प्रेगनेंसी में अखरोट खाने के फायदे और नुकसान- Walnuts During Pregnancy In Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन जर्नलिज्म मीडिया कम्युनिकेशन)

प्रेगनेंसी के समय खाद्य पदार्थों का सेवन सोच समझकर करना चाहिए, इसलिए कई बार पौष्टिक ड्राई फ्रूट्स को लेकर भी महिलाओं मन में संशय उठना लगता है। कुछ ऐसा ही अखरोट के साथ भी है। ऐसे में अखरोट खाने की शौकीन महिलाएं अगर यह जानना चाहती हैं कि प्रेगनेंसी में अखरोट खाना कितना सुरक्षित है, तो इससे जुड़ी जरूरी जानकारी इस लेख में मौजूद है। यहां हम प्रेगनेंसी में अखरोट खाने के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में बता रहे हैं। इनके बारे में पढ़कर आप यह फैसला ले सकते हैं कि गर्भावस्था में अखरोट का सेवन करना चाहिए या नहीं।

शुरू करते हैं लेख

सबसे पहले यह जानते हैं कि गर्भावस्था में अखरोट खाना सुरक्षित है या नहीं।

क्या गर्भावस्था में अखरोट खाना सुरक्षित है? Is it Safe to Eat Walnuts While Pregnant?

हां, प्रेगनेंसी में अखरोट खाना फायदेमंद हो सकता है। इससे संबंधित एक शोध में जिक्र मिलता है कि प्रेगनेंसी और प्रसव के बाद अखरोट को आहार में शामिल करने वाली महिलाओं के बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होता है (1)। यही नहीं, प्रेगनेंसी में कैल्शियम, फोलेट, आयरन जैसे पोषक तत्वों का सेवन जरूरी होता है (2)। ये सभी जरूरी न्यूट्रिएंट्स अखरोट में मौजूद होते हैं (3)। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि प्रेगनेंसी में अखरोट का सेवन किया जा सकता है।

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गर्भावस्था में अखरोट से होने वाले लाभ के बारे में आगे पढ़ें।

प्रेगनेंसी में अखरोट खाने के फायदे – 6 Benefits of Eating Walnuts During Pregnancy In Hindi

अखरोट के सेवन से गर्भवती को किस तरह के लाभ हो सकते हैं, यह लेख के इस भाग में समझिये। बस ध्यान दें कि अखरोट से किसी गंभीर समस्या का इलाज नहीं हो सकता है। इसका सेवन बीमारियों से बचने और स्वस्थ रहने के लिए किया जा सकता है।

1. हार्ट हेल्थ

गर्भावस्था में अखरोट खाने के फायदे में हार्ट हेल्थ शामिल है। एक रिसर्च में बताया गया है कि अखरोट, हृदय के लिए भी लाभदायक हो सकता है। दरअसल, इसमें हानिकारक कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करने की क्षमता हो सकती है। साथ ही यह उच्च रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकता है। ये सभी हृदय रोग के जोखिम हैं, इसलिए इसे हृदय के लिए अच्छा माना जाता है। यही नहीं, अखरोट ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कुछ कम करके भी हृदय को बेहतर तरीके से कार्य करने में सहयोग कर सकता है (4)।

2. एंटीऑक्सीडेंट युक्त

अखरोट को एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर नट्स में से एक बताया जाता है (5)। इससे संबंधित एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) द्वारा पब्लिश एक रिसर्च में भी इस बात का जिक्र मिलता है। रिसर्च के अनुसार, अखरोट के स्किन में सबसे ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होता है (6)। कहा गया है कि सेलेनियम, विटामिन ई और सी जैसे पोषक तत्व एंटीऑक्सीडेंट की तरह कार्य करने की क्षमता रखते हैं। इसके कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है (7)। ये सारी पोषक तत्व अखरोट में मौजूद होते हैं (3)।

3. फोलेट

भ्रूण के विकास के लिए जरूरी माना जाने वाला फोलेट भी अखरोट में मौजूद होता है। रिसर्च की मानें, तो इस पोषक तत्व की कमी होने से बच्चे को बर्थ डिफेक्ट यानी जन्म दोष हो सकता है। इसमें न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट यानी रीढ़ और दिमाग से संबंधी परेशानी शामिल है। यही नहीं, फोलेट गर्भपात का कारण भी बन सकता है (8)। ऐसे में अखरोट का सेवन करके इन समस्याओं से बचने और फोलेट की कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है।

4. अच्छी नींद के लिए

गर्भावस्था के समय नींद में खलल और अनिद्रा या नींद की कमी होना काफी आम है। ऐसे में अखरोट का सेवन करके इस परेशानी से कुछ राहत मिल सकती है (9)। अखरोट में मौजूद मेलाटोनिन, सेरोटोनिन और कुल पॉलीफेनोल्स उच्च एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव प्रदर्शित करते हैं। इस प्रभाव से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। इसी वजह से अखरोट को नींद के लिए अच्छा माना जाता है (10)।

5. अवसाद

गर्भावस्था के समय होने वाली परेशानियों में से एक डिप्रेशन यानी अवसाद भी है (11)। इससे बचने के लिए अखरोट का सेवन किया जा सकता है। अखरोट से जुड़े एक रिसर्च पेपर में कहा गया है कि अखरोट में अल्फा लिनोलेनिक एसिड है, जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का कार्य कर सकता है। यह डिप्रेशन के जोखिम को कम कर सकता है। इसके अलावा, अखरोट में पॉलीफेनोल कंपाउंड होते हैं, जो सेरोटोनिन रसायन का उत्पादन करते हैं। यह मस्तिष्क के कार्य को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, जिससे मस्तिष्क पर अच्छा प्रभाव पड़ सकता है (12)।

7.वजन कम करने में सहायक

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का वजन बढ़ता है, लेकिन यह एक सीमा तक ही बढ़ना सही है। अन्यथा गर्भावस्था से जुड़े जोखिम जैसे – मैक्रोसोमिया (नवजात जो औसत से बहुत बड़ा हो), गर्भकालीन मधुमेह (जीडीएम) , गर्भावस्था से प्रेरित उच्च रक्तचाप (PIH), समय पूर्व प्रसव, सिजेरियन डिलीवरी (सीएस) प्री-एक्लेम्पसिया (ब्लड प्रेशर से होने वाली समस्या) हो सकते हैं (13)। ऐसे में अखरोट का सेवन करके वजन नियंत्रित रह सकता है (14)।

पढ़ते रहें लेख

गर्भावस्था में अखरोट खाने के फायदे के बाद आगे समझिए कि प्रेगनेंसी के समय अखरोट का सेवन किन-किन तरीकों से किया जा सकता है।

गर्भावस्था में अखरोट को अपने आहार में कैसे शामिल करें

अखरोट को आहार में कुछ आसान तरीकों से आहार में शामिल किया जा सकता है। नीचे हमने संक्षेप में अखरोट खाने के तरीके इन प्रेगनेंसी बताए हैं।

  • अखरोट को साबुत खा सकते हैं।
  • इसके टुकड़े करके इसे आइसक्रीम या केक की टॉपिंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • अखरोट को हल्का भूनकर या सेकने के बाद स्नैक्स के रूप में खाया जा सकता है।
  • स्मूदी और मिल्क शेक बनाते समय अखरोट को मिलाया जा सकता है।
  • ओट्स बनाते समय उसमें ऊपर से कुछ अखरोट के टुकड़े डाल सकते हैं।
  • हलवा बनाते समय अखरोट को डाला जा सकता है।

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प्रेगनेंसी में अखरोट खाने के तरीके के बाद लेख में आगे बढ़ते हुए अखरोट खाने के नुकसान जानिए।

प्रेगनेंसी में अखरोट खाने के नुकसान- Side Effects of Eating Walnuts While Pregnant In Hindi

अखरोट का सेवन करते समय बरती जाने वाली सावधानियां कुछ इस प्रकार हैं।

प्रेगनेंसी में अखरोट खाने के फायदे और नुकसान दोनों के ही बारे में आप समझ गए होंगे। अखरोट खाने के नुकसान अधिक नहीं हैं, इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन प्रेगनेंसी में होने वाली कई समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है। बस तो लेख में बताए गए तरीकों की मदद से आहार में अखरोट को शामिल करके स्वास्थ्य लाभ उठाएं और बीमारियों के जोखिम से खुद को व अपने बच्चे को बचाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गर्भवती अखरोट को खाली पेट खा सकती हैं?

हां, गर्भवतियों अखरोट को खाली पेट खा सकती हैं।

क्या गर्भावस्था के दौरान रोजाना अखरोट खा सकते हैं?

जी हां, डॉक्टर की सलाह पर सीमित मात्रा में प्रेगनेंसी के दौरान रोजाना अखरोट खा सकते हैं।

अखरोट किसे नहीं खाना चाहिए?

नट एलर्जी वालों को अखरोट खाने से बचना चाहिए।

गर्भावस्था में अखरोट कब खाना शुरू करना चाहिए?

डॉक्टर की सलाह पर सीमित मात्रा में पूरी प्रेगनेंसी में अखरोट खा सकते हैं।

Sources

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