प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) के समय होने वाले दर्द का घरेलु इलाज – Premenstrual Syndrome Relief Tips in Hindi

Written by , (एमए इन मास कम्युनिकेशन)

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम पीरियड्स से पहले होने वाले लक्षणों को कहते हैं। यह समस्या कुछ महिलाओं को अधिक महसूस हो सकती है तो कुछ को कम। ऐसे में इसे नजरअंदाज करना नुकसानदेह हो सकता है। हालांकि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी लेकर आए हैं। यहां हम पीएमएस सिम्टम्स के साथ पीएमएस का उपचार व उससे बचाव के बारे में भी बताएंगे।

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सबसे पहले जानेंगे पीएमएस के दर्द का कारण क्या है।

पीएमएस के दर्द का कारण – Cause of Premenstrual Syndrome in Hindi

पीएमएस यानी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम, पीरियड आने से एक या दो सप्ताह पहले शुरू होता है। इस दौरान महिलाओं को सिरदर्द, जोड़ों का दर्द, चिड़चिड़ापन, मूड में बदलाव, अवसाद, स्तन में सूजन की समस्या महसूस होने लगती है (1)।

अगर बात करें पीएमएस के कारणों की तो फिलहाल इसके सही कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है। हालांकि, मासिक धर्म चक्र के दौरान होने वाले हार्मोन स्तर में बदलाव को इसके पीछे का मुख्य कारण माना जा सकता है। वहीं, कुछ मामलों में पीएमएस के कारण सामाजिक, बायोलॉजिकल व साइकोलॉजिकल कारकों से भी संबंधित हो सकते हैं। कई बार अधिकांश महिलाएं अपने प्रसव के वर्षों के दौरान पीएमएस के लक्षणों का अनुभव करती हैं। यह समस्या महिलाओं में कई बार हो सकती है (2):

  • 20 से 40 उम्र के बीच में ।
  • जिन्हें एक बच्चा हो ।
  • पर्सनल या फिर पारिवारिक समस्या से अवसाद के कारण ।
  • प्रसव के बाद अवसाद या मनोदशा विकार ।

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पीएमएस के दर्द का कारण जानने के बाद जानते हैं पीएमएस के दर्द के लक्षण क्या हैं।

पीएमएस के दर्द का लक्षण – Symptoms of Premenstrual Syndrome in Hindi

पीएमएस के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं को शारीरिक लक्षण हो सकते हैं, तो कुछ को भावनात्मक या मानसिक, वहीं किसी को दोनों ही हो सकते हैं (3)।

पीएमएस के शारीरिक लक्षण

पीएमएस के भावनात्मक या मानसिक लक्षण

  • चिड़चिड़ापन
  • थकान महसूस होना
  • नींद की समस्या (बहुत अधिक या बहुत कम सोना)
  • भूख में बदलाव होना या बहुत अधिक भूख लगना
  • एकाग्रता या याददाश्त की कमी
  • तनाव या चिंता
  • अवसाद या उदासी की भावना
  • मूड में बदलाव

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आइए जान लेते हैं पीएमएस का उपचार कैसे करें।

पीएमएस का उपचार – PMS Treatment in Hindi

पीएमएस के इलाज का मुख्य उद्देश्य पीएमएस के दौरान होने वाले लक्षणों से राहत पाना और दैनिक दिनचर्या की गतिविधियों पर इसके प्रभाव को कम करना है। ऐसे में कुछ उपचार जैसे मालिश, आहार, पोषण, व्यायाम को अपनाकर इनसे राहत पाया जा सकता है। आइए जानते हैं इसके उपचार के बारे में (4):

  • जीवनशैली में बदलाव: प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी है। इसके लिए नियमित रूप से व्यायाम, स्ट्रेस से बचाव व पर्याप्त नींद लेने की आदतों को अपने रूटीन में शामिल करना लाभकारी हो सकता है।
  • दवाइयां : पीएमएस की समस्या में हर्बल दवाई का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें मूड स्विंग को कम करने के लिए फ्रूट विटास लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा सेलेक्टिव सेरोटोनिन रिसेप्टर्स इनहिबिटर (SSRIs) का इस्तेमाल भी पीएमएस के मनोदशा में सुधार कर सकता है।
  • कॉग्निटिव-बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी): सीबीटी एक टॉकिंग थेरेपी हैं। मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं। सीबीटी अवसाद और चिंता के साथ-साथ बेचैनी को दूर करने में मदद कर सकती है।

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अब जानें, पीएमएस के समय होने वाले दर्द से बचाव के उपाय क्या हो सकते हैं।

पीएमएस के समय होने वाले दर्द से बचाव के उपाय – Prevention Tips For Premenstrual Syndrome in Hindi

इस लेख को पढ़ने के बाद अगर मन में यह सवाल आ रहा हो कि प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम से बचाव कैसे किया जा सकता है तो, नीचे हम कुछ ऐसे ही टिप्स बता रहे हैं जिन्हें ध्यान में रखकर पीएमएस के दर्द के लक्षण को कुछ हद तक कम कर सकते हैं (2):

  • पानी या जूस जैसे तरल पदार्थों का खूब सेवन करें।
  • कैफीन युक्त ठंडे पेय पदार्थ, शराब या अन्य पेय पदार्थों का सेवन न करें।
  • थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हर दो से तीन घंटे के अंतराल पर भोजन करें, अधिक खाने से बचें।
  • संतुलित आहार का सेवन करें। आहार में साबुत अनाज, सब्जियां और फल शामिल करें। नमक और चीनी की मात्रा को सीमित करें।
  • विटामिन बी6, कैल्शियम और मैग्नीशियम आदि को अपने भोजन में जगह दें। ये पोषक तत्व इस समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।
  • इसके अलावा, डेयरी उत्पादों में पाया जाने वाला ट्रिप्टोफैन भी मददगार हो सकता है।
  • महीने भर नियमित रूप से एरोबिक व्यायाम करें। यह पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकता है।
  • नींद की समस्या के लिए दवा लेने के बजाय आदतों में बदलाव लाएं।

अंत में जानें

अब जान लेते हैं डॉक्टर से कब लेनी चाहिए सलाह।

कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह – When to Visit A Doctor

कुछ परिस्थितियों में पीएमएस से निपटने के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी पड़ सकती है, आइए जानते हैं (2)

  • अगर, पीएमएस के लक्षण इतने गंभीर हैं कि वो कार्य करने की क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • अगर ऐसा लगता है कि पीएमएस के दौरान खुद को या दूसरों को चोट पहुंचा सकते हैं तो डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

पीएमएस से बचने के लिए इसे अच्छे से समझना जरूरी है, जिसमें हमारा यह लेख आपकी मदद कर सकता है। इस लेख में हमने पीएमएस के दर्द का कारण क्या होता है, समझाने के साथ-साथ पीएमएस के दर्द का लक्षण व बचाव से जुड़ी जानकारी दी है। कुछ परिस्थितियों में आप डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते हैं जिसके बारे में भी चर्चा की गई है। उम्मीद है यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पीएमएस पीरियड्स से पहले कितने समय तक रहता है?

पीएमएस के कई लक्षण होते हैं जो कि आमतौर पर मासिक धर्म चक्र के दूसरे भाग के दौरान शुरू होते हैं और मासिक धर्म शुरू होने के 1 से 2 दिन बाद चले जाते हैं (2)।

क्या पीएमएस के दौरान गर्भवती हो सकती हैं?

हां, पीएसएस के दौरान महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं (5)।

संदर्भ (Source) :

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  1. Premenstrual Syndrome
    https://medlineplus.gov/premenstrualsyndrome.html
  2. Premenstrual syndrome
    https://medlineplus.gov/ency/article/001505.htm
  3. Premenstrual syndrome (PMS)
    https://www.womenshealth.gov/menstrual-cycle/premenstrual-syndrome
  4. Premenstrual Syndrome
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK560698/
  5. Pregnancy risk during menstrual cycle: misconceptions among urban men in India
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5469003/
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