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गठिया (आर्थराइटिस) के लक्षण, इलाज और घरेलू उपचार – Arthritis Symptoms and Home Remedies in Hindi

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गठिया (आर्थराइटिस) के लक्षण, इलाज और घरेलू उपचार – Arthritis Symptoms and Home Remedies in Hindi April 9, 2019

इस बात से तो आप सहमत ही होंगे कि अब न तो पहले जैसा रहन-सहन रहा है और न ही खानपान। इस कारण से हमारी हड्डियां, जोड़ और मांंसपेशियां कमजोर हो रही हैं। परिणामस्वरूप, गठिया (आर्थराइटिस) का सामना करना पड़ता है। जहां, पहले यह समस्या अमूमन 60 वर्ष के बाद होती थी, वहीं अब युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। गठिया का सबसे ज्यादा असर घुटनों, कूल्हों व हाथों की उंगुलियों पर दिखाई देता है। इस अवस्था में मरीज का चलना-फिरना और उठना-बैठना तक मुश्किल हो जाता है।

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आखिर गठिया रोग क्या है, इससे जुड़े तमाम जवाब आपको इस लेख में मिलेंगे। बेशक, हालात गंभीर होने पर डॉक्टरी उपचार ही काम आता है, लेकिन कुछ ऐसे घरेलू उपचार भी हैं, जो गठिया में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इन घरेलू नुस्खों से आपका दर्द काफी हद तक कम हो सकता है।

क्या है गठिया? – What is Arthritis

हड्डियों के जोड़ों में यूरिक एसिड जमा होने या फिर कैल्शियम की कमी होने पर उनमें सूजन व अकड़न आ जाती है। साथ ही जोड़ों में गांठ, कांटे चुभने जैसा महसूस होता है। साथ ही जोड़ों में मौजूद टिशू भी टूटकर नष्ट होने लगते हैं। इस अवस्था को ही गठिया कहा जाता है। जोड़ उन्हें कहा जाता है, जहां दो हड्डियां आपस में मिलती हैं, जैसे – कोहनियां व घुटने (1)।

गठिया रोग क्या है, यह जानने के बाद आगे पता करते हैं कि गठिया होता क्यों है।

गठिया (आर्थराइटिस) के कारण – Causes of Arthritis Hindi

Arthritis Pinit

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गठिया होने के विभिन्न कारण हो सकते हैं, जिनमें से प्रमुख कारणों के बारे में यहां बताया जा रहा है (2):

  • कार्टिलेज : जोड़ों में कार्टिलेज (एक प्रकार का टिशू) होता है, जो हड्डियों के लिए कुशन का काम करता है। इसके नष्ट होने पर जोड़ आपस में रगड़ खाने लगते हैं, जिससे गठिया की समस्या हो सकती है।
  • आनुवंशिक : अगर परिवार में किसी को कभी गठिया की समस्या रही है, तो हो सकता है कि आपको भी इसका सामना करना पड़े।
  • आयु : वैसे तो 60 वर्ष के आसपास पहुंचने पर यह समस्या होने लगती है, लेकिन आजकल युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं।
  • लिंग : पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में गठिया की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि महिलाओं में कैल्शियम की कमी उम्र बढ़ने के साथ-साथ कम होने लगती है। साथ ही एस्ट्रोजन हार्मोन के असंतुलित होने पर भी ऐसा हो सकता है।
  • पुरानी चोट : अगर आपको पहले कभी हड्डियों के जोड़ में चोट लगी है, तो भविष्य में आर्थराइटिस की समस्या होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • मोटापा : वजन का अधिक होना भी आर्थराइटिस का अहम कारण माना गया है। शरीर का वजन जरूरत से ज्यादा होने पर घुटनों, कूल्हों व कमर पर ज्यादा बोझ पड़ता है। आगे चलकर इससे गठिया हो सकता है।
  • संक्रमण : शरीर में किसी बैक्टीरिया या वायरस के पनपने पर भी गठिया हो सकता है।

गठिया रोग के लक्षण जानने के लिए पढ़ते रहें यह लेख।

गठिया के लक्षण – Symptoms of Arthritis in Hindi

जोड़ों में सूजन और दर्द गठिया रोग के लक्षण है। इसके अलावा, अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जिनके बारे में हम यहां विस्तार से बता रहे हैं (2):

  • सूजन व दर्द के कारण चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है।
  • कुछ लोगों में सुबह के समय यह दर्द ज्यादा होता है।
  • प्रभावित जगह लाल रंग की हो जाती है।
  • जिस जगह गठिया हुआ है, उस जोड़ में भारीपन महसूस हो सकता है।
  • जल्दी थकान हो जाना और इम्यून सिस्टम का कमजोर होना।
  • पीड़ित व्यक्ति को बार-बार बुखार आ सकता है।
  • जोड़ों के आसपास गांठें भी बन सकती हैं।

आइए, अब गठिया के विभिन्न प्रकार भी जान लेते हैं।

गठिया (आर्थराइटिस) के प्रकार – Types of Arthritis Hindi

अभी तक 100 प्रकार के आर्थराइटिस की पहचान हो चुकी है। इनमें से सबसे अहम ऑस्टियो आर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस है। ज्यादातर लोग इन्हीं दो का शिकार होते हैं। ऑस्टियो आर्थराइटिस का शिकार 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग होते हैं और खासकर महिलाएं इसका ज्यादा शिकार होती हैं (3)। वहीं, रूमेटाइड आर्थराइटिस के लक्षण अधिकतर युवाओं में नजर आते हैं। यह भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा होता है (4)। आर्थराइटिस के अन्य प्रकार कुछ तरह से हैं :

  • गाउट : शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा हो जाने से जोड़ों के कार्टिलेज नष्ट होने लगते हैं। साथ ही यूरिक एसिड जोड़ों व नसों में जम जाता है, जिससे आर्थराइटिस की समस्या होती है (4)।
  • एंकलोजिंग स्पोंडिलाइटिस : इसमें कमर की हड्डी व जोड़ प्रभावित होते हैं। इस अवस्था में पीठ में सूजन व दर्द होने लगती है (5)।
  • जुवेनाइल आर्थराइटिस : इसका शिकार बच्चे होते हैं, इसलिए इसे जुवेनाइल आर्थराइटिस कहा जाता है। यह 16 साल से कम उम्र के बच्चों को होता है। स्पष्ट तौर पर बताना मुश्किल है कि यह किस कारण से होता है, ऐसा अनुमान है कि ऑटोइम्यून सिस्टम खराब होने के कारण ऐसा हो सकता है। इसमें शरीर के स्वस्थ्य टिशू नष्ट हो जाते हैं (6)।
  • सोराइटिक आर्थराइटिस : यह त्वचा संबंधी विकार सोरायसिस के कारण होता है। सोरायसिस से प्रभावित 7 से 42 प्रतिशत मरीज इसकी चपेट में आते हैं (7)।
  • रिएक्टिव आर्थराइटिस : यह जोड़ों, आंखों, यूरिन मार्ग व जेनिटल एरिया को प्रभावित कर सकता है। इन जगहों पर सूजन व दर्द महसूस होती है। यह समस्या संक्रमण के कारण होती है (8)।
  • ओस्टियोसोराइसिस : यह आनुवंशिक हो सकता है, जो उम्र बढ़ने के साथ-साथ सामने आता है। यह मुख्य रूप से कमर, घुटनों और पैरों को प्रभावित करता है।

लेख के इस भाग में जानिए, गठिया के कारगर घरेलू इलाज।

गठिया के घरेलू इलाज – Home Remedies for Arthritis in Hindi

1. हल्दी

turmeric Pinit

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लाभ : हल्दी को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक माना गया है। चोट लगने पर हल्दी का प्रयोग किया जाए, तो जल्द राहत मिलती है। इसमें करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है। साथ ही आर्थराइटिस के असर को धीरे-धीरे कम कर सकता है (9)। इसलिए, गठिया की दवा के रूप में आप हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे करें प्रयोग : दो-तीन ग्राम हल्दी को पानी में डालकर उबाल लें। इसके बाद जब पानी सामान्य हो जाए, तो इसका सेवन करें। आप प्रतिदिन के भोजन में भी थोड़ी-सी हल्दी का प्रयोग कर सकते हैं।

2. अदरक

लाभ : सर्दी-जुकाम से लेकर थकान मिटाने, पेट संबंधी विकारों और मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए सदियों से अदरक का प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, यह सूजन को दूर करने के भी काम आता है। यह शरीर में प्रोस्टाग्लैंडीन के स्तर को कम कर आर्थराइटिस से राहत दिलाता है। कई शोधों में इस बात की पुष्टि की गई है कि दर्द व सूजन को कम करने के लिए किसी दवा के मुकाबले अदरक तेजी से काम करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं (10) (11)। गठिया रोग के लिए अदरक बेहतर है। आयुर्वेद में भी इसके कई गुणों का उल्लेख है।

कैसे करें प्रयोग : आप अदरक के तेल से मालिश कर सकते हैं। इसके अलावा अदरक की चाय बनाकर इसका सेवन कर सकते हैं। हर लिहाज से अदरक फायदेमंद साबित होगा। ध्यान रहे कि इसका अधिक सेवन न करें, क्योंकि इससे पेट में गर्मी हो सकती है।

3. मेथी

Fenugreek Pinit

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लाभ : जहां मेथी खाने का स्वाद बढ़ा देती है, वहीं यह कई प्रकार की बीमारियों से लड़ने में हमारी मदद करती है। इसे एंंटीइंफ्लेमेटरी और एंटी आर्थराइटिक का प्रमुख स्रोत माना गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार मेथी के दानों में पेट्रोलियम ईथर एक्सट्रेक्ट होता है, जिस कारण ये गठिया के चलते जोड़ों में आई सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही इसमें सैचुरेटेड और अनसैचुरेटेड फैटी एसिड भी होता है। इस कारण से भी यह सूजन और दर्द को कम कर सकते हैं (12) (13)। इसलिए, अगर आपको गठिया का दर्द है, तो मेथी के दानों का सेवन गठिया की दवा के रूप में कर सकते हैं।

कैसे करें प्रयोग : मेथी के दानों को पानी में डालकर उबाल लें। फिर पानी को छानकर उसमें नींबू व शहद मिलाकर चाय की तरह पिएं। साथ ही आप मेथी के दानों को पीसकर पाउडर बना सकते हैं और फिर इसे सब्जियों व सूप में डालकर सेवन करें। इसके अलावा, मेथी के दानों को पानी में भिगोकर अंकुरित कर लें और फिर सलाद की तरह खा सकते हैं।

4. अरंडी का तेल

लाभ : अरंडी का तेल शरीर में लिम्फोसाइट को बढ़ाने में मदद करता है। यह एक प्रकार के टी सेल यानी श्वेत रक्त कोशिकाएं होती हैं, जो किसी भी तरह की बीमारी से लड़ने में हमारी मदद करती हैं। अरंडी के तेल से मालिश करने से 24 घंटे में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। यह शरीर में लगने वाली चोटों से भी उबरने में मदद करती हैं। साथ ही अरंडी के तेल में रिसिनोलिक एसिड पाया जाता है, जो एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है (14)। गठिया रोग के लिए अरंडी का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे करें प्रयोग : अरंडी के तेल में अजवाइन व कपूर मिलाकर गर्म कर लें। फिर तेल के हल्का गुनगुना होने पर दर्द वाली जगह पर हल्के-हल्के हाथों से 15-20 मिनट मालिश करें। इस तरह मसाज करने से जोड़ों में दर्द व अकड़न से राहत मिलेगी।

5. लहसुन

Garlic Pinit

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लाभ : कई अध्यनों में पाया गया है कि लहसुन में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है, जिस कारण यह जोड़ों में दर्द व सूजन को कम कर सकता है (15)। इसके अलावा, अदरक में डायलाइल डाइसल्फाइड नामक तत्व भी होता है, जो एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह प्रभावी असर दिखाता है। यह आर्थराइटिस के कारण होने वाले दर्द व सूजन को कम करने और नष्ट कार्टिलेज को ठीक करने का काम करता है (16)। इसलिए, लहसुन को गठिया की दवा के रूप में खाएं।

कैसे करें प्रयोग : आर्थराइटिस जैसी समस्या में आप रोज सुबह तीन-चार लहसुन की कच्ची कलियों का सेवन कर सकते हैं।

6. बुरडॉक की जड़

लाभ : यह सदियों से प्रयोग की जा रही आयुर्वेदिक औषधि है। इसमें भी एंटीइंफ्लेमेरी गुण पाए जाते हैं। यह जड़ बाजार में सूखे पाउडर, काढ़े या फिर रस के रूप में मिल जाएगी। इसके सेवन से न सिर्फ घुटनों व अन्य जोड़ों में आई सूजन कम होती है, बल्कि ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस का स्तर भी कम होता है (17)। बुरडॉक की जड़ को गठिया का आयुर्वेदिक इलाज माना गया है।

कैसे करें प्रयोग : अगर आपके पास इसका पाउडर है, तो इसे करीब 200 मिलीलीटर पानी में डालकर उबाल लें और फिर पानी को सामान्य होने दें। इसके बाद दिन में दो-तीन बार इस मिश्रण का सेवन करें। दिन में दो बार इसका सेवन करें।

7. मुलेठी

Muleti Pinit

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लाभ : इस आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी में ग्लाइसिराइजिन नामक प्रमुख तत्व पाया जाता है, जो एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है। यह शरीर में फ्री रेडिकल्स को बनने से रोकता है और शरीर में सूजन का कारण बनने वाले एंजाइम को जड़ से खत्म करता है (18)। यह भी गठिया का आयुर्वेदिक इलाज है।

कैसे करें प्रयोग : बाजार में मुलेठी सूखी छड़, पाउडर, टेब्लेट, कैप्सूल या फिर जेल के रूप में मिल जाएगी। आप इसका सेवन किसी भी रूप में कर सकते हैं।

8. आलू का रस

लाभ : आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि आलू के रस से भी गठिया का इलाज संभव है। बेशक, आलू खाने से फैट बढ़ता है, लेकिन इसका रस बेहद गुणकारी है। आलू के रस में विभिन्न प्रकार के खनिज और कार्बनिक नमक मौजूद होता है। इसे पीने से शरीर में जमा यूरिक एसिड बाहर निकल जाता है, जिस कारण आर्थराइटिस से आराम मिलता है (19)।

कैसे करें प्रयोग : आप आलू को छिलकर बारीक टुकड़ों में काट लें और फिर रातभर के लिए पानी में डालकर रख दें। अगली सुबह इस पानी को खाली पेट पिएं। इसके अलावा, आप आलू के रस और पानी को बराबर मात्रा में लेकर मिक्स कर लें और फिर सेवन करें।

9. अश्वगंधा

Ashwagandha Pinit

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लाभ : इस आयुर्वेदिक जड़ी-बूडी के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और ताकत मिलती है। साथ ही यह दर्द और सूजन को भी कम करता है। इसके पौधे के पत्तों व जड़ की गंध अश्व के मूत्र जैसी होती है, इसलिए इसका नाम अश्वगंधा पड़ा है। ध्यान रहे कि रुमेटी आर्थराइटिस से पीड़ित मरीज अश्वगंधा का सेवन न करे। इससे उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ सकती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि गठिया रोग का इलाज अश्वगंधा से किया जा सकता है।

कैसे करें प्रयोग : गठिया के मरीज इसकी चाय बनाकर इसका सेवन कर सकते हैं।

10. विलो की छाल

लाभ : आर्थराइटिस के लिए विलो (एक प्रकार का पेड़) की छाल का प्रयोग किया जा सकता है। इससे गठिया का इलाज संभव है। इसके प्रयोग से शरीर में सूजन कम होती है। पुराने समय में लोग दर्द को कम करने के लिए इस पेड़ की छाल को चबाया करते थे। इसमें एस्पिरिन जैसे गुण होते हैं, जो जोड़ों में होने वाले दर्द को कम करने में सक्षम है (20)। गठिया के उपचार के लिए आप विलो की छाल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे करें प्रयोग : आप या तो इस छाल को चबा सकते हैं या फिर इसकी चाय बना सकते हैं। इसका सेवन सप्लीमेंट्स की तरह भी किया जा सकता है। ध्यान रहे कि इसे अधिक मात्रा में लेने से शरीर पर रैशेज या फिर किसी अन्य तरह की एलर्जी हो सकती है।

11. नेटल्स

Nettle Pinit

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लाभ : हिमालय के पहाड़ी क्षेत्र में कंडाली नामक औषधीय पौधा पाया जाता है। आम भाषा में इसे नेटल्स या फिर बिच्छू बूटी कहते हैं, क्योंकि इस पौधे को छूने पर शरीर में उसी प्रकार झनझनाहट होती है, जिस प्रकार बिच्छू के काटने पर होती है। इस आयुर्वेदिक औषधि की मदद से हर प्रकार के आर्थराइटिस को ठीक किया जा सकता है। इसमें तमाम तरह के पोषक तत्व और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो आर्थराइटिस के दर्द को कम कर हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं (21) (22)। गठिया रोग के घरेलू उपचार में आप नेटल्स भी प्रयोग कर सकते हैं।

कैसे करें प्रयोग : इसके पत्तों के ऊपर छोटे-छोटे बाल जैसे होते हैं, जिनमें सिलिकॉन की मात्रा ज्यादा होती है। जब इन पत्तों को त्वचा से स्पर्श किया जाता है, तो इन बालों के तीखे कोनों के साथ सिलिकॉन तत्व त्वचा में प्रवेश कर जाता है। बाद में यह तत्व दर्द कम करने में मदद करता है।

12. गर्म सिकाई

लाभ : आर्थराइटिस में गर्म सिकाई करने से जोड़ों में आई अकड़न कम होती है और मांसपेशियां भी नरम होती हैं। इससे रक्त का प्रवाह अच्छी तरह हो पाता है। ऐसा करने से आपको जोड़ों में हो रहे दर्द से आराम मिलेगा। साथ ही जरूरी पोषक तत्वों को भी प्रभावित मांसपेशियों तक पहुंचने का रास्ता मिल जाता है (23)। इससे गठिया का इलाज आसानी से किया जा सकता है।

कैसे करें प्रयोग : आप अपनी पसंद के अनुसार गीले या सूखे तरीके से गर्म सिकाई कर सकते हैं। आप या तो गर्म पानी से नहा लें या फिर बाथ टब में गर्म पानी भरकर उसमें कुछ देर बैठ सकते हैं। इसके अलावा, आप करीब 20 मिनट के लिए हीटिंग पैड का इस्तेमाल कर सकते हैं।

लेख के इस अंतिम भाग में हम गठिया से बचने कुछ अन्य उपाय भी जान लेते हैं।

गठिया (आर्थराइटिस) से बचाव – Prevention Tips for Arthritis in Hindi

  • जोड़ों के दर्द से बचने के लिए दिनभर में कम से कम तीन-चार लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। इससे शरीर में जमा विषाक्त पदार्थ मूत्र मार्ग के जरिए बाहर निकल जाते हैं।
  • नियमित रूप से व्यायाम करना जरूरी है। इससे शरीर की मांसपेशियां व हड्डियां ठीक प्रकार से काम कर पाती हैं।
  • व्यायाम के साथ-साथ समय निकालकर योग करना भी जरूरी है। इससे आपकी मांसपेशियां मजबूत होंगी और आप दिनभर ऊर्जावान बने रहेंगे।
  • अपनी डाइट में दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों को शामिल करें। इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मिलता है, जिससे हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं। अगर आपको डेयरी उत्पादों से एलर्जी है, तो डॉक्टर की सलाह पर अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
  • कैल्शियम की तरह ही विटामिन की भी जरूरत होती है। हड्डियों के लिए मुख्य रूप से विटामिन-सी और डी चाहिए होता है। सर्दियों में सुबह कुछ देर धूप में बैठने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी मिलता है। इसके अलावा, आप इनके सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।
  • सर्दियों में सुबह उठते ही कमरे से बाहर न जाएं, बल्कि कुछ मिनट शरीर को सामान्य होने दें और गर्म कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें।
  • जरूरत से ज्यादा वजन होने पर भी आर्थराइटिस की समस्या हो सकती है। वजन अधिक होने पर घुटनों व कूल्हों पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसलिए, अपने वजन को नियंत्रित रखें।
  • अगर आपके किसी जोड़ पर लगातार चोट लगती है, तो सावधान हो जाएं। आगे चलकर इससे भी आर्थराइटिस की समस्या हो सकती है।
  • अधिक शराब, धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से भी हड्डियों और मांसपेशियों पर विपरित असर पड़ता है। इन सभी चीजों का गठिया रोग में परहेज करने से आपको फायदा होगा।

बेशक, यहां बताए गए सभी घरेलू उपचार आर्थराइटिस के मरीजों के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन ध्यान रहे कि इनके उपयोग से सिर्फ सूजन व दर्द कम हो सकती है। साथ ही ये बीमारी से उबरने में आपकी मदद कर सकते हैं। बेहतर गठिया के इलाज के लिए आपको अच्छे डॉक्टर से संपर्क करना होगा। इसके अलावा, आपको संतुलित दिनचर्या व खानपान का पालन करना होगा। आपको यह लेख कैसा लगा, हमें नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं।

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