कासनी के फायदे, उपयोग और नुकसान – Chicory Benefits and Side Effects in Hindi

Medically reviewed by Neha Srivastava (Nutritionist), Nutritionist
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सदियों से शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए विभिन्न जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में इनकी अहम भूमिका होती है। इसी क्रम में हम आपको ऐसी ही एक जड़ी-बूटी ‘कासनी’ के बारे में बताने जा रहे हैं। माना जाता है कि सामान्य-सा दिखने वाला कासनी का पौधा विभिन्न बीमारियों से बचाव का काम कर सकता है। वहीं, बीमारी की अवस्था में उससे उबरने में मदद कर सकता है और मेडिकल ट्रीटमेंट व दवा के प्रभाव को बढ़ा सकता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में जानते हैं कि कासनी क्या है और कासनी के फायदे क्या-क्या हो सकते हैं। इसके अलावा, आपको इससे होने वाले नुकसानों से भी अवगत कराया जाएगा।

चलिए, लेख की शुरुआत कासनी के परिचय के साथ करते हैं।

कासनी क्या है? – What is Chicory in Hindi

कासनी एक खास प्रकार की जड़ी-बूटी है, जिसमें कई औषधीय गुण होते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम सिकोरियम इंटीबस (Cichorium Intybus) है और यह डैंडेलियन परिवार से संबंध रखती है। इसका फूल सफेद-नीले रंग का होता है। कासनी (चिकोरी) के पौधे लगभग एक से दो मीटर तक ऊंचे होते हैं। नीचे जानिए कि शरीर के लिए यह औषधीय जड़ी-बूटी किस प्रकार लाभदायक हो सकती है।

उससे पहले जानते हैं कि कासनी सेहत के लिए क्यों अच्छी है।

कासनी आपकी सेहत के लिए क्यों अच्छी होती है?

स्वास्थ्य के लिए कासनी को वरदान माना जा सकता है, कारण है इसमें मौजूद विभिन्न औषधीय गुण। माना जाता है कि यह कई शारीरिक समस्याओं पर प्रभावी असर दिखा सकती है, जिसमें हृदय रोग, कैंसर, गठिया, कब्ज और लीवर-किडनी से जुड़ी समस्या शामिल हैं। इनके अलावा भी यह कई तरह से शरीर को फायदा पहुंचाने का काम कर सकती है, जिसकी जानकारी नीचे दी जाएगी (1)।

आगे कासनी से होने वाले फायदे के बारे में जानेंगे।

कासनी के फायदे – Benefits of Chicory in Hindi

कासनी आपकी सेहत को कई लाभ पहुंचाने का काम कर सकता है, जिसके बारे हम नीचे बता रहे हैं।

1. तनाव और चिंता से राहत

तनाव और चिंता में कासनी का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के अनुसार, एंटीऑक्सीडेंट गुण मानसिक विकारों से निजात दिलाने में मदद कर सकता है, जिसमें चिंता, तनाव और डिप्रेशन शामिल हैं (2)। एनसीबीआई में प्रकाशित दूसरे शोध के अनुसार, कासनी में एंटीऑक्सीडेंट की अच्छी मात्रा पाई जाती है (3)। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि कासनी के फायदे तनाव और चिंता से राहत दिलाने का काम कर सकते हैं।

2. पाचन में फायदेमंद

पाचन तंत्र संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में कासनी की अहम भूमिका हो सकती है। चिकोरी में इनुलिन (Inulin -डाइटरी फाइबर) की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो एसिड रिफ्लक्स (पाचन संबंधी रोग) के साथ-साथ आंतों और पाचन संबंधी कई समस्याओं से निपटने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह अपच और हार्टबर्न से भी राहत दिला सकता है (1)।

3. हृदय स्वास्थ्य के लिए

हृदय स्वास्थ्य के लिए भी कासनी को उपयोगी माना जा सकता है। यह एंटीऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध होती है और इससे बनने वाली कॉफी का सेवन शरीर में रक्त और प्लाज्मा के संतुलन में सुधार करने का काम कर सकता है, जिससे हृदय रोग का खतरा बहुत हद तक कम हो सकता है। इसके अलावा, इसमें इनुलिन भी पाया जाता है, जो शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने का काम कर सकता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की आशंका कम हो जाती है (1)। वहीं, अगर किसी को दिल से जुड़ी कोई बीमारी है, तो वह डॉक्टर से चेकअप जरूर करवाए और डॉक्टर के निर्देश पर इस घरेलू नुस्खे के साथ-साथ दवा भी ले।

4. लीवर स्वास्थ्य के लिए

लीवर को स्वस्थ रखने में भी कासनी मुख्य भूमिका निभा सकती है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के अनुसार, कासनी में हिपेटोप्रोटेक्टीव (Hepatoprotective) गुण पाए जाते हैं, जो लीवर को सुरक्षित रखने का काम कर सकते हैं (4)।

5. गठिया के लिए

कासनी चूर्ण को गठिया के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो ऑस्टियोअर्थराइटिस के दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, कासनी मांसपेशियों में दर्द और जोड़ों के दर्द से भी कुछ राहत दिला सकती है (1)।

6. वजन घटाने में मददगार

कासनी के फायदे शरीर के वजन को कम करने के लिए भी देखे जा सकते हैं। कासनी में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है। फाइबर शरीर में ऊर्जा को बनाए रखने के साथ-साथ लंबे समय तक भूख को नियंत्रित रखने का काम कर सकता है। साथ ही अतिरिक्त खाने की आदत पर रोक लग सकती है, फलस्वरूप वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है (1)।

7. कैंसर के लिए

कासनी ब्रेस्ट और कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव का काम भी कर सकती है। साथ ही कैंसर के लक्षणों पर भी प्रभावी असर दिखा सकती है। इसके लिए चिकोरी में पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल्स और फोटोकैमिकल्स गुण सहायक हो सकते हैं। साथ ही इसकी जड़ में भी एंटी-कैंसर गुण पाए जाते हैं (1)। अगर कोई कैंसर से पीड़ित हो, तो उसे सिर्फ घरेलू नुस्खें पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उसे समय रहते उचित मेडिकल ट्रीटमेंट भी करवाना चाहिए।

8. कब्ज से छुटकारा

अगर कोई कब्ज की समस्या से जूझ रहा है, तो उनके लिए कासनी किसी चमत्कार से कम नहीं है। कासनी में इनुलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो फाइबर की तरह काम करता है। फाइबर पाचन में सुधार करने के साथ-साथ बाउल सिस्टम को बेहरत करने में मदद कर सकता है, जिससे कब्ज की समस्या से निजात पाया जा सकता है (1)।

9. किडनी की समस्या से राहत

कासनी की जड़ के अर्क को मूत्रवर्धक (Diuretic) की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पेशाब की मात्रा बढ़ सकती है। पेशाब के जरिए किडनी में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर हो सकते हैं, जिसका सकारात्मक प्रभाव किडनी स्वास्थ्य पर पड़ सकता है (1)। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि कासनी के फायदे किडनी के लिए भी हो सकते हैं।

10. एक्जिमा और कैंडिडा

एक्जिमा त्वचा में सूजन से जुड़ी समस्या है और कैंडिडा त्वचा संबंधी फंगल संक्रमण है (5), (6)। इन दोनों स्थितियों में कासनी के फायदे देखे जा सकते हैं, क्योंकि कासनी एंटी इंफ्लेमेटरी गुण के साथ-साथ एंटी फंगल गुणों से समृद्ध होती है (3)।

लेख में आगे हम कासनी में मौजूद पौष्टिक तत्व के बारे में बता रहे हैं।

कासनी के पौष्टिक तत्व – Chicory Nutritional Value in Hindi

कासनी के पौधे में कई पोषक तत्व से पाए जाते हैं, जिन्हें हम एक चार्ट के माध्यम से जानेंगे (7)

पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 g
पानी92 g
ऊर्जा23 kcal
प्रोटीन1.7 g
टोटल लिपिड (फैट)0.3 g
कार्बोहाइड्रेट4.7 g
फाइबर4 g
शुगर, टोटल0.7 g
मिनरल
कैल्शियम ,Ca100 gm
आयरन ,Fe0.9 mg
मैग्नीशियम , Mg30 mg
फास्फोरस ,P47 mg
पोटैशियम ,K420 mg
सोडियम ,Na45 mg
जिंक ,Zn0.42 mg
विटामिन
विटामिन सी , टोटल एस्कॉर्बिक एसिड24 mg
थियामिन0.06 mg
राइबोफ्लेविन0.1 mg
नियासिन0.5 mg
विटामिन बी -60.105 mg
फोलेट, DFE110 µg
विटामिन ए, RAE286 µg
विटामिन ई (अल्फा-टोकोफेरॉल)2.26 mg
लिपिड
फैटी एसिड, टोटल सैचुरेटेड0.073 g
फैटी एसिड, टोटल मोनोअनसैचुरेटेड0.006 g
फैटी एसिड, टोटल पॉलीअनसैचुरेटेड0.131 g

लेख के अगले भाग में कासनी खाने के तरीके के बारे में बताया गया है।

कासनी खाने के तरीके – How to Eat Chicory in Hindi

कासनी को डाइट में कई तरह से शामिल किया जा सकता है। इनमें से कुछ आम तरीकों के बारे में हम नीचे बता रहे हैं-

कैसे खाएं :
  • कासनी को चाय या कॉफी की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि इसका स्वाद कॉफी जैसा ही होता है। हालांकि यह कैफीन फ्री होता है।
  • कासनी के ताजे पत्ते को सलाद की तरह आहार में शामिल किया जा सकता है।
  • कासनी की पत्तियों को सब्जी बनाकर खा सकते हैं।
  • कासनी चूर्ण को पानी, दूध या शहद के साथ मिलाकर सेवन कर सकते हैं।
कब खाएं :
  • इससे बने पेय पदार्थ को सुबह या शाम किसी भी समय लिया जा सकता है।
  • इसकी पत्तियों की सब्जी या सलाद को दोपहर या रात के खाने के साथ ले सकते हैं।
कितना खाएं :
  • फिलहाल, यह बताना मुश्किल है कि प्रतिदिन इसकी कितनी मात्रा पर्याप्त होती है, क्योंकि इस संबंध में अभी कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए, इसकी उचित मात्रा जानने के लिए आप आहार विशेषज्ञ से संपर्क करें। वह आपके स्वास्थ्य के अनुसार इसकी प्रतिदिन की खुराक के बारे में बताएंगे।

आगे कासनी से होने वाले कुछ दुष्प्रभावों के बारे में बताया जा रहा है।

कासनी के नुकसान – Side Effects of Chicory in Hindi

कासनी के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। नीचे जानिए इससे होने वाले नुकसानों के बारे में।

  • जिन लोगों को एलर्जी की अधिक शिकायत होती है, उन्हें कासनी के सेवन से एलर्जी हो सकती है (8)।
  • कासनी का अधिक मात्रा में सेवन करने से डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में बाधा उत्पन्न हो सकती है (2)।
  • गर्भावस्था के दौरान व स्तनपानी कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन न करने की सलाह दी जाती है।

अब आप यह तो समझ ही गए होंगे कि कासनी क्या है। साथ ही कासनी किस तरह विभिन्न शारीरिक समस्याओं पर प्रभावी असर दिखा सकती है। इसके अलावा, कासनी से होने वाले नुकसानों के बारे में भी आपको बताया गया है, ताकि पहले से ही सजगता बरती जा सके। एक बार फिर से बता दें कि कासनी किसी भी समस्या का इलाज नहीं है, लेकिन यह समस्या को कम करने में सहायक भूमिका जरूर निभा सकती है। साथ ही किसी भी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टरी उपचार को नजरअंदाज न करें।

Sources

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भूपेंद्र वर्मा ने सेंट थॉमस कॉलेज से बीजेएमसी और एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी किया है। भूपेंद्र को लेखक के तौर पर फ्रीलांसिंग में काम करते 2 साल हो गए हैं। इनकी लिखी हुई कविताएं, गाने और रैप हर किसी को पसंद आते हैं। यह अपने लेखन और रैप करने के अनोखे स्टाइल की वजह से जाने जाते हैं। इन्होंने कुछ डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्टोरी और डायलॉग्स भी लिखे हैं। इन्हें संगीत सुनना, फिल्में देखना और घूमना पसंद है।

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