हर्पीस के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Herpes Causes, Symptoms and Home Remedies in Hindi

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गंदगी और साफ-सफाई न रखने की स्थिति में त्वचा संबंधी समस्याओं का होना आम है, जो मुख्य रूप से संक्रमण (वायरल, बैक्टीरियल, फंगल और पैरासिटिक) के कारण हो सकती हैं (1)। वहीं, त्वचा संबंधी कुछ समस्याएं ऐसी भी हैं, जिनका नाम सुनते ही लोग भयभीत हो जाते हैं। उन्हीं में से एक हर्पीस है। इस समस्या में रोगी को असहनीय पीड़ा, दर्द और जलन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम हर्पीस के कारण, लक्षण और इससे बचाव के कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं। लेख में बताए जा रहे घरेलू उपाय हर्पीस की समस्या में कुछ हद तक राहत दिला सकते हैं। वहीं, अगर समस्या गंभीर हो, तो डॉक्टर से चेकअप जरूर करवाना चाहिए।

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आइये, लेख में सबसे पहले हर्पीस के विषय में थोड़ी जानकारी हासिल कर लेते हैं।  

हर्पीस क्या है – What is Herpes Simplex Virus in Hindi

हर्पीस, वायरस के जरिए होने वाला एक संक्रामक रोग है। इसमें मुख्य रूप से त्वचा प्रभावित होती है। जिस वायरस के कारण यह समस्या होती है, उसे हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस (एचएसवी) के नाम से जाना जाता है। इस समस्या के होने पर प्रभावित स्थान पर छोटी-छोटी फुंसियों का समूह देखा जाता है। इन फुंसियों के कारण प्रभावित स्थान पर रोगी को खुजली, दर्द और जलन महसूस होती है, जो बाद में घाव का रूप ले लेती हैं। इस समस्या को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है। एक है मौखिक हर्पीस यानी (हर्पीस टाइप-1)। वहीं, दूसरे को जननांग हर्पीस यानी (हर्पीस टाइप-2) का नाम दिया गया है। आइए, अब हम हर्पीस के दोनों भागों के बारे में भी जान लेते हैं (2)।

  • मौखिक हर्पीस : मौखिक हर्पीस में संक्रमण का असर मुख्य रूप से रोगी के मुंह के चारों ओर और चेहरे पर नजर आता है। वहीं, कुछ मामलों में इसके गले तक फैलने की भी आशंका रहती है।
  • जननांग हर्पीस : हर्पीस के इस प्रकार में संक्रमण जननांग और उसके आसपास के क्षेत्र के साथ-साथ नितंब और गुदा क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकता है।

नोट : बेशक, हर्पीस को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है, जिनके बारे में ऊपर बताया गया है, लेकिन कुछ मामलों में यह संक्रमण मुंह और जननांग के साथ-साथ आंख और शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है।

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आइये, अब लेख में हर्पीस के लक्षण जान लेते हैं।

हर्पीस के लक्षण – Symptoms of Herpes in Hindi

टाइप-1 और टाइप-2 हर्पीस दोनों को उनके लक्षण देखकर पहचाना जा सकता है। यहां सबसे पहले हम दोनों के समान लक्षण के बारे में बता रहे हैं। इसके बाद इन दोनों के अलग-अलग लक्षणों के विषय में नीचे बताया जाएगा (3) (4) :

टाइप-1 और टाइप-2 हर्पीस के समान लक्षण

  • प्रभावित स्थान पर जलन का होना।
  • प्रभावित स्थान पर छोटी-छोटी फुंसियों का समूह या पानी से भरे दानों का दिखाई देना।
  • प्रभावित स्थान पर खुजली होना।
  • गंभीर स्थिति में प्रभावित स्थान पर घाव का होना।

अब जानिए मौखिक हर्पीस से लक्षण :

  • होठों पर या मुंह के चारों ओर खुजली और जलन महसूस होना।
  • होंठ या मुंह के आसपास झुनझुनी महसूस होना।
  • गले में खराश।
  • बुखार
  • निगलने में तकलीफ।
  • मसूड़ों, होंठ, मुंह और गले में छाले या चकत्ते।

 अब जानिए जननांग हर्पीस के लक्षण

  • भूख कम लगना।
  • बुखार आना।
  • कमजोरी महसूस होना।
  • घुटने, कमर, कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों में दर्द व ऐंठन होना।
  • ग्रोइन एरिया यानी कमर और जांघों के बीच के हिस्से में सूजन का दिखना।
  • योनि, योनि के बाहरी हिस्से, गुदे के आसपास, कूल्हे या जांघों के आसपास तरल से भरे दर्दनाक फफोले (महिलाओं में)।
  • लिंग पर, गूदे के आसपास, कूल्हे या जांघों के आसपास तरल से भरे दर्दनाक फफोले (पुरुषों में)।
  • जीभ, मुंह, आंख, मसूड़े, होंठ, उंगलियां और शरीर के अन्य हिस्से पर तरल से भरे फफोले।
  • यूरिन पास करने के दौरान दर्द।
  • योनि से स्राव।

और भी है कुछ खास

हर्पीस के लक्षणों को जानने के बाद अब हर्पीस के कारण क्या-क्या हैं, इस बारे में बात करते हैं।

हर्पीस के कारण – Causes of Herpes in Hindi

हर्पीस होने का मुख्य कारण हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस (एचएसवी) है, जिसके बारे में लेख के शुरुआत में बताया गया है। विशेषज्ञों की मानें, तो यह वायरस बंदरों की विभिन्न प्रजातियों से करोड़ों वर्ष पूर्व इंसानों में आया था (5)। यह एक संक्रामक रोग है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित हो सकता है। इसलिए, इसके स्थानांतरण की वजह को मुख्य रूप से इंसानों में हर्पीस के होने का कारण माना गया है (3) (4)। आइए, अब उन कारणों पर भी नजर डाल लेते हैं, जिनकी वजह से एक व्यक्ति से दूसरे में इस वायरस के फैलने की आशंका अधिक होती है।

1. मौखिक हर्पीस के कारण

  • संक्रमित व्यक्ति का चुंबन (Kiss) लेना।
  • संक्रमित व्यक्ति का जूठा भोजन खाना।
  • संक्रमित व्यक्ति द्वारा उपयोग की गई लिप क्रीम या बाम का इस्तेमाल करना।
  • जननांग हर्पीस से ग्रस्त व्यक्ति के साथ वैकल्पिक यौन संबंध बनाने से भी यह मौखिक हर्पीस के रूप में स्थानांतरित हो सकता है।

2. जननांग हर्पीस का कारण

संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध इसके होने का मुख्य कारण है, जिसमें असुरक्षित और वैकल्पिक यौन संबंध शामिल है।

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हर्पीस के कारणों को जानने के बाद अब बारी है हर्पीस का निदान जानने की। 

हर्पीस का निदान – Diagnosis of Herpes Simplex Virus in Hindi

हर्पीस वायरस की जांच के लिए डॉक्टर निम्नलिखित टेस्ट कर सकते हैं (6) (3) (4) :

  1. वायरल कल्चर : इस टेस्ट में यह देखा जाता है कि त्वचा पर मौजूद घाव या फफोला हर्पीस वायरस से संक्रमित है कि नहीं। इसके लिए त्वचा पर मौजूद घाव या फफोले के तरल का सैंपल (फफोले पर कॉटन स्वाब रगड़कर) लिया जाता है, जिसके बाद लैब में हर्पीस वायरस की मौजूदगी का पता लगाया जाता है।
  2. रक्त परीक्षण : रक्त परीक्षण के जरिए एंटीबॉडी के स्तर का पता लगाया जाता है। इससे भी हर्पीस वायरस की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
  3. पोलीमरेज चेन रिएक्शन (PCR) परीक्षण : इस परीक्षण में फफोले के तरल में मौजूद वायरस के डीएनए की जांच की जाती है। इससे हर्पीस टाइप 1 और हर्पीस टाइप 2 का पता लगाया जा सकता है।

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लेख के अगले हिस्से में जानिए हर्पीस का इलाज।

हर्पीस रोग का इलाज – Treatment for Herpes in Hindi

हर्पीस वायरस के प्रभाव और उसके लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित उपचार कर सकते हैं (3) (4) :

  • हर्पीस के उपचार के लिए डॉक्टर वायरस से लड़ने के लिए एंटीवायरल दवाएं लिख सकते हैं। यह दर्द को कम करने और लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकती हैं।
  • एंटीवायरल स्किन क्रीम का भी इस्तेमाल करने की सलाह भी दी जा सकती है।
  • एंटीसेप्टिक साबुन का उपयोग वायरस को शरीर के अन्य क्षेत्रों में फैलने से रोकने में मदद कर सकता है।
  • दर्द को कम करने के लिए प्रभावित क्षेत्र पर कोल्ड या हल्का गर्म वॉशक्लॉथ लगा सकते हैं।

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हर्पीस रोग के इलाज के बाद जानिए हर्पीस के घरेलू उपचार।

हर्पीस के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies For Herpes In Hindi

हर्पीस की प्रारंभिक अवस्था को कुछ हद तक रोकने के लिए और उसके लक्षणों को कम करने के लिए कुछ घरेलू उपचार की मदद ली जा सकती है। हर्पीस के घरेलू उपाय से जुड़ी जानकारी नीचे दी जा रही है।

1. टी ट्री ऑयल

सामग्री :

  • टी टी ऑयल की दो से चार बूंदें (आवश्यकतानुसार)
  • एक रूई का टुकड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • रूई के टुकड़े पर टी ट्री ऑयल की दो से चार बूंदें लें।
  • अब रूई की मदद से टी ट्री ऑयल को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को आप दिन में करीब तीन बार दोहरा सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

हर्पीस के उपचार के लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग काफी हद तक सहायक सिद्ध हो सकता है। कारण यह है कि इसमें एंटीवायरल प्रभाव पाया जाता है। जैसा कि लेख में हम पहले भी बता चुके हैं कि यह एक वायरल संक्रमण है, जो हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के कारण होता है। इसलिए, यह माना जा सकता है कि टी ट्री ऑयल का यह गुण हर्पीस वायरस के प्रभाव को खत्म करने में मददगार साबित हो सकता है (7)।  

2. शहद

सामग्री :

  • एक चम्मच शहद
  • एक कॉटन पैड

कैसे इस्तेमाल करें :

  • काॅटन पैड पर शहद की कुछ बूंदों को लें।
  • अब प्रभावित हिस्से पर इस पैड काे लगाएं।
  • इस विधि का उपयोग रोजाना किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

शहद का उपयोग हर्पीस की समस्या में फायदेमंद हो सकता है। इस विषय पर हुए शोध में पाया गया शहद का टॉपिकल उपयोग करने पर यह खुजली और हर्पीस के घाव को दूर करने में मददगार हो सकता है (8)। हालांकि, शहद का कौन सा गुण समस्या में फायदेमंद होता है, इस बात की जानकारी शोध में उपलब्ध नहीं है। 

3. बेकिंग सोडा

सामग्री :

  • एक चम्मच बेकिंग सोडा
  • दो से तीन चम्मच पानी
  • रूई का एक टुकड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • बेकिंग सोडा को पानी में मिलाकर इसका घोल बना लें।
  • इस घोल को रूई की मदद से प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब तीन से चार बार दोहराया जा सकता है।
  • वहीं, जननांग हर्पीस में बाथ टब के पानी में करीब एक कप बेकिंग सोडा मिलाएं और उसमें करीब 10 से 15 मिनट तक बैठें। इस प्रक्रिया को दिन में दो बार अपनाना लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

बेकिंग सोडा में एंटीप्यूरेटिक प्रभाव पाया जाता है, जो त्वचा संबंधी कई समस्याओं जैसे खुजली और जलन को दूर करने में मदद कर सकता है (9)। वहीं, मुंह के छालों में भी इसे फायदेमंद माना गया है, जिसका एक मुख्य कारण हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस (एचएसवी) भी है (10)। इस कारण यह कहना गलत नहीं होगा कि बेकिंग सोडा के उपयोग से हर्पीस की समस्या में कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है। ध्यान रहे, बेकिंग सोडा का त्वचा पर अधिक मात्रा में प्रयोग कुछ दुष्परिणाम भी प्रदर्शित कर सकता है। इसलिए, हर्पीस के उपचार के लिए बेकिंग सोडा का उपयोग बड़ी सावधानी से और संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए। वहीं, बेहतर और सकारात्मक परिणाम के लिए डॉक्टरी परामर्श भी जरूरी है।

4. लेमन बाम

सामग्री :

  • लेमन बाम ऑयल (एसेंशियल ऑयल) दो से तीन बूंद
  • एक रूई का टुकड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • रूई के टुकड़े पर लेमन बाम ऑयल की दो से तीन बूंदें लें।
  • रूई की मदद से तेल को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • जल्द प्रभाव के लिए इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो से तीन बार तक दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

हर्पीस का इलाज करने के लिए लेमन बाम ऑयल को भी उपयोग में ला सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें एंटीवायरल गुण मौजूद होता है, जो हर्पीस के वायरस को नष्ट करने के साथ ही उसके प्रभाव को दूर करने में असरदार हो सकता है (11)। इस कारण लेमन बाम से तैयार किए गए एसेंशियल ऑयल को हर्पीस की समस्या से निजात पाने का एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है। 

5. इचिनेशिया

सामग्री :

  • इचिनेशिया टी बैग या इसके एक से दो सूखे फूल।
  • एक कप गर्म पानी

कैसे इस्तेमाल करें :

  • सबसे पहले एक कप गर्म पानी लें।
  • इसमें इचिनेशिया टी बैग या इसके सूखे फूलों को 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • समय पूरा होने के बाद इचिनेशिया के टी बैग या फूलों को अलग कर लें।
  • अब आप तैयार हुई चाय को सिप करके पी सकते हैं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो बार दोहराया जा सकता है।

नोटध्यान रहे, चाय बनाने के बाद इचिनेशिया टी बैग या इसके बचे फूलों को फेंके नहीं। इसके अर्क को अलग करके रूई की मदद से प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। यह प्रक्रिया बाहरी रूप से हर्पीस के प्रभाव को दूर करने में सहायक साबित हो सकती है।

कैसे है फायदेमंद :

हर्पीस के घरेलू उपचार में इचिनेशिया का उपयोग भी लाभकारी हो सकता है। दरअसल, एक शोध में साफ तौर से जिक्र मिलता है कि इचिनेशिया का उपयोग हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस टाइप 1 के खिलाफ एंटीवायरल गतिविधि प्रदर्शित कर सकता है (12)। ऐसे में हर्पीस के प्रभाव को कम करने के लिए एकीनेसिया को एक उत्तम उपाय के तौर पर देखा जा सकता है। 

6. पेट्रोलियम जेली

सामग्री :

  • पट्रेालियम जेली की डिब्बी

कैसे इस्तेमाल करें :

  • एक उंगली की सहायता से पेट्रोलियम जेली को प्रभावित स्थान पर लगाएं।
  • इस क्रिया को सात दिन तक दिन में तीन बार दोहराएं।

कैसे है फायदेमंद :

हर्पीस की समस्या में पेट्रोलियम जेली या वैसलीन के लाभ भी देखे गए हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च में पाया गया कि पेट्रोलियम जेली का उपयोग मौखिक हर्पीस में कुछ हद तक फायदेमंद साबित हो सकता है (13)। हालांकि, इसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।  

7. एप्सम साल्ट

सामग्री :

  • एक से आधा कप एप्सम साल्ट
  • गर्म पानी (आवश्यकतानुसार)

कैसे इस्तेमाल करें :

  • सबसे पहले बाथ टब में नहाने योग्य गर्म पानी भर लें और उसमें एक कप एप्सम साल्ट मिला दें।
  • अब इस पानी में करीब 10 से 15 मिनट तक बैठें।
  • बाद में सामान्य पानी से नहा लें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

नोटअगर बाथ टब नहीं है, तो एक बाल्टी पानी में करीब आधा कप एप्सम साल्ट को मिलाकर इस पानी को नहाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

विशेषज्ञों के मुताबिक, एप्सम सॉल्ट युक्त गुनगुने पानी में नहाने से हर्पीस के घाव के दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, नहाने के बाद त्वचा को अच्छी तरह जरूर सूखा ले, क्योंकि नमी, घाव भरने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है (14)। वहीं, इसमें एंटीएनेस्थेटिक (सुन्न करने वाला) और एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) प्रभाव भी पाए जाते हैं, जो संयुक्त रूप से हर्पीस की समस्या से पैदा होने वाली पीड़ा को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं (15)। फिलहाल इसे लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

8. एलोवेरा जेल

सामग्री :

  • ताजा एलोवेरा जेल (आवश्यकतानुसार)

कैसे इस्तेमाल करें :

  • एलोवेरा की पत्ती से एलोवेरा जेल (पत्ती के बीच मौजूद गूदा) अलग कर लें।
  • अब पत्ती से अलग किए गए जेल (गूदे) को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और उसे ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब तीन बार दोहराया जा सकता है।

नोटबाजार में उपलब्ध प्राकृतिक एलोवेरा जेल को भी उपयोग में लाया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

कई औषधीय गुणों की मौजूदगी के कारण एलोवेरा का इस्तेमाल सेहत और त्वचा से संबंधित कई समस्याओं के उपचार के तौर पर किया जा सकता है, जिसमें हर्पीस का इलाज भी शामिल है। इसमें मौजूद हीलिंग (घाव भरने वाला), एंटीवायरल (वायरल इन्फेक्शन को कम करने वाला), मॉइस्चराइजिंग (त्वचा की नमी बनाए रखने वाला) प्रभाव पाया जाता है। ये सभी प्रभाव संयुक्त रूप से हर्पीस की समस्या में राहत पहुंचाने का काम कर सकते हैं (16)।

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9. जैतून का तेल

सामग्री :

  • एक कप जैतून का तेल
  • करीब 10 बूंद लैवेंडर ऑयल
  • दो चम्मच बीजवैक्स (मधुमक्खियों द्वारा तैयार किया गया मोम)
  • रूई का एक टुकड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • जैतून के तेल को गर्म करके इसमें करीब 10 बूंद लैवेंडर ऑयल और दो चम्मच बीजवैक्स मिला लें।
  • अब इस मिक्सचर को पांच से दस मिनट तक गर्म कर लें।
  • इसके बाद मिक्सचर को थोड़ी देर ठंडा होने के लिए रख दें।
  • जब मिक्सचर सामान्य तापमान पर आ जाए, तो इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  • इस मिक्सचर को दिन में करीब दो से तीन बार तक इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

हर्पीस की समस्या में जैतून के तेल का उपयोग फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, जैतून के तेल में एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल दोनों ही गुण मौजूद होते हैं। वहीं, हम लेख में ऊपर बता चुके हैं कि हर्पीस एक प्रकार का वायरस इन्फेक्शन है। इस कारण यह माना जा सकता है कि जैतून के तेल में मौजूद एंटीवायरल गुण हर्पीस वायरस के प्रभाव को दूर करने में सहायक साबित हो सकते हैं। वहीं, इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण हर्पीस वायरस से संक्रमित घाव को बैक्टीरिया से बचाने में मदद कर सकते हैं (17)। इसके अलावा, लैवेंडर ऑयल में दर्द और बीजवैक्स में खुजली से राहत दिलाने की क्षमता मौजूद होती है (18) (19)। यही कारण है कि जैतून के तेल का यह घरेलू उपाय हर्पीस की समस्या में रोगी को काफी हद तक राहत पहुंचाने का काम कर सकता है।

10. मुलेठी की जड़

सामग्री :

  • आधा चम्मच मुलेठी की जड़ का चूर्ण
  • पानी (आवश्यकतानुसार)

कैसे इस्तेमाल करें :

  • मुलेठी की जड़ के चूर्ण में पानी मिलाकर इसका पेस्ट बना लें।
  • इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाकर 20 से 30 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • समय पूरा होने पर इसे पानी से धो लें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो बार तक दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

हर्पीस की समस्या में राहत पाने के लिए मुलेठी की जड़ का उपयोग किया जा सकता है। दरअसल, इसमें एंटीवायरल गुण मौजूद होते हैं, जो हर्पीस वायरस से लड़ने का काम कर सकते हैं। वहीं, इसमें मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी गुण घाव की वजह से होने वाली सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण हर्पीस वायरस से संक्रमित घाव को बैक्टीरियल संक्रमण से बचाने में मदद कर सकते हैं (20)।

11. हर्बल टी

सामग्री :

  • पांच से छह सेज पौधे की पत्तियां
  • पांच से छह थाइम पौधे की पत्तियां
  • एक कप गर्म पानी

कैसे इस्तेमाल करें :

  • सेज और थाइम पौधे की पत्तियों को एक कप गर्म पानी में डालकर पांच से 10 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • अब तैयार हर्बल टी को छान लें और सिप करके पिएं।
  • इस चाय को दिन में करीब दो से तीन बार इस्तेमाल में ला सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

सेज और थाइम दो ऐसे औषधीय पौधे हैं, जिनमें एंटीवायरल गुण मौजूद होता है। वहीं, हम लेख में पहले भी बता चुके हैं कि हर्पीस ऐसी समस्या है, जो हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के कारण होती है। ऐसे में सेज और थाइम में मौजूद एंटीवायरल गुण इस वायरस के खिलाफ लड़ने में मदद कर सकते हैं। इसी वजह से इनकी पत्तियों से तैयार की गई चाय को हर्पीस वायरस के प्रभाव से राहत पाने में सहायक माना जा सकता है (21) (22)।

12. ग्रीन टी

सामग्री :

  • ग्रीन टी बैग
  • एक कप गर्म पानी
  • आधा चम्मच शहद (वैकल्पिक)

कैसे इस्तेमाल करें :

  • एक कप गर्म पानी में ग्रीन टी बैग को डालकर पांच से 10 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • समय पूरा होने के बाद आप इसमें स्वाद के लिए आधा चम्मच शहद मिलाकर सिप करके पी लें।
  • एक दिन में करीब तीन से चार कप तक ग्रीन टी पी जा सकती है।

कैसे है फायदेमंद :

ग्रीन टी के औषधीय गुणों पर किए गए एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि इसमें एंटीवायरल (वायरस के प्रभाव को नष्ट करने वाला) प्रभाव मौजूद होता है, जो हर्पीस की समस्या के मुख्य कारण हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, इसमें इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण भी पाया जाता है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे वायरस से लड़ने में शरीर को आंतरिक मजबूती मिल सकती है (23)। इस कारण यह माना जा सकता है कि हर्पीस का घरेलू उपचार और समस्या से राहत पाने में ग्रीन टी के फायदे हो सकते हैं।

13. लाइसिन

सामग्री :

  • लाइसिन कैप्सूल

कैसे इस्तेमाल करें :

  • डॉक्टरी सलाह पर लाइसिन कैप्सूल का सेवन करें।

कैसे है फायदेमंद :

विशेषज्ञों के मुताबिक, हर्पीस बीमारी की समस्या में लाइसिन कैप्सूल एक उपचार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के प्रभाव को कम करने में कारगर साबित हो सकता है (24)। ध्यान रहे कि इसके नियमित इस्तेमाल से पूर्व डॉक्टरी परामर्श लेना जरूरी है, ताकि आपको इसके बेहतर लाभ हासिल हो सकें।

14. अजवायन का तेल

सामग्री :

  • दो से चार बूंद अजवायन का तेल
  • रूई का एक टुकड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • रूई के टुकड़े पर अजवायन के तेल की दो से चार बूंदें लें।
  • अब रूई की मदद से अजवायन के तेल को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और उसे ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो से तीन बार तक दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

अजवायन के तेल में कार्वाक्रोल (Carvacrol) नाम का एक खास तत्व पाया जाता है, जिसके कारण यह तेल एंटीवायरल प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है (25)। साथ ही कार्वाक्रोल (Carvacrol) के कारण इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाला) और एनाल्जेसिक (दर्दनिवारक) प्रभाव भी पाया जाता है (26)। ये सभी प्रभाव संयुक्त रूप से इस समस्या में होने वाली सूजन और दर्द को नियंत्रित करने के साथ हर्पीस की समस्या में आराम पहुंचाने का काम कर सकते हैं। इस कारण यह कहा जा सकता है कि हर्पीस बीमारी के उपचार के लिए अजवायन का तेल एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।  

15. गोल्डनसील

सामग्री :

  • दो से तीन बूंद गोल्डन सील का अर्क
  • एक रूई का टुकड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • रूई के एक टुकड़े पर गोल्डन सील के अर्क की तीन बूंद डालें।
  • अब रूई की सहायता से गोल्डनसील के अर्क को प्रभावित क्षेत्र पर लगाकर छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब तीन बार इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

गोल्डनसील का उपयोग भी हर्पीस वायरस से संक्रमित त्वचा के लिए लाभकारी हो सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में साफ तौर पर जिक्र मिलता है कि गोल्डनसील का इस्तेमाल हर्पीस वायरस संक्रमण में कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है (27)। हालांकि, यह किस प्रकार यह काम कर सकता है, इसे लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

16. डेमेबोरो पाउडर

सामग्री :

  • डेमेबोरो पाउडर का एक छोटा पैकेट
  • पानी आवश्यकतानुसार
  • एक साफ सूती कपड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • डेमेबोरो पाउडर के पैकेट पर दिए गए तरीके के अनुसार इसे पानी में मिलाकर इसका घोल बना लें।
  • इस घोल में सूती कपड़े को भिगोएं और प्रभावित क्षेत्र पर 10 से 15 मिनट तक रखें।
  • बेहतर प्रभाव के लिए इस प्रक्रिया को दो से तीन घंटे में दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

डेमेबोरो पाउडर का इस्तेमाल भी हर्पीस वायरस से संक्रमित त्वचा को आराम दिलाने में मददगार हो सकता है। दरअसल, इसमें खुजली को कम करने और रैसेज को सूखाने वाला प्रभाव पाया जाता है (28)। ऐसे में हम कह सकते हैं कि डेमेबोरो पाउडर का उपयोग हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के लक्षणों को कम करने में कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है।

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आगे हम बता रहे हैं कि हर्पीस बीमारी में क्या खाना चाहिए। 

हर्पीस में क्या खाना चाहिए : Diet In Herpes In Hindi

हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस की समस्या होने पर डाइट का ध्यान रखना भी जरूरी है। यहां हम कुछ जरूरी खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे हैं, जो हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के लक्षणों को ठीक करने में कुछ हद तक मददगार हो सकते हैं (29) :

  • ताजा हरी और पीली सब्जियां (ऑर्गेनिक)।
  • ताजे जैविक फल (खट्टे फलों को छोड़कर)।
  • फलियां (मटर, छोले, दाल, बीन्स आदि)।
  • साबुत अनाज विशेष रूप से बाजरा।
  • मशरूम।
  • लहसुन।

नोट: हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस की समस्या के दौरान इन खाद्य पदार्थों को लेने से पहले एक बार डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

आगे पढ़ें कुछ विशेष

हर्पीस वायरस से जुड़ी जटिलताएं नीचे बताई गई हैं।

हर्पीस की समस्या से जुड़ी जटिलताएं – Complications Of Herpes Simplex Virus In Hindi

हर्पीस की समस्या से निम्नलिखित जटिलताएं पैदा हो सकती हैं (3) (4) :

  • मुंह के छाले और फफोले दोबारा हो सकते हैं।
  • त्वचा के अन्य भागों को भी यह वायरस अपनी चपेट में ले सकता है।
  • बैक्टीरियल संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों में इस वायरस का पूरे शरीर में प्रसार जानलेवा भी हो सकता है।
  • गर्भवती महिलाओं में जननांग हर्पीस संक्रमण होने वाले बच्चे में भी प्रवेश कर सकता है।
  • गर्भवती महिलाओं में हर्पीस संक्रमण होने वाले बच्चे में ब्रेन इंफेक्शन का कारण बन सकता है।

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यहां हम जानकारी दे रहे हैं हर्पीस होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए।

हर्पीस की समस्या में डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए – When to consult the Doctor?

हर्पीस की निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो जाता है (3) :

  • हर्पीस के गंभीर लक्षण दिखने पर।
  • हर्पीस वायरस के लक्षण अगर गंभीर हैं और वे 2 सप्ताह के बाद भी बने रहते हैं।
  • आंखों के आसपास फफोले होना।
  • अगर संक्रमित व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर है।

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हर्पीस से बचाव किस प्रकार किया जा सकता है, जानिए नीचे।  

हर्पीस से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव – Lifestyle Changes and Prevention Tips for Herpes in Hindi

हर्पीस की समस्या से खुद को दूर रखने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जा सकता है (3) (4) :

  •   घर से बाहर जाने से पहले जिंक ऑक्साइड युक्त लिप बाम का प्रयोग करें।
  •   होठों की नमी बनाए रखने के लिए मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें।
  •   संक्रमित व्यक्ति से सीधे संपर्क में आने से बचें।
  •   तौलिया या रूमाल का उपयोग करने के बाद उन्हें गर्म पानी से जरूर धोएं।
  • मौखिक हर्पीस से ग्रस्त व्यक्ति के साथ कुछ भी खाने से बचें। साथ ही बर्तन, गिलास व स्ट्रा जैसी   वस्तुए साझा न करें।
  •   वहीं, जननांग हर्पीस से ग्रस्त व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से बचें।

अब तो आप हर्पीस की समस्या से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बातें जान चुके होंगे। साथ ही आपको हर्पीस के कारण क्या-क्या हो सकते हैं, इस बारे में भी पूरी जानकारी मिल गई होगी। वहीं, लेख में आपको इस समस्या से बचाव संबंधी कुछ सुझाव और इससे निजात दिलाने वाले घरेलू उपायों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। ध्यान रहे, इन घरेलू उपायों के उपयोग से समस्या में राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन ये उपाय हर्पीस का पूर्ण इलाज नहीं हैं। इसलिए, समस्या के पूर्ण उपचार के लिए डॉक्टरी परामर्श जरूर लें। उम्मीद करते हैं कि यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

क्या कोल्ड सोर और हर्पीस एक ही है?

हां, हर्पीस को कोल्ड सोर (Cold sores) के नाम से भी जाना जाता है।

क्या बारिश और सर्दियों के मौसम में हर्पीस का खतरा अधिक होता है?

वैसे तो हर्पीस के वायरस हर मौसम में मौजूद होते हैं लेकिन बारिश और सर्दियों के मौसम में इसके फैलने का खतरा अधिक हाे सकता है। हालांकि, इस विषय पर कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

क्या प्रेग्नेंसी के दौरान हर्पीस से शिशु को नुकसान पहुंच सकता है?

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि अगर गर्भवती को जननांग हर्पीस है, तो यह वायरस होने वाले बच्चे के शरीर में जा सकता है और मस्तिष्क संक्रमण का जोखिम खड़ा सकता है।

हर्पीस को ठीक होने में कितनी समय लग सकता है?

यह समस्या की गंभीरता और व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

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Saral Jain

सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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