इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के कारण, लक्षण और इलाज – Irritable Bowel Syndrome in hindi

Written by , (शिक्षा- बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मीडिया कम्युनिकेशन)

जब व्यक्ति का पेट स्वस्थ होता है, तो सेहत भी अच्छी रहती है। यूं तो हमेशा पेट अच्छा रहे यह संभव नहीं। दरअसल, कई बार अचानक से ही पेट संबंधी परेशानी होते-होते इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस शिकायत को दूर करने के लिए स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का इलाज बता रहे हैं। साथ ही इस समस्या की पहचान करने के लिए इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण भी यहां बताए गए हैं।

नीचे है पूरी जानकारी

इस लेख में हम सबसे पहले इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम क्या होता है, इसकी जानकारी दे रहे हैं।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम क्या है?

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) पेट से संबंधित एक तरह की समस्या है, जो बड़ी आंत को प्रभावित करती है। इसके कारण पेट में ऐंठन, सूजन और आंत में बदलाव हो सकता है। इस समस्या से जूझ रहे कुछ लोगों को कब्ज की शिकायत होती है, तो कुछ को दस्त, पेट में दर्द आदि की (1)। इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या होने के पीछे के कारण और इसके इलाज के बारे में हम आगे लेख में बताएंगे।

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आगे जानते हैं इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के कारण क्या होते हैं।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk Factors of Irritable Bowel Syndrome in Hindi

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS-आईबीएस) के कारण अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चले हैं। हालांकि, यह एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन या आंतों के पेरासिटिक इन्फेक्शन (जियार्डियासिस) होने के बाद हो सकता है (2)। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि कई परेशानियां मिलकर आईबीएस की परेशानी का कारण बनते हैं। इन्हीं को आईबीएस का जोखिम कारक भी माना जा सकता है (3)।

  • शारीरिक या यौन शोषण की वजह से होने वाले तनाव के कारण
  • कुछ मानसिक समस्याएं, जैसे अवसाद व गंभीर चिंता।
  • पाचन तंत्र में बैक्टीरियल इन्फेक्शन होना।
  • छोटी आंत के बैक्टीरिया में वृद्धि।
  • पाचन संबंधित समस्या उत्पन्न करने वाली खाद्य पदार्थ।

लेख में बने रहें

अब आगे बढ़ते हुए इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण जानते हैं।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण – Symptoms of Irritable Bowel Syndrome in Hindi

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग तरह से दिखाई दे सकते हैं। इसके लक्षण अधिकतर हल्के ही नजर आते हैं। कुछ एक मामले में ये लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। ये लक्षण कुछ इस प्रकार हैं (1)।

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लेख के अगले भाग में हम इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के निदान बताएंगे।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का निदान- Diagnosis of Irritable Bowel Syndrome in Hindi

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के निदान के लिए डॉक्टर खुद जांच करने के बाद कई तरह के टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं (4):

  1. शारीरिक परिक्षण – इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के बारे में पता लगाने के लिए डॉक्टर सबसे पहले शरीर की जांच करते हैं। इस समय वे पेट कितना फूला है, इसकी जांच पेट को हाथ से दबाकर कर सकते हैं। साथ ही स्टेथोस्कोप लगाकर पेट के अंदर की आवाजें भी सुन सकते हैं।
  2. ब्लड टेस्ट – आईबीएस का निदान करने के लिए शारीरिक परिक्षण के बाद डॉक्टर रक्त की भी जांच करने की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए रक्त का सैंपल लेकर प्रयोगशाला में देना होगा। इससे पता चल सकता है कि व्यक्ति को आईबीएस है या नहीं।
  3. स्टूल टेस्ट – इस परिक्षण के लिए मल का सैंपल देना होता है। लैब भेजे गए मल से यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति को संक्रमण से संबंधित समस्या है या नहीं और यह परेशानी कितनी गंभीर है।
  4. अन्य जांच– आईबीएस का निदान करने के लिए कुछ अन्य जांच प्रक्रिया की भी मदद ली जा सकती है, जिनमें ये शामिल हैं।
  • हाइड्रोजन ब्रीद टेस्ट – इस जांच से छोटी आंतों के बैक्टीरिया की वृद्धि या लैक्टोज असहिष्णुता जैसे पचान की समस्याओं का पता लगाया जाता है।
  • अपर जीआई एंडोस्कोपी और बायोप्सी – इस जांच से सीलिएक रोग के बारे में पता लगाया जा सकता है, जो कि आईबीएस का कारण बन रहा हो। बता दें कि सीलिएक रोग पाचन से जुड़ी एक समस्या है।
  • कोलोनोस्कोपी – इस परीक्षण से कोलन कैंसर या इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज की जांच की जा सकती है, जिससे इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम और उसके कारण स्पष्ट होते हैं।

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इस लेख के अगले भाग में हम इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का इलाज कैसे करें, बताएंगे।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का इलाज – Treatment of Irritable Bowel Syndrome in Hindi

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम किसी तरह की बीमारी न होकर कई लक्षणों का समूह है। ऐसे में इसके लक्षणों को दूर करके इसका इलाज किया जा सकता है। डॉक्टर इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का इलाज करने के लिए इन तरीकों को अपना सकते हैं (5)।

1. दवाइयां

आईबीएस के अलग-अलग लक्षणों के लिए डॉक्टर अलग-अलग दवाइयां लेने की सलाह दे सकते हैं। अगर यह समस्या दस्त या कब्ज जैसे लक्षणों से जुड़ी है, तो इसके लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक व मल को नरम बनाने वाली लैक्सेटिव दवाओं की खुराक दे सकते हैं। वहीं, यदि यह स्थिति पेट में दर्द से जुड़ी है, तो डॉक्टर दर्द के कारणों के आधार पर एंटीस्पास्मोडिक्स व एंटीड्रिप्रेसेंट्स जैसे दवाओं की खुराक दे सकते हैं।

2. प्रोबायोटिक्स

आईबीएस के उपचार के लिए डॉक्टर प्रोबायोटिक्स भी लेने की सलाह दे सकते हैं। प्रोबायोटिक्स एक तरह के माइक्रोऑर्गेनाइज्म होते हैं, जो आमतौर पर पाचन तंत्र में भी मौजूद होते हैं। यह पाचन क्रिया को बेहतर करके आईबीएस से राहत पहुंचा सकते हैं।

3. मेंटल हेल्थ थेरेपी

जैसा कि हमने ऊपर लेख में बताया है कि इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम होने के पीछे मानसिक स्वास्थ्य भी जिम्मेदार है। ऐसे में इसके लिए थेरेपी को अपनाकर तनाव को कम किया जा सकता है, जिससे कि इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

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अब पढ़ते हैं कि इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या में किस तरह के आहार का सेवन करना चाहिए।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के लिए आहार- Diet for Irritable Bowel Syndrome in Hindi

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम को ठीक करने और इसे गंभीर करने में खानपान की अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि लेख के इस भाग में हम आईबीएस की स्थिति में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए इसकी जानकारी दे रहे हैं (6) (7)।

क्या खाना चाहिए

  • इस समय फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए जैसे कि ओट्स और ओट युक्त खाद्य पदार्थ
  • ताजी सब्जियां- पालक, टमाटर, गाजर, खीरा, बैंगन, सेम, कद्दू और आलू।
  • फल- खरबूजा, चकोतरा, कीवी, पपीता, अनानास, रास्पबेरी, स्ट्रॉबेरी आदि।
  • डेरी प्रोडक्ट्स- आल्मंड मिल्क, काजू मिल्क, राइस मिल्क, लैक्टोज फ्री मिल्क, लैक्टोज फ्री दही।
  • नट्स और सीड्स- आल्मंड बटर, अखरोट और मूंगफली।
  • मक्का, आलू, चावल, ओट्स और क्विनोआ से तैयार ब्रैड, पास्ता और सीरियल्स।

क्या नहीं खाना चाहिए

जिन लोगों को इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम है, उन्हें इसके लक्षणों से राहत पाने के लिए अपने आहार में बदलाव करना जरूरी है। ऐसे में इन खाद्य पदार्थ को लेने से बचें या फिर इनकी मात्रा को सीमित करें (6)।

  • फल में सेब, ब्लैकबेरी, खुबानी, चेरी, आम, नाशपाती, आलूबुखारा और तरबूज को सीमित करें।
  • ऊपर बताए गए फलों के रस व जूस का सेवन कम करें।
  • सब्जियों में आर्टिचोक, शतावरी, गोभी, फूलगोभी और मशरूम का सेवन न करें।
  • डेयरी उत्पाद जैसे दूध और दूध से बने उत्पाद, सॉफ्ट चीज, दही, कस्टर्ड और आइसक्रीम से परहेज करें।
  • गेहूं और राई भी लेने से बचें।
  • शहद, जिनमें अधिक फ्रूक्टोज सिरप हो, उसे भी आहार में शामिल न करें।

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अब हम इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम से बचने के तरीके बता रहे हैं।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम से बचने के उपाय – Prevention Tips for Irritable Bowel Syndrome in Hindi

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम से बचने के लिए उसके कारणों से बचना जरूरी है (3)। इससे बचाव के लिए इन तरीकों को अपना सकते हैं-

  • इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के कारण बनने वाले तनाव, चिंता और अवसाद को दूर करने के लिए थेरेपिस्ट की मदद ले सकते हैं।
  • पाचन तंत्र को बेहतर रखने के लिए फाइबर युक्त आहार का सेवन कर सकते हैं। इससे पाचन तंत्र बेहतर रहेगा और आईबीएस से बचा जा सकता है।
  • पाचन तंत्र में बैक्टीरियल इन्फेक्शन न हो, इसके लिए एंटी-बैक्टीरियल युक्त खाद्य पदार्थ ले सकते हैं।
  • खाना-खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धोएं।
  • अपने आस-पास स्वछता बनाए रखें। खाने को दूषित होने से बचाएं।
  • हमेशा ताजा बना खाना खाएं व बचे हुए खाने को हमेशा ढक कर रखें।
  • बासी या बहुत देर तक खुला रखा हुआ या फ्रीज में स्टोर किया खाना न खाएं।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। इसके होने पर ज्यादा घबराएं न। सही देखभाल करने पर इसके लक्षण से राहत मिल सकती है। साथ ही उचित खाद्य पदार्थ को अपने आहार में शामिल करके इस समस्या को पनपने से रोका जा सकता है। हम आशा करते हैं कि लेख में दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। इस तरह की दूसरी जानकारी के लिए स्टाइलक्रेज की वेबसाइट पर प्रकाशित अन्य लेख को पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैं आईबीएस को तुरंत कैसे रोक सकता हूं?

किसी भी समस्या को तुरंत ठीक करना संभव नहीं है। हां, आईबीएस के लक्षणों से राहत पाने के लिए ओट्स, साबुत अनाज, फल और सब्जियों का सेवन कर सकते हैं (6)।

आईबीएस के लिए सबसे अच्छा पेय कौन-सा है?

आईबीएस में कीवी, लाइम और स्ट्रॉबेरी का सेवन करने की सलाह दी जाती है (7)। इसके लिए कीवी, लाइम और स्ट्रॉबेरी से तैयार स्मूदी या डिटॉक्स वॉटर तैयार कर सकते हैं।

आईबीएस के लिए सबसे खराब खाद्य पदार्थ क्या हैं?

इस स्थिति में ग्लूटेन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे ब्रेड, पिज्जा, पास्ता, नूडल्स, बर्गर, पेस्ट्री आदि सबसे खराब माने जाते हैं (6)।

संदर्भ (Sources)

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  1. Irritable Bowel Syndrome
    https://medlineplus.gov/irritablebowelsyndrome.html
  2. Irritable bowel syndrome
    https://medlineplus.gov/ency/article/000246.htm
  3. Symptoms & Causes of Irritable Bowel Syndrome
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/irritable-bowel-syndrome/symptoms-causes
  4. Diagnosis of Irritable Bowel Syndrome
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/irritable-bowel-syndrome/diagnosis
  5. Treatment for Irritable Bowel Syndrome
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/irritable-bowel-syndrome/treatment
  6. Eating Diet & Nutrition for Irritable Bowel Syndrome
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/irritable-bowel-syndrome/eating-diet-nutrition
  7. Low FODMAP diet
    https://medlineplus.gov/ency/patientinstructions/000984.htm
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