गर्भावस्था में चावल खाने के फायदे और नुकसान – Rice Benefits In Pregnancy In Hindi

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चावल एक ऐसा खाद्य पदार्थ है, जो लगभग हर घर में बनता है। कुछ लोग तो यहां तक मानते हैं कि भोजन में यदि चावल नहीं शामिल करें तो वह अधूरा होता है। ऐसे में सामान्य दिनों में तो चावल खाना या न खाना व्यक्ति की पसंद-नापसंद में निर्भर करता है। वहीं, खाने को लेकर पसंद-नापसंद का यह ख्याल गर्भावस्था के दौरान मन में कई तरह के खाद्य पदार्थों को लेकर संशय पैदा कर देता है। इसी में शामिल गर्भावस्था में चावल खाना, भले ही यह सामान्य खाद्य पदार्थ है, लेकिन गर्भावस्था में चावल खाना सुरक्षित है या नहीं, इसका ध्यान रखना भी जरूरी है। तो स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम प्रेगनेंसी में चावल खाने के फायदे से जुड़ी कई विशेष जानकारियां देंगे। साथ ही अगर गर्भावस्था में चावल खाने के नुकसान है तो इसकी जानकारी भी साझा करेंगे।

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लेख में सबसे पहले जानें कि क्या गर्भावस्था में चावल खाना सुरक्षित है।

क्या गर्भावस्था में चावल लेना सुरक्षित है?

हां, गर्भावस्था में चावल खाना सुरक्षित माना गया है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में गर्भावस्था के दौरान चावल के सेवन को सुरक्षित माना गया है। वहीं, अन्य खाद्य पदार्थों के साथ चावल के सेवन को समय पूर्व प्रसव या बच्चे के समय से पहले जन्म के जोखिम को कम करने के लिए मददगार बताया गया है (1)। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी कि डब्यूएचओ ने भी गर्भावस्था में चावल फायदेमंद और सुरक्षित माना गया है (2)

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लेख के इस हिस्से में हम जानेंगे गर्भावस्था में चावल खाने के फायदे

प्रेगनेंसी में चावल खाने के फायदे – Benefits of Eating Rice in Pregnancy In Hindi

अब यह बात तो पता चल ही गई कि गर्भावस्था में चावल खाना सुरक्षित है। तो अब प्रेगनेंसी में चावल खाने के फायदे जानना भी जरूरी है। तो लेख के इस भाग में हम प्रेगनेंसी में चावल खाने के फायदे से जुड़ी जानकारियां साझा कर रहे हैं। तो प्रेगनेंसी में चावल खाने के फायदे कुछ इस प्रकार हैं:

1. ऊर्जा से भरपूर

गर्भावस्था के दौरान भ्रूण, प्लेसेंटा और मां के टिश्यू के विकास और रखरखाव के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऐसे में चावल का सेवन लाभकारी हो सकता है (3)। दरअसल, चावल कार्बोहाइड्रेट से समृद्ध होता है। वहीँ, कार्बोहाइड्रेट शरीर में पहुंचने के बाद ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। यह न सिर्फ गर्भवती के लिए, बल्कि भ्रूण के विकास के लिए भी फायदेमंद माना गया है (4)। वहीं,  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चावल को ऊर्जा का प्रमृख स्रोत माना है, जो गर्भवती के लिए जरूरी है (2)

2. मतली की समस्या में

गर्भावस्था में मतली और उल्टी की समस्या होना आम बात है (5)। मतली के साथ ही उल्टी की समस्या को कम करने के लिए चावल का उपयोग फायदेमंद हो सकता है। दरअसल, रिसर्च में पाया गया कि अन्य खाद्य पदार्थों के साथ ही यदि चावल का सेवन कम किया जाए तो इससे मतली की समस्या हो सकती है। वहीं, यदि सीमित मात्रा में चावल और अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाए तो इस समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है (6)

3. कब्ज के लिए 

गर्भावस्था में कब्ज की समस्या होना आम है। दरअसल, हॉर्मोनल बदलाव के कारण गर्भावस्था में पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिसका नतीजा कब्ज हो सकता है (7)। ऐसे में इस समस्या में भी चावल फायदेमंद माना गया है। इस विषय में मौजूद जानकारी के अनुसार, शारीरिक गतिविध के साथ ही फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ कब्ज की समस्या को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। वहीं, ब्राउन राइस को फाइबर का अच्छा स्रोत माना गया है। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि ब्राउन राइस का सेवन कब्ज की समस्या में फायदेमंद हो सकता है (8)। ऐसे में गर्भावस्था में कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए सफेद चावल के बजाय ब्राउन राइस का विकल्प चुनें, क्योंकि वाइट राइस की तुलना में ब्राउन राइस में अधिक फाइबर होता है  (9)

4. रक्तचाप को नियंत्रित करे

गर्भावस्था में  उच्च रक्तचाप की समस्या का भी जोखिम बना रहता है। वहीं, प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है (10)। ऐसे में इस समस्या में चावल का सेवन कुछ हद तक प्रभावकारी हो सकता है। दरअसल, ब्राउन राइस में मौजूद गामा-एमिनोब्यूटिरिक एसिड (Gamma-aminobutyric acid- एमिनो एसिड),, ब्लड प्रेशर को कम करने में कुछ हद तक फायदेमंद साबित हो सकता है। साथ ही इसमें पोटैशियम मौजूद होता है, जो ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायक हो सकता है (11)

5. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

गर्भावस्था में एंटीऑक्सीडेंट का बहुत महत्व माना गया है। रिसर्च के अनुसार यदि गर्भावस्था में सेलेनियम, कॉपर, जिंक, और मैंगनीज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों से जुड़े एंटीऑक्सीडेंट की कमी होती है, तो इसके कारण गंभीर परिणाम हो सकते हैं।  गर्भावस्था में एंटीऑक्सीडेंट की कमी के कारण भ्रूण की ग्रोथ रुक सकती है, प्रीक्लेम्पसिया यानी की गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है। साथ ही आगे चलकर बड़े होने के बाद भी कई बीमारियों जैसे – हृदय रोग और टाइप 2 मधुमेह की समस्या का जोखिम हो सकता है (12)। वहीं, एक अन्य शोध में, चावल में मौजूद फेनोलिक एसिड, फ्लेवोनोइड्स, और फाइटिक एसिड जैसे पोषक तत्वों में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि प्रदर्शित करने की बात सामने आई है  (13)

ऐसे में चावल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, इसकी कमी के कारण होने वाली समस्याओं से बचाव में लाभदायक हो सकता है। हालांकि, इस विषय पर अधिक शोध की जरूरत है। बता दें एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल के कारण शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण होने वाले क्षति से बचाव कर सकता है। एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थ कोशिकाओं की क्षति से बचाव कर सकता है (14)। बता दें फ्री रेडिकल के वजह से कई तरह की बीमारियों जैसे – गठिया, ह्रदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है (15)

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गर्भावस्था में चावल को शामिल करने के कई तरीके हो सकते हैं, यहां हम उन्हीं के बारे में बता रहे हैं।

गर्भावस्था के आहार में चावल को कैसे शामिल करें

गर्भावस्था के दौरान चावल को कई प्रकार से डाइट में शामिल किया जा सकता है। यहां हम कुछ प्रकारों के बारे में जानकारी दे रहे हैं:

  • चावल को सामान्य रूप से उबालकर सेवन किया जा सकता है।
  • दाल और चावल की खिचड़ी भी सेहत के लिए फायदेमंद मानी गई है।
  • इसके अलावा चावल का कम मसाले वाला पुलाव भी खाया जा सकता है।
  • खीर के रूप में भी चावल का सेवन किया जा सकता है।
  • चावल खींचले और इडली के रूप में भी सेवन कर सकते हैं।
  • दक्षिण भारत में गेंहू के जैसी ही चावल की रोटी बनाकर खाई जाती है।

मात्रा: गर्भावस्था में एक दिन में 9 से 11 सर्विंग तक चावल खाया जा सकता है (4)। आसानी से समझ जाए तो अन्य खाद्य पदार्थों के साथ ही आधा कप तक चावल का सेवन किया जा सकता है (2)। हालांकि हर किसी की गर्भावस्था एक जैसी नहीं होती है। इसलिए, उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार इसकी मात्रा में बदलाव हो सकते हैं। ऐसे में इसकी मात्रा की सही जानकारी के लिए डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

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यहां हम जानेंगे गर्भावस्था में चावल खाने के नुकसान के बारे में।

गर्भावस्था में चावल खाने के नुकसान- Side Effects of Rice in Pregnancy In Hindi

चावल को गर्भावस्था में फायदेमंद माना गया है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा गर्भवती के लिए हानिकारक हो सकती है। यहां हम उन्हीं के बारे में बता रहे हैं।

  • चावल हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स युक्त खाद्य पदार्थ है (16)। इसलिए इसका अधिक सेवन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ा सकता है जिससे मधुमेह की समस्या हाे सकती है (17)
  • सफेद चावल में मौजूद सेवन ट्राइग्लिसराइड (रक्त में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट) मेटाबॉलिक सिंड्रोम की समस्या को बढ़ाने का काम कर सकता है (18)। बता दें कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम किसी प्रकार की बीमारी नहीं, बल्कि हृदय रोग, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम कारकों के समूह को कहा जाता है (19)
  • कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा, खासकर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ के कारण मोटापे की समस्या भी हो सकती है (20)। वहीं, सफेद चावल रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ की श्रेणी में ही है (21)। ऐसे में इस आधार पर माना जा सकता है कि अधिक सफेद चावल के सेवन से वजन बढ़ने का जोखिम हो सकता है।
  • ब्राउन राइस में मौजूद आर्सेनिक (Arsenic) भ्रूण के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है (22)
  • आर्सेनिक के कारण चावल का अधिक सेवन उल्टी, मतली और दस्त की समस्या की कारण भी बन सकता है। साथ ही इससे निर्जलीकरण और सदमे की समस्या भी हो सकती है (23)
  • अधिक मात्रा में आर्सेनिक युक्त चावल का सेवन कैंसर के साथ ही मृत्यू का कारण भी बन सकता है (25) (26)

गर्भावस्था में किसी भी चीज का अधिक सेवन हानिकारक हो सकता है। वहीं यदि चावल का सीमित मात्रा में सेवन किया जाए तो ही यह फायदेमंद हो सकता है, नहीं तो इसके नाकारात्मक परिणाम हाे सकते हैं। हालांकि, सफेद चावल के स्थान पर ब्राउन राइस का सेवन ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद माना गया है, इसलिए कोशिश करें कि गर्भावस्था में चावल खाना है, तो ब्राउन राइस को शामिल कर सकती हैं। अगर अब भी मन में किसी प्रकार का संशय हो तो गर्भावस्था में चावल खाने से पहले एक बार डॉक्टरी सलाह भी ले सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्भवती महिला को कितना चावल खाना चाहिए?

गर्भावस्था में चावल का सेवन अन्य खाद्य पदार्थों के साथ आधे कप तक किया जा सकता है (2)

मुझे गर्भवती होने पर प्रेगनेंसी में कच्चे चावल खाना की लालसा क्यों है?

गर्भावस्था के दौरान प्रेगनेंसी में कच्चे चावल खाना पिका सिंड्रोम के कारण हो सकता है (27)।  ऐसे में बेहतर है इस बारे में डॉक्टरी सलाह ली जाए, क्योंकि पिका सिंड्रोम में किसी ऐसी चीज के खाने की लालसा होती है, जो खाने योग्य नहीं होते हैं (28)

संदर्भ (Sources)

  1. A vegetable, fruit, and white rice dietary pattern during pregnancy is associated with a lower risk of preterm birth and larger birth size in a multiethnic Asian cohort: the Growing Up in Singapore Towards healthy Outcomes (GUSTO) cohort study
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/27733407/
  2. Healthy Eating during Pregnancy and Breastfeeding
    https://www.euro.who.int/__data/assets/pdf_file/0020/120296/E73182.pdf
  3. Energy Requirements, Energy Intake, and Associated Weight Gain during Pregnancy
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK235247/
  4. Eating right during pregnancy
    https://medlineplus.gov/ency/patientinstructions/000584.htm
  5. Pregnancy – signs and symptoms
    https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/HealthyLiving/pregnancy-signs-and-symptoms#signs-of-pregnancy
  6. Nausea and vomiting in early pregnancy: Effects on food intake and diet quality
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5400073/
  7. Common symptoms during pregnancy
    https://medlineplus.gov/ency/patientinstructions/000583.htm
  8. Health Tips for Pregnant Women
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/weight-management/healthy-eating-physical-activity-for-life/health-tips-for-pregnant-women
  9. Constipation – self-care
    https://medlineplus.gov/ency/patientinstructions/000120.htm
  10. High Blood Pressure During Pregnancy
    https://www.cdc.gov/bloodpressure/pregnancy.htm
  11. Germinated brown rice as a value added rice product: A review
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3551059/
  12. The Importance of Antioxidant Micronutrients in Pregnancy
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3171895/
  13. Rice antioxidants: phenolic acids, flavonoids, anthocyanins, proanthocyanidins, tocopherols, tocotrienols, γ-oryzanol, and phytic acid
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3959956/
  14. Antioxidants: In Depth
    https://www.nccih.nih.gov/health/antioxidants-in-depth
  15. Antioxidants
    https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/healthyliving/antioxidants
  16. Effects of White Rice, Brown Rice and Germinated Brown Rice on Antioxidant Status of Type 2 Diabetic Rats
    https://www.mdpi.com/1422-0067/13/10/12952/htm
  17. Glycemic index and diabetes
    https://medlineplus.gov/ency/patientinstructions/000941.htm
  18. White rice consumption is a risk factor for metabolic syndrome in Tehrani adults: a prospective approach in Tehran Lipid and Glucose Study
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/24916530/
  19. Metabolic syndrome
    https://medlineplus.gov/ency/article/007290.htm
  20. Did the food environment cause the obesity epidemic?
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5769871/
  21. Carbohydrates
    https://medlineplus.gov/ency/article/002469.htm
  22. Arsenic and Rice: Translating Research to Address Health Care Providers’ Needs
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4779445/
  23. Arsenic
    https://www.cdc.gov/biomonitoring/pdf/Arsenic_FactSheet.pdf
  24. Health Effects of Chronic Arsenic Exposure
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4186552/
  25. Arsenic
    https://medlineplus.gov/arsenic.html
  26. A Case Report on Pica: A rare pregnancy related complication
    https://ajner.com/HTML_Papers/Asian%20Journal%20of%20Nursing%20Education%20and%20Research__PID__2015-5-1-29.html
  27. Pica
    https://medlineplus.gov/ency/article/001538.htm
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सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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