डिप्रेशन (अवसाद) के कारण, लक्षण और घरेलू इलाज – Symptoms Of Depression and Treatment in Hindi

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हर कोई जीवन में एक बार कुछ दिनों तक उदास महसूस जरूर करता है। अधिकतर मामलों में यह उदासी समय के साथ खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ मामलों में यह इतना गंभीर रूप ले लेती है कि रोजमर्रा के कार्य प्रभावित होने लगते हैं। फिर होते-होते इंसान डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। समय के साथ यह समस्या तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। इसी वजह से स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम डिप्रेशन के बारे में जानकारी लेकर आए हैं। यहां हम डिप्रेशन के लक्षण और उपाय के साथ-साथ डिप्रेशन का इलाज कैसे होता है, यह भी बताएंगे।

शुरू करते हैं लेख

सबसे पहले यह समझते हैं कि डिप्रेशन आखिर है क्या।

क्या है अवसाद – What is depression in hindi

डिप्रेशन यानी अवसाद एक प्रकार का मूड डिसऑर्डर है। अगर आसान भाषा में इसे समझें, तो यह वो स्थिति है जब इंसान काफी उदास और दुखी महसूस करता है। यूं तो अधिकांश लोग जिंदगी में कभी-न-कभी दुखी और अकेलापन महसूस करते हैं, लेकिन जब यह उदासी, हताशा या फिर गुस्सा हफ्तों तक बना रहता है, तो उसे डिप्रेशन कहा जाता है (1)। एक सर्वे के मुताबिक, महिलाओं में अवसाद के लक्षण ज्यादा देखे जाते हैं (2)।

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डिप्रेशन को समझने के बाद जानते हैं कि यह समस्या कितनी तरह की होती है।

डिप्रेशन के प्रकार – Types of Depression in Hindi

डिप्रेशन का पक्का इलाज करने के लिए उसके प्रकार के बारे में पता होना जरूरी है। इसी वजह से यहां हम अवसाद के प्रकार के बारे में बता रहे हैं, जो निम्नलिखित हैं (3)-

  1. यूनीपोलर डिप्रेशन (Unipolar Depression): यह अवसाद का सबसे आम रूप है। इस तरह के डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण में कम से कम दो सप्ताह तक के लिए अकेला, थका और उदास महसूस करना शामिल है। इस दौरान व्यक्ति को लगता है कि उसके जीवन में कोई प्रेरणा ही नहीं बची। यूनीपोलर डिप्रेशन में लोगों को सोने में दिक्कत और भूख में कम हो सकती है।
  1. बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar disorder): इस डिप्रेशन के प्रकार में मरीज का मूड बदलता रहता है। एक पल में वह गंभीर डिप्रेशन के लक्षण को झेलता है, तो दूसरे ही पल में वह खुद को ऊर्जावान महसूस करने लगता है। कभी-कभी वह आत्मविश्वास से भर जाता है और कभी काल्पनिक जीवन जीने लगता है।
  1. डिस्थीमिया (Dysthymia): इस अवस्था में मरीज अस्थिर और उदास महसूस करने लगता है, लेकिन इससे रोजमर्रा की जिंदगी इतनी प्रभावित नहीं होती। इसके लक्षण दिन-ब-दिन बदलते हैं और करीब दो साल तक रह सकते हैं।
  1. सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर (Seasonal affective disorder): इस प्रकार के मरीज विशेष मौसम में अवसाद से ग्रस्त होते हैं, जैसे – पतझड़ और सर्दी का मौसम। इस मौसम में प्रकाश की कमी के कारण डिप्रेशन सिम्पटम्स नजर आते हैं, जो वसंत ऋतु के आते-आते खुद ही ठीक होने लगते हैं।
  1. पोस्टनेटल डिप्रेशन (Postnatal Depression): यह डिप्रेशन का वह प्रकार है, जो कुछ महिलाओं में प्रसव के बाद नजर आता है। कभी-कभी यह अवस्था इतनी गंभीर हो जाती है कि मां के लिए अपने बच्चे की देखभाल करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही उसे यह एहसास होने लगता है कि आसपास के लोग उसे समझ नहीं पा रहे हैं। ऐसी अवस्था के कारण मां खुद को दोषी महसूस करने लगती है।
  1. मेजर डिप्रेशन (Major Depression): इस अवस्था में मरीज के मन में उदासी, निराशा या गुस्से की भावना लंबे समय तक रहती है। यह उसके शारीरिक कामकाज को भी प्रभावित करने लगता है (4)।

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अवसाद के प्रकार के बाद सिम्पटम्स ऑफ डिप्रेशन के बारे में जानिए।

डिप्रेशन (अवसाद) के लक्षण – Symptoms of Depression in Hindi

यहां हम डिप्रेशन के लक्षण बता रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (1) ।

  • मन का ज्यादातर उदास या चिड़चिड़ा रहना
  • नींद न आना या बहुत अधिक नींद आना
  • भूख में कमी आना या फिर ज्यादा भूख लगना
  • थकान या ऊर्जा की कमी महसूस होना
  • खुद को नाकाबिल समझना या खुद से नफरत करना
  • एक चीज पर ध्यान न लगा पाना (एकाग्रता की कमी)
  • गतिविधियों में कमी आना और सामान्य गतिविधियों से परहेज करना
  • आशाहीन या फिर असहाय महसूस करना
  • मृत्यु या आत्महत्या का लगातार विचार आना
  • उन सभी गतिविधियों में कमी, जिससे जीवन में आनंद महसूस होता है

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सिम्पटम्स ऑफ डिप्रेशन के बारे में जानने के बाद अब अवसाद के कारण पर एक नजर डाल लें।

डिप्रेशन(अवसाद) का कारण – Causes of Depression in Hindi

एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, डिप्रेशन का कारण स्पष्ट नहीं है। ऐसा माना जाता है कि इसके पीछे विभिन्न परिस्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। इनमें जैविक कारक, मनोवैज्ञानिक कारक या फिर किसी के जीवन में घटी कोई घटना शामिल है। यहां हम क्रमवार उन स्थितियों का जिक्र कर रहे हैं, जिन्हें इसका कारण माना जा सकता है (5) –

  • आनुवंशिकता – अगर परिवार में किसी को डिप्रेशन की बीमारी थी या है, तो अवसाद होने का खतरा हो सकता है।
  • कठिन परिस्थिति का अनुभव – जिंदगी में कोई दुर्व्यवहार, अपमान या फिर किसी अपने की मृत्यु होने से भी व्यक्ति डिप्रेशन में जा सकता है।
  • चिंता – अगर कोई बचपन या युवावस्था से किसी चिंता में जी रहा हो या चिंता संबंधी विकार हो, तो डिप्रेशन हो सकता है।
  • फिजिकल मेडिकल प्रॉब्लम्स – स्ट्रोक, हार्ट अटैक, कैंसर या थायराइड की समस्या के कारण डिप्रेशन का जोखिम बढ़ सकता या हो सकता है।
  • बायोकेमिकल बदलाव– डिप्रेशन होने पर मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया अलग होने के साथ ही तंत्रिका का सिग्नल देने का काम भी धीमा हो जाता है। केमिकल मैसेंजर्स और हार्मोनल बदलाव से भी डिप्रेशन हो सकता है।
  • प्रकाश की कमी– शरद या शीत काल में प्रकृति में ज्यादा देर अंधेरा रहने के कारण भी किसी-किसी को अवसाद की समस्या हो सकती है।
  • जीवन की कठिन परिस्थितियां: लगातार तनाव में रहना या अकेलापन महसूस करना भी डिप्रेशन को जन्म दे सकता है।

घरेलू उपचार पढ़िए

आइए, अब लेख में आगे बढ़ते हुए होम रेमेडीज फॉर डिप्रेशन के बारे में जानते हैं।

डिप्रेशन (अवसाद) के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Depression in Hindi

यहां हम कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों का जिक्र करने वाले हैं, जो अवसाद के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं। हम यह भी स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि लेख में बताए गए डिप्रेशन के लिए घरेलू उपाय किसी भी तरह से डिप्रेशन का रामबाण इलाज नहीं हैं। यह केवल इसके लक्षणों को कम कर सकते हैं। तो चलिए, आगे जानते हैं कि कौन-कौन से घरेलू उपचार डिप्रेशन के इलाज में मदद कर सकते हैं।

1. काजू

सामग्री :

  • 4 से 6 पीस काजू

उपयोग करने का तरीका :

  • काजू को पीसकर उसका पाउडर दूध में डालें।
  • इसे दूध में अच्छे से मिक्स करके पी लें।

कैसे है फायदेमंद :

डिप्रेशन दूर करने के घरेलू उपाय के तौर पर काजू का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जुड़े एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि काजू का सेवन अवसाद से बचाव में मदद कर सकता है। रिसर्च के अनुसार, यह मूड को बेहतर करने के साथ ही विचारों को स्थिर करने में सहायक है। इसके लिए काजू में मौजूद फाइबर, मिनरल्स, विटामिन और फाइटोकेमिकल्स को फायदेमंद माना जाता है (6)। यही वजह है कि सिम्पटम्स ऑफ डिप्रेशन कम करने के लिए लोग काजू का सेवन करते हैं।

2. दही

सामग्री :

  • एक कटोरी दही

उपयोग करने का तरीका :

  • दही को भोजन में शामिल करें
  • चाहें तो इससे फ्रूट योगर्ट चार्ट या लस्सी बनाकर पी सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च के मुताबिक, डिप्रेशन के लक्षण को कम करने के लिए दही के फायदे भी देखे जा सकते हैं। दही शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन के स्तर को बढ़ाकर अवसाद को कम करने में मदद कर सकता है। सेरोटोनिन हार्मोन को मूड बेहतर करने के लिए जाना जाता है। शोध में कहा गया है कि दही के साथ ही एक्सरसाइज करना डिप्रेशन के लिए और ज्यादा प्रभावी होता है (7)। इस आधार पर डिप्रेशन के लिए घरेलू उपाय के तौर पर डाइट में दही को शामिल करना लाभकारी हो सकता है।

3. सेब

सामग्री :

  • एक सेब

उपयोग करने का तरीका:

  • सेब को यूं ही या फ्रूट सलाद के रूप में खा सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद:

घर में अवसाद के उपचार के लिए सेब का सेवन भी किया जा सकता है। जी हां, फलों को मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है, जिनमें से एक सेब भी है (8)। एक शोध में यह भी कहा गया है कि कच्चे फलों के सेवन से भी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। इन फलों में सेब का नाम भी शामिल है (9)। इसी आधार पर डिप्रेशन का रामबाण इलाज करने के लिए सेब का उपयोग किया जा सकता है।

4. सौंफ

सामग्री :

  • सौंफ

उपयोग करने का तरीका:

  • खाना खाने के बाद सौंफ का सेवन कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद:

माउथ फ्रेशनर के रूप में उपयोग होने वाला सौंफ भी डिप्रेशन के लक्षण को कम करने में प्रभावकारी हो सकता है। एक शोध में बताया गया है कि सौंफ में एंटी डिप्रेसेंट प्रभाव होता है, जो अवसाद के लक्षणों को कम करने में काफी हद तक कारगर साबित हो सकता है (10)। इसी वजह से कुछ लोग सौंफ के उपयोग डिप्रेशन का रामबाण इलाज करने के लिए भी करते हैं।

6. पपीता

सामग्री:

  • पपीता

उपयोग करने का तरीका:

  • पपीते को अन्य फलों के साथ मिलाकर सलाद के रूप में खा सकते हैं।
  • चाहें तो पपीते का जूस बनाकर भी पी सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद:

डिप्रेशन ट्रीटमेंट के लिए पपीता का भी इस्तेमाल लाभकारी सिद्ध हो सकता है। ऐसा इसलिए. क्योंकि पपीता में एंटी डिप्रेसेंट प्रभाव होता है, जो अवसाद के लक्षण को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। दरअसल, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव के कारण पपीते को डिप्रेशन के लिए अच्छा माना जाता है (11)। यही वजह है कि पपीता को कुछ लोग डिप्रेशन का पक्का इलाज भी कहते हैं।

7. अदरक

सामग्री:

  • अदरक का एक छोटा टुकड़ा
  • उपयोग करने का तरीका:
  • अदरक को चाय में डालकर पी सकते हैं।
  • साथ ही अदरक को सब्जी और चटनी में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद:

डिप्रेशन का इलाज अदरक का उपयोग करके भी किया जा सकता है। इस बात की पुष्टि इससे संबंधित एक रिसर्च से होती है। शोध में बताया गया है कि अदरक का इस्तेमाल अवसाद सहित विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जा सकता है (12)। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि अवसाद दूर करने के घरेलू उपचार के तौर पर अदरक एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है।

8. सालमन मछली

सामग्री:

  • सालमन मछली

उपयोग करने का तरीका:

  • सालमन को फ्राई करके या करी बनाकर खाया जाता है।
  • इसके अलावा, मछली को रोस्ट या स्टीम करके भी खा सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद:

एनसीबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध रिसर्च से जानकारी मिलती है कि सालमन मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। यह फैटी एसिड मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ मूड सुधारने में भी मदद कर सकता है, जिससे अवसाद के लक्षण को कम करने में मदद मिल सकती है (13)। यही वजह है कि अवसाद के उपचार के लिए सालमन मछली का उपयोग लाभकारी माना जाता है।

9. पेपरमिंट ऑयल

सामग्री:

  • 0.3 एमएल पुदीने का तेल
  • सामान्य पानी 2 एमएल

उपयोग करने का तरीका:

  • सबसे पहले एक बर्तन में स्लाइन वाटर लें।
  • अब इसमें पुदीने का तेल मिला दें और सूंघें।

कैसे है फायदेमंद:

पुदीने के तेल के फायदे में अवसाद सिम्पटम्स और डिप्रेशन को कम करना भी शामिल है। एक शोध में इस बात की पुष्टि होती है कि पेपरमिंट ऑयल अवसाद के साथ-साथ चिंता के लक्षणों को भी दूर करने में प्रभावी साबित हो सकता है (14)। इस तथ्य को देखते हुए पेपरमिंट ऑयल को डिप्रेशन का रामबाण इलाज माना जा सकता है।

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लेख के इस हिस्से में जानिए डिप्रेशन में क्या खाएं।

डिप्रेशन(अवसाद) के लिए आहार – Diet For Depression in Hindi

किसी भी बीमारी के उपचार के लिए सही डाइट का पालन करना जरूरी होता है। इसी वजह से यहां हम अवसाद के दौरान ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन के बारे में बता रहे हैं, जो फायदेमंद साबित हो सकते हैं। चलिए, जानते हैं डिप्रेशन में क्या खाएं (15) (16)।

लेख में बने रहें

अब बारी है डिप्रेशन का इलाज कैसे किया जाता है, यह समझने की।

डिप्रेशन(अवसाद) का इलाज – Treatment of Depression in Hindi

डिप्रेशन का इलाज दवा और काउंसलिंग (मनोचिकित्सा) दोनों तरीकों से किया जा सकता है। अगर इन माध्यमों के जरिए डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण कम नहीं होते हैं, तो मरीज की स्थिति देखते हुए डॉक्टर अन्य उपचार कर सकते हैं। इन डिप्रेशन के इलाज के बारे में नीचे जानिए (17)

  • दवाइयां – डिप्रेशन की दवा के तौर पर डॉक्टर एंटी डिप्रेशन दवाएं दे सकते हैं। इन दवाओं की मदद से 4 से 8 सप्ताह के अंदर नींद की समस्या, भूख और एकाग्रता में कमी जैसे अवसाद के लक्षणों में सुधार हो सकता है।
  • काउंसलिंग (मनोचिकित्सा) – डिप्रेशन का पक्का इलाज करने के लिए टॉक थेरेपी या काउंसलिंग का भी सहारा लिया जा सकता है। इसके जरिए अवसादग्रस्त लोगों को सोचने और व्यवहार करने का नया तरीका सिखाया जाता है। साथ ही उनकी आदतों में बदलाव लाने का भी प्रयास किया जाता है। इसमें दो तरह के मनोचिकित्सा शामिल हैं।

(i) कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) – इसमें मरीज की चिंताजनक भावनाओं को सुधारने की
कोशिश की जाती है।

(ii) इंटर पर्सनल थेरेपी (IPT) – यह जीवन की घटनाओं पर केंद्रित रहता है। इसका मुख्य
लक्ष्य मरीज को समाज के साथ जोड़ने होता है।

  • ब्रेन स्टिम्युलेशन थेरेपी (Brain Stimulation Therapy) – ऊपर बताए गए उपचार जब काम नहीं करते, तो डॉक्टर इस थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। इसमें मस्तिष्क को सीधे बिजली या मैग्नेटिक तरंगों के साथ जोड़ा जाता है।
  • डिप्रेशन की आयुर्वेदिक दवा – कुछ जड़ी बूटियों की मदद से डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज भी किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, लैवेंडर, पैशन फ्लावर, और केसर में एंटी डिप्रेशन (अवसाद के लक्षणों को कम करने वाला) प्रभाव पाया जाता है। ऐसे में अवसाद के उपचार के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक इन्हें बतौर डिप्रेशन की आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दे सकते हैं (18)।

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चलिए, अब डिप्रेशन के जोखिम और जटिलताओं के बारे में समझने की कोशिश करते हैं।

डिप्रेशन के जोखिम और जटिलताएं – Depression Risks and Complications in Hindi

डिप्रेशन के जोखिम कारकों और जटिलताओं के बारे में जानना भी जरूरी है। आगे हम दो भागों में इस विषय के बारे में बता रहे हैं।

अवसाद के जोखिम कारक

डिप्रेशन के जोखिम कारक कुछ इस प्रकार हैं (19)

  • कुछ न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग (खासकर अल्जाइमर और पार्किंसन रोग), स्ट्रोक, मल्टीपल स्केलेरोसिस (प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी समस्या), दौरा पड़ने की समस्या, कैंसर, आंखों से संबंधित बीमारी और क्रोनिक पेन अवसाद के जोखिम कारक हो सकते हैं।
  • जीवन की कुछ घटनाएं और परेशानी अवसाद के पनपने का जोखिम बन सकती हैं।
  • इनके अलावा, किसी प्रियजन की मृत्यु, समाज में सम्मान की कमी, वित्तीय समस्याएं, किसी से लड़ाई या विवाद डिप्रेशन का जोखिम बन सकते हैं।

अवसाद की जटिलताएं

  • अवसादग्रस्त लोग जिसकी वजह से उन्हें कुछ जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे (20)-
  • शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा
  • आत्महत्या का प्रयास
  • शराब या अन्य अवैध पदार्थों का उपयोग
  • अवसाद से ग्रस्त किशोर को मोटापा हो सकता है
  • धमनी रोग
  • अस्थमा

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लेख के आखिरी भाग में हम अवसाद से बचने के कुछ प्रभावी उपाय बता रहे हैं।

डिप्रेशन (अवसाद) से बचने के उपाय – Prevention Tips for Depression in Hindi

अवसाद के लक्षण और उपचार तो हम लेख में बता ही चुके हैं। अब यहां हम कुछ ऐसे टिप्स बताने रहे हैं, जिनकी मदद से अवसाद से बचा जा सकता है (17)

  • एक्सरसाइज करें
  • दिनभर में महज 30 मिनट पैदल चलने से मूड बेहतर हो सकता है
  • सही समय पर सोएं और जागें
  • रोजाना स्वस्थ भोजन का सेवन करें
  • मन को जो करना अच्छा लगे वो जरूर करें
  • एक लिस्ट तैयार करें कि आपको क्या करना है और उसे फॉलो करें
  • नए लोगों के साथ जुड़ने की कोशिश करें
  • उन लोगों से बातें करें, जिन पर आपको भरोसा है

अवसाद एक गंभीर समस्या है, जो जिंदगी को प्रभावित कर सकती है। यहां हमने डिप्रेशन के लक्षण और उपाय के साथ-साथ अवसाद दूर करने के घरेलू उपचार भी बताए हैं। इनके अलावा, खाद्य पदार्थों पर भी चर्चा की गई है, जिनसे अवसाद की स्थिति को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है। इन सभी जानकारी से आप खुद की या अवसाद से गुजर रहे किसी करीबी की मदद कर सकते हैं। इस तरह के अन्य आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़े रहें स्टाइलक्रेज से साथ।

Sources

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