लैक्टोज असहिष्णुता के कारण, लक्षण और इलाज – Lactose Intolerance in Hindi

Written by , (शिक्षा- बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मीडिया कम्युनिकेशन)

व्यक्ति को खुद को स्वस्थ रखने के लिए अपने पेट को स्वस्थ रखना जरूरी है, क्योंकि अधिकतर समस्या का जन्म खराब पेट से ही होता है। अब पेट के स्वास्थ्य के लिए व्यक्ति स्वस्थ आहार का सेवन करता है, लेकिन हर हेल्दी खाद्य पदार्थ भी सबको फायदा नहीं पहुंचाते। इसकी एक वजह लैक्टोज असहिष्णुता हो सकती है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम विस्तार से लैक्टोज असहिष्णुता के कारण और लैक्टोज असहिष्णुता का इलाज बता रहे हैं।

नीचे है पूरी जानकारी

लेख के पहले भाग में समझिए कि लैक्टोज असहिष्णुता क्या है।

लैक्टोज असहिष्णुता क्या है – What is Lactose Intolerance in Hindi

लैक्टोज असहिष्णुता का मतलब लैक्टोज युक्त खाद्य पदार्थों को पचा न पाना है। लैक्टोज कुछ और नहीं, बल्कि दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों में पाया जाने वाला शुगर है। लैक्टोज को पचाने के लिए शरीर को पर्याप्त मात्रा में लैक्टेज नामक एंजाइम की जरूरत होती है। लैक्टोज असहिष्णुता की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब छोटी आंत पर्याप्त मात्रा इस एंजाइम का उत्पादन नहीं कर पाता है (1)। इससे लैक्टोज असहिष्णु लोगों को पेट की समस्या हो सकती है। इस दौरान गैस, दस्त और पेट में सूजन जैसी शिकायत होना आम है (2)।

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आइए, जानते हैं लैक्टोज असहिष्णुता के कारण क्या हैं।

लैक्टोज असहिष्णुता के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk Factors of Lactose Intolerance in Hindi

अगर किसी समस्या के उत्पन्न होने के कारण और जोखिम कारक का पता चल जाए, तो उससे बचना आसान हो जाता है। ऐसे में कोई भी लैक्टोज असहिष्णुता के कारण और जोखिम कारक जानकर सावधानियों को अपना सकता है। लैक्टोज असहिष्णुता के कारण और जोखिम कारक कुछ इस प्रकार हो सकते हैं (1)।

  1.  समय से पहले जन्म – अगर कोई बच्चा समय से पहले जन्म लेता है, तो उसे लैक्टोज इन्टॉलेरेंस की समस्या हो सकती है।
  1.  लैक्टोज एंजाइम की कमी – जब व्यक्ति का शरीर पर्याप्त मात्रा में लैक्टोज एंजाइम का उत्पादन नहीं कर पाता, तो वो दूध और उससे बने खाद्य पदार्थों को पचा नहीं पाता। इससे उन्हें लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या हो सकती है।
  1.  बीमारी के कारण – अगर छोटी आंत को नुकसान पहुंचाने वाली कोई बीमारी हो गई है, तो इससे भी लैक्टोज असहिष्णुता हो सकती है। इसमें छोटी आंत की सर्जरी, छोटी आंत में संक्रमण, सीलिएक रोग (ग्लूटन के प्रति इम्यून का रिेएक्शन), क्रोहन रोग (पाचन तंत्र में सूजन) और दस्त का कारण बनने वाली समस्याएं शामिल हो सकती है।
  1. आनुवंशिक दोष – अगर कोई आनुवंशिक दोष के साथ पैदा होता है, तो वो ठीक तरह से लैक्टोज एंजाइम का उत्पादन नहीं कर पाता। इससे लैक्टोज इन्टॉलेरेंस की समस्या उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है।

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लैक्टोज असहिष्णुता के कारण के बाद अब लैक्टोज असहिष्णुता के लक्षण पढ़ें।

लैक्टोज असहिष्णुता के लक्षण – Symptoms of Lactose Intolerance in Hindi

लैक्टोज असहिष्णुता के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग नजर आ सकते हैं। इसके लक्षण अक्सर दूध या उससे बने पदार्थ का सेवन करने के 30 मिनट से 2 घंटे बाद दिखाई देते हैं। अगर कोई दूध का अधिक मात्रा में सेवन करता है, तो इसके लक्षण बहुत गंभीर भी हो सकते हैं (1)। अधिकतर लैक्टोज असहिष्णु लोगों में कुछ इस प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं (3) (4)।

इन लक्षणें के अलावा कुछ लोगों में इस तरह के भी संकेत नजर आ सकते हैं। हालांकि, यह लक्षण सामान्य नहीं हैं (4)।

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लेख के अगले भाग में हम लैक्टोज असहिष्णुता के निदान के बारे में बता रहे हैं।

लैक्टोज असहिष्णुता का निदान- Diagnosis of Lactose Intolerance in Hindi

अगर किसी में लैक्टोज असहिष्णुता के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो इसका निदान कुछ टेस्ट के जरिए किया जा सकता है। लैक्टोज असहिष्णुता से जुड़े कुछ सामान्य परीक्षण में ये शामिल हैं (1) (4)-

  1.  शारीरिक परीक्षण – डॉक्टर किसी भी समस्या का निदान करने के लिए शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं। इस दौरान डॉक्टर स्टेथोस्कोप से पेट की जांच कर सकता है। साथ ही हाल ही खानपान से जुड़े लक्षण और बीमारियों के बारे में भी पूछ सकता है।
  1.  ब्रीद टेस्ट – इस टेस्ट के दौरान विशेषज्ञ सांस में हाइड्रोजन के स्तर को मापते हैं। अगर हाइड्रोजन का स्तर उच्च है, तो लैक्टोज असहिष्णुता होने की आशंका होती है।
  1.  ब्लड टेस्ट – इस परीक्षण के लिए सबसे पहले डॉक्टर व्यक्ति को दूध या लैक्टोज युक्त पदार्थ का सेवन करने के लिए कहता है। फिर रक्त की जांच करके लैक्टोज या ग्लूकोज के स्तर का पता लगाया जाता है। इससे लैक्टोज असहिष्णुता का निदान हो सकता है।
  1.  स्टूल पीएच टेस्ट – इस परीक्षण के दौरान मल की जांच की जाती है। अगर किसी को लैक्टोज असहिष्णुता है, तो उसके मल का पीएच कम हो सकता है, जिससे कि इस समस्या का पता लगाया जा सकता है ।

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चलिए, अब जानते हैं लैक्टोज असहिष्णुता के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए।

लैक्टोज असहिष्णुता आहार – Lactose Intolerance Diet in Hindi

लैक्टोज असहिष्णुता के दौरान खानपान पर खास ध्यान देना होता है। इस समय क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसकी जानकारी नीचे मौजूद है।

क्या खाएं –

अगर किसी को लैक्टोज असहिष्णुता है, तो हर दिन पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी लेना चाहिए। इसके लिए लैक्टोज फ्री कैल्शियम युक्त आहार का सेवन कर सकते हैं। इनमें ये खाद्य पदार्थ शामिल हैं (5)।

  • सैल्मन या सारडाइन मछली
  • ब्रोकली और पत्तेदार हरी सब्जियां
  • संतरे और अंडे
  • बादाम, ब्राजील नट्स, और सूखे बीन्स
  • टोफू और सोया दूध
  • साबुत अनाज और फलों का रस

क्या न खाएं –

अगर किसी को लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या है, तो उन्हें लैक्टोज युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन से बचना ​चाहिए (4)।

  • सॉफ्ट एंड प्रोसेस्ड चीज़
  • बटरमिल्क यानी छाछ
  • क्रीम
  • दूध
  • आइसक्रीम
  • मलाई
  • पेनकेक्स और वफल
  • आलू
  • मक्खन
  • कस्टर्ड और पुडिंग

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आगे जानिए लैक्टोज असहिष्णुता का इलाज कैसे किया जा सकता है।

लैक्टोज असहिष्णुता का इलाज – Treatment of Lactose Intolerance in Hindi

लैक्टोज असहिष्णुता के लिए किसी प्रकार का विशेष उपचार नहीं है। हां, इसके लक्षण को कम करने के लिए लैक्टोज युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बंद और कम कर सकते हैं। कुछ लोगों को सिर्फ लैक्टोज युक्त खाद्य पदार्थ को सीमित करने की, तो कुछ को पूरी तरह इसका सेवन बंद करने की जरूरत होती है। वहीं, ​कुछ लोगों को लैक्टोज उत्पाद देकर इसके लक्षणों का मैनेज किया जाता है (6)। इनके अलावा, लैक्टोज असहिष्णुता का इलाज करने के लिए इनका सहारा लिया जा सकता है।

  1.  एंजाइम सप्लीमेंट्स – लैक्टोज इन्टॉलेरेंस का इलाज करने के लिए डॉक्टर लैक्टोज को पचाने वाले एंजाइम लेने की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर द्वारा सुझाए गए एंजाइम को ही खरीदें (1)।
  1.  कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट्स – लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या होने पर शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हो सकती है, जो दूसरी समस्या को जन्म दे सकती है। ऐसे में इस समय डॉक्टर इन दोनों सप्लीमेंट्स को लेने की सलाह दे सकते हैं (1)।
  1.  छोटी आंत की समस्या का इलाज – यदि किसी की छोटी आंत में इंजरी है, जिस कारण लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर उस इंजरी का इलाज कर समस्या को ठीक कर सकते हैं (6)।

अभी और जानकारी है

लैक्टोज असहिष्णुता का इलाज जानने के बाद लैक्टोज असहिष्णुता से होने वाली जटिलताओं के बारे में पढ़ें।

लैक्टोज असहिष्णुता से होने वाली जटिलताएं – Complication of Lactose Intolerance in Hindi

अगर लंबे समय तक लैक्टोज असहिष्णुता रहती है, तो कुछ जटिलताएं हो सकती हैं। ये समस्याएं कुछ इस प्रकार हैं (4)।

  • ऑस्टियोपीनिया – इस स्थिति में हड्डी के मिनरल खोने लगते हैं, जिससे कि हड्डियां कमजोर हो जाती हैं (7)।
  • ऑस्टियोपोरोसिस – यह हड्डियों से संबंधित एक बीमारी है, जो हड्डियों को पतला और कमजोर करती है। इससे हड्डियां नाजुक हो जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर होने का जोखिम बना रहता है (8)।
  • कुपोषण – यह ऐसी स्थिति होती है, जब शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते (9)।
  • वजन घटना – लैक्टोज असहिष्णुता के कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। नतीजन व्यक्ति का शरीर कमजोर और वजन कम हो सकता है।

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अब हम आगे लैक्टोज असहिष्णुता से बचने के उपाय बता रहे हैं।

लैक्टोज असहिष्णुता से बचने के उपाय – Prevention Tips for Lactose Intolerance in Hindi

लैक्टोज असहिष्णुता से बचने के लिए किसी तरह का खास तरीका मौजूद नहीं है। लैक्टोज असहिष्णुता से बचने के उपाय में लैक्टोज को डाइट में जगह न व कम देना ही हो सकता है। इसके साथ ही अन्य टिप्स आगे पढ़ें (1)।

  • लैक्टोज युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि दूध, पनीर, छाछ, मलाई आदि के सेवन से बचें ।
  • पाचन क्रिया को बेहतर करने के लिए योग और व्यायाम का सहारा ले सकते हैं (10)।
  • इससे बचने के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन कर सकते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर कर सकता है (11)।
  • दिन में अधिक से अधिक पानी पीकर शरीर और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखें।
  • जंक फूड के सेवन से बचें, जो पाचन तंत्र को खराब कर सकता है।

लैक्टोज इन्टॉलेरेंस किसी तरह की गंभीर बीमारी नहीं है, जिसके लिए व्यक्ति को बहुत ज्यादा घबराना पड़े। इस समस्या के साथ व्यक्ति जीवन व्यतीत कर सकता है। बस उन्हें इस स्थिति में कुछ खाद्य पदार्थ के सेवन से दूर रहना पड़ेगा, जिससे कि वो लैक्टोज असहिष्णुता से बच सके। साथ ही यह भी ध्यान दें कि लैक्टोज इन्टॉलरेंट लोग जब लैक्टोज युक्त डेयरी प्रोडक्ट का अधिक सेवन कर लेते हैं, तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है। ऐसे में सतर्क रहें और खुद को सुरक्षित रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैं कैसे बता सकता हूं कि मैं लैक्टोज इन्टॉलरेंट हूं?

आप लैक्टोज असहिष्णुता है या नहीं, यह डेयरी युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन करने के 30 मिनट से 2 घंटे बाद पता लगा सकते हैं। अगर इस दौरान उल्टी, मतली, सिरदर्द, पेट दर्द, गैस, पेट में भारीपन जैसे लक्षण नजर आएं, तो आप कह सकते हैं कि आप लैक्टोज इन्टॉलरेंट हैं (1)।

लैक्टोज असहिष्णुता के चार प्रकार क्या हैं?

लैक्टोज असहिष्णुता के चार प्रकार में प्राइमरी लैक्टेज डेफिशियेंसी, सेकेंडरी लैक्टेज डेफिशियेंसी, कंजेनिटल लैक्टेज डेफिशियेंसी और डेवलपमेंटल लैक्टेज डेफिशियेंसी शामिल है (12)।

क्या किसी को अचानक लैक्टोज असहिष्णुता हो सकती है?

जी हां, लैक्टोज असहिष्णुता अचानक भी हो सकती है। दरअसल, छोटी आंत की सर्जरी, छोटी आंत में संक्रमण, सीलिएक रोग (ग्लूटन के प्रति इम्यून का रिेएक्शन), क्रोहन रोग (पाचन तंत्र में सूजन) और दस्त का कारण बनने वाली समस्याओं से व्यक्ति लैक्टोज असहिष्णु हो जाता है। अगर किसी को ये समस्याएं हो जाएं, तो उसे अचानक लैक्टोज असहिष्णुता हो सकती है (1)।

आप लैक्टोज असहिष्णुता को कैसे ठीक करते हैं?

लैक्टोज असहिष्णुता को पूरी तरह ठीक तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसके लक्षण से बचने के लिए दूध और उससे बने आहार का सेवन कम व बंद करना होगा। वहीं, इसके कारणों के आधार पर इलाज की प्रक्रिया को अपनाना पड़ सकता है। जैसे कि एंजाइम सप्लीमेंट लेना और छोटी आंत से जुड़ी बीमारी का इलाज।

क्या प्रोबायोटिक्स लैक्टोज असहिष्णुता में मदद करते हैं?

जी हां, लैक्टोज असहिष्णुता की स्थिति में प्रो बायोटिक्स मददगार हो सकते हैं। दरअसल, प्रो बायोटिक्स पाचन क्रिया को बेहतर करने वाले अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जिससे कि लैक्टोज असहिष्णुता में सुधार हो सकता है (13)।

संदर्भ (Sources) :

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  1. Lactose intolerance
    https://medlineplus.gov/ency/article/000276.htm
  2. Lactose Intolerance
    https://medlineplus.gov/lactoseintolerance.html
  3. Symptoms & Causes of Lactose Intolerance
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/lactose-intolerance/symptoms-causes
  4. Lactose Intolerance
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK532285/
  5. Eating Diet & Nutrition for Lactose Intolerance
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/lactose-intolerance/eating-diet-nutrition
  6. Treatment for Lactose Intolerance
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/lactose-intolerance/treatment
  7. Osteopenia
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK499878/
  8. Osteoporosis
    https://medlineplus.gov/osteoporosis.html
  9. Malnutrition
    https://medlineplus.gov/ency/article/000404.htm
  10. Can yoga be used to treat gastroesophageal reflux disease
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3734640/
  11. Fiber
    https://medlineplus.gov/ency/article/002470.htm
  12. Lactose Intolerance Dairy Avoidance and Treatment Options
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6316316/
  13. The effects of probiotics in lactose intolerance: A systematic review
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/29425071/
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