दालचीनी की चाय के फायदे और नुकसान – Cinnamon Tea Benefits and Side Effects in Hindi

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अपने दिन की शुरुआत ज्यादातर लोग चाय के साथ करते हैं। इसे नींद को दूर भगाने और शरीर को ताजगी से भरने वाला पेय पदार्थ माना जाता है। क्या आप जानते हैं कि साधारण सी चाय में कुछ आसानी से उपलब्ध औषधीयों को मिलाकर कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। ऐसी ही एक औषधि दालचीनी है। चाय में दालचीनी मिलाकर पीने से कई फायदे मिल सकते हैं। इसी वजह से स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल में हम दालचीनी की चाय के फायदे बता रहे हैं। साथ ही यहां हम दालचीनी की चाय बनाने की विधि और सावधानी के तौर पर दालचीनी की चाय के नुकसान पर भी चर्चा करेंगे।

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आर्टिकल की शुरुआत करते हैं सेहत के लिए दालचीनी की चाय के फायदे के साथ।

दालचीनी की चाय के फायदे – Benefits of Cinnamon Tea in Hindi

दालचीनी की चाय में कई प्रकार के पाेषक तत्व और औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इससे मिलने वाले फायदे के बारे में हम नीचे बता रहे हैं। बस ध्यान दें कि दालचीनी की चाय किसी गंभीर बीमारी का इलाज नहीं है। हां, इसे स्वस्थ रहने और बीमारी से बचने के लिए डाइट में शामिल किया जा सकता है। चलिए, आगे जानते हैं स्वास्थ्य के लिए दालचीनी की चाय के फायदे क्या हैं।

1. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर

दालचीनी की चाय में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होता है। एक शोध में पाया गया है कि दालचीनी की चाय में मौजूद पॉलीफेनोल एंटीऑक्सीडेंट्स की तरह कार्य करते हैं। रिसर्च में आगे इस बात का भी जिक्र मिलता है कि दालचीनी की चाय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स को कम करने में मददगार हो सकता है (1)

दरअसल, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कई प्रकार की बिमारियों के साथ ही शरीर की एजिंग प्रक्रिया में तेजी लाने, ट्रॉमा और स्ट्रोक का कारण बन सकता है। इसके अलावा, फ्री रेडिकल्स को सूजन, कैंसर, मानसिक तनाव का कारण माना जाता है (2)

2. स्वस्थ्य हृदय के लिए

हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारक में से एक है, चयापचय सिंड्रोम। चयापचय सिंड्रोम में इंसुलिन प्रतिरोध, ग्लूकोज लेवल बढ़ना, मोटापा, उच्च रक्तचाप जैसी अनेक समस्याएं होती हैं, जो गंभीर हृदय रोग की वजह बन सकती हैं। रिसर्च के अनुसार, दालचीनी का सेवन करके चयापचय सिंड्रोम और हृदय रोग के जोखिम से बचाव हो सकता है (3)

दरअसल, दालचीनी के अर्क में एंटी-डायबिटिक, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव होते हैं, जो कार्डियोप्रोटेक्टिव एजेंट की तरह कार्य करने के साथ ही चायपचय सिड्रोम को कम कर सकते हैं (3)। इनके अलावा, एक अन्य शोध में कहा गया है कि दालचीनी की चाय शरीर में शुगर की मात्रा को बढ़ने नहीं देती है, जिससे हृदय को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है (1)

3. मधुमेह की समस्या में

दालचीनी की चाय का सेवन मधुमेह की समस्या में भी फायदेमंद हो सकता है। शोध के अनुसार, मधुमेह के मरीज दालचीनी को डाइट में शामिल करके डायबिटीज को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। रिसर्च में आगे बताया गया है कि इसमें हाइपोग्लासेमिक यानी ब्लड ग्लूकोज को कम करने वाला प्रभाव होता है (4)। एक अन्य अध्ययन के अनुसार, दालचीनी और इसके अर्क में मौजूद पॉलीफेनॉल्स शरीर के सीरम ग्लूकोज को कम और इंसुलिन को बेहतर करके डायबिटीज से बचा सकते हैं (5)

4. एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल प्रभाव

दालचीनी की चाय में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल दोनों प्रभाव होते हैं (6)। शोध के अनुसार, दालचीनी की चाय में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल प्रभाव ओरल इंफेक्शन से संबंधित बैक्टीरिया से बचाने में मदद कर सकता है (7)। इसके अलावा, दालचीनी की चाय में फंगल इंफेक्शन को कम करने वाला एंटी-फंगल प्रभाव भी होता है। इससे फंगल संक्रमण और उससे संबंधित लक्षणों को कम किया जा सकता है (6)

5. वजन नियंत्रण

बढ़ता वजन या मोटापा हर व्यक्ति के लिए एक चिंता का विषय है। इससे बचने के लिए दालचीनी की चाय का सेवन किया जा सकता है। जी हां, मोटापा घटाने के लिए दालचीनी को असरदार माना जाता है। इस विषय पर हुए अध्ययन के अनुसार, दालचीनी का अर्क बढ़ते वजन को नियंत्रित कर सकता है। इसकी वजह दालचीनी में मौजूद एंटी ओबेसिटी प्रभाव को माना जाता है। इससे अतिरिक्त मोटापे की समस्या को भी कुछ कम किया जा सकता है (8)

6. मासिक धर्म

दालचीनी की चाय डिसमेनोरिया यानी मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को कम कर सकती है। एक अध्ययन के दौरान कुछ महिलाओं को दो मासिक चक्र के तकरीबन 3 दिन पहले दालचीनी दी गई। इसके बाद डिसमेनोरिया में कमी पाई गई (9)। इसके अलावा, दालचीनी से मासिक धर्म के दौरान होने वाले अधिक रक्तस्राव, उल्टी और मतली की गंभीरता को कम किया जा सकता है (10)

7. त्वचा के लिए

अध्ययन बताते हैं कि दालचीनी कोलेजन गठन को बढ़ावा दे सकती है और त्वचा की इलास्टिसिटी को बढ़ा सकती है। साथ ही इसे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को कम करने के लिए भी जाना जाता है। दरअसल, शोध में दिया गया है कि दालचीनी के अर्क में एंटी एजिंग प्रभाव होता है, जो एजिंग प्रोसेस और बढ़ती उम्र के लक्षण को कम करने में मदद कर सकता है (11)

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दालचीनी की चाय के फायदे के बाद यहां हम इसमें पाए जाने वाले पौष्टिक तत्वों की जानकारी दे रहे हैं।

दालचीनी की चाय के पौष्टिक तत्व –  Cinnamon Tea Nutritional Value in Hindi

दालचीनी की चाय के फायदे हम आपको बता ही चुके हैं। दालचीनी की चाय में दालचीनी पाउडर डाला जाता है, इसलिए इसमें इसी मसाले में मौजूद पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसी वजह से आगे हम दालचीनी पाउडर में मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी दे रहे हैं (12)

पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 ग्राम
पानी 10.58 g
ऊर्जा247 kcal
प्रोटीन3.99 g
फैट1.24 g
फाइबर53.1 g
कार्बोहाइड्रेट80.59 g
शुगर2.17 g
कैल्शियम1002 mg
आयरन8.32 mg
मैग्नीशियम60 mg
फास्फोरस64 mg
पोटेशियम431 mg
सोडियम10 mg
जिंक1.83 mg
मैंगनीज17.466 mg
 कॉपर0.339 mg
सिलेनियम3.1 μg
विटामिन-सी3.8 mg
थियामिन0.022 mg
राइबोफ्लेविन0.041 mg
नियासिन1.332 mg
पैंटोथैनिक एसिड0.358 mg
विटामिन-बी 60.158 mg
फोलेट6 μg
विटामिन-ए15 μg
कैरोटीन, बीटा          112 μg
  कैरोटीन, अल्फा  1 μg
लाइकोपीन 15 μg
ल्यूटिन + जेक्सैंथिन222 μg
विटामिन ई (अल्फा-टोकोफेरॉल)2.32 mg

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पोषक तत्वों के बाद जानिए दालचीनी की चाय बनाने का तरीका क्या है।

दालचीनी की चाय बनाने की विधि – How to Prepare Cinnamon Tea in Hindi

घर में ही आसानी से दालचीनी की चाय को बनाया जा सकता है। चलिए, आगे दालचीनी की चाय बनाने का तरीका जानते हैं।

सामग्री:

  • दो से तीन दालचीनी की छाल या आधा चम्मच दालचीनी पाउडर
  • दो गिलास पानी
  • शहद आवश्यकतानुसार

बनाने की विधि:

  • सबसे पहले एक बर्तन में पानी डालकर गैस पर रखें।
  • अब दालचीनी की छाल या पाउडर को 15 से 20 मिनट तक पानी में उबालें।
  • वैकल्पिक रूप से इसमें कुछ चाय की पत्ती भी डाल सकते हैं।
  • फिर इसके गुनगुना होने के बाद शहद मिला लें। आप चाहें, तो बिना शहद के भी इसे पी सकते हैं।
  • बस दालचीनी की चाय बनकर तैयार है। अब इसे गर्मागर्म पी लें।

लेख में बने रहें

आर्टिकल के इस हिस्से में हम दालचीनी की चाय पीने का सही समय बता रहे हैं।

दालचीनी की चाय पीने का सही समय – When to Drink Cinnamon Tea in Hindi

दालचीनी की चाय को अन्य चाय की तरह ही किसी भी समय पी सकते हैं। अगर वजन कम करना है, तो 50ml दालचीनी की चाय सुबह-सुबह खाली पेट ले सकते हैं। इसे बनाने के लिए इसमें 3 से 5 ग्राम दालचीनी पाउडर डाल सकते हैं (13)

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अब एक नजर डालिए दालचीनी की चाय के नुकसान पर।

दालचीनी की चाय के नुकसान – Side Effects of Cinnamon Tea in Hindi

दालचीनी की चाय के फायदे तो हम बता चुके हैं, लेकिन इसका अधिक सेवन करने से नुकसान भी हो सकते हैं। इसी वजह से हम नीचे दालचीनी की चाय के नुकसान के बारे में बता रहे हैं (7) (14) (15) (16)

  • दालचीनी का एसेडिक नेचर दांतों के इनेमल यानी टिश्यू को नुकसान पहुंचा सकता है
  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पेट संबंधी) विकार
  • एलर्जी
  • लिवर संबंधी समस्या
  • ग्लूकोज लेवल का कम होना, जिससे व्यक्ति ऊर्जाहीन महसूस कर सकता है

यह तो स्पष्ट हो गया है कि दालचीनी की चाय का सेवन केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि स्वस्थ रहने के लिए भी किया जा सकता है। यहां हमने दालचीनी की चाय बनाने का तरीका भी बताया है। बस तो दालचीनी की चाय के लाभ और गुण जानने के बाद आप इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं। हां, दालचीनी की चाय के लाभ उठाने के लिए इसका सेवन संयमित मात्रा में ही करें, अन्यथा दालचीनी की चाय के नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैं कितनी बार दालचीनी की चाय पी सकता हूं?

आप दिन में एक से दो बार दालचीनी की चाय पी सकते हैं।

क्या मैं दालचीनी की चाय रोज पी सकता हूं?

हां, आप दालचीनी की चाय को अन्य चाय की तरह ही रोजाना पी सकते हैं।

क्या रात को दालचीनी की चाय पीना ठीक है?

हां, रात को सोने से कुछ समय पहले दालचीनी की चाय पी सकते हैं।

क्या दालचीनी अदरक की चाय बनाई जा सकती है?

हां, दालचीनी अदरक की चाय बनाई जा सकती है। इसके लिए बस सामान्य चाय में दालचीनी और अदरक की कुछ मात्रा डाल दें।

16 Sources

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Saral Jain

सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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