बिनौले के तेल के 7 फायदे, उपयोग और नुकसान – Cotton Seed Oil Benefits and Side Effects in Hindi

Written by , MA (Journalism & Media Communication) Puja Kumari MA (Journalism & Media Communication)
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कॉटन यानी कपास का इस्तेमाल कई चीजों को बनाने के लिए किया जाता है, जैसे कपड़े, साज-सज्जा की चीजें, ईयर बड्स आदि। वहीं, डॉक्टरी उपचार में रक्त को साफ करने या पट्टी करने के लिए भी कॉटन का उपयोग किया जाता है। वहीं, आपको जानकर हैरानी होगी कि कॉटन के अलावा, कॉटन के बीज के तेल का इस्तेमाल भी किया जाता है। कई अध्ययनों में कपास के बीज के तेल यानी बिनौले के तेल के स्वास्थ्य लाभ के बारे में पता चलता है। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम बिनौले के तेल के फायदे व बिनौले का तेल का उपयोग बता रहे हैं। साथ ही यहां बिनौले का तेल के नुकसान भी बताए गए हैं।

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लेख की शुरुआत करते हैं बिनौले का तेल के फायदे के साथ।

बिनौले के तेल के फायदे – Benefits of Cottonseed Oil in Hindi

बिनौले के तेल में पाए जाने वाले औषधीय गुण इसे सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद बनाते हैं, जिनके बारे में हम नीचे बता रहे हैं। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि बिनौले का तेल किसी बीमारी का डॉक्टरी इलाज नहीं है। इसका उपयोग कुछ हद तक लाभकारी साबित हो सकता है। पढ़ें नीचे :

1. सूजन कम करने के लिए

इस्केमिक स्ट्रोक तीन प्रकार के स्ट्रोक में से एक है। इसे ब्रेन इस्किमिया और सेरेब्रल इस्किमिया भी कहा जाता है और यह विश्व स्तर पर मौत का दूसरा प्रमुख कारण है। इस प्रकार का स्ट्रोक सूजन के कारण मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी में रुकावट की वजह से होता है।
एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि बिनौले के तेल में एंटीइंफ्लामेटरी प्रभाव पाया जाता है, जो सूजन की समस्या को कम करके इस्केमिक स्ट्रोक की चोट को कम करने में मददगार हो सकता है (1)। इसके अलावा, एक अन्य रिसर्च में पाया गया कि बिनौले के तेल में मौजूद एंटीइंफ्लामेटरी गुण आंतों की सूजन को बढ़ने से रोकने में उपयोगी हो सकता है (2)।

2. एंटी कैंसर प्रभाव

बिनौले के तेल का उपयोग कैंसर से बचाव में कुछ हद तक मददगार हो सकता है। एक शोध के अनुसार बिनौले के तेल में गॉसिपोल नामक पॉलीफेनोल पाया जाता है। इस पॉलिफिनॉल्स में एंटी कैंसर प्रभाव मौजूद होता है। यह प्रभाव स्तन कैंसर, कोलन कैंसर, पैंक्रियाटिक यानी अग्नाशयी कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को कम करने में कुछ हद तक मददगार हो सकता है (3)। हालांकि, कॉटन सीड ऑयल कैंसर का इलाज नहीं है। अगर कोई कैंसर से पीड़ित है, तो उसका डॉक्टरी उपचार कराना जरूरी है।

3. हृदय को स्वस्थ रखने के लिए

हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया यानी कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि हृदय रोग का जोखिम खड़ा कर सकती है। वहीं, बिनौले तेल युक्त आहार का सेवन कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल की वजह से होने वाले हृदय रोग के जोखिम को कम किया जा सकता है। दरअसल, बिनौले के तेल में मौजूद लिपिड को कम करने वाला प्रभाव कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है (4)।

इसके अलावा, एक अन्य अध्ययन से पता चला है कि बिनौले तेल युक्त आहार के सेवन से कुल कोलेस्ट्रॉल, हानिकारक कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स (रक्त में पाया जाने वाला एक प्रकार का वसा या लिपिड) के स्तर को कम किया जा सकता है। वहीं, इसके सेवन से फायदेमंद कोलेस्ट्रॉल यानी उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि पाई गई, जो हृदय संबंधी रोग के बढ़ते जोखिम को कम करने में मददगार हो सकता है (5)।

4. घाव भरने के लिए

बिनौले के तेल का उपयोग घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए भी किया जा सकता है। एक रिसर्च के अनुसार इसके बीज में एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव के साथ ही वूंड हीलिंग प्रभाव भी पाया जाता है। इस आधार पर हम यह मान सकते हैं कि यह प्रभाव इसके तेल में भी मौजूद हो सकता है। यह प्रभाव घाव को तेजी से भरने में मददगार हो सकता है (6)। फिलहाल, इस विषय में अभी और सटीक शोध की आवश्यकता है।

5. त्वचा के लिए

सेहत के साथ ही बिनौले का तेल त्वचा को स्वस्थ रखने में भी मददगार हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार बिनौले के तेल में विटामिन ई मौजूद होता है। यह त्वचा के कोलेजन और इलास्टिन को बढ़ाने में मददगार हो सकता है। इसके साथ ही यह स्ट्रेटम कार्नियम यानी त्वचा की बाहरी परत पर लिपिड संरचनाओं की रक्षा कर सकता है, जिससे त्वचा ड्राई होने से बची रह सकती है। इसका उपयोग सूर्य की हानिकारक किरणों की वजह से होने वाली एरिथेमा (त्वचा पर होने वाले लाल चकत्ते) की समस्या से बचाव कर सकता है।

इसके साथ ही यह त्वचा पर होने वाली सूजन को भी कम करने में लाभदायक हो सकता है (7)। इसके अलावा, बिनौले के तेल का इस्तेमाल त्वचा के दाग-धब्बों और झाइयों को साफ करने के लिए भी किया जा सकता है (6)।

6. बालों को स्वस्थ रखने के लिए

बालों को टूटने से रोकने और उनकी ग्रोथ के लिए उन्हें स्वस्थ रखना जरूरी है। वहीं, बिनौले के तेल का उपयोग बालों को स्वस्थ रखने में लाभदायक हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार इसमें विटामिन ई मौजूद होता है। विटामिन ई बालों को स्वस्थ रखकर उनकी गुणवत्ता को बढ़ाने में मददगार हो सकता है।

7. एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव

एंटीऑक्सीडेंट शरीर में एक अहम भूमिका निभाता है। यह कोशिकाओं की क्षति को रोक सकता है। यह शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकता है। फ्री रेडिकल्स यानी मुक्त कण के कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस होता है, जिससे कैंसर, हृदय संबंधी रोग, मधुमेह, अल्जाइमर रोग (भूलने की बीमारी), पार्किंसंस रोग (न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार, जिसमें शरीर का संतुलन बनाए रखने में समस्या होती है) और नेत्र रोग, जैसे मोतियाबिंद का जोखिम बढ़ सकता है।

एंटीऑक्सीडेंट कई प्रकार के प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है, जिनमें से एक बिनौले का तेल भी है। यह शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स यानी मुक्त कणों के प्रभाव को कम करने में मददगार हो सकता है।

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लेख के इस भाग में जानिए बिनौले के तेल में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में।

बिनौले के तेल के पौष्टिक तत्व – Cotton Seed Oil Nutritional Value in Hindi

बिनौले के तेल में मौजूद पोषक तत्व इसे सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद बनाते हैं। यहां हम उन्हीं पोषक तत्वों के बारे में बता रहे हैं (8)।

पोषक तत्वमात्रा
ऊर्जा884 केसीएएल
वसा100 ग्राम
कोलीन0.2 मिलीग्राम
विटामिन ई12.1 मिलीग्राम
विटामिन के24.7 माइक्रोग्राम
फैटी एसिड टोटल सैचुरेटेड18 ग्राम
फैटी एसिड टोटल मोनोअनसैचुरेटेड29.5 ग्राम
फैटी एसिड टोटल पाॅलीअनसैचुरेटेड48.1 ग्राम

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बिनौले के तेल का उपयोग कैसे करना है, नीचे जानिए।

बिनौले के तेल का उपयोग – How to Use Cottonseed Oil in Hindi

बिनौले के तेल का उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है। यहां हम उन्हीं के बारे में बता रहे हैं :

  • बिनौले के तेल का उपयोग खाना पकाने के तेल के रूप में किया जा सकता है।
  • सलाद की ड्रेसिंग में भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कॉटन के जरिए इसकी कुछ मात्रा घाव पर इस्तेमाल की जा सकती है।
  • त्वचा पर होने वाले दाग-धब्बों और झाइयों की समस्या में भी इसका उपयोग किया जा सकता है (8)।

मात्रा : खाना बनाने के लिए एक से डेढ़ चम्मच शुद्ध बिनौले के तेल का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, अपनी उम्र और स्वास्थ्य अनुसार इसके सेवन की सही मात्रा जानने के लिए डॉक्टर से परामर्श कर लेना चाहिए।

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यहां जानें बिनौले के तेल का चयन और इसे सुरक्षित रखने का तरीका।

बिनौले के तेल का चयन कैसे करें और लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?

सामान्य खाद्य तेलों के जैसे ही बिनौले तेल का चयन करना बहुत ही आसान है। बाजार में मिलने वाले किसी भी प्रकार के अच्छी गुणवत्ता वाले बिनौले के तेल को उपयोग में लिया जा सकता है। वहीं, इसे कांच की बोतल में स्टोर कर सकते हैं। इसे कमरे के सामान्य तापमान में रखकर लंबे समय तक उपयोग कर सकते हैं।

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लेख में आगे जानें बिनौले के तेल के नुकसान।

बिनौले के तेल के नुकसान – Side Effects of Cottonseed Oil in Hindi

सीमित मात्रा में सेवन करने पर बिनौले का तेल के फायदे हो सकते हैं। इसके विपरीत अधिक मात्रा में सेवन करने पर बिनौले के तेल के नुकसान भी हो सकते हैं, जिनके बारे में हम नीचे बता रहे हैं (3) :

  • बिनौले के तेल में गॉसिपोल पाया जाता है। इसमें एंटी न्यूट्रिशन प्रभाव होता है, जिसके कारण कुपोषण की समस्या हो सकती है।
  • गॉसिपोल युक्त बिनौले के तेल का लंबे समय तक सेवन विषाक्तता का कारण बन सकता है, जिससे पुरुषों में इनफर्टिलिटी का जोखिम बढ़ सकता है।

लेख में आपने बिनौले के तेल के फायदे के बारे में विस्तार से जाना। इसके फायदे उठाने के लिए लेख में दी गई जानकारी के माध्यम से इसका उपयोग किया जा सकता है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि अधिक मात्रा में सेवन करने पर बिनौले का तेल के नुकसान भी हो सकते हैं। इसलिए, इसे सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करें। वहीं, इसके सेवन के बाद किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नजर आएं, तो इसका इस्तेमाल बंद कर डॉक्टर से संपर्क करें। हम उम्मीद करते हैं कि यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

क्या मैं अपने चेहरे पर कपास के बीज का तेल उपयोग कर सकता हूं?

हां, बिनौले के तेल का उपयोग त्वचा पर किया जा सकता है (9)। लेकिन, ध्यान रहे कि इसे उपयोग करने के पहले पैच टेस्ट जरूर कर लें।

बालों के विकास के लिए मैं बिनौले के तेल का उपयोग कैसे कर सकता हूं?

बालों के विकास के लिए बिनौले के तेल को किसी भी हेयर ऑयल या फिर शैम्पू में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।

References

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  1. Cottonseed oil alleviates ischemic stroke injury by inhibiting the inflammatory activation of microglia and astrocyte,
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/32917229/
  2. Cottonseed Oil Protects Against Intestinal Inflammation in Dextran Sodium Sulfate-Induced Inflammatory Bowel Disease,
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31112045/#:~:text=Cottonseed%20oil%20protects%20against%20intestinal%20inflammation%20and%20the%20development%20of,with%20therapeutic%20benefits%20for%20IBD.
  3. Isolation of Cottonseed Extracts That Affect Human Cancer Cell Growth,
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6041348/
  4. Consumption of a Diet Rich in Cottonseed Oil (CSO) Lowers Total and LDL Cholesterol in Normo-Cholesterolemic Subjects,
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3407983/
  5. A 5-day high-fat diet rich in cottonseed oil improves cholesterol profiles and triglycerides compared to olive oil in healthy men,
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/30527259/
  6. gossypium herbaceum linn an ethnopharmacological review,
    http://jpsionline.com/admin/php/uploads/116_pdf.pdf
  7. Bioactive Compounds for Skin Health: A Review,
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC7827176/
  8. Oil, soybean, salad or cooking, (partially hydrogenated) and cottonseed,
    https://fdc.nal.usda.gov/fdc-app.html#/food-details/173565/nutrients
  9. Final report on the safety assessment of Hydrogenated Cottonseed Oil, Cottonseed (Gossypium) Oil, Cottonseed Acid, Cottonseed Glyceride, and Hydrogenated Cottonseed Glyceride,
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/11558638/
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Puja Kumari

Puja Kumariहेल्थ एंड वेलनेस राइटर

पुजा कुमारी ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। इन्होंने वर्ष 2015 में अपने करियर की शुरुआत न्यूज आधारित वेब पोर्टल से की थी। अब तक इनके 2 हजार से भी ज्यादा आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। पुजा को विभिन्न विषयों पर लेख लिखना पसंद है, लेकिन इनका सबसे ज्यादा पसंदीदा विषय घर की...read full bio

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