निमोनिया के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Pneumonia Symptoms and Home Remedies in Hindi

Written by , (शिक्षा- बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मीडिया कम्युनिकेशन)

बदलते माैसम के साथ छींकना, खांसना, गले में खराश और तेज बुखार जैसी समस्याएं निमानिया का लक्षण हो सकती हैं। समय पर निमोनिया का इलाज नहीं हुआ, ताे यह संक्रामक रोग जानलेवा भी हो सकता है। अगर घर में किसी को निमोनिया हुआ है, तो अधिक सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि यह रोग संक्रमण होने के कारण जल्दी फैल सकता है। इस लेख में समझिए निमोनिया के कारण क्या हैं और निमोनिया का घरेलू उपचार कैसे होता है।

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हम सबसे पहले निमोनिया क्या होता है, इसकी जानकारी दे रहे हैं।

निमोनिया क्या है – What is Pneumonia in Hindi

निमोनिया रोग फेफड़ों का एक संक्रमण है, जो सभी उम्र के लोगों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है (1)। निमोनिया आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस जैसे कई कारणों से हो सकता है। निमोनिया की वजह से फेफड़ों में सूजन, मवाद भरना और सांस लेने में तकलीफ जैसी कई समस्याएं होती हैं। साथ ही यह दो वर्ष की आयु से कम उम्र के बच्चों के लिए और 65 वर्ष की आयु के लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है (2)।

नीचे मुख्य जानकारी है

चलिए, अब जानते हैं कि निमोनिया कितने प्रकार के होते हैं।

निमोनिया के प्रकार – Types of Pneumonia in Hindi

निमोनिया कई प्रकार का होता है, लेकिन यहां हम इसके कुछ खास प्रकारों के बारे में बता रहे हैं (3)।

1. बैक्टीरियल निमोनिया: वो निमोनिया जो बैक्टेरिया के द्वारा फैलता है। इसके कारण शरीर कमजोर हो जाता है और फिर कमजोर प्रतिरक्षा के कारण बैक्टीरिया फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर देते हैं। यह बीमारी खराब पोषण, बुढ़ापे या खराब प्रतिरक्षा की वजह से हो सकती है। बैक्टीरियल निमोनिया सभी उम्र को प्रभावित कर सकता है (4)।

2. वायरल निमोनिया: वायरल निमोनिया फ्लू सहित कई वायरस के कारण हो सकता है। यह मुख्य रूप से युवा, बुजुर्गों और इन्फ्लूएंजा से पीड़ितों में पाई जाने वाली बीमारी है। इन्फ्लुएंजा-ए और बी वायरस वयस्कों में निमोनिया रोग का मुख्य कारण है और शिशुओं में वायरल निमोनिया का मुख्य कारण रेस्पिरेटरी सिंकिटियल वायरस (आरएसवी) है (5)। अगर किसी को वायरल निमोनिया है, तो उन्हें बैक्टीरियल निमोनिया होने की आशंका हो सकती है।

3. माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया: माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया एक प्रकार का ‘एटिपिकल’ बैक्टीरिया है, जो आमतौर पर श्वसन तंत्र के हल्के संक्रमण का कारण बनता है। इन जीवाणुओं के कारण बच्चों में ट्रेकोब्रोनिटिस नाम की बीमारी हो सकती है, जिसे आमतौर पर सीने में ठंड लगना कहा जाता है। माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया के लक्षणों में अक्सर थकान, गले में खराश, बुखार और खांसी शामिल है। कभी-कभी माइकोप्लाज्मा निमोनिया के कारण गंभीर फेफड़ों का संक्रमण भी हो सकता है (6)।

4. फंगल निमोनिया: संक्रमित फफूंद और फंगस की वजह से होने वाला एक प्रकार का निमोनिया रोग है, जो मिट्टी में रहता है। संक्रमित फफूंद के संपर्क में आने से लोग संक्रमित हो सकते हैं। यह हफ्तों से लेकर महीनों तक होने वाले फ्लू जैसे लक्षण पैदा कर सकता है। इसके लक्षण बुखार, खांसी, सिरदर्द, दाने, मांसपेशियों में दर्द या जोड़ों में दर्द जैसी अन्य आम बीमारियों के समान हैं, इसलिए इसके उपचार में अक्सर देरी होती है (7)।

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अब जब आप निमोनिया के प्रकारों से परिचित हैं, तो इसके कारणों को समझना बहुत आसान है।

निमोनिया के कारण – Causes of Pneumonia Hindi

बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की वजह से निमोनिया हो सकता है। इसके अलावा, आइए जानते हैं कि निमोनिया होने के और कौन-कौन से कारण हो सकते हैं (8)।

1. ह्यूमन मेटापॉइरोवायरस (एचएमपीवी): यह सभी उम्र के लोगों में सांस के रोगों का कारण बन सकता है। छोटे बच्चों, वयस्कों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वालों में इसके संक्रमण का खतरा ज्यादा बना रहता है (9)।

2. ह्यूमन पैराफ्लुएंजा वायरस (एचपीआईवी): आमतौर पर नवजात, छोटे बच्चों, वयस्कों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वालों में सांस के रोगों का कारण बनता है, लेकिन इससे कोई भी संक्रमित हो सकता है। संक्रमित होने पर इसके लक्षण 2 से 7 दिन के बाद ही दिखाई देते हैं (10)।

3. इन्फ्लूएंजा (फ्लू): यह समस्या इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होती है। फ्लू का गंभीर परिणाम मौत के रूप में भी सामने आ सकता है। इन्फ्लूएंजा वृद्धों, छोटे बच्चों और शारीरिक समस्या से जूझ रहे लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है (11)।

4. लैग्योनैरिस रोग और पोंटिएक बुखार: यह निमोनिया का गंभीर रूप है, जो लीजोनेला (Legionella) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। जब लोग धुंध में सांस लेते हैं या गलती से लीजोनेला से संक्रमित पानी को पी लेते हैं, तो ऐसे लोग इस गंभीर निमोनिया से संक्रमित हो सकते हैं (12)।

5. माइकोप्लाज्मा निमोनिया: माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया (Mycoplasma pneumoniae) एक प्रकार का बैक्टीरिया है, जो श्वसन प्रणाली (गले, फेफड़े, विंड पाइप) की सतह को नुकसान पहुंचाकर निमोनिया का कारण बन सकता है (13)।

6. न्यूमोकोकल बीमारी: न्यूमोकोकल बीमारी स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक संक्रमण है, जिसे न्यूमोकोकस भी कहा जाता है। न्यूमोकोकस कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है, जिसमें कान में संक्रमण, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का संक्रमण शामिल है। बच्चों और वयस्कों में न्यूमोकोकल बीमारी को रोकने के लिए टीके लगाए जाते हैं (14)।

7. न्यूमोसिस्टिस निमोनिया (पीसीपी): न्यूमोसिस्टिस निमोनिया (पीसीपी) एक गंभीर संक्रमण है, जो न्यूमोसिस्टिस जिरोवेसी नामक फंगस की वजह से होता है। इसकी वजह से प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और आप बैक्टीरिया से होने वाले कई प्रकार के संक्रमण से बीमार हो सकते हैं (15)।

8. रेस्पिरेटरी सिंक्राइटियल वायरस: रेस्पिरेटरी सिंक्राइटियल वायरस एक सामान्य श्वसन वायरस है, जो आमतौर पर ठंड जैसे लक्षणों का कारण बनता है। ज्यादातर लोग एक या दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह शिशुओं और वयस्कों के लिए गंभीर हो सकता है (16)।

9. राइनोवायरस: राइनोवायरस अस्थमा को बढ़ाने का काम कर सकता है और साइनस व कान के संक्रमण की वजह भी बन सकता है (17)।

लेख में बने रहें

निमोनिया के कारण जानने के बाद आइए जानते हैं निमोनिया के लक्षणों को।

निमोनिया के लक्षण – Symptoms of Pneumonia in Hindi

निमोनिया के कारण के बाद अब जानते हैं कि निमोनिया होने पर उनके कौन-कौन से लक्षण हो सकते हैं। निमोनिया के लक्षण सामान्य से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं (2)।

  • ठंड के साथ तेज बुखार
  • लंबे समय तक कफ के साथ खराश वाली खांसी
  • सांस लेने में तकलीफ
  • सांस लेने या खांसी होने पर सीने में दर्द
  • ठंड या फ्लू के बाद अचानक सेहत बिगड़ जाना

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निमोनिया का घरेलू उपचार कैसे किया जाता है, आगे समझिए।

निमोनिया के घरेलू उपचार – Home Remedies for Pneumonia in Hindi

निमोनिया के कारण और लक्षणों के बाद निमोनिया का इलाज करने के लिए सटीक घरेलू उपचार जानते हैं।

1. हल्दी

सामग्री :

उपयोग करने का तरीका :

  • एक गिलास गर्म दूध में हल्दी पाउडर मिलाएं।
  • फिर इस दूध को धीरे-धीरे सेवन करें।
  • प्रतिदिन सोने से पहले हल्दी दूध पिएं।

यह कैसे काम करता है :

निमोनिया का आयुर्वेदिक उपचार में हल्दी अहम भूमिका निभा सकती है। दरअसल, हल्दी करक्यूमिन (Curcumin) नामक खास तत्व से समृद्ध होती है। इसे एंटी इंफ्लेमेटरी, इम्यूनोमॉड्यूलेटरी और एंटीबायोटिक गुण के बल पर निमोनिया से होने वाले फेफड़ों के संक्रमण के लिए प्रभावी माना जाता है (18)।

2. अदरक

सामग्री :

  • अदरक के दो-तीन छोटे टुकड़े
  • एक कप गर्म पानी
  • शहद (वैकल्पिक)

उपयोग करने का तरीका :

  • एक कप गर्म पानी में अदरक मिला कर 5 से 10 मिनट तक उबलने दें।
  • आप इसमें स्वाद के लिए शहद डाल सकते हैं।
  • अब इस पेय का धीरे-धीरे सेवन करें।
  • इस उपाय को दिन में दो तीन बार कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है :

अदरक भी निमोनिया का घरेलू उपचार है। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, अदरक का अर्क निमोनिया के असर को कम कर सकता है। इससे निमोनिया के इलाज में आसानी हो सकती है (19)। साथ ही एयरवे यानी श्वसन मार्ग को स्मूद कर मांसपेशियों को आराम दे सकता है (20)। इससे निमोनिया की स्थिति में श्वसन से जुड़े लक्षण से राहत मिल सकती है।

3. मेथी बीज

सामग्री :

उपयोग करने का तरीका :

  • 10 मिनट के लिए एक कप पानी में मेथी के बीजों को उबालें।
  • इसके बाद स्वाद के लिए शहद मिलाएं।
  • अब चाय की तरह इस पेय का सेवन करें।
  • इस चाय को दिन में दो या तीन बार ले सकते हैं।

यह कैसे काम करता है :

निमानिया का इलाज करने में मेथी के बीजों की अहम भूमिका देखी जा सकती है। दरअसल, मेथी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में जुकाम, खांसी, सांस की तकलीफ, ब्रोन्कियल और गले में खराश जैसे निमोनिया के लक्षणों पर प्रभावी रूप से काम कर सकता है (21)।

4. तिल के बीज

सामग्री :

  • तिल के बीज, एक बड़ा चम्मच
  • एक कप पानी
  • एक चम्मच शहद
  • एक चुटकी नमक

उपयोग करने का तरीका :

  • एक बर्तन में पानी लेकर इसमें तिल डालकर 5 मिनट तक उबालें।
  • इसके बाद नमक और शहद मिलाएं।
  • ठंडा होने से पहले इस पेय का सेवन करें।
  • इसे प्रतिदिन दिन में एक बार जरूर सेवन करें।

यह कैसे काम करता है :

तिल के बीज का उपयोग निमोनिया का उपचार करने में किया जा सकता है। एक शोध के अनुसार, तिल का बीज निमोनिया के जोखिम से बचा सकता है। दरअसल, इसमें मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो रेस्पिरेटरी स्वास्थ्य को बेहतर रख सकता है (22)। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि निमोनिया की स्थिति में तिल से राहत मिल सकती है।

5. तुलसी

सामग्री :

  • कुछ तुलसी के पत्ते

उपयोग करने का तरीका :

  • तुलसी के पत्तों को धो कर चबाएं।
  • प्रतिदिन दो या तीन बार इसका उपयोग कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है :

तुलसी का उपयोग निमाेनिया का घरेलू उपचार साबित हो सकता है। इस संबंध में किए गए वैज्ञानिक अध्ययन में दिया है कि तुलसी में एंटीमिक्रोबियल प्रभाव होता है, जो कि निमोनिया का कारण बनाने वाले बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है। इससे निमोनिया से राहत मिल सकती है (23)।

6. काली मिर्च

सामग्री :

  • चुटकी भर काली मिर्च
  • एक कप गर्म पानी
  • थोड़ा-सा नींबू का रस

उपयोग करने का तरीका :

  • पानी में काली मिर्च डालें।
  • इसके साथ कुछ नींबू की बूंदें अच्छी तरह मिलाएं।
  • मिलने का बाद इसका सेवन करें।
  • इसका सेवन दिन में दो-तीन बार कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है :

काली मिर्च निमोनिया के उपचार में सहायक साबित हो सकती है। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, काली मिर्च एंटी एस्पिरेशन ड्रग्स की तरह काम करती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव निमोनिया पर दिख सकता है (24)।

7. वेजीटेबल जूस

निमोनिया का आयुर्वेदिक उपचार में सब्जियों के जूस को अहम माना जाता है। दरअसल, कई सब्जियों में विटामिन-ए होता है और एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, यह पोषक तत्व निमोनिया जैसे संक्रमण से बचा सकता है (25)। शरीर में विटामिन-ए की पूर्ति के लिए टमाटर, गाजर, ब्रोकली, पालक आदि का जूस बनाकर सेवन किया जा सकता है (26)।

8. विटामिन-सी

निमोनिया के इलाज के लिए विटामिन-सी कारगर माना जाता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट है, जो निमोनिया को ठीक करने में एक प्रभावी असर दिखा सकता है (27)। शरीर में विटामिन सी की पूर्ति के लिए विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ या सप्लीमेंट का सेवन कर सकते हैं। हालांकि, निमोनिया के लिए विटामिन सी का सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

9. शहद

सामग्री :

  • एक चम्मच शहद
  • आधा कप गुनगुना पानी

उपयोग करने का तरीका :

  • पानी में एक चम्मच शहद मिलाएं।
  • इस घोल का सेवन करें।
  • इसका रोजाना सेवन कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है :

कहा जाता है कि निमोनिया का आयुर्वेदिक उपचार शहद से भी हो सकता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च में भी इस बात की पुष्टि की गई है। रिसर्च की मानें, तो शहद में एंटीबैक्टीरियल गुण होता है, जो स्टेनोट्रोफोमोनास माल्टोफिलिया नामक बैक्टीरिया से राहत दिलाकर निमोनिया के लक्षण को कम कर सकता है (28)।

10. अजवायन का तेल

सामग्री :

  • अजवायन के तेल की 1-2 बूंदें
  • कॉटन बॉल

उपयोग करने का तरीका :

  • कॉटन बॉल पर अजवायन के तेल की कुछ बूंदें डालें।
  • सोने से पहले इसे अपने बिस्तर के बगल में रखें।
  • इसका उपयोग आप हर रात कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है :

अजवायन का तेल निमोनिया का घरेलू उपचार हो सकता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, अजवायन तेल में एंटीबैक्टीरियल गुण होता है। इसकी मदद से निमोनिया के कारण बनाने वाले बैक्टीरिया से राहत मिल सकती है (29)। इस आधार पर अजवायन के तेल को निमोनिया लिए अच्छा माना जाता है।

11. लहसुन

सामग्री :

  • लहसुन की 3-4 कलियां

उपयोग करने का तरीका :

  • लहसुन की कलियों को चबा सकते हैं या उन्हें अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
  • लहसुन की कलियों का पेस्ट बनाकर उसे अपनी छाती पर लगा लें।
  • ऐसा दिन में एक बार कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है :

लहसुन निमोनिया का घरेलू उपचार हो सकता है। दरअसल, लहसुन में पानी मिलाकर तैयार किए गए अर्क में एंटीबैक्टीरियल प्रभाव होता है। यह नोमोनिया के संक्रमण के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है। इस तरह निमोनिया रोग से राहत दिलाने में लहसुन अहम भूमिका निभा सकता है (30)।

12. सेब का सिरका

सामग्री :

  • एक बड़ा चम्मच सेब का सिरका
  • एक चम्मच शहद
  • आधा गिलास गुनगुना पानी

उपयोग करने का तरीका :

  • गुनगुने पानी में सेब का सिरका और आधा चम्मच शहद अच्छी तरह से मिलाएं।
  • अच्छे से मिलने के बाद इस घोल का सेवन करें।
  • कुछ दिनों तक यह उपचार जारी रख सकते हैं।

यह कैसे काम करता है :

जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि निमोनिया बैक्टीरिया की वजह से भी हो सकता है (4)। इसके उपचार के लिए सेब के सिरके का इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल, यह एंटी बैक्टीरियल गुण से समृद्ध होता है। यह गुण बैक्टीरिया की समस्या को कम करता है (31)। इसी आधार पर सेब के सिरके को भी निमोनिया के लिए अच्छा माना जाता है।

13. एसेंशियल ऑयल

(क) पुदीना का तेल

सामग्री :

  • पुदीने के तेल की 2-3 बूंदें
  • एक चम्मच जैतून या बादाम का तेल

उपयोग करने का तरीका :

  • जैतून या बादाम के तेल के साथ पुदीना के तेल की कुछ बूंदें मिलाएं।
  • इस मिश्रण को अपनी छाती और पीठ पर लगा लें।
  • इसे दिन में कम-से-कम एक बार जरूर लगाएं।

कैसे करता है काम :

निमोनिया उपचार में पुदीने का तेल कारगर साबित हो सकता है। एक मेडिकल रिसर्च की मानें, तो पुदीना में एंटीबैक्टीरियल गुण होता है, जो बैक्टीरियल संक्रमण के जोखिम को कम कर सकता है। इससे निमोनिया के लक्षण कम हो सकते हैं (32)।

(ख) नीलगिरी का तेल

सामग्री :

  • नीलगिरी के तेल की 4-5 बूंदें
  • एक बर्तन में गर्म पानी

उपयोग करने का तरीका :

  • गर्म पानी में नीलगिरी तेल की कुछ बूंदें मिलाएं।
  • अब धीरे-धीरे कुछ मिनट तक भाप लें।
  • इसका उपयोग प्रतिदिन कर सकते हैं।

कैसे करता है काम :

नीलगिरी के तेल का इस्तेमाल कर निमोनिया से राहत पाई जा सकती है। दरअसल, नीलगिरी के तेल में भी एंटीबैक्टीरियल क्षमता होती है। इससे निमोनिया के उपचार में सहायता मिल सकती है (33)।

14. विक्स वेपोरब

सामग्री:

  • विक्स वेपोरब

उपयोग करने का तरीका :

  • बिस्तर पर जाने से पहले अपनी छाती और पीठ पर विक्स वेपोरब लगाएं।
  • रोजाना सोने से पहले यह उपाय करें।

कैसे करता है काम :

विक्स वेपोरब निमोनिया के इलाज में प्रभावी हो सकता है। अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि विक्स वेपोरब अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन पर कारगर तरीके से काम करता है। इसका सकारात्मक असर निमोनिया पर भी पड़ सकता है (34)। हालांकि, इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

15. डैंडिलियन चाय

सामग्री :

  • एक चम्मच डेंडिलियन की जड़
  • एक कप पानी
  • शहद (वैकल्पिक)

उपयोग करने का तरीका :

  • एक कप पानी में डेंडिलियन की जड़ डालें।
  • 5 से 10 मिनट तक इसे उबलने दें।
  • उबलने के बाद इसमें शहद डालें।
  • अब डेंडिलियन चाय का सेवन करें।
  • दिन मे दाे बार कभी भी इसे पी सकते हैं।

कैसे करता है काम :

डेंडिलियन चाय का उपयोग निमोनिया के लिए किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित जानकारी के अनुसार, डेंडिलियन को कई समस्याओं में पारंपरिक दवाई के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें निमोनिया भी शामिल है। साथ ही यह प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाने और ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण को भी दूर कर सकता है। इससे निमोनिया में कुछ हद तक सुधार हो सकता है (35)।

16. सेब

सामग्री :

  • एक सेब

उपयोग करने का तरीका :

  • सेब को सीधे नाश्ते में खा सकते हैं।
  • इसके अलावा, सेब का रस निकालकर भी सेवन कर सकते हैं।
  • रोजाना इसे कभी भी पी लें।

कैसे करता है काम :

निमोनिया के उपचार में सेब अहम भूमिका निभा सकता है। दरअसल, सेब विटामिन-सी से समृद्ध होता है, जो एंटीबैक्टीरियल गुण की तरह काम कर सकता है। इससे निमोनिया की समस्या कम हो सकती है (36)।

17. विलो की छाल

सामग्री :

  • एक चम्मच विलो की छाल
  • एक कप पानी
  • एक चम्मच शहद

उपयोग करने का तरीका :

  • एक कप पानी में विलो की छाल डालकर उबालें।
  • उबालने के बाद घोल को छान लें और इसमें शहद मिलाएं।
  • ठंडा होने से पहले इसका सेवन करें।
  • हर दिन कम-से-कम दो बार इस घोल को पीना चाहिए।

कैसे करता है काम :

विलो छाल में एंटीबायोटिक और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। ये यौगिक संपूर्ण प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करते हैं। इसी वजह से विलो की छाल, निमोनिया के इलाज के लिए एक बढ़िया विकल्प है (37)।

18. गाजर

सामग्री :

  • एक कप कटी हुई गाजर

उपयोग करने का तरीका :

  • कटी हुई गाजर का सेवन करें।
  • हर दिन तीन से चार बार इसका सेवन कर सकते हैं।

कैसे करता है काम :

गाजर के फायदे निमोनिया के लिए भी नजर आ सकते हैं। इस संबंध में प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च में दिया है कि गाजर में प्रोबायोटिक प्रभाव होता है, जो निमोनिया के बैक्टीरिया का मुकाबला करने में कारगर साबित हो सकता है (38)। इससे निमोनिया की समस्या से राहत मिल सकती है।

19. कपूर

सामग्री :

  • कपूर के तेल की 2-3 बूंदें
  • एक चम्मच जैतून का तेल

उपयोग करने का तरीका :

  • एक चम्मच जैतून तेल में कपूर के तेल की लगभग तीन बूंदें मिलाएं।
  • इस मिश्रण को अपनी छाती और पीठ पर हल्के से मल लें।
  • हर रात सोने से पहले इसका उपयोग कर सकते हैं।

कैसे करता है काम :

निमोनिया का आयुर्वेदिक उपचार कपूर से भी किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक रिसर्च के मुताबिक, कपूर के तेल में शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल गुण होता है। ये निमोनिया के लक्षणों से राहत दिला सकता है (39)। ध्यान रहे कि इसे बच्चों की पहुंच से दूर ही रखें।

20. पार्सनिप का रस

सामग्री :

  • आधा कप पार्सनिप का रस

उपयोग करने का तरीका :

  • पार्सनिप रस का सेवन करें।
  • दिन में एक बार इसका सेवन कर सकते हैं।

कैसे करता है काम :

पार्सनिप में विभिन्न तरह के विटामिन होते हैं, जो सामान्य रूप से सभी रोगों के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मदद करते हैं। खासकर, पार्सनिप में विटामिन सी होता है (40)। हम बता ही चुके हैं कि विटामिन-सी इम्यूनिटी को बढ़ाने के साथ ही निमोनिया जैसे कई प्रकार के रोगों के खिलाफ प्रभावी हो सकता है (41)।

21. ब्लीच बाथ

सामग्री :

  • आधा कप ब्लीच पाउडर
  • एक टब गुनगुना पानी

उपयोग करने का तरीका :

  • एक टब पानी लें या बाथटब को गुनगुने पानी से भर लें।
  • अब उसमें आधा कप ब्लीच पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।
  • फिर उस बाथटब में कुछ देर लेट जाएं या टब के पानी से नहा लें।
  • ब्लीच बाथ प्रतिदिन ले सकते हैं।

कैसे करता है काम :

निमोनिया की स्थिति में ब्लीच बाथ लेना फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, निमोनिया होने का मुख्य कारण बैक्टीरिया होते हैं (8)। वहीं, ब्लीच बाथ एंटी-माइक्रोबियल गुण होता है, जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारकर, निमोनिया के संक्रमण को फैलने से रोक सकता है। साथ ही सूजन के जोखिम को भी कम करता है (42)।

22. भाप लेना

सामग्री :

  • एक पतीला गर्म पानी
  • तौलिया

उपयोग करने का तरीका :

  • एक पतीला में गर्म पानी लें और उसके ऊपर अपना सिर झुका लें।
  • अपने सिर को तौलिये से ढक लें और गर्म भाप को अंदर लें।
  • इस गर्म पानी में नीलगिरी या पेपरमिंट जैसे एसेंशियल ऑयल भी मिला सकते हैं।
  • इस उपाय को रोजाना 1-2 बार कर सकते हैं।

कैसे करता है काम :

भाप लेने से निमोनिया की समस्या कम हो सकती है। दरअसल, इससे निचले श्वसन तंत्र के संक्रमण से राहत मिल सकती है, जिससे निमोनिया की स्थिति में सुधार करने में भी सहायता मिल सकती है (43)।

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आगे हम निमोनिया का इलाज कैसे करते हैं, यह बता रहे हैं।

निमोनिया का इलाज – Treatment for Pneumonia in Hindi

निमोनिया का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि निमोनिया किस प्रकार का है। घर में निमोनिया का इलाज हो जाएगा सोचने के बजाय डॉक्टर से मिलकर सटीक निमोनिया ट्रीटमेंट करवाएं।

1. बैक्टीरियल निमोनिया : बैक्टीरियल निमोनिया का इलाज डॉक्टर के द्वारा दी जाने वाली एंटीबायोटिक्स दवाओं से किया जाता है। दवा खत्म होने से पहले अधिकांश लोग बेहतर महसूस करना शुरू कर सकते हैं, फिर भी इसके डोज को जारी रखना चाहिए (44)।

बताया जाता है कि समय से पहले दवा लेना बंद करने से निमोनिया वापस आ सकता है। दवाओं को डॉक्टर की सलाह पर ही बंद करना चाहिए (44)। अधिकांश लोगों के एंटीबायोटिक उपचार के एक से तीन दिनों के ही बाद खांसी और बुखार ठीक हाेने लगती है और वो बेहतर महसूस करना शुरू कर देते हैं।

2. वायरल निमोनिया : अगर किसी को वायरल निमोनिया है, तो डॉक्टर इसका इलाज करने के लिए एक एंटीवायरल दवा लिख ​​सकते हैं। वायरल निमोनिया आमतौर पर एक से तीन सप्ताह में सुधर जाता है (44)।

गंभीर लक्षण वालों का निमोनिया ट्रीटमेंट अस्पताल में ही संभव है। इसके लिए अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ सकता है। इसी वजह से निमोनिया के लक्षण दिखने पर शीघ्र ही उसका इलाज कराना चाहिए, नहीं तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं (44)।

3. माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया : इस प्रकार के निमोनिया के इलाज में एंटीबायोटिक दवाई का उपयोग किया जाता है। इस समय डॉक्टर बच्चों और युवाओं के लिए अलग-अलग तरह के एंटीबायोटिक दवाई दे सकते हैं। ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाई का उपयोग न करें (45)।

4. फंगल निमोनिया: इस तरह के निमोनिया के उपचार में डॉक्टर मुख्य रूप से एंटी-फंगल दवाई देते हैं, क्योंकि इस प्रकार के निमोनिया पीछे फंगल जिम्मेदार होते हैं।

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आइए, अब जानते हैं कि निमोनिया में क्या खाना चाहिए और किस चीज का परहेज करना चाहिए।

निमोनिया में आहार – क्या खाएं और क्या न खाएं – Diet for Pneumonia in Hindi

निमोनिया होने पर विटामिन-सी से भरपूर आहार को डाइट में जगह देना फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें कुछ इस तरह के खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं (46)।

क्या खाएं :

  • खरबूजा, संतरे, अंगूर, कीवी फल, आम और पपीता खा सकते हैं ।
  • अनानास, स्ट्रॉबेरी, रसभरी, ब्लूबेरी, क्रैनबेरी व तरबूज का सेवन करें।
  • हर्बल चाय, सूप और शोरबा भी ले सकते हैं, जो विटामिन- सी से समृद्ध होते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबायोटिक गुण भी होते हैं, जो निमोनिया से छुटकारा दिला सकते हैं (47)।

क्या न खाएं :

ये सभी पदार्थ सांस से संबधित संक्रमण का कारण हो सकते हैं और निमोनिया के दौरान नकारात्मक परिणाम दिखा सकते हैं।

  • पका हुआ ठंडा गोश्त
  • अधिक नमक
  • दूध के उत्पाद
  • तले हुए खाद्य पदार्थ
  • कार्बोनेटेड युक्त ठंडा पानी
  • एसिडिक खाद्य पदार्थ और पेय

लेख अंत तक पढ़ें

आगे जानिए, निमोनिया रोग के जोखिम कारक क्या-क्या होते हैं।

निमोनिया के जोखिम कारक – Risk Factors For Pneumonia in Hindi

निमोनिया कुछ आयु वर्ग के लोगों और विशेष स्थिति से गुजर रहे लोगों में तेजी से फैलता है। चलिए, एक नजर निमोनिया के जोखिम कारक पर डालते हैं (44)।

  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग।
  • सिगरेट व शराब का अधिक सेवन करने वाले।
  • गलत दवाओं का उपयोग करने वालों में भी निमोनिया की आशंका अधिक होती है।
  • दो वर्ष से कम और 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले।
  • रसायन, प्रदूषण या फिर जहरीले धुएं के संपर्क में रहना।

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चलिए, अब जानते हैं निमोनिया से बचाव के लिए कौन कौन से उपाय अपनाए जा सकते हैं।

निमोनिया से बचाव – Prevention Tips for Pneumonia in Hindi

निमोनिया से बचाव के बारे में पता होना जरूरी है। कुछ आसान से तरीकों का पालन करके निमाेनिया से बचा जा सकता है।

  • धूम्रपान छोड़ें, क्योंकि यह श्वास संबंधी संक्रमण को अधिक संवेदनशील बनाता है।
  • भोजन करने से पहले और बाद में अपने हाथों को धोएं।
  • संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए खांसते और छींकते समय अपने नाक और मुंह को ढकें।
  • प्रतिरक्षा प्रणानी को बेहतर करने के लिए स्वस्थ आहार लें और पर्याप्त आराम करें।

निमोनिया के लिए टीके भी उपलब्ध हैं, लेकिन ये निमोनिया को पूरी तरह से रोक नहीं सकते। ये जोखिम को कम करने में सहायक जरूर हो सकते हैं। निमोनिया के लिए इन बीमारियों से संबंधित टीके लगाए जा सकते हैं (48)।

  • हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (Hib)
  • इन्फ्लुएंजा (फ्लू)
  • खसरा
  • पर्टुसिस (काली खांसी)
  • न्यूमोकोकल
  • वैरिकाला (चिकनपॉक्स)

नीचे और जानकारी है

अब निमोनिया के बचाव से जुड़े कुछ जरूरी टिप्स के बारे में जानते हैं।

निमोनिया के लिए कुछ और जरूरी टिप्स – Other Tips for Pneumonia in Hindi

अगर किसी को निमोनिया है, तो वो संक्रमण से उबरने और जटिलताओं को रोकने के लिए कुछ जरूरी टिप्स का पालन कर सकते हैं, जैसे (44) :

  • खूब आराम करें।
  • चिकित्सक द्वारा बताई गई सभी दवाएं लें।
  • एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग तब तक जारी रखें, जब तक निमोनिया पूरी तरह खत्म न हो जाए। दवाई को बीच में बंद कर देने से निमोनिया वापस आ सकता है।
  • निमोनिया से उबरने में समय लग सकता है। इसलिए, अपने चिकित्सक से बात करें कि अपनी सामान्य दिनचर्या को कब से शुरू कर सकते हैं।
  • अगर किसी को निमोनिया है, तो परिवार और दोस्तों के साथ संपर्क सीमित करें।
  • खांसते या छींकते समय अपनी नाक और मुंह को ढक लें। इस्तेमाल किए गए कपड़ों को तुरंत हटा दें और अपने हाथों को धो लें।

निमोनिया ऐसा संक्रमण है, जिसे अगर समय पर ठीक न किया जाए, तो यह घातक हो सकता है। इसी वजह से शारीरिक समस्याओं के प्रति हमेशा सचेत रहें और अपना ध्यान रखें। साथ ही इस स्थिति में जितना हो सके लोगों के संपर्क से दूर रहें। निमोनिया से जुड़ी यह जानकारी और इससे बचने के उपाय अपने साथियों के साथ जरूर शेयर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या एंटीबायोटिक्स हमेशा निमोनिया को ठीक कर सकता है?

नहीं, हमेशा एंटीबायोटिक से निमोनिया ठीक नहीं हो सकता है। हां, अगर निमोनिया होने का कारण बैक्टीरिया है, तो इसके लिए एंटीबायोटिक्स असरदार हो सकता है। वहीं, अगर निमोनिया वायरस या फंगल के कारण हुआ है, तो इसके लिए एंटीवायरस और एंटीफंगल दवाई लेने की सलाह दी जाती है (44)।

क्या निमोनिया संक्रामक है?

जी हां, निमोनिया संक्रामक होता है। इसके लिए डॉक्टर एंटीवायरल दवाई लेने की सलाह दे सकते हैं (44)।

क्या विक्स वेपोरब निमोनिया के लिए अच्छा है?

जी हां, विक्स वेपोरब निमोनिया के लिए अच्छा होता है (48)।

निमोनिया कैसे फैलता है?

निमोनिया से प्रभावित व्यक्ति के संपर्क में आने पर यह समस्या हो सकती है। साथ ही यह खांसी और छींक से भी फैल सकता है।

निमोनिया से ठीक होने में कितना समय लगता है?

निमोनिया से ठीक होने में कुछ लोगों को एक सप्ताह, तो कुछ को एक महीने और उससे भी ज्यादा वक्त लग सकता है (2)।

निमोनिया के लिए किस प्रकार के डॉक्टर से इलाज कराते हैं?

निमोनिया के इलाज के लिए पल्मोनोलॉजिस्ट से संपर्क कर सकते हैं। पल्मोनोलॉजिस्ट, श्वसन प्रणाली से संबंधित समस्या का उपचार करते हैं (49)।

क्या निमोनिया श्वास की समस्या का कारण बनता है?

जी हां, निमोनिया श्वास की समस्या का कारण बन सकता है। इससे रेस्पिरेटरी फेलियर होने का खतरा रहता है (2)।

निमोनिया और ब्रोंकाइटिस के बीच क्या अंतर है?

ब्रोंकाइटिस, ब्रोन्कियल नलियों को प्रभावित करता है, जो फेफड़ों में हवा पहुंचाती है। निमोनिया, एयर सकस यानी एल्वियोली को प्रभावित करता है, जो ऑक्सीजन को रक्त तक ले जाती है (50)।

क्या गर्भावस्था के दौरान निमोनिया होना खतरनाक है?

जी हां, गर्भावस्था के दौरान निमोनिया होने पर प्रीटर्म लेबर यानी समय से पहले प्रसव शुरू होने के जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं (51)।

निमोनिया का निदान कैसे किया जाता है?

निमोनिया का निदान करने के लिए छाती का एक्स-रे और ब्लड टेस्ट किया जा सकता है (2)।

निमोनिया द्वारा कौन सा आयु वर्ग आमतौर पर प्रभावित होता है?

निमोनिया से 2 वर्ष व उससे कम उम्र के बच्चे और 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं (2)।

संदर्भ (Sources) :

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