ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार) के कारण, लक्षण और इलाज – Obsessive Compulsive Disorder (OCD) in Hindi

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कभी-कभी कुछ लोग किसी काम को लेकर इतने ज्यादा गंभीर हो जाते हैं कि उन्हें उस काम को करने की आदत हो जाती है। हालांकि, यही आदत जब सनक बन जाए तो यह चिंता का विषय हो सकता है। मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली ऐसी ही एक बीमारी है ऑब्सेसिव कपल्सिव डिसऑर्डर यानी मनोग्रसित बाध्यता विकार। ऐसे में स्टाइलक्रेज के इस लेख का विषय भी यही है। यहां हम ओसीडी के लक्षण व ओसीडी उपचार से जुड़ी जानकारी देंगे। तो ओसीडी यानी ऑब्सेसिव कपल्सिव डिसऑर्डर से जुड़ी हर विशेष जानकारी के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।

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लेख में सबसे पहले हम जानते हैं कि ओसीडी क्या है।

ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार) क्या है? – What is Obsessive Compulsive Disorder in Hindi

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) एक मानसिक विकार है, जिसमें व्यक्ति अपने मन और सोच पर काबू नहीं रख पाता है। व्यक्ति एक ही काम को करने के बारे में बार-बार सोचने लगता है या एक ही काम को बार-बार और लगातार करने लगता है। इस मनोविकार के कारण व्यक्ति को न चाहते हुए भी अनुचित विचार आने लगते हैं और उसके दिमाग में अनचाहे डर की आशंकाएं होने लगती हैं (
1)।

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर किसी भी व्यक्ति को दो तरह से प्रभावित कर सकते हैं। ऑब्सेसिव यानी किसी बात या धारणा काे लेकर जुनून होना और दूसरा कंपल्सिव यानी किसी चीज को करने के लिए मजबूर हो जाना। ये दोनों मिलकर चार प्रकार से गंभीर समस्या का कारण बन सकते हैं। देखा जाए तो ओसीडी के चार कारक हो सकते हैं या कहें तो इसे चार मुख्य कैटेगॉरी में बांटा जा सकता है। ये कुछ इस प्रकार हैं (2):

  • फोर्बिडन थाट्स यानी कामुक, हिंसक विचारों में डूबे रहना।
  • सैमैट्री यानी बार-बार किसी चीज को जांचना।
  • क्लिनिंग यानी अत्यधिक धोना या साफ करना।
  • होर्डिंग यानी अत्यधिक वस्तुएं जमा करना, आदि के विचार शामिल हैं।

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ओसीडी या मनोग्रसित बाध्यता विकार के बारे में जानने के बाद यहां हम ओसीडी के लक्षण के बारे में बता रहे हैं।

ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार) के लक्षण – Symptoms of Obsessive Compulsive Disorder in Hindi

ओसीडी वाले लोगों में ऑब्सेसिव यानी जूनून और कंपल्सिव यानी मजबूरी या दोनों के लक्षण हो सकते हैं। तो नीचे हम ओसीडी के लक्षण के बारे में विस्तार से बता रहे हैं (2) (3) (4)।

1. फोर्बिडन थाट्स – ऐसे ख्याल जो मन में नहीं आने चाहिए। ये कुछ इस प्रकार हैं:

  • वे विचार जो अक्सर यौन या हिंसक प्रकृति के होते हैं।
  • अपराधबोध, शर्म और अन्य संकट के बारे में विचार आना।
  • यौन रुचियों के बारे में लगातार पूछताछ करना।
  • लगातार चिंता में रहना।
  • खुद को नुकसान पहुंचाने की चिंता वाले विचार आना।
  • धार्मिक विचारों के बारे में जुनून जैसे – मंत्रों को बार-बार बोलना, बार-बार या घंटों-घंटों तक पूजा करना।
  • उन चीजों को छिपाना जिन्हें हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे चाकू या कोई धारदार वस्तु।

2. सिमेट्री – किसी चीज को बार-बार सही लाइन में रखना या ठीक क्रम में रहने के बावजूद उसको बार-बार ठीक करने की आदत। इनमें शामिल है:

  • बार-बार किसी चीज को जांचना।
  • अपने सामान या अन्य वस्तुओं को तब तक व्यवस्थित करने की मजबूरी जब तक वे बिल्कुल सही हैं ऐसा महसूस न करें।
  • बार-बार किसी वस्तु की गिनती करना।
  • बार-बार चेक करना कि दरवाजा ठीक तरह से बंद है या नहीं।
  • सामग्री का खुद के अनुसार व्यवस्थित नहीं होने पर मन को ठेस पहुंचना।

3. क्लिनिंग और कंटामिनेशन – बार-बार साफ सफाई करना या साफ चीजों को भी बार-बार गंदा समझकर साफ करना। ये लक्षण कुछ इस प्रकार हैं:

  • बीमारी के बारे में लगातार चिंता।
  • शारीरिक या मानसिक रूप से खुद को गंदा महसूस करने का विचार।
  • विषाक्त पदार्थों, वायरस या गंदगी के संपर्क में आने की लगातार चिंता।
  • उन वस्तुओं से छुटकारा पाने की मजबूरी जिन्हें मन में गंदा मानते हैं भले ही वे गंदे न हों।
  • दूषित वस्तुओं को धोने या साफ करने की मजबूरी महसूस होना।
  • अपने हाथों और अन्य सामग्री को बार-बार साफ करना।

4. होर्डिंग – ऐसी वस्तुओं को जमा करने की आदत जिसकी जरूरत न हो (5)। इसके अलावा, अपनी चीजों को खोने का डर या यह मानना कि अगर कोई चीज खो जाए तो कुछ बुरा हो सकता है। इनमें शामिल है:

  • लगातार चिंता करना कि कुछ फेंकने से खुद को या किसी और को नुकसान हो सकता है।
  • अपने आप को या किसी और को नुकसान से बचाने के लिए एक निश्चित संख्या में वस्तुओं को इकट्ठा करने की आवश्यकता।
  • दुर्घटनावश किसी महत्वपूर्ण या आवश्यक वस्तु को फेंकने का अत्यधिक भय, जैसे- संवेदनशील या आवश्यक जानकारी वाला मेल।
  • एक ही वस्तु को बार-बार खरीदने की मजबूरी, जबकि उस वस्तु की आवश्यकता भी न हो।
  • चीजों को फेंकने में कठिनाई क्योंकि उन्हें छूने से दूसरों को संक्रमण हो सकता है इस प्रकर से विचार आना।
  • अपनी संपत्ति की बार-बार जांच करने की बाध्यता।

ओसीडी वाले कुछ लोगों में टॉरेट सिंड्रोम या कोई अन्य टिक विकार भी हो सकता है। इसका मतलब है मांसपेशियों में अचानक संकुचन होना और फिर उनके हाव-भाव में बदलाव होना। ये लक्षण कुछ इस प्रकार हैं (3) (4):

  • आंख झपकना
  • मुंह बनाना
  • कंधे सिकोड़ना
  • सिर मरोड़ना
  • बार-बार गला साफ करना, सूंघना, या आवाज निकालना

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ओसीडी के लक्षण जानने के बाद यहां बता रहे हैं ओसीडी के कारण और जोखिम कारकों के बारे में।

ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार) के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk Factors of Obsessive Compulsive Disorder in Hindi

जानकारों की मानें तो ओसीडी का कारण अज्ञात है। हालांकि, कुछ कारक हैं, जो इस स्थिति का कारण बन सकते हैं। आमतौर पर, ओसीडी किशोरवस्था में लगभग 19 साल या उससे अधिक उम्र में उत्पन्न हो सकती है और हो सकता है 30 साल की उम्र तक इसके लक्षण न दिखे। साथ ही यह लड़कियों की तुलना में लड़कों को कम उम्र में हो सकता है (3) (4)। इसके अलावा भी कई ऐसे कारक हैं जो ओसीडी का कारण बन सकते हैं, ये कुछ इस प्रकार हैं:

  • फैमिली हिस्ट्री: यदि परिवार में किसी रिश्तेदार जैसे कि दादा, दादी, माता-पिता या फिर भाई बहन को ओसीडी की समस्या रही हो तो हो सकता है अन्य सदस्य को भी इस परेशानी का जोखिम हो। खासतौर से, परिवार के बच्चे को या आने वाली पीढ़ी में किसी को यह जोखिम हो।
  • मस्तिष्क की संरचना और कार्य: इमेजिंग के द्वारा किए गए अध्ययनों से पता चला है कि ओसीडी वाले लोगों के मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में और सामान्य लोगों के मस्तिष्क की संरचना में कुछ अंतर होता है। हालांकि, मस्तिष्क की संरचना में अंतर होना और ओसीडी के बीच संबंध को समझने के लिए अभी शोधकर्ताओं को और अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता है।
  • बचपन में घटने वाली कोई घटना: कुछ अध्ययनों के अनुसार कुछ लोगों के साथ बचपन में होने वाली कोई घटना या आघात का उनपर गहरा असर पड़ता है और इसके कारण उन्हें ओसीडी की समस्या हो सकती है। जैसे बचपन में किसी प्रकार का शोषण या कोई अप्रिय घटना।

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लेख के इस हिस्से में हम बात करेंगे ओसीडी के निदान के बारे में।

ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार) का निदान – Diagnosis of Obsessive Compulsive Disorder in Hindi

ओसीडी का निदान करना कभी-कभी कठिन हो सकता है। इसके लक्षण अन्य मानसिक विकारों जैसे एंग्जायटी डिसऑर्डर, चिंता, अवसाद की समस्या जैसे हो सकते हैं। जरूरी नहीं कि ऑब्सेसिव और कंपल्सिव से पीड़ित हर व्यक्ति को ओसीडी हो। इसके अलावा, हो सकता है ओसीडी के साथ कोई अन्य मानसिक विकार भी हो। ऐसे में ओसीडी का निदान निम्न तरीकों से किया जा सकता है (3) (4):

  • डॉक्टर मरीज या उनके परिवार वालों से कुछ सवाल-जवाब करके इसका पता लगा सकते हैं।
  • अगर मरीज का अपने विचारों या व्यवहारों पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा हो।
  • अगर दिन में कम से कम 1 घंटा इन विचारों या व्यवहारों की वजह से व्यर्थ जा रहा हो।
  • इन विचारों या व्यवहारों के कारण दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा हो।
  • इसके अलावा डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं।

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ओसीडी के निदान के बाद जानते हैं कि ओसीडी का इलाज किस प्रकार संभव है।

ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार) का इलाज – Treatment of Obsessive Compulsive Disorder in Hindi

कुछ लोगों का मानना है कि ओसीडी का घरेलू इलाज किया जा सकता है। हालांकि, ओसीडी के लिए कोई मेडिकल इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर की मदद से इसके लक्षणों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। जिससे ओसीडी वाले लोग फिर से सामान्य जीवन जीना शुरू कर सकते हैं। ये कुछ इस प्रकार हैं (4) (3) (6):

  • कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी या टॉक थेरेपी: ओसीडी वाले लोगों को आमतौर पर मनोवैज्ञानिक उपचार की सलाह दी जाती है। डॉक्टरों द्वारा मरीज को कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी) दी जाती है। यह थेरेपी एक प्रभावी ओसीडी उपचार साबित हो सकती है। इसमें मरीज से बात करके उनके नकारात्मक विचारों को बदलने की कोशिश की जा सकती है। चिकित्सा के दौरान, व्यक्ति कई बार ऐसी स्थिति से अवगत होता है जो जुनूनी विचारों को ट्रिगर कर सकता है और फिर इस दौरान धीरे-धीरे चिंता को सहन करना सीखता है। इस थेरेपी का उपयोग तनाव और चिंता को कम करने के लिए भी किया जा सकता है (4)।

ओसीडी का घरेलू इलाज के रूप में भी टॉक थेरेपी को अपनाया जा सकता है। इसमें परिवार का कोई सदस्य या मरीज का कोई दोस्त मरीज से बात कर उनकी चिंताओं को कम करने की कोशिश कर सकता है। ध्यान रहे इस तरह की स्थिति में परिवार और दोस्तों का सहयोग काफी जरूरी होता है।

  • एंटीडिप्रेसेंट दवा: सीबीटी के अलावा अवसाद को कम करने के लिए दवा के रूप में डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाईयां दे सकते हैं, जिससे उनकी चिंता की परेशानी से कुछ हद तक राहत मिल सके।

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ओसीडी उपचार के बाद आर्टिकल में यहां हम जानेंगे ओसीडी से बचने के उपाय के बारे में।

ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार) से बचने के उपाय – Prevention Tips for Obsessive Compulsive Disorder in Hindi

ओसीडी से बचाव किस प्रकार से किया जा सकता है, इस विषय पर शोध की कमी है। हालांकि, जैसे कि हमने पहले ही जानकारी दी है कि तनाव या किसी तरह का भावनात्मक आघात भी इसके जोखिम कारक हो सकते हैं। तो इस आधार पर माना जा सकता है कि तनाव से बचाव करके व स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर इसके जोखिम को कम किया जा सकता है। तो तनाव से बचाव के लिए नीचे दिए गए उपाय अपनाएं जा सकते हैं (7):

यदि कोई व्यक्ति एक दो या तीन बार चीजों को दोबारा चेक करता है तो ये सामान्य बात है। वहीं, अगर वह दिनभर में 10 बार ऐसा कर रहा है तो यह ओसीडी लक्षण हो सकता है। ऐसे में इसके लिए तुरंत मनोचिकित्सक को दिखाने की आवश्यकता हो सकती है। लेख में हमने आपको ओसीडी के लक्षण और निदान के साथ ही ओसीडी का इलाज कैसे करें इस बारे में विस्तार से बताया है। यदि किसी को भी यह समस्या है तो लेख में दी गई जानकारी उनके लिए ओसीडी उपचार के रूप में लाभदायक हो सकती है। ओसीडी लक्षण को अनदेखा बिल्कुल न करें और इस महत्वपूर्ण लेख को सभी के साथ शेयर जरूर करें।

अक्सर पूछे जाने सवाल

ओसीडी के मरीज किस प्रकार से महसूस करते हैं।

ओसीडी से पीड़ित रोगी अक्सर अपने विचारों को लेकर शर्मिंदगी महसूस कर सकते हैं। वे अपने परेशान करने वाले लक्षणों को छिपाने का प्रयास कर सकते हैं (8)।

ओसीडी के मरीज के साथ किस प्रकार की बातें नहीं करनी चाहिए?

ओसीडी के मरीज के साथ ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए, जिससे उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो या वे अधिक तनाव महसूस करने लगे।

क्या ओसीडी वाले लोग स्मार्ट होते हैं?

जैसा कि लेख में बताया गया कि ओसीडी एक मानसिक विकार है जिसके कारण वे अक्सर तनाव और चिंता से घिरे रहते हैं, लेकिन इस आधार पर हम यह नहीं कह सकते हैं, कि जिन्हें यह समस्या होती है वे स्मार्ट होते हैं या नहीं।

क्या ओसीडी सिर्फ सफाई के बारे में है?

नहीं, ओसीडी सिर्फ साफ सफाई से संबंधित नहीं। यह समस्या होने पर किसी भी काम को बार-बार करने की इच्छा होती है और मरीज को ना चाहते हुए भी यह करना पड़ता है। इसमें सिर्फ सफाई ही नहीं, बल्कि बार-बार किसी नंबर को दोहराना, किसी चीज को चेक करना और ऐसी ही अन्य चीजें शामिल हैं (3) (4)।

यदि ओसीडी का इलाज न किया जाए तो क्या होगा?

ओसीडी एक मानसिक विकार है, जिसके लक्षणों को पहचान कर सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। इससे व्यक्ति और उनके साथ रहने वाले लोग भी प्रभावित हो सकते हैं (8)।

संदर्भ (Sources):

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  1. Obsessive-Compulsive Disorder
    https://www.nimh.nih.gov/health/topics/obsessive-compulsive-disorder-ocd
  2. Symptom dimensions and subtypes of obsessive-compulsive disorder: a developmental perspective
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3181902/
  3. Obsessive-Compulsive Disorder
    https://medlineplus.gov/obsessivecompulsivedisorder.html
  4. Obsessive-compulsive disorder
    https://medlineplus.gov/ency/article/000929.htm
  5. Hoarding in obsessive-compulsive disorder and related disorders: a preliminary report of 15 cases
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/11929567/
  6. Obsessive-compulsive disorder: Overview
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK279562/
  7. Learn to manage stress
    https://medlineplus.gov/ency/article/001942.htm
  8. Clinical Treatment of Obsessive Compulsive Disorder
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2993523/
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सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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