चमकती त्वचा के लिए प्राणायाम – Pranayama For Glowing Skin in Hindi

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हेल्दी और ग्लोइंग स्किन हर कोई पाना चाहता है। वहीं, इसके लिए लोग कई प्रकार की क्रीम और अन्य ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल भी करते हैं। हालांकि, इस कारण उन्हें कभी-कभी इसके नुकसानों को भी झेलना पड़ता है। ऐसे में स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम ग्लोइंग स्किन पाने के लिए एक कारगर उपाय लाए हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं प्राणायाम की। इस लेख में हम उन प्राणायाम के बारे में बताएंगे, जो त्वचा को चमकदार बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं। साथ ही यहां हम प्राणायाम को करने का तरीका भी समझाएंगे। तो फिर चलिए, बिना देर किए जानते हैं चमकती त्वचा के लिए प्राणायाम के फायदे।

विस्तार से पढ़ें लेख

चलिए जानते हैं, ग्लोइंग स्किन के लिए प्राणायाम और उन्हें करने का तरीका।

चमकती त्वचा के लिए प्राणायाम – Pranayama For Glowing Skin in Hindi

यहां हम क्रमवार चमकती त्वचा के लिए प्राणायाम और उनके फायदों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। वहीं, इस बात का ध्यान रखें कि बताए जा रहे प्राणायाम का नियमित अभ्यास ग्लोइंग स्किन पाने में मददगार हो सकता है, लेकिन इसे किसी भी तरीके से त्वचा संबंधी समस्या का इलाज न समझें। अब पढ़ें आगे :

1. कपालभाति

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कैसे है लाभकारी :

चमकती त्वचा पाने के लिए कपालभाति प्राणायाम बेहद कारगर साबित हो सकता है। इस बात की पुष्टि इससे संबंधित एक शोध से होती है। बता दें कि कपालभाति दो शब्दों से मिलकर बना है। कपाल का अर्थ है ‘माथा’ और भाति का मतलब है ‘चमक’। शोध के मुताबिक, कपालभाति प्राणायाम पूरे श्वसन प्रणाली को शुद्ध कर सकता है। साथ ही यह त्वचा पर चमक लाने में भी सहायक हो सकता है (1)। फिलहाल, इसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी और शोध की जरूरत है।

कैसे करें :

  • सबसे पहले शांत और साफ जगह पर योग मैट बिछा लें।
  • अब सुविधानुसार पद्मासन की मुद्रा, सुखासन या वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • अपनी कमर को सीधा रखते हुए आंखें बंद करें और उंगलियों को ज्ञान मुद्रा में रख लें।
  • मन को शांत करने की कोशिश करें।
  • अब गहरी और लंबी सांस लें।
  • फिर पेट को अंदर खींचते हुए नाक से सांस को झटके से बाहर निकालें।
  • ऐसा 15 से 20 बार लगातार करते रहें।
  • साथ ही इस दौरान मुंह को बंद ही रखें। सिर्फ नाक से ही सांस लेनी है और छोड़नी है।
  • 15 से 20 बार करने पर इस प्राणायाम का एक चक्र पूरा होता है।
  • इसे क्षमतानुसार दो से तीन बार कर सकते हैं।

सावधानी :

कपालभाति प्राणायाम को करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें :

  • अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी रोग है, तो कपालभाति प्राणायाम धीमी गति से करना चाहिए।
  • इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • नाक से खून आने की स्थिति में यह प्राणायाम न करें।

2. अनुलोम विलोम

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कैसे है लाभकारी :

ग्लोइंग स्किन के लिए प्राणायाम में अनुलोम विलोम को भी शामिल करना लाभकारी माना जा सकता है। दरअसल, अनुलोम विलोम शारीरिक ऊर्जा और मानसिक ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सांस से जुड़ा एक प्रकार का प्राणायाम है। इसे करने से शरीर में उचित मात्रा में ऑक्सीजन की पूर्ति के साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, इस प्राणायाम से खून में मौजूद विषाक्त पदार्थों को भी बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह तनाव, चिंता व अवसाद को कम करने में मदद कर सकता है (2)। बता दें कि जब शरीर की अशुद्धियां बाहर निकलती हैं, तो इससे चेहरे पर प्राकृतिक चमक आ सकती है (3)

कैसे करें :

  • इस योग को करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर पद्मासन या सुखासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • इस दौरान अपनी कमर सीधी रखें और दोनों आंखें बंद कर लें।
  • अब एक लंबी गहरी सांस लें और धीरे से छोड़ दें। इसके बाद खुद को एकाग्र करने की कोशिश करें।
  • इसके बाद अपने दाएं हाथ के अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस लें। सांस लेने के दौरान ज्यादा जोर न लगाएं, जितना हो सके उतनी गहरी सांस लें।
  • अब दाहिने हाथ की मध्य उंगली से बाईं नासिका को बंद करें और दाई नासिका से अंगूठे को हटाते हुए धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
  • इसके बाद कुछ सेकंड आराम कर दाईं नासिका से गहरी सांस लें।
  • फिर दाएं अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से दाएं हाथ की मध्य उंगली को हटाकर धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
  • इस प्रकार अनोम-विलोम प्राणायाम का एक चक्र पूरा हो जाएगा।
  • एक बार में ऐसे पांच से सात चक्र कर सकते हैं।

सावधानी :

अनुलोम विलोम को करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें :

  • अगर किसी को गंभीर ह्रदय रोग की समस्या है, तो डॉक्टरी परामर्श के बाद ही अनुलोम विलोम करना चाहिए।
  • इसके अलावा, रक्तचाप की समस्या वाले और गर्भवती महिलाओं को भी डॉक्टर से सलाह लेकर ही इस प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।
  • अनोम-विलोम प्राणायाम को हमेशा खाली पेट ही करना चाहिए। वहीं, अगर कोई खाना खा चुका है, तो ऐसी स्थिति में खाने के 4 से 5 घंटे बाद ही इस प्राणायाम को करना चाहिए।

पढ़ते रहें लेख  

3. भस्त्रिका प्राणायाम

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कैसे है लाभकारी :

चमकती त्वचा के लिए प्राणायाम में भस्त्रिका को भी शामिल किया जा सकता है। दरअसल, एक शोध में जिक्र मिलता है कि यह प्राणायाम श्वसन तंत्र को साफ और मजबूत करने के साथ ही शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद कर सकता है (4)। वहीं, हम बता चुके हैं शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने से चेहरे पर चमक लाने में मदद मिल सकती है (3)। यही कारण है कि चेहरे की चमक को बनाए रखने के लिए भस्त्रिका प्राणायाम लाभकारी माना जा सकता है। फिलहाल, इस विषय पर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

कैसे करें :

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर पद्मासन में बैठ जाएं।
  • इस दौरान गला, रीढ़ की हड्डी और सिर बिल्कुल सीधा रखें। साथ ही ध्यान रहे कि इस प्राणायाम को करते समय मुंह बिल्कुल भी खुला न रहे।
  • अब अपनी आंखें बंद कर लें।
  • इसके बाद दोनों नाक के छिद्रों से गहरी सांस लें। सांस अंदर लेने की प्रक्रिया में फेफड़े पूरी तरह से फूलने चाहिए।
  • इसके बाद एक झटके में दोनों नाक के छिद्रों के माध्यम से भरी हुई सांस को छोड़ें। वहीं, सांस छोड़ते समय उसकी गति इतनी तेज होनी चाहिए कि झटके के साथ फेफड़े सिकुड़ जाएं।
  • इस तरह भस्त्रिका प्राणायाम का एक चक्र पूरा होता है।
  • इस प्रक्रिया को 10 से 12 बार कर सकते हैं।

सावधानी :

भस्त्रिका प्राणायाम को करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें :

  • भस्त्रिका प्राणायाम को शुरू करने से पहले नाक को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए।
  • भस्त्रिका प्राणायाम योग की शुरुआत हमेशा धीमी गति के साथ ही करनी चाहिए।
  • अगर कोई हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित है, तो इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए।
  • वहीं, गर्भवती महिलाओं को भी इस प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

4. सूर्यभेदी प्राणायाम

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कैसे है लाभकारी :

एक अध्ययन से इस बात की जानकारी मिलती है कि सांस से जुड़ी एक्सरसाइज ग्लोइंग स्किन के लिए बेहतरीन हो सकती है (5)। बता दें कि सूर्यभेदी प्राणायाम भी सांस से जुड़ा ही प्राणायाम है, जिसमें नासिका की मदद से सांस को भरा और छोड़ा जाता है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि चमकती त्वचा के लिए प्राणायाम में सूर्यभेदी प्राणायाम को शामिल करना लाभकारी साबित हो सकता है।

कैसे करें :

  • इस योग को करने के लिए एक आरामदायक आसन (पद्मासन या सुखासन) में सिर और कमर को सीधा रखते हुए योग मैट पर बैठ जाएं।
  • इस दौरान हाथों को घुटनों पर ध्यान मुद्रा में रखें और आंखों को बंद कर पूरे शरीर को आराम दें।
  • इसके बाद दाएं हाथ की अनामिका (छोटी उंगली से पास वाली) उंगली से बाईं नासिका को बंद कर लें और दाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस लें। सांस लेने की प्रक्रिया इतनी धीमी होनी चाहिए कि कोई आवाज न आए।
  • इसके बाद ठोड़ी को नीचे करें और सीने का स्पर्श कराकर थोड़ा दबाव बनाएं और कुछ देर सांस को रोके रखें। इसे कुम्भक लगाना कहते हैं, जिसे धीरे-धीरे क्षमतानुसार बढ़ा सकते हैं।
  • इसके बाद कुम्भक से पहली वाली अवस्था में आएं।
  • इसके बाद दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से सांस छोड़ दें। इस दौरान भी आवाज नहीं आनी चाहिए।
  • इस तरह इस आसन का एक चक्र पूरा होगा।
  • इसे क्षमतानुसार पांच से दस बार कर सकते हैं।

सावधानी :

सूर्यभेदी प्राणायाम को करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें :

  • अगर किसी को हृदय रोग या मिर्गी की समस्या है, तो इस प्राणायाम से परहेज करना चाहिए।
  • इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को भी सूर्यभेदी प्राणायाम को करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

5. भ्रामरी प्राणायाम

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 कैसे है लाभकारी :

एक शोध से पता चलता है कि प्राणायाम करने से चेहरे की झुर्रियों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, प्राणायाम उम्र के बढ़ते प्रभावों को कम करने के साथ ही चेहरे की चमक और सौंदर्य को भी बरकरार रखने में सहायक साबित हो सकता है (6)। वहीं, चमकदार स्किन के लिए प्राणायाम में भ्रामरी प्राणायाम कितना लाभकारी हो सकता है, फिलहाल इस बारे में अभी और शोध की आवश्यकता है।

कैसे करें :

  • सबसे पहले किसी शांत वातावरण में योग मैट बिछाएं और उस पर बैठ जाएं।
  • इसके बाद आंखें बंद करें और आसपास की शांति को महसूस करें।
  • अब अपने अंगूठे से कानों को बंद कर लें और अपनी मध्य और उसके बगल (अनामिका) की उंगली को आंखों पर रखें।
  • फिर मुंह को बंद रखते हुए नाक के माध्यम से गहरी सांस अंदर लें। इसके बाद मधुमक्खी जैसी आवाज (ह्म्म्म्म्म) करते हुए सांस को धीरे-धीरे बाहर की ओर छोड़ें।
  • सांस अंदर लेने का समय करीब 3-5 सेकंड तक का होना चाहिए और बाहर छोड़ने का समय 15-20 सेकंड तक का होना चाहिए।
  • इसके बाद दोबारा गहरी सांस लें और इस प्रक्रिया को 3 से 5 बार दोहराएं।

सावधानी :

भ्रामरी प्राणायाम को करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें (7) :

  • भ्रामरी प्राणायाम को खाली पेट करना चाहिए।
  • इस प्राणायाम के दौरान अपनी आंखों को जोर से ना दबाएं।
  • माइग्रेन की समस्या वालों लोगों को इसका अभ्यास करने से बचना चाहिए या फिर ट्रेनर की देखरेख में खुली आंखों से इसका अभ्यास कर सकते हैं।

तो दोस्तों, इस लेख को पढ़ने के बाद अब आप यह तो समझ गए होंगे कि चमकदार स्किन के लिए प्राणायाम कैसे मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा, लेख में हमने इसे करने के तरीकों को भी समझाया है। अब आप चाहें, तो यहां बताए गए प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल कर अपनी त्वचा और आकर्षक बना सकते हैं। साथ ही हम यह स्पष्ट कर दें कि प्राणायाम करते समय धैर्य बरतें, क्योंकि योग का असर धीरे-धीरे ही हो सकता है। वहीं, प्राणायाम के साथ-साथ उचित खानपान का भी ध्यानरखें, तभी इसके बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।

Sources

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  1. Effect of 6 Weeks of Kapalabhati Pranayama Training on Peak Expiratory Flow Rate in Young Healthy Volunteers
    https://www.researchgate.net/publication/264553454_Effect_of_6_Weeks_of_Kapalabhati_Pranayama_Training_on_Peak_Expiratory_Flow_Rate_in_Young_Healthy_Volunteers
  2. To Study the Effect of Pranayama on Depression in Geriatric Population
    https://www.ijhsr.org/IJHSR_Vol.6_Issue.8_Aug2016/30.pdf
  3. An Overview On Blood Purifier
    https://www.researchgate.net/publication/271236485_AN_OVERVIEW_ON_BLOOD_PURIFIER/fulltext/56dcc1ac08aebabdb4142920/AN-OVERVIEW-ON-BLOOD-PURIFIER.pdf
  4. Effect Of Bhastrika Pranayama On Abdominal Obesity In Men & Women – A Randomized Controlled Trial
    http://repository-tnmgrmu.ac.in/10172/3/460215918jancy_rani.pdf
  5. A Study To Assess The Effectiveness Of Breathing Exercises On Hypertension Among Patients With Chronic Renal Failure In Selected Hospital At Coimbatore
    http://repository-tnmgrmu.ac.in/2432/1/3001313indukm.pdf
  6. Advantages Of Eight Type Pranayamas
    http://oldisrj.lbp.world/UploadedData/8903.pdf
  7. International Journal of Applied Ayurved Research ISSN 2347-6362 CRITICAL STUDY OF BHRAMARI PRANAYAMA A REVIEW ARTICLE
    https://www.researchgate.net/publication/342674037_International_Journal_of_Applied_Ayurved_Research_ISSN_2347-6362_CRITICAL_STUDY_OF_BHRAMARI_PRANAYAMA_A_REVIEW_ARTICLE
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आवृति गौतम ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। इन्होंने अपने करियर की शुरूआत डिजिटल मीडिया से ही की थी। इस क्षेत्र में इन्हें काम करते हुए दो वर्ष से ज्यादा हो गए हैं। आवृति को स्वास्थ्य विषयों पर लिखना और अलग-अलग विषयों पर विडियो बनाना खासा पसंद है। साथ ही इन्हें तरह-तरह की किताबें पढ़ने का, नई-नई जगहों पर घूमने का और गाने सुनने का भी शौक है।

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