कच्ची हल्दी के 16 फायदे – 16 Health Benefits of Raw Turmeric in Hindi

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आपने हल्दी चूर्ण के गुणों के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन क्या आपको मालूम है कि हल्दी चूर्ण के जैसे ही कच्ची हल्दी के भी कई फायदे हैं। जी हां, शरीर से जुड़ी कई समस्याओं में इसे बतौर घरेलू उपाय इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जुड़े कई वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके औषधीय गुणों के बारे में पता चलता है। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम कच्ची हल्दी के फायदे बताने जा रहे हैं। इसके अलावा, इस लेख में कच्ची हल्दी के उपयोग और कच्ची हल्दी के नुकसान से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई है। कच्ची हल्दी के फायदे विस्तार से जानने के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

पढ़ें विस्तार से

आर्टिकल की शुरुआत करते हैं सेहत के लिए कच्चा हल्दी के फायदे के साथ।

कच्ची हल्दी के 16 फायदे – 16 Health Benefits of Raw Turmeric in Hindi

यहां हम विस्तार से बता रहे हैं कि सेहत के लिए कच्ची हल्दी के फायदे किस प्रकार काम कर सकते हैं। वहीं, इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि कच्ची हल्दी किसी भी तरीके से लेख में शामिल बीमारियों का डॉक्टरी इलाज नहीं है। यह केवल समस्या से बचाव और उसके प्रभाव को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकती है। अब जानिए आगे –

1. इम्यून सिस्टम बूस्ट करने के लिए

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए कच्ची हल्दी का उपयोग किया जा सकता है। शोध में पाया गया कि कच्ची हल्दी में करक्यूमिन नामक कंपाउंड पाया जाता है (1)। करक्यूमिन में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण यानी कि इम्यून सिस्टम को सुधारने और नियंत्रित करने वाले गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा, इसके अन्य बायोएक्टिव घटक भी प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधारने में फायदेमंद हो सकते हैं (2)।

2. ब्लड प्यूरीफाई के लिए

कच्ची हल्दी का उपयोग रक्त को साफ करने के लिए भी किया जा सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि इसमें ब्लड प्यूरीफायर यानी रक्त को साफ करने के गुण पाए जाते हैं। ऐसे में हम कह सकते हैं कि रक्त को प्यूरीफाई करने के लिए कच्ची हल्दी का प्रयोग किया जा सकता है (3)। फिलहाल, इसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।    

3. मधुमेह को नियंत्रित करने में मददगार

कच्ची हल्दी मधुमेह को नियंत्रित करने में मददगार हो सकती है। चूहाें पर किए गए एक शोध में पाया गया कि कच्ची हल्दी के अर्क में करक्यूमिन, डेमथॉक्सीकरक्यूमिन, बिसडेमेथॉक्सीकरक्यूमिन और अर-टरमेरॉन जैसे घटक पाए जाते हैं। ये घटक हाइपोग्लाइसेमिक (ब्लड शुगर कम करने वाला) प्रभाव प्रदर्शित कर सकते हैं, जिससे रक्त में मौजूद ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है (4)।

4. एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर

कच्ची हल्दी का उपयोग बैक्टेरिया के कारण होने वाली समस्या और संक्रमण से बचने के लिए भी किया जा सकता है। इस विषय से जुड़े एक शोध के अनुसार कच्ची हल्दी के अर्क में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाया जाता है। कच्ची हल्दी के अर्क में पाया जाने वाला यह गुण बैक्टीरिया से लड़ने और उसके प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है (5)। एंटीबैक्टीरियल गुणों के साथ ही हल्दी में पाए जाने वाले करक्यूमिन में एंटीसेप्टिक गुण भी पाए जाते हैं (6)। एंटीसेप्टिक गुण त्वचा पर किसी भी प्रकार के घाव को सूक्ष्मजीवों से बचाने में मदद कर सकता है।

5. एंटी इंफ्लेमेटरी गुण

सूजन के कारण कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। इनमें अल्जाइमर, अर्थराइटिस और अस्थमा जैसी समस्याएं शामिल हैं (7)। यहां कच्ची हल्दी के फायदे देखे जा सकते हैं। दरअसल, एक शोध में पाया गया कि कच्ची हल्दी में पाए जाने वाले करक्यूमिन में एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। करक्यूमिन में पाए जाने वाले एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण सूजन की समस्या को कम इससे होने वाली समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं (8)।

6. कैंसर से बचाव में कच्ची हल्दी के लाभ

कच्ची हल्दी का उपयोग कैंसर से बचाव में भी मददगार हो सकता है। इस विषय से जुड़े एक अध्ययन से पता चलता है कि कच्ची हल्दी में मौजूद करक्यूमिन नामक यौगिक में एंटी-कैंसर गुण पाया जाता है। यह गुण कई तरह के कैंसर, जैसे प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर, पेट के कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है (9)। वहीं, पाठक इस बात का ध्यान रखें कि कच्ची हल्दी कैंसर से बचाव में सहायक हो सकती है, लेकिन यह कैंसर का इलाज नहीं है। इसके लिए डॉक्टरी उपचार करवाना बहुत जरूरी है।

7. बढ़ते वजन के लिए कच्ची हल्दी

कच्ची हल्दी का उपयोग मेटाबोलिक सिंड्रोम और मोटापा की समस्या को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। दरअसल, मेटाबोलिक सिंड्रोम (हृदय रोग, स्ट्रोक और मधुमेह जैसी समस्याओं के जोखिम कारकों का एक समूह, जिसमें मोटापा भी शामिल है) से पीड़ित कुछ लोगों पर किए गए एक शोध में करक्यूमिन का सेवन कमर की चौड़ाई, वजन और बॉडी मास इंडेक्स को कम करने में कारगर पाया गया है (10)। ऐसे में, हम यह कह सकते हैं कि कच्ची हल्दी बढ़ते वजन को नियंत्रित करने में मददगार हो सकती है।

8. गठिया में कच्ची हल्दी के लाभ

गठिया की समस्या होने पर जोड़ों में दर्द और सूजन की शिकायत हो सकती है। इस समस्या में कच्ची हल्दी फायदेमंद हो सकती है। इस विषय से जुड़े एक शोध से पता चलता है कि हल्दी का तेल एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-आर्थरीटिक प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है, जिससे आर्थराइटिस की समस्या में कुछ हद तक राहत मिल सकती है (11)।

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9. पाचन के लिए कच्चा हल्दी के फायदे

कच्ची हल्दी का उपयोग पाचन की समस्या को दूर करने के लिए भी किया जा सकता है। इससे जुड़े शोध में पाया गया कि कच्ची हल्दी में पाया जाने वाला बायोएक्टिव कंपाउंड करक्यूमिन पाचन से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद हो सकता है। इसमें अपच और दस्त में सुधार करना शामिल है। इन लाभ के पीछे करक्यूमिन के एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों का प्रभाव हो सकता है (12)।  

10. लिवर की समस्या में

हल्दी का उपयोग लिवर के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। इससे जुड़े एक शोध के अनुसार, हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन लिवर की समस्याओं पर प्रभावी रूप से काम कर सकता है। इसमें हेपेटोटॉक्सिसिटी (लिवर से जुड़ी विषाक्तता), नॉन अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (एक प्रकार का फैटी लिवर डिजीज) और सिरोसिस (लिवर में गंभीर घाव) के साथ-साथ लिवर इंजरी शामिल हैं (13)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि लिवर को स्वस्थ रखने में कच्ची हल्दी एक अहम भूमिका निभा सकती है।

11. न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग में कच्चा हल्दी के फायदा

न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग यानी मस्तिष्क के न्यूरॉन्स से जुड़े विकार या समस्या। इसमें अल्जाइमर की समस्या (भूलने की बीमारी) का नाम भी शामिल है। यहां कच्ची हल्दी में मौजूद करक्यूमिन की अहम भूमिका देखी जा सकती है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में पता चलता है कि करक्यूमिन में एंटीइंफ्लेमेटरी (सूजन को कम करने वाला) और एंटीऑक्सीडेंट (फ्री रेडिकल्स को दूर रखने वाला) प्रभाव पाए जाते हैं, जो अल्जाइमर के मरीजों में मानसिक क्षमता को सुधारने का काम कर सकते हैं (14)। ऐसे में हम कह सकते हैं कि कच्ची हल्दी का उपयोग न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

12. अल्सर को कम करने में

अल्सर की समस्या में कच्चा हल्दी का गुण काम कर सकता है। दरअसल, कच्ची हल्दी के करक्यूमिन में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। ये दोनों गुण अल्सर की समस्या को कम करने में फायदेमंद हो सकते हैं (15)। इसलिए, पेट और पाचन को सही रखने के लिए कच्ची हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।

13. गले की खराश के लिए

गले में खराश की समस्या को दूर करने में भी कच्ची हल्दी का उपयोग किया जा सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि गर्म दूध के साथ हल्दी का उपयोग गले में खराश के साथ सर्दी से आराम देने में मदद कर सकता है (16)। फिलहाल, इसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।   

14. सर्दी और खांसी में

खांसी के साथ अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सर्दी को श्वसन तंत्र से जुड़े विकारों में गिना जाता है। वहीं, इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि कच्ची हल्दी में मौजूद करक्यूमिन श्वसन तंत्र विकारों को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है (17)। फिलहाल, इसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

15. त्वचा विकारों के लिए

सेहत के साथ ही कच्ची हल्दी के फायदे स्किन के लिए भी देखे जा सकते हैं। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध से पता चलता है कि करक्यूमिन त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं, जो त्वचा से जुड़ी सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, करक्यूमिन त्वचा से जुड़े घाव को जल्द भरने में मदद कर सकता है और कोलेजन में सुधार कर सकता है। वहीं, शोध में यह भी जिक्र मिलता है कि यह त्वचा से जुड़ी बीमारियों के लिए नॉनटॉक्सिक एजेंट के रूप में काम कर सकता है (18)।

16. बालों के लिए

सेहत और त्वचा के साथ ही कच्ची हल्दी बालों के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। दरअसल, एक शोध में जिक्र मिलता है कि हल्दी का इस्तेमाल सफेद बालों की समस्या में किया जा सकता है। वहीं, इसी शोध में जिक्र मिलता है कि यह बालों को हटाने (Hair Remove) का काम भी कर सकती है (19)। ऐसे में हमारी राय यही है कि बालों के लिए इसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टरी राय जरूर लें।

और जाने कुछ खास

चलिए, अब थोड़ा कच्ची हल्दी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों के बारे में भी जान लेते हैं।

कच्ची हल्दी के पौष्टिक तत्व – Raw Turmeric Nutritional Value in Hindi

कच्ची हल्दी में मौजूद पोषक तत्व ही इसे गुणकारी बनाने का काम करते हैं। यहां हम हल्दी चूर्ण के पोषक तत्वों के जरिए कच्ची हल्दी में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में बता रहे हैं (20)। हालांकि, दोनों के पोषक तत्वों की मात्रा में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है।

पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 ग्राम
पानी12.85 ग्राम
कैलोरी312 केसीएएल
प्रोटीन9.68 ग्राम
फैट3.25 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट67.14 ग्राम
फाइबर22.7 ग्राम
शुगर3.21 ग्राम
कैल्शियम168 मिलीग्राम
आयरन55 मिलीग्राम
मैग्नीशियम208 मिलीग्राम
फास्फोरस299 मिलीग्राम
पोटेशियम2080 मिलीग्राम
सोडियम27 मिलीग्राम
जिंक4.5 मिलीग्राम
कॉपर1.3 मिलीग्राम
मैंगनीज19.8 मिलीग्राम
सेलेनियम6.2 माइक्रोग्राम
विटामिन-सी0.7 मिलीग्राम
थियामिन0.058 मिलीग्राम
राइबोफ्लेविन0.15 मिलीग्राम
नियासिन1.35 मिलीग्राम
विटामिन-बी 60.107 मिलीग्राम
फोलेट20 माइक्रोग्राम
विटामिन-ई4.43 माइक्रोग्राम
विटामिन-के13.4 माइक्रोग्राम
फैटी एसिड टोटल सैचुरेटेड1.838 ग्राम
फैटी एसिड टोटल मोनोअनसैचुरेटेड0.449 ग्राम
फैटी एसिड टोटल पॉलीअनसैचुरेटेड0.756 ग्राम

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अब जान लेते हैं कि कच्ची हल्दी का उपयोग कैसे किया जा सकता है?

कच्ची हल्दी का उपयोग – How to Use Raw Turmeric in Hindi

कच्ची हल्दी का उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है। नीचे हम इसके उपयोग के कुछ तरीके बता रहे हैं –

  • कच्ची हल्दी का अचार बनाकर इसका सेवन किया जा सकता है।
  • डॉक्टरी परामर्श पर कच्ची हल्दी का तेल इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
  • कच्ची हल्दी को धोकर इसे ग्रीन सलाद में मिलाकर भी खाया जा सकता है।
  • कच्ची हल्दी को उबालकर इसका सेवन किया जा सकता है।
  • कच्ची हल्दी की चाय का सेवन किया जा सकता है।
  • इसका उपयोग फेसपैक के रूप में भी किया जा सकता है।

मात्रा : हल्दी का सेवन पूरे दिन में 12 ग्राम तक किया जा सकता है (17)। हालांकि, इसके सेवन की सही मात्रा व्यक्ति की उम्र और उसके स्वास्थ्य के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में इससे जुड़ी जानकारी संबंधित डॉक्टर से जरूर लें।

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चलिए, अब नजर डाल लेते हैं कच्ची हल्दी के नुकसान पर।

कच्ची हल्दी के नुकसान – Side Effects of Raw Turmeric in Hindi

कुछ मामलों में कच्ची हल्दी नुकसान का कारण भी बन सकती है। नीचे हम कच्ची हल्दी के नुकसान बता रहे हैं –

  •  कच्ची हल्दी में ऑक्सालेट (Oxalate) नामक यौगिक होता है। इस कारण इसका अत्यधिक सेवन किडनी स्टोन की समस्या का कारण बन सकता है (21)।
  • हल्दी का सेवन गर्भावस्था के दौरान नुकसान का कारण बन सकता है (22)। ऐसे में इस दौरान कच्ची हल्दी के सेवन से परहेज करें। हालांकि, यह किस प्रकार के नुकसान पैदा कर सकती है, इससे जुड़े वैज्ञानिक शोध का अभाव है।
  • संवेदनशील त्वचा वालों को कच्ची हल्दी से एलर्जी की समस्या भी हो सकती है।
  • वहीं, कच्ची हल्दी में मौजूद करक्यूमिन की अधिक मात्रा हेयर लॉस, गले से जुड़े संक्रमण, दिल की धड़कन तेज होना, हल्के बुखार व पेट से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकती है (23)।

दोस्तों, कच्ची हल्दी का उपयोग अगर ठीक प्रकार किया जाए, तो यह लेख में बताए गए स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकती है। वहीं, इसका सेवन अगर अधिक मात्रा में किया जाए, तो बताए गए कच्ची हल्दी के नुकसान सामने आ सकते हैं। ऐसे में, जरूरी है कि आप लेख में दिए गए इसके फायदों और नुकसानों को अच्छी तरह समझ लें और फिर इसे इस्तेमाल में लाएं। वहीं, अगर आप किसी गंभीर समस्या से ग्रस्त हैं, तो इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टरी परामर्श जरूर लें। उम्मीद है कि यह लेख स्वास्थ्य की दृष्टि से आपके लिए लाभकारी रहा होगा। आगे जानिए इससे जुड़े कुछ सवालों के जवाब।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कच्ची हल्दी सूखी हल्दी से अधिक स्वास्थ्यवर्धक है?

जो गुण कच्ची हल्दी में होते हैं, लगभग वही गुण सूखी हल्दी में भी पाए जाते हैं। इसलिए, दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।

क्या कच्ची हल्दी जहरीली है?

कच्ची हल्दी के जहरीले होने से जुड़ा कोई वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इसकी अधिक मात्रा लेख में बताए गए कच्ची हल्दी के नुकसान का कारण बन सकती है।

कच्ची हल्दी खाने से क्या होता है?

कच्ची हल्दी सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद हो सकती है, जिसके बारे में हम आपको ऊपर बता चुके हैं।

एक दिन में कितनी कच्ची हल्दी ले सकते हैं?

एक दिन में कच्ची हल्दी की 12 ग्राम मात्रा का सेवन किया जा सकता है (17)। वहीं, थोड़ी मात्रा में कच्चा हल्दी का अचार भी खाया जा सकता है। अच्छा होगा कि इसके सेवन की सही मात्रा से जुड़ी जानकारी डॉक्टर से ली जाए।

क्या हर दिन हल्दी लेना सुरक्षित है?

हां, सीमित मात्रा में हल्दी सेहत के लिए सुरक्षित हो सकती है।

23 संदर्भ (Sources)

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Saral Jain

सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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