जलोदर के कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपचार – Ascites Home Remedies in Hindi

Medically reviewed by Dr. Zeel Gandhi, Ayurvedic Doctor, BAMS
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इंसान का शरीर भी एक मशीन की तरह होता है, जिसे समय-समय पर रखरखाव की जरूरत होती है। अगर ठीक से इसका ध्यान न रखा जाए, तो कई तरह की बीमारियां शरीर को अपना घर बना सकती है। इन्हीं में से एक है जलोदर यानी एसाइटिस की समस्या। इसमें पेट फूला हुआ नजर आता है और अगर सही समय पर जलोदर का इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर भी हो सकता है। इसके कारण शरीर के कई अंगों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। साथ ही कई अन्य समस्याएं भी जन्म ले सकती हैं। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम जलोदर के कारण, इलाज और लक्षण के साथ जलोदर के घरेलू उपचार बताने जा रहे हैं। जलोदर से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।

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जलोदर के घरेलू उपचार जानने से पहले जानते हैं कि जलोदर क्या है।

क्या है जलोदर? – What Is Ascites In Hindi

सामान्य शब्दों में कहें, तो जलोदर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पेट में तरल पदार्थ भर जाता है और पेट फूला हुआ नजर आता है (1)। यह पानी पेट में झिल्लीदार परतों के बीच में बनता है, जिसे पेरिटोनियल स्पेस (peritoneal space) कहते हैं (2)। पेरिटोनियल स्पेस में तरल पदार्थ का थोड़ी मात्रा में होना सामान्य बात है। वहीं, तरल पदार्थ के अधिक मात्रा में इकट्ठा हो जाने से सूजन हो जाती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है (1)।

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लेख के इस भाग में हम जलोदर के प्रकार से जुड़ी जानकारी साझा कर रहे हैं।

जलोदर के प्रकार – Types Of Ascites In Hindi

जलोदर के लक्षण या इसके विषय में और जानकारी हासिल करने से पहले जलोदर के प्रकार जानने जरूरी है। जलोदर कई प्रकार के हो सकते हैं, जिसके बारे में हम नीचे जानकारी दे रहे हैं (3):

  • हेपाटिक : जलोदर का यह प्रकार मुख्य रूप से लिवर सिरोसिस या इन्फीरियर वेना कावा (हृदय तक बिना आक्सीजन युक्त रक्त को पहुंचाने वाली नस) में बाधा आने की स्थिति में हो सकता है।
  • कार्डियोजेनिक : जलोदर का यह प्रकार कंजेस्टिव कार्डियेक फेलियर (हृदय की पम्प करने की क्षमता का कमजोर होना) और कंस्ट्रक्टिव पेरिकार्डिटिस (हृदय की बाहरी परत में गंभीर सूजन) की स्थिति में हो सकता है।
  • नेफ्रोजेनिक : किडनी संबंधी विकार होने की स्थिति में जलोदर का यह प्रकार होने की आशंका अधिक रहती है।
  • मैलिग्नेंट : शरीर के विभिन्न अंगों में कैंसर होने की स्थिति में जलोदर का यह प्रकार सामने आ सकता है।
  • इन्फेक्शियस एसाइटिस : जलोदर का यह प्रकार फंगल, बैक्टीरियल या परजीवी की वजह से होने वाले संक्रमण के कारण हो सकता है।
  • मिस्लीनियस एसाइटिस : जलोदर का यह प्रकार लिपिड, पित्त तरल और ओवरी से जुड़ी समस्या के कारण देखने को मिल सकता है।

इनके अलावा भी जलोदर के कुछ अन्य प्रकार भी हैं, जो निम्नलिखित हैं :

  • दुर्दम्य जलोदर (Refractory ascites) : इसमें रोगी को विभिन्न लिवर संबंधी जटिलताओं का खतरा रहता है (4)। यह उपचार के बाद फिर से दोबारा हो सकता है।
  • काइलस जलोदर (Chylous ascites) : यह एक असामान्य जलोदर है। यह तब होता है, जब इलाज ठीक से नहीं हो पाता। इससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है (5)।

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जलोदर के प्रकार के बाद आगे अब हम जलोदर के कारण जानेंगे।

जलोदर के कारण – Causes Of Ascites In Hindi

लिवर की नसों में अधिक दबाव और एल्ब्यूमिन प्रोटीन की कमी को पेट की परत में पानी भरने का कारण माना जाता है। इस स्थिति के पैदा होने के कई अन्य कारण हो सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (1):

  • गंभीर हेपेटाइटिस बी और सी इन्फेक्शन।
  • लंबे समय से शराब का सेवन करना।
  • फैटी लिवर की समस्या।
  • एपेंडिक्स, पेट, अंडाशय, गर्भाशय, पेनक्रियाज (अग्नाशय) और लिवर से जुड़े कैंसर की स्थिति के कारण।
  • लिवर की नसों में खून के थक्के जमने के कारण।
  • हृदय की पम्प करने की क्षमता का कमजोर होना।
  • पैंक्रिया में सूजन (Pancreatitis)।
  • हृदय की बाहरी परत में सूजन।
  • किडनी डायलिसिस।

और भी है बहुत कुछ

जलोदर के कारण के बाद हम सिम्पटम्स ऑफ एसाइटिस समझने का प्रयास करेंगे।

जलोदर के लक्षण – Symptoms Of Ascites In Hindi

कम तरल की स्थिति में जलोदर के लक्षण नजर नहीं आते हैं, लेकिन तरल की अधिकता होने की स्थिति में जलोदर के लक्षण कुछ इस तरह देखने को मिल सकते हैं (1) (6)।

  • पेट में दर्द।
  • पेट में ऐठन और मरोड़।
  • सांस लेने में तकलीफ।
  • पेट का फुलना।
  • उल्टी और मतली।
  • जल्द पेट भरने का एहसास होना।
  • पैर के निचले हिस्से में सूजन।
  • वजन बढ़ना
  • चलने-फिरने में तकलीफ का अनुभव।
  • बुखार।

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सिम्पटम्स ऑफ एसाइटिस के बाद आगे हम जलोदर की जांच के विषय में जानेंगे।

जलोदर की जांच – Diagnosis Of Ascites In Hindi

जलोदर के घरेलू उपचार या इलाज जानने से पहले उसका निदान जानना आवश्यक है। जलोदर की जांच पहले डॉक्टर मरीज की पेट को छूकर या दबाकर कर सकते हैं। अगर पेट फूला हुआ लगे या डॉक्टर को किसी प्रकार की सूजन महसूस हो, तो डॉक्टर जलोदर की पुष्टि के लिए नीचे बताए गए टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं  (1):

  • मूत्र जांच।
  • इलेक्ट्रोलाइट की जांच।
  • किडनी कार्यक्षमता की जांच।
  • लिवर कार्यक्षमता की जांच।
  • रक्त स्त्राव के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए खून में प्रोटीन की उपस्थिति की जांच।
  • पेट का अल्ट्रासाउंड।
  • संक्रमण और जलोदर के कारण का पता लगाने के लिए पेट की परत में मौजूद तरल की जांच। इसके लिए डॉक्टर पेट में महीन सुई चुभाकर तरल का नमूना निकालते हैं।

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जलोदर की समस्या से राहत पाने के लिए कुछ घरेलू उपचार भी हैं, जिनके बारे में आगे बता रहे हैं।

जलोदर के घरेलू उपचार – Home Treatments For Ascites In Hindi

लेख के इस भाग में हम जलोदर के घरेलू उपचार की जानकारी दे रहे हैं। हालांकि, हम यह स्पष्ट कर दें कि यहां बताए घरेलू उपाय पेट की परत मे पानी भरने के लक्षण को कुछ हद तक कम कर सकते हैं। अगर किसी की समस्या गंभीर है, तो घरेलू उपचार करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। जलोदर के ये घरेलू उपचार लक्षणों को कम करने, जलोदर से बचाव या जोखिम कारकों को कम करने में सहायक हो सकते हैं, इन्हें जलोदर का इलाज समझने की भूल न करें। तो जलोदर के घरेलू उपाय कुछ इस प्रकार हैं :

1. मेथी

सामग्री :

  • एक मुट्ठी मेथी के दाने
  • एक कटोरी पानी
  • पानी छानने के लिए छलनी या कपड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगोकर रख दें।
  • अगली सुबह मेथी को पानी में अच्छी तरह मिलाकर बाद में पानी छान लें।
  • अब मेथी के इस पानी को पी लें।
  • रोज सुबह मेथी के पानी को पी सकते है।

कैसे है फायदेमंद :

जब बात आए पेट संबंधी परेशानियों की, तो मेथी को एक बेहतर घरेलू उपचार माना जाता है। इससे भी पेट में जलोदर का इलाज संभव है। दरअसल, इसमें हेपटोप्रोटेक्टिव (लिवर को सुरक्षा प्रदान करने वाला) और एंटी-कैंसर तत्व होते हैं। इन दोनों गुणों के कारण मेथी कैंसर के जोखिम को कम करने के साथ ही लिवर को भी सुरक्षा प्रदान कर सकती है (7)। वहीं लिवर विकार और कैंसर दोनों ही जलोदर के कारणों में शामिल है (1)। इसके अलावा शोध में सीधे तौर पर मेथी को एसाइटिस कोशिकाओं के प्रसार को रोकने में सक्षम माना गया है (7)। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि मेथी का सेवन जलोदर रोग का उपचार और बचाव में सहायक हो सकता है।

2. लहसुन का रस

सामग्री :

  • लहसुन की तीन-चार कलियां

कैसे इस्तेमाल करें :

  • लहसुन को बारीक टुकड़ों में काटकर इसका रस निकाल लें। आप चाहें तो उंगली से अच्छी तरह दबाकर लहसुन का रस निकाल सकते हैं।
  • अब इस तरह तैयार किए गए एक चम्मच लहसुन के रस को खाली पेट पिएं।
  • रोजाना सुबह लहसुन का रस पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

हर घर में लहसुन आसानी से मिल जाता है और खास बात यह है कि इससे जलोदर रोग का उपचार भी किया जा सकता है। इस बात को फ्लोरिडा की यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी के एक शोध में भी माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि इस्तेमाल से उपापचय प्रक्रिया को ठीक करने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह लिवर संबंधी नसों से जुड़ी समस्या को ठीक करने में मदद कर सकता है, जो कि जलोदर का कारण मानी जाती है (8)। वहीं मुर्गियों से संबंधित एक अन्य शोध में भी इसे एसाइटिस की समस्या में सहायक माना गया है (9)। इस आधार पर जलोदर उपचार या बचाव में लहसुन के फायदे देखे जा सकते हैं।

3. अदरक

सामग्री :

  • 1 मध्यम आकार का अदरक का टुकड़ा
  • एक कप गर्म पानी
  • शहद

कैसे इस्तेमाल करें :

  • एक पैन में पानी गर्म करें।
  • अब उबलते पानी में अदरक को घिसकर डाल दें।
  • थोड़ी देर बाद गैस बंद कर दें।
  • फिर पानी को एक कप में छानकर उसमें शहद मिलाएं।
  • जब पानी गुनगुना हो जाए, तो उसे पी लें।

कैसे है फायदेमंद :

जलोदर की आयुर्वेदिक दवा के रूप में अदरक के फायदे भी सहायक हो सकते हैं। इस विषय में हुए एक शोध में अदरक को फैटी लिवर की समस्या में सहायक पाया गया है (10)। जैसे कि हमने लेख की शुरुआत में ही यह जानकारी दी थी कि जलोदर का एक कारण फैटी लिवर भी है (1)। इसके अलावा अदरक में मौजूद एंटीट्यूमरजेनिक और एंटीकैन्सर गुण लिवर कैंसर के जोखिम पैदा करने वाले कैन्सर कोशिकाओं के प्रसार को रोकने में सहायक हो सकता है (11)। इस आधार पर माना जा सकता है कि अदरक का उपयोग जलोदर रोग का उपचार या उससे बचाव में सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है।

4. गाजर का रस

सामग्री :

  • तीन-चार गाजर
  • जूसर

कैसे इस्तेमाल करें :

  • सबसे पहले गाजर को साफ करके उसे छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • अब गाजर के टुकड़ों को जूसर में डालकर इसका जूस निकाल लें।
  • फिर तैयार जूस को गिलास में छानकर पी लें।

कैसे है फायदेमंद :

गाजर के जूस को भी जलोदर के घरेलू उपचार के रूप में इस्तेमाल में किया जा सकता है। दरअसल, गाजर का जूस नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर की समस्या में लाभकारी साबित हो सकता है। इस बात को एनसीबीआई पर प्रकाशित एक शोध में भी स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है (12)। इसके अलावा, फैटी लिवर के डाइट में भी गाजर को शामिल करना उपयोगी हो सकता है (13)। वहीं फैटी लिवर की समस्या जलोदर के कारणों में शामिल है (1)। इस आधार पर माना जा सकता है कि फैटी लिवर से राहत दिलाकर गाजर का जूस कुछ हद तक जलोदर के जोखिम को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। गाजर के जूस के अलावा गाजर का सेवन भी किया जा सकता है।

5. अरंडी के तेल का पैक

सामग्री :

  • एक कटोरी अरंडी का तेल
  • एक गर्म कपड़े का टुकड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • अरंडी के तेल से भरी कटोरी में गर्म कपड़े के टुकड़े को डुबो दें।
  • जब गर्म कपड़ा पर्याप्त तेल सोंक ले, तो कपड़े को थोड़ा ठंडा होने दें।
  • कपड़े के हल्के ठंडे होने के बाद इस कपड़े को सूजन वाली जगह पर रखें।
  • करीब 30 मिनट तक इस कपड़े को रखा रहने दें और फिर बाद में इसे हटा लें।
  • बाद में सूखे कपड़े से अतिरिक्त तेल को त्वचा से पोछ लें।
  • इस प्रक्रिया को प्रतिदिन एक बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

घरेलू तौर पर पेट की परत में पानी भरने का इलाज करने के लिए अरंडी के तेल का पैक भी प्रभावी साबित हो सकता है। इस बात की पुष्टि चूहों पर किए गए एक शोध से होती है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित इस स्टडी में जिक्र मिलता है कि अरंडी का तेल ट्यूमर और कैंसर एसाइटिस के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है (14)।

इसके अलावा, एनसीबाई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक अन्य आयुर्वेदिक स्टडी के अनुसार, दूध के साथ अरंडी के तेल का सेवन जलोदर के लिए उपयोगी पाया गया है (15)। इस आधार पर अरंडी के तेल का पैक जलोदर के घरेलू उपचार के तौर पर इस्तेमाल में लाना सहायक हो सकता है। हालांकि, हम यहां तेल को प्रभावित जगह पर लगाने की राय दे रहे हैं, जो कि जलोदर के लक्षण को कम कर सकता है। जलोदर या अन्य किसी स्वास्थ्य समस्या में अरंडी तेल के सेवन से पहले डॉक्टरी सलाह लेना आवश्यक है।

6. मालिश

सामग्री :

  • दो चम्मच अरंडी, नारियल या बादाम का तेल

कैसे इस्तेमाल करें :

  • ऊपर दिए गए इनमें से किसी भी तेल से पेट पर हल्के-हल्के से मालिश करें।
  • 15-20 मिनट तक मालिश करें और फिर इसे ऐसे ही छोड़ दें।
  • बेहतर लाभ के लिए रोज तेल की मालिश की जा सकती है।

कैसे है फायदेमंद :

मालिश के माध्यम से भी जलोदर की समस्या में आराम पाया जा सकता है। ताइवान की ताइपेई नर्सिंग यूनिवर्सिटी के एक शोध में भी इस बात को माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि मालिश करने से मैलिग्नेंट जलोदर (malignant ascites- जलोदर का प्रकार) के लक्षणों को कम करने मदद मिल सकती है। इन लक्षणों में दर्द, थकान, मतली, चक्कर आना, भूख की कमी, सांस लेने में तकलीफ, चलने-फिरने में परेशानी और शरीर का बढ़ा वजन शामिल हैं (16)। इस तथ्य को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि हल्की मालिश जलोदर के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकती है।

7. मूली

सामग्री :

  • छोटी आकार की चार ताजी मूली
  • एक चुटकी काला नमक (स्वाद के लिए)
  • जूसर

कैसे इस्तेमाल करें :

  • सबसे पहले मूली को अच्छे से धोकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • अब इन सभी टुकड़ों को जूसर में डालकर मूली का जूस निकाल लें।
  • फिर तैयार जूस को एक गिलास में छानकर निकाल लें।
  • इसके बाद जूस में एक चुटकी काला नमक मिलाकर पी जाएं।

कैसे है फायदेमंद :

मूली का उपयोग लिवर के लिए अच्छा माना जा सकता है, क्योंकि यह प्राकृतिक डिटॉक्सीफायर का काम करती है। इसमें मौजूद एंजाइम फैटी लिवर की समस्या से बचाव करने का काम कर सकता है (17)। जैसे कि हमें पहले ही जानकारी दी है कि फैटी लिवर जलोदर का एक मुख्य कारण माना जाता है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि फैटी लिवर के कारण होने वाली जलोदर की स्थिति में मूली का जूस जलोदर की आयुर्वेदिक दवा का काम कर सकती है। इसके अलावा जलोदर से बचाव के लिए भी मूली का सेवन कर सकते हैं।

8. करेला

सामग्री :

  • एक करेला
  • एक चम्मच नींबू का रस
  • चुटकीभर नामक
  • एक गिलास पानी

कैसे इस्तेमाल करें :

  • करेले को छीलकर इसके बीज निकाल लें।
  • अब करेले को और पानी को मिक्सर में डालकर जूस बना लें।
  • फिर इसे एक गिलास में छान लें।
  • अब इसमें नींबू का रस और नमक मिलाकर, इसका सेवन करें।

कैसे है फायदेमंद :

करेले के जूस का सेवन कर जलोदर की समस्या से बचाव किया जा सकता है। यह बात करेले से संबंधित एक शोध से स्पष्ट होती है। शोध में जिक्र मिलता है कि करेले का जूस फैटी लिवर की समस्या में राहत दिलाने का काम कर सकता है (18)। फैटी लिवर जलोदर के मुख्य कारणों में से एक है (1)। इसके अलावा, करेला जौंडिस की समस्या के लिए भी उपयोगी हो सकता है और जौंडिस के लक्षणों में जलोदर भी शामिल है (19)। इस आधार पर भी माना जा सकता है कि यह जलोदर के लिए उपयोगी हो सकता है।

9. प्याज

सामग्री :

  • मध्यम आकार के एक या दो प्याज

कैसे इस्तेमाल करें :

  • प्याज को छीलने के बाद इसे गोल टुकड़ों में काटकर इसे सलाद के रूप में खाने के साथ खाएं।
  • प्याज को अपने हर रोज के आहार में शामिल करें।

कैसे है फायदेमंद :

प्याज का उपयोग भी जलोदर की समस्या में लाभकारी साबित हो सकता है। दरअसल, प्याज में लिवर की सूजन को कम कर उसे सुरक्षा प्रदान करने का गुण मौजूद होता है। ऐसे में प्याज नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर की समस्या को दूर करने या उससे बचाव में सहायक हो सकता है (20)। वहीं लेख में आपको पहले ही बताया जा चुका है कि जलोदर के कारणों में फैटी लिवर की समस्या भी शामिल है (1)। इस आधार पर हम यह मान सकते हैं कि फैटी लिवर की स्थिति को नियंत्रित कर प्याज जलोदर के जोखिम को कम कर सकता है।

10. पुनर्नवा जड़ी बूटी

सामग्री :

  • पुनर्नवा की जड़ या पुनर्नवा का चूर्ण
  • एक गिलास गुनगुना पानी

कैसे इस्तेमाल करें :

  • पुनर्नवा की जड़ को पीसकर महीन चूर्ण बना लें।
  • पुनर्नवा चूर्ण बाजार में भी उपलब्ध होता हाओ, तो चाहें तो बाजार से पुनर्नवा का चूर्ण खरीद सकते हैं
  • तीन ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी के साथ खा लें।

कैसे है फायदेमंद :

इस आयुर्वेदिक औषधि को होगवीड भी कहा जाता है। यह दुनिया भर में लिवर के उपचारों में सबसे प्रसिद्ध है और इसे आमतौर पर जलोदर व ड्रॉप्सी के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें मूत्रवर्धक, एनीमिया, कफ से बचाव के गुण भी मौजूद हैं। इन सभी बातों की पुष्टि एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित पुनर्नवा के फायदे से संबंधित एक शोध से होती है (21)।

11. डैंडेलियन चाय

सामग्री :

  • एक डैंडेलियन टी बैग या एक चम्मच डैंडेलियन टी
  • एक गिलास गर्म पानी
  • एक चम्मच शहद

कैसे इस्तेमाल करें :

  • डैंडेलियन चाय की पत्ती या टी बैग को को 10 मिनट तक गर्म पानी में डुबोकर रखें।
  • फिर इस पानी को छान लें और ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
  • अब इसमें शहद मिलाकर पी जाएं।

कैसे है फायदेमंद :

डैंडेलियन की जड़ से तैयार चाय को पीना भी जलोदर में भी लाभकारी हो सकता है। इस बात को कुछ इस तरह समझा जा सकता है कि डैंडेलियन की जड़ में हेप्टोप्रोटेक्टिव (लिवर को सुरक्षा देने वाला) गुण पाया जाता है। इस गुण के कारण यह शराब के अधिक सेवन के कारण लिवर को पहुंचने वाली क्षति को कम करने में मदद कर सकती है (22)। वहीं लेख में आपको पहले ही बताया जा चुका है कि लिवर विकार और अत्याधिक शराब का सेवन जलोदर का कारण बन सकता है। इस आधार पर डैंडेलियन की जड़ से तैयार चाय को जलोदर से बचाव में मददगार माना जा सकता है।

12. कुल्थी की दाल का सूप

सामग्री :

  • ½ कप कुल्थी की दाल
  • चार कप पानी
  • एक चम्मच काली मिर्च
  • एक बड़ा चम्मच कटा लहसुन
  • एक बारीक कटा टमाटर
  • एक चम्मच बारीक कटा धनिया

कैसे इस्तेमाल करें :

  • कुल्थी की दाल को रात भर पानी में भिगोकर रखें।
  • अब अगले दिन इसे छान लें।
  • अब पानी के साथ प्रेशर कुकर में डालकर 5-6 सीटी तक पाक लें।
  • अब एक पैन में काली मिर्च, लहसुन और टमाटर को भून लें।
  • इसमें उबली हुई कुल्थी की दाल को डालकर अच्छी तरह मिला लें और ठंडा होने दें।
  • जब यह ठंडा हो जाए, तो इसे पीसकर पेस्ट बना लें।
  • फिर इसमें धनिया पत्ता और बची हुई दाल डाल दें।
  • इसे मिलाकर तीन-चार मिनट के लिए पकाएं।
  • अब सूप तैयार है, इसे गुनगुना होने पर पिएं।

कैसे है फायदेमंद :

कुल्थी की दाल से तैयार सूप को इस्तेमाल करके भी जलोदर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इस बात की पुष्टि केरल के अमाला कैंसर रिसर्च सेंटर के एक शोध से होती है। शोध में जिक्र मिलता है कि कुल्थी की दाल एसाइटिस ट्यूमर कोशिकाओं के प्रसार को रोकने में मदद कर सकती है (23)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि जलोदर से राहत पाने में कुछ हद तक कुल्थी उपयोगी हो सकते है।

पढ़ते रहें लेख

यहां अब हम जलोदर का इलाज करने की प्रक्रिया जानेंगे।

पेट में पानी भरने का इलाज – Ascites Treatment in Hindi

नीचे दिए गए बिन्दुओं के माध्यम से हम जलोदर का इलाज करने की प्रक्रिया और चरणों को समझ सकते हैं, जिन्हें डॉक्टर अपनाने की सलाह दे सकते हैं (1)।

1. जीवन शैली में बदलाव

जलोदर के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से डॉक्टर इलाज के रूप में रोगी को अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की सलाह दे सकते हैं। यह बदलाव कुछ इस प्रकार हो सकते हैं :

  • शराब से परहेज
  • नमक का कम उपयोग (प्रतिदिन 1500 मिलीग्राम से अधिक नहीं)
  • तरल का कम उपयोग

2. जलोदर की दवा

जलोदर के इलाज के लिए डॉक्टर कुछ दवाओं को लेने की भी  सलाह दे सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं :

  • जलोदर की दवा के रूप में डॉक्टर कुछ मूत्रवर्धक दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं, जो शरीर में मौजूद अतिरिक्त तरल को बाहर निकालने में मदद कर सकती हैं।
  • वहीं इसके साथ ही डॉक्टर संक्रमण से बचाव के लिए एंटीबायोटिक दवाओं को भी उपयोग में लाने की सलाह दे सकते हैं।
  • इसके अलावा लिवर से संबंधित समयाओं को दूर रखने के लिए डॉक्टर इन्फ्लूएंजा, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी और न्यूमोकोकल न्यूमोनिया के इंजेक्शन लेने का सुझाव दे सकते हैं।

3. अन्य :

दवा के बावजूद स्थिति गंभीर होने पर डॉक्टर कुछ अन्य तरीके भी इस्तेमाल में ला सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:

  • पेट में सुई चुभाकर पेट की त्वचा में मौजूद पानी को निकालने का प्रयास किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को परसेन्टेसिस (paracentesis) कहा जाता है।
  • लिवर में खून का बहाव ठीक से न होने की स्थिति में डॉक्टर ट्यूब की मदद से ब्लड फ्लो में सुधार करने की कोशिश कर सकते हैं।

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इलाज के बाद अब हम जलोदर में क्या खा सकते हैं, उसकी जानकारी दे रहे हैं।

जलोदर के मरीज के लिए डाइट – Diet For A Patient With Ascites In Hindi

जलोदर में क्या खाए, यह पता होना भी बहुत जरूरी है। वजह यह है कि इस बीमारी में उपचार भी तभी ज्यादा असर दिखाएंगे, जब व्यक्ति का खान-पान बेहतर होगा। जलोदर के मरीज को कम नमक वाले और मूत्रवर्धक खाद्य पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है (24)। इसलिए, नीचे हम जलोदर में क्या खाएं यह बताने जा रहे हैं :

  • खट्टे फल जैसे संतरा व अंगूर (अंगूर के बीज) प्राकृतिक मूत्रवर्धक हैं और पेट से अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालने में मदद कर सकते हैं (25) (1)।
  • अनानास भी एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक है। यह शरीर को डिटॉक्सीफाई कर लिवर और किडनी को स्वस्थ रख सकता है। इसलिए जलोदर में इसे खाना या इसका रस पीना लाभकारी हो सकता है (27)।
  • साबुत अनाज को आहार में शामिल करें (28)।
  • फाइबर युक्त चीजों को भी आहार में जरूर शामिल करें। यह जलोदर की समस्या में इन्फेक्शन के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है (29)।

नोट : जलोदर में क्या खाना है, यह मरीज की स्थिति और जलोदर के प्रकार पर भी निर्भर करता है। ऐसे में बेहतर है मरीज इस बारे में डॉक्टरी सलाह भी जरूर लें। बेहतर है कि मरीज जलोदर के लिए डॉक्टर से डाइट चार्ट के बारे में भी जानकारी लें।

अभी और जानकारी है

जलोदर में क्या खा सकते हैं, यह तो आप जान गए, अब हम जलोदर में क्या नहीं खाना चाहिए उसकी जानकारी लेख के इस भाग में दे रहे हैं।

जलोदर के मरीज न खाएं ये चीजें – Foods To Avoid With Ascites In Hindi

जलोदर की स्थिति में नीचे बताए खाद्य पदार्थों से परहेज की सलाह दी जा सकती है। ये खाद्य पदार्थ कुछ इस प्रकार है :

  • जलोदर से निपटने के लिए नमक खाना कम करना चाहिए (1)।
  • एल्कोहल के सेवन से भी जलोदर की समस्या बढ़ती है (1)। इसलिए, जलोदर की समस्या से बचाव के लिए एल्कोहल का सेवन न करें।
  • तले-भूने खाने का सेवन न करें। वजह, यह है कि ये लिवर के लिए हानिकारक माना जाता है (30)। वहीं लेख में बताया जा चुका है कि लिवर विकार के कारण जलोदर का जोखिम हो सकता है।
  • फैटी लिवर की समस्या से उबरने के लिए वसायुक्त मांस, दूध और दुग्ध उत्पादों से बचने की सलाह दी जाती है (31)। ऐसे में जलोदर की स्थिति में इन चीजों का परहेज आवश्यक है।
  • प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि उनमें उच्च मात्रा में सोडियम होता है (32)।

अंत तक पढ़ें लेख

आइए, अब जलोदर से राहत पाने के लिए कुछ योग के बारे में जान लेते हैं।

जलोदर के लिए योग – Yoga For Ascites In Hindi

जलोदर की समस्या से राहत पाने के लिए इलाज के साथ ही योग का भी सहारा लिया जा सकता है। यह इलाज की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है (33)। हालांकि, इस संबंध में अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है। जानकारों की माने तो जलोदर में योग विशेषज्ञ मुख्य रूप से तीन आसन करने की सलाह दे सकते हैं, जो इस प्रकार हैं :

1. बद्ध पद्मासन

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इसे लॉक लोटस पोज या बाउंड लोटस पोज भी कहा जाता है। यह आसन छाती के विकास में मदद करता है और आंतरिक रूप से शरीर के अंगों की मालिश होती है। इससे रक्त प्रवाह भी सुधरता है और शरीर से अतिरिक्त तरल भी बाहर निकल सकता है।

करने का तरीका :

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर पद्मासन की मुद्रा में बैठें।
  • अब अपने बाएं पैर को दाईं जांघ पर और दाएं पैर को बाईं जांघ पर रखें।
  • सुनिश्चित करें कि इस स्थिति में पैर के पंजे जांघों से बाहर की ओर निकलकर दोनों ओर से कमर को छू रहे हों।
  • अब अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
  • इसके बाद अपने हाथों को पीछे की ओर ले जाएं।
  • अब बाईं भुजा को पीठ के पीछे से लाते हुए दाएं पैर के अंगूठे को पकड़े और दाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें।
  • अब इस स्थिति में आने के बाद एक मिनट तक धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • समय पूरा होने के बाद धीरे-धीरे अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
  • शुरुआत में कुछ लोगों को यह आसान करने में कुछ परेशानी हो सकती है।

2. लोलासन

Lolasan

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इसे पेंडेंट पोज भी कहा जाता है। हालांकि, यह आसन करना थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन यह शरीर के आंतरिक अंगों को सक्रिय बना सकता है और पेट से दबाव को दूर करने में मदद कर सकता है।

करने का तरीका :

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर पद्मासन की स्थिति में बैठ जाएं।
  • इसके बाद अपनी दोनों हथेलियों को जांघों के बगल में जमीन पर रखें।
  • अब हथेलियों पर जोर देते हुए अपने पूरे शरीर का भार हथेलियों पर लेकर आएं।
  • इसके बाद धीरे से हथेलियों पर जोर देते हुए शरीर को इसी मुद्रा में जमीन से ऊपर उठाने का प्रयास करें।
  • अब इस मुद्रा में करीब एक मिनट तक अपने शरीर को आगे-पीछे झुलाने का प्रयास करें और सामान्य गति से सांस लेते रहें।
  • फिर अपने शरीर को धीरे-धीरे जमीन पर वापस लाते हुए प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

3. मयूरासन

Mayurasan

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इसे पीकॉक पोज भी कहा जाता है। यह पेट की मांसपेशियों को मजबूत कर ब्लड फ्लो में सुधार कर सकता है। यह एक कठिन पोज है, इसलिए शुरुआत में किसी की मदद से ही करें।

करने का तरीका :

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर घुटनों के बल बैठ जाएं।
  • अब अपनी हथेलियों को जमीन से सटाएं।
  • इसके बाद अपने पैरों के पंजों को एक दूसरे से लगाएं और सुनिश्चित करें कि इस दौरान दोनों घुटनों के बीच थोड़ी जगह छूटी रहे।
  • ध्यान रहे, इस स्थिति में दोनों हाथ दोनों घुटनों के बीच में होने चाहिए।
  • फिर अपने दोनों हाथ की कोहनियों को अपने पेट पर इस प्रकार लगाएं कि दोनों कोहनियां नाभि के दाएं-बाएं रहें।
  • अब अपने दोनों पैरों को पीछे की ओर बिल्कुल सीधा करते हुए फैला दें।
  • इसके बाद अपने शरीर के अगले हिस्से को थोड़ा आगे झुकाएं और अपने दोनों हाथों पर शरीर का पूरा वजन लेते हुए शरीर को जमीन से ऊपर उठाने का प्रयास करें।
  • सुनिश्चित करें कि दोनों हाथों पर शरीर का संतुलन रहे। इस दौरान केवल आपके हाथ जमीन को छूते रहेंगे और बाकी पूरा शरीर हवा में रहेगा।
  • अपनी क्षमता के अनुसार इस स्थिति में रहने का प्रयास करें।
  • समय पूरा होने के बाद धीरे-धीरे शरीर को वापस अपनी प्रारंभिक स्थिति में ले आएं।

नोट : अगर आप पहली बार योगासन कर रहे हैं, तो इन्हें खुद से न करें। हमेशा प्रशिक्षक की निगरानी में रहकर ही ये व्यायाम करें।

समस्या कितनी भी जटिल हो, सही इलाज प्रक्रिया और खान-पान के तरीके को ध्यान में रख उससे राहत पाई जा सकती है। ऐसा ही जलोदर की समस्या में भी मुमकिन। इस लेख को अच्छी तरह पढ़ने के बाद आप बेहतर तरीके से इस बात को समझ गए होंगे। ऐसे में अगर किसी के परिवार में कोई या परिचित जलोदर से पीड़ित है, तो उसे लेख में शामिल जानकारी से जरूर अवगत कराएं। हम उम्मीद करते हैं कि यह लेख आपको पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य विषयों के बारे में जानने के लिए पढ़ते रहें स्टाइलक्रेज।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पानी पीना जलोदर में लाभकारी है?

पानी शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। हालांकि, जलोदर की स्थिति के अनुसार डॉक्टर पानी या पेय पदार्थों के सेवन को कम करने की सलाह दे सकते हैं। ऐसे में पानी जलोदर में लाभकारी हो सकता है या नहीं यह जलोदर की स्थिति पर निर्भर करता है।

क्या होगा अगर जलोदर को बिना इलाज के छोड़ दिया जाए?

अगर जलोदर का इलाज किए बिना छोड़ दिया जाए तो निम्न जटिलताएं देखने को मिल सकती हैं (1)।

  • जानलेवा संक्रमण
  • किडनी फेलियर
  • वजन कम होने के साथ प्रोटीन की कमी
  • भ्रम, चेतना में कमी के साथ कोमा की स्थिति पैदा होना
  • आंत के ऊपरी और निचले हिस्से से रक्त स्त्राव
  • सीने और फेफड़े के मध्य तरल भर जाना
  • लिवर सिरिसिस से जुड़े अन्य जोखिम

जलोदर का आयुर्वेदिक उपचार करने के लिए किन चीजों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है?

लेख में हमने जलोदर के कई घरेलू उपचार बताए हैं, जिन्हें जलोदर का आयुर्वेदिक उपचार करने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है। हालांकि, इन उपायों से जलोदर से बचाव या उसके लक्षण से आराम मिल सकता है, इसे जलोदर का इलाज न समझें। अगर किसी को जलोदर की गंभीर समस्या है, तो डॉक्टरी इलाज को ही प्राथमिकता दें।

जलोदर का होम्योपैथिक इलाज कितना प्रभावी है?

होम्योपैथी में जलोदर का इलाज करने के लिए कई दवाओं को उपयोग में लाया जाता है (34)। हालांकि जलोदर का होम्योपैथिक इलाज कितना प्रभावी है, इस संबंध में स्पष्ट प्रमाण की कमी है। इस संबंध में अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

और पढ़े:

Sources

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  2. Peritoneal fluid analysis
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    अंकित रस्तोगी ने साल 2013 में हिसार यूनिवर्सिटी, हरियाणा से एमए मास कॉम की डिग्री हासिल की है। वहीं, इन्होंने अपने स्नातक के पहले वर्ष में कदम रखते ही टीवी और प्रिंट मीडिया का अनुभव लेना शुरू कर दिया था। वहीं, प्रोफेसनल तौर पर इन्हें इस फील्ड में करीब 6 सालों का अनुभव है। प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में इन्होंने संपादन का काम किया है। कई डिजिटल वेबसाइट पर इनके राजनीतिक, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से संबंधित कई लेख प्रकाशित हुए हैं। इनकी मुख्य रुचि फीचर लेखन में है। इन्हें गीत सुनने और गाने के साथ-साथ कई तरह के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने का शौक भी हैं।

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