सहजन के फूल के फायदे, उपयोग और नुकसान – Sahjan Ke Phool Ke Fayde in Hindi

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भारत एक ऐसा देशा है जहां विभिन्न प्रकार की साग-सब्जियों का उपयोग किया जाता है। इन्हीं में एक नाम सहजन के फूल का भी है। यूं तो सहजन और इसके पत्ते का सेवन स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है, लेकिन इसके साथ-साथ सहजन के फूल के गुण भी कई सारे हैं। तो इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम सहजन के फूल के फायदे और उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं। साथ ही सहजन के फूल का उपयोग सीमित मात्रा में ही किया जाए इसलिए सहजन के फूल के नुकसान के बारे में भी बताएंगे। ऐसे में सहजन के फूल के फायदे व इससे जुड़ी हर जानकारी के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।

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लेख की शुरुआत करते हैं सहजन के फूल के औषधीय गुणों की जानकारी के साथ।

सहजन के फूल के औषधीय गुण

सहजन के फूल सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद माने गए हैं, इसका प्रमुख कारण है इसमें मौजूद औषधिय गुण। सहजन के फूल में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीहेलिमिंटिक (कीट नाशक), ड्यूरेटिक (मूत्र वर्धक), हेपटोप्रोटेक्टिव (लिवर को सुरक्षित रखने वाला) और एंटीबायोटिक जैसे गुण मौजूद होते हैं। इसके अलावा, इसमें सूजन की समस्या को कम करने वाला, कोलेस्ट्रॉल कम करने वाला, यौन क्षमता को बेहतर करने वाला (Aphrodisiac), मांसपेशियों की समस्या से बचाव करने वाले गुण भी हैं।

सहजन के फूल का उपयोग कार्डियोवैस्कुलर, हिस्टीरिया (एक प्रकार का मानसिक विकार), ट्यूमर और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकार से बचाव के लिए भी किया जा सकता है। इसमें अमीनो एसिड, क्वेरसेटिन, पोटेशियम, कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भी मौजूद हैं (1)। लेख में आगे हम अच्छी सेहत के लिए सहजन के फूल के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी ​​दे रहे हैं।

यहां हम जानेंगे सेहत के लिए सहजन के फूल के फायदे।

सहजन के फूल के फायदे – Benefits of Drumstick Flowers in Hindi

जिस प्रकार से सहजन और इसकी पत्तियों का उपयोग कई बीमारी से बचाव या लक्षणों को कम करने में लाभकारी हो सकते हैं। ठीक वैसे ही सहजन के फूल के फायदे भी सेहत के लिए देखे गए हैं। इसमें मौजूद पोषक तत्व और गुण कई बीमारियों से बचाकर शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकते हैं। यहां हम उन्हीं के बारे में बता रहे हैं। तो शरीर के लिए सहजन के फूल के फायदे कुछ इस प्रकार हैं:

1.प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करे

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण कई प्रकार के संक्रमण और बीमारियां का जोखिम रहता है (2)। वहीं, सहजन के फूलों का उपयोग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और उसमें सुधार करने के लिए देखा गया है। इस विषय पर हुई एक रिसर्च के अनुसार सहजन के फूलों के अर्क में इम्युनोमोडायलेटरी प्रभाव पाया गया है। यह प्रभाव न सिर्फ प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधारने में, बल्कि उसे बढ़ाने में भी मददगार हो सकता है। इसका उपयोग रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर कर परजीवी के कारण होने वाले संक्रमण से बचाव भी कर सकता है (3)। इस अधार पर कहा जा सकता है कि प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर करने के खाद्य पदार्थ में सहजन के फूलों को भी शामिल किया जा सकता है।

2.मधुमेह को नियंत्रित करे

रक्त में शुगर की अधिक मात्रा मधुमेह का कारण बन सकता है। सहजन के फूलों का इस्तेमाल मधुमेह की समस्या को कम करने में मददगार हो सकता है। शोध के अनुसार सहजन के फूलों के इथेनॉलिक अर्क में मौजूद फ्लेवोनोइड्स में एंटीडायबिटिक और एंटीऑक्सिडेंट प्रभाव होने की पुष्टि होती है। ये दोनों ही प्रभाव रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित कर मधुमेह की समस्या को कम करने में मददगार हो सकते हैं (4)।

बता दें कि फ्री रैडिकल्स के कारण शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जिस वजह से मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ता है (5)। ऐसे में फ्री रैडिकल्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव के लिए एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थ लाभकारी हो सकते हैं। यह फ्री रैडिकल्स के प्रभाव को कम कर शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकते हैं (6)। ऐसे में मधुमेह के जोखिम को कम करने के लिए सहजन के फूलों को डाइट में शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, अगर कोई मधुमेह की दवा का सेवन कर रहा हो तो सहजन के फूल को डाइट में शामिल करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

3.वजन कम करने में मददगार

शरीर में अतिरिक्त चर्बी के जमा होने पर वजन बढ़ने व मोटापे जैसी समस्या हो सकती है। इस दौरान भी सहजन के फूल का इस्तेमाल लाभदायक हो सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि सहजन के हर भाग, जिसमें फल, फूल और पत्तियां शामिल हैं, उनमें क्लोरोजेनिक एसिड पाया जाता है। वहीं, क्लोरोजेनिक एसिड में एंटी-ओबेसिटी प्रभाव होता है। यह प्रभाव बढ़ते वजन और मोटापा की समस्या को कुछ हद तक नियंत्रित रखने में मददगार हो सकता है (7)। देखा जाए तो सहजन के पौधे के पूरे भाग में एंटी-ओबेसिटी मौजूद होता है (8)। ऐसे में इस आधार पर माना जा सकता है कि नियमित व्यायाम व सही डाइट के साथ सहजन के फूल को आहार में शामिल कर वजन बढ़ने के जोखिम को कम किया जा सकता है।

4.लिवर के लिए

लिवर संबंधी समस्या को कम कर इसकी सुरक्षा के लिए भी सहजन के फूलों के फायदे हो सकते हैं। एक रिसर्च के अनुसार सहजन में हेपटोप्रोटेक्टिव प्रभाव पाया जाता हैे। यह प्रभाव लिवर संबंधी समस्या से बचाव कर लिवर को सुरक्षित रखने में लाभदायक हो सकता है। इसके पीछे सहजन के फूल में मौजूद क्वेरसेटिन नामक फ्लेवेनॉइड को माना जा सकता है। यही फ्लेवेनॉइड हेपटोप्रोटेक्टिव गुण प्रदर्शित कर सकता है (1)। हालांकि, लिवर से जुड़ी गंभीर समस्या में सहजन या इसके फूल के सहारे न रहें, बल्कि डॉक्टरी इलाज को प्राथमिकता दें। ध्यान रहे सहजन के फूल के फायदे बीमारी से बचाव या लक्षणों को कम कर सकता है। इन्हें गंभीर बीमारी का इलाज न समझें।

5.पाचन में सुधार

पाचन संबंधी समस्या को दूर करने के साथ ही सहजन के फूल पाचन क्रिया में सुधार करने में भी लाभदायक हो सकते हैं। दरअसल, एक रिसर्च के मुताबिक सहजन के फूल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। सहजन के फूल में पाया जाने वाला फाइबर न सिर्फ पाचन को आसान कर सकता है, बल्कि पाचन क्षमता को बेहतर करने और पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने में मददगार हो सकता है (9)।

6.गठिया से बचाव

गठिया जोड़ों से जुड़ी समस्या है, इसमें जोड़ों में सूजन के कारण दर्द की परेशानी हो सकती है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि गठिया के 100 से भी ज्यादा प्रकार हैं (10)। ऐसे में गठिया से बचाव के लिए भी सहजन के फूल के फायदे हो सकते हैं। दरअसल, सहजन के फूल में एंटी आर्थराइटिक गुण मौजूद हैं, हो गठिया के जोखिम को कम कर सकता है (11)। ऐसे में गठिया से बचाव के लिए सहजन के फूल को डाइट में शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

7.त्वचा के लिए

जैसे कि हमने पहले ही जानकारी दी थी की ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण कई सारी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है। यह न सिर्फ स्वास्थ्य को, बल्कि त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की वजह से झुर्रियां, झाइयां, सोरयसिस जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती है (12)। ऐसे में इनसे बचाव के लिए सहजन के फूल का उपयोग लाभकारी हो सकता है। दरअसल, सहजन के फूल में एंटीऑक्सिडेंट गुण मौजूद होता है (13)। इस आधार पर माना जा सकता है कि यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के जोखिम को कम कर त्वचा को स्वस्थ रख सकता है। हालांकि, इस विषय में सीधे तौर पर अभी शोध की आवश्यकता है।

8.बालों को स्वस्थ रखे

सेहत और त्वचा के साथ ही सहजन का उपयोग बालों को स्वस्थ रखने और उन्हें पोषण देने के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। सहजन के तेल का उपयोग बालों को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है (14)। वहीं, एंटीऑक्सिडेंट गुणों वाला सहजन का फूल बालों के लिए उपयोगी हो सकता है (12)। दरअसल, शोध के अनुसार ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी बालों को नुकसान पहुंचाने वाला एक कारक हो सकता है (15)। ऐसे में माना जा सकता है कि बालों को स्वस्थ रखने के लिए एंटीऑक्सिडेंट गुणों से युक्त सहजन का फूल लाभकारी हो सकता है। हालांकि, सीधे तौर पर बालों के विकास के लिए सहजन के फूल के लाभ से जुड़ी शोध की जरूरत है।

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लेख के इस हिस्से में हम जानेंगे कि सहजन के फूल का उपयोग किस प्रकार से कर सकते हैं।

सहजन के फूल का उपयोग – How to Use Drumstick Flowers in Hindi

सहजन के फूल का उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है। यहां हम उन्हीं के बारे में जानकारी दे रहे हैं। तो सहजन के फूल के उपयोग कुछ इस प्रकार हैं:

  • जैसे कि हमने जानकारी दी है कि सहजन के फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं (1)। ऐसे में सहजन के फूलों की चाय बाजार और ऑनलाइन उपलब्ध हैं, तो उसे खरीदकर सहजन के फूल की चाय पी सकते हैं।
  • सहजन के फूलों को फ्राई करके भी खा सकते हैं। इसका स्वाद मशरूम की तरह लग सकता है (11)।
  • त्वचा के लिए सहजन के फूलों का उपयोग लेप के रूप में किया जा सकता है।

मात्रा: रोजाना या हर दूसरे दिन सहजन के फूलों से बनी 1 कप चाय दिन में एक बार पी सकते हैं। हालांकि, इस विषय पर शोध की कमी है इसलिए इसके बारे में डॉक्टर से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।

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सहजन के फूल खाने के फायदे और उपयोग के बाद जानेंगे सहजन के फूलों को स्टाेर करने का तरीका।

सहजन के फूल लम्बे समय तक सुरक्षित रखने का तरीका – Storage of Drumstick Flowers in Hindi

सहजन के फूलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए नीच दिए गए उपायों को अपनाया जा सकता है।

  • सहजन के फूलों को सुरक्षित रखने के लिए ताजा सहजन के फूल एयर टाइट कंटेनर में रखकर रेफ्रीजरेटर में स्टाेर कर सकते हैं।
  • इसके अलावा सहजन के फूलों को कमरे के तापमान पर केवल दो दिन तक ही रखा जा सकता है।
  • सजहन के फूलों को लंबे समय तक स्टाेर करने के लिए उन्हें सुखाकर या पीस कर पाउडर के रूप में भी रख सकते हैं।
  • चाहें तो सहजन के फूल के चाय के लिए इसके टी बैग का पैक भी खरीद सकते हैं।

आगे भी है कुछ खास

लेख के इस भाग में हम आपको बता रहे हैं सहजन के फूल से होने वाले नुकसान के बारे में।

सहजन के फूल के नुकसान – Side Effects of Drumstick Flowers in Hindi

सहजन के फूलों के नुकसान को लेकर अधिक शोध उपलब्ध नहीं है फिर भी कुछ मामलों में इसके दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। हम यहां उन्हीं के बारे में बता रहें। तो सहजन के फूल के नुक़सान कुछ इस प्रकार हैं:

  • जैसे कि हमने जानकारी दी है कि सहजन के फूलों में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है (16)। वहीं, फाइबर की अधिक मात्रा का सेवन गैस, सूजन और ऐंठन की समस्या का कारण बन सकता है (17 )। इसके अलावा, अधिक फाइबर का सेवन शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा भी पैदा कर सकता है (18)।
  • जिन्हें लो शुगर की समस्या है या फिर जो शुगर की दवा का सेवन करते हैं उन्हें भी इसका सेवन करने से बचना चाहिए या डॉक्टरी सलाह पर ही इसका सेवन करना चाहिए, क्योंकि सहजन के फूल में मौजूद एंटीडायबिटिक प्रभाव समस्या को गंभीर कर सकते हैं (4)।
  • जिन्हें सहजन से एलर्जी की समस्या है उन्हें इसके फूल से भी एलर्जी का जोखिम हो सकता है।
  • सहजन के फूल के सेवन से गर्भपात का जोखिम हो सकता है (13)। इसलिए गर्भवती इसका सेवन न करें या सेवन से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह लें।
  • संवेदनशीन त्वचा वालों पर इसका उपयोग एलर्जी का कारण बन सकता है।

तो ये थे सहजन के फूल के फायदे, तो इसे डाइट में शामिल कर इन फायदों के लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में सहजन के फूल के नुकसान भी हो सकते हैं। इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही डाइट में शामिल करें। अगर इस विषय में मन में कोई उलझन हो तो डॉक्टर से इस बारे में जानकारी जरूर लें। सहजन के फायदे के बारे में तो कई लोगों को पता होगा, लेकिन सहजन के फूल के फायदे से कई लोग अवगत न हो। ऐसे में सहजन के फूल के लाभ का यह लेख हर किसी के साथ साझा करके सभी को सहजन के फूल के गुण व उपयोग से अवगत कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सहजन के फूल त्वचा के लिए फायदेमंद हैं?

सहजन के फूल में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट गुण के आधार पर माना जा सकता है कि यह त्वचा के लिए उपयोगी हो सकता है (13)। बता दें कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं (15 )। ऐसे में इससे बचाव के लिए एंटीऑक्सिडेंट युक्त सहजन का फूल लाभकारी हो सकता है। हालांकि, सीधे तौर पर सहजन के फूल त्वचा के लिए उपयोगी हो सकता है या नहीं इस विषय पर शोध की आवश्यकता है।

क्या सहजन के फूलों का सेवन रोजाना किया जा सकता है?

किसी भी चीज का जरूरत से ज्यादा उपयोग फायदे के बजाय नुकसान कर सकता है। ऐसे में सहजन के फूल का सेवन रोजाना करना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए बेहतर है इसका सेवन रोजाना करने से बचें। अगर हर रोज सेवन करना भी है तो इससे पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

क्या यूटीआई से बचाव के लिए सहजन के फूल का उपयोग लाभकारी हो सकता है?

यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) बैक्टीरिया के कारण हो सकता है (19)। ऐसे में इससे बचाव के लिए सहजन के फूल का उपयोग लाभकारी हो सकता है। दरअसल, सहजन में एंटी बैक्टीरियल व एंटी माइक्रोबियल गुण हैं (20)। वहीं, इसके फूल को यूरिनरी समस्याओं के लिए उपयोगी बताया गया है (11)। ऐसे में इन गुणों के आधार पर यह माना जा सकता है कि सहजन के फूल के उपयोग से यू टी आई (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, सीधे तौर पर अभी इस विषय में शोध की आवश्यकता है।

20 Sources

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  2. People at Risk – People with Weakened Immune Systems
    https://www.cdc.gov/listeria/risk-groups/weakened-immunity.html
  3. A Trypsin Inhibitor from Moringa oleifera Flowers Modulates the Immune Response In Vitro of Trypanosoma cruzi-Infected Human Cells
    https://www.researchgate.net/publication/343657766_A_Trypsin_Inhibitor_from_Moringa_oleifera_Flowers_Modulates_the_Immune_Response_In_Vitro_of_Trypanosoma_cruzi-Infected_Human_Cells
  4. Antidiabetic and Antioxidant Activities of Ethanolic Extract of Dried Flowers of Moringa oleifera in Streptozotocin-induced Diabetic Rats
    http://eprints.lmu.edu.ng/2344/1/%5B22172521%20-%20Acta%20Facultatis%20Medicae%20Naissensis%5D%20Antidiabetic%20and%20Antioxidant%20Activities%20of%20Ethanolic%20Extract%20of%20Dried%20Flowers%20of%20Moringa%20oleifera%20in%20Streptozotocin-induced%20Diabetic%20Rats.pdf
  5. Antioxidants: In Depth
    https://www.nccih.nih.gov/health/antioxidants-in-depth
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  18. Fiber
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  19. Urinary tract infection – adults
    https://medlineplus.gov/ency/article/000521.htm
  20. Use of Moringa oleifera Flower Pod Extract as Natural Preservative and Development of SCAR Marker for Its DNA Based Identification
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4947656/
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सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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