फावा बीन्स (बाकला) के फायदे, उपयोग और नुकसान – Fava Bean Benefits and Side Effects in Hindi

Medically Reviewed By Neha Srivastava (Nutritionist), Nutritionist
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डॉक्टर अक्सर अच्छी सेहत के लिए हरी सब्जियां खाने की सलाह देते हैं, उन्हीं सब्जियों में से एक है बाकला यानी फावा बीन्स। स्टाइलक्रेज का यह लेख इस खास प्रकार की सब्जी पर ही आधारित है। यहां पाठक जान पाएंगे कि शरीर के लिए फावा बीन्‍स के फायदे क्या हैं? साथ ही फावा बीन्‍स का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है, लेकिन पाठक इस बात का ध्यान रखें कि फावा बीन्‍स के गुण लेख में बताई गई किसी भी बीमारी का इलाज नहीं है। शारीरिक समस्या के लिए डॉक्टरी उपचार जरूरी है।

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लेख में सबसे पहले जानते हैं कि फावा बींस आखिर क्या है।

फावा बीन्स क्या है?

फावा एक प्रकार की बीन्स है, जिसे सब्जी के रूप में खाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम विसिया फाबा (Vicia faba) है। इसे क्षेत्रीय भाषा में बाकला के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, अंग्रेजी में इसे ब्रॉड बीन्स से नाम से पुकारा जाता है। भले ही इसके नाम से बीन्स शब्द जुड़ा हो, लेकिन यह सब्जी मटर के परिवार (Pea family) से संबंध रखती है (1)।

इतिहास बताता है कि रोमन और यूनानियों के आहार में इसकी एक लोकप्रिय भूमिका थी। इसके अलावा, इसमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन सी जैसे कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो कई तरीके से शरीर को लाभ पहुंचाने का काम कर सकते हैं (1)। इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभों को आगे लेख में बताया गया है।

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फावा बींस क्या है, यह जानने के बाद फावा बींस के फायदे के बारे में बता रहे हैं।

फावा बीन्स के फायदे – Benefits of Fava Bean in Hindi

फावा बीन्स न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होती है, बल्कि फावा बीन्‍स के गुण भी कई हैं। नीचे हम फावा बीन्‍स के फायदे के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं। ध्यान रहे कि फावा बीन्स किसी गंभीर समस्या का इलाज नहीं है, लेकिन इसका सेवन स्वास्थ्य संबंधित कई परेशानियों के लक्षण को कम करने में मददगार हो सकता है।

1. पार्किंसन रोग के लिए फावा बीन्‍स के फायदे

पार्किंसन, तंत्रिका तंत्र से संबंधित एक बीमारी है, यह समस्या तब होती है जब तंत्रिका कोशिकाएं डोपामाइन नामक मस्तिष्क रसायन का उत्पादन नहीं कर पाती हैं (2)। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के अनुसार, फावा बीन्स एल-डोपा और सी-डोपा जैसे एमिनो एसिड का अच्छा स्रोत हैं (3)।

शोध में कुछ पार्किंसन रोगियों को फावा बीन्‍स का सेवन कराया गया। इसके सेवन से उनके खून में एल-डोपा और सी-डोपा के स्तर में वृद्धि देखी गई। इतना ही नहीं इसके सेवन से बिना किसी दुष्प्रभाव के पार्किंसन रोगियों के मोटर स्किल में सुधार भी हो सकता है (3)। आमतौर पर, लेवोडोपा यानी एल-डोपा का उपयोग पार्किंसंस रोग के उपचार के लिए डोपामाइन के रिप्लेसमेंट के रूप में किया जाता है (4)।

2. जन्म दोषों से बचाव के लिए फावा बीन्‍स के फायदे

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती के शरीर में फोलिक एसिड की कमी से शिशु में जन्म दोष का खतरा बढ़ सकता है (5)। जन्म दोष का प्रभाव शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर हो सकता है (6)। फावा बीन्स फोलेट का एक अच्छा स्रोत है। प्रति 100 ग्राम ब्रॉड बीन्स में 0.423 मिलीग्राम फोलेट होता है। ऐसे में शिशु के सही विकास के लिए गर्भवती महिलाएं फोलेट की प्राप्ति के लिए फावा बीन्स का सेवन कर सकती हैं (7)। सावधानी के तौर पर गर्भवती को इसका सेवन करने से पहले किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

3. मधुमेह के लिए फावा बीन्‍स के फायदे

मधुमेह के जोखिम को कम करने के लिए फावा बीन्स मददगार साबित हो सकती है। एक रिसर्च के अनुसार फावा बींस में एंटीडायबिटिक प्रभाव होता है। यह प्रभाव मधुमेह की समस्या को कुछ हद तक कम करने में मददगार हो सकता है (8)। वहीं, एक अन्य वैज्ञानिक शोध के अनुसार, फावा बीन्‍स के एंटीडायबिटीक गुण के लिए इसमें मौजूद विसिने और डिवीसीन नामक कंपाउंड को प्रभावकारी बताया गया है। (1)।

4. कैंसर के लिए फावा बीन्‍स के फायदे

कैंसर से बचाव के लिए फावा बीन्‍स के फायदे देखे जा सकते हैं। दरअसल, फावा बीन्स में एंटी-कैंसर गुण मौजूद होता है, जो खासकर पेट के कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। इतना ही नहीं फावा बीन्स को पेट के कैंसर के उपचार के लिए सप्लीमेंट के तौर पर भी उपयोग किया जा सकता है (9)।

इसके अलावा, एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि फावा बींस में पाया जाने वाला जेनिस्टिन, एक प्रकार का आइसोफ्लेवोन, कैंसर से जुड़ी कोशिकाओं के विकास को रोकने में मदद कर सकता है (10)। ध्यान रखें कि कैंसर के लिए सिर्फ फावा बीन्स पर निर्भर रहना समाधान नहीं है। कैंसर का एकमात्र इलाज डॉक्टरी उपचार है।

5. एनीमिया का उपचार करे

शरीर में आयरन की कमी के कारण एनीमिया की समस्या हो सकती है (11)। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए फावा बींस का उपयोग लाभदायक हो सकता है। इस विषय पर हुई एक रिसर्च केे मुताबिक फावा बींस में आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो एनीमिया के जोखिम को कुछ हद तक कम करने में मददगार हो सकता है (12)।

6. ब्लड प्रेशर के लिए फावा बीन्‍स के फायदे

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए भी फावा बीन्स का सेवन गुणकारी हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित रिसर्च पेपर के अनुसार, एक वैज्ञानिक शोध में 500 लोगों को शामिल किया गया। परीक्षण के दौरान जिन लोगों को फलियों का सेवन कराया गया, उनके रक्तचाप में कमी पाई गई (7)। इस आधार पर हम मान सकते हैं कि फावा बीन्स का उपयोग रक्तचाप की समस्या में मददगार हो सकता है।

7. वजन घटाने के लिए फावा बीन्‍स के फायदे

फावा बीन्स के फायदे की बात करें, तो इसमें वजन को नियंत्रित रखना भी शामिल है। नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे (NHANES) में देखा गया है कि फलियों का सेवन न करने वालों की तुलना में विभिन्न प्रकार की फलियों का सेवन करने वाले वयस्कों में शरीर का वजन कम था। इसके अलावा, जो व्यक्ति फलियों का सेवन करते हैं, उनमें मोटापे का जोखिम भी कम हो सकता है। इतना ही नहीं प्रमाण यह भी है कि मेडिटेरियन डाइट, जिसमें फलियां, फाइबर और मोनोअनसैचुरेटेड शामिल हैं, वजन और चर्बी कम करने में लाभकारी हो सकती है (7)।

8. कोलेस्ट्रॉल के लिए फावा बीन्‍स के फायदे

नियमित रूप से फलियों का सेवन करने से एलडीएल (LDL) यानी हानिकारक कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी हो सकती है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध में 3 हफ्तों तक 10 लोगों ने फलियों का सेवन किया। इस परीक्षण में देखा गया कि फलियों का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी हो सकती है (7)।

इसके अलावा, 31 व्यक्तियों पर किए गए एक अन्य परीक्षण में शोधकर्ताओं को फलियों का सेवन करने वाले व्यक्तियों में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स यानी ब्लड में मौजूद वसा में सुधार देखने को मिला। साथ ही ब्लड ग्लूकोज और इंसुलिन स्तर में भी सुधार पाया गया (7)। ध्यान रहे कि भले ही ये शोध फलियों के साथ तो किए गए हैं, लेकिन इसमें यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें फावा बीन्स का उपयोग कितनी मात्रा में किया गया है। इसलिए, इस विषय में अभी और शोध की आवश्यकता है।

9. प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मददगार

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण कई प्रकार की बीमारियां और संक्रमण होने का खतरा बना रहता है (13)। वहीं, फावा बींस का सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मददगार हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार फावा बींस का सेवन टी सेल फंक्शन में सुधार कर सकता है। टी सेल फंक्शन में सुधार प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मददगार हो सकता है। हालांकि, रिसर्च में इस बात का जिक्र भी किया गया है कि फावा बींस का सेवन कुछ लोगों के लिए एलर्जी का कारण बन सकता है (14)।

10. हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के लिए

अच्छी सेहत के साथ ही फावा बींस का सेवन हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में भी मददगार हो सकता है। फलियों पर हुए एक रिसर्च के अनुसार कई प्रकार की फलियों में, जिनमें फावा बींस भी शामिल हैं, कई पोषक तत्वों के साथ ही कैल्शियम की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है। वहीं, कैल्शियम हड्डियों के लिए जरूरी पोषक तत्व माना गया है। हड्डियों के स्वास्थ्य रखने के साथ ही कैल्शियम उन्हें मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभा सकता है (15)।

आगे है और जानकारी

आगे जानिए फावा बीन्स के पौष्टिक तत्वों के बारे में, जो इसे इतना लाभकारी बनाते हैं।

फावा बीन्स के पौष्टिक तत्व – Fava Bean Nutritional Value in Hindi

नीचे हम फावा बीन्स के पौष्टिक तत्वों की सूची साझा कर रहे हैं (16)।

पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 ग्राम
पानी11 g
ऊर्जा341 kcal
प्रोटीन26.1 g
कुल फैट  1.53 g
कार्बोहाइड्रेट58.3 g
फाइबर25 g
कुल शुगर5.7 g
कैल्शियम103 mg
आयरन6.7 mg
मैग्नीशियम192 mg
फास्फोरस421 mg
पोटैशियम1060 mg
सोडियम13 mg
जिंक3.14 mg
विटामिन सी1.4 mg
कॉपर0.842 mg
मैग्नीश1.63 mg
सेलेनियम8.2 μg
थियामिन0.555 mg
राइबोफ्लेविन0.333 mg
नियासिन2.83 mg
विटामिन बी – 60.366 mg
फोलेट423 μg
विटामिन ए (RAE)3 μg
विटामिन ए53 IU
विटामिन ई (अल्फा-टोकोफेरॉल)0.05 mg
विटामिन K1 (फाइलोक्विनोन) (μg)9.0
फैटी एसिड कुल सैचुरेटेड0.254 g
फैटी एसिड, कुल मोनोअनसैचुरेटेड (g)0.303 g
फैटी एसिड, कुल पॉलीअनसैचुरेटेड (g)1.627 g

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पोषक तत्वों की जानकारी के बाद यहां हम बता रहे हैं कि फावा बींस का उपयोग कैसे कर सकते हैं।

फावा बीन्स का उपयोग – How to Use Fava Bean in Hindi

अगर फावा बीन्‍स के फायदे चाहते हैं, तो फावा बीन्‍स का उपयोग भी सही तरीके से करना जरूरी है। इसलिए, नीचे हम फावा बीन्‍स का उपयोग कैसे किया जा सकता है, इस विषय में जानकारी दे रहे हैं।

  • फावा बीन्स को आलू के साथ सब्जी बनाकर रात या दोपहर के भोजन के साथ लिया जा सकता है।
  • फावा बीन्स को प्याज और टमाटर के साथ भी सब्जी बनाकर सेवन किया जा सकता है।
  • सुबह या शाम फावा बीन्स को सलाद में उपयोग कर सेवन किया जा सकता है।
  • सुबह या शाम फावा बीन्स से बने सूप का भी सेवन किया जा सकता है।

नोट : फावा बीन्स की मात्रा की बात करें, तो यह व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिती पर निर्भर करता है। इसे कितनी मात्रा में सेवन करना है, इसके लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होगा।

अभी बाकी है और जानकारी

लेख में आगे फावा बींस के नुकसान के बारे में जानेंगे।

फावा बीन्स से नुकसान – Side Effects of Fava Bean in Hindi

फावा बीन्स के फायदे जानने के बाद एक नजर इसके नुकसान पर डालते हैं। बीन्‍स के नुकसान बताकर हमारा अपने पाठकों को डराने का उद्देश्य नहीं है। हम नुकसान इसलिए बता रहे हैं, ताकि फावा बीन्‍स का उपयोग व्यक्ति सावधानी से करे।

  • ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज (G6PD-एक प्रकार का एंजाइम) की कमी से हीमोलिटिक एनीमिया (आनुवंशिक विकार) हो सकता है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं समय से पहले टूटने (Breakdown) लगती हैं। वैसे तो हीमोलिटिक एनीमिया की समस्या अनुवांशिक है, लेकिन कभी-कभी यह समस्या फावा बीन्स के सेवन से भी हो सकती है (17)।
  • अगर कोई पहली बार फावा बीन्स का सेवन कर रहा है, तो कम मात्रा में ही इसका सेवन करें। खासतौर पर वो व्यक्ति, जिन्हें नए खाद्य पदार्थों से फूड एलर्जी का जोखिम रहता हो (14)।
  • ध्यान रहे कि गर्भावस्था में फावा बीन्स के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लें। गर्भावस्था के दौरान जरूरत से ज्यादा फावा बीन्स के सेवन से नवजात शिशु में हिमोलिटिक एनीमिया का खतरा हो सकता है (18)।
  • अधिक मात्रा में कच्ची फावा बींस का सेवन गैस का कारण बन सकता है (19)।

फावा बीन्‍स के फायदे अनेक हैं। अगर फावा बीन्स को सही मात्रा और ठीक तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह एक लाभकारी आहार हो सकता है। हमारी कोशिश यही रही कि इस लेख के माध्यम से हम पाठकों तक फावा बीन्स की ज्यादा से ज्यादा जानकारी पहुंचा सकें। फावा बींस का उपयोग करने के साथ ही इस बात का ध्यान रहे कि यह किसी भी बीमारी का इलाज नहीं बल्कि उपचार में सहायक हो सकता है। फावा बीन्‍स के फायदे और फावा बीन्‍स का उपयोग जानने के बाद आप फावा बींस से संबंधित इस लेख को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या फावा बीन्स का कच्चा सेवन किया जा सकता है?

हां, फावा बीन्स को कच्चा खाया जा सकता है, लेकिन बेहतर है इसे पकाकर खाया जाए। इसमें लेक्टिन मौजूद होता है। अगर यह सही तरीके से न पका हो, तो इससे उल्टी, पेट दर्द व मतली आदि की समस्या हो सकती है (19)।

फावा बीन्स, लिमा बीन्स से कैसे अलग हैं?

फावा बीन्स और लिमा बीन्स एक ही परिवार से संबंध रखती हैं, लेकिन दोनों का स्वाद अलग होता है। बनावट और पकाने की प्रक्रिया के मामले में भी दोनों भिन्न हैं। लिमा बीन्स को छीलना नहीं पड़ता है। इसके अलावा, लिमा बीन्स पकाए जाने के बाद फावा बीन्स जैसे कड़े नहीं होते हैं।

कुछ लोकप्रिय भाषाओं में फावा बीन्स को क्या कहा जाता है?

अंग्रेजी में फावा बीन्स के अलावा ब्रॉड बीन्स भी कहा जाता है, जबकि हिंदी में बाकला और स्पेनिश में हाबस (Habas) कहा जाता है।

क्या फावा बीन्स गैस का कारण बनते हैं?

हां, एक शोध में बताया गया है कि अधिक मात्रा में फावा बींस का सेवन गैस का कारण बन सकता है (19)।

यदि मैं बहुत अधिक फावा बीन्स खाता हूं, तो क्या होगा?

अधिक मात्रा में फावा बींस का सेवन उल्टी, मतली व दस्त जैसी समस्या का कारण बन सकता है (19)।

क्या फावा बीन्स में डोपामाइन होता है?

हां, फावा बींस में डोपामाइन यौगिक मौजूद होता है (20)। बता दें, डोपामाइन एक तरह का हार्मोन व न्यूरोट्रांसमीटर होता है।

संदर्भ (Sources):

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  17. Glucose-6-phosphate dehydrogenase deficiency
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  18. Favism in a female newborn infant whose mother ingested fava beans before delivery
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/7472841/
  19. Naturally Occurring Food Toxins
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3153292/
  20. An increase in renal dopamine does not stimulate natriuresis after fava bean ingestion
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3628380/
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सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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