दारुहरिद्रा के फायदे, उपयोग और नुकसान – All about Daruharidra in Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन जर्नलिज्म मीडिया कम्युनिकेशन)

विश्वभर में अनेक लाभदायक पौधे हैं, जिनमें से कुछ एक से तो हम वाकिफ होते हैं, लेकिन कई से अनजान। ऐसा ही एक पौधा दारुहरिद्रा भी है। आयुर्वेद में दारुहरिद्रा का उपयोग इसके औषधीय गुणों की वजह से सालों से किया जाता रहा है। इस लाभकारी के फायदों से अंजान होने के कारण हम इसका उपयोग नहीं कर पाते। इसी वजह से स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम दारुहरिद्रा से जुड़ी जानकारी लेकर आए हैं। यहां आप दारुहरिद्रा के फायदे के साथ ही उपयोग और पौष्टिक तत्वों को जान पाएंगे।

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सबसे पहले समझते हैं कि दारुहरिद्रा क्या है और कैसी दिखती है।

दारुहरिद्रा क्या है – What is Daruharidra in Hindi

दारुहरिद्रा कुछ और नहीं, बल्कि एक औषधीय पौधा है, जो बर्बेरिडेसी परिवार से संबंध रखता है। इसे भारतीय बेरबेरी, दारुहल्दी, दरवी, चित्रा जैसे नामों से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम बर्बेरिस अरिस्टाटा है। प्राचीन काल से ही इस पौधे को आयुर्वेद में इस्तेमाल किया जाता रहा है (1)। इस पौधे का हर भाग लाभदायक होता है, लेकिन विशेषतौर पर इसकी जड़ को ही औषधि कहा गया है।

अध्ययनों के अनुसार, बर्बेरिस यानी बर्बेरी की अन्य तीन प्रजातियों को भी दारुहरिद्रा के नाम से ही जाना और इस्तेमाल किया जाता है। जी हां, विभिन्न राज्यों में बर्बेरिस अरिस्टाटा के अलावा बर्बेरिस एशियाटिका, बर्बेरिस चिट्रिया और बर्बेरिस लाइसियम को भी दारुहरिद्रा ही कहा जाता है। हालांकि, सही मायने में दारुहरिद्रा, बर्बेरिस अरिस्टाटा ही है (2)। इसके पत्ते गहरे हरे और चमकीले होते हैं। साथ ही इसके फल लाल रंग के नजर आते हैं।

नीचे है पूरी जानकारी

आइए, अब जानते हैं कि दारुहरिद्रा के फायदे किस तरह से हो सकते हैं।

दारुहरिद्रा के फायदे – Benefits of Daruharidra in Hindi

दारुहरिद्रा में कई तरह के गुण हैं। इन्हीं गुणों के कारण स्वास्थ्य पर दारुहरिद्रा के फायदे नजर आते हैं। यहां हम दारुहरिद्रा के फायदे जरूर साझा कर रहे हैं, लेकिन ध्यान रहे कि दारुहरिद्रा के गुण किसी गंभीर बीमारी का इलाज नहीं कर सकते। यह बस शारीरिक समस्या से बचाव और उनके लक्षणों को कम करने में योगदान दे सकते हैं। अब जानते हैं स्वास्थ्य के लिए दारुहरिद्रा के फायदे।

1. डायरिया

दारुहरिद्रा का सेवन करने से डायरिया यानी दस्त की परेशानी को कुछ कम किया जा सकता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) द्वारा प्रकाशित रिसर्च पेपर में भी इस बात का जिक्र मिलता है। शोध के अनुसार, दारुहरिद्रा में मौजूद बेरबेरीन कंपाउंड दस्त की शिकायत को कुछ हद तक दूर करने में सहायक साबित हो सकता है (2)। इसके लिए दारुहरिद्रा के अर्क को सीधे या फिर किसी जूस में मिलाकर मिश्रण के रूप में लिया जा सकता है (1)।

2. मधुमेह

दारुहरिद्रा के फायदे में डायबिटीज को नियंत्रित करना भी शामिल है। एक शोध में बताया गया है कि इस पौधे में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक प्रभाव होता है। इसका मतलब है कि दारुहरिद्रा का पौधा ब्लड ग्लूकोज के स्तर को कम करने की क्षमता रखता है (1)। इस आधार पर मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए दारुहरिद्रा का उपयोग किया जा सकता है।

मधुमेह के स्तर को नियंत्रित करने के लिए दारुहरिद्रा की जड़ और फल दोनों को ही उपयोगी माना जाता है (3)। एक अन्य रिसर्च में कहा गया है मोटापे के कारण मधुमेह की समस्या हो सकती है। ऐसे में मोटापे को नियंत्रित करके दारुहरिद्रा औषधि मधुमेह के जोखिम से बचाव कर सकती है (4)।

3. पाइल्स

पाइल्स यानी बवासीर की शिकायत होने पर भी दारुहरिद्रा का उपयोग किया जा सकता है (5)। साथ ही दारुहरिद्रा की जड़ को पकाकर बनने वाले रसौंत को खूनी बवासीर के लिए अच्छा माना गया है। इसके लिए प्रभावित क्षेत्र को पतले रसौंत से धोया जाता है (6)। रिसर्च में जिक्र मिलता है कि बेरबेरीन कंपाउंड के कारण ही दारुहरिद्रा पाइल्स के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। साथ ही इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी प्रभाव भी होता है, जो पाइल्स संबंधी सूजन को कम कर सकता है (7)।

4. आंखों के लिए

दारुहरिद्रा को आंखों से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए भी जाना जाता है (2)। एक रिसर्च पेपर के अनुसार, दारुहरिद्रा से बनने वाले रसौंत से आंखों के इंफ्लेमेशन यानी ऑप्थल्मिया से बचाव हो सकता है। साथ ही आंख आने यानी कंजंक्टिवाइटिस से भी कुछ राहत मिल सकती है (6)।

एक शोध की मानें, तो दारुहरिद्रा में मौजूद एंटी बैक्टीरियल, एंटी एलर्जिक और एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव के कारण यह आंखों की समस्या के लिए लाभकारी माना जाता है (8)। इसके लिए दारुहरिद्रा की जड़ को कपड़े में बांधने के बाद इसके अर्क में कपड़े को भिगोकर आंखों की सिकाई कर सकते हैं। साथ ही इसका लेप बनाकर आंखों के आसपास लगाया जा सकता है।

5. बुखार

बुखार होने पर भी दारुहरिद्रा का सेवन किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के अनुसार, दारुहरिद्रा में एंटी पायरेटिक यानी बुखार को कम करने वाला प्रभाव होता है। शोध में लिखा है कि यह सामान्य बुखार के साथ ही मलेरिया के कारण होने वाले बुखार से भी बचाव कर सकता है (1)।

दरअसल, बुखार होने के कारणों में से एक बैक्टीरिया और वायरस से होने वाला संक्रमण भी है (9)। ऐसे में दारुहरिद्रा में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबिएल क्षमता से भी बुखार कम हो सकता है (1)। साथ ही इसका बर्बेरिन कंपाउंड भी बुखार और इंफेक्शन दोनों से बचाव कर सकता है। इस आधार पर बुखार में दारुहरिद्रा के अर्क और काढ़े का उपयोग फायदेमंद माना जा सकता है (7)।

6. इंफ्लेमेशन

सूजन जैसी समस्या से बचाव के लिए भी दारुहरिद्रा का उपयोग लाभकारी हो सकता है। दरअसल, इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होता है, जिसे सूजन की समस्या से बचाव और राहत पाने के लिए जाना जाता है (10)। वक्त रहते सूजन की समस्या पर गौर न किया जाए, तो डीएनए क्षति हो सकती है और कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है (11)। ऐसे में दारुहरिद्रा के जड़ व अर्क में मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण का लाभ उठाया जा सकता है (12)।

7. त्वचा के लिए फायदेमंद

स्किन संबंधी समस्याओं से बचाव के लिए बर्बेरिन कंपाउंड युक्त पदार्थों को फायदेमंद बताया जाता है। दारुहरिद्रा में भी यह कंपाउंड मौजूद होता है। इस आधार पर त्वचा विकार के लिए दारुहरिद्रा को लाभदायक माना जा सकता है (7)।

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आगे जानिए कि दारुहरिद्रा में किस तरह के पोषक तत्व और औषधीय गुण होते हैं।

दारुहरिद्रा के पौष्टिक तत्व और औषधीय गुण- Daruharidra Nutritional Value in Hindi

दारुहरिद्रा में विटामिन-सी मौजूद होता है। फाइटोकेमिकल अध्ययनों से पता चलता है कि इसमें एल्कलॉइड बर्बेरिन, ऑक्सीबेरिन, बेरबामाइन, एरोमोलिन, प्रोटोबेरबेरिन एल्कलॉइड कराचिन, पामेटाइन, ऑक्सीकैंथिन, टैक्सिलमाइन और टैनिन, शुगर और स्टार्च भी होता है। साथ ही इसमें कई औषिधिय गुण भी होते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (15):

  • एंटी इंफ्लेमेटरी यानी सूजन को कम करने वाला प्रभाव
  • बुखार कम करने वाला एंटी पायरेटिक गुण
  • फंगस की रोकथाम करने वाली एंटी फंगल गतिविधियां
  • एंटी बैक्टीरियल एक्टीविटी, जिससे बैक्टीरियल संक्रमण से बचा जा सकता है
  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स
  • कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने वाला एंटी कैंसर प्रभाव
  • लिवर को सुरक्षित रखने वाला हेपटोप्रोटेक्टिव इफेक्ट

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लेख के इस भाग में दारुहरिद्रा के उपयोग के तरीके जानिए।

दारुहरिद्रा खाने का सही तरीका – How to Use Daruharidra in Hindi

दारुहरिद्रा के फायदे जानने के बाद अब इसके गुणों को पाने के लिए दारुहरिद्रा का उपयोग भी सही तरीके से करना आवश्यक है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम लेख के इस भाग में दारुहरिद्रा का उपयोग करने के तरीके साझा कर रहे हैं। कुछ इस प्रकार कर सकते हैं दारुहरिद्रा का उपयोग।

  • दारुहरिद्रा के पाउडर या चूर्ण को शहद या दूध के साथ सेवन किया जा सकता है।
  • मधुमेह रोगी दारुहरिद्रा का काढ़ा बनाकर सेवन कर सकते हैं।
  • हल्की-फुल्की सूजन या दर्द की समस्या में दारुहरिद्रा का पेस्ट बनाकर लगा सकते हैं।
  • डॉक्टरी सलाह पर दारुहरिद्रा की कैप्सूल या टैबलेट का सेवन भी कर सकते हैं।

खुराक – दारुहरिद्रा की खुराक को लेकर वैज्ञानिक शोध का अभाव है। लोकमान्यता के आधार पर बात करें, तो पाउडर के रूप में इसे एक चौथाई चम्मच से लेकर आधा चम्मच ले सकते हैं। इसके अलावा, चूर्ण के पैकेट में भी इसके सेवन की मात्रा के बारे में जानकारी मौजूद हो सकती है। वैसे व्यक्ति के स्वास्थ्य और उम्र के आधार पर इसकी मात्रा अलग-अलग हो सकती है, इसलिए दारुहरिद्रा की सही खुराक के बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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दारुहरिद्रा के फायदे व उपयोग के बाद अब इसके नुकसान के बारे में जानते हैं।

दारुहरिद्रा के नुकसान – Side Effects of Daruharidra in Hindi

दारुहरिद्रा के फायदे तो हैं ही, लेकिन इसके अधिक उपयोग से कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। ऐसे में लेख के इस भाग में हम दारुहरिद्रा के नुकसान से जुड़ी कुछ जानकारी दे रहे हैं। चलिए, पढ़ते हैं दारुहरिद्रा के नुकसान।

  • जैसे कि हमने लेख की शुरुआत में ही जानकारी दी है कि दारुहरिद्रा में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण होता है। यह गुण ब्लड ग्लूकोज के स्तर को कम कर सकता है (13)। ऐसे में जिनको लो ब्लड शुगर की समस्या है, वो इसका सेवन न करें।
  • डायबिटीज के मरीज अगर दवा का सेवन करते हैं, तो इसके सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अन्यथा दारुहरिद्रा के एंटी हाइपरग्लाइसेमिक प्रभाव के कारण ग्लूकोज का स्तर हद से ज्यादा कम हो सकता है।
  • दारुहरिद्रा में एंटी फर्टिलिटी प्रभाव होता है (14)। ऐसे में यह प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से गर्भधारण करना चाह रही महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं को भी इसके सेवन से बचने की सलाह दी जाती है।

दारुहरिद्रा के फायदे से जुड़ी पूरी जानकारी हमने इस लेख में दी है। यह एक गुणकारी औषधि है, जिसके फायदे कई सारे हैं, लेकिन अधिक उपयोग से दारुहरिद्रा के नुकसान भी हो सकते हैं। ऐसे में लेख में बताए गए दारुहरिद्रा के फायदे और नुकसान को ध्यान में रखते हुए ही इसे अपने रूटीन में शामिल करें। अगर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या है या किसी प्रकार की दवाई ले रहे हैं, तो दारुहरिद्रा का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या रोज दारुहरिद्रा का सेवन करना ठीक है?

नहीं, किसी भी चीज का सेवन लगातार ज्यादा समय तक करने से फायदे की जगह नुकसान हो सकते हैं। खासकर, दारुहरिद्रा में मौजूद ब्लड शुगर कम करने और एंटी फर्टिलिटी गुण इसे रोजाना सेवन करने के काबिल नहीं बनाते (14)। हां, सीमित समय तक इसे रोजाना कम मात्रा में लिया जा सकता है।

क्या दारुहरिद्रा का सेवन खाली पेट किया जा सकता है?

हां, कम मात्रा में दारुहरिद्रा को खाली पेट भी ले सकते हैं, लेकिन हर किसी के लिए खाली पेट इसका सेवन अच्छा साबित होगा ये जरूरी नहीं। ऐसे में एक बार डॉक्टर से सलाह भी जरूर लें, क्योंकि हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है।

दारुहरिद्रा को काम करने में कितना समय लगता है?

यह पूरी तरह से व्यक्ति के स्वास्थ्य और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है। अनुमान के तौर पर बात करें, तो एक हफ्ते से लेकर एक महीने तक का वक्त लग सकता है।

संदर्भ (Sources)

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  3. Critical Analysis of Pramehaghna Dravyas on the Basis of Rasapanchaka
    https://www.bibliomed.org/mnsfulltext/70/70-1370331860.pdf?1624990509
  4. Review Article: Herbal Approach for Obesity Management
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  6. Rasont – A traditional crude drug prepared from Berberis sp and its uses
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  7. Berberine: Botanical Occurrence Traditional Uses Extraction Methods and Relevance in Cardiovascular Metabolic Hepatic and Renal Disorders
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6111450/
  8. Effect of Daruharidra Aschyotana in Allergic Conjuctival Inflammation – A Clinical Study
    https://www.researchgate.net/publication/215558629_Effect_of_Daruharidra_Aschyotana_in_Allergic_Conjuctival_Inflammation_-_A_Clinical_Study
  9. Fever
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  10. Daruharidra (Berberis aristata): Review based upon its Ayurvedic Properties
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  12. Identification of Novel Anti-inflammatory Agents from Ayurvedic Medicine for Prevention of Chronic Diseases
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    https://www.researchgate.net/publication/350799250_Daruharidra_Berberis_aristata_Review_based_upon_its_Ayurvedic_Properties
  14. PHYTO-PHARMACOLOGY OF BERBERIS ARISTATA DC: A REVIEW
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  15. Berberis aristata: A Review
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