 फीट की ऊंचाई तक बढ़ सकता है और इसमें विभिन्न औषधीय गुण होते हैं। इस चंदन का एसेंशियल ऑयल ऊंची कीमतों पर बिकता है। इसके अलावा, यह भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है और यह 100 साल तक जीवित रह सकता है। हालांकि, यह पेड़ संरक्षण के तहत आता है।

लाल चंदन इसे रक्त चंदन के नाम से भी जाना जाता है। यह दक्षिणी भारत के पूर्वी घाटों में पाया जा सकता है। यह पेड़ अपनी लकड़ी के लिए काफी प्रसिद्ध है, जिसमें एक आकर्षक लाल रंग है। हालांकि, इस पेड़ की सुंदर दिखने वाली लकड़ी सुगंधित नहीं है। यह अपेक्षाकृत छोटा है और 20-25 फीट तक बढ़ सकता है। लाल चंदन में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।

स्वेत चंदनयह एक सदाबहार वृक्ष है, जिसमें औषधीय लाभों की अधिकता है। स्वेत चंदन और पीत चंदन एक ही पेड़ से निकलते हैं। स्वेत चंदन के पेड़ से एसेंशियल ऑयल, साबुन, परफ्यूम व कॉस्मेटिक्स प्रोडक्ट बनाए जाते हैं।

मलयागिरी चंदन यह भी एक सदाबहार पेड़ है, जो 20-30 फीट तक ऊंचा हो सकता है। यह मैसूर, कूर्ग, हैदराबाद, नीलगिरि और दक्षिण भारत के पश्चिमी घाटों में पाया जा सकता है। हालांकि, चंदन की कई किस्में हैं, मलयगिरि चंदन या श्रीखंड उन सभी में सबसे मीठा और असली है। इन पेड़ों की लकड़ी का उपयोग सुंदर बक्से, चौकी और पायदान बनाने में किया जाता है।

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आगे जानते हैं चंदन के औषधीय गुणों के बारे में।

चंदन के औषधीय गुण

चंदन औषधीय गुणों का खजाना है, इसमें एंटीपायरेटिक (बुखार कम करने का गुण), एंटीसेप्टिक, एंटीस्केबेटिक (antiscabetic) और मूत्रवर्धक (diuretic) गुण पाए जाते हैं। यह ब्रोंकाइटिस, सिस्टिटिस (मूत्राशय में सूजन की समस्या), डिसुरिया (पेशाब में जलन की समस्या) और मूत्र पथ के रोगों (urinary tract diseases) पर भी प्रभावी हो सकता है (3)। वहीं, लाल चंदन में एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और दर्द निवारक गुण मौजूद होते हैं (4)। लेख में आगे चंदन के ऐसे कई गुणों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

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अब बारी आती है चंदन के फायदे के बारे में विस्तार से जानने की।

चंदन के फायदे – Benefits of Sandalwood in Hindi

यहां हम सेहत के लिए चंदन के फायदे बताने जा रहे हैं। जानिए चंदन का इस्तेमाल किस प्रकार स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। साथ ही पाठक इस बात का भी ध्यान रखें कि चंदन किसी भी तरीके से लेख में शामिल बीमारियों को डॉक्टरी इलाज नहीं है। यह बताई गईं शारीरिक समस्याओं से बचाव और उनके लक्षणों को कुछ हद तक कम करने में मददगार हो सकता है। समस्या अगर गंभीर है, तो डॉक्टरी उपचार जरूर करवाएं।

1. एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण

जैसे कि हमने लेख की शुरुआत में जानकारी दी कि चंदन कई प्रकार के होते हैं। उनमें से एक है लाल चंदन, जिसमें एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह बात एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोलिक यौगिक चंदन के एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइन्फ्लेमेटरी प्रभावों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके अलावा, आयुर्वेद में सूजन और सिरदर्द जैसी समस्याओं के लिए चंदन का लेप लगाने का जिक्र मिलता है (4)। ऐसे में हल्की-फुल्की सूजन से संबंधित समस्याओं के लिए चंदन का उपयोग लाभकारी हो सकता है (5)।

2. एंटीऑक्सीडेंट गुण

फ्री रेडिकल्स की वजह से स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से हृदय रोग, कैंसर और अन्य कई तरह की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को मुक्त कणों से दूर रख सकता है और ऑक्सीकरण से होने वाले नुकसान से बचाव या उसे कम करने में सहायक हो सकता है (6)। अगर बात करें चंदन की, तो चंदन में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं और यह बात एक स्टडी में सामने आयी है। इस शोध में चंदन का एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव डीपीपीएच (DPPH radical) नामक रेडिकल पर पाया गया है। इसके साथ ही फ्रैप ऐसे (FRAP assay – ferric reducing ability of plasma – एंटीऑक्सीडेंट परख का टेस्ट) में भी चंदन की एंटीऑक्सीडेंट क्षमता साबित हुई है (7)।

3. एंटीसेप्टिक

चंदन का उपयोग हल्की-फुल्की चोट या घाव में भी किया जा सकता है। दरअसल, चंदन में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो चोट के लिए लाभकारी हो सकता है (3)। हालांकि, इस बारे में ठोस वैज्ञानिक शोध की कमी है। ऐसे में इसका प्रभाव चोट या घाव की स्थिति पर भी निर्भर करता है। अगर जख्म ज्यादा पुराना या गहरा है, तो डॉक्टरी सलाह जरूरी है।

4. कैंसर

इसमें कोई शक नहीं है कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है। ऐसे में इससे बचाव के लिए चंदन उपयोगी हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, चंदन के तेल में एंटी कैंसर गुण पाए जाते हैं। इसके साथ ही चंदन के पेड़ से निकाले जाने वाले यौगिक अल्फा सैंटालोल (α-santalol) में एंटीकैंसर और कीमोप्रिवेंटिव गुण की बात सामने आई है (8)। इसके अलावा, यह नॉन टॉक्सिक भी है, जिस कारण इसका उपयोग सुरक्षित हो सकता है (5)। साथ ही ध्यान रखें कि यह कैंसर से बचाव में कुछ हद तक मददगार हो सकता है, लेकिन यह किसी भी तरीके से कैंसर का इलाज नहीं है। अगर कोई कैंसर से पीड़ित है, तो डॉक्टरी उपचार करवाना अतिआवश्यक है।

जानकारी और है

5. स्किन एलर्जी के लिए चंदन के फायदे

देखा जाए, तो चंदन त्वचा संबंधी एलर्जी के लिए भी लाभदायक हो सकता है। शोध में जिक्र मिलता है कि यह सोरायसिस (psoriasis – एक प्रकार की त्वचा संबंधी समस्या) और एटॉपिक डर्मेटाइटिस (atopic dermatitis – जिसमें लाल खुजलीदार रैशेज हो जाते हैं) के लिए भी लाभकारी हो सकता है। इसके अल्फा सैंटालोल (alpha-santalol) यौगिक में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं (9)। हालांकि, इस बारे में अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन त्वचा को आराम देने के लिए चंदन का उपयोग किया जा सकता है।

6. पेट के लिए चंदन

चंदन का उपयोग पेट के लिए भी लाभकारी हो सकता है। कई लोगों को यह जानकारी हो सकती है, लेकिन यह बात एक स्टडी में सामने आई है। चंदन के पेड़ में एंटी-अल्सर गुण होते हैं। यह इसमें मौजूद हाइड्रोअल्कोहलिक अर्क (Hydroalcoholic Extract) के कारण हो सकता है। इसके साथ ही यह युनानी दवाइयों में गैस्ट्रिक अल्सर के लिए उपयोग किया जाता है (10)  (11)।

7. बुखार के लिए चंदन

अगर किसी को हल्का-फुल्का बुखार है, तो इसमें भी चंदन के फायदे देखे जा सकते हैं। दरअसल, चन्दन में (antipyretic) एंटीपायरेटिक गुण मौजूद होता है। एंटीपायरेटिक, बुखार को कम करने का गुण होता है। ऐसे में चंदन के इस गुण के कारण बुखार को कम करने में मदद मिल सकती है (3) (12)।

8. एक्ने के लिए चन्दन

त्वचा को निखारने के कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में चंदन का उपयोग किया जाता रहा है (13)। अगर बात करें मुंहासों की, तो इसमें सूजन की समस्या भी होती है (14)। ऐसे में एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण वाले चंदन का उपयोग न सिर्फ ठंडक प्रदान कर सकता है बल्कि इससे सूजन भी कम हो सकती है (4)। इसके साथ ही इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण भी हैं, जो कील-मुंहासों पर असरदार हो सकता है (15)। हालांकि, इस बारे में वैज्ञानिक शोध की कमी है, पर राहत पाने के लिए घरेलू उपाय के तौर पर इसका उपयोग किया जा सकता है।

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अब जानते हैं कि चंदन का उपयोग कैसे-कैसे किया जा सकता है।

चंदन का उपयोग – How to Use Sandalwood in Hindi

नीचे जानिए विभिन्न तरीकों से चंदन का उपयोग कैसे किया जा सकता है।

  • चमकती त्वचा के लिए चंदन का फेसपैक लगा सकते हैं।
  • घाव या चोट पर चंदन का लेप लगा सकते हैं।
  • चंदन के तेल से एरोमाथेरेपी ले सकते हैं।
  • तन की दुर्गंध हटाने के लिए चंदन का पेस्ट या चंदन के तेल को नहाने के पानी में डालकर नहा सकते हैं।
  • मार्केट में कई प्रकार के सैंडलवुड सोप भी उपलब्ध हैं, तो चंदन युक्त साबुन का उपयोग भी कर सकते हैं।
  • चंदन के चूर्ण का सेवन दूध के साथ किया जा सकता है। हालांकि, ध्यान रहे इस बारे में डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी है।

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अब जानते हैं कि घर में चंदन का तेल कैसे बनाया जा सकता है।

चंदन का तेल बनाने की विधि

नीचे पढ़ें घर में आसानी से चंदन का तेल बनाने की विधि।

सामग्री:

  • आवश्यकतानुसार चंदन पाउडर (बाजार या ऑनलाइन उपलब्ध)
  • आधे से एक कप या आवश्यकतानुसार वर्जिन ऑलिव ऑयल या सामान्य ऑलिव ऑयल
  • छोटा ग्लास जार या बोतल

बनाने की विधि:

  • एक कप ऑलिव ऑयल में आवश्यकतानुसार चंदन पाउडर डालें।
  • अब इसे ग्लास जार में डालकर अच्छी तरह से हिलाएं ताकि पाउडर अच्छी तरह से घुल जाए।
  • फिर इसे एक हफ्ते किसी साफ और सूखी जगह पर रखें।
  • इसे बीच-बीच में हिलाते रहें।
  • एक हफ्ते बाद तेल के मिश्रण को अच्छी तरह से छान लें।
  • अब इसे दूसरे साफ ग्लास जार में निकालकर किसी ठंडी जगह पर रख दें।
  • फिर जब मन तब उपयोग करें।

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अब जानते हैं चंदन को लम्बे समय तक सुरक्षित कैसे रखा जा सकता है?

चंदन को लम्बे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?

नीचे जानिए चंदन को लम्बे समय तक सुरक्षित किस प्रकार रखा जा सकता है –

  • चंदन के पेस्ट को एयर टाइट कंटेनर में किसी ठंडी जगह पर एक से दो दिन तक रख सकते हैं।
  • चंदन के पाउडर को एयर टाइट कंटेनर में किसी साफ सूखी जगह पर रख सकते हैं।
  • चंदन के तेल को भी किसी एयर टाइट कंटेनर में सालों तक रखा जा सकता है।

नोट : आजकल मार्केट में चंदन का पाउडर या तेल एक्सपायरी डेट के साथ आते हैं। ऐसे में एक्सपायरी डेट देखकर इन्हें खरीद सकते हैं।

नुकसान भी हैं

लेख में आगे जानिए चंदन के नुकसान।

चंदन के नुकसान – Side Effects of Sandalwood in Hindi

चंदन के नुकसान की बात की जाए, तो इस बारे में कोई ठोस वैज्ञानिक शोध मौजूद नहीं है। सावधानी के तौर पर हम नीचे कुछ गिने-चुने नुकसान के बारे में जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं।

  • अगर किसी को एलर्जी की समस्या है, तो हो सकता है कि चंदन से खुजली, जलन या रैशेज हों।
  • मुंह के द्वारा लेने से यह पेट संबंधी कई समस्याओं का कारण बन सकता है। हालांकि, इस तथ्य से जुड़ा कोई वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है।
  • गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं चंदन के सेवन से बचें।

ये थे स्वास्थ्य और त्वचा के लिए चंदन के फायदे। उम्मीद करते हैं कि इस लेख में बताए गए चंदन के फायदे जानने के बाद कई लोग इसका उपयोग करना चाहेंगे। इसके उपयोग के साथ-साथ ध्यान रखें कि जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से चंदन के नुकसान भी हो सकते हैं। ऐसे में सीमित मात्रा में चंदन का उपयोग कर चंदन के फायदे लिए जा सकते हैं। वहीं, चंदन को किसी गंभीर बीमारी का इलाज न समझें। हमारी सलाह यही है कि अगर किसी को कोई गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो वो डॉक्टरी चिकित्सा को प्राथमिकता दें। ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए जुड़े रहें स्टाइलक्रेज के साथ।

15 संदर्भ (Sources) :

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Arpita Biswas

अर्पिता ने पटना विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक किया है। इन्होंने 2014 से अपने लेखन करियर की शुरुआत की थी। इनके अभी तक 1000 से भी ज्यादा आर्टिकल पब्लिश हो चुके हैं। अर्पिता को विभिन्न विषयों पर लिखना पसंद है, लेकिन उनकी विशेष रूचि हेल्थ और घरेलू उपचारों पर लिखना है। उन्हें अपने काम के साथ एक्सपेरिमेंट करना और मल्टी-टास्किंग काम करना पसंद है। इन्हें लेखन के अलावा डांसिंग का भी शौक है। इन्हें खाली समय में मूवी व कार्टून देखना और गाने सुनना पसंद है।

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