निमोनिया के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Pneumonia Symptoms and Home Remedies in Hindi

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बदलते माैसम के साथ छींकना, खांसना, गले में खराश और तेज बुखार जैसी समस्याएं निमानिया का लक्षण हो सकती हैं। समय पर निमोनिया का इलाज नहीं हुआ, ताे यह संक्रामक रोग जानलेवा भी हो सकता है। अगर घर में किसी को निमोनिया हुआ है, तो आपको अधिक सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि यह रोग संक्रमण के कारण बहुत जल्दी फैलता है। वैसे आपको निमोनिया से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको निमोनिया से बचने के कुछ असरकारक घरेलू उपचार बताएंगे। साथ में निमोनिया से बचने के कुछ और टिप्स भी साझा करेंगे।

सबसे पहले हम जानते हैं कि निमोनिया क्या है?

निमोनिया क्या है – What is Pneumonia in Hindi 

निमोनिया रोग फेफड़ों का एक संक्रमण है, जो सभी उम्र के लोगों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है (1)। निमोनिया आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस जैसे कई कारणों से हो सकता है। निमोनिया के कारण फेफड़ों में सूजन, मवाद भरना और सांस लेने में तकलीफ जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही यह दो वर्ष की आयु से कम बच्चों के लिए और 65 वर्ष की आयु के लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है (2)। निमोनिया कितना गंभीर है, यह कई कारकों पर निर्भर करता है।

यहां जानते हैं कि निमाेनिया रोग कितने प्रकार का होता है।

निमोनिया के प्रकार – Types of Pneumonia in Hindi 

निमोनिया कई प्रकार का हो सकता है, लेकिन यहां हम इसके कुछ खास प्रकारों के बारे में बता रहे हैं (3)।

बैक्टीरियल निमोनिया: वो निमोनिया जो बैक्टेरिया के द्वारा फैलता है। इसके कारण शरीर कमजोर हो जाता है और फिर कमजोर प्रतिरक्षा के कारण बैक्टीरिया फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर देते हैं। यह बीमारी खराब पोषण, बुढ़ापे या खराब प्रतिरक्षा की वजह से हो सकती है। बैक्टीरियल निमोनिया सभी उम्र को प्रभावित कर सकता है (4)।

वायरल निमोनिया: वायरल निमोनिया फ्लू सहित कई वायरस के कारण हो सकता है। यह मुख्य रूप से युवा, बुजुर्गों और इन्फ्लूएंजा से पीड़ित लोगों में पाई जाने वाली बीमारी है। इन्फ्लुएंजा ए और बी वायरस वयस्कों में निमोनिया रोग का मुख्य कारण है और शिशुओं में वायरल निमोनिया का मुख्य कारण रेस्पिरेटरी सिंकिटियल वायरस (आरएसवी) है (5)। अगर आपको वायरल निमोनिया है, तो आपको बैक्टीरियल निमोनिया होने की आशंका हो सकती है।

माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया: माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया एक प्रकार का ‘एटिपिकल’ बैक्टीरिया है, जो आमतौर पर श्वसन तंत्र के हल्के संक्रमण का कारण बनता है। इन जीवाणुओं के कारण बच्चों में ट्रेकोब्रोनिटिस नाम की बीमारी हो सकती है, जिसे आमतौर पर सीने में ठंड लगना कहा जाता है। माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया लक्षणों में अक्सर थकान, गले में खराश, बुखार और खांसी शामिल होती है। कभी-कभी माइकोप्लाज्मा निमोनिया के कारण गंभीर फेफड़ों का संक्रमण भी हो सकता है (6)।

फंगल निमोनिया: संक्रमित फफूंद और फंगस की वजह से होने वाला एक प्रकार  निमोनिया रोग है, जो मिट्टी में रहता है। संक्रमित फफूंद के संपर्क में आने से लोग संक्रमित हो सकते हैं। यह हफ्तों से लेकर महीनों तक होने वाले फ्लू जैसे लक्षण पैदा कर सकता है, क्योंकि इसके लक्षण बुखार, खांसी, सिरदर्द, दाने, मांसपेशियों में दर्द या जोड़ों में दर्द जैसी अन्य आम बीमारियों के समान हैं, इसलिए इसके उपचार में अक्सर देरी होती है (7)।

अब जब आप निमोनिया के प्रकारों से परिचित हैं, तो इसके कारणों को समझना बहुत आसान है।

निमोनिया के कारण – Causes of Pneumonia in Hindi 

निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की वजह से हो सकता है। इसके अलावा, आइए जानते हैं कि निमोनिया होने के और कौन-कौन से कारण हो सकते हैं (8)।

ह्यूमन मेटापॉइरोवायरस (एचएमपीवी): यह सभी उम्र के लोगों में सांस के रोगों का कारण बन सकता है। छोटे बच्चों, वयस्कों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में इसके संक्रमण का खतरा ज्यादा बना रहता है (9)।

ह्यूमन पैराफ्लुएंजा वायरस (एचपीआईवी): आमतौर पर नवजात, छोटे बच्चों, वयस्कों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में सांस के रोगों का कारण बनता है, लेकिन इससे कोई भी संक्रमित हो सकता है। संक्रमित होने पर इसके लक्षण 2 से 7 दिन के बाद ही दिखाई देते हैं (10)।

इन्फ्लूएंजा (फ्लू): यह समस्या इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होती है। फ्लू का गंभीर परिणाम मौत के रूप में भी सामने आ सकता है। इन्फ्लूएंजा वृद्धों, छोटे बच्चों और शारीरिक समस्या से जूझ रहे लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है (11)।

लैग्योनैरिस रोग और पोंटिएक बुखार: यह निमोनिया का गंभीर रूप है, जो लीजोनेला (Legionella) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। जब लोग धुंध में सांस लेते हैं या गलती से लीजोनेला से संक्रमित पानी को पी लेते हैं, तो ऐसे लोग इस गंभीर निमोनिया से संक्रमित हो सकते हैं (12 )।

माइकोप्लाज्मा निमोनिया: माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया (Mycoplasma pneumoniae) एक प्रकार का बैक्टीरिया है, जो श्वसन प्रणाली (गले, फेफड़े, विंड पाइप) की सतह को नुकसान पहुंचाकर निमोनिया का कारण बन सकता है (13)।

न्यूमोकोकल बीमारी: न्यूमोकोकल बीमारी स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक संक्रमण है, जिसे न्यूमोकोकस भी कहा जाता है। न्यूमोकोकस कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है, जिसमें कान में संक्रमण, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का संक्रमण शामिल है। बच्चों और वयस्कों में न्यूमोकोकल बीमारी को रोकने के लिए टीके लगाए जाते हैं (14) ।

न्यूमोसिस्टिस निमोनिया (पीसीपी): न्यूमोसिस्टिस निमोनिया (पीसीपी) एक गंभीर संक्रमण है, जो न्यूमोसिस्टिस जिरोवेसी नामक फंगस की वजह से होता है। इसकी वजह से प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और आप बैक्टीरिया से होने वाले कई प्रकार के संक्रमण से बीमार हो सकते हैं (15)।

रेस्पिरेटरी सिंक्राइटियल वायरस: रेस्पिरेटरी सिंक्राइटियल वायरस एक सामान्य श्वसन वायरस है, जो आमतौर पर ठंड जैसे लक्षणों का कारण बनता है। ज्यादातर लोग एक या दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह शिशुओं और वयस्कों के लिए गंभीर हो सकता है (16)।

राइनोवायरस: राइनोवायरस अस्थमा को बढ़ाने का काम कर सकता है और साइनस और कान के संक्रमण की वजह भी बन सकता है (17)।

निमोनिया के कारण जानने के बाद आइए जानते हैं निमोनिया के लक्षणों को।

निमोनिया के लक्षण – Symptoms of Pneumonia in Hindi

ऊपर हमने निमोनिया के कारण को जाना। कारणों को जानने के बाद अब जानते हैं कि निमोनिया होने पर उनके कौन-कौन से लक्षण हो सकते हैं। निमोनिया के लक्षण सामान्य से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं (2)-

  • ठंड के साथ तेज बुखार।
  • लंबे समय तक कफ के साथ खराश वाली खांसी।
  • सांस लेने में तकलीफ।
  • सांस लेने या खांसी होने पर सीने में दर्द ।
  • ठंड या फ्लू के बाद अचानक सेहत बिगड़ जाना।

निमोनिया से बचाव के लिए जानते हैं कुछ घरेलू उपचार।

निमोनिया के घरेलू उपचार – Home Remedies for Pneumonia in Hindi 

निमोनिया के कारण और लक्षणों के जानने के बाद जानते हैं कि निमोनिया का इलाज करने के लिए सटीक घरेलू उपचार।

1. हल्दी

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सामग्री
  • एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर
  • 1 गिलास गर्म दूध
क्या करें?
  • एक गिलास गर्म दूध में हल्दी पाउडर मिलाएं।
  • फिर इस दूध कस धीरे-धीरे सेवन करें।
कब सेवन करें?

प्रतिदिन सोने से पहले हल्दी दूध का सेवन करें।

यह कैसे काम करता है?

निमोनिया का आयुर्वेदिक उपचार में हल्दी अहम भूमिका निभा सकती है। दरअसल, यह कर्क्यूमिन (curcumin) नामक खास तत्व से समृद्ध होती है और कर्क्यूमिन अपने एंटी इंफ्लेमेटरी, इम्यूनोमॉड्यूलेटरी और एंटीबायोटिक गुण के बल पर निमोनिया से होने वाले फेफड़ों के संक्रमण पर प्रभावी असर दिखा सकता है (18)।

2. अदरक 

सामग्री
  • अदरक के दो-तीन छोटे टुकड़े
  • एक कप गर्म पानी
  • शहद (वैकल्पिक)
क्या करें?
  • एक कप गर्म पानी में अदरक मिला कर 5 से 10 मिनट तक उबलने दें।
  • आप इसमें स्वाद के लिए शहद डाल सकते हैं।
  • अब इस पेय का धीरे-धीरे सेवन करें।
कब सेवन करें?

इस उपाय को दिन में दो तीन बार कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है?

अदरक भी निमोनिया का घरेलू उपचार है। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, अदरक का अर्क निमोनिया का इलाज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है (19)। हालांकि, इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

3. मेथी बीज 

सामग्री
  • एक चम्मच मेथी के बीज
  • एक कप पानी
  • शहद (वैकल्पिक)
क्या करें?
  • 10 मिनट के लिए एक कप पानी में मेथी के बीजों को उबालें।
  • इसके बाद स्वाद के लिए शहद मिलाएं।
  • अब चाय की तरह इस पेय का सेवन करें।
कब सेवन करें?

इस चाय को दिन में दो या तीन बार ले सकते हैं।

यह कैसे काम करता है?

निमानिया का इलाज करने में मेथी के बीजों की एक अहम भूमिका देखी जा सकती है। दरअसल, मेथी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में जुकाम, खांसी, सांस की तकलीफ, ब्रोन्कियल और गले में खराश जैसे निमोनिया के लक्षणों पर प्रभावी रूप से काम कर सकता है (20)।

4. तिल के बीज 

सामग्री
  • 1 बड़ा चम्मच तिल के बीज
  • 1 कप पानी
  • 1 चम्मच शहद
  • एक चुटकी नमक
क्या करें?
  • एक बर्तन में पानी लेकर इसमें तिल डालकर 5 मिनट तक उबालें।
  • इसके बाद नमक और शहद मिलाएं।
  • ठंडा होने से पहले इस पेय का सेवन करें।
कब सेवन करें?

इसे प्रतिदिन दिन में एक बार जरूर सेवन करें।

यह कैसे काम करता है?

तिल के बीज निमोनिया का उपचार करने में कारगर हो सकते हैं। एक शोध के अनुसार, बताए गए तरीके से किया गया तिल का सेवन निमोनिया से निजात दिलाने का काम कर सकता है (21)।

5. तुलसी

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सामग्री

कुछ तुलसी के पत्ते

क्या करें?

तुलसी के पत्तों को धो कर चबाएं।

कब सेवन करें?

प्रतिदिन दो या तीन बार इसका उपयोग कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है?

तुलसी निमाेनिया का घरेलू उपचार साबित हो सकती है, इसके औषधीय गुण शरीर को निमोनिया से लड़ने में मदद कर सकते हैं (21)।

6. काली मिर्च 

सामग्री
  • चुटकी भर काली मिर्च
  • 1 कप गर्म पानी
  • थोड़ा-सा नींबू का रस
क्या करें?
  • पानी में काली मिर्च डालें।
  • इसके साथ कुछ नींबू की बूंदें अच्छी तरह मिलाएं।
  • मिलने का बाद इसका सेवन करें।
कब सेवन करें?

इसका सेवन दिन में दो-तीन बार कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है?

काली मिर्च निमोनिया के उपचार में एक प्रभावी भूमिका निभा सकती है। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, काली मिर्च एंटी एस्पिरेशन ड्रग्स की तरह काम कर सकती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव निमोनिया पर दिख सकता है (22)।

7. वेजीटेबल जूस

निमोनिया का आयुर्वेदिक उपचार में सब्जियों का जूस एक अहम भूमिका निभा सकता है। दरअसल, कई सब्जियों में विटामिन-ए पाया जाता है और एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, यह पोषक तत्व निमोनिया जैसे संक्रमण से रोकथाम का काम करते हैं (23)। शरीर में विटामिन-ए की पूर्ति के लिए टमाटर, गाजर, ब्रोकली, पालक आदि का जूस बनाकर सेवन किया जा सकता है (24)।

8. विटामिन सी 

निमोनिया के इलाज के लिए विटामिन सी कारगर भूमिका निभा सकता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट है, जो निमोनिया को ठीक करने में एक प्रभावी असर दिखा सकता है (25)। शरीर में विटामिन सी की पूर्ति के लिए आप विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ या सप्लीमेंट का सेवन कर सकते हैं। हालांकि, निमोनिया के लिए विटामिन सी का सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

9. शहद

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सामग्री
  • 1 चम्मच शहद
  • आधा कप पानी
क्या करें?
  • पानी में एक चम्मच शहद मिलाएं।
  • इस घोल का सेवन करें।
कब सेवन करें।

इस घोल का रोजाना सेवन कर सकते हैं।

यह कैसे काम करता है?

शहद एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध होता है (26), (27)। यह निमोनिया के लक्षण जैसे खांसी और सर्दी को दूर करने का काम कर सकता है (28)।

10. अजवायन का तेल 

सामग्री
  • अजवायन के तेल की 1-2 बूंदें
  • कॉटन बॉल
क्या करें?
  • कॉटन बॉल पर अजवायन के तेल की कुछ बूंदें डालें।
  • सोने से पहले इसे अपने बिस्तर के बगल में रखें।
कब सेवन करें?

इसका उपयोग आप हर रात कर सकते हैं।

कैसे काम करता है?

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि निमोनिया होने की एक वजह बैक्टीरियल इंफेक्शन भी है (3)। यहां अजवायन का तेल एक अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि यह एंटीबैक्टीरियल गुण से समृद्ध होता है (29)।

11. लहसुन 

सामग्री

लहसुन की 3-4 कलियां

क्या करें?
  • आप या तो लहसुन की कलियों को चबा सकते हैं या उन्हें अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
  • आप लहसुन की कलियों का पेस्ट बनाकर उसे अपनी छाती पर लगा सकते हैं।
कब सेवन करें?

इसे दिन में एक बार कर सकते हैं।

कैसे काम करता है

लहसुन निमोनिया का घरेलू उपचार हो सकता है। दरअसल, लहसुन में एलिसिन नामक एक तत्व पाया जाता है, जो एंटीमाइक्रोबियल गुणों से समृद्ध होता है। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, एंटीमाइक्रोबियल निमोनिया के उपचार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है (30), (31)।

12. सेब का सिरका 

सामग्री
  • 1 बड़ा चम्मच सेब का सिरका
  • 1 चम्मच शहद
  • आधा गिलास गर्म पानी
क्या करें?
  • गर्म पानी में सेब का सिरका और आधा चम्मच शहद अच्छी तरह से मिलाएं।
  • अच्छे से मिलने के बाद इस घोल का सेवन करें।
  • कुछ दिनों तक यह उपचार जारी रख सकते हैं।
कब सेवन करें?

इसका सेवन कभी भी कर सकते हैं।

कैसे करता है काम?

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि निमोनिया बैक्टीरिया की वजह से भी हो सकता है (3)। इसके उपचार के लिए आप सेब के सिरके का इस्तेमाल कर कर सकते हैं, क्योंकि यह एंटी बैक्टीरियल गुणों से समृद्ध होता है (32)।

13. एसेंशियल ऑयल 

क. पुदीना का तेल 

सामग्री
  • पुदीने के तेल की 2-3 बूंदें
  • 1 चम्मच जैतून या बादाम का तेल
क्या करें?
  • जैतून या बादाम के तेल के साथ पुदीना के तेल की कुछ बूंदें मिलाएं।
  • इस मिश्रण को अपनी छाती और पीठ पर लगाएं।
कब उपयोग करें?

इस मिश्रण को दिन में कम से कम एक बार जरूर लगाएं।

कैसे करता है काम?

पुदीने का तेल एंटीबैक्टीरियल, एंटीमाइक्रोबियल और एनाल्जेसिक गुणों से भरपूर होता है, जो निमोनिया से निपटने में मदद कर सकता है (33) (34)।

ख. नीलगिरी का तेल

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सामग्री
  • नीलगिरी के तेल की 4-5 बूंदें
  • एक बर्तन में गर्म पानी
क्या करें?
  • गर्म पानी में नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें मिलाएं।
  • अब धीरे-धीरे कुछ मिनट तक भाप लें।
कब उपयोग करें?

आप इसका सेवन प्रतिदिन कर सकते हैं। साथ ही आप इसके सेवन से तुरंत आराम भी पा सकते हैं।

कैसे करता है काम?

नीलगिरी के तेल में एनाल्जेसिक और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो निमोनिया के उपचार में सहायक हो सकते हैं। नीलगिरी तेल के औषधीय गुणों के कारण व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है (35), (36)।

14. विक्स वेपोर रब 

सामग्री

विक्स वेपोरब

क्या करें?

बिस्तर पर जाने से पहले अपनी छाती और पीठ पर विक्स वेपोरब लगाएं।

कब सेवन कर सकते हैं?

सोने से पहले यह उपाय करें।

कैसे करता है काम?

विक्स वेपोरब निमोनिया के इलाज में प्रभावी हो सकता है। अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि विक्स वेपोरब अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन पर कारगर तरीके से काम कर सकता है। इसका सकारात्मक असर निमोनिया पर भी पड़ सकता है, हालांकि इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है (37)।

15. डैंडिलियन चाय

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सामग्री
  • 1-2 चम्मच डेंडिलियन की जड़
  • 1 कप पानी
  • शहद (वैकल्पिक)
क्या करें?
  • एक कप पानी में डेंडिलियन की जड़ डालें।
  • 5 से 10 मिनट तक इसे उबलने दें।
  • उबलने के बाद इसमें शहद डालें।
  • अब डेंडिलियन चाय का सेवन करें।
कब सेवन कर सकते हैं?

दिन मे दाे से तीन बार कभी भी।

कैसे करता है काम?

डेंडिलियन की जड़ें अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। यह एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुणों में समृद्ध होती हैं (38)। डेंडिलियन के ये गुण निमोनिया के उपचार में कारगर हो सकते हैं, क्योंकि निमानिया बैक्टीरिया के साथ-साथ फंगल संक्रमण की वजह से हो सकता है, जिसका जिक्र हमने निमानिया के प्रकार में किया है (3) (6)।

16. सेब 

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  • 1 सेब
क्या करें?
  • सेब को सीधे नाश्ते में खा सकते हैं।
  • इसके अलावा आप सेब का रस निकालकर भी सेवन कर सकते हैं।
कब सेवन कर सकते हैं?

इसे हर दिन कभी भी सेवन कर सकते हैं।

कैसे करता है काम?

निमोनिया के उपचार में सेब अहम भूमिका निभा सकता है। दरअसल, सेब विटामिन-सी से समृद्ध होता है और जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि विटामिन-सी निमोनिया के उपचार में एक अहम भूमिका निभा सकता है (27)। शरीर में विटामिन सी की पूर्ति के लिए आप सेब का सेवन कर सकते हैं (39)।

17. विलो की छाल

सामग्री
  • 1-2 चम्मच विलो की छाल
  • 1 कप पानी
  • 1 चम्मच शहद
क्या करें?
  • एक कप पानी में विलो की छाल डालकर उबालें।
  • उबालने के बाद घोल को छान लें और इसमें शहद मिलाएं।
  • ठंडा होने से पहले इसका सेवन करें।
कब सेवन कर सकते हैं?

हर दिन कम से कम दो बार इस घोल को पीना चाहिए।

कैसे करता है काम?

विलो छाल में एंटीबायोटिक और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं। ये यौगिक आपकी संपूर्ण प्रतिरक्षा प्रणाली में भी सुधार करते हैं। इसलिए, विलो की छाल, निमोनिया के इलाज के लिए एक बढ़िया विकल्प है (40)।

18. गाजर

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1 कप कटी हुई गाजर

क्या करें?

कटी हुई गाजर का सेवन करें।

कब सेवन कर सकते हैं?

हर दिन तीन से चार बार इसका सेवन कर सकते हैं।

कैसे करता है काम?

गाजर विटामिन सी गुणों से युक्त होती हैं (41), जो निमोनिया पैदा करने वाले बैक्टीरिया का मुकाबला करने में कारगर साबित हो सकते हैं (27)।

19. कपूर 

सामग्री
  • कपूर के तेल की 2-3 बूंदें
  • 1 चम्मच जैतून का तेल
क्या करें?
  • एक चम्मच जैतून तेल में कपूर के तेल की लगभग तीन बूंदें मिलाएं।
  • इस मिश्रण को अपनी छाती और पीठ पर हल्के से मलें।
कब  उपयोग कर सकते हैं?

हर रात सोने से पहले इसका उपयोग कर सकते हैं।

कैसे करता है काम?

कपूर के तेल के शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल गुण निमोनिया के लक्षणों से राहत देने में मदद कर सकते हैं (42)। ध्यान रहे इसे बच्चों की पहुंच से दूर ही रखें।

20. पार्सनिप का रस

सामग्री

आधा कप पार्सनिप का रस

क्या करें?

पार्सनिप रस का सेवन करें।

कब सेवन कर सकते हैं?

दिन में एक बार इसका सेवन कर सकते हैं।

कैसे करता है काम?

पार्सनिप में विभिन्न तरह के विटामिन होते हैं, जो सामान्य रूप से सभी रोगों के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मदद करते हैं। पार्सनिप में मौजूद विटामिन सी (43) निमोनिया जैसे कई प्रकार के श्वास रोगों के खिलाफ प्रभावी होता है (44)।

21. ब्लीच बाथ 

जैसी कि हम ऊपर पढ़ चुके हैं कि निमोनिया होने का एक कारण बैक्टेरिया भी है और ब्लीच बाथ एंटी माइक्रोबियल गुण के कारण त्वचा के हानिकारक बैक्टीरिया को मारकर, निमोनिया के संक्रमण को फैलने और सूजन के जोखिम को कम कर सकता है (45)।

कब करें?

आप ब्लीच बाथ प्रतिदिन ले सकते हैं। यह निमोनिया के साथ-साथ कई अन्य संक्रमण से होने वाली बीमारियों से रक्षा करता है।

निमोनिया के घरेलू उपचार के बाद आइए जानते हैं, इसके इलाज के बारे में।

निमोनिया का इलाज – Treatment for Pneumonia in Hindi

निमोनिया का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि निमोनिया किस प्रकार का है। सबसे आम प्रकार के निमोनिया का इलाज घर पर किया जा सकता है। फिर भी निमोनिया का इलाज डॉक्टर की देखरेख में ही करवाना चाहिए।

बैक्टीरियल निमोनिया : बैक्टीरियल निमोनिया का इलाज डॉक्टर के द्वारा दी जाने वाली एंटीबायोटिक्स दवाओं से किया जाता है। दवा खत्म होने से पहले अधिकांश लोग बेहतर महसूस करना शुरू कर सकते हैं, फिर भी इसके डोस को जारी रखना चाहिए। अगर आप दवा लेना बंद कर देते हैं, तो निमोनिया वापस आ सकता है। दवाओं को डॉक्टर की सलाह से ही बंद करना चाहिए (46)। अधिकांश लोगों के एंटीबायोटिक उपचार के एक से तीन दिनों के ही बाद खांसी और बुखार ठीक हाेने लगते हैं और वे बेहतर महसूस करना शुरू कर देते हैं।

वायरल निमोनिया : अगर आपको वायरल निमोनिया है, तो डॉक्टर इसका इलाज करने के लिए एक एंटीवायरल दवा लिख ​​सकता है। वायरल निमोनिया आमतौर पर एक से तीन सप्ताह में सुधर जाता है (46)।

इसके अलावा सभी गंभीर लक्षणों वाले निमोनिया का इलाज अस्पताल में ही संभव है। निमोनिया के लक्षण दिखने पर शीघ्र ही उसका इलाज कराना चाहिए, नहीं तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं (46)।

आइए, अब जानते हैं कि निमोनिया में क्या खाना चाहिए और किस चीज का परहेज करना चाहिए।

निमोनिया में आहार – क्या खाएं और क्या न खाएं – Diet for Pneumonia in Hindi 

निमोनिया होने पर डॉक्टर द्वारा बताए गए खाद्य पदार्थों को ही आहार में शामिल करना चाहिए।

क्या खाएं?

खरबूजा, संतरे, अंगूर, कीवी फल, आम, पपीता, अनानास, स्ट्रॉबेरी, रसभरी, ब्लूबेरी, क्रैनबेरी व तरबूज का सेवन करें (47)।  इसके अलावा हर्बल चाय, सूप और शोरबा भी ले सकते हैं, जो विटामिन- सी से समृद्ध होते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबायोटिक गुण भी पाए जाते हैं। ये निमोनिया से छुटकारा पाने के लिए कारगर साबित हो सकते हैं (48)।

क्या न खाएं? 

पका हुआ ठंडा गोश्त, अधिक नमक, दुग्ध उत्पाद, तले हुए खाद्य पदार्थ, कार्बोनेटेड युक्त शीतल पेय, अम्लीय खाद्य पदार्थ और पेय। ये सभी पदार्थ सांस से होने वाले संक्रमण का कारण हो सकते हैं और निमोनिया के दौरान नकारात्मक परिणाम का कारण बन सकते हैं।

इसके बाद अब जानते हैं निमोनिया के जोखिम कारक।

निमोनिया के जोखिम कारक – Risk Factors For Pneumonia in Hindi

निमोनिया कुछ आयु वर्ग के लोगों में अधिक तेजी से फैलता है। इसके अलावा, निमोनिया के जोखिम कारक इस प्रकार हैं (47)।

  • जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजारे होती है।
  • सिगरेट व शराब का अधिक सेवन करने वाले।
  • जो लोग गलत दवाओं का उपयोग करते हैं, उनमें भी निमोनिया की आशंका अधिक होती है।
  • दो वर्ष से कम और 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले।
  • कुछ रसायनों, प्रदूषण या फिर जहरीले धुएं के संपर्क में आने वाले। 

जोखिम कारकों के बाद जानते हैं कि निमोनिया से कैसे बचा जा सकता है।

निमोनिया से बचाव – Prevention Tips for Pneumonia in Hindi 

निमोनिया से बचाव के बारे में पता होना जरूरी है। कुछ आसान से तरीकों का पालन करके निमाेनिया से बचा जा सकता है-

  1. धूम्रपान छोड़ें, क्योंकि यह श्वास संक्रमण को अधिक संवेदनशील बनाता है।
  2. भोजन करने से पहले और बाद में अपने हाथों को धोएं।
  3. संक्रमण को फैलने से बचाने के लिए खांसते और छींकते समय अपनी नाक और मुंह को ढकें।
  4. प्रतिरक्षा प्रणानी को बेहतर करने के लिए स्वस्थ आहार लें और पर्याप्त आराम करें।
  5. हालांकि निमोनिया के लिए टीके उपलब्ध हैं, लेकिन ये निमोनिया को पूरी तरह से रोक नहीं सकते। ये जोखिम को कम करने में सहायक जरूर हो सकते हैं। निमोनिया के लिए टीके कुछ इस प्रकार हैं – (49)
  • हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (हिब)
  • इन्फ्लुएंजा (फ्लू)
  • खसरा
  • पर्टुसिस (काली खांसी)
  • न्यूमोकोकल
  • वैरिकाला (चिकनपॉक्स)

अब निमोनिया के खिलाफ कुछ आसान, लेकिन जरूरी टिप्स के बारे में जानते हैं।

निमोनिया के लिए कुछ और ज़रूरी टिप्स – Other Tips for Pneumonia in Hindi 

अगर आपको निमोनिया है, तो आप संक्रमण से उबरने और जटिलताओं को रोकने के लिए कुछ जरूरी टिप्स का पालन कर सकते हैं, जैसे (47):

  • खूब आराम करें।
  • चिकित्सक द्वारा बताई गई सभी दवाएं लें।
  • एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग तब तक जारी रखें, जब तक कि निमोनिया पूरी तरह खत्म न हो जाए। दवाई को बीच में बंद कर देने से निमोनिया वापस आ सकता है।
  • निमोनिया से उबरने में समय लग सकता है। इसलिए, अपने चिकित्सक से बात करें कि आप अपनी सामान्य दिनचर्या को कब से शुरू कर सकते हैं।
  • अगर आपको निमोनिया है, तो परिवार और दोस्तों के साथ संपर्क सीमित करें।
  • खांसते या छींकते समय अपनी नाक और मुंह को ढक लें। इस्तेमाल किए गए कपड़ों को तुरंत हटा दें और अपने हाथों को धो लें।

निमोनिया ऐसा संक्रमण है, जिसे अगर समय पर ठीक न किया जाए, तो यह घातक भी हो सकता है। इसलिए, शारीरिक समस्याओं के प्रति हमेशा सचेत रहें। इस आर्टिकल के माध्यम से हमने निमोनिया के लक्षण, उपचार के साथ ही इससे बचने के आसान घरेलू उपचार और अन्य जरूरी टिप्स भी आपके साथ साझा किए हैं। निमोनिया से जुड़ी यह जानकारी और इससे बचने के उपाय अपने साथियों के साथ जरूर शेयर करें। अगर आपके पास निमोनिया से जुड़े सवाल या कोई सुझाव हैं, तो आप नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें बता सकते हैं।

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