दाद के कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपाय – Home Remedies For Ringworm in Hindi

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दाद त्वचा पर होने वाली पीड़ादायक समस्याओं में से एक है। इसमें खुजली आती है और यह बहुत जल्दी फैलता भी है। दाद होने पर किसी भी काम में मन लगाना मुश्किल हो जाता है और ध्यान हमेशा दाग वाली जगह पर ही रहता है। वहीं, आयुर्वेद, दाद के ऐसे समाधान पेश करता है, जो इस त्वचा रोग से राहत देने में मदद कर सकते हैं। इसी वजह से स्ट्राइलक्रेज के इस लेख में हम दाद का घरेलू उपचार क्या हो सकता है, इसके बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही यहां हम दाद होने के कारण के साथ ही इससे बचाव के तरीके भी बताएंगे।

पढ़ते रहें

सबसे पहले दाद क्या है, यह जान लेते हैं। इसके बाद दाद के प्रकार और उपचार के बारे में जानेंगे। 

दाद क्या है – What is Ringworm in Hindi

दाद एक तरह का स्किन इंफेक्शन है, जो फंगस के कारण होता है। इसे इंग्लिश में रिंग वॉर्म कहा जाता है, क्योंकि यह गोलाकार व अंगूठी के आकार का होता है। इसे डर्मेटोफाइटोसिस और टिनिया के नाम से भी जाना जाता है (1)। आमतौर पर दाद डर्मेटोफाइट्स (Dermatophytes) नामक फंगस के कारण होता है (2)। ये कई प्रकार के हो सकते हैं, जिसकी जानकारी नीचे दी जा रही है।

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अब हम नीचे बता रहे हैं कि दाद कितने प्रकार के होते हैं। इसके बाद दाद कैसे होता है, यह भी बताएंगे।

दाद के प्रकार – Types of Ringworm in Hindi

दाद के प्रकार को इससे प्रभावित त्वचा के आधार पर बांटा गया है। चलिए, आगे जानते हैं कि दाद के प्रकार क्या हैं (3) (4):

  • दाढ़ी के पास होने वाले दाद को टिनिया बारबाई (Tinea Barbae) कहा जाता है।
  • शरीर पर होने वाले दाद को टिनिया कॉर्पोरिस (Tinea Corporis) कहा जाता है।
  • पैर में होने वाले दाद को टिनिया पेडिस (Tinea Pedis) या एथलीट फुट कहा जाता है।
  • स्कैल्प पर होने वाला दाद टिनिया कैपिटिस (Tinea Capitis) कहलाता है।
  • पेट से कूल्हे के बीच में होने वाले दाद को टिनिया क्रुरिस (Tinea Cruris) कहा जाता है।
  • हाथ पर होने वाले दाद को टिनिया मनस (Tinea Manus) कहा जाता है।
  • दाढ़ी के अलावा चेहरे के अन्य हिस्से पर होने वाले दाद को टिनिया फेसिई (Tinea Faciei) कहा जाता है।
  • नाखूनों पर होने वाले दाद को टिनिया अंगियम (Tinea Unguium) कहा जाता है।

आगे है और जानकारी 

दाद कितने प्रकार के होते हैं, जानने के बाद लेख के अगले भाग में दाद खाज खुजली होने के कारण जानें।

दाद होने के कारण – Causes of Ringworm Hindi

दाद का मुख्य कारण डर्मोफाइट्स फंगस होता है। इसके अलावा, हम अन्य दाद होने के कारण भी बता रहे हैं, जिन्हें जानकर दाद से बचाव भी किया जा सकता है (5) (6) : 

  • किसी संक्रमित के संपर्क में आने से।
  • त्वचा में या नाखून में हल्की चोट लगने से।
  • लंबे समय तक त्वचा के गीले रहने से। जैसे, पसीने से शरीर का गीला होना।
  • किसी संक्रमित वस्तु को छूने से जैसे – कपड़े या कंघी।
  • बालों को समय-समय पर न धोने से।
  • रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से।
  • टाइट जूते पहनने से।
  • जानवरों के संपर्क में आने से।

अब लक्षण जानें 

दाद कैसे होता है यह जानने के बाद आगे दाद के लक्षण के बारे में पढ़ लेते हैं।

दाद के लक्षण – Symptoms of Ringworm in Hindi

दाद के लक्षण संक्रमण के कारण और इससे प्रभावित शरीर के हिस्से पर निर्भर करते हैं। वैसे, हम नीचे दाद के कुछ सामान्य लक्षण के बारे में बता रहे हैं, जिससे पता चल जाएगा कि दाद हुआ है या नहीं (5) (7) :

  • त्वचा पर परतदार और उभरा हुआ दाग।
  • यह लाल चकत्ते जैसा हो सकता है।
  • खुजली और जलन होना।
  • फैलकर फफोले जैसा बनना।
  • दाग के बाहरी किनारों का लाल हो जाना।
  • बालों का झड़ना।

जरूरी जानकारी नीचे है

ये थे दाद के लक्षण। अब हम जानेंगे कि दाद के घरेलू उपाय क्या हैं। 

दाद के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Ringworm in Hindi

दाद के घरेलू नुस्खे के बारे में जानने के लिए अंत तक लेख के इस भाग को पढ़ें। बता दें, नीचे बताये जा रहे घरेलू उपचार दाद की समस्या को कुछ हद तक कम करने में मददगार हो सकते हैं। इन्हें किसी भी तरीके से दाद का डॉक्टरी इलाज न समझा जाए। तो चलिए, दाद होने पर क्या करें, इस सवाल का जवाब जानते हैं।

1. सेब का सिरका 

सामग्री :

  • आवश्यकतनुसार सेब का सिरका

उपयोग का तरीका :

  • रूई को सेब के सिरके में भिगो लें और अतिरिक्त सिरका निचोड़ दें।
  • फिर इस रूई को 15 मिनट के लिए दाद वाली जगह पर रखें।
  • इस प्रक्रिया को एक सप्ताह तक दिन में तीन से चार बार दोहराएं।

कैसे लाभदायक है :

सेब के सिरके का इस्तेमाल करके भी दाद का घरेलू उपाय किया जा सकता है। जैसा कि हम ऊपर भी बता ही चुके हैं कि दाद फंगस की वजह से होता है। इसी वजह से इसको बढ़ने से रोकने में सेब के सिरके का एंटी-फंगल गुण मदद कर सकता है (8)। इसी वजह से सेब के सिरके को दाद की आयुर्वेदिक दवा भी कहा जाता है।

2. टी-ट्री ऑयल

सामग्री :

  • टी-ट्री ऑयल की पांच से छह बूंदे
  • इसे डायल्यूट करने के लिए एक से दो बूंद नारियल तेल

उपयोग का तरीका :

  • टी-ट्री ऑयल में नारियल तेल की बूंदें डालकर उसे डायल्यूट कर लें।
  • फिर इसे रूई की मदद से प्रभावित हिस्से में लगाएं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में तीन से चार बार दोहराया जा सकता है।

कैसे लाभदायक है :

दाद का घरेलू उपचार टी-ट्री ऑयल से भी किया जा सकता है। दरअसल, इसमें मौजूद एंटी-फंगल गुण दाद खाज खुजली होने के कारण बनने वाले फंगस को पनपने नहीं देता है। फंगस के न पनपने की वजह से दाद की स्थिति में सुधार हो सकता है। तभी माना जाता है कि टी-ट्री ऑयल दाद को कम कर में प्रभावी असर दिखा सकता है (9)

3. नारियल तेल 

सामग्री :

  • वर्जिन कोकोनट ऑयल की कुछ बूंदें

उपयोग का तरीका :

  • दाद पर रूई की मदद से नारियल का तेल लगाएं।
  • फिर कुछ देर रूई को वहीं छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में तीन से चार बार दोहराया जा सकता है।

कैसे लाभदायक है :

नारियल तेल में भी एंटी-फंगल गुण होते हैं, जो दाद से बचाव कर सकता है। अगर दाद हो गया है, तो नारियल तेल में मौजूद यह गुण मदद कर सकता है। एक स्टडी में कहा गया है कि नारियल तेल संक्रमित जगह पर एक सुरक्षात्मक परत बना देता है। इससे बाहरी जीवाणु उस पर नहीं पनप पाते और प्रभावित हिस्सा जल्दी हील हो सकता है (10)। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में भी इस बात का जिक्र है कि वर्जिन नारियल तेल फंगस पर प्रभाव रूप से काम कर सकता है (11)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि दाद खाज खुजली का उपचार में नारियल का तेल सक्रिय रूप से काम कर सकता है।

4. लहसुन 

सामग्री :

  • एक से दो लहसुन की कलियां
  • एक बूंद पानी

उपयोग का तरीका :

  • लहसुन की कली को बारीक पीसकर इसे दाद वाली जगह पर लगाएं।
  • इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें, फिर धो लें।

कैसे लाभदायक है :

लहसुन का इस्तेमाल अक्सर पैरों पर होने वाले दाद के लिए किया जाता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च में भी इस बात का जिक्र है कि लहसुन से दाद का उपचार किया जा सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि लहसुन में मौजूद एजीन (Ajoene) कंपाउंड टीनिया पेडिस (पैर के दाद) के शॉर्ट टर्म ट्रीटमेंट में प्रभावी हो सकता है। इसी वजह से कई क्रीम में एजीन कंपाउंड का इस्तेमाल किया जाता है (12)। इसके अलावा, अन्य दाद के प्रकार को भी ठीक करने में यह कंपाउंड मदद कर सकता है (13)

5. हल्दी 

सामग्री :

  • एक से दो चम्मच हल्दी पाउडर या हल्दी के तेल की कुछ बूंदें
  • पानी आवश्यकतानुसार

उपयोग का तरीका :

  • हल्दी पाउडर में थोड़ा-सा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें।
  • अब इस पेस्ट को दाद पर लगा लें।
  • कुछ देर हल्दी को उंगली से दाद पर मसल भी सकते हैं।
  • इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जा सकता है, जब तक दाद दूर न हो जाए।
  • इसके अलावा, हल्दी के तेल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

कैसे लाभदायक है :

हल्दी पाउडर भी दाद का घरेलू उपचार करने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। हल्दी में एंटीफंगल गुण होते हैं, जो दाद और खुजली को कम कर सकता है। इसी वजह से कई क्रीम में हल्दी पाउडर और हल्दी के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं, हल्दी का तेल एंटीडर्माटोफाइटिक गतिविधि भी प्रदर्शित करता है, जो दाद को ठीक कर सकता है (14)

6. एलोवेरा 

सामग्री :

  • एक एलोवेरा की पत्ती

उपयोग का तरीका :

  • एलोवेरा की पत्ती को सबसे पहले अच्छे से धो लें।
  • एलोवेरा की पत्ती को काटकर चम्मच की मदद से उसका जेल निकालें।
  • ध्यान रहे, एलोवेरा में से निकलने वाले पीले पदार्थ (एलो-लेटेक्स) को अलग कर दें, उसे इस्तेमाल में न लाएं।
  • फिर यह जेल दाद वाले हिस्से पर लगाएं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में दो से तीन बार दोहरा सकते हैं।

कैसे लाभदायक है :

एक रिसर्च में कहा गया है कि एलोवेरा से भी दाद से बचाव किया जा सकता है। स्टडी के मुताबिक, यह एंटीफंगल ड्रग की तरह कार्य कर सकता है। दरअसल, इसमें एंटीफंगल गतिविधि होती है, जो फंगल इंफेक्शन को कम करके इससे राहत दिला सकती है (15)। इसी वजह से इसे दाद की अचूक दवा भी माना जाता है।

7. नीम 

सामग्री :

  • नीम की पत्तियां या नीम के तेल की कुछ बूंदें

उपयोग का तरीका :

  • दाद वाले भाग पर नीम का तेल लगाएं।
  • तेल न हो, तो नीम की पत्तियों को पीसकर भी लगा सकते हैं।

कैसे लाभदायक है :

नीम दाद की आयुर्वेदिक दवा की तरह कार्य करने की क्षमता रखता है। एक रिसर्च में कहा गया है कि यह त्वचा, पैरों के नाखून और बालों को प्रभावित करने वाले दाद के फंगस को खत्म करने में मदद कर सकता है। माना जाता है कि इसमें मौजूद फंगीसाइडस (Fungicides) इस फंगल इंफेक्शन से बचाने में मदद कर सकता है (16) 

8. ऑरेगैनो ऑयल (Oregano Oil) 

सामग्री :

  • ऑरेगैनो ऑयल की कुछ बूंदें

उपयोग का तरीका :

  • दाद वाले हिस्से पर ऑरेगैनो ऑयल की कुछ बूंदें डालें।
  • फिर उसे ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को रोजाना दो से तीन बार दोहराया जा सकता है।

कैसे लाभदायक है :

ऑरेगैनो ऑयल से भी दाद का घरेलू उपचार किया जा सकता है। एसेंशियल ऑयल को लेकर हुए एक रिसर्च के मुताबिक, इससे एथलीट फूट यानी पैर का रिंग वॉर्म ठीक हो सकता है। इससे बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन से बचाव किया जा सकता है (17)। माना जाता है कि ऑरेगैनो में मौजूद एंटीफंगल प्रभाव की वजह से ही यह टिनिया कॉर्पोरिस (Tinea Corporis) और  टिनिया पेडिस (Tinea Pedis) के खिलाफ प्रभावी रूप से काम कर सकता है (18)

9. सरसों के बीज 

सामग्री :

  • थोड़े-से सरसों के बीज

उपयोग का तरीका :

  • सरसों के बीज को आधे घंटे तक पानी में भिगोएं। फिर उसके बाद उन्हें पीसकर मोटा पेस्ट बना लें।
  • इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाएं।

कैसे लाभदायक है :

सरसों के बीज को दाद की आयुर्वेदिक दवा माना जाता है। इस बात का जिक्र एक रिसर्च पेपर में भी मिलता है। कहा जाता है कि यह दाद खाज खुजली का उपचार करने में मदद कर सकता है। दरअसल, इसमें मौजूद  कैरोटीन, विटामिन, सल्फर और ल्यूटिन को डर्मल प्रोब्लम यानी त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह सारे तत्व एटीफंगल की तरह कार्य कर सकते हैं (19)

10. ब्लीच (Sodium Hypochlorite) 

सामग्री :

  • एक छोटा चम्मच ब्लीच
  • ब्लीच की मात्रा में ही पानी

उपयोग का तरीका :

  • ब्लीच और पानी को एक साथ मिलाएं।
  • रूई के एक टुकड़े को इसमें भिगोएं और इसे प्रभावित भाग पर लगाएं।
  • ध्यान रहे कि ब्लीच आसपास के भाग पर न लगे।
  • इसे अपने आप सूखने दें।
  • अगर असहजता महसूस नहीं हो रही है, तो इसे तुरंत न धोएं।

कैसे लाभदायक है :

ब्लीच में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जिस कारण इसे दाद पर लगाने से कीटाणुओं को पनपने से रोका जा सकता है (20)। इसका अधिकतर इस्तेमाल पैर के दाद पर किया जाता है। एक रिसर्च में कहा गया है कि यह पांच मिनट के अंदर फंगस का खात्मा करने की क्षमता रखता है (21)। हां, संवेदनशील त्वचा वालों को यह दाद का घरेलू उपाय नहीं आजमाना चाहिए।

11. लैवेंडर ऑयल 

सामग्री : 

  • लैवेंडर ऑयल की 8-10 बूंदें
  • दो से तीन बूंद ऑलिव ऑयल

उपयोग का तरीका :

  • लैवेंडर ऑयल और ऑलिव ऑयल को मिलाएं।
  • इसे प्रभावित हिस्से पर लगाकर छोड़ दें।

कैसे लाभदायक है :

दाद के घरेलू नुस्खे में लैवेंडर ऑयल का नाम भी शुमार है। इसमें भी एंटीफंगल गुण होता है। इसी वजह से माना जाता है कि दाद के कारण फंगस को यह खत्म करने का काम कर सकता है (22)। इसके इस्तेमाल से पैर के दाद के साथ ही अन्य रिंग वॉर्म के प्रभाव को भी कम किया जा सकता है (23)

12. नीलगिरी तेल (Eucalyptus Oil) 

सामग्री :

  • एक छोटा चम्मच नीलगिरी तेल
  • नीलगिरी तेल को डायल्यूट करने के लिए पानी

उपयोग का तरीका :

  • पानी और तेल को आपस में मिला लें।
  • अब रूई की मदद से उसे दाद प्रभावित हिस्से पर लगाएं।
  • फिर जितनी देर हो सके रूई को वहीं रहने दें।

कैसे लाभदायक है :

नीलगिरी तेल में शक्तिशाली एंटी-फंगल प्रभाव होता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च में इसे फंगल इंफेक्शन के लिए एक अच्छा टॉपिकल (ऊपर से लगाने वाला) उपाय बताया है (24)। जैसे कि हम ऊपर बता ही चुके हैं कि दाद एक फंगल इंफेक्शन है। इसी वजह से नीलगिरी तेल को इंफेक्शन से राहत दिलाने वाला दाद का घरेलू उपाय माना जाता है।

पढ़ते रहें

दाद के घरेलू उपाय के बाद जानते हैं कि डॉक्टर की सलाह कब ली जानी चाहिए।

दाद के लिए डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

जैसा कि हम ऊपर बता ही चुके हैं कि दाद फैलने वाली बीमारी है। अगर यह बहुत ज्यादा फैल गया हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, लंबे समय से घरेलू उपाय करने के बाद भी अगर दाद में कोई सुधार न आ रहा हो, तो विशेषज्ञ से परामर्श लें।

अब हम दाद का निदान कैसे किया जाता है, इसकी जानकारी दे रहे हैं।

दाद का निदान – Diagnosis of Ringworm in Hindi

त्वचा रोग विशेषज्ञ अक्सर स्किन को देखकर ही दाद का निदान करते हैं। इसके अलावा, कुछ जांच भी की जा सकती है। निदान के तरीके और जांच कुछ इस प्रकार हैं (5):  

  • सबसे पहले डॉक्टर प्रभावित त्वचा के लक्षण के बारे में पूछेगा और समझेगा कि वो दाद के लक्षण से मिलते हैं या नहीं।
  • माइक्रोस्कोप से प्रभावित त्वचा को हल्का छूकर या खरोंचकर देखने से डॉक्टर बता सकता है कि यह दाद है या नहीं।
  • फंगस की जांच करने के लिए स्किन का सैंपल लैब भिजवाया जा सकता है।
  • इसके अलावा, गंभीर मामलों में  त्वचा की बायोप्सी से भी दाद का पता लग सकता है। 

अब इलाज जानें 

दाद के निदान के बाद दाद की दवा करने के लिए दाद खाज खुजली का इलाज क्या हो सकता है, यह जानेंगे।   

दाद का इलाज – Treatment of Ringworm in Hindi

दाद का उपचार संक्रमित स्थान और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। दाद के कुछ प्रकार ओवर-द-काउंटर दवाओं यानी बिना डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दाद की दवा से भी किया जा सकता है। नीचे हम बता रहे हैं कि पुराने दाद का इलाज करने के लिए कौन-सी दाद खाज खुजली की दवा लगाई जा सकती है (25)

  • एथलीट फुट (टिनिया पेडिस) और जॉक इच (टिनिया क्रूरिस) जैसे दाद का उपचार आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह तक त्वचा पर लगाए जाने वाले एंटिफंगल क्रीम, लोशन या पाउडर से किया जा सकता है।
  • दाद खाज खुजली का इलाज क्लोट्रिमेजोल (लोट्रिमिन और मायसेलेक्स) से हो सकता है।
  • माइकोनाजोल
  • दाद खाज खुजली का इलाज करने के लिए टर्बिनाफाइन (लामिसिल) दवा ली जा सकती है।
  • केटोकोनाजोल (जोलेगेल)।

नोट – किसी प्रकार के दुष्प्रभाव से बचने के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टरी परामर्श पर करें। 

दाद का इलाज जानने के बाद अब जानिए कि दाद होने पर क्या नहीं खाना चाहिए और क्या खाना चाहिए।  

दाद में क्या खाना चाहिए – Foods to Eat for Ringworm in Hindi 

नीचे हम बताएंगे कि दाद होने पर क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। पहले हम बता रहे हैं कि दाद होने पर क्या खाना चाहिए (26) (27): 

  • ऐसा भोजन करें, जिसमें विटामिन-ए भरपूर मात्रा में हो। विटामिन-ए इम्यून सिस्टम को दुरुस्त कर फंगस से लड़ने में मदद कर सकता है।
  • इसके अलावा, विटामिन-ई भी इम्यून सिस्टम को बेहतर करके इन्फेक्शन से बचा सकता है। इसके लिए खानपान में ओलिव ऑयल व बादाम आदि का सेवन कर सकते हैं।
  • अपने खानपान में अदरक और लहसुन भी शामिल करें। जैसा कि हम ऊपर बता ही चुके हैं कि लहसुन से दाद का उपचार, उसके एंटीफंगल गुण के कारण होता है। इसके अलावा, अदरक में भी यह प्रभाव पाया जाता है।

आगे हम बता रहे हैं कि दाद होने पर क्या नहीं खाना चाहिए (28):

  • जंक फूड।
  • तला हुआ खाना।
  • अधिक नमक युक्त खाना
  • अत्यधिक मिर्च वाला। 

अंत तक पढ़ें

अब हम दाद से बचाव के तरीके के बारे में बता रहे हैं।

दाद से बचाव – Prevention Tips for Ringworm in Hindi

ऊपर बताए गए दाद के घरेलू इलाज के साथ ही बचाव का तरीका अपनाकर भी इसे फैलने से रोका जा सकता है। इसी वजह से नीचे हम दाद से बचाव के कुछ टिप्स दे रहे हैं (29) : 

  • स्किन को सूखा और साफ रखें।
  • ऐसे जूते पहने जिनके अंदर हवा पास हो सके।
  • किसी दूसरे का तौलिया, कपड़े जैसी किसी वस्तु का इस्तेमाल न करें।
  • स्विमिंग पूल एरिया या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बिना चप्पल के न जाएं।
  • पालतू जानवरों के साथ खेलने के बाद हमेशा हाथ धोएं।
  • कोई खेल खेलने के बाद हमेशा नहाएं।
  • अपने अंतर्वस्त्र और जुराबें रोजाना बदलें।
  • दाद अगर हो गया है, तो उस हिस्से को बार-बार छूने से बचें।
  • उसमें क्रीम या कोई अन्य घरेलू दाद खाज खुजली की दवा लगाने से पहले हाथों को अच्छे से धो लें।

दाद खाज खुजली की दवा के साथ ही कुछ घरेलू उपाय और बचाव के तरीके मददगार साबित हो सकते हैं। अब यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि दाद होने पर क्या करें? झट से इस दाद-खुजली वाले लेख में बताए गए दाद के घरेलू उपचार की मदद ले लें। बस ध्यान दें कि यह ऐसी समस्या है, जिसमें सावधान रहना बहुत जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही की वजह से यह बहुत फैल सकता है। उम्मीद करते हैं कि यहां दी गई सभी जानकारी आपके काम आएगी। अब लेख में आगे हम रिडर्स द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब दे रहे हैं।  

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

क्या दाद संक्रामक है? यदि हां, तो कब तक?

हां, दाद एक संक्रामक रोग है। जब तक दाद ठीक नहीं हो जाता है, तब उसे छूने या उसके संपर्क में आई हुई चीजों को छूने से दाद हो सकता है (30)

क्या गर्भवती महिला के लिए दाद खतरनाक है?

नहीं, गर्भावस्था में दाद हो जाना गर्भवती के लिए कोई खतरे का संकेत नहीं है। दाद केवल ऊपरी त्वचा को प्रभावित करता है, जिससे होने वाले बच्चे पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।

क्या दाद को खत्म करने के लिए आयोडीन का इस्तेमाल कर सकते हैं?

हां, स्पेशल आयोडीन और डायल्यूट एसिटिक एसिड की मदद से पुराने दाद का इलाज किया जा सकता है। लेकिन, इसे घर में आयोडीन की मदद से दाद को खत्म करने की कोशिश न करें (31)

दाद से निजात पाने व उसे ठीक होने में कितना समय लग सकता है?

दाद को खत्म से निजात पाने में दो से चार हफ्ते का समय लग सकता है (32)। हालांकि, यह समस्या की गंभीरता पर भी निर्भर करता है।

कैसे दाद को फैलने से रोका जा सकता है?

लेख में ऊपर बताए गए दाद से बचाव के टिप्स को अपनाकर इसे फैलने से रोका जा सकता है।

दाद और एक्जिमा के बीच क्या अंतर है?

दादा एक फंगल संक्रमण है जबकि एक्जिमा एक तरह की एलर्जी है।

दाद और सोरायसिस के बीच क्या अंतर है?

सोरायसिस एक इंफ्लेमेटरी चर्म रोग है, जो आनुवंशिक, पर्यावरणीय और प्रतिरक्षात्मक कारक के कारण होता है (33)। वहीं, रिंग वॉर्म फंगल इंफेक्शन है।

क्या दाद हमेशा खुजलीदार होता है?

नहीं, हमेशा दाद में खुजली नहीं होती है। जैसे-जैसे यह फैलता जाता है खुजली होने लग सकती है।

दाद कैसा दिखता है?

हम ऊपर बता ही चुके हैं कि दाद गोलाकार व अंगूठी के आकार का होता है। इसके किनारे लाल दिख सकते हैं।

अगर दाद का इलाज न किया जाए, तो क्या होगा?

दाद फैलने वाला रोग है। अगर दाद खाज खुजली का उपचार न किया जाए, तो यह फैलता चला जाएगा और अन्य समस्याओं को उत्पन्न कर सकता है। इसी वजह से नए और पुराने दाद का इलाज करना जरूरी होता है।

दाद की अचूक दवा क्या है?

लेख में ऊपर बताए गए दाद के घरेलू नुस्खे छोटे-मोटे दाद की अचूक दवा साबित हो सकते हैं। इसके अलावा, दाद की अचूक दवा के लिए डॉक्टर से भी संपर्क किया जा सकता है।

क्या नींबू से दाद का इलाज हो सकता है?

नींबू से दाद का इलाज करने की पुष्टि किसी रिसर्च में स्पष्ट तरीके से नहीं हुई है। हां, नीबू के तेल और छिलके इसमें मददगार हो सकते हैं।

दाद क्यों होता है?

दाद क्यों होता है, इसका जवाब लेख में ऊपर दाद होने के कारण वाले भाग में विस्तार पूर्वक बताया गया है।

 31 संदर्भ (Sources):

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Auli Tyagi

औली त्यागी उभरती लेखिका हैं, जिन्होंने हरिद्वार (उत्तराखंड) से पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए. की डिग्री हासिल की है। औली को लेखन के क्षेत्र में दो साल का अनुभव है। औली प्रतिष्ठित दैनिक अखबार और कम्युनिटी रेडियो स्टेशन से ट्रेनिंग ले चुकी हैं। औली सामाजिक मुद्दों पर लिखना पसंद करती हैं। लेखन के अलावा इन्हें वीडियो एडिटिंग और फोटोग्राफी का तकनीकी ज्ञान भी हैं। इन्हें हिंदी और उर्दू साहित्य में विशेष रुचि है।

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