हेपेटाइटिस बी के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Hepatitis B Causes, Symptoms and Home Remedies in Hindi

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अपने पूरे जीवन में लोग कई बीमारियों का सामना करते हैं। कुछ बीमारियां बहुत आम होती हैं, जो दो से चार दिनों में ही ठीक हो जाती हैं। वहीं कुछ बीमारियां ऐसी भी हैं, जिनका जीवन में शामिल होना मौत की दस्तक के समान होता है। ऐसी ही एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, हेपेटाइटिस बी। इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको हेपेटाइटिस बी के लक्षण, कारण और इसके उपचार के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। फिर भी आपको ध्यान रखना होगा कि लेख के माध्यम से बताया जाने वाला हेपेटाइटिस बी का घरेलू इलाज कुछ हद तक राहत तो दिला सकता है, लेकिन इनकी मदद से समस्या से पूरी तरह छुटकारा नहीं पाया जा सकता। इसलिए, जरूरी है कि हेपेटाइटिस बी के उपचार के लिए एक बार डॉक्टर से परामर्श अवश्य ले लें।

तो आइए विषय से संबंधित अन्य जानकारियां हासिल करने से पहले जरूरी है कि थोड़ा हेपेटाइटिस बी के विषय में जान लिया जाए।

हेपेटाइटिस बी क्या है – What are Hepatitis B in Hindi

हेपेटाइटिस बी एक संक्रामक बीमारी है, जो हेपेटाइटिस बी वायरस के कारण होती है। यह बीमारी किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकती है। लेकिन बच्चों में इस बीमारी के होने की आशंका अत्यधिक प्रबल मानी जाती है। इसमें मुख्य रूप से रोगी का लिवर प्रभावित होता है। संक्रमण के कारण लिवर में सूजन आती है, जो समय के साथ अन्य शारीरिक जटिलताओं को जन्म दे सकती है। वहीं कुछ गंभीर स्थितियों में यह लिवर की घातक क्षति या सिरोसिस (लिवर का पूरी तरह से काम न करना) का कारण भी बन सकती है। हालांकि, यह स्थिति दुर्लभ है, लेकिन अत्यधिक गंभीर अवस्था में इस संक्रमण के कारण रोगी की मौत भी हो सकती है (1)

हेपेटाइटिस बी क्या है, इस बारे में जानने के बाद लेख के अगले भाग में हम आपको इसके प्रकार के बारे में बताएंगे।

हेपेटाइटिस बी के प्रकार – Types of Hepatitis B in Hindi

हेपेटाइटिस बी संक्रमण मुख्य दो प्रकार के होते हैं (1)

1. एक्यूट हेपेटाइटिस बी

यह हेपेटाइटिस बी का एक सामान्य प्रकार है। इसमें दो से तीन हफ्तों में ही रोगी को होने वाली समस्याओं का अंत हो जाता है। वहीं चार से छह महीनों में लिवर सामान्य अवस्था में वापस आ जाता है।

2. क्रोनिक हेपेटाइटिस बी

हेपेटाइटिस बी का यह प्रकार काफी घातक साबित हो सकता है और कुछ विशेष परिस्थितियों में लिवर की गंभीर क्षति या सिरोसिस का कारण भी बन सकता है। हेपेटाइटिस बी के इस प्रकार में लंबे समय तक कोई भी लक्षण प्रदर्शित नहीं होते और जब तक लक्षण नजर आते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। हेपेटाइटिस बी का यह प्रकार मुख्य रूप से बच्चों में देखा जाता है। वहीं कुछ ऐसे वयस्क जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसकी चपेट में आ जाते हैं।

लेख के अगले भाग में अब हम आपको हेपेटाइटिस बी के जोखिम कारकों से जुड़ी जानकारी देंगे।

हेपेटाइटिस बी के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk Factors of Hepatitis B in Hindi

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि हेपेटाइटिस बी वायरस के कारण ही हेपेटाइटिस बी संक्रमण होता है। यह संक्रमण हेपेटाइटिस बी के जोखिम कारक के जरिए एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। इन जोखिम कारकों को बिंदुवत बताया गया है (1)

  • संक्रमित सुई का उपयोग करने से।
  • त्वचा और मुंह का घाव या कट (Cut) की स्थिति के साथ आंखों का संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल जैसे:- खून या लार का सीधा संपर्क में आना।
  • संक्रमित व्यक्ति से साथ असुरक्षित यौन संबंध।
  • संक्रमित खून चढ़ाने के कारण।
  • संक्रमित खून के लगातार संपर्क में रहने से (स्वास्थ्य संबंधी जांच करने वाले व्यक्ति को)।
  • लंबे समय से डायलिसिस (खून को मशीन की सहायता से साफ करने की प्रक्रिया) कराने वाले लोगों को।
  • असुरक्षित सुई से टैटू बनाने से।
  • संक्रमित व्यक्ति के साथ टूथब्रश या रेजर जैसी निजी चीजे शेयर करने से।
  • संक्रमित गर्भवती मां से बच्चे में।

अब हम लेख के अगले भाग में आपको हेपेटाइटिस बी के लक्षण के बारे में बताएंगे।   

हेपेटाइटिस बी के लक्षण – Symptoms of Hepatitis B in Hindi

हालांकि, शुरुआती दिनों में हेपेटाइटिस रोग के लक्षण बिलकुल भी नहीं दिखाई देते। लेकिन कुछ स्थितियों में आपको निम्न प्रभाव देखने को जरूर मिल सकते हैं (1)

  • कुछ दिनों या हफ्तों तक कमजोरी का महसूस होना।
  • जल्दी-जल्दी बीमार होना।
  • भूख की कमी।
  • अत्यधिक थकान।
  • हल्का बुखार।
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की समस्या।
  • मतली और उल्टी की समस्या।
  • त्वचा पर पीलापन।
  • गाढ़े रंग का पेशाब होना।

हेपेटाइटिस बी के लक्षण जानने के बाद आइए अब हम इस समस्या के घरेलू उपचारों के बारे में भी थोड़ी जानकारी हासिल कर लेते हैं।   

हेपेटाइटिस बी के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Hepatitis B in Hindi

1. मिल्क थिसल

सामग्री
  • मिल्क थिसल टी बैग
कैसे इस्तेमाल करें
  • सबसे पहले एक कप गर्म पानी लें।
  • अब कप में मिल्क थिसल टी बैग डालकर 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • समय पूरा होने के बाद तैयार चाय को सिप करके पिएं।
  • नियमित रूप से इस चाय को दिन में एक से दो बार इस्तेमाल किया जा सकता है। 
कैसे है लाभदायक

हेपेटाइटिस बी का घरेलू इलाज के तौर पर मिल्क थिसल की चाय को उपयोग में लाना फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, मिल्क थिसल के बीज में सिलीबिन नाम का एक खास तत्व पाया जाता है, जिसमें लिवर प्रोटेक्टिव (लिवर को क्षति से बचाने वाला) प्रभाव पाया जाता है। साथ ही इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन को कम करने वाला) गुण भी पाया जाता है, जो संयुक्त रूप से हेपेटाइटिस बी वायरस के प्रभाव को कम करने के साथ होने वाले जोखिमों को रखने में भी मदद कर सकता है (2)

2. लहसुन 

समाग्री 
  • दो से तीन लहसुन की कली
कैसे इस्तेमाल करें 
  • खाद्य सामग्रियों में लहसुन का प्रयोग करें।
  • चाहें तो लहसुन को सीधे खाने के लिए भी इस्तेमाल में ला सकते हैं।
  • दिए गए दोनों ही तरीकों में से किसी एक के माध्यम से दिन में एक बार लहसुन का सेवन जरूर करें। 
कैसे है लाभदायक

एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार लहसुन में एलिसिन (Allicin) नाम का एक खास तत्व पाया जाता है। इस खास तत्व के कारण लहसुन में एंटीमाइक्रोबियल (घातक जीवाणुओं को नष्ट करने वाले), इम्यूनोमॉड्यूलेटरी (प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले) और एंटीवायरल (वायरस को नष्ट करने वाले) गुण मौजूद होते हैं (3) (4)। जैसा कि हमने आपको बताया कि हेपेटाइटिस बी एक वायरस संक्रमण है और इसमें लिवर प्रभावित होता है (1)

ऐसे में एंटीमाइक्रोबियल और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार कर उपापचय संबंधी विकारों को दूर करने में मदद कर सकते हैं। इसी कारण इन दोनों प्रभावों का हेपेटाइटिस बी के कारण होने वाली लिवर संबंधी समस्याओं पर सकारात्मक लाभ देखा जा सकता है (3) (4)। वहीं इसमें मौजूद एंटीवायरल प्रभाव हेपेटाइटिस बी वायरस के प्रभाव को कम करने में लाभकारी माना जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में सीधे तौर पर कोई भी प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि यह हेपेटाइटिस बी वायरस पर कितना प्रभावी साबित हो सकता है।

3. अदरक 

सामग्री 
  • अदरक के कटे हुए दो से चार टुकड़े
  • एक कप पानी 
कैसे इस्तेमाल करें
  • एक कप पानी को सॉस पैन में लेकर उसमें अदरक के टुकड़े डालें और गैस पर उबलने तक चढ़ा दें।
  • अच्छे से पानी उबलने के बाद उसे एक कप में छानकर अलग कर लें और हल्का ठंडा होने का इंतजार करें।
  • जब पानी गुनगुना हो जाए तो उसे सिप करके पिएं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब एक से दो बार दोहराया जा सकता है।
कैसे है लाभदायक

विशेषज्ञों के मुताबिक अदरक में हेपटोप्रोटेक्टीव (लिवर को क्षति से बचाने वाला) और एंटीवायरल (वायरस के प्रभाव को नष्ट करने वाला) प्रभाव पाया जाता है (5) (6)। जैसा कि आपको लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि हेपेटाइटिस एक वायरस संक्रमण है, जिसमें लिवर में सूजन और क्षति की समस्या होती है (1)। इस कारण यह माना जा सकता है कि अदरक के उपयोग से हेपेटाइटिस बी का घरेलू इलाज लाभकारी परिणाम प्रदर्शित कर सकता है।

4. ग्रीन टी 

सामग्री 
  • एक चम्मच ग्रीन टी
  • एक कप गर्म पानी 
कैसे इस्तेमाल करें 
  • सबसे पहले एक कप गर्म पानी लें और उसमें एक चम्मच ग्रीन टी डालें।
  • अब इसे 10 से 15 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें।
  • समय पूरा होने के बाद धीरे-धीरे इसे सिप करके पिया जा सकता है।
  • इस प्रक्रिया को दिन में एक से दो बार दोहराया जा सकता है। 
कैसे है लाभदायक

हेपेटाइटिस बी के उपचार के लिए ग्रीन टी का उपयोग भी फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, ग्रीन टी में एपिगैलोकैटेचिन गैलेट (Epigallocatechin Gallate) नाम का एक विशेष तत्व पाया जाता है, जो हेपेटाइटिस बी वायरस के खिलाफ लड़ने की क्षमता रखता है। वहीं इसके अलावा ग्रीन टी में ऐसे ही अन्य कई तत्व भी मौजूद होते हैं, जो संयुक्त रूप से हेपेटाइटिस बी की समस्या से राहत दिलाने में मदद करते हैं (7) (8)। इस कारण यह कहना गलत नहीं होगा कि इस समस्या से राहत पाने के लिए ग्रीन टी का उपयोग लाभकारी साबित हो सकता है।

5. रेड जिनसिंग 

सामग्री 
  • एक रेड जिनसिंग टी बैग
  • एक कप गर्म पानी 
कैसे इस्तेमाल करें 
  • एक कप गर्म पानी लें और उसमें रेड जिनसिंग टी बैग डाल दें।
  • 10 से 15 मिनट तक टी बैक को ऐसे ही पड़ा रहने दें।
  • समय पूरा होने के बाद इसे सिप करके पी लें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में एक से दो बार तक दोहराया जा सकता है। 
कैसे है लाभदायक

विशेषज्ञों के मुताबिक रेड जिनसिंग में एंटीवायरल प्रभाव पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटाने वाले प्रभाव के साथ काफी हद तक हेपेटाइटिस बी वायरस के खिलाफ भी सकारात्मक परिणाम प्रदर्शित कर सकता है (9)। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि रेड जिनसिंग को हेपेटाइटिस बी के उपचार के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

6. शहद

सामग्री 
  • एक चम्मच प्राकृतिक शहद 
कैसे इस्तेमाल करें 
  • एक चम्मच शहद का नियमित सेवन करें।
  • बेहतर प्रभाव के लिए इसे दिन में दो बार तक लिया जा सकता है।
कैसे है लाभदायक

शहद में हेप्टोप्रोटेक्टिव (लिवर को क्षति से बचाने वाला) और एंटीवायरल (वायरस को नष्ट करने वाला) दोनों ही गुण पाए जाते हैं (10) (11)। वहीं लेख में इस बात का जिक्र पहले भी किया जा चुका है कि यह दोनों ही गुण संयुक्त रूप से हेपेटाइटिस बी की समस्या से होने वाले जोखिमों को कम कर सकते हैं, बल्कि इससे राहत दिलाने में भी मददगार साबित हो सकते हैं। इस कारण यह माना जा सकता है कि शहद का उपयोग हेपेटाइटिस बी के उपचार के एक बेहतर विकल्प के तौर पर किया जा सकता है।

7. गन्ने का रस 

सामग्री 
  • आधा गिलास गन्ने का रस 
कैसे इस्तेमाल करें 
  • प्रतिदिन ताजा गन्ने का रस पिएं। 
कैसे है लाभदायक

हेपेटाइटिस बी ट्रीटमेंट के लिए आप गन्ने के रस को भी उपयोग में ला सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक गन्ने के रस में फ्लेवोनॉयड और एंथोसायनिन जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। इनकी मौजूदगी के कारण ही गन्ने का रस शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (मुक्त कणों से होने वाली क्षति को रोकने वाला) और हेप्टोप्रोटेक्टिव (लिवर को क्षति से बचाने वाला) प्रभाव प्रदर्शित करता है (12)। जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि हेपेटाइटिस बी की समस्या में मुख्य रूप से लिवर ही प्रभावित होता है (1)। इस कारण यह कहा जा सकता है कि गन्ने का रस लिवर संबंधित जोखिमों को दूर कर हेपेटाइटिस बी के घातक परिणामों को दूर रखने में मदद कर सकता है।

8. बिटर कोला 

सामग्री 
  • बिटर कोला सीड सप्लीमेंट 
कैसे इस्तेमाल करें 
  • बिटर कोला सीड सप्लीमेंट की मात्रा और लेने की प्रक्रिया के बारे में डॉक्टर से संपर्क करके नियमित सेवन में लाएं।
कैसे है लाभदायक

हेपेटाइटिस बी ट्रीटमेंट के लिए आप बिटर कोला को भी इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल, गन्ने के रस की ही तरह बिटर कोला में भी हेप्टोप्रोटेक्टिव (लिवर को क्षति से बचाने वाला) प्रभाव पाया जाता है (13)। इस प्रभाव के कारण इसका उपयोग हेपेटाइटिस बी के प्रभाव को धीमा कर समस्या में राहत पहुंचाने का काम कर सकता है।

9. हल्दी 

सामग्री 
  • एक चम्मच हल्दी पाउडर
  • एक गिलास गर्म दूध
कैसे इस्तेमाल करें
  • एक गिलास गर्म दूध लेकर उसमें एक चम्मच हल्दी डालें और अच्छे से मिलाएं।
  • अब इसे धीरे-धीरे पी जाएं।
  • बेहतर लाभ के लिए प्रतिदिन इस प्रक्रिया को रात में सोने से पहले अपनाने की सलाह दी जाती है। 
कैसे है लाभदायक

वल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के मुताबिक हल्दी में अन्य औषधीय गुणों के साथ ही एंटीवायरल प्रभाव भी मौजूद होता है, जो सीधे तौर पर हेपेटाइटिस बी वायरस के प्रभाव को कम करने में मदद करता है (14)। इस तथ्य को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि हेपेटाइटिस बी की समस्या से राहत पाने के लिए हल्दी का उपयोग सहायक साबित हो सकता है।

हेपेटाइटिस बी का घरेलू इलाज जानने के बाद अब हम आपको डॉक्टर द्वारा अपनाए जाने वाले हेपेटाइटिस बी के इलाज के बारे में बताएंगे।

हेपेटाइटिस बी का इलाज – Treatment of Hepatitis B in Hindi

हेपेटाइटिस बी के इलाज की बात करें तो सामान्य तौर पर एक्यूट और क्रोनिक हेपेटाइटिस बी के दोनों ही प्रकार में किसी भी निर्धारित इलाज की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत होती है तो बस भरपूर आराम की। साथ ही इस दौरान डॉक्टर अधिक से अधिक पेय पदार्थों के साथ स्वस्थ भोजन करने की सलाह देते हैं। हां, यह जरूर है कि ब्लड टेस्ट के माध्यम से संक्रमित व्यक्ति में वायरस की सक्रियता के स्तर और उससे पड़ने वाले अन्य अंगों पर प्रभाव की निगरानी जरूर की जाती है। जांच में अगर पुष्टि होती है कि व्यक्ति क्रोनिक हेपेटाइटिस बी से पीड़ित है और वायरस शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है तो उससे बचाव के लिए एंटीवायरल दवाओं का सेवन करने की डॉक्टर सलाह देता है (1)

अब आइए उन स्थितियों पर भी एक नजर डाल लेते हैं, जिनमें डॉक्टर रोगी को दवा लेने की सलाह देता है:

  • जब संक्रमण के कारण जल्द ही लिवर पर घातक प्रभाव दिखने लगे।
  • अगर लंबे समय से लिवर से संबंधित कोई परेशानी हो।
  • जब खून में हेपेटाइटिस बी वायरस की अत्यधिक सक्रियता दिखे।
  • अगर महिला गर्भवती हो।

हेपेटाइटिस बी के इलाज जानने के बाद अब हम आपको इससे बचाव संबंधी कुछ जरूरी बाते बताएंगे।

हेपेटाइटिस बी से बचाव  – Prevention Tips for Hepatitis B in Hindi 

हेपेटाइटिस बी संक्रमण से बचाव के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है (1)

  • बच्चों को जन्म के तुरंत बाद और फिर छठे महीने से 18वें महीने के बीच तीन चरण में इसके टीके लगवाएं।
  • 19 साल से कम उम्र के बच्चे जिन्हें अभी तक हेपेटाइटिस बी नहीं हुआ है, वह भी इससे सुरक्षा के लिए हेपेटाइटिस बी से बचाव का टीका लगवा सकते हैं।
  • अगर गर्भवती महिला को हेपेटाइटिस बी की समस्या है तो ऐसे में जन्म के बाद बच्चों को 12 घंटों के अंदर इससे संबंधित विशेष टीकाकरण अवश्य करवाएं।
  • अगर संक्रमण के 24 घंटों के भीतर हेपेटाइटिस बी इम्यून ग्लोब्लिन (Hepatitis B Immune Globulin) टीका लगवा लिया जाए तो संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है।
  • अगर शराब का सेवन करते हैं तो उसे तत्काल प्रभाव से बंद कर दें।

हेपेटाइटिस बी क्या है और सावधानी न बरतनी की स्थिति में यह कितना घातक हो सकता है, इस बारे में तो अब आप जान ही गए होंगे। साथ ही आपको इस बात का भी पता चल गया होगा कि इस संक्रमण के कारण क्या-क्या जटिलताएं झेलनी पड़ सकती हैं। लेकिन अगर हेपेटाइटिस रोग के लक्षण और जोखिम कारकों को ध्यान में रखा जाए तो समय रहते ही बीमारी को होने या बढ़ने से रोका जा सकता है। फिर भी अगर कोई हेपेटाइटिस संक्रमण की चपेट में आ जाए तो लेख में बताएं गए बचाव संबंधी घरेलू उपाय और इलाज के तरीके बड़े काम आएंगे। वहीं आपको यह भी ध्यान में रखना होगा कि किसी भी समस्या का पूर्ण उपचार बिना डॉक्टर की सलाह के संभव नहीं। ऐसे में एक बार अपने नजदीकी चिकित्सक या हॉस्पिटल में संपर्क जरूर करें। इस विषय से जुड़ा अन्य कोई सवाल आपके मन में हो तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स के जरिए उसे हम तक पहुंचा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कितने समय तक हेपेटाइटिस बी वायरस शरीर के बाहर रह सकता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक हेपेटाइटिस बी वायरस करीब 7 दिनों तक शरीर के बाहर रह सकता है और किसी के भी संक्रमण का कारण बन सकता है (15)

क्या OSHA BBP का मुख्य ध्यान हेपेटाइटिस बी पर है?

हां, विषय की गंभीरता को देखते हुए OSHA (ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन) ब्लडबोर्न पैथोजेन्स (BBP) रेग्यूलेशन का मुख्य ध्यान हेपेटाइटिस बी पर है (16), लेकिन ब्लडबोर्न पैथोजेन्स जैसे:- हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करने वाले वायरस तक ही सीमित नहीं है।

हेपेटाइटिस बी के टीके का असर कितने समय तक रहता है?

अगर बच्चे को छह महीने की उम्र में हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण कराया गया है तो यह सामान्य रूप से 30 साल तक बच्चे की संक्रमण से सुरक्षा कर सकता है (17)

क्या हेपेटाइटिस बी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है?

हेपेटाइटिस बी को ठीक करने का कोई भी इलाज नहीं है। इसमें केवल भरपूर आराम के साथ अच्छी मात्रा में तरल और स्वस्थ खाद्य पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है। सामान्य तौर पर एक्यूट संक्रमण के रोगी दो से तीन हफ्ते में अपने आप ठीक हो जाते हैं। क्रोनिक संक्रमण वालों में चूंकि यह वायरस लंबे समय तक रहता है, वह एक वाहक की भूमिका निभाते हैं (1)

हेपेटाइटिस बी का टीका कब लगवाना चाहिए?

बच्चों को जन्म के तुरंत बाद और फिर छठे महीने से 18वें महीने के बीच तीन चरणों में टीके लगवाने चाहिएं (1)। वहीं अधिक जानकारी के लिए जन्म के बाद मिलने वाले टीकाकरण चार्ट से भी मदद ली जा सकती है।

वयस्कों के लिए हेपेटाइटिस बी वैक्सीन के लिए सही समय क्या है?

संक्रमण न होने की स्थिति में व्यस्क हेपेटाइटिस बी का टीका लगवा सकते हैं। दूसरी ओर संक्रमण होने के 24 घंटे के अंदर बचाव के लिए हेपेटाइटिस बी इम्यून ग्लोबिन (hepatitis B immune globulin) टीका लगवाया जा सकता है। वहीं संक्रमण होने के 24 घंटे बीत जाने के बाद टीका किसी काम का नहीं रह जाता (1)

शिशुओं में हेपेटाइटिस बी के टीके के दुष्प्रभाव क्या हैं?

किसी भी अन्य समस्या की तरह हेपेटाइटिस बी के टीके के कुछ दुष्प्रभाव देखे जा सकते हैं, जिनमें टीके वाली जगह पर सूजन या एलर्जी (खुजली या जलन) के साथ बुखार हो सकता है (18)

क्या गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाया जा सकता है?

गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस बी के टीके   का कोई जिक्र नहीं मिलता है। हां, जन्म के बाद बच्चे को 12 घंटे के अंदर हेपेटाइटिस बी इम्यून ग्लोबिन (Hepatitis B immune globulin) टीका लगाया जा सकता है (15)

हेपेटाइटिस बी किस अंग को प्रभावित करता है?

लेख में आपको पहले ही बताया जा चुका है कि हेपेटाइटिस बी मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करता है (1)

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