चीड़ के तेल के 7 फायदे और नुकसान – Pine Oil Benefits and Side Effects in Hindi

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चीड़ के पेड़ का नाम तो सभी ने सुना होगा, जिसे अंग्रेजी में पाइन ट्री के नाम से जाना जाता है। इसके बावजूद शायद ही किसी को मालूम हो कि चीड़ का तेल कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम करने में भी मदद कर सकता है। अब चीड़ के तेल का उपयोग किन-किन समस्याओं में लाभकारी हो सकता है, स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम इसी बात को समझाने जा रहे हैं। हालांकि, इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या का इलाज डॉक्टरी सलाह पर ही निर्भर करता है। चीड़ के तेल के फायदे की मदद से केवल लेख में शामिल समस्याओं में कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है।

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तो आइए, सबसे पहले हम चीड़ के तेल के फायदे से जुड़ी जानकारी हासिल कर लेते हैं।

चीड़ के तेल के फायदे – Benefits of Pine Oil in Hindi

यहां हम चीड़ के तेल के फायदे बताने जा रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं :

1. सूजन को कम करे

चीड़ का तेल शरीर की सूजन की समस्या को कम करने में मददगार हो सकता है। इस बात को चीड़ के पेड़ से संबंधित चूहों पर आधारित एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) के एक शोध में माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि चीड़ के अर्क में मौजूद फ्लेवेनोइड में एंटीइन्फ्लामेट्री (सूजन कम करने वाला) प्रभाव पाया जाता है (1)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि सूजन को कम करने में चीड़ का तेल सहायक साबित हो सकता है। सूजन के लिए इसके तेल से मालिश की जा सकती है।

2. सामान्य सर्दी में सहायक

सामान्य सर्दी-जुकाम की समस्या से राहत पाने के लिए भी चीड़ के तेल का उपयोग किया जा सकता है। यह बात ब्लैक पाइन (चीड़ का एक प्रकार) से संबंधित एक शोध से स्पष्ट होती है। शोध में माना गया है कि चीड़ से तैयार टार को छाती और पीठ पर लगाने से सामान्य सर्दी से राहत पाने में मदद मिल सकती है (2)। वहीं, एक अन्य शोध में इस बात का स्पष्ट जिक्र मिलता है कि चीड़ के टार से भी पाइन ऑयल बनाया जाता है (3)। इस आधार पर कहना गलत नहीं होगा कि चीड़ के तेल का उपयोग कर सामान्य सर्दी को दूर करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इस विषय पर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

3. भूख को बढ़ाए

भूख बढ़ाने के मामले में चीड़ का तेल उपयोगी है या नहीं, इस बारे में कोई भी स्पष्ट प्रमाण मौजूद नहीं हैं। हां, कोरियन पाइन के बीज के अर्क से तैयार तेल भूख को कम करने में जरूर सहायक साबित हो सकता है। इस बात की पुष्टि कोरियन पाइन नट ऑयल से संबंधित एक शोध से होती है (4)। इस आधार पर चीड़ के पेड़ से निकला हुआ तेल बढ़ते वजन को कम करने के उपाय में एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है।

4. स्किन इन्फेक्शन से दिलाए राहत

त्वचा इन्फेक्शन से बचाव के लिए भी चीड़ के पेड़ से निकला हुआ तेल फायदेमंद हो सकता है। चीड़ से संबंधित एक शोध में इस बात को स्पष्ट रूप से माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि चीड़ के अर्क में एंटीबैक्टीरियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) और एंटीफंगल (फंगस को नष्ट करने वाला) गुण पाया जाता है। शोध में आगे इस बात का भी जिक्र मिलता है कि चीड़ का अर्क मुंहासे, एक्जिमा (खुजली और सूजन से जुड़ा त्वचा विकार) और सोराइसिस (सूखे और खुजली युक्त चकत्तों का होना) में राहत दिला सकता है (2)

5. आर्थराइटिस में पहुंचाए आराम

लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि चीड़ के तेल में एंटीइन्फ्लामेट्री (सूजन कम करने वाला) गुण पाया जाता है। वहीं, आर्थराइटिस की समस्या में होने वाली जोड़ों की सूजन से राहत पाने के लिए एंटीइन्फ्लामेट्री दवाइयों का उपयोग लाभकारी माना जाता है। ऐसे में चीड़ के तेल में मौजूद सूजन कम करने वाला यह प्रभाव काफी हद तक सहायक साबित हो सकता है (1)

6. जलने के कारण हुए जख्म में फायदेमंद

जलने के कारण हुए जख्म के दर्द से राहत पाने के लिए और उसे ठीक करने के लिए भी चीड़ के तेल का उपयोग किया जा सकता है। चूहों पर आधारित चीड़ के तेल से संबंधित एनसीबीआई के एक शोध में इस बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। शोध में माना गया है कि चीड़ के तेल में मौजूद एंटीइन्फ्लामेट्री गुण जलने के कारण होने वाली सूजन से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। साथ ही यह भी पाया गया है कि चीड़ का तेल सेकंड डिग्री बर्न को ठीक करने में सहायक साबित हो सकता है (5)

7. मुंहासों को करे दूर

लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि त्वचा से संबंधित कई विकारों को दूर करने में चीड़ का तेल मददगार हो सकता है। इन विकारों में मुंहासों की समस्या भी शामिल है (2)। वहीं, पाइन कोंस (चीड़ का फल) से संबंधित एक अन्य शोध में सीधे तौर पर बताया गया है कि चीड़ के अर्क में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने में सहायक हो सकता है (6)। इस आधार पर मुंहासों से राहत पाने के उपाय के तौर पर चीड़ के तेल को उपयुक्त माना जा सकता है।

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चीड़ के तेल के फायदे के बाद अब हम चीड़ के तेल के पौष्टिक तत्वों के बारे में बात करेंगे।

चीड़ के तेल के पौष्टिक तत्व – Pine Oil Nutritional Value in Hindi

चीड़ के तेल में मौजूद रसायनों को ही इसके पोषक तत्वों के रूप में देखा जाता है। यहां हम अलेप्पो पाइन (चीड़ का एक प्रकार) के तेल में मौजूद रसायनों की जानकारी देने जा रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (7) :

  • टेट्राडेकोनोइक एसिड
  • पामिटिक एसिड
  • हेक्साडेकोनोइक एसिड
  • मार्गैरिक एसिड
  • हेप्टाडेकोनोइक एसिड
  • स्टेरिक एसिड
  • इलैडिक एसिड
  • वैक्सेनिक एसिड
  • ओलिक एसिड
  • लिनोलेइक एसिड
  • रुमेनिक एसिड
  • इकोसेनोइक एसिड
  • इकोसैमोनोइक एसिड
  • इकोसैडियोनोइक एसिड
  • आर्चीडोनिक एसिड
  • बेहेनिक एसिड
  • एरूसिस एसिड
  • मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (MUFA)
  • पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (PUFA)
  • आयोडीन

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आगे अब हम चीड़ के तेल का उपयोग करने के कुछ तरीके बताएंगे।

चीड़ के तेल का उपयोग – How to Use Pine Oil in Hindi

चीड़ के तेल का उपयोग करने के आसान तरीके कुछ इस प्रकार हैं :

  • सूजन संबंधी समस्या से राहत पाने के लिए चीड़ के तेल को प्रभावित हिस्से पर लगाने की सलाह दी जाती है।
  • सर्दी से राहत पाने के लिए इसे सीने और पीठ पर लगाया जाता है।
  • त्वचा से संबंधित इन्फेक्शन और आर्थराइटिस में भी इसे लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  • जले के घाव से राहत पाने के लिए भी इसे घाव पर लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

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उपयोग के विषय में जानने के बाद अब हम चीड़ के तेल के नुकसान जान लेते हैं।

चीड़ के तेल के नुकसान – Side Effects of Pine Oil in Hindi

चीड़ के तेल में टरपीन नाम का एक विषैला पदार्थ भी मौजूद होता है, जिसके कारण कई तरह से चीड़ के तेल के नुकसान देखने को मिल सकते हैं। यही वजह है कि चीड़ के तेल का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। चीड़ के तेल में मौजूद इस विषैले पदार्थ के निम्न दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं (8):

  • निगलने में तकलीफ
  • गले में जलन
  • आंखों में जलन
  • सांस लेने में तकलीफ
  • पेट में दर्द
  • डायरिया
  • जी मिचलाना
  • उल्टी आना
  • असामान्य हृदय गति
  • कोमा
  • भ्रम की स्थिति
  • अवसाद
  • सिर चकराना
  • सिरदर्द
  • चिड़चिड़ापन
  • घबराहट
  • दिमाग काम न करना
  • बेहोशी आना

चीड़ का तेल क्या है और इसे कैसे बनाया जाता है, यह तो आप अच्छे से समझ गए होंगे। वहीं, चीड़ के तेल का उपयोग किन समस्याओं में लाभकारी है, इस बात को लेकर भी अब किसी बात का संशय नहीं रहा होगा। तो फिर अधिक क्या सोचना, लेख में शामिल किसी समस्या से अगर कोई नजदीकी या परिवार का सदस्य परेशान है, तो आप उसे चीड़ के तेल का उपयोग करने की सलाह दे सकते हैं। बशर्ते, चीड़ का तेल उपयोग करने के तरीके और चीड़ के तेल के नुकसान से जुड़ी लेख में दी जानकारी को जरूर ध्यान में रखें, ताकि चीड़ के तेल के सेवन के नुकसान को खुद से दूर रखा जा सके। आपको यह लेख अगर पसंद आया है, तो आप ऐसे ही अन्य विषयों को पढ़ने के लिए स्टाइलक्रेज के अन्य लेख देख सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

क्या पाइन ऑयल बैक्टीरिया को मार सकता है?

हां, पाइन ऑयल में एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है। इस कारण यह माना जा सकता है कि पाइन ऑयल बैक्टीरिया को मार सकता है (2)

क्या पाइन एक डिसइन्फेक्टेंट है?

हां, पाइन एक डिसइन्फेक्टेंट है (8)

क्या पाइन ऑयल और तारपीन एक हैं?

पाइन ऑयल और तारपीन एक नहीं है। पान ऑयल चीड़ के पेड़ से तैयार शुद्ध पदार्थ है, जबकि तारपीन को पेट्रोलियम पदार्थो को मिलाकर तैयार किया जाता है। तारपीन का इस्तेमाल मुख्य रूप से पेंट को पतला करने के लिए किया जाता है।

क्या पाइन ऑयल को निगलना सुरक्षित है?

नहीं, पाइन ऑयल में टरपीन नाम का एक विषैला पदार्थ पाया जाता है (8), इसलिए इसका सेवन सुरक्षित नहीं कहा जा सकता (9)

क्या पाइन ऑयल बालों के लिए अच्छा है?

पाइन ऑयल को एलोपेसिया (बाल झड़ने की समस्या) में लाभकारी माना जाता है (2)। इसलिए, इसे बालों के लिए अच्छा कहा जा सकता है।

9 संदर्भ (Sources) :

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Ankit Rastogi

अंकित रस्तोगी ने साल 2013 में हिसार यूनिवर्सिटी, हरियाणा से एमए मास कॉम की डिग्री हासिल की है। वहीं, इन्होंने अपने स्नातक के पहले वर्ष में कदम रखते ही टीवी और प्रिंट मीडिया का अनुभव लेना शुरू कर दिया था। वहीं, प्रोफेसनल तौर पर इन्हें इस फील्ड में करीब 6 सालों का अनुभव है। प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में इन्होंने संपादन का काम किया है। कई डिजिटल वेबसाइट पर इनके राजनीतिक, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से संबंधित कई लेख प्रकाशित हुए हैं। इनकी मुख्य रुचि फीचर लेखन में है। इन्हें गीत सुनने और गाने के साथ-साथ कई तरह के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने का शौक भी हैं।

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