लाजवंती या छुईमुई के फायदे, उपयोग और नुकसान – Lajwanti Benefits and Uses in Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन जर्नलिज्म मीडिया कम्युनिकेशन)

पेड़ पौधों में कई तरह के औषधीय गुण होते हैं, जिस कारण उनके फूल, बीज, पत्ते, टहनियां और जड़ो को सदियों से आयुर्वेद में दवाई की तरह इस्तेमाल किया जाता आ रहा है। इन्हीं औषधीय पौधों में से एक लाजवंती (छुईमुई) भी है। लाजवंती को कई समस्याओं से निपटने के लिए आयुर्वेदिक दवाई के रूप में भी उपयोग किया जाता है। पर यहां स्पष्ट कर दें कि यह किसी भी समस्या का सटीक इलाज नहीं होता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम विस्तार से बताएंगे कि लाजवंती का पौधा किस काम में आता है और छुईमुई के फायदे क्या-क्या हो सकते हैं।

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तो आइए लाजवंती क्या है, सबसे पहले हम इस बारे में जान लेते हैं।

लाजवंती क्या है – What is Lajwanti in Hindi

लाजवंती एक तरह का पौधा है, जिसे छुईमुई के नाम से भी जाना जाता है। इस पौधे को अंग्रेजी में टच मी नॉट के नाम से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम मिमोसा पुडिका (Mimosa pudica) है। यह एक तरह का बारहमासी पौधा है, जो पूरे साल हराभरा रह सकता है। इस पौधे की प्रवित्ति शर्मीली होती है। इसलिए इसे छूने पर यह पौधा शांत हो जाता है। इस पौधे की पत्तियों व बीज अपने खास औषधीय गुणों के कारण कई प्रकार की दवाओं को बनाने में इस्तेमाल किए जाते हैं। इस बारे में लेख में आगे विस्तार से बताया गया है (1)।

लेख में बने रहें

इस लेख के अगले हिस्से में हम लाजवंती के औषधीय गुण के बारे में बता रहे हैं।

लाजवंती के औषधीय गुण – Medicinal Properties of Lajwanti in Hindi

लाजवंती में कई तरह के औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (1):

  • एंटी-अस्थमेटिक (अस्थमा से राहत दिलाने वाला)
  • एनाल्जेसिक (दर्दनिवारक)
  • एंटीडिप्रेसेंट (अवसाद से राहत दिलाने वाला)
  • वाउंड हीलिंग- (घाव भरने वाला)
  • ड्यूरेटिक- (मूत्रवर्धक)
  • एंटीफर्टिलिटी- (नपुंसकता दूर करने वाला)
  • एंटीवेनम- (विषैले प्रभाव से बचाव करने वाला)
  • एंटीमाइक्रोबियल- (सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने वाला)
  • एंटीफंगल- (फंगस को नष्ट करने वाला)
  • एंटीवायरल-(वायरस के प्रभाव को दूर करने वाला)

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आइए, अब जान लेते है कि लाजवंती के फायदे में क्या-क्या शामिल है।

लाजवंती के फायदे – Benefits of Lajwanti in Hindi

सेहत और स्वास्थ्य के नजरिए से छुई मुई का उपयोग काफी लाभप्रद माना जाता है। यही वजह है कि यहां हम लाजवंती के कई स्वास्थ्य संबंधी फायदे विस्तार से बता रहे हैं।

1. तनाव से राहत

तनाव से राहत पाने के लिए छुई मुई का उपयोग कर सकते हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के मुताबिक, छुई मुई के एसीटेट अर्क में एंटी-एंग्जायटी, एंटी-डिप्रेसेंट और याददाश्त बढ़ाने वाली गतिविधियां होती हैं। यह गतिविधियां चिंता और अवसाद से आराम दिला सकती हैं, जिससे तनाव की समस्या भी कम हो सकती है (2)।

2. मधुमेह में मददगार

लाजवंती के फायदे मधुमेह के रोगियों के लिए भी काफी लाभकारी हो सकते हैं। यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूएसडीए) की वेबसाइट पर दी गई जानकारी की मानें तो, लाजवंती में एंटी-डायबिटीज गुण होते हैं। इस गुण के कारण यह पौधा मधुमेह के जोखिमों से बचाने का काम कर सकता है (3)। वहीं एक अन्य अध्ययन में दिया है कि लाजवंती में मौजूद एंटी-डायबिटीज गुण ब्लड ग्लूकोज को कम करने का काम कर सकता है। इससे मधुमेह की स्थिति में राहत मिल सकती है (4)।

3. घाव भरने के लिए

छुईमुई के फायदे में घाव भरना भी शामिल है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक मेडिकल रिसर्च में इस बात की पुष्टि की गई है। शोध के अनुसार, लाजवंती में वाउंड हीलिंग गतिविधि भी मौजूद होती है। इस कारण यह पौधा घाव को जल्दी भरने का काम कर सकता है। इसके लिए अरंडी के तेल में छुईमुई की तली हुई जड़ का पेस्ट बनाकर कटे हुए घाव पर लगा सकते हैं (1)।

4. जोड़ों के दर्द में कमी

अगर जोड़ो के दर्द को कम करने की बात की जाए, तो इसके लिए भी छुई मुई का उपयोग किया जा सकता है। दरअसल, जोड़ो में दर्द होने का एक कारण गठिया होता है (5)। एक वैज्ञानिक रिसर्च में दिया है कि लाजवंती गठिया के लक्षण को कम करने का काम कर सकता है, जिसका सकारात्मक असर जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए हो सकता है (6)।

5. मासिक धर्म के लिए

मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में लाजवंती सहायक की भूमिका निभा सकती है। इस संबंध में प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययन में भी इस बात का जिक्र मिलता है। शोध में माना गया है कि इसकी जड़ों का उपयोग मासिक धर्म की समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जा सकता है (7)। फिलहाल, अभी इस संबंध में और वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है। ताकि मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं में यह किस प्रकार राहत पहुंचाता है, इस बारे में बेहतर पका चल सके।

6. बवासीर के लिए

बवासीर की समस्या से पीड़ित व्यक्ति के लिए लाजवंती के फायदे देखे जा सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन की मानें, तो लाजवंती की पत्तियों को बवासीर के पारंपरिक उपचार के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं (1)। एक दूसरे वैज्ञानिक शोध के अनुसार, एंटी-हेमोरॉयडल (बवासीर को रोकने वाला गुण) वाले पौधों की सूची में लाजवंती का नाम भी शामिल है (8)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि लाजवंती बीज के फायदे बवासीर से छुटाकार दिलाने में भी सहायक हो सकते हैं।

7. पेट दर्द से राहत

अगर कोई पेट दर्द से परेशान है, तो उसके लिए छुई मुई का इस्तेमाल सहायक साबित हो सकता है। इस बात की पुष्टि एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक रिसर्च से होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लाजवंती में एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) गुण होता है, जो दर्द को कम करने का काम कर सकता है। पेट दर्द में इसके पत्तों और शहद के पेस्ट को खाली पेट उपयोग करने की सलाह दी जाती है (1)।

8. खुजली के लिए

लाजवंती के बीजों के फायदे खुजली से परेशान व्यक्ति के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक रिसर्च से पता चलता है कि यह खुजली और खुजली से संबंधित रोगों को दूर करने के लिए प्रभावी हो सकता है (9)। फिलहाल, लाजवंती का कौनसा गुण इसके लिए मददगार होता है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। ऐसे में अभी इस संबंध में और रिसर्च की जरूरत है।

9. अनिद्रा के लिए

अनिद्रा की समस्या से निजात पाने के लिए छुई मुई का उपयोग लाभकारी हो सकता है (10)। विशेषज्ञों की मानें, तो इसे नींद न आने की स्थिति में पारंपरिक उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है (11)। दरअसल, इसमें एंटी-एंग्जायटी और एंटी-डिप्रेसेंट प्रभाव पाए जाते हैं, जो चिंता और अवसाद को कम कर मन को शांत रख सकते हैं (2)। चिंता और अवसाद की स्थिति में ठीक से नींद नहीं आती है (12) (13)। ऐसे में इस समस्या से राहत मिलने पर बेहतर नींद आ सकती हैं।

10. अल्सर से राहत

अगर किसी के मन में यह सवाल आ रहा है कि लाजवंती का पौधा किस काम में आता है, तो उन्हें बता दें कि इसे अल्सर से राहत पाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एक वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, छुई मुई की पत्तियों के एथेनॉलिक अर्क में एंटीअल्सर गतिविधि होती है। यह गुण अल्सर की समस्या को दूर रखने में मदद कर सकता है। साथ ही, इसके पत्ते के अर्क को अल्सर के उपचार में एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है (14)।

11. दस्त के लिए

दस्त एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बार बार मल आ सकता है। इस समस्या में भी छुईमुई के फायदे राहत दिला सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, छुई मुई की पत्तियों के एथेनॉलिक अर्क में एंटी-डायरिया गुण होता है, जो दस्त की समस्या को कम करने का काम कर सकता है (15)।

12. लीवर के लिए

लाजवंती के फायदे लिवर को स्वस्थ रखने के लिए देखे जा सकते हैं। विशेषज्ञों की मानें, तो लाजवंती के पत्तों के इथेनॉल अर्क में हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण मौजूद होते हैं, जो कार्बन टेट्राक्लोराइड के कारण होने वाले लिवर की क्षति से बचाने में मदद कर सकते हैं (15)।

13. बालों का झाड़ना कम करें-

अगर किसी के बाल बहुत झड रहे हैं, तो बालों का झड़ना कम करने के लिए लाजवंती का उपयोग कर सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकशित रिसर्च में दिया है कि एलोपेसिया के उपचार में छुई मुई फायदेमंद हो सकता है (1)। एलोपेसिया एक ऐसी समस्या जिसमें बाल बहुत झड़ने लगते हैं (16)। वहीं इसके विपरीत छुईमुई के बीज और अन्य पौधों के कुछ हिस्सों में मिमोन्साइन (एक तरह एमिनो एसिड) होता है, जो बालों के झड़ने का कारण माना जाता है (17)। ऐसे में इसे बालों पर इस्तेमाल करने से पहले एक बार विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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इस लेख के अगले भाग में छुई मुई का उपयोग करने का तरीका बता रहे हैं।

लाजवंती खाने का सही तरीका – How to Use Lajwanti in Hindi

छुई मुई का उपयोग मौखिक और टॉपिकल (बाहरी रूप से) दोनों तरीके से किया जा सकता है। पर इसे सिमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसे नीचे बताए जा रहे तरीको से उपयोग कर सकते हैं:

कैसे उपयोग करें :

  • लाजवंती का रस का सेवन किया जा सकता है।
  • लाजवंती आधारित कैप्‍सूल भी आते हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं।
  • इसकी जड़ और पत्ते के चूर्ण को दूध में मिलाकर पी सकते हैं।
  • लाजवंती के रस में शहद व काली मिर्च मिलाकर सेवन कर सकते हैं।
  • इसके पत्तियों से बने पेस्ट को घाव पर भी लगा सकते हैं।

कब उपयोग करें :

  • इसके चूर्ण को रात में सोने से पहले दूध में मिलाकर पी सकते हैं।
  • इसके कैप्सूल को डॉक्टर की सलाह पर खाना खाने के बाद ले सकते हैं।

कितना उपयोग करें :

लाजवंती को 10 से 20 ग्राम तक ले सकते हैं (1)। फिर भी इसे लेने से पहले लाजवंती की सही मात्रा जानने के लिए डॉक्टर या डायटीशियन से जरूर पूछे।

लेख अंत तक पढ़ें

चलिए जानते हैं कि लाजवंती के नुकसान किस तरह के हो सकते हैं।

लाजवंती के नुकसान – Side Effects of Lajwanti in Hindi

लाजवंती के फायदे और नुकसान दोनों हो सकते हैं। अगर इसे सिमित मात्रा में लिए जाए, तो यह फायदेमंद हो सकता है और अगर इसे अधिक मात्रा में ले तो यह सेहत पर नुकसानदायक असर दिखा सकता है। लाजवंती के नुकसान कुछ इस प्रकार से हो सकते हैं :

  • कुछ लोगों को लाजवंती के उपयोग से त्वचा में जलन महसूस हो सकती है (18)। ऐसे में अगर कोई इसके पेस्ट को त्वचा में लगाने का सोच रहे हैं, तो वे पहले पैच टेस्ट जरूर करें।
  • इसके बीज का उपयोग बालों के झड़ने का कारण बन सकता है (17)।
  • गर्भावस्था के दौरान या बच्चे के लिए इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
  • अगर कोई किसी बीमारी के लिए दवाई ले रहा है, तो इसके सप्लीमेंट को अपने आहार में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ से जरूर बात करें।

लाजवंती के पत्तियों से लेकर, फूल जड़ और तन सभी उपयोगी होते हैं। इसके पत्ते की तरह ही लाजवंती के बीज खाने के फायदे भी कई हैं। यह एक औषधीय पौधा है, इसलिए इसे हमेशा सीमित मात्रा में ही उपयोग करें। इससे शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है और ऊपर बताए गए फायदे हासिल किए जा सकते हैं। हम उम्मीद करते है कि इस लेख में दी गई सभी जानकारी रीडर के लिए उपयोगी साबित होगी। इस तरह के दूसरे औषधीय पौधों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध दूसरे लेख पढ़ सकते हैं।

इस लेख का अंत करने से पहले इससे जुड़े कुछ सवालों पर एक नजर डालेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

क्या लाजवंती को रोजाना लेना ठीक है?

जी हां, लाजवंती को रोजाना ले सकते हैं, पर किसी भी खाद्य पदार्थ को हर दिन नहीं लेना चाहिए। इसलिए, इसे रोजाना लेने का सोच रहे हैं, तो इस बारे में एक बार डॉक्टर से चर्चा जरूर करें ।

लाजवंती लेना क्यों बुरा होता है?

लाजवंती लेना इसलिए बुरा हो सकता है, क्योंकि इससे कई बार कुछ लोगों को हानि हो सकती है। इसे लेने पर त्वचा में जलन या बालों को नुकसान हो सकता है (18) (17)।

क्या लाजवंती को खाली पेट ले सकते हैं?

जी हां, लाजवंती को खाली पेट ले सकते हैं। इससे पेट से जुड़ी समस्याएं ठीक हो सकती हैं (1)।

लाजवंती को असर दिखाने में कितना समय लगता है?

किसी भी खाद्य पदार्थ को आहार दिखने में समय लगता है। अगर सही मात्रा में इसका सेवन किया जाए, तो इसके असर एक से दो हफ्तों में दिखाई दे सकते हैं।

संदर्भ (Sources) :

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    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3459453/
  2. Effects of Mimosa pudica L. leaves extract on anxiety
    depression and memory
  3. Analyses and profiling of extract and fractions of neglected weed Mimosa pudica Linn. traditionally used in Southeast Asia to treat diabetes
    https://pubag.nal.usda.gov/catalog/5414841
  4. Antidiabetic Efficacy of Mimosa pudica (Lajwanti) Root in Albino Rabbits
    https://citeseerx.ist.psu.edu/viewdoc/download?doi=10.1.1.1039.226&rep=rep1&type=pdf
  5. Arthritis
    https://medlineplus.gov/arthritis.html
  6. A Review on Ethnomedical and traditional uses of Mimosa pudica
    https://www.irjponline.com/admin/php/uploads/836_pdf.pdf
  7. Mimosa pudica L.
    a High-Value Medicinal Plant as a Source of Bioactives for Pharmaceuticals
  8. HEMORRHOIDS – A COMMON AILMENT AMONG ADULTS
    CAUSES & TREATMENT: A REVIEW
  9. Mimosa pudica (Lajwanti)Accelerates Repair and Regeneration of Deep Dermal Excision Wound in Swiss Albino Mice
    https://medcraveonline.com/IJCAM/mimosa-pudica-lajwantiaccelerates-repair-and-regeneration-of-deep-dermal-excision-wound-in-swiss-albino-mice.html
  10. Effects of Mimosa pudica L. leaves extract on anxiety
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  11. Anti-inflammatory Activity of Mimosa pudica Linn.(Mimosaceae) Leaves : An Ethnpharmacological study
    https://citeseerx.ist.psu.edu/viewdoc/download?doi=10.1.1.295.4907&rep=rep1&type=pdf
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  13. Depression
    https://medlineplus.gov/depression.html
  14. A Review on Antiulcer Activity of Few Indian Medicinal Plants
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    https://www.researchgate.net/publication/288261991_Pharmacology_and_Traditional_Uses_of_Mimosa_pudica
  16. Alopecia areata
    https://medlineplus.gov/ency/article/001450.htm
  17. MIMOSA PUDICA L. A SENSITIVE PLANT
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  18. PHARMACOLOGICAL AND TOXICOLOGICAL EVALUATION OF Mimosa pudica
    https://www.researchgate.net/publication/304657620_PHARMACOLOGICAL_AND_TOXICOLOGICAL_EVALUATION_OF_Mimosa_pudica
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पुजा कुमारी ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। इन्होंने वर्ष 2015 में अपने... more

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