निर्गुण्डी के फायदे, उपयोग और नुकसान – Nirgundi Benefits and Side Effects in Hindi

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प्रकृति ने हमें उम्दा सेहत के लिए कई प्रकार की जड़ी-बूटियों से नवाजा है। इनमें से कुछ का उपयोग हम स्वस्थ रहने के लिए करते भी हैं, लेकिन कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जिनके गुणों से हम अनजान हैं। उन्हीं में से एक है निर्गुण्डी। इसका इस्तेमाल सालों से औषधि के रूप में कई शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता रहा है। यह किस तरीके से काम करता है और निर्गुण्डी के फायदे क्या हैं, जानने के लिए स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल को पढ़ें। यहां निर्गुण्डी के उपयोग के साथ ही हम सावधानी के तौर पर निर्गुण्डी के नुकसान के बारे में भी बता रहे हैं।

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आर्टिकल में सबसे पहले हम बता रहे हैं कि निर्गुण्डी क्या है।

निर्गुण्‍डी क्‍या है – What Is Nirgundi in Hindi

निर्गुण्डी औषधीय गुणों से युक्त एक पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम विटेक्स नेगुंडो (Vitex Negundo) है। यह एक तरह की झाड़ी होती है, जो पूरे भारत में पाई जाती है। इसे हिन्दी में निर्गुण्डी या संभालू और संस्कृत में नीलपुष्पा कहा जाता है। आम तौर पर इसे चेस्ट (Chaste) ट्री के नाम से भी जाना जाता है (1)

इस पौधे व झाड़ी के हर भाग का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है, जैसे इसके पत्ते, बीज और जड़। इसमें कई सारे बायोएक्टिव कंपाउंड होते हैं, जो एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सिडेंट, एंटी डायबिटिक, एंटी कैंसर, एंटी माइक्रोबियल प्रभाव दिखाते हैं। ये सभी मिलकर व्यक्ति को सेहतमंद रखने और बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं (1)। नीचे हम आपको सेहत के लिए निर्गुण्डी के फायदों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं ।

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अब सेहत के लिए निर्गुण्डी के फायदे क्या हो सकते हैं, इस पर एक नजर डाल लेते हैं।

निर्गुण्डी के फायदे – Benefits of Nirgundi in Hindi

सेहत के लिए निर्गुण्डी के फायदे कई हैं, जिनके बारे में हम नीचे विस्तार से बता रहे हैं। बस ध्यान रहें कि निर्गुण्डी का उपयोग शारीरिक समस्या से बचाव के लिए किया जाना चाहिए। गंभीर बीमारी के इलाज के लिए इसपर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसके लिए डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।

1. सूजन को कम करने के लिए

निर्गुण्डी का उपयोग सूजन की समस्या में फायदेमंद हो सकता है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर पब्लिश एक शोध के अनुसार, इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है। यह प्रभाव सूजन को कम करने में मददगार हो सकता है। साथ ही यह गठिया से राहत भी दिला सकता है (2)। गठिया का एक लक्षण जोड़ों में सूजन भी है (3)। इसी वजह से इसे सूजन के लिए प्रभावी माना जाता है।

2. सिरदर्द के लिए

सिरदर्द की समस्या को दूर करने के लिए भी निर्गुण्डी का उपयोग सालों से किया जाता रहा है। इस विषय पर हुए शोध से पता चलता है कि निर्गुण्डी की पत्तियों में एनाल्जेसिक यानी दर्द निवारक गुण होता है। इस प्रभाव के कारण यह सिरदर्द को कम कर सकता है (4)

3. मासिक धर्म में

निर्गुण्डी का उपयोग मासिकधर्म चक्र को नियमित करने के लिए भी किया जा सकता है। इस विषय में चूहाें पर हुए शोध के अनुसार, निर्गुण्डी की पत्तों में ओलिगोमेनोरिया (Oligomenorrhea) की स्थिति को ठीक करने का गुण होता है (5)

ऑलिगोमेनोरिया का मतलब है मासिक धर्म का अनियमित होना और रक्त का प्रवाह सामान्य न होना (6)। इसी वजह से मासिक धर्म को नियमित करने के लिए निर्गुण्डी का इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि निर्गुण्डी में मौजूद कौन-सा तत्व इसमें मदद करता है।

4. महिलाओं की प्रजनन क्षमता के लिए

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) के कारण महिलाओं में प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इस समस्या में निर्गुण्डी का उपयोग फायदेमंद हो सकता है। चूहों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, निर्गुण्डी के अर्क में मौजूद फ्लेवोनॉइड्स में एंटीएंड्रोजेनिक प्रभाव होता है। यह फर्टिलिटी स्टेटस में सुधार कर सकता है। साथ ही एंटी पीसीओएस के रूप में कार्य करता है, जिससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता में सुधार हो सकता है (7)

5. घाव भरने के लिए

निर्गुण्डी घाव भरने में भी मददगार हो सकता है। इसके पौधे के लगभग सभी हिस्सों का इस्तेमाल घाव भरने के लिए किया जा सकता है (8)। इसके अलावा, निर्गुण्डी का तेल भी पुराने घाव को ठीक कर सकता है। इसमें घाव को साफ करने और उसे भरने वाले गुण होते है। साथ ही यह एंटीबैक्टीरियल प्रभाव से भरपूर होता है, जो घाव में पनपने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर सकता है (9)

6. यौन स्वास्थ्य

निर्गुण्डी का उपयोग यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। रिसर्च से पता चलता है कि यह  पुरुषों की यौन क्षमता और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को बेहतर कर सकता है। हालांकि, शोध में इस बात का भी जिक्र है कि इसकी पत्तियों का रस यौन भावनाओं को कम कर सकता है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें (10)

7. स्तनपान के लिए

स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने के अलावा निर्गुण्डी स्तन का दूध बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है। एक शोध में पाया गया है कि निर्गुण्डी को थोड़ी मात्रा में लेने पर यह स्तन के दूध को बढ़ा सकता है। वहीं, अगर इसका सेवन अधिक किया जाता है, तो यह दूध की मात्रा को कम कर सकता है (10)। निर्गुण्डी का कौन-सा गुण दूध के उत्पादन में मदद करता है, यह शोध का विषय है।

8. गाउट

गाउट एक तरह का अर्थराइटिस है। इस समस्या को कम करने में भी निर्गुण्डी को फायदेमंद माना जाता है। दरअसल, गाउट इंफ्लेमेटरी बीमारी है। इससे राहत दिलाने में इसके पत्तों से बना तेल, निर्गुण्डी के बीज और पत्ते का जूस सभी मदद कर सकते हैं। माना जाता है कि इनमें एंटीइंफ्लेमेटरी प्रभाव होता है, जो गाउट और अर्थराइटिस दोनों से राहत दिला सकता है (10)

9. छालों (ब्लिस्टर) के लिए

निर्गुण्डी का उपयोग छालों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। एक शोध में बताया गया है कि इसके पत्ते का इस्तेमाल सालों से छालों और फफलों से राहत पाने के लिए लोग करते रहे हैं (10)। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इसका कौन-सा प्रभाव इसमें लाभदायक होता है।

10. नसों से जुड़ी समस्या के लिए

निर्गुण्डी का उपयोग नसों से जुड़ी समस्या को दूर करने के लिए भी किया जा सकता है। शोध में पाया गया कि यह नसों की इंफ्लेमेशन को कम कर सकता है। साथ ही निर्गुण्डी से नस संबंधी साइटिका की समस्या में होने वाले दर्द और सूजन को भी कम किया जा सकता है (11)

11. एलिफेंटायसिस (हाथी पांव)

एलिफेंटायसिस की समस्या को दूर करने के लिए भी निर्गुण्डी का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है (12)। दरअसल, यह एक ऐसा बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मच्छरों के काटने से हो सकता है। इसके कारण सूजन की वजह से शरीर का कोई भी हिस्सा असामान्य रूप से बढ़ने लगता है (13)

इस समस्या से एनाल्जेसिक और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण कुछ राहत दिला सकते हैं (13)। यह दोनों गुण निर्गुण्डी में होते हैं, जो दर्द और सूजन को थोड़ा कम कर सकते हैं (14)। बस ध्यान रहे कि यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें डॉक्टरी इलाज जरूरी है। इसके लिए सिर्फ निर्गुण्डी पर निर्भर नहीं रहा जाना चाहिए।

12. त्वचा संबंधी समस्याओं में

सेहत के साथ ही निर्गुण्डी का उपयोग त्वचा के लिए भी किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, निर्गुण्डी त्वचा संबंधी बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि स्किन कैंसर की वजह से दिखने वाले बढ़ती उम्र के लक्षणों में सुधार कर सकता है। इसके अलावा, यह स्किन अल्सर और एलर्जी को भी ठीक कर सकता है (15)

13. बालों के लिए

सेहत और त्वचा के साथ ही निर्गुण्डी का उपयोग बालों की ग्रोथ और मजबूती के लिए भी किया जा सकता है। दरअसल, निर्गुण्डी की पत्तियों का जूस हेयर टॉनिक की तरह काम कर सकता है। इसका उपयोग नारियल तेल के साथ करने पर यह गंजेपन और डेड्रफ की समस्या में भी फायदेमंद हो सकता है। इतना ही नहीं, निर्गुण्डी का पेस्ट बालों को बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है (10)। इसमें मौजूद कौन-सा तत्व इसमें मददगार है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

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आर्टिकल के इस हिस्से में हम बता रहे हैं कि निर्गुण्डी का उपयोग कैसे किया जा सकता है।

निर्गुण्डी का उपयोग – How to Use Nirgundi in Hindi

अच्छी सेहत के लिए निर्गुण्डी का उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है। यहां हम आपको इसके उपयोग और मात्रा के बारे में विस्तार से बता रहे हैं (16)

  • गठिया की समस्या होने पर एक टेबल स्पून निर्गुण्डी के पत्तों का पाउडर खा सकते हैं।
  • गैस और दर्द को दूर करने के लिए इसकी पत्तियों का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं।
  • निर्गुण्डी के काढ़े का उपयोग प्रसव के बाद स्नान करने के लिए भी किया जा सकता है।
  • फोड़े और फुंसी की समस्या होने पर निर्गुण्डी का लेप बनाकर लगा सकते हैं।
  • पेशाब में जलन और गुर्दे की पथरी के लिए सप्ताह में दो बार नारियल पानी में लगभग दो चम्मच निर्गुण्डी के अर्क काे मिलाकर पी सकते हैं।
  • सर्दी, खांसी, सिरदर्द, बुखार की स्थिति में निर्गुण्डी की पत्तियों को पानी में उबालकर इसकी भाप ले सकते हैं।

मात्रा: हम बता ही चुके हैं कि निर्गुण्डी के सभी हिस्सों में औषधीय गुण होते हैं। इसी वजह से इनका सेवन अलग-अलग मात्रा में किया जाता है, जिसकी जानकारी हम नीचे दे रहे हैं। अगर किसी को शारीरिक समस्या है, तो उसे इसकी खुराक की जानकारी विशेषज्ञ से लेनी चाहिए।

  • रोजाना सूखे फल के रस की 40 मिलीग्राम मात्रा।
  • सूखी पत्तियों के अर्क की 300 से 600 मिलीग्राम मात्रा दिन में दो बार ले सकते हैं।
  • निर्गुण्डी के पत्तों से बना काढ़ा दिन में दो बार 50 से 100 ml पी सकते हैं ।
  • दिन में दो बार इसकी पत्ती का 10 से 20ml रस का सेवन किया जा सकता है।
  • निर्गुण्डी के पत्तों का 5 से 3 ग्राम पाउडर खा सकते हैं।
  • दिनभर में दो बार इसके जड़ की छाल के पाउडर का 3 से 6 ग्राम तक सेवन किया जा सकता है।
  • निर्गुण्डी के बीज का पाउडर का भी एक से तीन ग्राम तक सेवन कर सकते हैं।

बने रहें हमारे साथ

उपयोग और मात्रा के बाद जानते हैं कि निर्गुण्डी को सुरक्षित रखने के तरीके के बारे में।

निर्गुण्डी को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें – How to Store Nirgundi in Hindi

बाजार से निर्गुण्डी को पाउडर, तेल, अर्क और बूटी के रूप में खरीदा जा सकता है। वैसे तो हर पैकेट में उसकी एक्सपायरी डेट दी गई होती है। फिर भी इसे जल्दी खराब होने से बचाने के लिए इन्हें सामान्य तापमान पर रखना बेहतर होगा। इन्हें सूरज की सीधी रोशनी और नमी वाले क्षेत्र से दूर रखना चाहिए।

आगे जानते हैं कि निर्गुण्डी को कहां से खरीदा जा सकता है।

निर्गुण्डी कहां से खरीदें?

निर्गुण्डी को आयुर्वेदिक दवा की दुकान या फिर जड़ी-बूटी केंद्र से आसानी से खरीदा जा सकता है। इसके अलावा, यह बड़े सुपरमार्केट में भी मिल सकता है।

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अब निर्गुण्डी से होने वाले नुकसान पर एक नजर डाल लेते हैं।

निर्गुण्डी के नुकसान – Side Effects of Nirgundi in Hindi

निर्गुण्डी के फायदे ही नहीं, बल्कि नुकसान भी हो सकते हैं। इसी वजह से आगे हम निर्गुण्डी के नुकसान के बारे में बता रहे हैं (10)

  • निर्गुण्डी की पत्तियों का रस युवाओं की यौन इच्छा को कम कर सकता है।
  • यह हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के प्रभाव को कम कर सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन करने की सलाह नहीं दी जाती है।
  • इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से स्तन का दूध कम हो सकता है।

इस लेख में हमने निर्गुण्डी के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में बताया है। इन दोनों बातों पर गौर करके आप यह फैसला ले सकते हैं कि आपको इसे अपने दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए या नहीं। अगर कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या से जूझ रहा है, तो उसे इसका सेवन करने से पहले एक बार विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। इससे निर्गुण्डी के नुकसान से बचा जा सकता है। ऐसी ही अन्य जड़ी-बूटियों के बारे में जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहें।

16 संदर्भ (Sources):

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Saral Jain

सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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