गर्दन दर्द के कारण, इलाज और घरेलू उपाय – Neck Pain Treatment in Hindi

Medically Reviewed By Dr. Zeel Gandhi, Ayurvedic Doctor, BAMS
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कई बार हम कुछ शारीरिक समस्याओं को मामूली समझ कर नजरअंदाज कर देते है। ऐसे में वह समस्या समय के साथ-साथ गंभीर हो सकती है। ऐसे ही एक समस्या गर्दन दर्द की भी है। कभी न कभी हर किसी को गर्दन में दर्द की समस्या होती ही है। यह ऐसा दर्द ऐसा होता है, जो कई बार सहन के बाहर हो जाता है। ऐसे में वक्त रहते इसका सही इलाज करना जरूरी है। कई बार जब यह दर्द बढ़ जाता है, तो इसकी चपेट में सिर, हाथ व कंधा भी आ जाता है। अगर आप भी गर्दन में दर्द के कारण परेशान हैं, तो स्टाइलक्रेज का यह लेख हम खास आपके लिए लेकर आए हैं। इस लेख में हम गर्दन दर्द के कारण व गर्दन दर्द के लिए घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

नीचे है विस्तारपूर्वक जानकारी

इस लेख के पहले भाग हम बात रहे हैं कि गर्दन में दर्द होना क्या है।

गर्दन दर्द क्या है? – What is Neck Pain in Hindi

गर्दन का दर्द गर्दन के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इनमें मांसपेशियां, नस, हड्डियां, जोड़ और हड्डियों के बीच की डिस्क शामिल हैं। जब किसी के गर्दन में दर्द होता है, तो उसे गर्दन हिलाने में कठिनाई हो सकती है। जैसे कि किसी एक तरफ गर्दन को मोड़ना या फिर आगे-पीछे की ओर झुकाना। कुछ लोगों को इस दर्द के कारण गर्दन में अकड़न आ जाती हैं। वहीं, अगर किसी की गर्दन में दर्द नसों पर दबाव पड़ने से शुरू हुआ है, तो इससे हाथों में सुन्नता, झुनझुनी या कमजोरी महसूस हो सकती हैं (1)

आइए, अब यह जान लेते हैं कि किन कारणों से गर्दन में दर्द होता है।

गर्दन दर्द के कारण – Causes of Neck Pain in Hindi

ग्रीन का दर्द के सामान्य कारणों में मांसपेशियों में खिंचाव या तनाव शामिल है। ऐसा रोजमर्रा की गतिविधियों के कारण हो सकता है, जो इस प्रकार हैं (1):

  • घंटों तक गर्दन का एक ओर झुकाव।
  • खराब पोस्चर में बैठकर टीवी देखना या किताब पढ़ना।
  • कंप्यूटर मॉनिटर का अधिक या कम ऊंचाई पर होना, जिसे देखने के लिए गर्दन को ऊपर या नीचे करना पड़े।
  • असुविधाजनक मुद्रा में सोना।
  • एक्सरसाइज करते समय गर्दन को सही तरीके से न मोड़ना।
  • बहुत जल्दी या खराब मुद्रा में चीजों को उठाना।
  • दुर्घटना या गिरने से भी गर्दन में चोट लग सकती हैं, जो गर्दन दर्द का कारण बन सकता है।

गर्दन दर्द के अन्य कारणों में ये शामिल हैं:

  • चिकित्सा की स्थिति जैसे – फाइब्रोमायल्जिया।
  • सर्वाइकल अर्थराइटिस या स्पोंडिलोसिस।
  • टूटी हुई हड्डियों के बीच की डिस्क।
  • ऑस्टियोपोरोसिस के कारण रीढ़ में हुआ छोटा फ्रैक्चर।
  • स्पाइनल स्टेनोसिस।
  • गर्दन में मोच।
  • रीढ़ की हड्डी में संक्रमण (ऑस्टियोमाइलाइटिस, डिस्काइटिस, फोड़ा)।
  • कैंसर से प्रभावित स्पाइन के कारण।

चलिए जानते हैं कि गर्दन दर्द के लिए घरेलू उपाय क्या-क्या हो सकते हैं।

गर्दन दर्द के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies For Neck Pain In Hindi

अगर किसी को अचानक गर्दन में हल्का दर्द हो, तो वह घर में ही घरेलू उपचार के जरिए इस दर्द को कुछ कम कर सकता है। वहीं, अगर दर्द ज्यादा हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। गर्दन दर्द के उपाय में यह सामग्री उपयोगी साबित हो सकती है।

1. एसेंशियल ऑयल

सामग्री:

  • लैवेंडर ऑयल की कुछ बूंदें
  • तुलसी के तेल की कुछ बूंदें

उपयोग की विधि:

  • दोनों एसेंशियल ऑयल को अच्छी तरह मिला लें।
  • फिर इस मिश्रण से कुछ मिनट तक गर्दन की मालिश करें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद:

लैवेंडर और तुलसी के तेल से बने इस मिश्रण से गर्दन की मालिश करके गर्दन दर्द से राहत मिल सकती है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, गर्दन दर्द वाले रोगियों ने मालिश करने के लिए कुछ हफ्तों तक लैवेंडर तेल का इस्तेमाल किया। इसके बाद उनके गर्दन दर्द में काफी कमी पाई गई। साथ ही पीठ में दर्द और रीढ़ की हड्डियों में भी सुधार पाया गया। दरअसल, लैवेंडर के तेल में एनाल्जेसिक गुण पाए जाते हैं, जो दर्द से राहत दिलाने का काम कर सकते हैं (2)। वहीं, तुलसी के तेल में भी एनाल्जेसिक गुण यानी दर्द को कम करने का प्रभाव होता है, जो गर्दन दर्द से राहत दिलाने में असरदार साबित हो सकता है (3)।

2. सेब का सिरका

सामग्री:

  • सेब का सिरका
  • पेपर नैप्किन या टिशू

उपयोग की विधि:

  • नैप्किन को सेब के सिरके में भिगोएं और गर्दन पर रखें।
  • इसे एक घंटा गर्दन पर रखा रहने दें।
  • इसे दिन में दो बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद:

गर्दन दर्द के उपाय में सेब के सिरके को एक बेहतरीन घरेलू उपचार माना जा सकता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, सेब का सिरका जोड़ों का दर्द कम कर सकता है। साथ ही यह गठिया के स्थिति में भी सुधार कर सकता है  (4) । इसी तरह से यह गर्दन दर्द से भी छुटकारा दिला सकता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि गर्दन का दर्द सेब के सिरके से ठीक हो सकता है। फिलहाल, इस पर और शोध करने की जरूरत है, ताकि पता चल सके कि यह गुण के दर्द से निजात दिलाने में मददगार है।

[ पढ़े: Apple Cider Vinegar Ke Fayde in Hindi ]

3. आइस पैक

सामग्री:

  • एक आइस पैक

उपयोग की विधि:

  • आइस पैक को कुछ देर के लिए प्रभावित जगह पर रखे रहने दें।

कैसे है फायदेमंद:

अगर किसी को गर्दन दर्द है, तो वे इस दर्द से राहत पाने के लिए आइस पैक का इस्तेमाल कर सकता है। दरअसल, बर्फ से गर्दन की सूजन कुछ कम हो सकती है। ठंडक से गर्दन के दर्द में राहत मिल सकती है (5)

4. सेंधा नमक

सामग्री:

  • एक-दो कप सेंधा नमक
  • गुनगुना पानी
  • एक बाथटब

उपयोग की विधि:

  • बाथटब को तीन चौथाई गुनगुने पानी से भरें और इसमें सेंधा नमक मिलाएं।
  • इस पानी में गर्दन तक 10-15 मिनट तक बैठे रहें।

कैसे है फायदेमंद:

गर्दन दर्द के उपाय में सेंधा नमक को दवा की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। सेंधा नमक को अंग्रेजी में एप्सम साल्ट कहा जाता है, जबकि इसका वैज्ञानिक नाम मैग्नीशियम सल्फेट है, जो पानी में आसानी से घुल जाता है। इसका उपयोग मांसपेशियों में दर्द और दर्द के साथ-साथ खुजली और सूजन को कम करने के लिए किया जाता है। इससे गर्दन दर्द में राहत मिल सकती है (6)

पढ़ते रहें आर्टिकल

आगे हम गर्दन दर्द का इलाज कैसे किया जा सकता है, उसकी जानकारी दे रहे हैं।

[ पढ़े: Epsom Salt Ke Fayde in Hindi ]

गर्दन दर्द का इलाज – Neck Pain Treatment in Hindi

गर्दन दर्द को घरेलू उपचार के अलावा कुछ और इलाज की मदद से दूर किया जा सकता है, जिसमें यह उपाय शामिल है (7):

  1. मैनिपुलेशन और मोबिलाइजेशन – गर्दन दर्द का इलाज करने के लिए इन दोनों तरीकों को अपनाया जा सकता है। इन तरीकों का उपयोग दर्द से राहत पाने और जोड़ों की गतिविधियों में सुधार करने के लिए किया जा सकता है। मोबिलाइजेशन में जोड़ों को जितना संभव हो उसे उतना धीरे-धीरे मूव कराया जाता है। वहीं, मैनिपुलेशन में सावधानी के साथ हड्डी व मांसपेशियों पर दबाव डालने का प्रयास किया जाता है। इसे काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट ट्रीटमेंट के रूप में भी जाना जाता है। यह कुछ समय के लिए दर्द से राहत दिला सकता है, लेकिन गर्दन के दर्द के उपचार में यह कितना प्रभावी है, इस संबंध में अभी और शोध की आवश्यकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कुछ मरीजों में इससे दर्द कम होने की जगह बढ़ भी सकता है।
  2. लेजर थेरेपी- कभी-कभी गर्दन के दर्द को कम करने के लिए लेजर थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। इसे सिर्फ तेज दर्द होने पर थरेपी विशेषज्ञ से ही कराना ही ठीक रहता है। लो लेवल लेजर थेरेपी को कोल्ड लेजर थेरेपी के नाम से भी जाना जाता है। इसमें अन्य लेजर थेरेपी की तरह टिश्यू गर्म नहीं होते हैं। इस उपचार को अपनाने वालों का मानना है कि लेजर बीम सूजन को कम करके और रक्त प्रवाह को बढ़ावा या नसों को उत्तेजित कर सकता है। फिलहाल, इस संबंध में और शोध किए जाने की जरूरत है। साथ ही गर्दन दर्द के इलाज में लो लेवल लेजर थेरेपी कितनी प्रभावी है, यह भी स्पष्ट तौर पर कहना मुश्किल है।
  3. दवाई- गर्दन के दर्द के इलाज में कई तरह के दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। कई लोग दर्द से राहत पाने के लिए पेन किलर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसी दवाओं को नॉन स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी के नाम से भी जाना जाता है, जिनमें इबुप्रोफेन व डायक्लोफिनाक प्रमुख हैं। इसके अलावा कुछ लोग एसिटामिनोफेन (पेरासिटामोल) का उपयोग करते हैं।। इन दवाइयों को डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
  4. एक्यूपंक्चर- एक्यूपंक्चर ऐसा तरीका है, जिसमें दर्द वाले स्थान पर छोटी-छोटी सुइयां लगाई जाती हैं। दर्द से राहत दिलाने के लिए इस तरीके को काफी अपनाया जाता है। जब शरीर के किसी भाग पर एक्यूपंक्चर किया जाता है, तो ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है, जिससे दर्द से राहत मिलती है (8)। इसे कराने के लिए किसी प्रशिक्षित एक्यूपंक्चर थैरेपिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
  5. मालिश- मालिश किसी भी तरह के दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है। दर्द वाले भाग पर अच्छी तरह मालिश करने से रक्त संचार दुरुस्त होता है (9)। इसके अलावा, मालिश से नींद भी अच्छी आती है। ध्यान रहे रहे कि अगर किसी को ज्यादा दर्द है, तो प्रभावित भाग को न रगड़ें। साथ ही किसी विशेषज्ञ से मालिश करवानी चाहिए।
  6. विटामिन्स- विटामिन्स शरीर को ठीक से काम करने में मदद करते हैं। जब शरीर से विटामिन्स कम होने लगते हैं, तो कई समस्याएं जन्म लेने लगती हैं। इन्हीं में से एक है शरीर में दर्द होना भी है। अगर कोई लगातार गर्दन दर्द से जूझ रहा है, तो जरूरी विटामिन लेने से राहत मिल सकती है। ये विटामिन्स कुछ इस तरह से हैं :
  • विटामिन-डी– गर्दन दर्द से राहत दिलाने में विटामिन-डी का उपयोग फायदेमंद हो सकता है। दरअसल, विटामिन-डी हड्डियों और जोड़ों से संबंधित दर्द को कम करने में बेहतर होता है (10)
  • विटामिन बी- विटामिन बी 12 को दर्द की स्थिति में सुधार करने के लिए एक अच्छा उपचार माना जा सकता है। साथ ही इसके अभी तक कोई दुष्प्रभाव भी नजर नहीं आए हैं (11)। फिर भी इस संबंध में अभी और शोध की जरूरत है।
  • विटामिन सी व ई- विटामिन-सी एक एंटीनोसेप्टिव एजेंट है, जो दर्द कम करने में मदद करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो दर्द कम कर सकते हैं (12)

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आगे आप पढ़ेंगे कि गर्दन दर्द के उपाय के लिए व्यायाम और योग कितना असरदार हो सकता है।

गर्दन दर्द के लिए व्यायाम और योग – Exercises and Yoga for Neck Pain in Hindi

व्यायाम के जरिए भी गर्दन दर्द का इलाज किया जा सकता है। इस संबंध में किए गए एक अध्ययन में दिया गया है कि व्यायाम करने से गर्दन दर्द में सुधार होता है। साथ ही व्यायाम से शरीर लचीला होता है और मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने में मदद मिल सकती है। गर्दन के लचीला होने पर दर्द की समस्या कम हो सकती है (13)। यहां नीचे बताए गए व्यायाम करने से गर्दन के दर्द में तुरंत आराम मिल सकता है :

  • अपने धीरे-धीरे सिर को आगे व पीछे की ओर करें। इसके बाद दाईं व बाईं ओर झुकाएं।
  • जब आपकी मांसपेशियों का तनाव कम हो जाए, तो अपने सिर को पूरी तरह दाईं ओर झुकाएं और फिर पूरी तरह बाईं ओर झुकाएं। इस दौरान थोड़ा दर्द हो सकता है, ऐसे में इसे आराम से करें।
  • इस व्यायाम को कम से कम 20 बार दोहराएं।
  • बेहतर परिणाम के लिए इस व्यायाम को हर कुछ घंटों में करते रहें।

एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, योग की मदद से गर्दन दर्द को कम किया जा सकता है। यह गर्दन दर्द को कम करने के लिए सुरक्षित और प्रभावी तरीका होता है (14)। गर्दन दर्द से राहत पाने के लिए नीचे बताए जा रहे योग को किया जा सकता है –

  • भारद्वाजासन – यह गर्दन और कंधे के दर्द से राहत दिलाने में काफी कारगर आसन है।
  • मर्जरासन – इसे अंग्रेजी में कैट पोज भी कहा जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव लाता है, जिससे गर्दन दर्द में आराम मिल सकता है।
  • उत्तान शीशोसन – मर्जरासन की तरह इस योगासन को करने से भी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आएगा और गर्दन व सिर में रक्त संचार तेज होगा।
  • बालासन – इसे चाइल्ड पोज भी कहा जाता है। इसमें गर्दन और पीठ को स्ट्रेच किया जाता है। इस आसन को अन्य आसन करने के दौरान आराम की अवस्था में आने के लिए करें।

इसके अगले हिस्से में हम बताएंगे कि नेक कॉलर गर्दन को कम कर सकता है या नहीं।

क्या नेक कॉलर गर्दन दर्द को कम कर सकता है?

नेक कॉलर मुख्य रूप से गर्दन को सहारा देता है और सिर के भार को संभालने में मदद करता है। किसी तरह की चोट लगने पर नेक कॉलर गर्दन और हड्डी को एक सीधा रखने में मदद करता है, लेकिन इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह पर करना चाहिए (15)। अगर गर्दन में ज्यादा दर्द रहता है, तो काम के बीच में ब्रेक ले सकते हैं। ऑफिस में काम करने के दौरान हर एक घंटे में उठें और गर्दन को थोड़ा हिलाएं। इसके अलावा, अपने पोस्चर पर भी ध्यान दें। यह तरीका गर्दन में दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, जंक फूड खाने से परहेज करें और अपने खानपान में हरी सब्जियों व फल को शामिल करें। आपका ज्यादा वजन भी मांसपेशियों में खिंचाव पैदा कर सकता है।

आगे है और जानकारी

अब आगे गर्दन दर्द से बचने के तरीके के बारे में पढ़ेंगे।

गर्दन दर्द से बचाव  – Prevention Tips for Neck Pain in Hindi

गर्दन दर्द की समस्या से बचना बहुत ही आसान है। यदि आप दिन में अधिक समय कंप्यूटर या कुर्सी पर बैठकर काम करते है, तो आप नीचे बताए जा रहे तरकीब को अपनाकर गर्दन दर्द से बचाव कर सकते हैं (16)

  • पूरे दिन में काम के दौरान कुछ मिनट निकालकर गर्दन को स्ट्रेच करते रहें।
  • अगर आप कॉल सेंटर या कॉल रिसीव से जुड़ा कोई काम करते हैं, तो हेडफोन का उपयोग करना बेहतर होगा।
  • कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते समय उसे अपने आंखों के लेवल तक रखें।
  • अगर लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि कुर्सी सुविधाजनक हो। इससे पीठ, गर्दन व कंधो आदि पर दबाव नहीं पड़ेगा।

गर्दन के दर्द को रोकने के लिए किए जाने वाले अन्य उपाय में ये शामिल हैं:

  • ज्यादा समय तक किसी एक स्थान में खड़े होने से बचें।
  • हाई हील्स की जगह ऐसे जूते पहनें, जिन्हें पहनकर चलने में सुविधा हो।
  • अगर आप लंबे सफर में है, तो बीच-बीच में रुक कर थोड़ी देर शरीर को आराम जरूर दें।
  • रात को सोते समय आरामदायक तकिये व गद्दे का इस्तेमाल करें।

भले गर्दन में दर्द से ज्यादा परेशानी न हो, लेकिन इसे समय पर ठीक करना जरूरी है, क्योंकि लापरवाही बरतने पर यह समस्या गंभीर हो सकती है। इससे राहत पाने के लिए उसके कारणों को ध्यान में रखकर उनसे बचने की कोशिश करें। इसके अलावा, ऊपर बताए गए घरेलू उपचार व टिप्स कारगर साबित हो सकते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी अन्य जानकारियों के लिए पढ़ते रहें स्टाइलक्रेज।

Sources

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अर्पिता ने पटना विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक किया है। इन्होंने 2014 से अपने लेखन करियर की शुरुआत की थी। इनके अभी तक 1000 से भी ज्यादा आर्टिकल पब्लिश हो चुके हैं। अर्पिता को विभिन्न विषयों पर लिखना पसंद है, लेकिन उनकी विशेष रूचि हेल्थ और घरेलू उपचारों पर लिखना है। उन्हें अपने काम के साथ एक्सपेरिमेंट करना और मल्टी-टास्किंग काम करना पसंद है। इन्हें लेखन के अलावा डांसिंग का भी शौक है। इन्हें खाली समय में मूवी व कार्टून देखना और गाने सुनना पसंद है।

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