गर्भावस्था में कब्ज के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Constipation During Pregnancy in Hindi

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गर्भावस्था हर महिला के लिए एक अनोखा अनुभव है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जो गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाली आम समस्याओं में से एक है कब्ज। कब्ज होने की वजह से पेट साफ नहीं हो पाता और मल त्याग करने में परेशानी होती है। बेशक, गर्भावस्था में कब्ज होना सामान्य है, लेकिन इसका उपचार करना जरूरी हैं। अगर गर्भावस्था के दौरान कब्ज को ठीक न किया जाए, तो इससे कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है (1)। स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि गर्भावस्था में कब्ज की समस्या से कैसे निपटा जा सकता है।

सबसे पहले हम बता रहे हैं कि गर्भावस्था में कब्ज के कारण क्या-क्या हो सकते हैं। इसके बाद हम गर्भावस्था में कब्ज के लक्षण जानेंगे।

गर्भावस्था में कब्ज के कारण – Causes of Constipation During Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में कब्ज के कारण कई हो सकते हैं, जिनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. हार्मोन : गर्भावस्था के दौरान हार्मोन में बदलाव होना कब्ज के सबसे अहम व आम कारणों में से एक है। इस अवस्था में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप कब्ज की समस्या हो पैदा सकती है (1) (2)।
  2. फाइबर : आहार में फाइबर की कमी भी कब्ज की समस्या पैदा कर सकती है। इस समस्या को फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करके दूर किया जा सकता है। फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है (1)।
  3. पानी की कमी : गर्भावस्था में पानी का कम सेवन करना भी कब्ज के मुख्य कारणों में से एक है। अगर शरीर की आवश्यकता के अनुसार प्रतिदिन पानी नहीं पिया जा रहा है, तो कब्ज की समस्या हो सकती है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध की मानें, तो यह समस्या पानी की कमी की वजह से खासकर तीसरी तिमाही में होती है (1)। इसी वजह से पानी पीने के फायदे में कब्ज के ठीक होने को भी गिना जाता है।
  4. दवाइयां : प्रेगनेंसी में कब्ज का एक कारण इस दौरान ली जाने वाली दवाएं भी हैं। इस दौरान ली जाने वाली आयरन, मैग्नीशियम व सल्फेट जैसी दवाइयों के कारण भी कब्ज की समस्या हो सकती है (1)।
  5. मलाशय पर दवाब बनना : गर्भावस्था में कब्ज की समस्या के गंभीर होना का कारण मलाशय पर पड़ने वाले दवाब को भी माना जाता है। जैसे-जैसे गर्भवती प्रसव के नजदीक पहुंचती है, वैसे-वैसे गर्भाशय पर दवाब पड़ने लगता है, जिस कारण कब्ज की समस्या अधिक हो सकती है (2)।
  6. इर्रिटेबल बॉउल सिंड्रोम : गर्भावस्था के समय आंत संबंधी समस्या भी कब्ज का कारण हो सकती है, जिसमें इर्रिटेबल बॉवल सिंड्रोम शामिल है (3)। यह एक तरह का विकार होता है, जिसमें बड़ी आंत प्रभावित होती है और कब्ज का सामना करना पड़ता है (4)।
  7. शारिरिक गतिविधि में कमी : प्रेगनेंसी के समय शारीरिक गतिविधि की कमी से भी कब्ज की समस्या हो सकती है। यही वजह है स्वस्थ गर्भावस्था और कब्ज से दूर रहने के लिए रोजाना सैर करना भी जरूरी है। हां, अगर डॉक्टर ने किसी गर्भवती महिला को पूरी तरह से बेड रेस्ट करने की सलाह दी है, तो उस बात पर जरूर अमल करें (5)।
  8. आंतों के मार्ग में रुकावट : गर्भावस्था के दौरान आंतों में रुकावट आ सकती है, जिससे कब्ज की समस्या हो सकती है। इस बारे में दूसरी या तीसरी तिमाही में पता चल पाता है। इस दौरान उल्टियां होने के साथ-साथ पेट में दर्द और कब्ज की शिकायत भी हो सकती है (6)।

आइए, लेख के अगले हिस्से में जानते हैं कि गर्भावस्था में कब्ज के लक्षण क्या-क्या होते हैं।

गर्भावस्था में कब्ज के लक्षण – Symptoms of Constipation During Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में कब्ज के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं (7):

  • मल का बहुत कम आना।
  • कठोर व सख्त मल का होना।
  • मल को निकालते समय अधिक जोर लगाने की आवश्यकता पड़ना।
  • शौच करते समय पेट खाली (पूरे मल का बाहर न निकलना) होने का एहसास न होना।
  • सप्ताह में तीन से कम बार शौच का आना।
  • मल निकासी के समय मलद्वार में दर्द होना।
  • पेट दर्द होना।

गर्भावस्था में कब्ज के लक्षण के बाद यह जानते हैं कि प्रेगनेंसी में यह समस्या कब होती है।

गर्भावस्था में कब्ज की समस्या कब होती है?

प्रेगनेंसी की पहली और दूसरी तिमाही में कब्ज की समस्या होने की आशंका अधिक होती है। पहली तिमाही में इसका प्रतिशत 35, तो दूसरी में 39 प्रतिशत होता है। वहीं, अगर तीसरी तिमाही की बात करें, तो करीब 21 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं इस समस्या से जूझती हैं (8)।

लेख में हम आगे बता रहे हैं कि गर्भावस्था में कब्ज के लिए घरेलू उपाय क्या-क्या हो सकते हैं।

गर्भावस्था में कब्ज के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Constipation During Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में कब्ज का इलाज डॉक्टर अच्छी तरह बता सकते हैं, लेकिन खान-पान में सुधार करके भी कब्ज की समस्या को कुछ कम किया जा सकता है। आइए, जानते हैं कुछ ऐसे ही घरेलू उपाय।

1. संतरा

सामग्री:
  • 1 से 2 संतरे
उपयोग का तरीका:
  • दिनभर में एक से दो संतरे का सेवन करें।
यह कैसे मदद करता है:

गर्भावस्था में संतरे का सेवन सुरक्षित माना गया है (9)। संतरा में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है, जिसे कब्ज के लिए फायदेमंद माना जाता है। यही वजह है कि गर्भावस्था में कब्ज के घरेलू इलाज में संतरे का इस्तेमाल किया जा सकता है (10)। ध्यान रहे कि संतरा मीठा होना चाहिए। अगर संतरा खट्टा होगा, तो गला खराब हो सकता है।

2. सूखा आलूबुखारा

सामग्री:
  • 1 कप प्रून या इसका जूस
उपयोग का तरीका:
  • एक कप प्रून यानी सूखे आलूबुखारे का सेवन करें।
  • वैकल्पिक रूप से आलूबुखारे के जूस का भी सेवन कर सकते हैं।
यह कैसे मदद करता है:

प्रून यानी सूखे आलूबुखारे के फायदे में कब्ज की समस्या से राहत भी शामिल है। इसमें उच्च स्तर के फाइबर, फ्रुक्टोज (फ्रुक्टन) और सोर्बिटोल जैसे तत्व होते हैं। इसके अलावा, फैनोलिक यौगिकों की बड़ी मात्रा मुख्य रूप से नियोक्लोरोजेनिक और क्लोरोजेनिक एसिड बतौर लैक्सेटिव प्रभाव की तरह काम करते हैं। एनसीबीआई के वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, प्रूनस का सेवन करने से पेट आसानी से साफ हो सकता है (11)। एक शोध के अनुसार, प्रेगनेंसी में सूखे आलूबुखारे का सेवन सुरक्षित हो सकता है (12)।

3. अलसी

सामग्री:
  • अलसी का 1 बड़ा चम्मच
उपयोग का तरीका:
  • अलसी को भूनकर और पीसकर पाउडर बनाया जा सकता है, जिसे किसी भी सब्जी या सलाद में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • अलसी को भूनकर इसे रोटी या पराठे के आटे में मिला सकते हैं।
यह कैसे मदद करता है:

अलसी में मूसिलेज (Mucilage) यानी एक तरह का चिपचिपा पदार्थ होता है, जो लैक्सेटिव गुण को प्रदर्शित करता है। इसी वजह से अलसी का सेवन कब्ज की समस्या को ठीक करने में मदद कर सकता है (13)। इसमें सॉल्युबल व इनसॉल्युबल फाइबर भी पाया जाता है, जो आंतों को साफ कर कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकता है (14)। एनसीबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध एक शोध के अनुसार, अलसी में ओमेगा-फैटी एसिड मौजूद होता है। इस कारण गर्भावस्था में इसका सेवन करना सुरक्षित हो सकता है (15)। फिर भी इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें।

4. इसबगोल (Ispaghula Husks)

सामग्री:
  • इसबगोल का एक पैकेट
  • 1 गिलास पानी
उपयोग का तरीका:
  • एक गिलास ठंडे पानी में इसबगोल को मिक्स कर लें।
  • फिर इसका सेवन करें।
यह कैसे मदद करता है:

इसबगोल में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। शायद यही वजह है कि लंबे समय से इसका इस्तेमाल कब्ज की समस्या को ठीक करने के लिए किया जा रहा है। फाइबर के साथ ही इसमें म्यूसिलगिनस (Mucilaginous) पाया जाता है, जो एक तरह का गोंद होता है। इन गुणों के कारण इसबगोल कब्ज की समस्या को कम कर सकता है (16)। गर्भावस्था में इसबगोल का सेवन सुरक्षित माना गया है (8)।

5. पेपरमिंट या नींबू एसेंशियल ऑयल

सामग्री:
  • नींबू/पेपरमिंट एसेंशियल ऑयल की 1 से 2 बूंदें
  • आधा चम्मच जैतून या बादाम का तेल
उपयोग का तरीका:
  • किसी भी एसेंशियल ऑयल को बादाम या जैतेन तेल के साथ मिलाएं।
  • अब इस मिश्रण से पेट की हल्के हाथों से मालिश करें।
  • करीब 10 से 20 मिनट तक ऐसा कर सकते हैं।
यह कैसे मदद करता है:

अरोमाथेरेपी मसाज की मदद से भी घर में कब्ज का इलाज किया जा सकता है। पेपरमिंट या नींबू जैसे एसेंशियल ऑयल का उपयोग करके पेट की मालिश करने से इस समस्या को कम किया सकता है (17)। माना जाता है कि मसाज करने से मल त्याग में मदद मिलती है और इसकी आवृत्ति भी बढ़ती है (18)। ध्यान रहे कि गर्भावस्था नाजुक दौर होता है। इसलिए, पेट की मसाज किसी विशेषज्ञ से ही करवाएं।

6. कीवी

सामग्री:
  • एक कीवी
उपयोग का तरीका:
  • रोजाना एक कीवी का सेवन करें।
  • वैकल्पिक रूप से इसके जूस को भी पी सकते हैं।
यह कैसे मदद करता है:

एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित विभिन्न शोध के अनुसार, कब्ज से बचने के लिए कीवी का सेवन किया जा सकता है। साथ ही गर्भावस्था में भी इसे सुरक्षित माना गया है। कीवी के सेवन से मल मुलायम होता है और मलद्वार के जरिए आसानी से बाहर निकल जाता है। प्रति 100 ग्राम कीवीफ्रूट में 2 से 3 ग्राम डाइटरी फाइबर होता है, जो कब्ज को ठीक करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसमें मौजूद फोलेट की वजह से कीवी को गर्भावस्था में सुरक्षित माना गया है (11) (19)।

7. योगर्ट व दही

सामग्री:
  • 1 कप सादा दही
उपयोग का तरीका:
  • दही का सेवन या तो इसी तरह किया जा सकता है या फिर छाछ बनाकर।
यह कैसे मदद करता है:

अगर गर्भावस्था में कब्ज के लिए घरेलू उपाय के बारे में सोच रहे हैं, तो योगर्ट यानी दही के उपयोग पर भी ध्यान दिया जा सकता है। एनसीबीआई की ओर से जारी शोध के मुताबिक, प्रेगनेंसी में कब्ज के लक्षणों को सुधारने में 300 ग्राम/दिन प्रोबायोटिक और नॉर्मल दही अहम भूमिका निभा सकते हैं। दरअसल, दही में प्रोबायोटिक्स बैक्टीरिया होते हैं। प्रोबायोटिक्स जैसे लैक्टोबैसिलस व बिफिदोबैक्टीरियम मल को मुलायाम करके मल निकासी में मदद कर सकते हैं (20)।

8. सेब

सामग्री:
  • 1 सेब
उपयोग का तरीका:
  • सेब का सीधे सेवन कर लें।
यह कैसे मदद करता है:

फलों में पानी, सोर्बिटोल, फ्रुक्टोज, फाइबर और फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जिस वजह से इन्हें कब्ज के इलाज के लिए उपयोगी माना जाता है। यही वजह है कि सेब को भी कब्ज के इलाज के लिए उपयोगी माना गया है। छिलके के साथ सेब में अधिक फाइबर पाया जाता है, जो कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकता है (11)। इसे गर्भावस्था में भी बिना किसी डर के उपयोग में लाया जा सकता है (21)।

9. चिया के बीज

सामग्री:
  • 1/2 बड़ा चम्मच चिया सीड्स
  • 1 कप पानी
उपयोग का तरीका:
  • चिया के बीज को 30 मिनट के लिए पानी में भिगो दें।
  • अब भीगे हुए चिया के बीज को दूध में मिलाकर या किसी जूस में मिलाकर पी जाएं।
यह कैसे मदद करता है:

कब्ज की समस्या के लिए चिया बीज का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें फाइबर की मात्रा भरपूर होती है, खासतौर पर अघुलनशील फाइबर की। माना जाता है कि चिया बीज को पानी में मिलाने से जो जेल बनता है, वो कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकता है (22)। इसे गर्भावस्था के लिए भी पौष्टिक माना गया है, इसलिए चिया सीड्स को प्रेगनेंसी में खाया जा सकता है (23)।

10. सेंधा नमक

सामग्री:
  • 1 कप सेंधा नमक
  • पानी
उपयोग का तरीका:
  • नहाते समय बाल्टी या टब में सेंधा नमक डालें।
  • करीब 15 से 20 मिनट तक उसमें आराम से लेट जाएं या नहा लें।
  • वैकल्पिक रूप से सेंधा नमक का पानी का भी सेवन किया जा सकता है।
यह कैसे मदद करता है:

कब्ज जैसी पेट संबंधी समस्याओं से राहत पाने के लिए सेंधा नमक को भी उपयोग में लाया जा सकता है। कई बार कब्ज की समस्या मैग्नीशियम की कमी के कारण भी होती है। एनसीबीआई में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मैग्नीशियम की आपूर्ति के लिए इसके सेवन से बेहतर है इससे स्नान किया जाए। सेंधा नमक के पानी से स्नान करने से शरीर में मैग्नीशियम की मात्रा में हल्का सुधार हो सकता है। साथ ही सेंधा नमक के पानी में नहाने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रेक्ट (पाचन संबंधी अंग) से जुड़ी समस्याएं जैसे कब्ज आदि से राहत मिल सकती है (24)। हालांकि, सेंधा नमक में लैक्सेटिव गुण होता है, लेकिन इसे गर्भावस्था में सेवन करना चाहिए या नहीं, इसे लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है। इसलिए, सबसे बेहतर यही है कि सेंधा नमक का सेवन करने की जगह इससे नहाया जाए (25)।

11. ग्रीन टी

सामग्री:
  • आधा या एक चम्मच ग्रीन टी
  • 1 कप गर्म पानी
  • शहद (वैकल्पिक)
उपयोग का तरीका:
  • एक कप गर्म पानी में ग्रीन टी या ग्रीन टी बैग डालें।
  • करीब 5 मिनट के बाद ग्रीन टी बैग को निकाल लें।
  • अगर पत्ती का इस्तेमाल किया है, तो पानी को छान लें।
  • स्वाद के लिए इसमें शहद मिला सकते हैं।
यह कैसे मदद करता है:

गर्भावस्था में कब्ज का इलाज घरेलू नुस्खों से करने के लिए ग्रीन टी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ग्रीन टी पॉलीफेनोलिक यौगिकों से समृद्ध होता है। खासकर, कैटेचिन इसमें मौजूद प्रमुख घटक होता है। अध्ययनों से पता चला है कि कैटेचिन में विविध औषधीय गुण होते हैं, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या को ठीक करने में मदद कर सकते हैं। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या में कब्ज भी शामिल है, इसलिए माना जा सकता है कि ग्रीन टी का सेवन कब्ज संबंधी परेशानी को दूर करने में मदद कर सकता है (26)। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि ग्रीन टी के सेवन से गर्भवती के मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है। इसलिए, डॉक्टर के परामर्श पर संतुलित मात्रा में ही इसका सेवन करें (27)।

12. अंगूर

सामग्री:
  • 1 कप अंगूर
उपयोग का तरीका:
  • अंगूर का सीधे सेवन कर लें।
  • वैकल्पिक रूप से इसका जूस भी पी सकते हैं।
यह कैसे मदद करता है:

गर्भावस्था में कब्ज का इलाज घर में ही करने के बारे में सोच रहे हैं, तो अंगूर का सेवन कर सकते हैं। इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है (11)। अंगूर में फ्लेवोनोइड्स होते हैं, जो गर्भावस्था के लिए अच्छे माने जाते हैं, इसलिए इसका सेवन गर्भावस्था में किया जा सकता है (28)।

13. केला

सामग्री:
  • एक केला
उपयोग का तरीका:
  • केला का ऐसे ही सेवन करें।
  • इसे दूध में मिक्स करके यानी शेक बनाकर भी लिया जा सकता है।
यह कैसे मदद करता है:

केले को भी कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए इस्तेमाल में लायाा जाता है। इसमें रेसिसटेंट स्टार्च पाया जाता है। यह स्टार्च पेट संबंधी परेशानी को ठीक करने में मदद कर सकता है। यह पेट में मौजूद खाने के पाचन को सुनिश्चित करके कब्ज की समस्या को दूर करने में लाभदायक हो सकता है (29)। एक शोध में बताया गया है कि केला मल निकासी में मदद कर सकता है (11)। गर्भावस्था में केल का सेवन भी सीमित मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है (9)।

14. क्रेनबेरी

सामग्री:
  • एक कप क्रेनबेरी
उपयोग का तरीका:
  • क्रेनबेरी को धोकर ऐसे ही खा लें।
  • वैकल्पिक रूप से इसके जूस का भी सेवन कर सकते हैं।
यह कैसे मदद करता है:

क्रेनबेरी को भी कब्ज के लिए फायदेमंद माना गया है। इसमें फाइबर की मात्रा पाई जाती है। जैसा कि हम ऊपर बता ही चुके हैं कि फाइबर कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। साथ ही यह पाचन क्रिया को भी बेहतर रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर और पाचन में सुधार के गुण की मदद से कब्ज की समस्या से बचाव हो सकता है (30) (31)। एक अन्य शोध में गर्भावस्था के दौरान क्रेनबेरी का सेवन सुरक्षित माना गया है (9)।

नोट: गर्भावस्था में कब्ज के लिए घरेलू उपाय करने से पहले एक बार डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

प्रेगनेंसी में कब्ज से बचना आसान है। इन तरीकों के बारे में हम आर्टिकल के इस भाग में बता रहे हैं।

प्रेगनेंसी में कब्ज से बचाव – Prevention Tips for Constipation During Pregnancy in Hindi

  1. पानी का सेवन: प्रेगनेंसी में ज्यादा से ज्यादा पानी व अन्य तरल पदार्थ का सेवन करने से कब्ज की समस्या से बचा जा सकता है। हर किसी को दिनभर में कम से कम आठ से नौ गिलास पानी जरूर पीना चाहिए (2)।
  2. व्यायाम करें: व्यायाम करने से शरीर के अंदरुनी अंग बेहतर तरीके से काम करते हैं और पाचन तंत्र भी ठीक रहता है। यही वजह है कि व्यायाम कब्ज की समस्या को दूर रखने में लाभकारी माना जाता है। हालांकि, गर्भावस्था जैसे नाजुक समय के दौरान कौन-सा व्यायाम किया जाना चाहिए, इसके संबंध में डॉक्टर से सलाह ली जानी चाहिए (32)।
  3. फल, सब्जियां और साबूत अनाज खाएं: जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं कि प्रेगनेंसी में कब्ज की समस्या फाइबर का कम सेवन करने की वजह से भी होती है। ऐसे में फाइबर की मात्रा को शरीर में बढ़ाने के लिए फल, सब्जियों और साबूत अनाज का सेवन किया जाना चाहिए (2)।
  4. लैक्सेटिव: डॉक्टर की सलाह पर कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए लैक्सेटिव का भी सेवन किया जा सकता है। डॉक्टर गर्भावस्था में सुरक्षित प्राकृतिक लैक्सेटिव दवा या इस गुण वाले खाद्य पदार्थों के बारे में जानकारी दे सकता है (2)। लैक्सेटिव मल को मुलायम करके मलद्वार से बाहर निकालने में मदद करता है।

अब हम गर्भावस्था में कब्ज के नुकसान के बारे में बता रहे हैं।

गर्भावस्था में कब्ज होने के दुष्प्रभाव – Side Effects Of Constipation During Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में कब्ज के नुकसान भी हो सकते हैं। इसी वजह से कहा जाता है कि प्रेगनेंसी में कब्ज का इलाज करने के लिए एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। नीचे हम प्रेगनेंसी में कब्ज के नुकसान के बारे में बता रहे हैं (32) (33)।

  • कब्ज के परिणामस्वरूप गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे फेकल इम्पेक्शन (Fecal impaction)। यह एक ऐसी स्थिति है] जब मलाशय में मल बुरी तरह से फंस जाता है।
  • दैनिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव, जैसे पेट दर्द होना, मलाशय में दर्द होना आदि।
  • बवासीर की समस्या हो सकती है।
  • मलद्वार से रक्त का निकलना।

अभी आपने जाना कि गर्भावस्था में कब्ज की समस्या से कैसे निपटा जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान खाने-पीने का ध्यान रखने से पेट से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। भरपूर पानी पिएं और समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना न भूलें। यह कदम स्वस्थ माता व शिशु के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। अगर आप गर्भावस्था में कब्ज की समस्या के संबंध में कुछ और पूछना चाहते हैं, तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिख भेजें। हम वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर जल्द जवाब देने का प्रयास करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्भावस्था में कब्ज की समस्या से बचने के लिए क्या खाना चाहिए ?

जैसा कि लेख में ऊपर विस्तार से बताया गया है कि गर्भवती महिला को कब्ज से बचने के लिए आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अनाज, फल, सब्जियां और बीन्स आदि को शामिल करना चाहिए (2)।

गर्भावस्था में कब्ज की समस्या के लिए कौन सी दवाओं का सेवन सुरक्षित है?

गर्भावस्था में कब्ज होने पर डॉक्टर आमतौर पर लैक्सेटिव से बचने की सलाह देते हैं। इसकी जगह मल को मुलायम करने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ खाने की सलाह दी जाती है, जिसमें फाइबर हो। दवा के रूप में डॉक्टर लैक्सेटिव और स्टूल सॉफ्टनर का प्रयोग करने की सलाह दे सकते हैं (33)।

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Auli Tyagi

औली त्यागी उभरती लेखिका हैं, जिन्होंने हरिद्वार (उत्तराखंड) से पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए. की डिग्री हासिल की है। औली को लेखन के क्षेत्र में दो साल का अनुभव है। औली प्रतिष्ठित दैनिक अखबार और कम्युनिटी रेडियो स्टेशन से ट्रेनिंग ले चुकी हैं। औली सामाजिक मुद्दों पर लिखना पसंद करती हैं। लेखन के अलावा इन्हें वीडियो एडिटिंग और फोटोग्राफी का तकनीकी ज्ञान भी हैं। इन्हें हिंदी और उर्दू साहित्य में विशेष रुचि है।

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