लोध्र के फायदे, उपयोग और नुकसान – Lodhra (Symplocos Racemosa) Benefits and Uses in Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन जर्नलिज्म मीडिया कम्युनिकेशन)

भारत में छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्या के उपचार के लिए लोग देसी इलाज को तवज्जो देते हैं। इसमें विभिन्न जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें से कुछ जड़ी-बूटी से जहां अधिकतर लोग परचित होते हैं, तो वहीं कई ऐसी जड़ी-बूटी भी हैं, जिनका नाम शायद लोगों ने कभी सुना भी नहीं होता है। इन्हीं में एक नाम लोध्र का भी है। बहुत कम लोग लोध्र के गुण से वाकिफ हैं। अगर आपके लिए भी पठानी लोध्र एक नई औषधी है, तो स्टाइलक्रेज के इस लेख में लोध्र के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी साझा कर रहे हैं। साथ ही, किन स्थितियों में लोध्र के नुकसान हो सकते हैं, इस बारे में जानने के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।

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पठानी लोध्र के गुण जानने से पहले पढ़ें लोध्र क्या है।

लोध्र क्या है – What is Lodhra in Hindi

लोध्र (Lodhra) एक सदाबाहर पेड़ है। यह भारत के कई स्थानों में पाया जाता है (1)। औषधीय गुणों वाले लोध्र को वैज्ञानिक भाषा में सिम्प्लोकोस रेसमोसा (Symplocos Racemosa) कहते हैं। आयुर्वेद के साथ ही कई तरह की दवाओं के निर्माण में इसके इस्तेमाल का जिक्र मिलता है। पारंपरिक तौर पर लोध्र की जड़, छाल और पत्तियों का इस्तेमाल कई रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में इसे डायरिया, पेचिश, लिवर, गर्भाशय के साथ ही आंखों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए लाभकारी माना जाता है (2)।

प्राचीन समय में लोध्र का इस्तेमाल माथे पर तिलक लगाने के लिए किया जाता था। शायद यही वजह है कि भारतीय संस्कृति में इस पेड़ को लोध्रा के नाम से जाना जाता है (3)। नीचे विभिन्न भाषा में इसके अलग-अलग नाम पढ़ सकते हैं (1)।

  • संस्कृत – रोधरा, पित्का लोधरा, अंबर लोधरा, तिरसा
  • हिंदी – लोध
  • असमी – मुगाम
  • बंगाली – लोध, लोध्र
  • अंग्रेजी – सिम्प्लोकोस बार्क
  • गुजराती – लोधर
  • कन्नड़ – लोध्र
  • कश्मीरी – काथ
  • मलयालम – पाछोत्ती
  • मराठी – लोधा, लोध्र
  • पंजाबी – लोध्र
  • तमिल – वेल्लिलथी, वेल्लीलोथ्रम
  • तेलुगु – लोधुगा
  • उर्दू – लोध, लोधपठानी

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चलिए, अब जानते हैं कि स्वास्थ्य के लिए लोध्र के फायदे क्या क्या हो सकते हैं।

लोध्र के फायदे – Benefits of Lodhra in Hindi

इस भाग में हम स्वास्थ्य के लिए लोध्र के फायदे विस्तार से बता रहे हैं। ध्यान रखें कि लोध्र के गुण सिर्फ घरेलू उपाय के तौर पर ही आजमाए जा सकते हैं। किसी भी गंभीर स्वास्थ्य बीमारी में डॉक्टरी इलाज को ही प्राथमिकता दें।

1. अल्सर में लोध्र के फायदे

अल्सर के उपचार में लोध्र का उपयोग लाभकारी हो सकता है। एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि इसके इथेनॉलिक अर्क में एंटी अल्सर प्रभाव होता है, जो अल्सर के इलाज में मदद कर सकता है। साथ ही, इसका एंटी-सेक्रेटरी प्रभाव (Anti-secretory activity) पेट का एसिड कम करने में भी सहायक हो सकता है (4)। इसके अलावा, एक अन्य शोध के अनुसार, यह महिलाओं की योनि में होने वाले अल्सर (ulcers of vagina) के इलाज में भी लाभकारी हो सकता है (2)।

2. एक्ने में लोध्र के फायदे

लोध्र के फायदे में अगली जानकारी एक्ने यानी मुंहासों से जुड़ी है। घरेलू तौर पर मुंहासे दूर करने के लिए लोध्र की छाल का इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल, इसकी छाल में मैजूद इथेनॉलिक अर्क में एंटी एक्ने प्रभाव होता है, जिस वजह से इसका इस्तेमाल एक्ने या मुहांसे के उपचार में लाभकारी हो सकता है। साथ ही, लोध्र का यह प्रभाव एक्ने के प्रसार को फैलने से भी रोकने में मदद कर सकता है (2)। इस आधार पर एक्ने की समस्या से निजात पाने के लिए लोध्र का इस्तेमाल उपयोगी माना जा सकता है।

3. मुंह के स्वास्थ्य के लिए

मुंह के स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने के लिए भी लोध्र के गुण लाभकारी हो सकते हैं। एनसीबीआई के रिसर्च में इसकी जानकारी मिलती है कि आयुर्वेद और हर्बल ट्रीटमेंट में लोधा का इस्तेमाल मसूड़ों से खून बहने के उपचार के लिए किया जाता रहा है (5)। इससे संबंधित एक रिसर्च पेपर में यह बताया गया है कि लोध्रा दंत रोग संबंधी विकार के उपचार में मदद कर सकता है। इसके लिए दूध या दही के पानी के साथ मिलाकर लोध्रा का इस्तेमाल करने से दांतों से जुड़ी कई समस्याओं से राहत पाई जा सकती है (6)।

4. पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (PCOS)

महिलाओं के अंडाशय (ओवेरी) या एड्रि‍नल ग्रंथी में पुरुष हार्मोन (एण्ड्रोजन) का स्तर बढ़ने से पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (PCOS) हो सकता है। इसके कारण महिलाओं के अंडाशय में सिस्ट (द्रव से भरी थैली) बनने लगती हैं, जिससे महिलाओं में बांझपन और त्वचा से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है (7)। वहीं, इसके उपचार में लोधा की छाल का सेवन कर सकते हैं। दरअसल, लोध्र की छाल में एंटी-एंड्रोजेनिक प्रभाव होता है। यह टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम करके पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम या पीसीओएस का उपचार कर सकता है (4)।

5. रक्तस्राव विकार

सालों-साल से लोध्र की पत्तियों और छाल का इस्तेमाल रक्तस्राव विकार के लिए किया जाता रहा है (2)। एक रिसर्च पेपर में बताया गया है कि आयुर्वेद के अनुसार, लोधा रक्त दोष नाशक (rakta dosha nashaka) है। इसका पित्त और कफ दोष शांत करने वाला प्रभाव घाव भरने के साथ ही, रक्तस्राव रोकने में भी मदद कर सकता है (3)। शरीर के अंदर रक्तस्राव (Haemorrhage) बंद करने के लिए लोधा चूर्ण का सेवन कर सकते हैं। वहीं, शरीर के बाहर हो रहे रक्त का बहाव रोकने के लिए प्रभावित स्थान पर इसके चूर्ण का पेस्ट लगाया जा सकता है (4)।

6. आंखों के लिए

सिम्प्लोकोस रेसमोसा यानी लोध्र की छाल में एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव होता है, जिसका इस्तेमाल नेत्र रोग के उपचार में भी किया जा सकता है (8)। शायद यही वजह भी है कि लोधा का इस्तेमाल नेत्र हितकार (netra hitkara) के रूप में भी किया जाता रहा है। इसके अलावा, मधुमेह की जटिलताओं के कारण होने वाली आंखों की समस्या से भी लोधा बचाव कर सकता है (3)।

आंखों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के उपचार के लिए घरेलू तौर पर लोधा का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं, इसकी जानकारी नीचे पढ़ें (4):

  • पलकों की समस्या होने पर – लोधरा और मक्खन को मिक्स करके पलकों के ऊपर लगाएं।
  • कॉर्निया अल्सर के लिए – लोधरा के चूर्ण को गुनगुने पानी में मिलाएं और आंखों के ऊपर छिड़काव करें।
  • आंख आने पर – लोधरा चूर्ण और महुआ पाउडर को घी में भून लें। फिर इसे दूध में भीगे एक कपड़े की पोटली में बांधें। उस पोटली को आंखों के ऊपर रखें।
  • आंखों में जलन, खुजली और दर्द होने पर – लोधरा पाउडर में सेंधा नमक मिलाकर उसे चावल के पानी (मांड़) में मिलाएं। फिर एक कपड़े में बांधकर पोटली
  • तैयर करें। इसे आंखों के ऊपर रखें।
  • कोई नेत्र रोग होने पर – लोधरा की छाल के टुकड़ों को नींबू के पत्तों में लपेटकर गर्म करें। फिर इसका पाउडर बनाकर इसका सेवन करें।

7. त्वचा के लिए

घरेलू तौर से सुंदर त्‍वचा के उपाय में भी लोध्र का उपयोग कर सकते हैं। लोध्र या लोधा के इस्तेमाल का जिक्र त्वचा विकार दूर करने के लिए भी किया जाता रहा है (8)। इसके पीछे इसका एंटीबैक्टीरियल प्रभाव (Antibacterial) लाभकारी माना जा सकता है। इसका यह प्रभाव त्वचा से जुड़े कई तरह के संक्रमण दूर कर सकता है (3)। साथ ही, इसके पेस्ट का इस्तेमाल करने से एक्ने और मुंहासों की समस्या से भी राहत मिल सकती है (4)। इसलिए, लोधा का इस्तेमाल त्वचा के लिए गुणकारी हो सकता है।

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लोध्र के फायदे जानने के बाद, अब पढ़ें लोध्र के पौष्टिक तत्व।

लोध्र के पौष्टिक तत्व – Lodhra Nutritional Value in Hindi

औषधीय गुणों से भरपूर लोध्रा में कई पोषक तत्‍व, फाइटोकेमिकल्स व खनिज होते हैं (2)। नीचे लोध्र में पाए जाने वाले तत्व की जानकारी दे रहे हैं (4)।

  • इसमें सिम्लोकोसाइड, सिम्पोसाइड, ल्यूकोपेलार्गोनिडाइन -3 ग्लूकोसाइड, एलाजिक एसिड जैसे कई फ्लेवनॉल ग्लूकोसाइड्स (Flavanol glucosides) भी होते हैं।
  • इसके अलावा, इसमें फ्लेवनॉल ग्लाइकोसाइड्स के तौर पर रम्नेटिन 3-गैलेक्टोसाइड मौजूद होता है।
  • वहीं, ट्राइटरपीनोइड्स (Triterpenoids) के रूप में लोध्र में 19 ए-हाइड्रॉक्सीअर्जुनोलिक एसिड-3, 28-ओ-बीआईएस-बी-ग्लूकोपीरानोसाइड्स, 19-
  • हाइड्रोक्सीसियाटिक एसिड-3, बेटुलिन, ओलीनोलिक एसिड, बी-सिटोस्टेरॉल और ए-एमिरिन भी होते हैं।
  • साथ ही, लोध्र में अल्कलॉइड्स, फेनोलिक ग्लाइकोसाइड्स, एथिल ग्लाइकोसाइड्स और सी-ग्लाइकोसाइड भी होते हैं।

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लोध्र के पौष्टिक तत्व जानने के बाद, आगे हम लोध्र के उपयोग का सही तरीका बता रहे हैं।

लोध्र खाने का सही तरीका – How to Use Lodhra in Hindi

आयुर्वेद के अनुसार लोध्र का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। लोध्र के इस्तेमाल का सही तरीका क्या है और कैसे इसके अलग-अलग भागों का इस्तेमाल करें, इसकी जानकारी इस भाग में पढ़ें (1)।

  • विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों में लोध्र की छाल, पत्ती या जड़ का काढ़ा व जूस बनाकर पिया जा सकता है।
  • खाने के बाद लोध्र की छाल के चूर्ण का सेवन पानी के साथ किया जा सकता है।
  • लोध्र की छाल और पत्तियों का पेस्ट त्वचा की समस्याओं व घावों को भरने के लिए कर सकते हैं।
  • लोध्र के बीज से बने चूर्ण का भी सेवन किया जा सकता है।

खाने की मात्रा : प्रतिदिन 2000 मिलीग्राम की मात्रा तक लोध्र का सेवन करना सुरक्षित माना जा सकता है (4)। इसके अलावा, काढ़े के रूप में 20 से 30 ग्राम और पाउडर के रूप में 3 से 5 ग्राम तक की मात्रा में लोध्र का सेवन किया जा सकता है (1)।

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इस भाग में पढ़ें लोध्र के नुकसान।

लोध्र के नुकसान – Side Effects of Lodhra in Hindi

एक औषधी के तौर पर लोध्र के फायदे कई हैं। हालांकि, कुछ स्थितियों में लोध्र के नुकसान भी हो सकते हैं। वो नुकसान क्या हो सकते हैं, जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें।

  • लोध्र का इस्तेमाल रक्त में शुगर की मात्रा घटा सकता है (2)। इसलिए, मधुमेह की दवाओं का सेवन करने वाले लोगों को लोधा का सेवन करने से पहले डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
  • लोध्र शरीर में कुछ हार्मोन के साथ ही टेस्‍टोस्‍टेरोन और कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर कम करने में मदद कर सकता है (4)। इस लिहाज से शरीर में इसकी अधिकता इनका स्तर अधिक घटा सकती है।
  • लोधा में एंटी एंड्रोजन प्रभाव होता है, जो टेस्‍टोस्‍टेरोन (पुरुष हार्मोन) घटा सकता है (4)। इसलिए, पुरुषों को लंबे समय तक लोध्र के सेवन से बचना चाहिए।
    गर्भावस्था के समय लोधा चूर्ण का सेवन नहीं करना चाहिए (3)।
  • खाली पेट लोध्र का सेवन करने से कब्ज की समस्या के साथ ही पेट में भारीपन, मतली और उल्‍टी जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं (4)।
  • महिलाओं में सफेद पानी के उपचार के लिए इसका सेवन करने से पहले डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी हो सकता है (4)।
  • हमेशा लोध्र के ताजे काढ़े का ही इस्तेमाल करना चाहिए (4)।

एक औषधी के रूप में स्वास्थ्य के लिए लोध्र के फायदे कई हैं। उम्मीद करते हैं कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में आपको लोध्र के गुण और इससे होने वाले विभिन्न स्वास्थ्य लाभ की उचित जानकारी मिल गई होगी। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी होने के कारण लोध्र के दुष्प्रभाव की संभावना कम हो सकती है, लेकिन कुछ स्थितियों में लोध्र के नुकसान भी हो सकते हैं। इसलिए, लोध्र के फायदे पाने और लोध्र के नुकसान से बचने के लिए उचित मात्रा में और सुरक्षित तरीके से पठानी लोध्र का सेवन करें। साथ ही, लोध्र के गुण से जुड़ा यह लेख अपने प्रियजनों के साथ जरूर शेयर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या प्रतिदिन लोधा का सेवन किया जा सकता है?

हांं, सीमित मात्रा में प्रतिदिन लोध्र का सेवन करना सुरक्षित माना जा सकता है। हालांकि, अगर आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो लोध्र का सेवन करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

क्या खाली पेट पठानी लोध्र का सेवन किया जा सकता है?

नहीं, खाली पेट पठानी लोध्र का सेवन नहीं किया जा सकता है। खाली पेट लोध्र का सेवन करने से पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं (4

लोध्र के फायदे होने में कितना समय लग सकता है?

एक औषधीय जड़ी-बूटी के तौर पर लोध्र का इस्तेमाल कई समस्याओं के इलाज मे लाभकारी माना जाता है, लेकिन हर व्यक्ति पर इसका असर अलग तरीके से हो सकता है। कुछ लोगों में इसका हफ्ते भर में नजर आ सकता है। वहीं, कुछ लोगों में इसका असर नजर आने में समय लग सकता है। इसलिए, ऐसा स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है कि लोध्र के फायदे नजर आने में कितना समय लग सकता है।

संदर्भ (Sources)

8 Sources

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  1. THE AYURVEDIC PHARMACOPOEIA OF INDIA
    http://www.ayurveda.hu/api/API-Vol-1.pdf
  2. PHYTO-PHARMACOLOGICAL REVIEW OF SYMPLOCOS RACEMOSA BARK
    https://www.jbino.com/docs/Issue04_12_2018.pdf
  3. Management of Diabetes mellitus and its complications by Lodhra: A review
    https://core.ac.uk/download/pdf/266975289.pdf
  4. Lodhra- A Single Remedy For Different Ailments
    https://citeseerx.ist.psu.edu/viewdoc/download?doi=10.1.1.863.3065&rep=rep1&type=pdf
  5. A comprehensive analysis on Symplocos racemosa Roxb.: Traditional uses botany phytochemistry and pharmacological activities
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/26851499/
  6. A Critical Analysis of Dentation and Dental Care in Ayurveda
    https://www.omicsonline.org/open-access/a-critical-analysis-of-dentation-and-dental-care-in-ayurveda-2167-1206-1000175.php?aid=44436
  7. Polycystic ovary syndrome
    https://medlineplus.gov/ency/article/000369.htm
  8. ANTI-OXIDANT ANDANTI-CANCER POTENTIAL OF SYMPLOCOS RACEMOSA BARK AGAINST HEP3B CELL LINE
    https://ijpsr.com/bft-article/anti-oxidant-andanti-cancer-potential-of-symplocos-racemosa-bark-against-hep3b-cell-line/?view=fulltext
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