आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Gastroenteritis (Stomach Flu) Causes, Symptoms and Home Remedies in Hindi

by

कहते हैं कि मनुष्य का स्वास्थ्य उसके पेट पर निर्भर करता है। बात सच भी है, क्योंकि पाचन तंत्र के बिगड़ने पर कई अन्य शारीरिक समस्याएं हो सकती है। इसलिए, जरूरी है कि पेट को सेहतमंद रखा जाए। पेट तभी ठीक रह सकता है, जब हम पाचन तंत्र की छोटी-बड़ी परेशानियों को पहचान सकें। इसलिए, स्टाइलक्रेज के जरिए हमारी कोशिश रहती है कि पाचन को स्वस्थ रखने के संबंध में जरूरी जानकारियां अपने पाठकों तक पहुंचाते रहें। इस लेख में जानिए कि आंत्रशोध या गैस्ट्रोएन्टराइटिस क्या है? इसके कारण, लक्षण और घरेलू उपाय भी इस लेख में बताए गए हैं। ये घरेलू उपचार आंत्रशोथ के उपचार का दावा नहीं करते, बल्कि उससे बचाव में सहायक हो सकते हैं। गैस्ट्रोएन्टराइटिस के सम्पूर्ण और सटीक इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

नीचे विस्तार से पढ़ें

आइए, जानते हैं कि गैस्ट्रोएन्टराइटिस का मतलब क्या होता है।

आंत्रशोथ क्या है? – What are Gastroenteritis in Hindi

“गैस्ट्रोएन्टराइटिस” की उत्पत्ति दो ग्रीक शब्दों को मिलाने से हुई है –  गैस्ट्रॉन और एंटरोन। गैस्ट्रॉन का अर्थ है पेट और एंटरोन का अर्थ है छोटी आंत। इसका मतलब है “पेट और छोटी आंत में सूजन।”  मेडिकली गैस्ट्रोएन्टराइटिस को डायरियल (दस्त पैदा करने वाली) बीमारी के रूप में परिभाषित किया जाता है। गैस्ट्रोएन्टराइटिस होने पर 24 घंटे में तीन से अधिक बार पतला और पानीदार मल आ सकता है। इसके लक्षणों की अवधि के आधार पर गैस्ट्रोएन्टराइटिस चार प्रकार के हो सकते हैं।

  • एक्यूट गैस्ट्रोएन्टराइटिस : 14 दिन या 14 दिन से कम अवधि तक दस्त बने रहना।
  • परसिस्टेंट गैस्ट्रोएन्टराइटिस : 14 दिन से ज्यादा, लेकिन 30 दिन से कम दस्त बने रहना।
  • क्रोनिक गैस्ट्रोएन्टराइटिस : 30 दिन से अधिक समय तक दस्त बने रहना।
  • रीकरेंट गैस्ट्रोएन्टराइटिस : 7 दिन के भीतर समाप्त होने वाले दस्त।

यह रोग दूषित भोजन या पानी के संपर्क में आने से और बैक्टीरिया, वायरल, फंगल व पैरासाइट के कारण हो सकता है। इन कारणों के बारे में लेख में आगे विस्तार से बताया गया है। स्वस्थ व्यक्ति अक्सर बिना किसी जटिलता के इस स्थिति से उबर जाते हैं। वहीं, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को काफी नुकसान हो सकता है (1)। इस बीमारी को पेट में इन्फेक्शन या स्टमक फ्लू के नाम से भी जाना जाता है।

आगे है और जानकारी

आइए, लेख में आगे जानते हैं कि आंत्रशोथ के कारण और जोखिम क्या-क्या हो सकते हैं। 

आंत्रशोथ के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk Factors of Gastroenteritis in Hindi

कई प्रकार के जीवाणु और विषाणु को इस रोग का प्रमुख कारण माना गया है। आइए, एक नजर डालते हैं गैस्ट्रोएन्टराइटिस के प्रमुख कारणों पर (2):

  • वायरस – नोरोवायरस, कैली वायरस, रोटावायरस, एस्ट्रोवायरस और एडेनोवायरस जैसे विषाणु गैस्ट्रोएन्टराइटिस का कारण बन सकते हैं।
  • बैक्टीरिया – कैम्पिलोबैक्टर जीवाणु गैस्ट्रोएन्टराइटिस का कारण बन सकता है।
  • पैरासाइट – कुछ परजीवी जैसे कि एंटामोइबा हिस्टोलिटिका, गियार्डिया लैम्ब्लिया और क्रिप्टोस्पोरिडियम भी गैस्ट्रोएन्टराइटिस की समस्या पैदा कर सकते हैं।
  • बैक्टीरियल टॉक्सिंस – बैक्टीरिया खुद बीमारी का कारण नहीं बनते, लेकिन उनसे नकले जहरीले पदार्थ भोजन को दूषित कर सकते हैं। स्टेफिलोकोकल बैक्टीरिया से निकले विषाक्त तत्व गैस्ट्रोएन्टराइटिस पैदा कर सकते हैं।
  • रसायन – कुछ तत्व भी गैस्ट्रोएन्टराइटिस का कारण बन सकते हैं जैसे सीसा।
  • दवा – कुछ एंटीबायोटिक्स दवाओं के कारण अतिसंवेदनशील लोगों में गैस्ट्रोएन्टराइटिस की समस्या हो सकती है।

आंत्रशोथ के जोखिम कारक : जैसा कि इस लेख में बताया गया है कि आंत्रशोथ भोजन, पानी और संक्रमित व्यक्ति से फैल सकता है। साथ ही गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लिए मुख्य जोखिम कारक, पर्यावरण या मौसम से जुड़े भी हो सकते हैं। अधिक जनसंख्या भी इसका एक बड़ा कारण मानी जाती है। इस आधार पर इसके जोखिम कुछ इस प्रकार हो सकते हैं (3):

  • बच्चे इस रोग के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं, इसलिए बच्चों को इस संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।
  • खसरा और कम प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनोडेफिशिएंसी) गैस्ट्रोएन्टराइटिस का जोखिम पैदा कर सकती है।
  • कुपोषण या विटामिन-ए और जिंक की कमी भी इस रोग का जोखिम कारक बन सकती है।

पढ़ते रहें लेख

आइए, अब इस रोग से जुड़े लक्षणों के बारे में जान लेते हैं।

आंत्रशोथ के लक्षण – Symptoms of Gastroenteritis in Hindi

गैस्ट्रोएन्टराइटिस के मरीजों में नीचे लिखे लक्षणों में से कुछ या सभी लक्षण नजर आ सकते हैं (2)

  • भूख में कमी
  • पेट में सूजन
  • जी मिचलाना
  • उल्टी
  • पेट में ऐंठन
  • पेट में दर्द
  • दस्त
  • गंभीर मामले में मल में खून या मवाद आना
  • अस्वस्थ महसूस करना या बुखार
  • सुस्ती और शरीर में दर्द

आगे है और जानकारी

आइए, अब जानते हैं कि आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए कौन से घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं। 

आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Gastroenteritis (Stomach Flu) in Hindi

ये घरेलू उपाय आंत्रशोध के कुछ लक्षणों को कम कर सकते हैं, लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं कर सकते। गंभीर समस्या में मेडिकल ट्रीटमेंट ही सबसे बेहतर है। आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) का संपूर्ण समाधान सिर्फ डॉक्टर ही कर सकते हैं।

1. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए सेब का सिरका

सामग्री :
  • सेब के सिरका का 1 बड़ा चम्मच
  • 1 कप गर्म पानी
प्रयोग की विधि :
  • एक कप पानी में सेब का सिरका मिलाएं।
  • फिर इस मिश्रण को पी लें।
कैसे मदद करता है?

वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि सेब के सिरके में एंटीमाइक्रोबियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। गैस्ट्रोएन्टराइटिस की समस्या में ये दोनों गुण काम आ सकते हैं। इसके जीवाणुरोधी प्रभाव उन बैक्टीरिया के खिलाफ काम कर सकते हैं, जो पेट में सूजन पैदा करते हैं। साथ ही इसमें एसिटिक एसिड होता है, जिसे कोशिका स्तर पर सूजन कम करने के लिए जाना जाता है। यह शोध एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर उपलब्ध है (4)

2. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए प्रो-बायोटिक योगर्ट

सामग्री:
  • एक कटोरी प्रो-बायोटिक योगर्ट
प्रयोग की विधि :
  • रोज एक कटोरी प्रो-बायोटिक योगर्ट खाएं। 
कैसे मदद करता है?

आंत्रशोथ के लिए घरेलू उपाय में प्रो-बायोटिक योगर्ट भी शामिल है। यह आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के रोगियों के लिए उपयोगी हो सकता है। योगर्ट यानी दही का सेवन पेट में मौजूद प्रो-बायोटिक सामग्री यानी अच्छे जीवाणु जैसे लैक्टोबैसिली और बिफीडोबैक्टीरिया में वृद्धि कर सकता है। ये जीवाणु गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं (5) (6)

3. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए शहद

सामग्री :
  • 1-2 चम्मच शहद
  • 1 कप गुनगुना पानी
प्रयोग की विधि :
  • एक कप पानी में एक से दो चम्मच शहद अच्छी तरह से मिलाएं।
  • फिर इस मिश्रण का सेवन करें।
  • इसे ओआरएस के घोल में भी मिलाया जा सकता है।
कैसे मदद करता है?

शहद का प्रयोग बच्चों में गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लक्षणों को कम कर सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार बच्चों को ओआरएस के घोल में शहद मिलाकर देने से इसका प्रभाव और बढ़ सकता है। शहद में पाए जाने वाले एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटी माइक्रोबियल गुण पेट में इंफेक्शन की समस्या से राहत देने में मददगार हो सकते हैं। साथ ही ध्यान रहे कि छह माह से कम आयु वाले शिशु को शहद न दें (7)

4. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए अदरक

सामग्री:
  • 1 इंच कटा हुआ अदरक
  • 1 कप पानी
प्रयोग की विधि :
  • एक कप पानी में एक इंच कटा हुआ अदरक मिलाएं।
  • इसे सॉस पैन में उबाल लें।
  • इसके बाद पानी को छान कर पिएं।
कैसे मदद करता है?

आंत्रशोथ के लिए घरेलू उपाय में अदरक का इस्तेमाल किया जा सकता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में देखा गया है कि अदरक का सेवन आंत्रशोथ के दौरान अपच जैसी समस्याओं से राहत नहीं देता, लेकिन दर्द को जरूर कम कर सकता है। अदरक का सेवन आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के दर्द के लिए दर्द निवारक दवा डिक्लोफेनाक की तरह काम कर सकता है (8)

5. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए हल्दी

सामग्री :
  • 2 चुटकी हल्दी पाउडर
  • 1 गिलास गर्म दूध
प्रयोग की विधि :
  • एक गिलास गर्म दूध में दो चुटकी हल्दी पाउडर मिलाएं।
  • इस मिश्रण को धीरे-धीरे पिएं।
कैसे मदद करता है?

एनसीबीआई की ओर से उपलब्ध शोध के अनुसार, हल्दी में गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव (पेट को सुरक्षा देने वाले) गुण पाए जाते हैं। साथ ही इसमें करक्यूमिन नामक पदार्थ पाया जाता है, जो आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) जैसे सूजन के जोखिम को कम कर सकता है। हल्दी अपने एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गतिविधियों की मदद से पेट के इंफेक्शन में राहत दे सकती है (9)

6. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए दालचीनी

सामग्री :
  • एक इंच दालचीनी का टुकड़ा
  • 1 कप पानी
  • शहद (आवश्यकतानुसार)
प्रयोग की विधि :
  • एक कप पानी में दालचीनी का टुकड़ा डालें।
  • इसे सॉस पैन में उबाल लें।
  • 5 मिनट उबालकर मिश्रण को छान लें।
  • फिर इसे चाय की तरह पिएं।
कैसे मदद करता है?

दालचीनी सबसे महत्वपूर्ण हर्बल दवाओं में से एक है और एशिया में इसे प्रमुखता से उपयोग किया जाता है। दालचीनी को पारंपरिक रूप से सूजन कम करने और गैस्ट्रिक रोगों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है।  दालचीनी के घटकों की जांच के बाद विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला है कि इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटीवायरल, एंटीऑक्सीडेंट व गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव गुण मौजूद हैं। इन्हीं गुणों के चलते दालचीनी का सेवन करने से दस्त और सूजन से राहत मिल सकती है (10)

7. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए चावल का पानी

सामग्री :
  • आधा कप चावल
  • 2 कप पानी
प्रयोग की विधि :
  • चावल में पानी डालकर उबालें।
  • इसे तब तक उबालें जब तक चावल गल नहीं जाते।
  • अब इसे छानकर चावल और उसके पानी को अलग-अलग कर लें।
  • इस पानी को कप में डालकर मरीज को पिलाएं।
कैसे मदद करता है?

गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लिए घरेलू उपाय की लिस्ट में चावल का पानी भी शामिल है। चावल का पानी दस्त से राहत दे सकता है। यह इलेक्ट्रोलाइट का अच्छा विकल्प है, जो शरीर में पानी की मात्रा को सामान्य बनाने में सहायक हो सकता है। विशेष रूप से बच्चों में डायरिया के लक्षणों में चावल के पानी/मांड के फायदे देखे गए हैं (11)

8. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए कैमोमाइल चाय

सामग्री :
  • 1 चम्मच कैमोमाइल चाय
  • 1 कप पानी
प्रयोग की विधि :
  • एक कप पानी में एक चम्मच कैमोमाइल चाय मिलाएं।
  • इस मिश्रण को 5 मिनट तक पकाएं।
  • इस मिश्रण को छान कर पी जाएं।
कैसे मदद करता है?

कैमोमाइल चाय का प्रयोग पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत प्रदान कर सकता है। इस चाय का सेवन पेट में एसिड की बढ़ी हुई मात्रा को कम करने में सहायक हो सकता है। कैमोमाइल चाय का उपयोग पेट की जलन, अपच, दस्त, अनियमित खान-पान, मोशन सिकनेस, मतली और उल्टी सहित विभिन्न गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल गड़बड़ियों से बचाव में  सहायक हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार, कैमोमाइल चाय पेट की खराबी से पैदा हुई सूजन और ऐंठन को कम कर सकती है (12)

9. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए नींबू

सामग्री:
  • आधा नींबू
  • 1 गिलास पानी
प्रयोग की विधि :
  • एक गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़ें।
  • अच्छी तरह से मिलाएं और नींबू पानी पी जाएं।
कैसे मदद करता है?

नींबू के रस में सिट्रस पाया जाता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, सिट्रेट नोरोवायरस के खिलाफ काम कर सकता है। नोरोवायरस संक्रमण से पैदा होने वाले रोग जैसे आंत्रशोथ में नींबू का प्रयोग फायदेमंद हो सकता है। नींबू के इस गुण के चलते गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लिए घरेलू उपाय में इसे शामिल किया जा सकता है (13)

10. आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए हरा केला

सामग्री :
  • 1 हरा कच्चा केला
  • पानी (आवश्यकतानुसार)
प्रयोगविधि :
  • हरे केले को बिना छिलका हटाए 7-10 मिनट उबाल लें।
  • केले को थोड़ा ठंडा होने दें।
  • इसके बाद केले का छिलका हटाएं और इसे कुचल लें यानी मैश कर लें।
  • फिर स्वादानुसार नमक डालें।
  • इसका ऐसे ही सेवन करे या फिर चावल के साथ खाएं।
कैसे मदद करता है?

कच्चे केले में फाइबर होता है, जिसका सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत पाने में किया जाता है। एक शोध के अनुसार, कच्चे केले के सेवन से बच्चों में दस्त के लक्षणों में कमी देखी गई है। इसके सेवन से पानी की कमी और अधिक बार मल आने का जोखिम कम हो सकता है (14)

लेख को अंत तक पढ़ें

लेख में आगे जानते हैं कि आंत्रशोथ का इलाज क्या हो सकता है। 

आंत्रशोथ का इलाज – Treatment of Gastroenteritis (Stomach Flu) in Hindi

आंत्रशोथ का इलाज इसके लक्षणों और उनकी गंभीरता पर निर्भर करता है। फिर भी इसके इलाज के तरीकों में नीचे लिखी बातें शामिल हो सकती हैं (2)

  • बहुत से तरल पदार्थों का सेवन करने के सुझाव दिए जा सकते हैं।
  • डॉक्टर की सलाह पर ओरल रिहाइड्रेशन साल्यूशन (ओआरएस) का सेवन कर सकते हैं, जो अधिकतर मेडिकल स्टोर पर मिलते हैं।
  • कई बार डॉक्टर ड्रिप के जरिए शरीर में पानी की पूर्ति कर सकते हैं।
  • अगर ये संक्रमण बैक्टीरिया द्वारा हुआ है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दवाओं का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं।
  • अगर संक्रमण पैरासाइट द्वारा फैला है, तो उस स्थिती में भी डॉक्टर कुछ दवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • जब तक डॉक्टर न कहें, तब तक उल्टी व डायरिया-रोधी दवाओं से परहेज करें, क्योंकि ये दवाएं शरीर में संक्रमण को बनाए रख सकती हैं।

बने रहें हमारे साथ

आइए, अब जानते हैं कि इस बीमारी से बचाव कैसे किया जा सकता है। 

आंत्रशोथ से बचाव  – Prevention Tips for Gastroenteritis (Stomach Flu) in Hindi

आंत्रशोथ से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, इसलिए नीचे लिखी बातों का ध्यान रखें (2)

  • रसोई और उसमें इस्तेमाल होने वाले सभी तरह के सामान को स्वच्छ रखें।
  • फल और सब्जियों को धोकर खाएं।
  • दूषित जल का सेवन न करें।
  • शौचालय और बाथरूम की नियमित रूप से सफाई रखनी चाहिए।
  • शौच के बाद हाथ जरूर धोएं।
  • ऐसे देशों की यात्रा न करें, जहां सफाई न रहती हो।
  • घर के आसपास गंदगी जमा न होने दें।
  • खाना अच्छी तरह पकाकर खाएं।
  • बैक्टीरिया पैदा न हो इसके लिए ठंडा भोजन ठंडा (5°C से नीचे) और गर्म भोजन गर्म (60°C से ऊपर) रखें।

इस लेख में आपने जाना कि आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के कारण क्या है और आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) का इलाज क्या हो सकता है। उम्मीद करते हैं कि ये जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लक्षण बिगड़ते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इस लेख से यह बात साफ होती है कि व्यक्ति जाने अनजाने में हानिकारक बैक्टीरिया की चपेट में आ सकता है। इसलिए, हमेशा साफ-सफाई का ध्यान रखें और आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) जैसे रोग के बारे में सचेत रहें। इस तरह के संक्रमण की रोकथाम व्यक्ति की जागरूकता और आदतों पर निर्भर करती है। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) कभी भी हो सकता है?

हां, वायरस और बैक्टीरिया से यह रोग कभी भी और किसी को भी हो सकता है। इसलिए, अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखें (15)

क्या गैस्ट्रोएन्टराइटिस संक्रामक है?

हां, आंत्रशोथ एक संक्रामक रोग है और किसी संक्रमित व्यक्ति या सतह के सीधे संपर्क में आने से यह फैल सकता है। यह दूषित भोजन, वायु और पानी से भी फैल सकता है (16)

आंत्रशोथ कब तक रहता है?

आंत्रशोथ के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 1-3 दिन बाद दिखाई देते हैं। सही उपचार न मिलने पर यह 1-2 दिन से लेकर 10 दिन से ज्यादा तक रह सकता है (17)

क्या आंत्रशोथ और फूड पॉइजनिंग एक ही चीज है?

नहीं, ये दोनों एक बीमारी नहीं हैं, लेकिन फूड पॉइजनिंग के कारण आंत्रशोथ की समस्या हो सकती है। फूड पॅाइजनिंग की समस्या दूषित भोजन करने से होती है (18)

क्या उपरोक्त उपाय बच्चों में पेट के फ्लू के उपचार में मदद करेंगे?

उपरोक्त उपायों में से कौन सा उपाय बच्चों के लिए सुरक्षित है, यह जानने के लिए चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।

गैस्ट्रिटिस और गैस्ट्रोएंटराइटिस के बीच अंतर क्या है?

गैस्ट्रिटिस ऐसी स्थिति है, जो पेट की दीवारों (stomach lining) की सूजन का कारण बनती है। गैस्ट्र्रिटिस केवल पेट को प्रभावित करता है और हमेशा संक्रमण के कारण नहीं होता है। वहीं, गैस्ट्रोएन्टराइटिस पेट और आंत दोनों की सूजन है, जो एक संक्रमण के कारण पैदा हो सकती है (19)

गैस्ट्रोएन्टराइटिस होने पर क्या खाएं?

गैस्ट्रोएन्टराइटिस के रोगियों को घर पर बने सूप, चावल का पानी और ओआरएस जैसे तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए। उनके लिए अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहना जरूरी है (20)

20 sources

Stylecraze has strict sourcing guidelines and relies on peer-reviewed studies, academic research institutions, and medical associations. We avoid using tertiary references. You can learn more about how we ensure our content is accurate and current by reading our editorial policy.
Was this article helpful?
The following two tabs change content below.

Auli Tyagi

औली त्यागी उभरती लेखिका हैं, जिन्होंने हरिद्वार (उत्तराखंड) से पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए. की डिग्री हासिल की है। औली को लेखन के क्षेत्र में दो साल का अनुभव है। औली प्रतिष्ठित दैनिक अखबार और कम्युनिटी रेडियो स्टेशन से ट्रेनिंग ले चुकी हैं। औली सामाजिक मुद्दों पर लिखना पसंद करती हैं। लेखन के अलावा इन्हें वीडियो एडिटिंग और फोटोग्राफी का तकनीकी ज्ञान भी हैं। इन्हें हिंदी और उर्दू साहित्य में विशेष रुचि है।

ताज़े आलेख

scorecardresearch