चिकनगुनिया के लक्षण, इलाज और घरेलू उपचार – Chikungunya Symptoms and Home Remedies in Hindi

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संक्रामक रोग का इलाज बिना समय व्यर्थ किए करना चाहिए, क्योंकि ऐसा न करने पर समस्या के बढ़ने या फैलने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसी ही एक संक्रामक समस्या है चिकनगुनिया। इसका प्रकोप ऐसा है कि इसके नाम भर से ही लोग कांप उठते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि लोग चिकनगुनिया के बारे में कम ही जानते हैं। हालांकि, चिकगुनिया जानलेवा नहीं है, लेकिन अगर समय रहते इलाज न करवाया जाए, तो मरीज को काफी हानि हो सकती है। स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल में जाने चिकनगुनिया क्या है और चिकनगुनिया के लक्षण किस तरह के हो सकते हैं। साथ ही आर्टिकल में चिकनगुनिया के घरेलू उपचार भी बताए गए हैं।

नीचे विस्तार से पढ़ें

आइए, सबसे पहले जानते हैं कि चिकनगुनिया होता क्या है।

चिकनगुनिया क्या है?

चिकनगुनिया एक संक्रामक रोग है, जो मादा एडिस एजिप्टी व एडीस एल्बोपिक्टस मच्छर के काटने से होता है। इस संक्रामक रोग की चपेट में न सिर्फ भारत, बल्कि अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के भी कई देश हैं। मूल रूप से चिकनगुनिया अफ्रीकन शब्द है, जिसका अर्थ होता है हड्डी टूटने जैसा दर्द होना। हालांकि, चिकनगुनिया से निपटने के लिए अभी तक कोई इलाज नहीं है, लेकिन इससे बचना जरूर संभव है। इसकी जानकारी आपको इस आर्टिकल के जरिए हो जाएगी।
आगे है और जानकारी

इस आर्टिकल के अगले हिस्से में चिकनगुनिया के कारणों के बारे में जानेंगे।

चिकनगुनिया के कारण – Causes of Chikungunya in Hindi

चिकनगुनिया के कारणों का पता होने पर इसे रोकना आसान हो जाता है। इसके कुछ कारण इस तरह से है:

  • चिकनगुनिया मादा एडिस एजिप्टी व एडीस एल्बोपिक्टस मच्छर के काटने से होता है (1)। ये दोनों मच्छर डेंगू भी फैलाते हैं।
  • यह मच्छर दिन में काटता है, लेकिन मुख्य रूप से या तो सुबह के टाइम काटता है या फिर दोपहर के समय।
  • यह मच्छर घर के अंदर या बाहर कहीं भी काट सकता है।
  • चिकनगुनिया फैलाने वाला यह मच्छर जब किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है, तो उसकी लार में यह वायरस आ जाता है। इसके बाद वह जिसे काटता है, उसे भी चिकनगुनिया हो जाता है।
  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अगले सात दिन तक यह संक्रमण फैलाने में सक्षम होता है।

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आइए, अब बात करें चिकन गुनिया के लक्षण की, जिनसे इस रोग की पुष्टि हो सकती है।

चिकनगुनिया के लक्षण – Symptoms of Chikungunya in Hindi

यहां हम चिकनगुनिया के लक्षण (chikungunya ke lakshan) बता रहे हैं। जरूरी नहीं कि ये सभी लक्षण हर किसी को महसूस हों। हर केस में ये अलग-अलग हो सकते हैं (2)।

  • एडिस मच्छर के काटने के दो-तीन दिन बाद ही चिकनगुनिया के लक्षण नजर आने लगते हैं।
  • इसमें तेज बुखार और जोड़ों में दर्द हो सकता है। मुख्य रूप से हाथ व पैरों की अंगुलियों में ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है। हालांकि, एक हफ्ते बाद मरीज को आराम आना शुरू हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में जोड़ों का दर्द कई महीनों तक रह सकता है।
  • सिर में दर्द और मांसपेशियों में जकड़न महसूस हो सकती है।
  • आंखों व दिल में परेशानी महसूस हो सकती है।
  • मरीज को न्यूरोलॉजिकल समस्या भी हो सकती है।
  • जी-मिचलना जैसा महसूस होगा और भूख लगनी कम हो जाएगी।
  • इस बीमारी में शरीर पर जगह-जगह लाल रंग के दाने उभर आते हैं।
  • यह रोग एक हफ्ते में ही मरीज को इतना कमजोर कर देता है कि रोगी स्वयं से कुछ करने लायक नहीं रह जाता।
  • कुछ मरीज तेज रोशनी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं।

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इस लेख में आगे हम चिकनगुनिया के घरेलू उपचार के बारे में जानेंगे।

चिकनगुनिया के घरेलू इलाज – Home Remedies for Chikungunya in Hindi

यहां हम स्पष्ट कर दें कि ये घरेलू उपचार पूरी तरह से चिकनगुनिया को ठीक नहीं करते। ये सिर्फ चिकनगुनिया से बचाने या फिर इसके लक्षणों को कुछ हद तक कम करने में मददगार हो सकते हैं। इसलिए, गंभीर अवस्था में बिना देरी के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

1. तुलसी की पत्तियां

सामग्री :

  • तुलसी की 10 पत्तियां
  • आधा लीटर पानी

बनाने की विधि :

  • तुलसी की पत्तियों को पानी में डालकर तब तक उबालें, जब तक कि पानी आधा न रह जाए।
  • इसके बाद पानी को छानकर दिनभर में थोड़ा-थोड़ा पिएं।

कब तक प्रयोग करें :

  • इस तुलसी के पानी का कुछ दिन तक ही सेवन करें।

कैसे है लाभदायक :

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, चिकनगुनिया बुखार में तुलसी के पत्ते फायदेमंद साबित हो सकते हैं । इस शोध में कई आयुर्वेदिक पौधों के अर्क के प्रभाव को एडीज एजिप्टी मच्छर के लार्वा के खिलाफ के लिए जांच किया गया, जिनमें तुलसी के पत्ते का अर्क भी शामिल है। इस शोध से पता चला कि तुलसी का अर्क एडीज एजिप्टी मच्छर के लार्वा और क्यूलेक्स क्विन्कफासिक्टस (C. quinquefasciatus) के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकता है (3)। वहीं, तुलसी के इस्तेमाल से बनाए गए एसेंशियल ऑयल को त्वचा पर लगाने से यह एडीज एजिप्टी मच्छर के खिलाफ मॉस्किटो रेपेलेंट का काम कर सकता है। इससे डेंगू, चिकनगुनिया और येलो फीवर की समस्या से बचा सकता है (4)।

2. लहसुन

सामग्री :

  • 10-12 लहसुन की कलियां
  • आधा कप पानी

बनाने की विधि :

  • लहसुन को छिलने के बाद छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • अब पेस्ट बनाने के लिए पानी के साथ ग्राइंड कर लें।
  • फिर यह पेस्ट जोड़ों पर दर्द वाली जगह पर लगाएं और कुछ घंटों के लिए छोड़ दें।

कब तक प्रयोग करें :

  • इसे दिन में दो बार प्रयोग करें।

कैसे है लाभदायक :

चिकनगुनिया के कारण जोड़ों में दर्द होता है, जो गठिया में होने वाले दर्द जैसा होता है। इस दर्द से राहत पाने में लहसुन का इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रभावित जगह पर जितना अधिक लहसुन का पेस्ट लगाया जाए, उतना अच्छा साबित हो सकता है। यह न सिर्फ दर्द से राहत दिला सकता है, बल्कि सूजन को कम करके रक्त संचार को बेहतर करने में भी सहायता कर सकता है (5)। इसलिए, लहसुन को चिकनगुनिया का आयुर्वेदिक इलाज माना जा सकता है। अभी यह शोध का विषय है कि लहसुन किस गुण के कारण जोड़ों में दर्द से राहत दिलाता है।

3. गिलोय

सामग्री :

  • गिलोय के कैप्सूल

प्रयोग की विधि :

  • प्रतिदिन दो कैप्सूल ले सकते हैं। इसे भोजन के बाद लेना ही फायदेमंद रहेगा। दिनभर में एक ग्राम डोज पर्याप्त है।

कब तक प्रयोग करें :

  • इन कैप्सूल का कुछ हफ्तों तक लगातार सेवन कर सकते हैं।

कैसे है लाभदायक :

चिकनगुनिया बुखार का इलाज गिलोय से किया जा सकता है। इसका पौधा विभिन्न बुखारों व बीमारियों में कारगर तरीके से काम कर सकता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-अर्थराइटिस और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण पाए जाते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के साथ ही चिकनगुनिया के कारण उत्पन्न सूजन और गठिया की समस्या से राहत दिला सकते हैं। साथ ही इसमें एंटी-माइक्रोबियल गुण भी होता है, जो हर तरह के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान कर सकता है (6)।

नोट : पांच साल से कम उम्र के बच्चे को गिलोय नहीं देना चाहिए। वहीं, पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे को गिलोय की डोज 250 एमजी प्रतिदिन ही दी जा सकती है। वयस्क प्रतिदिन 3 ग्राम तक इसका सेवन कर सकते हैं।

4. शहद व नींबू

सामग्री :

  • एक चम्मच शहद
  • आधा नींबू
  • एक गिलास पानी

प्रयोग की विधि :

  • पहले पानी को हल्का गर्म कर लें।
  • अब इसमें नींबू और शहद को मिलाकर सेवन करें।

कब तक प्रयोग करें :

  • इसे दिन में एक या दो बार प्रयोग किया जा सकता है।

कैसे है लाभदायक :

चिकनगुनिया का इलाज करने के लिए शहद और नींबू का प्रयोग किया जा सकता है। दरअसल, शहद में एंटी-बैक्टीरियल व एंटी-माइक्रोबियल गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो संक्रमण से संबंधी बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकते हैं (7)। वहीं, नींबू में विटामिन-सी की समृद्ध मात्रा होती है, जो एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम कर सकता है। प्रतिरोधक क्षमता के बेहतर होने से बीमार होने से बचा जा सकता है या फिर किसी भी तरह के रोग से उबरने में मदद मिल सकती है (8)। जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि चिकनगुनिया एक संक्रामक समस्या है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि शहद और नींबू का इस्तेमाल कर इसके लक्षण को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

5. पपीते के पत्ते

सामग्री :

  • सात-आठ पपीते के ताजा पत्ते
  • साफ पानी

प्रयोग की विधि :

  • पत्तों को अच्छे से धो लें और बीच में से मोटे डंठल को निकाल लें।
  • अब पत्तों को बारीक काटकर पानी के साथ ग्राइंड करके पतला पेस्ट बना लें।
  • इसके बाद पेस्ट को छान लें और इस जूस के दो चम्मच हर तीन-तीन घंटे में पिएं।

कब तक प्रयोग करें :

  • करीब दो-तीन दिन तक लगातार सेवन करें। अगर इसके बाद भी बीमारी ठीक नहीं होती है, तो इसे एक हफ्ते तक जारी रख सकते हैं।

कैसे है लाभदायक :

चिगनगुनिया बुखार व डेंगू जैसी बीमारी में प्लेटलेट्स तेजी से कम हो सकते हैं। इसे ठीक करने के लिए पपीते के पत्तों का प्रयोग किया जा सकता है। साथ ही ये संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर को ऊर्जा प्रदान कर सकता है। इन पत्तों में लार्विसाइड गुण भी होता है, जो चिगनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों के लार्वा से मुकाबला कर सकता है (9) (10)। ऐसे में चिकनगुनिया का घरेलू उपचार करने के लिए पपीते के पत्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है।

6. नारियल पानी

सामग्री :

  • नारियल पानी

प्रयोग की विधि :

  • रोज 3-4 गिलास नारियल पानी पी सकते हैं।

कब तक प्रयोग करें :

  • इसका कुछ दिनों तक लगातार सेवन करें।

कैसे है लाभदायक :

एक वैज्ञानिक अध्ययन में चिकनगुनिया के घरेलू उपचार में नारियल पानी कारगर बताया गया है। दरअसल, चिकनगुनिया वायरस के कारण लीवर इन्फेक्शन का जोखिम बना रहता है (11)। ऐसे में नारियल पानी के सेवन से लीवर डिटॉक्सीफाई हो सकता है। इसके लिए इसमें पाए जाने वाले हेपेटोप्रोटेक्टिव और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव मददगार हो सकते हैं, जिससे मरीज को इस बीमारी से उबरने में आसानी हो सकती है (12)। साथ ही इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं, जो जोड़ों के दर्द को कम करने का काम कर सकता है, लेकिन इस संबंध में अभी और शोध की आवश्यकता है।

7. हल्दी

सामग्री :

  • आधा चम्मच हल्दी पाउडर
  • एक गिलास गर्म दूध

प्रयोग की विधि :

  • गर्म दूध में हल्दी को अच्छी तरह से मिक्स कर लें।
  • इस दूध को गर्मा-गर्म पिएं।

कब तक प्रयोग करें :

  • कुछ दिनों तक रात को सोने से पहले व सुबह इसका सेवन करें।

कैसे है लाभदायक :

आयुर्वेद में हल्दी के कई लाभ बताए गए हैं, जिनमें चिकनगुनिया के लक्षण से छुटकारा दिलाना भी शामिल है। दरअसल, हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो हर्बल और मेडिसिनल प्रोपर्टी का काम कर सकता है। वहीं, करक्यूमिन में कई वायरस के खिलाफ एंटीवायरल गुणों भी पाए जाते हैं, जिनमें डेंगू वायरस, हेपेटाइटिस सी वायरस, जीका और चिकनगुनिया वायरस भी शामिल है। इसलिए, हल्दी को चिकनगुनिया के उपचार में उपयोग किया जा सकता है (13)।

8. लाल मिर्च

सामग्री :

  • तीन चम्मच लाल मिर्च
  • एक कप जैतून का तेल या फिर बादाम का तेल
  • आधा कप मोम

प्रयोग की विधि :

  • लाल मिर्च को पानी में घोल लें और मध्यम आंच पर पांच-दस मिनट तक उबालें।
  • इसी दौरान, इसमें मोम को डाल दें और तब तक मिक्स करें, जब तक कि मोम पूरी तरह पिघलकर उसमें घुल न जाए।
  • अब इस मिश्रण को स्टोव से उतार कर करीब 10 मिनट के लिए फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें।
  • इसके बाद मिश्रण को फिर से घोलें, ताकि सभी सामग्रियां अच्छे से मिक्स हो जाएं।
  • अब इसे फिर से 10 मिनट के लिए ठंडा होने के लिए रखें और बाद में जोड़ों में जहां दर्द हो रहा है, इसे वहां लगाएं।
  • आप इस मिश्रण को एयरटाइट डिब्बे में बंद करके एक-दो हफ्ते के लिए स्टोर करके रख सकते हैं।

कब तक प्रयोग करें :

  • जब भी जरूरत महसूस हो, इसका प्रयोग कर सकते हैं।

कैसे है लाभदायक :

वैज्ञानिकों ने शोध के जरिए पुष्टि की है कि लाल मिर्च में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो किसी भी तरह की सूजन को कम कर सकता है (14)। इसलिए, चिकनगुनिया में होने वाले दर्द को कम करने के लिए घरेलू उपचार के तौर पर इसका प्रयोग फायदेमंद हो सकता है। फिलहाल, इस संबंध में और शोध की जरूरत है।

नोट : चिकनगुनिया का इलाज के लिए इस पेस्ट को बनाते समय दस्ताने जरूर पहन लें। साथ ही यह मिश्रण बनाते समय चेहरे व खासकर आंखों को न छुएं। इस पेस्ट को लगाने के बाद थोड़ी जलन महसूस हो सकती है, खासकर उन लोगों को, जिनकी त्वचा संवेदनशील होती है।

9. अंगूर

सामग्री :

  • बीज रहित अंगूर
  • एक कप गाय का दूध

प्रयोग की विधि :

  • अंगुर खाने के साथ-साथ दूध का सेवन करें।

कब तक प्रयोग करें :

  • करीब एक-दो दिन तक इसका सेवन किया जा सकता है।

कैसे है लाभदायक :

एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, अंगूर खाने के फायदे चिकनगुनिया के कुछ लक्षण से निजात दिलाने के लिए हो सकता है। दरअसल, इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट व एंटीवायरल जैसे कई गुण मौजूद होते हैं, जो संक्रमण से छुटकारा दिलाकर राहत पहुंचाने का काम कर सकते हैं (15)। इससे चिकनगुनिया के उपचार में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इस संबंध में और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है।

नोट : अगर किसी को डेयरी प्रोडक्ट से एलर्जी है, तो वे चिकनगुनिया के इस घरेलू उपचार का प्रयोग न करें।

10. गाजर

सामग्री :

  • एक ताजा गाजर

प्रयोग की विधि :

  • प्रतिदिन एक कच्ची गाजर खा सकते हैं या फिर इसे अन्य सब्जियों के साथ सलाद के तौर पर भी ले सकते हैं।

कब तक प्रयोग करें :

  • कम से कम हफ्ते तक लें।

कैसे है लाभदायक :

एक वैज्ञानिक शोध में बताया गया है कि चिकनगुनिया के घरेलू उपचार के तौर पर गाजर का सेवन किया जा सकता है। इसके पीछे कारण यह है कि गाजर में अल्फा और बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम को बेहतर करने का काम कर सकता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने से चिकनगुनिया की समस्या से कुछ हद तक राहत मिल सकती है (16)।

11. बर्फ की सिकाई

सामग्री :

  • कुछ बर्फ के टुकड़े
  • तौलिया या आईस पैक

प्रयोग की विधि :

  • बर्फ के टुकड़ों को तौलिये में लपेटकर कुछ देर के लिए दर्द वाली जगह पर रखें।

कब तक प्रयोग करें :

  • इसे दिनभर में कई बार प्रयोग किया जा सकता है।

कैसे है लाभदायक :

चिकनगुनिया के कारण जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या हो सकती है। ऐसे में बर्फ की सिकाई करने से कुछ आराम मिल सकता है। बर्फ से सिकाई करने पर प्रभावित जगह पर रक्त का प्रवाह सामान्य हो जाता है। इससे जोड़ों में आई सूजन और दर्द से राहत मिल सकती है (17)। इसलिए, कहा जा सकता है कि बर्फ की सिकाई द्वारा चिकनगुनिया का इलाज किया जा सकता है।

12. तेल की मालिश

सामग्री :

  • दो चम्मच अरंडी का तेल
  • चुटकी भर दालचीनी पाउडर

प्रयोग की विधि :

  • तेल को हल्का गर्म कीजिए और इसमें दालचीनी पाउडर को मिक्स कर दें।
  • अब इस तेल से प्रभावित जोड़ों पर हल्के हाथों से थोड़ी देर मालिश करें।

कब तक प्रयोग करें :

  • दिनभर में कम से कम दो-तीन बार इससे मालिश करें।

कैसे है लाभदायक :

जैसा कि इस लेख में पहले भी बताया गया है कि चिकनगुनिया में सबसे ज्यादा जोड़ों के दर्द से तकलीफ होती है। ऐसे में अरंडी के तेल से मालिश करना एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है। इस तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो चिकनगुनिया के कारण शरीर में आई सूजन व दर्द से राहत दिला सकते हैं (18) । वहीं, काजू के छिलके (सेल) से प्राप्त तरल में थेराप्यूटिक गतिविधि पाई जाती है, जो जीनस एडीज मच्छर को दूर रखने का काम कर सकता है। साथ ही काजू सेल के तरल और अरंडी के तेल के मिश्रण में लार्विसाइड प्रभाव होता है, जो मच्छर के लार्वा को नष्ट कर सकता है। इससे चिकनगुनिया से राहत पाई जा सकती है (19)। इसके अलावा, दालचीनी से बने एसेंशियल ऑयल में भी लार्विकाइडल प्रभाव होता है, जो मच्छर के लार्वा को बेअसर कर सकता है (20)।

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लेख के अगले भाग में चिकनगुनिया के इलाज के बारे में बता रहे हैं।

चिकनगुनिया का इलाज – Treatment of Chikungunya in Hindi

चिकनगुनिया का कोई सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके लक्षण को कुछ दवाइयों के इस्तेमाल से दूर किया जा सकता है (2)।

  • दवाई- चिकनगुनिया बुखार का इलाज और दर्द को कम करने के लिए एसिटामिनोफेन या पेरासिटामोल जैसी दवाई ली जा सकती है। यह दवा सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
  • तरल पदार्थ- चिकनगुनिया के इलाज में तरल पदार्थ का सेवन अहम भूमिका निभा सकता है। इसके सेवन से शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाया जा सकता है। इससे चिकनगुनिया को जल्द से जल्द ठीक करने में मदद मिल सकती है।
  • एंटीमाइक्रोबियल दवाई- यह एक संक्रामक रोग है, जिससे राहत पाने में एंटी माइक्रोबियल दवाई कुछ हद तक मददगार साबित हो सकती है। इसलिए, चिकनगुनिया के उपचार में एंटीमाइक्रोबियल दवाई का अहम इस्तेमाल किया जा सकता है।

चलिए, अब जानते हैं चिकनगुनिया के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं।

चिकनगुनिया के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं – Diet for Chikungunya in Hindi

चिकनगुनिया का घरेलू उपचार करने में खान-पान का भी अहम भूमिका हो सकती है। ऐसे में किस तरह के आहार का सेवन करना चाहिए और किस तरह के आहार को परहेज करना चाहिए। इसके बारे में नीचे विस्तार से जाने।

क्या खाएं –

सूप पिएं : चिकनगुनिया में सब्जियों का सूप पीना चाहिए। साथ ही अधिक से अधिक तरल पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है। बुखार में तरल पदार्थ को पचाना आसान होता है।

हरी सब्जियां खाएं : हरी पत्तेदार सब्जियों में विभिन्न विटामिन्स, मिनरल्स व फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को अच्छा करता है व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करता है। साथ ही सब्जियों में कम कैलोरी होती है, जिस कारण पाचन तंत्र पर दबाव नहीं पड़ता (21) (22)।

विटामिन-सी : विभिन्न खाद्य पदार्थों में विटामिन-सी होता है। इनका सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर हो सकती है। इसलिए, चिकनगुनिया में विटामिन-सी का सेवन करना चाहिए (23)।

सेब व केला : ये दोनों फल चिकनगुनिया में खाए जा सकते हैं। सेब में अधिक फाइबर होता है, इसलिए यह पाचन तंत्र को बेहतर कर सकता है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ावा मिल सकता है (24)। वहीं, केले में भी फाइबर होता है, जो पाचन क्रिया को मजबूत कर सकता है (25)।

विटामिन-ई : जिन खाद्य पदार्थों में विटामिन-ई शामिल होता है, उनका सेवन करने से चिकनगुनिया से लड़ने में मदद मिलती है। विटामिन-ई एंटी-ऑक्सीडेंट का काम कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर कर सकता है (26)। सूखे मेवे विटामिन-ई के प्रमुख स्रोत होते हैं।

ओमेगा-3 फैटी एसिड : इसे या तो खाद्य पदार्थ के तौर पर लिया जा सकता है या फिर सप्लीमेंट्स की तरह। सूखे मेवों, मछली, सोयाबिन तेल, अंडे, जूस व दूध आदि में ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होता है। इनका सेवन करने से जोड़ों में होने वाले दर्द से राहत मिल सकती है (27)।

जिंक युक्त खाद्य पदार्थ : जिंक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकता है। साथ ही यह मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया को भी बेहतर कर सकता है। बीन्स, नट्स व डेयरी उत्पाद जिंक के प्रमुख स्रोत हैं (28)।

पानी : चिकनगुनिया बुखार में अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए। पानी पीने से मूत्र के जरिए विषैले जीवाणु शरीर से बाहर निकल जाते हैं (29)।

क्या न खाएं –

  • मांसाहार का सेवन न करें, क्योंकि इससे पाचन तंत्र पर खराब असर पड़ता है।
  • कई बार चिकनगुनिया डेरी उत्पाद के कारण फैल सकता है। ऐसे में चिकनगुनिया से जूझ रहे व्यक्ति को डेरी प्रोडक्ट का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • बाहर के खाने से परहेज करें। बाहर के खाने में अधिक मिर्च-मसाले के प्रयोग किया जाता है।
  • तैलीय खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इनका सेवन करने से पाचन तंत्र बिगड़ सकता है।
  • शराब, तंबाकू व धूम्रपान का भी सेवन नहीं करना चाहिए।

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अब इसके अगले भाग में चिकनगुनिया से बचने के तरीके बता रहे हैं।

चिकनगुनिया से बचाव – Prevention Tips for Chikungunya in Hindi

बेशक, अभी तक वैज्ञानिक इस बीमारी का कोई इलाज नहीं ढूंढ पाए हैं, लेकिन इससे बचा जरूर जा सकता है। यहां हम कुछ काम की बातें बता रहे हैं, जिनका पालन करने से चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छर आपके आसपास पनप तक नहीं पाएंगे (30)।

  • सबसे पहली और अहम बात यह है कि चिकनगुनिया व डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। इसलिए, अपने घर के आसपास पानी एकत्र न होने दें। समय-समय पर कूलर, फूलदानों व फ्रिज के पीछे लगी वॉटर ट्रै का पानी बदलते रहें। अगर आप पानी बदलने में असमर्थ हैं, तो उसमें थोड़ा-सा मिट्टी का तेल डाल दें।
  • खाने-पीने के सामान और पानी से भरे बर्तनों को हमेशा ढक कर रखें।
  • ध्यान रहे कि एडिस मच्छर दिन के समय काटते हैं, इसलिए दिन में भी पूरी बाजू वाली कमजी व फुल पैंट पहनें। अगर दिन में सो रहे हैं, तो मच्छरदानी का प्रयोग करें। साथ ही मच्छर भगाने वाली क्रीम भी आती है, जिसे लगाने से त्वचा को कोई नुकसान नहीं होता।
  • घर के आसपास तुलसी का पौधा लगाएं, क्योंकि तुलसी के कारण एडिस मच्छर के लार्वा नष्ट हो जाते हैं।
  • घर के अंदर कपूर जला सकते हैं। इसकी गंध से मच्छर भाग जाते हैं।
  • नीम के तेल का दीपक जला सकते हैं। इसकी गंध से भी मच्छर घर के अंदर नहीं आते।
  • कुछ भी खाने से पहले हाथों को अच्छे से धोना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के विषैले जीवाणु भोजन के साथ अंदर न चले जाएं।

चिकनगुनिया ऐसी बीमारी है, जिसे पनपने से रोका जा सकता है। वहीं, अगर कोई इसकी चपेट में आ भी जाए, तो कुछ सावधानियां बरत कर उसे जल्द ठीक किया जा सकता है। अगर आपका कोई परिचित चिकनगुनिया से ग्रस्त है, तो इस लेख में बताए गए चिकन गुनिया का लक्षण और घरेलू उपचार से जल्द ठीक हुआ जा सकता है। वहीं, अगर चिकनगुनिया की समस्या गंभीर है, तो बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करें।

आगे है और जानकारी

आइए, अब चिकनगुनिया के संबंध पाठकों के कुछ सवालों के जवाब जान लेते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चिकनगुनिया की जांच कैसे करते हैं?

चिकनगुनिया का पता उसके लक्षण से किया जा सकता है। इसके अलावा, चिकनगुनिया का पता लगने के लिए डॉक्टर रक्त की जांच कर सकते हैं (31)।

चिकनगुनिया और डेंगू में क्या अंतर है?

डेंगू और चिकनगुनिया दोनों वायरल संक्रमण होते हैं। ये दोनों वायरल संक्रमण एडीज मच्छर द्वारा फैलते हैं, लेकिन इसके लिए वायरस के अलग-अलग प्रकार शामिल होते हैं। चिकनगुनिया के लिए अल्फावायरस (Alphavirus) और डेंगू के लिए फ्लेविवायरस (Flavivirus) जिम्मेदार होता है। चिकनगुनिया के लक्षण लगभग 12 दिन में नजर आ जाता है। वहीं, डेंगू के लक्षण को दिखाई देने के लिए 3 से 7 दिन लग सकते हैं (32)।

क्या चिकनगुनिया का वैक्सीन है?

नहीं, अभी चिकनगुनिया की कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है (33)।

चिकनगुनिया कब तक रहता है?

चिकनगुनिया से प्रभावित अधिकतर लोग लगभग एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन ठीक होने के बाद भी कुछ समय तक जोड़ों में दर्द रह सकता है।

चिकनगुनिया के कारण होने वाले त्वचा के चकत्ते को कैसे ठीक किया जा सकता है?

चिकनगुनिया के चकत्ते से छुटकारा पाने के लिए अरंडी के तेल से त्वचा की मालिश की जा सकती है। इसके लिए इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गतिविधि मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, बॉडी लोशन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं ।

यह रोग जोड़ों के दर्द का कारण क्यों बनता है?

चिकनगुनिया के कारण जोड़ों में सूजन हो जाती है, जिस कारण यह जोड़ों के दर्द का कारण बन सकता है (31)।

इस बुखार से जोड़ों का दर्द कब तक रहेगा?

कई बार जोड़ों का दर्द एक हफ्ते में ठीक हो जाता है और कुछ मामलों में इसे ठीक होने में एक महीना तक लग जाता है (31)।

33 संदर्भ (Source):

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Bhupendra Verma

भूपेंद्र वर्मा ने सेंट थॉमस कॉलेज से बीजेएमसी और एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी किया है। भूपेंद्र को लेखक के तौर पर फ्रीलांसिंग में काम करते 2 साल हो गए हैं। इनकी लिखी हुई कविताएं, गाने और रैप हर किसी को पसंद आते हैं। यह अपने लेखन और रैप करने के अनोखे स्टाइल की वजह से जाने जाते हैं। इन्होंने कुछ डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्टोरी और डायलॉग्स भी लिखे हैं। इन्हें संगीत सुनना, फिल्में देखना और घूमना पसंद है।

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