प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे और नुकसान- Cucumber During Pregnancy In Hindi

Written by , MA (Journalism & Media Communication) Puja Kumari MA (Journalism & Media Communication)
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प्रेगनेंसी में महिला अपना ध्यान अन्य दिनों से ज्यादा रखती हैं। खासकर जब बात खाने की आए, तो गर्भावस्था के दौरान महिला के खाने का एक्स्ट्रा ध्यान रखा जाता है। कई बार तो सामान्य से दिखने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से पहले भी महिला दस बार सोचती हैं। इन्हीं सामान्य खाद्य पदार्थों में से एक है खीरा। अब इस विषय में कुछ सवाल उठते हैं, क्या प्रेगनेंसी में खीरा खा सकते हैं? अगर हां, तो प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे क्या हैं? क्या गर्भावस्था में खीरा खाने के फायदे के साथ कुछ नुकसान भी हैं? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब हम स्टाइलक्रेज के इस लेख में दे रहे हैं। तो गर्भावस्था में खीरा खाने के फायदे और इससे जुड़े अन्य जानकारियों के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

लेख विस्तार से पढ़ें

सबसे पहले लेख की शुरुआत में सबसे अहम् सवाल का जवाब देते हैं कि प्रेगनेंसी में खीरा खाना सुरक्षित है या नहीं।

क्या गर्भावस्था में खीरा खाना सुरक्षित है?

इससे पहले कि लेख में आगे बढ़ें, मन में आने वाले इस सवाल का जवाब पता होना जरूरी है। प्रेगनेंसी में खीरा खाना सुरक्षित है या नहीं। तो हम बता दें कि गर्भावस्था में खीरा खाना सुरक्षित हो सकता है (1)। वहीं, विशेषज्ञों की मानें तो प्रेगनेंसी की पहली और तीसरी तिमाही में खीरे का सेवन किया जा सकता है (2)। हालांकि, ध्यान रहे कि हर किसी की गर्भावस्था एक जैसी नहीं होती है। ऐसे में अगर किसी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या हो, तो बेहतर है खीरा का सेवन डॉक्टरी सलाह से करें। वहीं, सलाद के साथ खीरे के दो से तीन स्लाइसेस का सेवन किया जा सकता है, लेकिन मन की तसल्ली के लिए खीरा खाने की मात्रा से जुड़ी जानकारी के लिए भी गर्भवती अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं।

अब लेख के इस भाग में जानिए गर्भावस्था में खीरा के फायदे के बारे में।

प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे – 8 Benefits of Eating Cucumber During Pregnancy In Hindi

यह तो स्पष्ट हो गया है कि गर्भावस्था में खीरा खाना सुरक्षित हो सकता है। अब बारी आती है प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे से जुड़ी जानकारियों पर गौर करने की। ऐसे में यहां हम एक या दो नहीं बल्कि गर्भावस्था में खीरा के 5 से भी ज्यादा फायदों की जानकारी दे रहे हैं। तो गर्भावस्था में खीरा खाने के फायदे कुछ इस प्रकार हैं :

1. कब्ज के लिए

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई सारी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में शामिल है कब्ज की समस्याहॉर्मोनल बदलाव के कारण पाचन प्रक्रिया का धीमा होना इसका एक कारण हो सकता है। ऐसे में इससे राहत पाने के लिए फाइबर युक्त आहार का सेवन उपयोगी हो सकता है (3)। वहीं, खीरा पानी और फाइबर का अच्छा स्त्रोत है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालकर पाचन क्रिया में सुधार करने में सहायक हो सकता है (4)

इसके साथ ही, खीरा में लैक्सेटिव गुण होने की पुष्टि भी हुई है, जो मल को नर्म करने में और कब्ज की समस्या से बचाव करने में उपयोगी हो सकता है (5)। ऐसे में गर्भावस्था में कब्ज से राहत पाने के लिए आहार में खीरा शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

2. न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से बचाव

गर्भावस्था के दौरान महिला को कई सारे जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है और उन्हीं में से एक है फोलेट। गर्भवस्था के पहले और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पर्याप्त मात्रा में फॉलिक एसिड या फोलेट की जरूरत होती है। फोलेट गर्भ में पल रहे शिशु को न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (Neural Tube Defects) जैसे – स्पाइना बिफिडा (मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या) के जोखिम से बचाव कर सकता है (6)

ऐसे में डॉक्टर द्वारा दिए गए फॉलिक एसिड सप्लीमेंट के साथ महिला फोलेट युक्त आहार को भी अपनी डाइट का हिस्सा बना सकती हैं। इसी फोलेट युक्त डाइट में खीरा भी शामिल है (7)। खीरा में फोलेट मौजूद होता है और इसी आधार पर मान सकते हैं कि फोलेट युक्त अन्य खाद्य पदार्थों के साथ खीरे का सेवन गर्भ में पल रहे भ्रूण को न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के जोखिम से बचा सकता है। 

3. पोषक तत्वों के लिए

गर्भावस्था के दौरान कई सारे पोषक तत्वों जैसे – कैल्शियम, आयरन, फॉलिक एसिड की जरूरत होती है (8)। ऐसे में उनकी पूर्ति के लिए अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ खीरा को आहार में शामिल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। खीरा में आयरन, कैल्शियम और फोलेट के साथ-साथ कई अन्य पोषक तत्व जैसे – पोटेशियम, फॉस्फोरस, जिंक और विटामिन-ए भी मौजूद है (7)। ऐसे में प्रेगनेंसी के हेल्दी डाइट में खीरा को शामिल किया जा सकता है।

4. हड्डियों के लिए

गर्भावस्था के दौरान हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए भी खीरा उपयोगी हो सकता है। दरअसल, खीरे को अल्कलाइन डाइट की श्रेणी में रखा गया है। यह शरीर के पीएच लेवल को संतुलित रख सकता है। वहीं, असंतुलित पीएच लेवल कई स्वास्थ्य समस्याओं, जिसमें कमजोर हड्डियां भी शामिल है, होने का कारण हो सकता है (9)। इसके अलावा, खीरे में कैल्शियम मौजूद होता है (7)। स्वस्थ हड्डियों और दांत के लिए कैल्शियम एक जरूरी पोषक तत्व होता है (10)। ऐसे में इस आधार पर मान सकते हैं कि गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ हड्डियों के लिए खीरा एक लाभकारी खाद्य पदार्थ हो सकता है।

5. सूजन के लिए

गर्भावस्था के दौरान सूजन, खासतौर पर हाथों और पैरों में सूजन होना सामान्य है (3)। ऐसे में सूजन की समस्या से बचाव के लिए खीरा खाना लाभकारी हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, खीरे में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो कि सूजन को कम करने में सहायक हो सकता है। इतना ही नहीं खीरा में लिगनैंस (Lignans) नामक पॉलीफेनोल्स होते हैं, जो सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं (9)। तो प्रेगनेंसी में सूजन की समस्या से बचाव या उनके लक्षणों को कम करने के लिए खीरा उपयोगी खाद्य पदार्थ हो सकता है।

6. डिहाइड्रेशन से बचाव

गर्भावस्था के दौरान मॉर्निंग सिकनेस या मतली और उल्टी होना सामान्य है। हालांकि, अगर यह समस्या लगातार या ज्यादा हो तो डिहाइड्रेशन का जोखिम पैदा हो सकता है (11)। ऐसे में गर्भावस्था में पानी के साथ-साथ पानी युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है। इन्हीं में खीरा भी शामिल है, एक शोध के मुताबिक खीरे में 95% पानी मौजूद होता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक हो सकता है (9)

7. डायबिटीज से बचाव

प्रेगनेंसी के दौरान डायबिटीज का जोखिम भी हो सकता है । स्वस्थ डाइट से इस समस्या को कुछ हद कम किया जा सकता है (12)। ऐसे में मधुमेह के खतरे को को कम करने के लिए अपने डाइट में खीरा शामिल कर सकते हैं। दरअसल, खीरे में एंटीडायबिटिक गुण मौजूद होता है, जो डायबिटीज के जोखिम को कम कर सकता है। इसके साथ ही इसमें एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक यानी ब्लड शुगर कम करने वाला गुण मौजूद होता है (13)। इस आधार पर कह सकते हैं कि यह न सिर्फ ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रख सकता है, बल्कि डायबिटीज के जोखिम को भी कम कर सकता है।

8. त्वचा के लिए

गर्भावस्था के दौरान सेहत के साथ-साथ त्वचा का ध्यान रखना भी आवश्यक है। ऐसे में त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए भी खीरा उपयोगी हो सकता है। खीरे का उपयोग कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं से बचाव कर सकता है। खीरा त्वचा को ठंडक प्रदान करने के साथ-साथ त्वचा की रंगत को निखार त्वचा को चमकदार बना सकता है। त्वचा को हाइड्रेट करना हो या पोषण प्रदान करना हो, स्किन के लिए खीरा एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।

त्वचा को कोमल, मुलायम और चमकदार बनाने के साथ-साथ त्वचा में कसावट लाकर स्किन को जवां बनाने में भी खीरा सहायक हो सकता है। वहीं, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण खीरे को कई तरह की त्वचा संबंधी परेशानियों जैसे – एक्जिमा की समस्या, सोरायसिस की परेशानी (Psoriasis – एक प्रकार का त्वचा रोग) और कील-मुंहासों के क्रीम में बतौर मुख्य सामग्री उपयोग किया जाता है। खीरा का उपयोग टोनर, फेस मास्क या फेस पैक के तौर पर भी कर सकते हैं (4)

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प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे के बाद अब जानते हैं कि गर्भावस्था में खीरा कैसे खाया जाना चाहिए।

गर्भावस्था में खीरा को अपने आहार में कैसे शामिल करें?

प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे जानने के बाद अब बारी आती है गर्भावस्था में खीरा खाने के तरीकों से जुड़ी जानकारी की। ऐसे में प्रेगनेंसी में खीरा अपने डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं, उसकी विस्तारपूर्वक जानकारी यहां दी गई है। तो प्रेगनेंसी में खीरा कुछ इस प्रकार खाएं:

  • खीरे को काटकर सलाद के तौर पर खाया जा सकता है।
  • खीरे का रायता बनाकर भी इसे उपयोग किया जा सकता है। इससे शरीर को ठंडक मिल सकती है।
  • हरी सब्जियों के साथ मिलाकर इसका जूस बनाकर भी पिया जा सकता है।
  • इसके अलावा, वेज सैंडविच बनाते समय भी खीरे का उपयोग करना सही हो सकता है।
  • खीरे का सूप भी गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है।

पढ़ते रहें

प्रेगनेंसी में खीरा खाने के तरीके के बाद अब हम खीरा के नुकसान के बारे में जानते हैं।

प्रेगनेंसी में खीरा खाने के नुकसान- Side Effects of Eating Cucumber While Pregnant In Hindi

वैसे तो गर्भावस्था में खीरा फायदेमंद है, लेकिन किसी भी चीज की अधिकता उसके नुकसान का कारण हो सकती है। ऐसे में लेख के इस भाग में हम प्रेगनेंसी में खीरा खाने के नुकसान से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां दे रहे हैं। तो गर्भावस्था में खीरा खाने के नुकसान कुछ इस प्रकार हैं :

  • खीरे का अधिक मात्रा में सेवन करने से गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है (14)
  • कुछ खीरे स्वाद में कड़वे होते हैं और उनका कड़वा स्वाद उनमें मौजूद क्यूकरबीटासीन्स (Cucurbitacins) नामक कंपाउंड के कारण हो सकता है (15)। कुछ मामलों में कड़वा खीरा विषक्तता ka कारण हो सकता है। ऐसे में ध्यान रहे कि गर्भवती कड़वे खीरे का सेवन न करें।
  • खीरे में ड्यूरेटिक (मूत्रवर्धक) प्रभाव होता है। इसलिए, अधिक मात्रा में खीरा खाने से बार-बार यूरिन पास करने की समस्या हो सकती है (16)। ऐसे में खीरा खाने से पहले प्रेगनेंट महिलाएं डॉक्टर की सलाह लें।
  • एक शोध के अनुसार, अगर कोई पौधों से होने वाली एलर्जी से पीड़ित हैं, तो उसे खीरे का सेवन करने से मुंह और गले में खुजली के साथ सूजन की भी समस्या हो सकती है (17)। इसके अलावा, अगर किसी महिला को खीरा या खीरे के परिवार से जुड़े किसी भी खाद्य पदार्थ से एलर्जी की समस्या है तो वह खीरे का सेवन न करें। अगर खीरे का सेवन करने की इच्छा हो भी रही है तो उससे पहले डॉक्टरी सलाह लें।

खीरे के नुकसान के बाद लेख के इस भाग में जानिए प्रेगनेंसी में खीरा खाने से जुड़ी सावधानियों के बारे में।

प्रेगनेंसी में खीरा खाने से पहले बरती जाने वाली सावधानियां

गर्भावस्था के दौरान खीरे के नुकसान के जोखिम को कम करने के लिए कुछ सावधानियों को ध्यान में रखना आवश्यक है। तो प्रेगनेंसी में खीरा खाने से पहले गर्भवती नीचे बताई गई सावधानियों को फॉलो कर सकती हैं। प्रेगनेंसी में खीरा खाने से जुड़ी सावधानियां कुछ इस प्रकार है :

  • बाजार से हमेशा ताजा खीरा खरीदें। अगर खीरा बासी दिखे या उसपर कोई दाग या चोट हो तो उसे न खरीदें।
  • खीरा बाजार से लाने के बाद अच्छे से धोएं।
  • खीरा खाने से पहले भी खीरे को हमेशा अच्छे से धो लें।
  • खीरे को हमेशा ताजा काटकर खाएं, अगर आधा कटा खीरा हो तो उसे न खाएं।
  • ठंड के मौसम में खीरा न खाएं, क्योंकि खीरे की तासीर ठंडी होती है। ऐसे में सर्दी-जुकाम होने का जोखिम हो सकता है।
  • गर्भवती के खाने से पहले खीरे को घर में कोई अन्य व्यक्ति चख ले, ताकि पता चल सके कि खीरा कड़वा है या नहीं।
  • अगर खीरा कड़वा हो तो उसका सेवन बिल्कुल न करें।

तो ये थे प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे। उम्मीद है इस लेख में दी गई जानकारी के माध्यम से गर्भावस्था में खीरा खाने से जुड़े हर सवाल का जवाब आपको मिल गया होगा। अब भी अगर मन में थोड़ा संशय हो, तो प्रेगनेंसी में खीरा खाने से पहले गर्भवती अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं। साथ ही हम यह स्पष्ट कर दें कि खीरा किसी भी बीमारी का इलाज नहीं है, बल्कि शारीरिक समस्याओं से बचाव और उनके प्रभाव को कम करने में उपयोगी हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान अगर किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या हो तो उसे अनदेखा न करते हुए, डॉक्टरी इलाज को प्राथमिकता दें। उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए उपयोगी रहा होगा। इस लेख को अन्य लोगों के साथ शेयर कर हर किसी को प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे से जुड़ी जानकारियों से अवगत कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या प्रेग्नेंट महिला को खाली पेट खीरा का सेवन करना चाहिए?

जैसे कि लेख में प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे के बारे में जानकारी दी गई है। हालांकि, प्रेगनेंसी में खाली पेट खीरा खाने से जुड़े शोध की कमी है। ऐसे में बेहतर है कि खीरे को खाने के साथ सलाद या रायता के तौर पर सेवन किया जाए। इसके अलावा, अगर मन में दुविधा हो तो खाली पेट खीरा खाने को लेकर गर्भवती अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान रोज खीरा खाना फायदेमंद है?

इसमें कोई शक नहीं है कि प्रेगनेंसी में खीरा खाने के फायदे कई सारे हैं। हालांकि, इसके अधिक सेवन से कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जिसकी जानकारी ऊपर दी गई है। ऐसे में बेहतर है कि गर्भावस्था में खीरे का सेवन हर रोज करने के बजाय हर दूसरे दिन या हर कुछ दिनों में करें।

खीरा किसे नहीं खाना चाहिए?

अगर किसी महिला को खीरा या खीरे से जुड़ी अन्य सब्जी से एलर्जी है, तो वो खीरा का सेवन न करें। अगर खीरा खाने की इच्छा हो भी रही है, तो बेहतर है सेवन से पहले एक बार डॉक्टरी सलाह लें।

प्रेगनेंसी के दौरान खीरा खाना कब शुरू करना चाहिए?

जैसे कि लेख में जानकारी दी गई है कि स्वस्थ प्रेगनेंसी की पहली या तीसरी तिमाही में खीरे का सेवन किया जा सकता है (2)। हालांकि, हर महिला का स्वास्थ्य और गर्भावस्था एक जैसी नहीं होती है, ऐसे में बेहतर है इस विषय में एक बार डॉक्टरी सलाह भी ली जाए।

References

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Puja Kumari

Puja Kumariहेल्थ एंड वेलनेस राइटर

पुजा कुमारी ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। इन्होंने वर्ष 2015 में अपने करियर की शुरुआत न्यूज आधारित वेब पोर्टल से की थी। अब तक इनके 2 हजार से भी ज्यादा आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। पुजा को विभिन्न विषयों पर लेख लिखना पसंद है, लेकिन इनका सबसे ज्यादा पसंदीदा विषय घर की...read full bio

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