ऑस्टियोपीनिया के कारण, लक्षण, इलाज – Osteopenia Causes, Symptoms and Treatment in Hindi

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पोषक तत्वों की कमी और उम्र के साथ कई तरह की शारीरिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इन्हीं समस्याओं में से एक है ऑस्टियोपीनिया। यह हड्डी से जुड़ी एक स्थिति है, जिस पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर समस्या गंभीर हो सकती है। स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल में हम इसी समस्या के बारे में बात कर रहे हैं। यहां हमने रिसर्च के आधार पर ऑस्टियोपीनिया के कारण, लक्षण और ऑस्टियोपीनिया के उपचार से संबंधित जानकारी दी है। इसके अलावा, यहां ऑस्टियोपीनिया से बचाव के बारे में भी बताया गया है।

नीचे है पूरी जानकारी

सबसे पहले हम बता रहे हैं कि ऑस्टियोपीनिया क्या होता है।

ऑस्टियोपीनिया क्या है – What is Osteopenia in Hindi 

ऑस्टियोपेनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बोन मिनरल डेंसिटी यानी हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। इसके कारण हड्डियां दिन-ब-दिन कमजोर होती जाती हैं (1)। ऑस्टियोपीनिया की अवस्था में हड्डियों में कैल्शियम और फास्फोरस की मात्रा कम हो जाती है। इससे हड्डियों के टूटने का जोखिम बढ़ता है (2)। अगर बोन डेंसिटी घटती जाती है, तो ऑस्टियोपीनिया के कुछ समय बाद ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है (3)

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चलिए, अब जानते हैं कि ऑस्टियोपीनिया के कारण क्या हैं। 

ऑस्टियोपीनिया के कारण – Causes of Osteopenia Hindi

ऑस्टियोपीनिया होने के कई कारण हो सकते है, जिनके बारे में हम आगे बता रहे हैं (1) (2)

  • कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन-डी की कमी
  • आनुवंशिकता
  • हार्मोनल कारण
  • धूम्रपान करना
  • अल्कोहल का सेवन
  • शारीरिक गतिविधियों में कमी
  • दुबला-पतला शरीर

आगे पढ़ें लक्षण 

ऑस्टियोपीनिया के कारण के बाद ऑस्टियोपीनिया के लक्षण पर एक नजर डाल लेते हैं। 

ऑस्टियोपीनिया के लक्षण – Symptoms of Osteopenia in Hindi

 

आमतौर पर ऑस्टियोपीनिया के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसी वजह से लोगों को इसके बारे में पता नहीं चलता। हां, हल्की ऊंचाई से या फिर खड़े-खड़े गिरने पर फ्रैक्चर या पूरी तरह हट्टी टूट जाए, तो उसे ऑस्टियोपीनिया का संकेत माना जा सकता है (1)

एक स्टडी में कहा गया है कि समय से पहले पैदा होने वाले अधिकांश शिशुओं को ऑस्टियोपीनिया की संभावना होती है, लेकिन उनमें किसी तरह के लक्षण नजर नहीं आते। गंभीर ऑस्टियोपीनिया की स्थिति वाले बच्चों में अज्ञात फ्रैक्चर की वजह से हाथ या पैर में सूजन और दर्द हो सकता है (2) 

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यहां हम आपको बता रहे हैं कि ऑस्टियोपीनिया में डाॅक्टर की सलाह कब ली जानी चाहिए।

ऑस्टियोपीनिया के लिए डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

अगर हल्की चोट लगने पर भी फ्रैक्चर हो रहा है या फिर खड़े-खड़े गिरने पर हड्डी टूट रही है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। हम ऊपर बता ही चुके हैं कि इसके अलावा ऑस्टियोपीनिया का कोई लक्षण नहीं होता है। ऐसे में बेहतर होगा कि समय-समय पर अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें, ताकि इस स्थिति के बारे में पता लगाया जा सके।

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आर्टिकल के इस हिस्से में जानते हैं कि ऑस्टियोपीनिया के क्या निदान हैं। 

ऑस्टियोपीनिया का निदान – Diagnosis of Osteopenia in Hindi 

ऑस्टियोपीनिया के निदान के लिए डॉक्टर दो प्रकार के परीक्षण की सलाह दे सकते हैं। इन दोनों परीक्षण के जरिए डॉक्टर हड्डियों का घनत्व और पोषक तत्वों के स्तर की जांच करते हैं। निदान के लिए उपयोग किए जाने वाले सबसे आम परीक्षण इस प्रकार हैं (1):

  • डेक्सा स्कैन (DXA Scan): डेक्सा स्कैन के जरिए डॉक्टर हड्डियों के टिश्यू स्केल को मापने के लिए एक्स-रे बीम का उपयोग करते हैं। यदि हड्डियों के टिश्यू का टी-स्कोर 1 से लेकर 2.5 तक रहता है, तो ऑस्टियोपीनिया की समस्या हो सकती है।
  • लैब टेस्ट: शरीर में कैल्शियम, फास्फोरस जैसे कई अन्य पोषक तत्व का स्तर पता लगाने के लिए डॉक्टर सीरम और यूरिन लैब टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

इलाज जानिए

निदान के बाद जानते हैं कि ऑस्टियोपीनिया का इलाज किस प्रकार संभव हो सकता है। 

ऑस्टियोपीनिया का इलाज – Treatment of Osteopenia in Hindi 

ऑस्टियोपीनिया के इलाज के लिए निम्न तरीकों को अपनाया जा सकता है (4):

  • सप्लीमेंट – हड्डियों के लिए डॉक्टर सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं। इसमें कैल्शियम और विटामिन-डी की खुराक शामिल हो सकती है।
  • पैदल चलना – रोजाना सुबह शाम पैदल चलने से भी हड्डियों के घनत्व में सुधार हो सकता है। डॉक्टर सप्लीमेंट के साथ पैदल चलने की भी सलाह दे सकते हैं।
  • हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी: हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) को रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर को संतुलित करने के लिए किया जाता है।
  • एस्ट्रोजन रिसेप्टर मॉड्यूलेटर: इस थेरेपी में दवाओं के जरिए एस्ट्रोजन के स्तर को सुधारा जाता हैे।
  • एंटी रिसॉर्प्टिव थेरेपी : इस थेरेपी में दवाओं के माध्यम से हड्डियों की स्ट्रैंथ को बढ़ाया जाता है।

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इलाज के बाद हम बता रहे हैं कि कौन से व्यायाम से ऑस्टियोपीनिया की समस्या में आराम मिल सकता है।

ऑस्टियोपीनिया की समस्या को दूर करने के लिए व्यायाम 

ऑस्टियोपीनिया की समस्या में कई प्रकार के व्यायाम भी फायदेमंद हो सकते हैं। इनकी मदद से बोन मिनरल डेंसिटी को बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जिससे ऑस्टियोपीनिया की समस्या में सुधार हो सकता है (5):

  • पैदल चलना
  • हाइकिंग यानी लंबी पैदल यात्रा करना
  • सीढ़ियां चढ़ना
  • दौड़ना
  • टेनिस खेलना
  • वेट लिफ्टिंग
  • डांस करना 

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यहां हम बता रहे हैं कि ऑस्टियोपीनिया की समस्या में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। 

ऑस्टियोपीनिया में क्या खाना चाहिए – Foods to Eat for Osteopenia in Hindi

ऑस्टियोपीनिया की समस्या होने पर एक्सरसाइज के साथ ही खान पान पर भी ध्यान देना जरूरी है। यहां हम आपको जानकारी दे रहे हैं कि ऑस्टियोपीनिया में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। सबसे पहले जानते हैं कि क्या खाना चाहिए।

ऑस्टियोपीनिया में खाने योग्य पदार्थ:

ऑस्टियोपीनिया की समस्या में पोषक तत्वों से भरपूर उन खाद्य पदार्थाें का सेवन करना चाहिए, जो हड्डियों के लिए फायदेमंद होते हैं। हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन-डी का सेवन आवश्यक माना गया है (6) (7):

  • टोफू
  • हरी पत्तेदार सब्जियां
  • सोयाबीन
  • साल्मन
  • वसायुक्त मछली
  • फिश लिवर ऑयल
  • फोर्टिफाइड (अलग से पोषक तत्व जोड़े गए) अनाज
  • डेयरी उत्पाद, जैसे – दूध, पनीर, दही

इनके सेवन करने से बचें

ऑस्टियोपीनिया की समस्या होने पर नीचे बताए गए पदार्थों का सेवन करने से बचें:

  • अल्कोहल का सेवन न करें
  • धूम्रपान करने से बचें
  • उन खाद्य पदार्थों के सेवन न करें, जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा कम हो।

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खाद्य पदार्थों की जानकारी के बाद जानते हैं ऑस्टियोपीनिया से बचाव के कुछ टिप्स। 

ऑस्टियोपीनिया से बचाव – Prevention Tips for Osteopenia in Hindi

कुछ जरूरी टिप्स को फॉलो करके ऑस्टियोपीनिया की समस्या से बचा जा सकता है। उनके बारे में हम नीचे बता रहे हैं:

  • अपनी डाइट में कैल्शियम और विटामिन-डी युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना।
  • रोजाना व्यायाम करना।
  • ऐसे खाद्य पदार्थ न खाएं जिनमें पोषक तत्व कम हों।
  • सुबह शाम टलने जाएं।
  • रेगुलर मेडिकल चेकअप कराते रहें।
  • 50 वर्ष की उम्र होने पर हड्डी विशेषज्ञ के संपर्क में रहें।
  • रोजाना कुछ देर सूरज की रोशनी में बैठें।

ऑस्टियोपीनिया से बचाव के लिए अपना ध्यान रखना जरूरी है, अन्यथा यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसे हड्डी रोग का रूप ले सकता है। लेख में हमने ऑस्टियोपीनिया के लक्षण और कारण दोनों ही बताएं हैं। इन पर गौर करके और इससे बचाव के टिप्स को अपनाकर आप हड्डियों को स्वस्थ रख सकते हैं। हड्डियां स्वस्थ रहेंगी, तो शारीरिक गतिविधियों में समस्या नहीं होगी और हड्डी रोगों का सामना नहीं करना पड़ेगा। हड्डी स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी भी शंका हो, तो तुरंत ऑस्टियोपीनिया का उपचार करने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया के बीच क्या अंतर है?

ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपेनिया दोनों हड्डियों के घनत्व में कमी से संबंधित हैं। जब हड्डियों का घनत्व सामान्य से कम होता है, तो ऑस्टियोपीनिया होता है। ऑस्टियोपीनिया होने वालों को ऑस्टियोपोरोसिस होने का जोखिम होता है (8)

ऑस्टियोपीनिया होने पर कितना कैल्शियम और विटामिन-डी लेना चाहिए?

ऑस्टियोपीनिया होने पर 1,000 मिलीग्राम  कैल्शियम और 800 IU विटामिन-डी प्रतिदिन लेना चाहिए (9)। उम्र के हिसाब से यह जरूरत कम या ज्यादा हो सकती है।

क्या ऑस्टियोपीनिया आपको थका सकता है?

नहीं, ऑस्टियोपीनिया को लेकर किए गए रिसर्च में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है।

9 संदर्भ (Sources):

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Saral Jain

सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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