नसों की कमजोरी – कारण, लक्षण और उपचार – Nervous Weakness in Hindi

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अस्त-व्यस्त और अनियंत्रित जीवनशैली के नकारात्मक प्रभाव किसी भी रूप में सामने आ सकते है। नसों की कमजोरी भी उसी में शामिल है। नसों की कमजोरी तंत्रिका संबंधी विकार है, जिसके कई कारण हो सकते हैं। इस बारे में हम आगे विस्तार से चर्चा करेंगे। यह विकार गंभीर इसलिए भी है, क्योंकि यह कई मानसिक और शारीरिक तकलीफों का कारण बन सकता है, जैसे तनाव, बदन दर्द, अनिंद्रा व थकान आदि। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो इसके परिणाम घातक भी हो सकते हैं। इस लेख में हमारे साथ जानिए नसों की कमजोरी के कारण, इसके लक्षण और इससे निजात पाने के विभिन्न उपचारों के बारे में।

विषय सूची


क्या है नसों की कमजोरी – What is Nervous Weakness in Hindi

नसों की कमजोरी या न्यूरोपैथी एक मेडिकल टर्म है, जो विभिन्न प्रकार के तंत्रिका विकारों को परिभाषित करती है। यह विकार आपके शरीर के एक या कई हिस्सों को प्रभावित कर नसों को कमजोर बना देता है। हालांकि, कुछ व्यक्तियों में यह समस्या अस्थाई हो सकती है, जबकि कुछ के लिए जीवन भर का दुख साबित हो सकता है। नीचे जानिए नसों की कमजोरी के विभिन्न कारणों के बारे में।

नसों की कमजोरी के आम कारण – Causes of Nervous Weakness in Hindi

नसों की कमजोरी के सबसे आम कारण हैं:

  • दर्द-सूजन से प्रभावित नस
  • नसों पर दवाब
  • नस को किसी प्रकार की क्षति
  • विकृत (Degenerated) नस
  • तंत्रिका कोशिकाओं (nerve cells) पर ट्यूमर का विकास
  • नसों पर विषाक्त पदार्थों का प्रभाव
  • अनियंत्रित जीवनशैली और खानपान
  • तनाव

विभिन्न रोगों के आधार पर नसों की कमजोरी भी अलग-अलग हो सकती है, जैसे :

  • बैक्टीरिया, वायरस या अन्य परजीवियों (Parasites) के कारण होने वाले तंत्रिका संक्रमण (Nerve Infection)।
  • नसों को नुकसान पहुंचाने वाली ड्रग्स।
  • पोषक तत्वों की कमी।
  • जन्मजात दोष या आनुवंशिक असामान्यताएं, जो नसों की क्षमता पर असर डालती हैं।

आगे जानिए नसों की कमजोरी के लक्षणों के बारे में।

नसों की कमजोरी के संकेत और लक्षण – Signs And Symptoms Of Nervous Weakness in Hindi

  • गुदगुदी की अनुभूति
  • चोट या दर्द
  • तनाव
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system)
  • थकान
  • सूंघने, देखने, स्वाद, स्पर्श या सुनने की शक्ति कमजोर होना
  • ज्ञान संबंधी समस्याएं (Cognitive Poblems)
  • मांसपेशियों की कमजोरी
  • कंपकंपी

नसों की कमजोरी के लक्षण के बाद जानिए नसों से जुड़े रोगों के बारे में।

कमजोर या क्षतिग्रस्त नसें विभिन्न बीमारियों को भी जन्म दे सकती हैं, नीचे जानिए उन रोगों के बारे में –

नर्वस सिस्टम से जुड़े रोगों की सूची – List Of Nervous System Diseases in Hindi

साइटिका : नसों पर दवाब पड़ने पर साइटिका की समस्या हो सकती है।

ल्टीपल स्क्लेरोसिस : यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो नसों की इन्सुलेटिंग शीथ (माइलिन शीथ) के जरिए प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करती है।

बेल्स पाल्सी : इस बीमारी में चेहरे के एक तरफ की नसों में सूजन आ जाती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

डायबेटिक न्यूरोपैथी : यह स्थिति डायबिटीज मेलिटस (diabetes mellitus) के लंबे और बिना उपचार के मामलों का एक परिणाम है।

स्ट्रोक : ब्रेन टिशू के हिस्से पर रक्त के थक्के (Blood Clot) बनने से स्ट्रोक की स्थिति बन जाती है।

पार्किंसन रोग : यह न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार (Neurodegenerative disorder) है, जो मस्तिष्क की कुछ नसों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है।

नसों की कमजोरी कई रोगों का कारण बन सकती है, इसलिए समय रहते उपचार करना जरूरी है। नीचे जानिए इस गंभीर समस्या से निपटने के सटीक प्राकृतिक उपचारों के बारे में।

1. आयुर्वेदिक तेल से मालिश

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सामग्री
  • बादाम या तिल का तेल
कैसे करें इस्तेमाल
  • इच्छानुसार तेल ( बादाम या तिल ) का चुनाव करें और उसे थोड़ा गर्म कर लें।
  • अब हल्के गर्म तेल से शरीर की मालिश करें या करवाएं।
  • आधे घंटे तेल शरीर पर लगा रहने दें और बाद में स्नान कर लें।
कितनी बार करें

आप रोजाना तेल से मालिश कर सकते हैं।

कैसे है लाभदायक

आयुर्वेदिक तेल की मालिश नसों की कमजोरी के साथ-साथ कई बीमारियों का एक प्रसिद्ध उपचार है। तेल मालिश की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इससे शरीर की नसों और मस्तिष्क को आराम मिलता है, जिससे आप ऊर्जावान महसूस करेंगे (1)।

2. सेंधा नमक

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सामग्री
  • एक कप सेंधा नमक
  • पानी
कैसे करें इस्तेमाल
  • नहाने के पानी में एक कप सेंधा नमक मिलाएं।
  • अब इस पानी में 15 से 20 मिनट तक शरीर को डुबोएं।
कितनी बार करें

सप्ताह में कम से कम तीन बार करें।

कैसे है लाभदायक

सेंधा नमक का स्नान आमतौर पर मांसपेशियों के दर्द और सूजन को दूर करने के लिए किया जाता है । यह खास नमक एंटीइंफ्लेमेटरी और हाई मैग्नीशियम तत्वों से समृद्ध होता है, जो नसों को कमजोरी से बचा सकता है (2)।

3. अश्वगंधा

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सामग्री
  • अश्वगंधा की खुराक (300-1000mg)
कैसे करें इस्तेमाल

दैनिक आधार पर अश्वगंधा की खुराक लें।

कितनी बार करें

एक महीने के लिए प्रतिदिन दो-तीन बार।

कैसे है लाभदायक

अश्वगंधा के कई फायदे हैं। यह तनाव से छुटकारा दिलाता है – जो नसों की कमजोरी का एक मुख्य कारण है (3), (4)।

4. वॉटर थेरेपी

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सामग्री
  • ठंडा और गर्म पानी
कैसे करें इस्तेमाल
  • सामान्य स्नान के बाद ठंडा पानी शरीर पर डालें।
  • हर दूसरे दिन साफ वॉशक्लॉथ को ठंडे पानी में भिगो दें।
  • शरीर पर इस ठंडे वॉशक्लॉथ को रगड़ें और फिर गर्म कपड़े पहनें।
  • आप एक दिन ठंडे पानी से स्नान और एक दिन गर्म पानी से स्नान की विधि का पालन कर सकते हैं। गर्म पानी से स्नान के बाद ठंडा पानी शरीर पर जरूर डालें।
कितनी बार करें

ऐसा रोजाना करें।

कैसे है लाभदायक

दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए वॉटर थेरेपी का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। नसों की कमजोरी के लिए पानी का इस प्रकार इस्तेमाल एक सटीक उपचार है। बारी-बारी से ठंडा और गर्म पानी शरीर पर डालने से कमजोर व क्षतिग्रस्त नसों को आराम मिलता है (5)।

5. सूरज की रोशनी

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नसों की कमजोरी से राहत पाने के लिए आप रोजाना कुछ देर धूप में बैठ सकते हैं। नसों की कमजोरी विटामिन-डी की कमी के कारण भी होती है और सूरज की किरणें विटामिन-डी का एक बड़ा स्रोत हैं, जो शरीर में विटामिन-डी की मात्रा को बढ़ाने का काम करती हैं (6)।

सावधानी

दोपहर में लंबे समय तक धूप में बाहर जाने से बचें, क्योंकि इससे आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है (7)।

नसों की कमजोरी के लिए जरूरी खाद्य पदार्थ

1. विटामिन

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नसों की कमजोरी से निजात पाने के लिए आप विटामिन-बी और डी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं। ये भोजन आपकी रीढ़ और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने का काम करेंगे। विटामिन-बी और डी एंटी इंफ्लेमेटरी गुण से समृद्ध होते हैं, जो शरीर के अंदर की सूजन को कम करने का काम करते हैं (8), (9)।

विटामिन-डी भी नसों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। विटामिन-डी शरीर को कैल्शियम सोखने में मदद करता है। शरीर में विटामिन की मात्रा बढ़ाने के लिए आप मछली, रोटी, साबुत अनाज, सब्जियां, ब्राउन राइस, पनीर और अंडे की जर्दी जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं।

2. मैग्नीशियम

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स्वस्थ नर्वस सिस्टम के लिए मैग्नीशियम महत्वपूर्ण पोषक तत्व है (10)। यह एंटी इंफ्लेमेटरी गुण से समृद्ध होता है, जो नसों की सूजन को दूर करने का काम करता है। साथ ही संपूर्ण तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को आराम देने के लिए सेरोटोनिन के उत्पादन को भी बढ़ावा देता है। शरीर में मैग्नीशियम की मात्रा बढ़ाने के लिए आप डार्क चॉकलेट, हरी पत्तेदार सब्जियां, केला और खुबानी आदि का सेवन कर सकते हैं।

3. ओमेगा-3 फैटी एसिड

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ओमेगा-3 फैटी एसिड पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड होता है, जो तंत्रिका तंत्र (Nervous System) के लिए किसी वरदान से कम नहीं है (11), (12)। यह एंटी इंफ्लेमेटरी गुण से समृद्ध होता है और कमजोर व क्षतिग्रस्त नसों के कारण नसों की विभिन्न बीमारियों का उपचार करने में मदद करता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए आप मैकेरल, सीप, सार्डिन, साल्मन और टूना जैसे सी फूड्स का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अपने चिकित्सक से परामर्श कर ओमेगा-3 फैटी एसिड के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।

4. कैमोमाइल चाय

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सामग्री
  • एक-दो चम्मच सूखा कैमोमाइल
  • एक कप पानी
  • स्वाद के लिए शहद
कैसे करें इस्तेमाल
  • एक कप पानी में सूखे कैमोमाइल को डालें और पांच मिनट के लिए उबालें।
  • अब पानी को हल्का ठंडा होने दें और स्वादानुसार शहद मिलाएं।
  • फिर आराम से कैमोमाइल चाय का आनंद लें।
कितनी बार करें

कैमोमाइल चाय रोजाना तीन से चार बार पिएं।

कैसे है लाभदायक

नसों की कमजोरी का एक अहम कारण तनाव है। कैमोमाइल चाय दर्दनिवारक की तरह काम करती है, जिससे तनाव काफी हद तक कम हो जाता है (13)। कैमोमाइल को अपने एंटी इंफ्लेमेटरी गुण के लिए भी जाना जाता है, जो कमजोर और क्षतिग्रस्त नसों का उपचार करने में कारगर है। नसों की कमजोरी का इलाज करने के लिए आप कैमोमाइल चाय का उपायोग कर सकते हैं।

5. ग्रीन टी

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सामग्री
  • एक ग्रीन टी बैग
  • एक कप गर्म पानी
  • शहद
कैसे करें इस्तेमाल
  • एक ग्रीन टी बैग लें और इसे पांच-दस मिनट के लिए एक कप गर्म पानी में डुबोएं।
  • पानी थोड़ा ठंडा होने पर स्वादानुसार शहद मिलाएं।
  • अब आराम से ग्रीन टी का आनंद लें।
कितनी बार करें

आप रोजाना कम से कम तीन बार ग्रीन टी पी सकते हैं।

कैसे है लाभदायक

ग्रीन टी के कई लाभ हैं। यह स्वस्थ तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को बढ़ावा देता है। इसमें एल-थीनिन नाम का एक तत्व होता है, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है (14)। इसके अलावा, ग्रीन टी तनाव संबंधी विकारों से भी निपटने में मदद करती है (15)।

नसों की कमजोरी से राहत पाने के सटीक व्यायाम –

1. योग

  • सर्व हित आसन
कैसे है लाभदायक

यह योगासन करने से नसें शांत होती हैं और सांस लेना भी आसान हो जाता है।

कितनी बार दोहराएं

पांच बार

  • शशांकासन

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कैसे है लाभदायक

शशांकासन आपके सिर में रक्त संचालन में सुधार करता है और मस्तिष्क व आंखों की कार्यप्रणाली को बेहतर करता है।

कितनी बार दोहराएं

तीन से चार बार

  • खाटू प्रणाम

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कैसे है लाभदायक

यह आसन आपकी रीढ़ व मांसपेशियों को मजबूत करता है और सिर में रक्त संचालन को बेहतर करता है। साथ ही तंत्रिका तंत्र के कामकाज को बढ़ावा देता है।

कितनी बार दोहराएं

चार से छह बार

2. नंगे पैर चलना

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कैसे है लाभदायक

नसों की कमजोरी से राहत पाने के लिए आप नंगे पांव नम जमीन या रेतीले समुद्री तट पर चल सकते हैं। माना जाता है कि धरती की सतह से इलेक्ट्रॉन आपके तनाव और शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं।

कितनी देर तक चलें

30 मिनट

3. गहरी सांस लेना

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कैसे है लाभदायक

तनाव और थकान से मुक्त होने के लिए आप गहरी सांस लेने का अभ्यास कर सकते हैं। यह अभ्यास आपको तनाव से संबंधित विकारों से निपटने में मदद करेगा। नसों की कमजोरी का इलाज करने के लिए आप यह उपाय कर सकते हैं।

अवधि

पांच से दस मिनट

कितनी बार दोहराएं

दो से तीन बार

उपचार, आहार और व्यायाम के अलावा, हम आपको नीचे कमजोर नसों से निपटने के कुछ अन्य सुझाव दे रहे हैं –

  • धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों से दूर रहें।
  • शरीर को भरपूर आराम दें।
  • कोई शारीरिक समस्या है, तो उसका इलाज करवाएं।
  • तरल पदार्थ और पानी पिएं।
  • शराब का सेवन न करें।
  • ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाएं।
  • बिना डॉक्टरी परामर्श के कोई भी दवा न लें।

स्वस्थ शरीर के लिए नर्वस सिस्टम का मजबूत रहना जरूरी है। अगर आप यहां बताए गए किसी भी लक्षण को महसूस करते हैं, तो प्राकृतिक उपचारों का सहारा ले सकते हैं। वहीं, अगर समस्या गंभीर नजर आती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आप इस समस्या के प्रति जितना जागरूक रहेंगे नसों की कमजोरी से उतना बचे रहेंगे। आपको यह लेख कैसा लगा, हमें कमेंट बॉक्स में बताना न भूलें। अन्य जानकारी के लिए आप हमसे सवाल पूछ सकते हैं।

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Nripendra Balmiki

नृपेंद्र बाल्मीकि एक युवा लेखक और पत्रकार हैं, जिन्होंने उत्तराखंड से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर (एमए) की डिग्री प्राप्त की है। नृपेंद्र विभिन्न विषयों पर लिखना पसंद करते हैं, खासकर स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर इनकी पकड़ अच्छी है। नृपेंद्र एक कवि भी हैं और कई बड़े मंचों पर कविता पाठ कर चुके हैं। कविताओं के लिए इन्हें हैदराबाद के एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

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