जालंधर बंध योग करने का तरीका और फायदे – Jalandhara Bandha Steps And Benefits in Hindi

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योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है, इस बात से तो आप जरूर वाकिफ होंगे। इसके साथ ही यह जान लेना भी जरूरी है कि योग न सिर्फ एक क्रिया है, बल्कि अनेक योगासनों का समूह भी है। इसके हर आसन की एक अलग खासियत है। ऐसा ही एक योगासन है जालंधर बंध। माना जाता है कि इस आसन का अभ्यास कई शारीरिक समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल में हम जालंधर बंध योग के बारे में बता रहे हैं। यहां हम जालंधर बंध योग के फायदे, इसे करने का तरीका और इससे संबंधित सावधानियों के बारे में भी विस्तार से बताएंगे।

शुरू करते हैं लेख

चलिए, सबसे पहले जानते हैं कि जालंधर बंध योग क्या है।

जालंधर बंध योग क्या है – What is Jalandhara Bandha in Hindi

जालंधर बंध एक योगासन है, जिसे अंग्रेजी में चिन लॉक (chin lock) के नाम से जाना जाता है। यहां जालंधर का अर्थ समझें, तो यह दो शब्दों को मिलाकर बना है। एक जाल यानी नेट (नाड़ियों का जाल) और दूसरा धर, जिसका मतलब है नाड़ियों में बह रहे तरल को रोकना। वहीं, बंध का अर्थ होता है रोकना या टाइट करना। यह योगी को शरीर के विभिन्न अंगों और नसों को नियंत्रित करने में मदद करता है। बंध मुद्रा कई तरह की होती हैं। वहीं, जालंधर बंध में गर्दन को सिकोड़कर और ठुड्डी के जरिए दबाव बनाकर बंध लगाया जाता है (1)।

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नीचे हम जालंधर बंध योग के फायदे के बारे में विस्तार से बताएंगे।

जालंधर बंध योग के फायदे – Benefits of Jalandhara Bandha in Hindi

जालंधर बंध योग को जानने के बाद यहां हम क्रमवार तरीके से इसके फायदे के बारे में बता रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं :

1. थायराइड फंक्शन में सुधार

गले में मौजूद थायराइड ग्रंथि जब हार्मोन का उत्पादन कम या ज्यादा करती है, तो थायराइड की परेशानी होती है (2)। वहीं, जालंधर बंध योग काफी हद तक इससे राहत दिलाने में मदद कर सकता है। दरअसल, एक शोध में जिक्र मिलता है कि जालंधर बंध योग करते समय गले की मांसपेशियां उत्तेजित होती हैं, जिससे थायराइड फंक्शन में सुधार हो सकता है। इसके अलावा, यह चिंता, क्रोध और तनाव को दूर कर मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में भी मदद कर सकता है (3)। इस आधार पर थायराइड की समस्या को नियंत्रित करने में जालंधर बंध योग को लाभकारी माना जा सकता है।

2. रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए

जालंधर बंध योग रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में लाभदायक हो सकता है। एक शोध में इस बात की पुष्टि होती है। शोध में माना गया है कि जालंधर बंध योग शरीर में रक्त संचार को तेज कर रीढ़ की हड्डी को मजबूती प्रदान करने का काम कर सकता है(3)।   

3. रक्त संचार में सुधार के लिए

लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि जालंधर बंध योग शरीर में रक्त संचार को बेहतर करने में मदद कर सकता है (3)। बता दें कि स्वस्थ रहने के लिए शरीर में ठीक से रक्त का संचार होना बेहद जरूरी होता है। यह शरीर की सभी कोशिकाओं में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचाने का काम करता है। साथ ही यह हृदय रोग से बचाव में भी सहायक हो सकता है (4)। जालंधर बंध योग के फायदे को देखते हुए इसे नियमित रूप से दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

4. गले से जुड़ी समस्याओं के लिए

गले से जुड़ी समस्याओं से राहत पाने के लिए भी जालंधर योग को बेहतर माना जाता है। इसका नियमित अभ्यास करने से गले से संबंधित परेशानियां जैसे गले में सूजन, गले में बलगम, टॉन्सिल्स की समस्या आदि में राहत पाई जा सकती है। साथ ही, आवाज में सुधार करने में भी जालंधर योग लाभकारी हो सकता है (3)।

5. कूल्हे की मांसपेशियों के लिए

जालंधर बंध योग से कूल्हे पर स्ट्रेच पड़ता है, जिस वजह से यह कूल्हे की मांसपेशियों को लचीला बनाने के साथ ही पोस्चर में सुधार करने में भी सहायक साबित हो सकता है। इसके अलावा, अगर इस योग को ठीक तरीके से किया जाए, तो यह मन को शांत करने में भी मदद कर सकता है (5)

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जालंधर बंध योग के फायदे जानने के बाद इसे करने का तरीका जानेंगे। 

जालंधर बंध योग करने का तरीका – Steps to do Jalandhara Bandha in Hindi

किसी भी योग को करने का लाभ तभी मिलता है, जब उसे सही तरीके से किया जाए। ऐसे में जालंधर बंध योग करने का तरीका जानना बेहद जरूरी है। इसलिए, यहां हम जालंधर बंध योग की विधि विस्तार से समझा रहे हैं।

  • जालंधर बंध करने के लिए सबसे पहले समतल जगह पर योग मैट बिछा लें।
  • इसके बाद सिद्धासन, पद्मासन की मुद्रा, वज्रासन की मुद्रा या सुखासन में से किसी एक आसन में बैठ जाएं।
  • इस दौरान कमर को सीधा रखें।
  • हथेलियों को घुटनों पर रखें और आंखों को बंद कर लें।
  • कंधों को थोड़ा ऊंचा उठा लें।
  • अब धीरे-धीरे गहरी सांस लें और सांस को रोक कर रखें।
  • कमर को सीधा रखते हुए शरीर को थोड़ा आगे झुकाएं और फिर सिर और गर्दन को इतना झुकाएं कि ठुड्डी छाती को छू ले।
  • इस दौरान अधिक बल न लगाएं व जब तक सांस को रोक पाएं, इस अवस्था में रहें।
  • अब धीरे धीरे सांस छोड़ें और वापस प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • जालंधर बंध का एक चक्र पूरा हुआ।
  • शरीर को कुछ सेकंड आराम देने के बाद आसन को दोहराएं।
  • इसे पांच-छह बार तक किया जा सकता है।

जानकारी बाकी है

जालन्धर बन्ध की विधि जानने के बाद आगे जानते हैं इससे जुड़ी सावधानियां।

जालंधर बंध योग के लिए कुछ सावधानियां – Precautions for Jalandhara Bandha in Hindi

जालंधर बंध योग करने से पहले इससे जुड़ी सावधानियों को जान लेना भी जरूरी है, जिन्हें हम नीचे बता रहे हैं (3) :

  • गर्दन में किसी तरह की चोट हो, तो इस योगासन को न करें।
  • सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की परेशानी (गर्दन में स्थित सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी समस्या), हाई इंट्राक्रेनियल प्रेशर (मस्तिष्क की किसी चोट के कारण स्कल यानी खोपड़ी के अंदर दबाव) और वर्टिगो के रोगियों (Vertigo – सिर घूमना या चक्कर आना) को यह आसन न करने की सलाह दी जाती है।
  • हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से ग्रसित लोगों को यह आसन करने की सलाह नहीं दी जाती है।
  • सांस संबंधित परेशानी होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • चक्कर महसूस हो, तो इस आसन को न करें।
  • पहली बार इस आसन को करने वाले लोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसे करें।
  • आसन को करते समय पीठ में दर्द, तेज धड़कन आदि होने पर विशेषज्ञ से सलाह लें।
  • किसी भी प्रकार के योगासन को जबरन नहीं करना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार योग करें, तो बेहतर होगा।
  • योग को हमेशा सही मुद्रा में और सही जानकारी के साथ ही करना चाहिए।

आर्टिकल में आपने जालंधर बंध योग के बारे में विस्तार से जाना। जालंधर बंध योग के फायदे जानने के बाद अगर इस आसन को करने का सोच रहे हैं, तो लेख में बताई गई विधि और सावधानियों को ध्यान से पढ़ें। जालन्धर बन्ध योग करने से कुछ परेशानियों में काफी हद तक राहत मिल सकती है, लेकिन इसे किसी भी समस्या का पूर्ण इलाज न मानें। किसी भी रोग का पूर्ण इलाज डॉक्टरी परामर्श पर ही निर्भर करता है। इसके साथ ही एक बात का खास ध्यान रखें कि किसी भी योग का लाभ तभी होगा, जब आप इसे नियमित रूप से करेंगे। उम्मीद करते हैं लेख में दी गई जानकारी आपके लिए लाभकारी साबित होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

किन लोगों को जालंधर बंध योग नहीं करना चाहिए?

जैसा कि लेख में ऊपर बताया गया है कि हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस, हाई इंट्राक्रेनियल प्रेशर और वर्टिगो के रोगियों को जालंधर बंध योग नहीं करना चाहिए (3)

क्या जालंधर बंध योग पेट की चर्बी को कम करता है?

जालंधर बंध योग पेट की चर्बी को कम करता है या नहीं, इससे जुड़े वैज्ञानिक शोध का अभाव है।

जालंधर बंध योग को कितनी बार किया जा सकता है?

अपनी क्षमतानुसार जालंधर बंध योग के पांच-छह चक्र पूरे कर सकते हैं।

Sources

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    1. Effect of Eight Weeks Jalandhar Bandh Practice on Physiological Variables of College Youths.
      https://www.worldwidejournals.com/paripex/recent_issues_pdf/2015/December/December_2015_1449635403__18.pdf
    2. Thyroid Diseases
      https://medlineplus.gov/thyroiddiseases.html
    3. A REVIEW ON JALANDHAR BANDHA AND ITS APPLIED ASPECTS
      http://journalijcar.org/sites/default/files/issue-files/7387-A-2018.pdf
    4. How does the blood circulatory system work?
      https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK279250/
    5. Common Benefits of Prayer and Yoga on Human Organism
      https://www.researchgate.net/publication/307555181_Common_Benefits_of_Prayer_and_Yoga_on_Human_Organism
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