गर्भावस्था में खुजली के कारण, लक्षण, घरेलू उपाय और इलाज – Itching During Pregnancy in Hindi

Written by , BA (Journalism & Media Communication) Saral Jain BA (Journalism & Media Communication)
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गर्भावस्था में एक महिला कई तरह के बदलावों का सामना करती है, जो कुछ मामलों में काफी दुखदाई भी महसूस होते हैं। ऐसी ही एक कष्टप्रद और पीड़ादायक स्थिति है, गर्भावस्था में खुजली। यूं तो इस अवस्था में थोड़ी बहुत खुजली हर महिला को होती है, लेकिन कभी-कभी यह स्थिति असहनीय भी हो सकती है। ऐसे में स्टाइलक्रेज का यह लेख गर्भावस्था के दौरान खुजली का कारण और गर्भावस्था के दौरान खुजली का इलाज कैसे किया जाए, यह समझने में मदद कर सकता है। वहीं, लेख में प्रेगनेंसी में खुजली से बचाव संबंधी उपाय भी शामिल किए गए हैं। फिर भी यह समझना जरूरी है कि घरेलू उपाय सिर्फ समस्या में राहत दिला सकते हैं, पूर्ण इलाज डॉक्टरी परामर्श पर ही निर्भर करता है।

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तो आइए सबसे पहले गर्भावस्था के दौरान खुजली का कारण समझ लेते हैं। बाद में हम इसके लक्षण और घरेलू उपायों पर भी बात करेंगे।

गर्भावस्था में खुजली के कारण – Causes of Itching During Pregnancy in Hindi

निम्न बिंदुओं के माध्यम से हम गर्भावस्था के दौरान खुजली का कारण मानी जाने वाली कुछ आम स्थितियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (1):
संक्रमण।

  • इन्फेस्टेशन (त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया या सूक्ष्ण किटाणुओं का प्रभाव)।
  • लिवर या किडनी से संबंधित परेशानी।
  • गर्भावस्था के दौरान होने वाली विशिष्ट त्वचा क्षति के कारण।
  • एटॉपिक डर्मेटाइटिस (एक्जिमा) जैसी त्वचा संबंधी समस्या होने पर

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गर्भावस्था के दौरान खुजली का कारण के बाद अब हम आपको गर्भावस्था में खुजली के लक्षण बताएंगे।

गर्भावस्था में खुजली के लक्षण – Symptoms of Itching During Pregnancy in Hindi

वैसे तो खुजली कुछ अपने आप में एक लक्षण है, जो कि ऊपर बताए गए कारणों के होने का संकेत मानी जाती है। इसके बावजूद गर्भावस्था में होने वाली खुजली की कुछ विशेष स्थितियां है, जिसे गर्भावस्था में खुजली के लक्षणों के रूप में देखा जा सकता है (2)।

  • पेट पर चकत्ते और खुजली।
  • जांघो पर चकत्तों के साथ खुजली।
  • नितम्बों पर चकत्तों के साथ खुजली।
  • भुजाओं पर चकत्तों के साथ खुजली।
  • स्तनों का आकर बढ़ने के कारण खुजली का एहसास हो सकता है

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लेख के अगले भाग में अब हम यह जानने का प्रयास करेंगे कि गर्भावस्था में खुजली की समस्या कब होती है।

गर्भावस्था में खुजली की समस्या कब होती है?

आमतौर पर महिलाओं में खुजली गर्भावस्था के 34वें हफ्ते के बाद होती है (2)। वहीं, ऊपर बताए गए कारणों की वजह से इसके होने की आशंका पहली और दूसरी तिमाही के दौरान भी हो सकती है।

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लेख के अगले भाग में अब हम गर्भावस्था की खुजली के लिए घरेलू उपचार संबंधी जानकारी हासिल करेंगे।

गर्भावस्था में खुजली के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Itching During Pregnancy in Hindi

यहां हम जानने का प्रयास करेंगे कि गर्भावस्था की खुजली के लिए घरेलू उपचार में किन चीजों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इस बात का ध्यान रखें कि बताए जा रहे घरेलू उपाय सामान्य खुजली की स्थिति में राहत पहुंचाने का काम कर सकते हैं। वहीं, किसी गर्भवती को अगर गंभीर खुजली की समस्या है, तो डॉक्टरी उपचार बहुत जरूरी है। तो आइए, क्रमवार हम प्रेगनेंसी में खुजली से बचाव संबंधी घरेलू उपाय जान लेते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं :

1. ओटमील बाथ

सामग्री :

  • पानी से भरा बाथ टब
  • एक या दो कप ओटमील

कैसे इस्तेमाल करें :

  • पानी से भरे बाथ टब में एक या दो कप ओटमील मिलाएं।
  • अब इस पानी में करीब 20 मिनट के लिए बैठें।
  • वहीं, चाहें तो किसी सूती कपडें में भीगे हुए ओटमील को बांधकर एक स्पंज की तरह प्रभावित स्थान पर लगाने के लिए भी उपयोग में ला सकती हैं।
  • आराम मिलने तक इस प्रक्रिया को नियमित रूप से इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

कैसे है लाभदायक :

ट्रीटमेंट ऑफ इचिंग ड्यूरिंग प्रेगनेंसी के लिए ओटमील बाथ को कारगर माना जा सकता है (3)। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) द्वारा प्रकाशित एक शोध में जिक्र मिलता है कि ओटमील के गाढ़े अर्क में एंटीइन्फ्लामेट्री (सूजन कम करने वाला) गुण पाया जाता है। ओटमील का यह गुण रूखी-सूखी त्वचा और खुजली की समस्या में राहत पहुंचाने का काम कर सकता है (4)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि गर्भावस्था के दौरान खुजली का इलाज करने के लिए ओटमील बाथ उपयोगी हो सकता है। बाथ टब न होने की स्थिति में इसे एक बाल्टी पानी में भी डाल कर उपयोग में ला सकते हैं।

2. नारियल तेल

सामग्री :

  • शुद्ध नारियल का तेल

कैसे इस्तेमाल करें :

  • दो से तीन बूंद नारियल का तेल अपनी हथेली पर लें।
  • अब उंगलियों के सहारे इसे प्रभावित स्थान पर हल्के हाथों से लगाएं।
  • लगाने के बाद इसे करीब 30 से 40 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें।
  • समय पूरा होने के बाद नहा लें।
  • बेहतर प्रभाव के लिए नारियल तेल को लगाकर रात भर के लिए भी छोड़ा जा सकता है।
  • नियमित रूप से हर रोज इस प्रक्रिया को अपनाया जा सकता है।

कैसे है लाभदायक :

खुजली की समस्या से राहत पाने के लिए नारियल के तेल को भी उपयोग में लाया जा सकता है। दरअसल, एनसीबीआई के एक शोध में जिक्र मिलता है कि नारियल तेल एक बेहतरीन मॉइस्चराइजर और एंटी इन्फ्लामेट्री एजेंट की तरह काम करता है। इस वजह से यह त्वचा को नमी प्रदान कर त्वचा संबंधी उलझन (जैसे :- जलन, चुभन और खुजली) को दूर करने का काम कर सकता है। वहीं, यह सोरायसिस जैसी त्वचा संबंधी समस्या को ठीक करने में भी मदद कर सकता है (5), जिसके कारण भी खुजली की समस्या हो सकती है (6)। इस आधार पर ट्रीटमेंट ऑफ इचिंग ड्यूरिंग प्रेगनेंसी में नारियल तेल को सहायक माना जा सकता है।

3. एलोवेरा जेल

सामग्री :

  • एलोवेरा जेल (आवश्यकतानुसार)

कैसे इस्तेमाल करें :

  • थोड़ा सा एलोवेरा जेल उंगलियों में लेकर खुजली वाली जगह पर लगाएं।
  • अब इसे करीब 30 मिनट के लिए ऐसे ही लगा रहने दें।
  • समय पूरा होने पर इसे पानी से धो लें और किसी कपड़े के सहारे प्रभावित स्थान को अच्छे से सुखा लें।
  • बेहतर प्रभाव के लिए इसे दिन में दो से तीन बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे है लाभदायक :

गर्भावस्था के दौरान खुजली का इलाज करने के लिए एलोवेरा जेल का उपयोग भी सहायक साबित हो सकता है। दरअसल, एलोवेरा जेल में एंटीइफ्लामेट्री (सूजन कम करने वाला) और एंटी बैक्टीरियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) प्रभाव पाया जाता है। एलोवेरा जेल के यह प्रभाव संयुक्त रूप से त्वचा संबंधित समस्याओं जैसे:- सोरायसिस (खुजली से जुड़ा त्वचा विकार), डर्मेटाइटिस (त्वचा की सूजन), बर्न (जलना), घाव और खुजली से राहत दिला सकते हैं (7)।

4. बेकिंग सोडा बाथ

सामग्री :

  • एक कप बेकिंग सोडा
  • पानी आवश्यकतानुसार

कैसे इस्तेमाल करें :

  • पानी में भरे बाथ टब में एक कप बेकिंग सोडा मिलाएं।
  • अब पानी से भरे इस बाथ टब में करीब 20 से 30 मिनट के लिए बैठें।
  • समय पूरा होने के बाद साफ मुलायम कपड़े से अपने शरीर को थपथपाते हुए सुखाएं।
  • खुजली के ठीक होने तक इस प्रक्रिया को दिन में एक बार दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

ट्रीटमेंट ऑफ इचिंग ड्यूरिंग प्रेगनेंसी में बेकिंग सोडा भी फायदेमंद माना जा सकता है। इटली की सस्सारी यूनिवर्सिटी द्वारा किए त्वचा से संबंधित एक शोध से इस बात की पुष्टि होती है। शोध में माना गया है कि बेकिंग सोडा एक्वाजेनिक प्यूरेटिस (पानी के कारण होने वाली खुजली) और सोरायसिस (खुजली से संबंधित त्वचा विकार) को दूर करने में मदद कर सकता है (8)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि बेकिंग सोडा का उपयोग कर गर्भावस्था में होने वाली खुजली से राहत पाई जा सकती है।

5. एसेंशियल ऑयल्स

सामग्री :

  • करीब 10 से 12 बूंद एसेंशियल ऑयल (पिपरमिंट, गुलाब, चंदन, अजवाइन या कागजी नींबू)
  • 30 मिली नारियल का तेल

कैसे इस्तेमाल करें :

  • नारियल के तेल में एसेंशियल ऑयल (ऊपर दिए गए में से कोई एक) मिलाएं।
  • अब इसे उंगलियों के सहारे प्रभावित हिस्से पर हल्के-हल्के लगाएं।
  • अब इसे करीब 30 से 40 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें।
  • समय पूरा होने के बाद इसे पानी से धो लें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में एक से दो बार तक दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

पिपरमिंट, गुलाब, चंदन, अजवाइन और कागजी नींबू के एसेंशियल ऑयल त्वचा से संबंधित खुजली की समस्या से राहत दिलाने में कारगर हो सकते हैं। इस काम में एसेंशियल ऑयल्स में मौजूद एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीइन्फ्लामेट्री गुण अहम माने जा सकते हैं। त्वचा से जुड़े एसेंशियल ऑयल्स से संबंधित एनसीबीआई के वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में इस बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। शोध में माना गया है कि ऊपर दिए गए सभी एसेंशियल ऑयल प्यूरिटिस (खुजली) से राहत दिलाने का काम कर सकते हैं (9)। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि गर्भावस्था के दौरान खुजली का इलाज करने के लिए एसेंशियल ऑयल काफी हद तक सहायक हो सकते हैं।

6. ठंडी सिकाई

सामग्री :

  • एक बर्फ का टुकड़ा
  • एक सूती कपड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • एक सूती कपड़े में एक छोटा बर्फ का टुकडा बांध लें।
  • अब इस बर्फ वाले कपड़े को खुजली वाले स्थान पर रख कर सिकाई करें।
  • करीब 10 से 15 मिनट सिकाई करने के बाद सूखे कपड़े से उस स्थान को पोंछ दें।
  • दिन में इस प्रक्रिया को करीब तीन बार तक दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

ठंडी सिकाई के माध्यम से भी खुजली की समस्या में कुछ हद तक आराम मिल सकता है। ठंडी सिकाई से संबंधित एनसीबीआई के एक शोध में भी इस बात को स्वीकार किया गया है। शोध में माना गया है कि सामान्य खुजली के साथ ही त्वचा की सूजन, चकत्तों और सोरायसिस जैसे त्वचा विकार के कारण होने वाली खुजली में भी ठंडी सिकाई लाभकारी असर दिखा सकती है (10)। इस आधार पर ट्रीटमेंट ऑफ इचिंग ड्यूरिंग प्रेगनेंसी में ठंडी सिकाई को सहायक माना जा सकता है।

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7. नींबू का रस

सामग्री :

  • एक नींबू
  • एक चौथाई कप पानी
  • एक रुई का टुकड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • एक चौथाई कप पानी में नींबू का रस निचोड़ कर मिला लें।
  • अब नींबू पाने के इस मिश्रण में रुई को भिगोकर प्रभावित स्थान पर लगाएं।
  • अब इसे करीब 30 से 40 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें।
  • समय पूरा होने के बाद इसे पानी से धो डालें।
  • एक-एक दिन के अंतराल पर इस प्रक्रिया को दिन में एक बार इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

कैसे है लाभदायक :

खुजली की समस्या से राहत पाने के लिए नींबू को भी एक अच्छा विकल्प माना जा सकता है। दरअसल, नींबू में एंटीइन्फ्लामेट्री (सूजन को कम करने वाला) और एंटीमाइक्रोबियल (सूक्ष्म बैक्टीरिया नष्ट करने वाला) गुण पाया जाता है। इस कारण यह त्वचा संबंधी सूजन और मुंहासों को कम करने में मदद कर सकता है (11)। इसके अलावा, यह त्वचा पर खुजली की समस्या को दूर करने का भी प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है। इस बात को नींबू से संबंधित एक शोध में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है (12)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि खुजली की समस्या से राहत पाने के लिए नींबू के रस का उपयोग सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है।

8. डैंडेलियन की जड़

सामग्री :

  • एक चम्मच डैंडेलियन की जड़ के छोटे टुकड़े
  • एक कप पानी
  • एक रुई का टुकड़ा

कैसे इस्तेमाल करें :

  • एक सॉस पैन में एक कप पानी लें।
  • अब इसमें एक चम्मच डैंडेलियन की जड़ डाल कर उबालने के लिए गैस पर चढ़ा दें।
  • अच्छे से उबल जाने के अब इस पानी को छान कर कप में अलग कर लें।
  • इसे कुछ समय अब ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
  • जब यह पानी ठंडा हो जाए, तो रुई का टुकड़ा इसमें डुबोएं और फिर उसे प्रभावित स्थान पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में दो से तीन बार दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

डैंडेलियन की जड़ के अर्क को इस्तेमाल करने से भी खुजली की समस्या में राहत पाई जा सकती है। इस बात का जिक्र डैंडेलियन पौधे से संबंधित एक शोध में मिलता है। शोध में माना गया है कि संपूर्ण डैंडेलियन पेड़ के अर्क का इस्तेमाल कर प्यूरिटिस (खुजली) और एक्जिमा (सूजन संबंधी त्वचा विकार) में राहत पहुंचा सकता है (13)। इस तथ्य के आधार पर यह माना जा सकता है कि डैंडेलियन की जड़ के अर्क का उपयोग भी काफी हद तक गर्भावस्था में होने वाली खुजली को कम करने में सहायक हो सकता है।

9. बेसन का पेस्ट

सामग्री :

  • एक चम्मच बेसन
  • एक चम्मच दही

कैसे इस्तेमाल करें :

  • सबसे पहले एक चम्मच बेसन में दही डालकर इसे अच्छे से मिलाएं।
  • अच्छे से मिलाने के बाद जब इसका एक चिकना पेस्ट तैयार हो जाएं, तो उसे प्रभावित स्थान पर लगाएं।
  • अब इसे सूखने के लिए करीब 30 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें।
  • समय पूरा होने के बाद इसे पानी से धो डालें।
  • समस्या खत्म होने तक इसे दिन में एक बार इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

बेसन को सामान्य तौर पर चने को पीसकर तैयार किया जाता है। इसका पेस्ट त्वचा को साफ करने, डेड स्किन को हटाने और रंगत में सुधार करने का काम कर सकता है (14)। वहीं चने से संबंधित एक अन्य शोध में इसे खुजली से राहत पाने में भी उपयोगी माना गया है (15)। इस आधार पर माना जा सकता है कि खुजली की समस्या से राहत पाने के लिए भी बेसन का उपयोग किया जा सकता है।

10. जुनिपर बेरी लोशन

सामग्री :

  • जुनिपर बेरी लोशन (आवश्यकतानुसार)

कैसे इस्तेमाल करें :

  • जुनिपर बेरी लोशन की दो से चार बूंद लेकर प्रभावित स्थान पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस लोशन को दिन में एक से दो बार तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

गर्भावस्था में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पाने के लिए घरेलू तौर पर जुनिपर बेरी लोशन को भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इस बात को प्यूरिटिस (खुजली) से संबंधित एक शोध में साफ तौर पर स्वीकार किया गया है। शोध में कई प्राकृतिक सामग्रियों को खुजली में कारगर बताया गया है। इन सामग्रियों में जुनिपर बेरी का नाम भी शामिल है, जिसे क्रीम, लोशन और पाउडर के रूप में इस्तेमाल में लाया जा सकता है (12)। इस आधार पर कहना गलत नहीं होगा कि खुजली की समस्या में जुनिपर बेरी लोशन सहायक हो सकता है।

11. कैलामाइन लोशन

सामग्री :

  • कैलामाइन लोशन (आवश्यकतानुसार)

कैसे इस्तेमाल करें :

  • कैलामाइन लोशन की कुछ बूंदे हाथों में लेकर प्रभावित स्थान पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • बेहतर प्रभाव के लिए इस लोशन को दिन में करीब दो बार तक इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

कैलामाइन लोशन के इस्तेमाल से भी काफी हद तक खुजली के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक शिन्गल्स (वायरल संक्रमण, जिसमें त्वचा पर दर्दनाक फफोले व चकत्ते हो जाते हैं) की सक्रियता के कारण होने वाली खुजली में कैलामाइन लोशन सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है (16)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली खुजली की समस्या में भी यह उपयोगी साबित हो सकता है।

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गर्भावस्था की खुजली के लिए घरेलू उपचार के बाद अब हम जानेंगे कि प्रेगनेंसी में खुजली का इलाज करने के लिए डॉक्टर से कब मिलना चाहिए।

प्रेगनेंसी में खुजली होने पर डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

जैसा कि आपको लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि गर्भावस्था में हर महिला को थोड़ी बहुत खुजली का एहसास होता है। वहीं, जब यह खुजली की समस्या अधिक होने लगे, तो बिना देर किए इस मामले में डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लेना चाहिए (3)। क्योंकि, गर्भावस्था में खुजली के कई कारण हो सकते हैं। इस बारे में भी आपको लेख में पहले ही जानकारी दी जा चुकी है।

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लेख के अगले भाग में अब हम आपको प्रेगनेंसी में खुजली का इलाज बताएंगे।

गर्भावस्था में खुजली का इलाज – Treatment for Itching During Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में इलाज के लिए डॉक्टर निम्न तरीकों को इस्तेमाल में ला सकते हैं (2)।

  • डॉक्टर खुजली में आराम देने वाले कुछ क्रीम या लोशन लगाने का सुझाव दे सकते हैं।
  • त्वचा पर होने वाले चकत्तों के कारण खुजली की समस्या में डॉक्टर एंटीहिस्टामाइन (एलर्जी से राहत दिलाने वाली) दवा का इस्तेमाल करने का सुझाव दे सकते हैं।
  • वहीं, कुछ विशेष स्थितियों में कोर्टिकोस्टेरॉयड (सूजन कम करने के लिए) क्रीम लगाने की भी सलाह दी जा सकती है

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लेख के अगले भाग में अब हम प्रेगनेंसी में खुजली से बचाव संबंधी जानकारी देने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में खुजली से बचाव – Prevention Tips for Itching During Pregnancy in Hindi

निम्न बिंदुओं के माध्यम से हम गर्भावस्था में होने वाली खुजली से बचाव के कुछ आप उपायों को समझ सकते हैं (17)।

  • खुजली होने की स्थिति में प्रभावित जगह को रगड़ें या खुजलाएं नहीं।
  • ढीले और ठंडक पहुंचाने वाले कपड़ों का इस्तेमाल करें।
  • नहाने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
  • नहाने के बाद त्वचा को आराम पहुंचाने वाले लोशन या क्रीम का उपयोग करें
  • ठंडक के दिनों में हमेशा मॉइश्चराइजर का उपयोग करें।
  • अत्यधिक गर्म या नमी के संपर्क में आने से बचें।
  • खुजली होने की स्थिति में खुद को अन्य काम में व्यस्त रखें ताकि आपका ध्यान खुजली से हटे। इससे थकान का अनुभव होगा और रात में नींद भी अच्छी आएगी।

गर्भावस्था में खुजली की समस्या होना आम है, यह तो आपको समझ आ ही गया होगा, लेकिन अधिक खुजली होने की स्थिति में इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। सामान्य खुलजी की स्थिति में बताए गए गर्भावस्था की खुजली के लिए घरेलू उपचार अपनाए जा सकते हैं। वहीं, स्थिति गंभीर हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही लेख में शामिल गर्भावस्था में खुजली से बचाव संबंधी उपाय भी इस समस्या में काफी मददगार साबित हो सकते हैं। ऐसे ही अन्य विषयों से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए पढ़ते रहें स्टाइलक्रेज।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्भावस्था के दौरान मेरे निपल्स में खुजली क्यों होती है?

स्तनपान के लिए गर्भावस्था में स्तनों की ग्रंथियां विकसित होती हैं। इस वजह से स्तनों का आकार बढ़ने लगता है (2)। ऐसे में त्वचा में खिंचाव होने के कारण स्तनों के साथ-साथ निपल में भी खुजली हो सकती है। इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए संबंधित डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।

गर्भावस्था में खुजली से राहत पाने के लिए सबसे अच्छी क्रीम कौन सी है?

गर्भावस्था में चकत्तों और उनके कारण होने वाली खुजली से राहत पाने के लिए कोर्टिकोस्टेरॉयड (सूजन कम करने के लिए) क्रीम को सबसे अच्छा माना जाता है (2)। फिर भी त्वचा पर किसी भी क्रीम को इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान मेरी त्वचा इतनी ड्राई क्यों हो जाती है?

बिगड़े हुए हेपैटिक बाइल फ्लो (यकृत पित्त प्रवाह) एक सामान्य कारण है, जो गर्भावस्था में खुजली और स्किन के ड्राई होने का कारण माना जाता है (18)।

क्या खुजली गर्भावस्था का संकेत है?

नहीं, खुजली गर्भावस्था का संकेत नहीं है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान खुजली हो सकती है।

References

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  3. Itching
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  4. Anti-inflammatory activities of colloidal oatmeal (Avena sativa) contribute to the effectiveness of oats in treatment of itch associated with dry, irritated skin
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/25607907/
  5. In vitro anti-inflammatory and skin protective properties of Virgin coconut oil
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  6. Itch in psoriasis: epidemiology, clinical aspects and treatment options
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  8. Efficacy of a Topical Formulation of Sodium Bicarbonate in Mild to Moderate Stable Plaque Psoriasis: a Randomized, Blinded, Intrapatient, Controlled Study
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  9. Commercial Essential Oils as Potential Antimicrobials to Treat Skin Diseases
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  10. Cooling the Itch via TRPM8
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6301073/
  11. Citrus limon (Lemon) Phenomenon—A Review of the Chemistry, Pharmacological Properties, Applications in the Modern Pharmaceutical, Food, and Cosmetics Industries, and Biotechnological Studies
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  12. Interventions for pruritus of unknown cause
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6513244/
  13. Literature Review on The Biological Effects of Taraxacum officinale Plant In Therapy
    https://www.researchgate.net/publication/333811877_Literature_Review_on_The_Biological_Effects_of_Taraxacum_officinale_Plant_In_Therapy
  14. In-House Preparation and Standardization of Herbal Face Pack
    https://pdfs.semanticscholar.org/1ca2/5c17343fd28d0dfa868e2abd0919f8e986dd.pdf%20
  15. The medical Importance of Cicer arietinum – A review
    http://www.iosrphr.org/papers/v6i3/D0632940.pdf
  16. Shingles – aftercare
    https://medlineplus.gov/ency/patientinstructions/000560.htm
  17. Itching
    https://medlineplus.gov/ency/article/003217.htm
  18. Pruritus in pregnancy
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3860924/

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Saral Jain

Saral Jainहेल्थ एंड वेलनेस राइटर

सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया का लगभग 9 वर्ष का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इनकी रुचि घरेलू...read full bio

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