गर्भावस्था (प्रेगनेंसी) के दौरान पेट दर्द (एब्डोमिनल पेन) – Stomach Pain (Abdominal Pain) In Pregnancy In Hindi

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गर्भावस्था में महिलाओं को शारीरिक बदलावों के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इनमें से कुछ स्वास्थ्य समस्याएं ऐसी होती हैं, जो गर्भावस्था के कई महीनों तक चलती है। ऐसी ही एक समस्या पेट का दर्द है। यह समस्या सामान्य से लेकर गंभीर दोनों हो सकती है। अक्सर महिलाएं पेट दर्द को आम मानकर नजरअंदाज कर देती है और डॉक्टर से संपर्क तक नहीं करती हैं। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे। यहां हम बता रहे हैं कि गर्भावस्था में पेट दर्द क्यों होता है। इसके अलावा, प्रेगनेंसी में पेट दर्द के गंभीर और सामान्य दोनों कारण के बारे में बता रहे हैं।

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चलिए, सबसे पहले जानते हैं कि प्रेगनेंसी में पेट दर्द किस लिए होता है।

गर्भावस्था में पेट दर्द क्यों होता है?

कुछ महिलाओं को अक्सर गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द होता है। इसके पीछे कई बार प्रसूति संबंधी विकार या पेट संबंधी समस्या हो सकती है (1)। इस दौरान महिलाओं को कब्ज जैसी आम शिकायत भी रहती है, जिस कारण पेट दर्द का सामना करना पड़ता है (2)। इनके साथ ही गर्भावस्था में पेट दर्द के कारण कई हैं, जिनके बारे में हम आगे बताएंगे। उससे पहले प्रेगनेंसी में पेट दर्द के प्रकार के बारे में जान लेते हैं।

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प्रेगनेंसी में पेट दर्द से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारी आगे पढे़ं।

गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द के प्रकार

गर्भावस्था में दर्द के प्रकार को पेट के हिस्से और कारण के आधार पर बांटा जा सकता है। हम पेट दर्द के कारण के बारे में अलग से लेख के अगले भाग में बात करेंगे, लेकिन उससे पहले यहां पेट के हिस्से के हिसाब से पेट दर्द के प्रकार के बारे में बता रहे हैं (3) (4)

  • पेट के ऊपरी हिस्सा (Epigastric) का दर्द
  • पेट के ऊपरी हिस्से के बाईं (Right Upper Quadrant) ओर दर्द
  • पेट के ऊपरी हिस्से के दाईं ओर दर्द
  • प्रेगनेंसी में पेट के नीचे दर्द (Lower Abdominal Pain)
  • पेट के निचले हिस्से के बाईं (Left Lower Quadrant) ओर दर्द
  • पेट के निचले हिस्से के दाईं (Right Lower Quadrant) ओर दर्द

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अब प्रेगनेंसी में पेट दर्द के कारण और जोखिम कारक जान लेते हैं।

गर्भावस्था में पेट दर्द के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk Factors of Stomach Pain During Pregnancy in Hindi

प्रेगनेंसी में पेट दर्द होने के कारण और जोखिम कारक के बारे में हम नीचे विस्तार से बता रहे हैं। इन कारक के आधार पर महिलाएं समझ सकती हैं कि उनका पेट दर्द गंभीर समस्या का संकेत है या नहीं।

  1. कब्ज : प्रेगनेंसी में पेट दर्द का एक कारण कब्ज की समस्या भी हो सकती है। गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन (Progesterone) हार्मोन बढ़ने लगता है, जिससे गैस की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा, गर्भवती के आहर में फाइबर कमी गैस की समस्या को उत्पन्न करने लगती है, जिस कारण पेट का दर्द होने लगता है। फाइबर से समृद्ध भोजन करने पर कब्ज के कारण होने वाले इस पेट दर्द से राहत मिल सकती है (2)
  2. बढ़ता गर्भाशय : गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द गर्भाशय बढ़ने के कारण भी हो सकता है। जैसे-जैसे गर्भाशय बढ़ने लगता है, वैसे-वैसे पेट दर्द की समस्या बढ़ सकती है। पेट दर्द के साथ ही कमर दर्द और जांघों में भी इस कारण गर्भावस्था में दर्द हो सकता है (5)
  3. एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic pregnancy): एक्टोपिक प्रेगनेंसी को अस्थानिक गर्भावस्था भी कहा जाता है। यह प्रेगनेंसी गलत स्थान पर हो जाती है। मतलब इस दौरान भ्रूण गर्भाशय से नहीं, बल्कि फैलोपियन ट्यूब से जुड़ जाता है। इसी वजह से भी पेट में दर्द बना रहता है (6)
  4. अपेंडिसाइटिस : गर्भावस्था में अपेंडिसाइटिस होने पर भी पेट में दर्द रहता है। यह एक गंभीर स्थिति है। इस दौरान पेट दर्द के साथ ही अन्य समस्याएं जैसे मितली व उल्टी आना भी हो सकता है। इसी वजह से इस स्थिति का निदान करना कई बार मुश्किल हो जाता है (7)
  5. यूटीआई : प्रेगनेंसी में मूत्रमार्ग संक्रमण यानी यूटीआई के कारण भी पेट दर्द हो सकता है। इस दौरान पेशाब करते समय जलन और असहजता का एहसास हो सकता है (8) (9)
  6. ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (Braxton Hicks Contractions) : यह गर्भाशय की मांसपेशियों का शिथिल होना और उनमें हल्का दवाब होना होता है। इसे फोल्स लेबर पेन भी कहा जाता है। कहा जाता है कि ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन 30 सेकंड से दो मिनट तक होता है। यह शरीर को लेबर के लिए तैयार करने की प्रक्रिया है (9)
  7. सहवास के दौरान दर्द : प्रेगनेंसी में सहवास के समय पेट में दर्द का एहसास हो सकता है। इसे प्रेगनेंसी में शारीरिक संबंध बनाते समय होने वाला आम दर्द बताया गया है। इसके अलावा, हल्का रक्तस्राव और योनि में भी दर्द हो सकता है (10)
  8. पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज : गर्भावस्था के दौरान पेल्विक एरिया (पेट और जांघों के बीच का हिस्सा) में होने वाले इंफ्लेमेशन की वजह से भी पेट में दर्द हो सकता है (11)
  9. प्रीक्लेम्पसिया : गर्भावस्था में बढ़ने वाले रक्तचाप को प्रीक्लेम्पसिया कहा जाता है। उच्च रक्तचाप के साथ ही इस स्थिति में पेशाब में प्रोटीन की मात्रा अधिक होने लगती है। इन्हीं कारणों से पेट में दर्द होता है (9)
  10. पित्ताशय में पथरी : प्रेगनेंसी के दौरान पित्ताशय में पथरी हो सकती है। इस कारण से भी पेट दर्द की समस्या बनी रह सकती है (12)
  11. प्लेसेंटा अब्रप्शन: प्लेसेंटा जीवनदायनी थैली है, जो शिशु की रक्षा करती है। जब यह थैली गर्भाशय से हटने लगती है, तब पेट दर्द होता है। इस दौरान गर्भाशय काफी सख्त हो जाता है (9)
  12. समय से पहले प्रसव : अगर गर्भावस्था में 37वें हफ्ते से पहले संकुचन (Contractions) हो, तो यह समय पूर्व प्रसव के लक्षण में से एक है। इस दौरान पेट में दर्द होता है। ऐसे में डॉक्टर को जल्द-से-जल्द संपर्क किया जाना चाहिए (13)
  13. गर्भपात : प्रेगनेंसी के 20वें हफ्ते में भ्रूण की मृत्यु हो जाए, तो उसे गर्भपात कहा जाता है। इस दौरान रक्तस्राव के साथ ही पेट दर्द भी हो सकता है (14)

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लेख के अगले हिस्से में हम बता रहे हैं कि गर्भावस्था में पेट दर्द होने पर डॉक्टर से कब संपर्क किया जा सकता है।

प्रेगनेंसी में पेट दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

अगर गर्भवती महिला को पेट में दर्द व ऐंठन के साथ कुछ अन्य लक्षण नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए। यह लक्षण इस प्रकार हैं (8) (15) :

  • तीव्र पेट दर्द
  • संभव संकुचन (कॉन्ट्रेक्शन)
  • दर्द के साथ रक्तस्राव या बुखार
  • दर्द के साथ सिर्फ बुखार
  • ठंड लगना
  • योनि से स्राव
  • बेहोशी
  • पेशाब करते समय असुविधा

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अब प्रेगनेंसी में पेट दर्द का इलाज जान लेते हैं।

गर्भावस्था में पेट में दर्द का इलाज- Treatment for Stomach Pain During Pregnancy in Hindi

  1. प्रेगनेंसी में पेट में दर्द होने पर इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है। कुछ दर्द समय के साथ खुद-ब-खुद ठीक हो जाते हैं और कुछ तरह के पेट दर्द का इलाज हम नीचे कारण के आधार पर बता रहे हैं:
  2. कब्ज : डॉक्टर लैक्सेटिव के सेवन की सलाह डॉक्टर दे सकते हैं। इसके अलावा, फाइबर को आहार में शामिल करने और सप्लीमेंट्स लेने को कह सकते हैं (16)
  3. अपेंडिक्स : गर्भावस्था में एपेंडिसाइटिस के कन्फर्म मामलों के लिए लेप्रोस्कोपी की सलाह दी जा सकती है (17)
  4. स्टोन : अगर पित्त की पत्थरी का आकार बड़ा नहीं है, तो दवाइयां का इस्तेमाल करके पेशाब के रास्ते उसे निकाला जा सकता है। वहीं, पित्त की नली में पत्थरी होने या जटिलता की वजह से पत्थरी निकालने के सुरक्षित तरीके पर विचार कर सकते हैं, ताकि भ्रूण पर असर न पड़े। डॉक्टर इंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड चोलैंगियोपैंक्रिटोग्राफी (Endoscopic Retrograde Cholangiopancreatography) की सलाह दे सकते हैं (17)
  5. एक्टोपिक प्रेगनेंसी : अगर इस समस्या से गुजर रही महिलाओं की स्थिति गंभीर नहीं है, तो मेथोट्रेक्सेट इंजेक्शन से इसका उपचार किया जा सकता है। जटलिता होने पर डॉक्टर सर्जरी, ब्लड रिप्लेसमेंट, हेमोपरिटोनियम (एक तरह की कैवेटी) की निकासी या सर्जरी (Salpingectomy) की सलाह दे सकते हैं (17)
  6. ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन : इस स्थिति का कोई मेडिकल इलाज नहीं है। सिर्फ डॉक्टर इसे ट्रिगर करने वाली स्थिति को बदलने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा, गतिविधि में बदलाव जैसे कि अगर कोई महिला ज्यादा काम करती है, तो उसे कुछ देर लेटना चाहिए। वहीं, अगर कोई महिला अधिक समय तक बैठी रहती है, तो उसे थोड़ा टहलना चाहिए। इसके अलावा, हल्के गुनगुने पानी से नहाने, मालिश करवाने व लगातार पानी पीने से भी आराम मिल सकता है (9)
  7. यूटीआई : डॉक्टर एंटीबायोटिक्स या एंटीबायोटिक थेरेपी लेने की सलाह दे सकते हैं। इस दवा का कोर्स यूरिन सैंपल की रिपोर्ट पर निर्भर करता है (18)
  8. प्रीक्लेम्पसिया : इस दौरान डॉक्टर रक्तचाप को कम करने के लिए ओरल एंटीहाइपरटेंसिव दवा लेने को कह सकते हैं (19)

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हम नीचे गर्भावस्था में होने वाले समान्य दर्द के कुछ घरेलू इलाज व उपाय बता रहे हैं।

प्रेगनेंसी में पेट दर्द से बचाव – Prevention Tips for Stomach Pain During Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में पेट दर्द से बचाव के कुछ टिप्स हम बता रहे हैं। इनकी मदद से घर में ही सामान्य पेट दर्द से राहत पाई जा सकती है।

  • गर्म पानी की बोतल से सेक ले सकते हैं। इसकी सेक 10 मिनट से ज्यादा न लें और सीधे पेट में लेने की जगह कमर पर लें।
  • सामान्य पेट दर्द हो रहा है, तो फाइबर युक्त आहार का सेवन करके इसे कम किया जा सकता है। इससे कब्ज के कारण हो रहे पेट दर्द से भी राहत मिल सकती है (2)
  • अधिक से अधिक आराम करें। आराम करने से पेट दर्द की समस्या कुछ कम हो सकती है।
  • आठ से दस गिलास पानी पिएं। इससे कब्ज की समस्या कम हो सकती है, क्योंकि पेट दर्द का एक कारण कब्ज भी है (5)
  • गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। वसायुक्त, तला, भुना, खट्टा, मिर्च और मसालेदार खाने से परहेज करें। इसके अलावा दाल, कच्चा चकुंदर, गोभी, प्याज व लहसुन न खाएं (20)
  • आडू और संतरे जैसे फलों का सेवन न करें (20)

अब आप जान गए हैं कि प्रेगनेंसी में हल्का पेट दर्द सामान्य और तेज दर्द क्यों होता है। अब इन सभी कारण को ध्यान में रखें और पेट दर्द होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। गर्भावस्था जैसे नाजुक दौर में डॉक्टर से चेकअप करवाना और जागरूक रहना दोनों ही जरूरी है। सतर्कता बच्चे और मां दोनों को गंभीर परेशानी से बचा सकती है। साथ ही समय रहते बिना किसी भयानक परिणाम के उनसे निपटने व उन्हें दूर करने में सहायक हो सकती है। चलिए, अब आगे रिडर्स द्वारा पूछे जाने वाले कुछ सवालों के जवाब जान लेते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द में क्या मदद कर सकता है?

पेट दर्द से बचाव के तरीके इसमें मदद कर सकते हैं। सभी बचाव के तरीके हम ऊपर बता चुके हैं।

क्या शुरुआती गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द होना सामान्य है?

हां, गर्भाशय का विस्तार, कब्ज और गैस की वजह से शुरुआती गर्भावस्था पेट में हल्का दर्द, खिंचाव व ऐंठन का होना सामान्य है।

प्रेगनेंसी में पेट में दर्द होने पर कब चिंता करनी चाहिए?

पेट दर्द के साथ बुखार व ब्लीडिंग होने पर चिंता करनी चाहिए (15)। इसके अलावा, पेट दर्द होने पर कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यह हम ऊपर भी बता चुके हैं।

प्रारंभिक गर्भावस्था में आपको पेट में कैसा महसूस हो सकता है?

इस दौरान पेट में हल्का-सा खिंचाव महसूस हो सकता है।

प्रारंभिक प्रेंगनेंसी में पेट में दर्द कब तक रहता है?

हर किसी की गर्भावस्था अलग होती है। इसी वजह से दर्द का समय भी इसी पर निर्भर करता है।

क्या गर्भावस्था के दौरान किसी अन्य कारण से पेट दर्द हो सकता है?

ऊपर बताए गए पेट दर्द के कारण के अलावा, गुर्दे की पथरी भी एक कारक है (21)। साथ ही पेट में वायरस होने के कारण, गर्भाशय फाइब्रॉइड या फिर फूड पॉइजनिंग के चलते भी गर्भावस्था में पेट में दर्द हो सकता है (8)। इसके अलावा, पेप्टिक अल्सर और एचईएलएलपी (HELLP) सिंड्रोम यानी हेमोलिसिस (लाल रक्त कोशिकाओं का टूटना) , लिवर एंजाइम का बढ़ना व कम प्लेटलेट्स भी प्रेगनेंसी में पेट दर्द का कारण बन सकते हैं (17)

21 संदर्भ (Sources) :

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vinita pangeni

विनिता पंगेनी ने एनएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में बीए ऑनर्स और एमए किया है। टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में काम करते हुए इन्हें करीब चार साल हो गए हैं। इन्हें उत्तराखंड के कई पॉलिटिकल लीडर और लोकल कलाकारों के इंटरव्यू लेना और लेखन का अनुभव है। विशेष कर इन्हें आम लोगों से जुड़ी रिपोर्ट्स करना और उस पर लेख लिखना पसंद है। इसके अलावा, इन्हें बाइक चलाना, नई जगह घूमना और नए लोगों से मिलकर उनके जीवन के अनुभव जानना अच्छा लगता है।

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