चिरौंजी के फायदे, उपयोग और नुकसान – Chironji (Charoli) Benefits and Side Effects in Hindi

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यूं तो हम सभी चिरौंजी या चारोली को एक सूखे मेवे के तौर पर देखते और इस्तेमाल में लाते हैं। मगर, क्या आप जानते हैं कि छोटे-छोटे दिखने वाले चिरौंजी दाना के फायदे भी कई हैं। यही वजह है कि इसे सेहत और स्वास्थ्य के लिए काफी उपयोगी माना गया है। इसके बावजूद बहुत से लोग ऐसे भी होंगे, जिन्हें किन समस्याओं में चिरौंजी के फायदे हासिल किए जा सकते हैं, यह न मालूम हो। इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम विस्तृत चिरौंजी खाने के फायदे और चिरौंजी के नुकसान बताने जा रहे हैं। उससे पहले आपको यह समझना होगा कि कोई भी घरेलू उपाय केवल समस्या में राहत पहुंचा सकता है। पूर्ण इलाज डॉक्टरी सलाह पर ही निर्भर करता है।

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तो आइए, सबसे पहले चिरौंजी क्या है, यह जान लेते हैं। बाद में हम चिरौंजी के फायदे के विषय में बात करेंगे।

चिरौंजी क्या है – What is Chironji in Hindi

चिरौंजी का वैज्ञानिक नाम बुकाननिया लानजान (buchanania lanzan) है। इसका पेड़ एनाकार्डिएसी (Anacardiaceae) परिवार से संबंधित है, जो भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है। यह एक ऐसा पेड़ है, जिसमें कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं। यही कारण है कि आयुर्वेद में इसकी जड़, पत्ती, फल, बीज और गोंद से कई बीमारियों का उपचार किया जाता है (1)। हम आमतौर पर जिसे चिरौंजी के नाम से पुकारते हैं, वह इस पेड़ के फल का बीज का अंदरूनी हिस्सा होता है, जिसे इसके बीज को तोड़कर निकाला जाता है।

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चिरौंजी क्या है, जानने के बाद अब हम चिरौंजी खाने के फायदे जानने का प्रयास करेंगे।

चिरौंजी के फायदे – Benefits of Chironji (Charoli) in Hindi

यहां हम सेहत और स्वास्थ्य से जुड़े चिरौंजी खाने के फायदे विस्तार से बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप चिरौंजी बेनिफिट्स को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।

1. डायबिटीज

चिरौंजी बेनिफिट्स डायबिटीज की समस्या में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इस बात की पुष्टि चिरौंजी से संबंधित एक शोध से होती है। शोध में माना गया कि चिरौंजी की पत्तियों के अर्क में एंटीडायबिटिक प्रभाव पाया जाता है। इस प्रभाव के कारण चिरौंजी की पत्तियों का अर्क इन्सुलिन की सक्रियता को बढ़ाकर ब्लड शुगर को कम करने में मदद कर सकता है (1)। कई लोग चिरौंजी के बीज को भी डायबिटीज की समस्या में उपयोगी मानते हैं, हालांकि इस बारे में कोई भी स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

2. सूजन को कम करे

सूजन की समस्या में भी चिरौंजी को उपयोग में लाया जा सकता है। चिरौंजी से संबंधित एक शोध में माना गया है कि इसकी पत्तियों के अर्क के साथ ही चिरौंजी के बीज के उपयोग से भी सूजन की समस्या को कम किया जा सकता है। वजह यह है कि इसकी पत्तियों में एंटीइन्फ्लामेट्री गुण पाया जाता है। वहीं, इसका बीज भी एंटीइन्फ्लामेट्री एजेंट की तरह काम कर सकता है। शोध में पाया गया कि इसके अर्क ने पॉ वोल्यूम यानी पंजे के बढ़े हुए आकार को कम करने का काम किया (1)। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि आर्थराइटिस जैसी जोड़ों में सूजन की समस्या में भी इसकी पत्तियों के अर्क और बीज का सेवन लाभदायक साबित हो सकता है।

3. प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए

चिरौंजी बीज जिसे हम आमतौर पर खाने के लिए घरों में इस्तेमाल करते हैं, को प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इंडियन जर्नल ऑफ फार्माकोलोजी के एक शोध में इस बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। शोध में माना गया कि चिरौंजी बीज के अर्क का उपयोग श्वेत रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने का काम कर सकता है (2)। वहीं, श्वेत रक्त कोशिकाओं को इम्यून सिस्टम का अहम हिस्सा माना जाता है, जो शरीर को वायरस, बैक्टीरिया, फंगी और पैरासाइट के हानिकारक प्रभाव से बचाने में सहयोग करती हैं (a)।

4. डायरिया

डायरिया की समस्या में भी चिरौंजी का इस्तेमाल लाभदायक साबित हो सकता है। दो अलग-अलग शोध से यह बात प्रमाणित होती है। एक शोध में जिक्र मिलता है कि चिरौंजी, डायरिया में राहत पहुंचा सकता है। इसके अलावा, चिरौंजी के पेड़ की छाल के चूर्ण को शहद के साथ लेने से डिसेंट्री (संक्रामक डायरिया) में मदद मिल सकती है (1)। वहीं, दूसरी ओर एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) एक शोध में जिक्र मिलता है कि चिरौंजी की जड़ में एस्ट्रिंजेंट (संकुचन पैदा करने वाला) प्रभाव पाया जाता है। यह प्रभाव डायरिया की समस्या में राहत पहुंचाने का काम कर सकता है (3)।

5. कब्ज में पहुंचाए राहत

कब्ज की समस्या में भी चिरौंजी को उपयोगी माना जा सकता है। यह बात स्पष्ट रूप से चिरौंजी से संबंधित एक शोध से साफ होती है। शोध में माना गया है कि चिरौंजी के फल में लैक्सेटिव (मल को ढीला कर बाहर निकालने वाला) गुण पाया जाता है (4)। चूंकि कब्ज की समस्या में लैक्सेटिव गुण को उपयुक्त और फायदेमंद माना जाता है (5)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि चिरौंजी फल का सेवन कर कब्ज की समस्या में चिरौंजी बेनिफिट्स हासिल किए जा सकते हैं।

6. सिर दर्द में पहुंचाए आराम

सिर दर्द की समस्या से पीड़ित व्यक्ति राहत पाने के लिए चिरौंजी के बीज को उपयोग में ला सकता है। चिरौंजी के बीज से संबंधित एक शोध से यह बात स्पष्ट होती है। शोध में पाया गया कि इनमें अन्य औषधीय गुणों के साथ एनाल्जेसिक (दर्दनिवारक) प्रभाव पाया जाता है (6)। इस प्रभाव के कारण ही यह सिर दर्द की समस्या में राहत पहुंचाने का काम कर सकता है। हालांकि, इस विषय पर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

7. त्वचा के लिए फायदेमंद

अन्य समस्याओं के साथ ही चिरौंजी को त्वचा के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक चिरौंजी बीज के पेस्ट को गुलाब जल के साथ मिला कर लगाने से त्वचा पर चमक आ सकती है और त्वचा स्मूद और सॉफ्ट दिख लग सकती है। वहीं, सामान्य रूप से इस्तेमाल में लाई जाने वाली 20 ग्राम चिरौंजी को चबाने से त्वचा में जलन की समस्या में भी लाभ मिल सकता है। इतना ही नहीं, दाग-धब्बों से राहत पाने में चिरौंजी के तेल भी कारगर माना जाता है (7)। इस आधार पर कहना गलत नहीं होगा कि चिरौंजी चिरौंजी दाना के फायदे त्वचा के लिए भी सकारात्मक प्रदर्शित कर सकते हैं।

8. बालों के लिए उपयोगी

बालों के लिए भी चिरौंजी काफी उपयोगी मानी जाती है। हर्बल कंडीशनर में खास तौर पर चिरौंजी की पत्तियों के अर्क को इस्तेमाल में लाया जाता है। इस बात का प्रमाण चिरौंजी से संबंधित एक शोध में मिलता है। शोध में माना गया है कि चिरौंजी में बालों को कंडीशन करने का गुण मौजूद होता है। इस गुण के कारण यह बालों को नर्म, मुलायम और चमकदार बनाने के साथ ही उन्हें नमी प्रदान करने का भी काम करता है (8)।

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चिरौंजी बेनिफिट्स के बाद अब हम चिरौंजी के पौष्टिक तत्वों के विषय में बात करेंगे।

चिरौंजी के पौष्टिक तत्व – Chironji Nutritional Value in Hindi

नीचे दिए गए चार्ट के माध्यम से हम चिरौंजी में मौजूद पौष्टिक तत्वों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं (1)।

पोषक तत्वऔसत प्रतिशत मात्रा प्रति 100 ग्राम
ऐश2.20%
नमी3.6%
क्रूड फैट38%
टोटल प्रोटीन43.24%
टोटल कार्बोहाइड्रेट12.96%
टोटल क्रूड फाइबर18.50%
एनर्जी229.99%
फोस्फोरस593%
स्ट्रोंटियम0.68%
जिंक3.32%
एलुमुनियम0.3%
बोरोन0.6%
कैल्शियम70%
कॉपर1.15%
आयरन4.8%
मैग्नीशियम275%

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लेख के अगले भाग में अब हम आपको चिरौंजी का सेवन कैसे करें, इस बारे में जानकारी देंगे।

चिरौंजी का सेवन कैसे करें – How to Eat Chironji (Charoli) in Hindi

जैसा कि हम आपको लेख में पहले ही बता चुके हैं कि चिरौंजी के पेड़ के सभी भाग जैसे:- फल, बीज, पत्तियां, जड़ और छाल को औषधीय उपयोग में लाया जात है। ऐसे अगर कोई इसके सभी औषधीय लाभों को हासिल करने के लिए उपयोग में लाना चाहता है तो निम्न बिंदुओं के माध्यम इसकी उपयोग विधि को समझ सकता है।

  • चिरौंजी की पत्तियों, छाल और जड़ के उपयोग से तैयार काढ़े को चिकित्सक की सलाह से करीब 50 से 100 मिली तक सेवन किया जा सकता है।
  • काढ़े की जगह अगर कोई इसके चूर्ण का इस्तेमाल करता है, तो वह इसके चूर्ण को करीब एक चम्मच गुनगुने पानी या दूध के साथ ले सकता है।
  • वहीं, चिरौंजी बीज को खाद्य सामग्रियों के साथ मिलाकर उपयोग में लाया जा सकता है, जिसमें मुख्य तौर पर मीठी खाद्य सामग्रियां शामिल हैं, जैसे खीर, लड्डू, हलुआ आदि।

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लेख के अगले भाग में अब हम चिरौंजी लेने से पूर्व बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बात करेंगे।

चिरौंजी लेने से पहले सावधानियां

चूंकि चिरौंजी से संबंधित शोध बहुत कम हैं, इसलिए गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसके सेवन में सावधानी बरतनी आवश्यक है। इसलिए, हमारी सलाह यही है कि इन दोनों ही स्थितिओं में अगर कोई महिला चिरौंजी को इस्तेमाल में लाना चाहती हैं, तो उससे पूर्व एक बार डॉक्टर से परामर्श जरूर कर ले। वहीं, किसी स्वास्थ्य परेशानी के लिए इसका इस्तेमाल औषधि कि तरह किया जा रहा है, तो इसकी सही खुराक की जानकारी डॉक्टर या विशेषज्ञ से जरूर लें।

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लेख के अगले भाग में अब हम आपको चिरौंजी के नुकसान के बारे में बताएंगे।

चिरौंजी के नुकसान – Side Effects of Chironji in Hindi

हालांकि चिरौंजी के पेड़ के साथ चिरौंजी दाना के फायदे कई हैं, लेकिन अधिक मात्र में इसका सेवन कुछ दुष्परिणाम भी प्रदर्शित कर सकता है, जो कुछ इस प्रकार हैं :

चिरोंजी की पत्तियों में एंटीडायबिटिक यानी बल्ड शुगर कम करने का गुण होता है (1)। इसलिए, शुगर की दवा वाले लोगों को इसके अर्क को लेने में सावधानी बरतनी चाहिए। अन्यथा ब्लड शुगर लो होने की स्थिति पैदा हो सकती है।

चिरौंजी फल में लैक्जेटिव गुण मौजूद होता है, इसलिए इसका अधिक करने से दस्त की समस्या हो सकती है (4)।

चिरौंजी बीज में एनाल्जेसिक (दर्दनिवारक) प्रभाव पाया जाता है (6)। इस कारण एनाल्जेसिक की अधिक मात्र के कुछ सामान्य परिणाम जैसे :- थकान, कमजोरी और मतली-उल्टी की शिकायत चिरोंजी के अधिक सेवन से हो सकती है (9)।

कई लोगों को नट्स से एलर्जी होती है (10)। चूंकि चिरौंजी बीज नट्स की श्रेणी में आते हैं (1)। इसलिए, नट्स से एलर्जी वाले लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिए।

पूरे लेख को पढ़ें के बाद अब इस बात में तो कोई संशय नहीं रह गया होगा कि चिरोंजी क्या है और इसे स्वास्थ्य के लिए उपयोगी क्यों माना गया है। तो फिर अधिक क्या सोचना, एक बार लेख में शामिल सभी जानकारियों को अच्छे से पढ़ें और इस स्वास्थ्य वर्धक पेड़ के विभिन्न भागों को इस्तेमाल में लाएं। साथ ही यह भी जरूरी है कि चिरौंजी दाना के फायदे के साथ आप चिरौंजी के नुकसान को भी जरूर ध्यान में रखें, ताकि बिना किसी दुष्प्रभाव के चिरौंजी खाने के फायदे हासिल किए जा सकें। उम्मीद है चिरोंजी से संबंधित यह लेख आपकी कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को हल करने में मददगार होगा। ऐसे ज्ञानपरक अन्य विषयों के बारे में जानने के लिए पढ़ते रहें स्टाइलक्रेज।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या आप कच्चे चिरौंजी के बीज खा सकते हैं?

जी बिल्कुल, चिरौंजी बीज को कच्चा या भून कर दोनों ही तरह से खाया जा सकता है (12)।

क्या चिरौंजी सेहत के लिए अच्छी है?

बेशक, चिरौंजी सेहत के लिए अच्छे है। चिरौंजी के स्वास्थ्य संबंधी फायदों के बारे में लेख में पहले ही विस्तार से बताया जा चुका है।

चिरौंजी कैसे बनाई जाती है?

चिरौंजी के बीज के बाहरी कठोर हिस्से को हटाकर अंदरूनी भाग को निकाला जाता है। बीज का यही अंदरुनी भाग चिरौंजी के नाम से जाना जाता है, जिसे हम प्रयोग में लाते हैं।

Sources

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