उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के लक्षण, इलाज और घरेलू उपचार – All About High Blood Pressure (Hypertension) in Hindi

Medically reviewed byMadhu Sharma, Registered Dietitian
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उच्च रक्तचाप अनियंत्रित जीवनशैली का परिणाम है। इसे हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें धमनियों में रक्त दबाव सामान्य से तेज हो जाता है। सामान्य स्थित में रक्त प्रवाह 120/80 से नीचे रहता है। जैसे ही ब्लड प्रेशर इससे अधिक होता है, तो उच्च रक्तचाप की समस्या होने लगती है। यह गंभीर इसलिए है, क्योंकि इसके कारण गुर्दे, धमनियों और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है (1)। अनियंत्रित उच्च रक्तचाप मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को कमजोर कर स्ट्रोक का कारण भी बन सकता है। इसी वजह से हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण और उपचार संबंधी जानकारी सभी को होनी चाहिए। इस लेख में हम हाई ब्लड प्रेशर ट्रीटमेंट और इससे संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं।

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सबसे पहले हम उच्च रक्तचाप के प्रकार के बारे में बता रहे हैं। उसके बाद हाई बीपी के कारण के बारे में जानेंगे।

उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) के प्रकार – Types of High BP in Hindi

उच्च रक्तचाप यानी हाई बीपी के प्रकार कुछ इस प्रकार हैं (2):

प्राइमरी : यह उच्च रक्तचाप का शुरुआती प्रकार है। यह उम्र बढ़ने के साथ-साथ होता है। अधिकतर लोग इसका शिकार होते हैं।

सेकंडरी : किसी अन्य बीमारी या दवा के सेवन से होने वाले उच्च रक्तचाप को इस श्रेणी में रखा जाता है। इलाज या दवा लेना बंद कर देने से यह स्थिति गंभीर हो सकती है।

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आगे हम बता रहे हैं हाई ब्लड प्रेशर के कारण के बारे में। इसके बाद हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण के बारे में जानेंगे।

उच्च रक्तचाप के कारण – Causes of High BP in Hindi

हाई बीपी के कारण के बारे मे पता हो, तो इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। चलिए, जानते हैं क्या है उच्च रक्तचाप के कारण (1) (3) (4) –

  • धूम्रपान।
  • मोटापा।
  • शारीरिक गतिविधियों में कमी।
  • भोजन में अत्यधिक नमक।
  • बढ़ती उम्र।
  • आनुवंशिकता।
  • शराब।
  • तनाव और थायराइड।
  • गुर्दे से जुड़ा पुराना रोग।
  • एड्रिनल (गुर्दे के ऊपर स्थित ग्रंथियां) संबंधी परेशानी।
  • स्लीप एपनिया (गंभीर नींद विकार)।

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हाई ब्लड प्रेशर के कारण जानने के बाद आगे जानिए हाई बीपी के लक्षण के बारे में।

उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के लक्षण – Symptoms of High Blood Pressure in Hindi

उच्च रक्तचाप को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि यह कई बार बिना दस्तक के ही शरीर में दाखिल हो जाता है। यहां हम कुछ हाई बीपी के लक्षण बता रहे हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की पहचान की जा सकती है (1) (5)।

  • लगातार सिरदर्द।
  • चक्कर आना।
  • थकान का एहसास होना।
  • छाती में दर्द।
  • नजर कमजोर होना।
  • सांस लेने में दिक्कत।
  • नाक से खून निकलना।

आगे है और जानकारी

हाई बीपी के लक्षण जानने के बाद आगे जानिए हाई ब्लड प्रेशर का घरेलू उपचार क्या हो सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर के घरेलू उपचार – Home Remedies for High BP in Hindi

नीचे पढ़ें हाई बीपी के घरेलू उपचार, जो हाई बी पी को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। बस ध्यान दें कि यह बीपी हाई का इलाज नहीं बल्कि इससे बचाव का तरीका हो सकता है। हाई बीपी की समस्या अगर अनियंत्रित हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

1. लहसुन

सामग्री:

  • लहसुन की 1 कली
  • एक चम्मच शहद

उपयोग करने का तरीका:

  • सुबह-शाम एक चम्मच शहद के साथ 1 लहसुन की कली ले सकते हैं।
  • भोजन बनाने में भी लहसुन का इस्तेमाल करें।

कैसे लाभदायक है:

लहसुन का इस्तेमाल कर अनियंत्रित रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। यह 10 mmHg सिस्टोलिक और 8 mmHg डायस्टोलिक रक्तचाप को कम कर सकता है। लहसुन में बायोएक्टिव सल्फर यौगिक के रूप में एस-एल सिस्टीन पाया जाता है, जो हाई ब्लड प्रेशर के लिए लाभदायक हो सकता है (6)। सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं में दबाव को तब मापता है, जब हृदय धड़क रहा होता है। वहीं, डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं में दबाव को उस वक्त मापता है, जब धड़कनों के बीच हृदय कुछ पल के आराम करता है (2)।

2. आंवला

सामग्री:

  • दो चम्मच आंवले का रस

उपयोग करने का तरीका:

  • एक गिलास साफ पानी में दो चम्मच आंवले का रस मिलाएं।
  • रोज सुबह खाली पेट लें।

कैसे लाभदायक है:

बीपी हाई का इलाज घर पर करने के लिए आंवला का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। आंवला में महत्वपूर्ण हाइपोलिपिडेमिक और एंटीहाइपरेटिव प्रभाव होते हैं। ये दोनों प्रभाव बीपी को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। हाइपोलिपिडेमिक प्रभाव एथेरोस्क्लेरोसिस यानी धमनी की दीवारों (Artery Walls) में वसा और कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों को बनने से रोक कर ब्लड नियंत्रण का काम कर सकता है (7)।

3. मेथी के बीज

सामग्री:

  • आधा चम्मच मेथी के बीज
  • एक गिलास गर्म पानी

उपयोग करने का तरीका:

  • एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच मेथी के बीज डाल दीजिए।
  • फिर इसे रातभर के लिए छोड़ दें।
  • सुबह उठते ही खाली पेट इस पानी का सेवन कीजिए।

कैसे लाभदायक है:

हाई बीपी के घरेलू उपचार में मेथी भी शामिल है। मेथी अधिक वजन की वजह से बढ़ने वाले कोलेस्ट्रॉल को कम करके हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकता है। एक रिसर्च में कहा गया है कि पॉलीफेनोल और फ्लेवोनोइड-समृद्ध मेथी का अर्क एंटीऑक्सिडेंट के कारण हाइपोकोलेस्टेरोलेमिक प्रभाव दिखाता है। यह प्रभाव शरीर के कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित रख सकता है (8)।

कोलेस्ट्रॉल कम होने से बीपी के बढ़ने का जोखिम कम हो जाता है (9)। इसके अलावा, मेथी के मेथेनॉल अर्क में एंटीहाइपरटेंशन प्रभाव पाए जाते हैं। यह प्रभाव भी बढ़ते ब्लड प्रेशर को सामान्य करने में मदद कर सकता है (10)। इसी वजह से मेथी को घर पर किया जाने वाला हाई ब्लड प्रेशर का उपचार माना जाता है।

4. शहद

सामग्री:

  • एक गिलास पानी
  • एक चम्मच शहद

उपयोग करने का तरीका:

  • सबसे पहले पानी को गुनगुना कर लें।
  • फिर पानी में शहद डालकर अच्छे से मिक्स करें।
  • अब शहद पानी को पी लें।

कैसे लाभदायक है:

शहद ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। एक रिसर्च के मुताबिक शहद में मौजूद क्वेरसेटिन- Quercetin (एक तरह का पॉलीफेनोल) बढ़ते ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का कार्य कर सकता है (11)। साथ ही माना जाता है कि शहद के उपयोग से रक्तचाप जरूरत से ज्यादा कम हो सकता है और कई बार यह टॉक्सिसिटी का कारण भी बन सकता है (12)। इसी वजह ऑर्गेनिक शहद का सेवन ही करें और वो भी डॉक्टर की सलाह पर ही।

5. प्याज का रस

सामग्री:

  • आधा चम्मच प्याज का रस
  • आधा चम्मच शहद

उपयोग करने का तरीका:

  • प्याज के रस को शहद के साथ अच्छी तरह मिला लें।
  • दिन में दो वक्त (सुबह और शाम) बराबर मात्रा में लें।

कैसे लाभदायक है:

प्याज की परतों में क्वेरसेटिन नामक पॉलीफेनोल पाया जाता है। इस कम्पाउंड को उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में काफी मदद माना जाता है। एक रिसर्च के मुताबिक प्याज के अर्क का सेवन 6 हफ्ते तक करने वालों के ब्लड प्रेशर में कमी पाई गई है (13)। इसी वजह से प्याज के रस को घरेलू हाई ब्लड प्रेशर का उपचार माना जाता है।

6. अदरक

सामग्री:

  • एक छोटा टुकड़ा अदरक या फिर एक चौथाई चम्मच अदरक पाउडर
  • एक कप पानी

उपयोग करने का तरीका:

  • अदरक को कूटकर या पाउडर के रूप में पानी में डाल पी सकते हैं।
  • इसका इस्तेमाल खाना बनाते समय भी कर सकते हैं।
  • वैकल्पिक रूप से अदरक की चाय बनाकर पी सकते हैं।

कैसे लाभदायक है:

अदरक के इस्तेमाल से भी बीपी को संतुलित किया जा सकता है। इसमें हाइपोटेंसिव प्रभाव होता है, जो रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है (14)। एक रिसर्च में बताया गया है कि आठ हफ्ते तक इसका सेवन करने से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कम हो सकता है (15)। डायबीटिज के पेशेंट भी इसका सेवन करके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रख सकते हैं (16)। इसी वजह से हाई ब्लड प्रेशर के उपाय के रूप में अदरक को जाना जाता है।

7. तरबूज

सामग्री:

  • एक कोटरी तरबूज

उपयोग करने का तरीका:

  • ताजे तरबूज को साफ चाकू की मदद से छोटा-छोटा काट लें।
  • फिर करीब एक बाउल प्रतिदिन खाएं।

कैसे लाभदायक है:

तरबूज एक गुणकारी फल है, जिसका सेवन उच्च रक्तचाप से बचने के लिए किया जा सकता है। दरअसल, तरबूज में एमिनो एसिड एल-साइट्रूलाइन (L-Citrulline) होता है। यह एमिनो एसिड हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकते हैं (17)। भले ही इसका सेवन हाई ब्लड प्रेशन के मरीजों के लिए अच्छा हो, लेकिन यह एक हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड है (18)। इसी वजह से डायबिटिक लोगों को इसका सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए (19)।

8. उच्च रक्तचाप के घरेलू उपचार के लिए दालचीनी पाउडर

सामग्री:

  • दालचीनी पाउडर
  • एक गिलास गर्म पानी

उपयोग करने का तरीका:

  • चुटकी भरी दालचीनी पाउडर को खाना बनाते वक्त इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • इसे सप्लीमेंट्री के रूप में भी ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले डॉक्टर से पूछना जरूरी है।
  • वैकल्पिक रूप से एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर को एक गिलास गर्म पानी से सुबह ले सकते हैं।

कैसे लाभदायक है:

उम्र के साथ बढ़ने वाले ब्लड प्रेशर को दालचीनी की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है। एक रिसर्च के मुताबिक दालचीनी का सेवन सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर दोनों को कम कर सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए दालचीनी को हाइपोटेंशियल सप्लिमेंट की तरह प्रस्तावित किया जा सकता है। लेकिन, शोध में स्पष्ट नहीं है कि इसके कौन से यौगिक रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं (20)।

9. नींबू

सामग्री:

  • आधे नींबू का रस
  • एक गिलास पानी

उपयोग करने का तरीका:

  • पानी को हल्का गर्म कर लें।
  • अब उसमें नींबू का रस मिलाकर चाय की तरह पी लें।
  • इसका सेवन सुबह खाली पेट किया जा सकता है।

कैसे लाभदायक है:

हाई ब्लड प्रेशर से बचने या उसके लक्षणों को कम करने के लिए नींबू का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कई देशों में बीपी नियंत्रित करने का घरेलू नुस्खा माना जाता है (21)। एक रिसर्च की मानें, तो रोजाना नींबू का सेवन करने और टहलने से सिस्टोलिक रक्तचाप को कम करने का कम कर सकता है। चूहों पर किए गए इस शोध में कहा गया कि नींबू का जूस और इसके फ्लेवोनोइड सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर पर दमनकारी प्रभाव (Suppressive effect) डालता है। इसके अलावा, नींबू के छिलके का पानी वाला अर्क भी ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है (22)।
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10. उच्च रक्तचाप के घरेलू उपचार के लिए आलू

सामग्री:

  • 2 मध्यम आकार के उबले हुए आलू
  • चुटकी भर काली मिर्च
  • नींबू के रस की 6-7 बूंदें

उपयोग करने का तरीका:

  • उबाले हुए आलू पर चुटकी भर काली मिर्च पाउडर डालें।
  • अब इसमें 6-7 बूंदें नींबू के रस का मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें।
  • मिक्स होने के बाद इसका सेवन करें।
  • इसे हफ्ते में दो बार खाया जा सकता है।

कैसे लाभदायक है:

सब्जियों में आलू का सेवन कर उच्च रक्तचाप के खतरे को कम किया जा सकता है। आलू में पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम होता है। यह पोटेशियम हाई ब्लड प्रेशर को कुछ हद तक कम करने में मददगार हो सकता है (23)। वहीं, पके हुए उबले हुए या मसले हुए आलू और फ्रेंच फ्राइज का अधिक सेवन उच्च रक्तचाप के बढ़ते जोखिम का भी कारण बन सकता है (24)। इसी वजह से आलू का सेवन संभलकर किया जाना चाहिए।

11. सैलरी (Celery)

सामग्री:

  • सैलरी की चार मध्यम आकार की डंठल
  • आवश्यक्तानुसार शहद

उपयोग करने का तरीका:

  • सबसे पहले साफ पानी से अजवाइन की डंठलों को धो लें।
  • अब जूसर की मदद से डंठलों का जूस निकला लें।
  • उच्च रक्तचाप की स्थिति में रोज सुबह खाली पेट जूस को पिएं।
  • स्वाद के लिए इसमें शहद मिलाया जा सकता है।

कैसे लाभदायक है:

उच्च रक्तचाप के लिए घरेलू उपचार के रूप में सैलरी और शहद को भी लाभदायक माना जाता है (25)। सैलरी में थालिड्स (Phthalides) नामक फाइटोकेमिकल होता है। यह आर्टरी वॉल्स के ऊतकों को आराम देकर रक्त प्रवाह को बढ़ाने और रक्तचाप को कम करने का कार्य कर सकता है। इंडोनेशिया में हुए इस अध्ययन में कहा गया है कि सैलरी दोनों सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर को कम करने का काम कर सकता है। सैलरी के बीज के अर्क को भी बीपी का स्तर सुधारने में लाभदायक माना जाता है (26)। इसी वजह से सैलरी को हाई ब्लड प्रेशर के उपाय के रूप में जाना जाता है।

12. गाजर

सामग्री:

  • मध्यम आकार की 4 गाजर

उपयोग करने का तरीका:

  • गाजर को पहले साफ पानी से धो लें।
  • जूसर की मदद से इन गाजरों का जूस निकाल लें।
  • रोज सुबह खाली पेट जूस का सेवन करें।

कैसे लाभदायक है:

उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए गाजर का सेवन भी किया जा सकता है। फाइबर, पोटेशियम, नाइट्रेट्स, और विटामिन-सी सहित गाजर के रस में मौजूद अन्य पोषक तत्व ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायक होते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि गाजर का रस सिस्टोलिक रक्तचाप में 5% तक की कमी में योगदान दे सकता है। इसी वजह से गाजर के को जूस को हृदय और गुर्दों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है (27)। इसी वजह से गाजर को हाई ब्लड प्रेशर के उपाय के रूप में जाना जाता है।

13. लाल मिर्च पाउडर (Cayenne Pepper)

सामग्री:

  • एक चौथाई चम्मच लाल मिर्च पाउडर

उपयोग करने का तरीका:

  • आधे गिलास पानी में लाल मिर्च पाउडर अच्छी तरह मिलाकर सुबह पिएं।
  • वैकल्पिक रूप से सब्जियों की सलाद (गाजर, मूली, बंदगोभी व चुकंदर आदि) पर चुटकी भर लाल मिर्च का पाउडर छिड़कर सेवन कर सकते हैं।
  • इसके अलावा, भोजन पकाने में आवश्यकतानुसार लाल मिर्च का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे लाभदायक है:

लाल मिर्च तीखी होती है, लेकिन उच्च रक्तचाप को कुछ हद तक नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। लाल मिर्च प्राकृतिक रूप से रक्तचाप को कम करने में मदद करती है। लाल मिर्च में कैप्साइसिन नामक तत्व पाया जाता है, जो रक्तचाप को संतुलित करने में मदद कर सकता है। यह अधिक नमक खाने की वजह से बढ़ने वाले बीपी को भी नियंत्रित कर सकता है। ध्यान रहे कि इसके अधिक सेवन से हाइपरटेंशन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है (28)।

14. केला

सामग्री:

  • 2-3 केले
  • संतरे का जूस (वैकल्पिक)

उपयोग करने का तरीका:

  • रोजाना 2-3 केलों का सेवन करें।
  • चाहें, तो सुबह नाश्ते में एक गिलास संतरे के जूस के साथ एक केला भी खा भी सकते हैं।

कैसे लाभदायक है:

उच्च रक्तचाप के लिए घरेलू उपचार के रूप में केला का भी उपयोग किया जा सकता है। केले में पोटेशियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है (29)। इसी वजह हरदम हाई ब्लड प्रेशर की दवा खाने के बजाए फलों को तरजीह देने की सलाह दी जाती है।

15.मूली

सामग्री:

  • ताजी मूली की पत्तियां

उपयोग करने का तरीका:

  • भोजन के समय मूली और उसकी पत्तियों का सेवन सलाद के रूप में कर सकते हैं।
  • वैकल्पिक रूप से मूली की पत्तियों का साग बनाकर भी खा सकते हैं।

कैसे लाभदायक है:

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च के अनुसार, मूली के पत्तों में एंटीहाइपरटेंसिव प्रभाव होता है। एंटीहाइपरटेंसिव गुण उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए, अगर मूली के पत्तों का इस्तेमाल किया जाए, तो उच्च रक्तचाप के प्रभाव को कुछ कम किया जा सकता है (30)। फिलहाल, उच्च रक्तचाप के संबंध में मूली पर और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है। इसलिए, मूली का सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाए।

16. एप्पल साइडर विनेगर

सामग्री:

  • एक चम्मच सेब का सिरका
  • एक गिलास पानी

उपयोग करने का तरीका:

  • गुनगुने पानी में सेब के सिरके की कुछ बूंदें डालें
  • अब इसे अच्छे से मिक्स कर लें।
  • मिक्स होने के बाद इसे पी लें।

कैसे लाभदायक है:

सेब का सिरका ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। सेब के सिरके में एसिटिक एसिड होता है। इस एसिड में एंटीहाइपरटेंसिव गुण होता है, जो रक्तचाप को कम कर सकता है (31) (32)। वहीं, हार्वड हेल्थ पब्लिशिंग की मानें, तो सेब में मौजूद एसेटिक एसिड शरीर में पोटेशियम की मात्रा को कम कर सकता है। पोटेशियम सामान्यत: ब्लड प्रेशर को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। इसी वजह से सेबा के सिरका का सेवन अधिक करने से बचना चाहिए (33)।

17. एसेंशियल ऑयल

सामग्री:

  • कुछ बूंदें लैवेंडर एसेंशियल ऑयल की।
  • वैकल्पिक रूप से तुलसी या निरोली ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • एक बर्तन में गर्म पानी या फिर डिफ्यूजर।

उपयोग करने का तरीका:

  • एक बर्तन में लैवेंडर ऑयल की कुछ बूंदें डालें।
  • अब उसकी भाप को सूंघें।
  • डिफ्यूजर हो, तो उसमें तेल डालकर सूंघ लें।

कैसे लाभदायक है:

अरेमाथेरेपी को भी बीपी को कम करने के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। एनसीबीआई की एक रिसर्च में कहा गया है कि लैवेंडर ऑयल हाइपरटेंशन को नियंत्रित कर सकता है। हालांकि, यह किस तरह से काम करता है, यह स्पष्ट नहीं है (34)।

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अब जानिए उच्च रक्तचाप की रोकथाम के लिए कौन सी डाइट बेहतर है।

उच्च रक्तचाप के लिए आहार – Diet for High Blood Pressure in Hindi

उच्च रक्तचाप की रोकथाम के लिए आहार का चयन बड़े ध्यान से किया जाना चाहिए। बताया जाता है कि डैश डाइट (DASH Diet) उच्च रक्तचाप की समस्या को नियंत्रित रखने के लिए बेहतर डाइट है। इस डाइट में फल, कम वसा वाले डेयरी प्रोडक्ट, सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं (35)। उच्च रक्तचाप के लिए आहार को विस्तार से पढ़ने के इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

हाई बीपी का इलाज क्या होता है, इस पर नजर डाल लेते हैं।

उच्च रक्तचाप का इलाज – Treatments for High Blood Pressure in Hindi

हाई बीपी का इलाज करने के लिए डॉक्टर कुछ हाई ब्लड प्रेशर की दवा के सेवन की सलाह दे सकते हैं। इस उपचार का लक्ष्य रक्तचाप को सामान्य रखना होता है। इसके लिए डॉक्टर लाइफ स्टाइल में बदलाव और कुछ परहेज करने की सलाह दे सकते हैं (1)।

अंत तक पढ़ें

हाई बीपी का इलाज क्या है, यह तो आप जान गए। अब उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के टिप्स पढ़ें।

उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के लिए कुछ और टिप्स – Other Tips for High Blood Pressure in Hindi

उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए लाइफ स्टाइल में परिवर्तन करना जरूरी है। क्या हैं वो जरूरी बातें, जिनको ध्यान में रखकर उच्च रक्तचाप को कंट्रोल किया जा सकता है, आइए जानते हैं (4) (36)।

  1. शरीर का वजन – बढ़ता वजन उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है। इसलिए, शरीर के वजन को बनाए रखने के लिए डॉक्टर से बॉडी मास इंडेक्स को मापने और गणना के लिए जरूर कहें। साथ ही अपने वजन को नियंत्रित रखने के लिए डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
  1. धूम्रपान – उच्च रक्तचाप का एक कारण धूम्रपान भी है (37)। इसलिए, हाई ब्लड प्रेशर की पहचान होने पर धूम्रपान बिल्कुल न करें।
  1. भोजन – उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए DASH (Dietary Approaches to Stop Hypertension) Diet का पालन करें। DASH फल, सब्जी, कम वसा वाले दूध आधारित खाध पदार्थ और बिना चर्बी वाले मांस का सेवन करने के लिए प्रोत्साहित करता है (38)। इस डाइट के माध्यम से हाई बीपी को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
  1. योग – योग एक आध्यात्मिक मार्ग है, जो तनाव को कम करके उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर सकता है। शरीर को रोगमुक्त और स्वस्थ रखने के लिए विभिन्न प्रकार के योगासन किए जाते हैं। रक्तचाप के लिए शुरुआत में किसी योग्य योग विशेषज्ञ से योग सीख सकते हैं (39)।
  1. अल्कोहल – अधिक शराब का सेवन करने से भी उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई हाई ब्लड प्रेशर का मरीज हैं, तो भूलकर भी मदिरापान न करें (40)।
  1. तनाव पर नियंत्रण – अधिक तनाव कई शारीरिक बीमारियों की जड़ है, जिसमें हाइपरटेंशन भी शामिल है। इसलिए, हाई ब्लड प्रेशर से निजात पाने के लिए तनाव पर नियंत्रण रखना जरूरी है। अधिक तनाव के कारण शरीर में वाहिकासंकीर्णन (Vasoconstriction) हार्मोन की वृद्धि होती है। यह हार्मोन रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर और हृदय गति को बढ़ाकर उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता हैं (41)। तनाव को नियंत्रित कर हाई बीपी का इलाज किया जा सकता है।

उच्च रक्तचाप एक ऐसी शारीरिक समस्या है, जिसे पूरी तरह खत्म तो नहीं, लेकिन नियंत्रित जरूर किया जा सकता है। इस लेख में बताए गए घरेलू नुस्खों को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर बीपी हाई होने के लक्षण को काबू करने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर भी हाई ब्लड प्रेशर ट्रीटमेंट के लिए दवाओं के साथ ही दिनचर्या में बदलाव का सुझाव देते हैं। ऐसे में यह लेख आपकी मदद कर सकता है। यहां ब्लड प्रेशर के पेशेंट को ध्यान दी जाने वाली बातें और फायदा पहुंचाने वाले नुस्खे के बारे में विस्तार से बताया गया है। आगे हम पाठकों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब दे रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रक्तचाप को नियंत्रित करना कब मुश्किल हो जाता है?

रेजिस्टेंट हाइपरटेंशन होने पर हाई बीपी की दवा लेने के बावजूद ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। रेजिस्टेंट हाइपरटेंशन में बीपी 140/90 mmHg से ऊपर रहता है (42)।

क्या उच्च रक्तचाप के कारण नकसीर (नाक से खून बहना) हो सकती है?

जी हां, हाई बीपी की वजह से नाक से खून बह सकता है। जैसा कि हम ऊपर बता ही चुके हैं कि बीपी हाई होने के लक्षण में से एक नाक से खून का बहना भी है।

रक्तचाप को नियंत्रित करने में कितना समय लगता है?

हाई बीपी को नियंत्रित करने में कितना समय लगेगा इसका कोई सटीक जवाब नहीं है। दरअसल, बीपी कंट्रोल करने में लगने वाला समय हाई बीपी सिम्पटम्स और हाई ब्लड प्रेशर का उपचार किस तरह से किया जा रहा है इस पर निर्भर करता है। इसके अलावा, हाई बीपी की दवा का सेवन कर रहे हैं और जीवनशैली में बदलाव किया गया है या नहीं, इस पर भी यह बात निर्भर करती है। सामान्यत: बीपी को नॉर्मल होने में 3 हफ्ते लग सकते हैं (43)।

उच्च रक्तचाप गर्भावस्था को कैसे प्रभावित करता है?

गर्भावस्था में हाई बल्ड प्रेशर से प्रीक्लेम्पसिया हो सकता है, जिसके कारण समय पूर्व बच्चे का जन्म, भ्रूण का विकास ठीक से न हो पाना, हृदय रोग का खतरा और बच्चे का वजन कम होने जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं (44)।

उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

लेख में बताए गए हाई बीपी के लक्षण नजर आएं, तो एक बार हाई ब्लड प्रेशर ट्रीटमेंट के लिए डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। डॉक्टर मरीज के हाई बीपी सिम्पटम्स के आधार पर लाइफ स्टाइल में बदलाव के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर की दवा लेने का सुझाव दे सकते हैं।

44 संदर्भ (Sources) :

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vinita pangeni

विनिता पंगेनी ने एनएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में बीए ऑनर्स और एमए किया है। टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में काम करते हुए इन्हें करीब चार साल हो गए हैं। इन्हें उत्तराखंड के कई पॉलिटिकल लीडर और लोकल कलाकारों के इंटरव्यू लेना और लेखन का अनुभव है। विशेष कर इन्हें आम लोगों से जुड़ी रिपोर्ट्स करना और उस पर लेख लिखना पसंद है। इसके अलावा, इन्हें बाइक चलाना, नई जगह घूमना और नए लोगों से मिलकर उनके जीवन के अनुभव जानना अच्छा लगता है।

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