काली खांसी (कुकर खांसी) के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Whooping Cough (Pertussis) Home Remedies in Hindi

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बदलते मौसम और हल्की सर्दी होने पर जुकाम के साथ खांसी आना आम है, लेकिन कई बार खांसी लगातार होती रहती है और लंबे समय तक रहती है। अगर खांसते समय आपको सांस लेने में तकलीफ हो और साथ में अजीब-सी आवाज आने लगे, तो ये काली खांसी के लक्षण हो सकते हैं। यह एक गंभीर समस्या है, जिसके कई गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको काली खांसी से जुड़े सभी तथ्यों से अवगत कराएंगे और कुकर खांसी का इलाज के बारे में भी आपको जानकारी देंगे।

पढ़ें विस्तार से

आइए, पहले जान लेते हैं कि आखिर काली खांसी क्या है?

काली खांसी क्या है? – What is Whooping Cough in Hindi

काली खांसी बोर्डेटेला पर्टुसिस (Bordetella pertussis) नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक श्वसन तंत्र से जुड़ा संक्रमण है। इस संक्रमण के कारण अनियंत्रित खांसी और सांस लेने में तकलीफ होती है। अंग्रेजी में काली खांसी को पर्टुसिस और वूपिंग कफ के नाम से जाना जाता है। यूं तो काली खांसी का संक्रमण किसी को भी हो सकता है, लेकिन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित नवजात और बच्चे होते हैं। खांसने की वजह से शिशुओं के लिए खाना, पीना और यहां तक कि सांस लेना भी कई बार मुश्किल हो जाता है (1)।

चलिए, अब जानते हैं कि काली खांसी (कुकर खांसी) के कितने चरण होते हैं (2) (3) :

पहला चरण – यह स्टेज एक से दो सप्ताह तक रह सकता है। इसे कैटर्रल (Catarrhal) भी कहा जाता है। इस दौरान नाक बहती रहती है, छीकें आती हैं, कम-ग्रेड का बुखार और कभी-कभी खांसी आती है। यह पहले चरण में आम सर्दी की तरह लगती है, लेकिन बाद में खांसी ज्यादा होने लगती है।

दूसरा चरण – इसे पेरोक्सिमल (Paroxysmal) कहा जाता है। इस स्टेज में खांसी अधिक होती है। खांसते वक्त काफी ज्यादा आवाज होने लगती है। इस दौरान उल्टी भी हो सकती है और पीड़ित शरीर में थकावट महसूस कर सकता है।

तीसरा चरण – यह स्टेज सात से बीस दिन तक रह सकता है। इसे कान्वलेसन्ट (Convalescent) यानी रिकवरी चरण कहा जाता है। इस दौरान उपचार की मदद से बीमारी धीरे-धीरे बेहतर होती है।

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काली खांसी क्या है, जानने के बाद आगे बात करेंगे काली खांसी के कारण बारे में। 

काली खांसी होने का कारण – Causes of Whooping cough (Pertussis) in Hindi

काली खांसी (कुकर खांसी) एक संक्रामक रोग है, जो बोर्डेटेला पर्टुसिस (Bordetella pertussis) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया सांस से संबंधित बीमारी के दौरान शरीर में जहर छोड़ता है। इससे सिलिया (अपर रेस्पिरेटरी सिस्टम का एक हिस्सा) को नुकसान पहुंचता है और नाक की नली में सूजन पैदा होती है (1) (4)। 

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काली खांसी का कारण जानने के बाद जानते हैं काली खांसी के लक्षण के बारे में। 

काली खांसी (कुकर खांसी) के लक्षण – Symptoms of Whooping cough in Hindi

काली खांसी अक्सर ठंड जैसे लक्षणों के साथ शुरू होती है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि काली खांसी के लक्षण क्या हैं (1) (5) (6)।

  • बहती नाक
  • दर्द के साथ पानी से भरी लाल आंखें
  • हल्का बुखार
  • खांसी
  • खांसते वक्त आवाज आना
  • सामान्य अस्वस्थता
  • एपनिया – सांस लेने के दौरान ठहराव आना (शिशुओं में)
  • खांसी के दौरान या बाद में उल्टी
  • थकावट का एहसास
  • दस्त

यहां इस बारे में जानना भी जरूरी है कि कुछ शिशु पर्टुसिस (काली खांसी) के दौरान बिल्कुल भी नहीं खांसते हैं। इसके बजाय शिशुओं को सांस लेने में तकलीफ होती है और उनका रंग नीला पड़ने लगता है।

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काली खांसी के लक्षण जानने के बाद बारी है कुकर खांसी के घरेलू इलाज जानने की। 

काली खांसी कम करने के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Whooping cough in Hindi

कुकर खांसी को घर में रहकर भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, घर में किया जाने वाला उपाय इसका सटीक इलाज नहीं है। इसके पूर्ण इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।  काली खांसी का घरेलू इलाज इससे कुछ हद तक आराम देने में मदद कर सकता है। अब पढ़ें आगे –

1. लहसुन 

सामग्री :

  • लहसुन की 3 से 4 कलियां
  • शहद (वैकल्पिक)

उपयोग का तरीका :

  • लहसुन की कलियों को कूचल कर रस निकाल लें।
  • इसके बाद लहसुन से निकलने वाले रस का सेवन करें।
  • स्वाद के लिए इसमें शहद भी मिला सकते हैं।

कैसे लाभदायक है :

लहसुन का उपयोग न सिर्फ घरेलू मसाले के रूप में बल्कि अच्छी सेहत के लिए भी किया जा सकता है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक लहसुन का उपयोग काली खांसी के साथ फेफड़े से जुड़े विकारों के लिए किया जा सकता है। वहीं, इसी शोध में जिक्र मिलता है कि लहसुन में प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने वाले और संक्रमण से बचाने वाले एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। लहसुन के इन्हीं गुण के कारण काली खांसी के बैक्टीरिया के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया जा सकता है (7)।

2. अदरक

सामग्री :

  • अदरक के एक-दो छोटे टुकड़े
  • स्वादानुसार शहद (वैकल्पिक)

उपयोग का तरीका :

  • अदरक का पेस्ट बना लें।
  • पेस्ट से अदरक का रस निकालें और इसका रोजाना सेवन करें।
  • स्वाद के लिए इसमें आधा चम्मच शहद मिला सकते हैं।

कैसे लाभदायक है :

अदरक का उपयोग स्वाद के साथ ही सेहत के लिए भी किया जा जाता है। इससे जुड़े एक शोध में पाया गया कि अदरक ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया (Gram-negative bacteria) के खिलाफ एंटीबैक्टीरियल प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है। वहीं, काली खांसी का बैक्टीरिया भी एक ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया ही है, इसलिए माना जा सकता है कि अदरक काली खांसी के बैक्टीरिया से लड़ने का काम कर सकता है। घर में ही कुकर खांसी का इलाज  करने के लिए अदरक को बताए गए तरीके से इस्तेमाल में ला सकते हैं (8)। 

3. हल्दी 

सामग्री :

  • 1 चम्मच हल्दी
  • 1 गिलास गर्म दूध

उपयोग का तरीका :

  • एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी डालें।
  • चम्मच की मदद से हल्दी को दूध में अच्छी तरह मिलाएं।
  • इसका एक हफ्ते तक या खांसी ठीक होने तक रोजाना सेवन कर सकते हैं।

कैसे लाभदायक है :

काली खांसी से आराम पाने के लिए हल्दी का उपयोग किया जा सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि हल्दी सामान्य खांसी से लेकर सूखी खांसी में थेराप्यूटिक (Therapeutic) प्रभाव दिखा सकती है (9)। वहीं, एक अन्य शोध में जिक्र मिलता है कि कच्ची हल्दी का उपयोग काली खांसी के साथ ही अन्य खांसी और डिस्पेनिया (सांस लेने में कठिनाई) में फायदेमंद हो सकता है (10)। 

4. तुलसी के पत्ते 

सामग्री :

  • तुलसी के कुछ पत्ते
  • काली मिर्च के कुछ दाने
  • शहद की कुछ बूंदें

उपयोग का तरीका :

  • तुलसी और काली मिर्च की बराबर मात्रा को एक साथ पीस लें।
  • अब इस पेस्ट में थोड़ा शहद मिला लें।
  • अब इसकी छोटी-छोटी गोलियां बनाएं।
  • दिन में चार बार इस गोली का सेवन करें।

कैसे लाभदायक है :

तुलसी का उपयोग काली खांसी के दौरान लाभदायक साबित हो सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध के अनुसार, तुलसी का उपयोग खांसी के लिए किया जा सकता है। साथ ही शोध में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि कई आयुर्वेदिक कफ सिरप में इसे बतौर मुख्य सामग्री प्रयोग किया जाता है। वहीं, काली खांसी के दौरान इसका उपयोग एंटीस्पास्मोडिक (मांसपेशियों में ऐंठन से राहत पाने के लिए) के रूप में भी किया जा सकता है (11)। इसके अलावा, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि तुलसी में एंटीमाइक्रोबियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी (इम्यून सिस्टम को रेगुलेट करने वाला) गुण भी मौजूद होता है (12)। ऐसे में हम कह सकते हैं कि तुलसी का उपयोग काली खांसी के बैक्टीरिया से लड़ने और इससे राहत पाने के लिए किया जा सकता है।

5. अजवाइन 

सामग्री :

  • एक गिलास पानी
  • 50 ग्राम अजवाइन
  • अजवाइन के तेल की 4 से 5 बूंदें (वैकल्पिक)

उपयोग का तरीका :

  • पानी में अजवाइन डालें।
  • इसके बाद अच्छे से उबाल लें।
  • अजवाइन से निकले पीले पानी को पी लें।

वैकल्पिक तरीके :

  • अजवाइन के तेल की कुछ बूंदों को अपनी छाती और पीठ पर रगड़ें।
  • गर्म पानी में अजवाइन के तेल को डालकर इसकी भाप भी ले सकते हैं।

कैसे लाभदायक है :

अजवाइन के फायदे काली खांसी का घरेलू इलाज करने में भी लाभदायक हाे सकते हैं। इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि यह सामान्य कफ से लेकर काली खांसी में राहत पहुंचाने का काम कर सकता है। वहीं, अजवाइन में एंटी बैक्टीरियल गुण भी मौजूद होता है। ऐसे में यह काली खांसी के बैक्टीरिया से लड़ने का काम भी कर सकता है (13)।

6. बादाम 

सामग्री :

  • 6 से 7 बादाम
  • 1/2 चम्मच मक्खन

उपयोग का तरीका :

  • बादाम को रात भर के लिए पानी में भिगोकर रख दें।
  • अगली सुबह बादाम को पानी से निकालकर मक्खन के साथ ग्राइड कर लें।
  • अब इस मिश्रण का सेवन करें। इस उपाय को खांसी ठीक होने तक रोजाना किया जा सकता है।

कैसे लाभदायक है :

बादाम के छिलके में मौजूद पॉलीफेनोल्स एंटीमाइक्रोबियल गुणों के लिए जाने जाते हैं। यह गुण काली खांसी के कारण बनने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक हो सकता है (14)। इसके अलावा, एक और शोध में पाया गया कि बादाम का उपयोग पुरानी खांसी और निमोनिया में किया जा सकता है। वहीं, इसमें पाया जाने वाला सूदिंग गुण यानी की आराम पहुंचाने वाला गुण सूखी खांसी में भी फायदेमंद हो सकता है (15)।

7. नींबू 

सामग्री :

  • आधा नींबू
  • 1 गिलास पानी
  • शहद (वैकल्पिक)

उपयोग का तरीका :

  • एक गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़ें।
  • इसे अच्छे से घोलकर पी लें।
  • स्वाद के लिए आधा चम्मच शहद भी डाल सकते हैं।

कैसे लाभदायक है :

नींबू के रस का उपयोग काली खांसी के दौरान भी किया जा सकता है। एक शोध के अनुसार, शहद और नींबू का उपयोग खांसी को रोकने के लिए किया जा सकता है (16)। एक अन्य शोध के मुताबिक, नींबू और शहद में एंटी बैक्टीरियल (antibacterial) गुण मौजूद होते हैं, जो रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन पर प्रभावी रूप से काम कर सकते हैं (17)। हालांकि, इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है कि नींबू काली खांसी का घरेलू इलाज में कैसे उपयोगी हो सकता है।

8. ह्यूमिडिफायर 

सामग्री :

  • ह्यूमिडिफायर

उपयोग का तरीका :

  • ह्यूमिडिफायर को कमरे में लगा दें।

कैसे लाभदायक है :

ह्यूमिडिफायर बिजली से चलने वाला उपकरण है, जो कमरे में नमी बनाने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से बहती नाक की परेशानी में राहत मिल सकती है। साथ ही बलगम को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। ह्यूमिडीफाइड की मदद से जुकाम और फ्लू से भी छुटकारा मिल सकता है (18)। एक शोध में थायराइड सर्जरी के बाद ह्यूमिडिफायर का उपयोग कफ और गले में खराश की समस्या को कम करने में मददगार पाया गया है। इससे हम यह मान सकते हैं कि काली खांसी की समस्या में यह कुछ हद तक फायदेमंद हो सकता है (19)। हालांकि, ह्यूमिडिफायर सीधे तौर पर काली खांसी में कितना प्रभावी हो सकता है, इसे लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

9. प्याज 

सामग्री :

  • 1 मध्यम आकार के प्याज का रस या प्याज का टुकड़ा
  • 1/4 कप शहद

उपयोग का तरीका :

  • प्याज को भूनकर शहद के साथ खा सकते हैं।
  • वैकल्पिक रूप से प्याज के रस को शहद में मिलाएं।
  • कुछ घंटों के अंतराल में इस मिश्रण का एक चम्मच सेवन करते रहें।

कैसे लाभदायक है :

पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में प्याज का उपयाेग अस्थमा, ब्रोंकाइटिस के साथ ही काली खांसी के लिए किया जाता रहा है। शोध में पाया गया कि प्याज में एंटीमाइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं (20)। प्याज में पाया जाने वाला यह गुण काली खांसी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, एक अन्य शोध में भी इस बात का जिक्र मिलता है कि प्याज का इस्तेमाल काली खांसी के लिए किया जा सकता है (21)।

10. एसेंशियल ऑयल 

सामग्री :

  • एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें
  • भाप के लिए गर्म पानी

नोट: पुदीना, लेमनग्रास या युकलिप्टुस के एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

उपयोग का तरीका :

  • एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें गर्म पानी में डालें।
  • गर्म पानी से निकलती भाप को लें।
  • इसके अलावा, इन तेलों से पीठ और छाती की हल्की मालिश भी कर सकते हैं।

कैसे लाभदायक है :

काली खांसी को कम करने के लिए एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं। शोध के अनुसार युकलिप्टुस, पुदीना, लेमनग्रास व पामरोजा एसेंशियल ऑयल में एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं (22)।  इसलिए, ऐसा माना जा सकता है कि इन तेलों में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण काली खांसी के बैक्टीरिया से लड़ने में कुछ हद तक मददगार हो सकते हैं। फिलहाल, इसे लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

11. विटामिन-सी 

सामग्री :

  • विटामिन-सी सप्लीमेंट
  • विटामिन-सी से भरपूर आहार

उपयोग का तरीका :

  • विटामिन-सी के सप्लीमेंट का सेवन करें।
  • विटामिन-सी से भरपूर आहार को भी अपनी डाइट में शामिल करें।

कैसे लाभदायक है :

काली खांसी के घरेलू उपचार रूप में  विटामिन-सी का उपयोग भी किया जा सकता है। शोध में पाया गया कि विटामिन-सी, काली खांसी की समस्या में लाभदायक साबित हो सकता है (23)। इसके अलावा, एक अन्य शोध के मुताबिक विटामिन-सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार हो सकता है, जिससे काली खांसी से बैक्टीरिया से लड़ने में शरीर की आंतरिक क्षमता बढ़ सकती है (24)। इसके लिए विटामिन-सी युक्त खाद्य-पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर डॉक्टरी सलाह से विटामिन-सी के सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं।

12. ग्रीन टी 

सामग्री :

  • 1 ग्रीन टी-बैग
  • 1 कप गर्म पानी
  • स्वादानुसार शहद (वैकल्पिक)

उपयोग का तरीका :

  • 2-3 मिनट के लिए एक कप गर्म पानी में ग्रीन टी-बैग को डुबोएं।
  • स्वाद के लिए इसमें शहद मिक्स करें।
  • अब इसका सेवन करें।

कैसे लाभदायक है :

ग्रीन टी भी काली खांसी का घरेलू उपाय हो सकती है। इसमें मौजूद एंटीवायरल गुण सर्दी और फ्लू सहित कई प्रकार के संक्रमणों के इलाज में मददगार हो सकता है (25)। वही, एक अध्ययन के मुताबिक, इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण काली खांसी पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मारने में मदद कर सकते हैं (26)।

13. एल्डरबेरी सिरप 

सामग्री :

  • 1 बड़ा चम्मच एल्डरबेरी सिरप
  • 1 कप किसी भी फल का रस या गर्म पानी 

उपयोग का तरीका :

  • एक कप फलों के रस या गर्म पानी में सिरप मिलाएं।
  • इसका रोजाना सेवन करें।

कैसे लाभदायक है :

काली खांसी में एल्डरबेरी के फायदे भी देखे जा सकते हैं। यह एंटी एंटीमाइक्रोबियल (बैक्टीरिया से लड़ने वाला) गुणों से समृद्ध होती है। इसके अलावा, यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ सर्दी-जुकाम से राहत देने में भी मदद कर सकती है (27)। इन गुणों को देखते हुए हम यह कह सकते हैं कि काली खांसी के दौरान एल्डरबेरी कुछ हद तक फायदेमंद साबित हो सकती है। फिलहाल, इस विषय पर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

14. नमक पानी 

सामग्री :

  • आधा चम्मच नमक
  • 1 कप गर्म पानी

उपयोग का तरीका :

  • एक कप गर्म पानी में नमक मिलाएं।
  • इस पानी का उपयोग गार्गल करने के लिए करें।

कैसे लाभदायक है :

काली खांसी के घरेलू उपचार रूप में नमक-पानी के फायदे भी देखे गए हैं। इससे जुड़े एक शोध में पाया गया कि नमक में एंटी माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। यह गुण बैक्टीरिया के कारण होने वाली समस्या को कम करने के लिए फायदेमंद हो सकते हैं (28)। इससे हम यह मान सकते हैं नमक का उपयोग काली खांसी के बैक्टीरिया के ऊपर प्रभावी हो सकता है। फिलहाल, इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

15. शहद 

सामग्री :

  • ऑर्गेनिक शहद का 1 बड़ा चम्मच
  • 1 कप गर्म पानी

उपयोग का तरीका :

  • एक कप गर्म पानी में शहद मिलाएं।
  • इस मिश्रण का रोजाना सेवन करें।

कैसे लाभदायक है :

शहद का इस्तेमाल कर काली खांसी का घरेलू उपाय किया जा सकता है। लंबे समय से खांसी से छुटकारा पाने के लिए बतौर कफ सिरप इसका उपयोग किया जाता रहा है। दरअसल, शहद में एंटी बैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं (29)। ऐसे में हम कह सकते हैं कि शहद खांसी के बैक्टीरिया के जोखिम व इससे बचाव में मददगार हो सकता है। इसके अलावा, यह खांसी से आराम दिलाकर अच्छी नींद को बढ़ावा देने का काम भी कर सकता है (30)।

16. लीकोरिस (Licorice) 

सामग्री :

  • लीकोरिस की एक छोटी जड़ (बारीक कटी हुई)
  • 1 कप पानी
  • शहद (वैकल्पिक)

उपयोग का तरीका :

  • एक कप पानी में लीकोरिस को डालें।
  • 10 मिनट तक इसे पानी में उबालें।
  • फिर छानकर पानी को एक कप में डालें।
  • स्वाद के लिए इसमें शहद भी मिला सकते हैं।
  • अब इस चाय का सेवन करें।

कैसे लाभदायक है :

काली खांसी के घरेलू उपचार रूप में लीकोरिस का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जुड़े शोध के अनुसार, यह खांसी से आराम दिला सकता है और साथ ही बलगम को निकालने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, इसमें एंटीवायरल और एंटीमाइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं (31)। ये गुण फ्लू के साथ काली खांसी के संक्रमण के जोखिम को भी कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, लिकोरिस में एंटीट्यूशिव गुण यानी खांसी रोकने वाला गुण भी होता है, जो खांसी से राहत दिला सकता है (32)।

17. कैमोमाइल 

सामग्री :

  • 1 से 2 चम्मच सूखे कैमोमाइल फूल
  • 1 कप पानी
  • स्वादानुसार शहद (वैकल्पिक)

उपयोग का तरीका :

  • एक कप गर्म पानी में कैमोमाइल को 5 से 10 मिनट तक डुबोकर रखें।
  • स्वाद के लिए शहद डाल सकते हैं।
  • ठंडा होने से पहले इसे चाय की तरह पिएं।

कैसे लाभदायक है : 

कैमोमाइल की चाय के द्वारा काली खांसी का घरेलू उपाय किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल खांसी-जुकाम के लिए किया जा सकता है। कैमोमाइल में मौजूद बैक्टीरिसाइडल गुण शरीर में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने का काम कर सकते हैं (33)। ऐसे में इसका सेवन काली खांसी के लिए भी प्रभावी माना जा सकता है।

18. केसर से काली खांसी का इलाज 

सामग्री :

  • केसर के 5-6 धागे
  • 1 कप गर्म पानी
  • शहद (वैकल्पिक)

उपयोग का तरीका :

  • एक कप गर्म पानी में केसर को 5 से 10 मिनट के लिए भिगो दें।
  • स्वाद के लिए शहद जोड़ें और इसका प्रतिदिन सेवन करें।

कैसे लाभदायक है :

काली खांसी के घरेलू उपचार रूप में केसर का उपयोग किया जा सकता है। दरअसल, यह अस्थमा, खांसी, काली खांसी (पर्टुसिस) और सांस लेने में तकलीफ में मदद कर सकता है। वहीं, इसमें एक्सपेक्टोरेन्ट (बलगम को निकालने में सहायक गुण) प्रभाव भी पाया जाता है। इस वजह से कहा जा सकता है कि केसर का उपयोग काली खांसी से आराम दिलाने में मददगार हो सकता है (34)। 

पढ़ते रहें

अब जानिए काली खांसी होने पर डॉक्टर की सलाह कब लें? 

काली खांसी के लिए डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

जब काली खांसी के घरेलू उपाय काम ना आए और निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए –  (1)

  • त्वचा का रंग नीला दिखाई देने पर, क्योंकि यह ऑक्सीजन की कमी का संकेत देता है।
  • एपनिया यानी सांस लेने में समस्या
  • दौरे की स्थिति
  • तेज बुखार
  • लगातार उल्टी
  • निर्जलीकरण 

और पढ़ें 

यहां हम आपको बता रहे हैं काली खांसी का इलाज। 

काली खांसी (कुकर खांसी) का इलाज – Whooping cough Treatment in Hindi

काली खांसी होने का खतरा सबसे ज्यादा शिशुओं में होता है। इसलिए, इसका उपचार जरूरी है। इसके उपचार में निम्नलिखित चीजों को शामिल किया जा सकता है – (35) (1)

  • काली खांसी का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जा सकता है।
  • रोगी को हाई ह्यूमिडिटी वाले ऑक्सीजन टेंट में रखा जा सकता है।
  • जरूरत पड़ने पर नसों के जरिए तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं।
  • नींद के लिए सेडेटिव दवाएं दी जा सकती हैं।
  • काली खांसी से पीड़ित 18 महीने से कम बच्चों को लगातार डॉक्टर की निगरानी में रखा जा सकता है। अगर स्थिति गंभीर है, तो उन्हे अस्पताल मे भर्ती भी कराया जा सकता है।

आगे है कुछ खास 

काली खांसी का इलाज, तो आपने जान लिया, अब जानिए इससे जुड़े जोखिम और जटिलताएं। 

काली खांसी के जोखिम और जटिलताएं – Whooping cough Risks & Complications in Hindi

काली खांसी के दौरान कुछ जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। काली खांसी के जोखिम कारक इस प्रकार हैं (36) –

शिशुओं में :

  • निमोनिया
  • सांस लेने की क्षमता में कमी
  • धीमी सांस लेना
  • मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी

वयस्कों में :

  • बार-बार पेशाब जाना
  • वजन का घटना
  • गंभीर खांसी के कारण रिब फ्रैक्चर
  • बेहोशी

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सबसे आखिरी में जानते हैं काली खांसी से बचने के उपाय।

काली खांसी से बचने के उपाय – Prevention Tips for Whooping cough in Hindi 

काली खांसी से बचने के उपाय में निम्नलिखित तरीकों को अपनाया जा सकता है – (37)

  • काली खांसी से बचने के लिए सबसे जरूरी से इससे संबंधित टीका लगवाना।
  • शिशुओं को टीका लगवाने के साथ ही काली खांसी वाले व्यक्ति से दूर रखना चाहिए।
  • एंटीबायोटिक्स दवाइयों का इस्तेमाल इसके संक्रमण से बचने में मदद कर सकता है। दरअसल, जब घर के किसी सदस्य को काली खांसी होती है, तो डॉक्टर बाकी सदस्य को एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं। ध्यान रहे, बिना डॉक्टरी परामर्श के इन दवाइयों का सेवन न करें।
  • सफाई का विशेष ख्याल रखना चाहिए, ताकि बैक्टीरिया न पनप सकें।

उम्मीद करते हैं कि काली खांसी से जुड़ी तमाम जानकारी के बाद, अब आप काली खांसी से बचने के उपाय व इसका इलाज सही तरीके से कर पाएंगे। आपकी सुविधा के लिए हमने लेख में काली खांसी का घरेलू इलाज भी बताया है, जो इसके प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, गंभीर स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें। साथ ही, अपने बच्चों को विशेष तौर पर ध्यान रखें और जागरूक रहें। ध्यान रहे, आपकी जागरूकता ही किसी भी बीमारी से बचने का सबसे पहला तरीका है। आगे पढ़ें पाठकों द्वारा पूछे जाने वाले कुछ सवालों के जवाब।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

खांसी और काली खांसी में क्या अंतर है?

सामान्य और काली खांसी में अंतर देखा जा सकता है। दरअसल, काली खांसी बोर्डेटेला पर्टुसिस नामक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होती है (38)। वहीं, सामान्य खांसी फ्लू, कोल्ड व अन्य कई कारणों की वजह से हो सकती है (1)। काली खांसी को खांसी का गंभीर रूप कहा जा सकता है और समय पर इलाज न करवाने पर यह पीड़ित को गंभीर रूप से प्रभावित भी कर सकती है। वहीं, सामान्य खांसी अपने आप भी ठीक हो सकती है, लेकिन यह कुछ दिन तक बनी रहे, तो इसका इलाज भी जरूरी है।

गर्भावस्था के दौरान काली खांसी की वैक्सीन लेने के फायदे और नुकसान क्या हो सकते हैं?

नवजात को काली खांसी से बचाने के लिए गर्भावस्था के दौरान टीडेप (Tdap) का टीका दिया जा सकता है (39)। हालांकि, इसके कुछ दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं। इसमें इंजेक्शन लगने वाली जगह पर लालिमा, दर्द, थकान व बुखार शामिल हैं (40)। इससे जुड़ी जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।

क्या रात में काली खांसी तेज हो जाती है?

काली खांसी अपने दूसरे चरण में गंभीर हो सकती है। दिन के साथ यह रात में भी पीड़ित को परेशान कर सकती है। खांसी इतनी गंभीर हो सकती है कि यह उल्टी का कारण भी बन सकती है।

काली खांसी से ठीक होने में कितना समय लगता है?

यह संक्रमण की गंभीरता और व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इसलिए, इससे जुड़ी सही जानकारी डॉक्टर दे सकता है।

काली खांसी को शांत कैसे किया जा सकता है?

काली खांसी को शांत करने में हमारे द्वारा बताए गए घरेलू उपचार कुछ हद तक मदद कर सकते हैं। वहीं, स्थिति अगर गंभीर है, तो डॉक्टरी उपचार जरूरी है।

क्या काली खांसी सूखी होती है या फिर गीली?

शुरुआत में यह सूखी खांसी और बाद में यह गीली खांसी के रूप में भी सामने आ सकती है (41)।

कब तक काली खांसी अधिक संक्रामक हो सकती है?

खांसी शुरू होने के लगभग 2 सप्ताह तक संक्रमित लोग सबसे अधिक संक्रामक हो सकते हैं (41)।

वयस्कों में काली खांसी कितनी गंभीर है?

काली खांसी के कारण निमोनिया, दौरा, ब्रेन डैमेज और मृत्यु तक हो सकती है (42)।

कैसे पता चलेगा कि मुझे काली खांसी है या बस सर्दी है?

आर्टिकल में दिए गए लक्षणों के माध्यम से आप काली खांसी के बारे पता कर सकते हैं।

क्या काली खांसी के कारण मृत्यु हो सकती है?

हां, समय पर उपचार न मिलने और स्थिति खराब होने पर इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं जिससे मृत्यु भी शामिल है (42)।

Sources

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सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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