नीलगिरी तेल के फायदे और नुकसान – Eucalyptus Oil (Nilgiri Tel) Benefits and Side Effects in Hindi

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ऐसे कई तेल हैं, जिनका इस्तेमाल त्वचा और बालों के साथ ही सेहत के लिए भी कई तरह से उपयोगी माना जाता है। स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल में हम ऐसे ही तेल के बारे में बता रहे हैं, जो सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से बचाए रखने में मदद कर सकता है। इस गुणकारी तेल का नाम है यूकेलिप्टस, जिसे हिंदी में नीलगिरी तेल भी कहा जाता है। यह तेल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम करने और उसके लक्षणों से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि हम यहां नीलगिरी तेल के फायदे, उपयोग और नुकसान के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
चलिए, सबसे पहले हम नीलगिरी तेल के फायदे के बारे में जानते हैं।

नीलगिरी तेल के फायदे

1. साइनस, कोल्ड और फ्लू को करता है कम

नीलगिरी का तेल कई प्रकार की समस्याओं को दूर करने के लिए फायदेमंद हो सकता है। उन्हीं समस्याओं में साइनस (सांस लेने में तकलीफ), कोल्ड और फ्लू की समस्या भी शामिल है। वायरल इंफेक्शन की वजह से होने वाली ये समस्याएं तकलीफ देती हैं (1) (2)। इन तीनों समस्याओं को दूर करने के लिए नीलगिरी का तेल फायदेमंद हो सकता है।
एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, नीलगिरी के तेल में एंटीवायरल गुण पाया जाता है। यह गुण वायरल इंफेक्शन को फैलाने वाले वायरस के प्रभाव को कम करके इन समस्याओं से कुछ हद तक राहत दिला सकता है (3)।

यही वजह है कि खांसी होने पर इस्तेमाल में लाए जाने वाले वेपर रब में भी नीलगिरी के तेल का उपयोग किया जाता है (1)। इसके अलावा, नीलगिरी तेल का उपयोग नासिका मार्ग और फेफड़ों को साफ करने में भी किया जा सकता है। इस तेल में डीकन्जेस्टेंट (एक प्रकार की सर्दी-खांसी की दवा) प्रभाव भी होता है। इससे नाक के श्वसन मार्ग में जमे बलगम के साफ होने से साइनसाइटिस से निपटने में मदद मिल सकती है (4)।

2. गले में खराश का इलाज

गले में खराश होने के कई कारण हो सकते हैं और इस समस्या के कारण लोग असहज व बीमार होने जैसा अनुभव कर सकते हैं। इस परेशानी को कम करने के लिए नीलगिरी का तेल लाभदायक हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, नीलगिरी के तेल में सिनेओल (Cineole) नामक टेरपेनॉइड ऑक्साइड (terpenoid oxide), एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं। नीलगिरी के तेल में पाए जाने वाले ये गुण खांसी और गले में होने वाली खराश को दूर करने में फायदेमंद हो सकते हैं (4)।

3. दर्द और सूजन में नीलगिरी तेल के फायदे

कई प्रकार के संक्रमण और शारीरिक गतिविधी के कारण दर्द और सूजन की समस्याएं हो सकती हैं। इस दौरान नीलगिरी का तेल इन समस्या को दूर करने में कारगर हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के अनुसार, नीलगिरी तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक (दर्द-निवारक) गुण पाए जाते हैं। नीलगिरी में पाए जाने वाले ये गुण जहां एक ओर दर्द को कम करने में फायदेमंद हो सकते हैं, वहीं सूजन जैसी तकलीफदेह स्थिति में भी कुछ हद तक सुधार कर सकते हैं (5)।

4. मुंहासे व अन्य त्वचा संक्रमणों से राहत

नीलगिरी का तेल त्वचा के लिए भी कई प्रकार से फायदेमंद हो सकता है। यह मुंहासों को दूर करने के साथ-साथ घाव भरने, सूजन को कम करने, जलन और फाेड़ों को ठीक करने में उपयोगी हो सकता है। इस संबंध में एनसीबीआई ने अपनी वेबसाइट पर शोध प्रकाशित किया है। इस शोध के अनुसार, यूकेलिप्टस की कई प्रजातियों में मेथनॉल-डाईक्लोरोमेथेन (methanol-dichloromethane) नामक अर्क पाया जाता है। इस अर्क में एंटीएक्ने गुण होते हैं। वहीं, चूहाें पर यूकेलिप्टस ऑयल प्रयोग करने से सिद्ध हुआ कि यह तेल ग्रंथियों के आकार को सिकोड़ कर सीबम के उत्पादन को कम कर सकता है, जिससे मुंहासों को फैलने का मौका नहीं मिलता (6)।
एक अन्य शोध में पाया गया है कि नीलगिरी के तेल का उपयोग त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं के इलाज के लिए किया जा सकता है। इस तेल से बैक्टीरिया, फंगल या वायरस के कारण होने वाले संक्रमण को कुछ हद तक दूर किया जा सकता है। इसके अलावा, त्वचा की सूजन, एक्जिमा, झुर्रियां और घाव भरने के साथ ही फंगल इंफेक्शन की समस्या को खत्म करने के लिए भी नीलगिरी का तेल फायदेमंद हो सकता है (7)।

5. फेफड़ों के रोगों में नीलगिरी तेल के फायदे

नीलगिरी के तेल का उपयोग रोगों को ठीक करने के लिए लंबे समय से किया जाता रहा है। यही वजह है कि लोग इसका इस्तेमाल फेफड़े के रोग के लिए भी करते हैं। दरअसल, नीलगिरी तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-इंफेक्टिव प्रभाव पाए जाते हैं, जो फेफड़े की सूजन और इंफेक्शन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, यह फेफड़ों में रोग व संक्रमण उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं को पनपने से रोकने में भी मदद कर सकता है (8)।

6. फंगल संक्रमण में नीलगिरी तेल के फायदे

फंगल इंफेक्शन को दूर करने या फिर इनके प्रभाव को कम करने के लिए भी नीलगिरी के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल, इसमें मौजूद एंटीफंगल गुण की वजह से इसे पेनिसिलियम डिजीटम (Penicillium digitatum) व एस्परगिलस फ्लैवस (Aspergillus flavus) जैसे कई तरह के फंगस से लड़ने में प्रभावकारी पाया गया है। ये फंगस कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकते हैं (9)। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, नीलगिरी तेल में पाए जाने वाले ये गुण पैर के नाखून में होने वाले संक्रमण के साथ ही कई प्रकार के फंगल इंफेक्शन के बढ़ने से रोकने में मदद कर सकते हैं (10)।

नीलगिरी के तेल के फायदे के बाद हम यहां इसे उपयोग करने के तरीके बता रहे हैं।

नीलगिरी तेल का उपयोग

नीलगिरी तेल का उपयोग किसी भी खाद्य पदार्थों में नहीं किया जाता है, लेकिन इसे उपयोग करने के अन्य तरीके भी हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • इसका उपयोग रूम फ्रेशनर के रूप में कर सकते हैं।
  • नीलगिरी तेल का उपयोग बतौर माउथ वाश किया जा सकता है।
  • नीलगिरी तेल का इस्तेमाल दांतों को साफ करने के लिए भी कर सकते हैं।
  • अक्सर नीलगिरी तेल का इस्तेमाल सोना बाथ के दौरान शरीर पर लगाने के लिए भी किया जा सकता है।
  • इसको बालों में लगाने वाले तेल के साथ मिलाकर बालों की समस्या काे दूर किया जा सकता है।
  • दर्द के दौरान इस तेल को दर्द वाले स्थान पर लगाने से भी लाभ मिल सकता है।

मात्रा : नीलगिरी तेल को किसी और चीज में मिक्स किए बिना करीब 3.5 एमएल तक लेने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, इसे पानी में या फिर किसी अन्य चीज में मिलाकर लेना चाहिए। इसे कैसे लेने है, इस बारे में डॉक्टर ही बेहतर बता सकते हैं (11)।

उपयोग के बाद यहां हम नीलगिरी तेल के नुकसान के बारे में बता रहे हैं।

नीलगिरी तेल के नुकसान

नीलगिरी के तेल की अधिक मात्रा लेना हानिकारक हो सकता है। इससे होने वाले कुछ दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं।

  • यूकेलिप्टस तेल को बिना पानी या किसी अन्य चीज में मिक्स किए सेवन करने पर पेट में दर्द, जलन, चक्कर आना, मांसपेशियों की कमजोरी, आंख की पुतलियां छोटी हो जाने व घुटन का अहसास होने की आशंका हो सकती है (11)।
  • इस तेल के अधिक मात्रा में सेवन करने से मतली, उल्टी और दस्त का खतरा भी हो सकता है (11)।
  • इसे किसी और चीज में मिक्स किए बिना त्वचा पर लगाने से एलर्जी की समस्या भी हो सकती है (11)।
  • गर्भवती महिलाओं व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। यह उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
  • कुछ वैज्ञानिक शोध का मानना है कि नीलगिरी तेल का सेवन नहीं करना चाहिए, वरना यह प्राणघातक साबित हो सकता है (13)।

दोस्तों, आपने इस आर्टिकल में नीलगिरी के तेल के बारे में जाना। अगर चिकित्सक की सलाह से इस तेल का उपयोग किया जाए, तो यह तेल अच्छा घरेलू उपचार साबित हो सकता है। साथ ही ध्यान रखें कि यह तेल सिर्फ बीमारी से उबरने में मदद कर सकता है, लेकिन मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प साबित नहीं हो सकता। आप चिकित्सक की सलाह से अपनी दिनचर्या में नीलगिरी के तेल को शामिल कर इसके फायदाें का लाभ ले सकते हैं। नीलगिरी के तेल के ऊपर लिखा यह आर्टिकल आपके लिए किस प्रकार से फायदेमंद रहा उसे नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमारे साथ जरूर साझा करें।

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Saral Jain

सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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