सरसों (राई) के 16 फायदे, उपयोग और नुकसान – All About Mustard Seeds in Hindi

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सरसाें का नाम लेते ही जहन में सबसे पहले सरसों का साग आता है। साथ ही सरसों का उपयोग तेल निकालने के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा, भारतीय रसोई में सरसों के दाने से तड़का भी लगाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सेहत के लिए भी इसके कई फायदे हैं। स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल में हम सेहत के लिए सरसों के बीज के फायदे और नुकसान बता रहे हैं। सरसों के बीज स्वास्थ्य लाभ के साथ ही हम सरसों के उपयोग कैसे कर सकते हैं इस बारे में भी जानेंगे। हालांकि, सरसों के उपयोग से स्वस्थ जरूर रहा जा सकता है, लेकिन गंभीर बीमारी की अवस्था में डॉक्टर से इलाज करवाना ही सही है।

नीचे है पूरी जानकारी

सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि सरसों कहते किसे हैं।

सरसों क्या है?

सरसों के बारे में शायद ही ऐसा कोई होगा, जो नहीं जानता होगा। सरसों क्रूसिफेरा या ब्रैसिकेसी (Cruciferae or Brassicaceae) परिवार का एक पौधा है, जो आकार में लगभग 1 से लेकर 3 फुट तक लंबा हो सकता है। इसे ब्रेसिका कैंपेस्ट्रिस (Brassica campestris) वैज्ञानिक नाम से जाना जाता है। इसकी पत्तियों का उपयोग साग बनाने के लिए, जबकि फूल और बीजों का उपयोग तेल निकालने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, सरसों के बीज का उपयोग मसाले के रूप में भी किया जाता है।

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सरसों के बारे में जानने के बाद अब हम सरसों के प्रकार के बारे में बता रहे हैं।

सरसों के प्रकार – Types of Mustard in Hindi

सरसों के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं, काली सरसों, पीली सरसों और भूरी सरसों। इसके अलावा, सरसों से ही मिलती-जुलती राई होती है। राई के दाने सरसों के दाने से आकार में थोड़े छोटे होते हैं। साथ ही स्वाद भी दोनों का अलग होता है। जहां, सरसों के दाने का तेल निकाला जाता है, वहीं राई के दाने आचार में डाले जाते हैं। वहीं, गुणों की बात करें, तो दोनों में ही लगभग एक समान गुण और पोषक तत्व पाए जाते हैं। साथ ही अंग्रेजी में दोनों को मस्टर्ड (mustard) कहा जाता है।

आगे है और जानकारी

अब हम जानते हैं सरसों में पाए जाने वाले औषधीय गुणों के बारे में।

सरसों के औषधीय गुण

सरसों हमारी सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद हो सकती है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, सरसों का हर हिस्सा सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसमें कैरोटीनॉयड, फेनोलिक कंपाउंड्स और ग्लूकोसिनोलेट्स जैसे कई प्रकार के फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं। इन फाइटोकेमिकल्स की मदद से कैंसर, मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों से बचना आसान होता है (1)। इसमें पाए जाने वाले औषधीय गुण सेहत के लिए अन्य प्रकार से भी फायदेमंद हो सकते हैं, जिनके बारे में आगे विस्तार से बताया गया है।

आगे है बहुत कुछ

यहां हम आपको सेहत के लिए सरसाें के फायदे को विस्तार से बता रहे हैं।

सरसों के फायदे – Benefits of Mustard in Hindi

1. कैंसर की रोकथाम में सरसों के बीज के फायदे

सरसों में कुछ ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो कैंसर को पनपने से रोक सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध में पाया गया कि सरसों में एंटीकार्सिनोजेनिक गुण पाया जाता है। सरसों में पाया जाने वाला यह गुण शरीर में कैंसर को पनपने से रोक सकता है (1)। इसके अलावा, एक अन्य शोध में पाया गया है कि सरसों के तेल में मौजूद ओमेगा-3 पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड कोलन कैंसर के खतरे को रोकने में प्रभावी असर दिखा सकते हैं (2)। बेशक, वैज्ञानिक अध्ययन पुष्टि करते हैं कि सरसों में एंटी कैंसर गुण पाए जाते हैं, लेकिन ये कैंसर का इलाज नहीं हो सकते हैं। इसलिए, अगर कोई इस गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो उसे डॉक्टर से उचित इलाज करवाना चाहिए। 

2. अस्थमा की अवस्था में सरसों के लाभ

सरसों में मौजूद औषधीय गुण अस्थमा में लाभकारी हो सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, सरसों के बीज में साइनपाइन (sinapine) नामक कार्बनिक यौगिक पाया जाता है। यह मांसपेशियों की सक्रियता और फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाकर अस्थमा की स्थिति के विपरीत क्रिया उत्पन्न कर अस्थमा को रोकने में मदद कर सकता है (3)।

3. माइग्रेन को दूर करने में सरसों के बीज के फायदे

माइग्रेन की समस्या के कारण, पीड़ित व्यक्ति सिर में असहनीय दर्द से जूझता है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरसों का उपयोग फायदेमंद हो सकता है। एक वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, सरसों के बीज में रिबोफ्लेविन (Riboflavin) नामक विटामिन मौजूद होता है, जो माइग्रेन के खतरे को कम कर सकता है (4) (5)। फिलहाल, इस विषय पर और वैज्ञानिक रिसर्च की जरूरत है। इसलिए, गंभीर माइग्रेन की शिकायत होने पर बिना देरी के डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए।

4. रक्तचाप के लिए सरसों के बीज के स्वास्थ्य लाभ

रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए भी सरसों का उपयोग किया जा सकता है। एक शोध में पाया गया कि सरसों के बीज में मेथनॉल अर्क पाया जाता है, जिसमें एंटीहाइपरटेंशन प्रभाव होता है। इसलिए, अगर सीमित मात्रा में सरसों के बीज या फिर राई के बीज का सेवन किया जाता है, तो रक्तचाप को नियंत्रित रखा जा सकता है (6)।

5. वजन कम करने के लिए सरसों के फायदे

बढ़ता हुआ वजन कई गंभीर बीमारियोंं का कारण बन सकता है और सरसों के बीज के फायदे वजन घटाने में भी देखे जा सकते हैं। जी हां, इस विषय पर कई वैज्ञानिक रिसर्च हुए हैं, जिन्हें एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है। रिसर्च के अनुसार, सरसों के बीज से निकाला गया तेल वजन घटाने में सहायक हो सकता है। दरअसल, सरसों के तेल में डायसेलिग्लिसरॉल (Diacylglycerol) की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो वजन घटाने में सहायक हो सकता है (7)।

6. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सरसों के बीज के स्वास्थ्य लाभ

सरसों बेनिफिट्स की बात करें, तो कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में भी इसके लाभदायक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, डायसेलिग्लिसरॉल (diacylglycerol) से समूद्ध सरसों में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने की क्षमता पाई जाती है। इसके सेवन के बाद यह देखा गया है कि हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एचडीएल) यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि हुई और लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एलडीएल) यानी खराब कोलेस्ट्रॉल में कमी आई। इसलिए, कोलेस्ट्रॉल के संतुलन में सरसों के तेल का प्रयोग किया जा सकता है (7)।

7. मधुमेह से बचने में सरसों के बीज के लाभ

रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने और अनियंत्रित होने से मधुमेह की समस्या हो सकती है। मधुमेह की समस्या से बचने के लिए सरसों मददगार हो सकता है। इस विषय पर कई वैज्ञानिक शोध भी हो चुके हैं। दरअसल, शोध में पाया गया है कि काले सरसों के बीज में हाइपोग्लाइसेमिक और एंटीडायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो रक्त में मौजूद ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं। काले सरसों के बीज टाइप 2 डायबिटीज की समस्या में आराम पहुंचाने का काम कर सकते हैं। इस बात की पुष्टि एनसीबीआई की साइट पर उपलब्ध एक रिसर्च पेपर से होती है (8)।

8. रुमेटाइड अर्थराइटिस में लाभदायक

रुमेटाइड अर्थराइटिस ऐसी बीमारी है, जिसमें पैरों की गांठ में सूजन की समस्या के साथ-साथ दर्द भी हो सकता है। यहां सरसों तेल के फायदे देखे जा सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, सरसों के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो रुमेटाइड अर्थराइटिस में आराम पहुंचाने का काम कर सकता है। यह अर्थराइटिस के कारण होने वाले दर्द और जोड़ों में सूजन को कुछ हद तक कम कर सकता है (9)।

9. रतौंधी की समस्या को दूर करने के लिए सरसों का उपयोग

विटामिन ए की कमी से रात को नहीं दिखाई देना या फिर नजर का कमजोर होना यानी रतौधीं की समस्या हो सकती है। सरसों का उपयोग करने पर इस समस्या को दूर किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के अनुसार, पीली सरसों में विटामिन-ए की अच्छी मात्रा पाई जाती है। विटामिन-ए रतौंधी की समस्या को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकता है (10)। बेशक, रतौंधी में सरसों से फायदा हो सकता है, लेकिन गंभीर अवस्था में जल्द से जल्द डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए।

10. रजोनिवृत्ति

रजोनिवृत्ति की स्थिति में महिलाओं में मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाते हैं। इस स्थिति में महिलाएं गर्भवती नहीं हो सकती हैं। महिलाओं में होने वाली रजोनिवृत्ति में सरसों के फायदे आराम पहुंचा सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, सरसों में कॉपर, मैग्नीशियम, आयरन और सेलेनियम की मात्रा पाई जाती है। ये सभी पोषक तत्व रजोनिवृत्ति में महिलाओं को होने वाली उच्च रक्तचाप और ओस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचा सकते हैं (11)।

11. फाइबर से भरपूर

अन्य पोषक तत्वों के साथ फाइबर भी शरीर के लिए जरूरी माना जाता है। यह कब्ज जैसी पेट संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिलाने के साथ-साथ वजन को नियंत्रित करने का काम भी करता है (12)। इस खास पोषक तत्व की पूर्ति के लिए सरसों का सेवन किया जा सकता है, क्योंकि सरसों फाइबर का अच्छा स्रोत है (4)।

12. बुखार और सर्दी में सरसों खाने के फायदे

बुखार और सर्दी में भी सरसों के फायदे देखे गए हैं। माना जाता है कि अगर पीले बुखार (Yellow Fever) से ग्रस्त मरीज के पैरों को गर्म पानी में सरसों मिलाकर धोया जाए, तो आराम मिल सकता है (13)। इसके अलावा, एक और अन्य शोध से यह पता चला है कि सरसों में मौजूद गुणों के कारण इसका इस्तेमाल सर्दी, जुकाम और फ्लू के खिलाफ किया जा सकता है (14)। फिलहाल, यह बताना मुश्किल है कि इसमें ऐसे कौन से गुण होते हैं, जिस कारण सरसो बुखार, सर्दी व जुकाम आदि में लाभदायक है।

13. पीठ दर्द और मांसपेशियों के दर्द में

आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में पीठ दर्द और मांसपेशियों में दर्द की समस्या तेज से बढ़ रही है। ऐसे में सरसों का उपयोग या फिर राई के फायदे पीठ दर्द और मांशपेशियों के दर्द में भी देखे जा सकते है। एक शोध से पता चला है कि सरसों का उपयोग मलहम और दर्द निवारक के रूप में आज भी गठिया की समस्या के साथ ही पीठ दर्द और मांसपेशियों में दर्द के इलाज के लिए किया जाता है (15)। हालांकि, दर्द निवारक गुणों के लिए सरसों या राई किस प्रकार से काम करते हैं यह अभी अध्ययन का विषय है।

14. संक्रामक रोगों से लड़ने में सरसों के लाभ

सरसों या राई के फायदे संक्रमण से लड़ने में भी काम आ सकते हैं। एक शोध में पाया गया कि सरसों का उपयोग आरटीआई (रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) यानी श्वसन तंत्र की समस्या को कम करने में फायदेमंद हो सकता है। शोध में मरीजों के पैरों को दिन में एक बार सरसों के बीज के फुटबाथ किया गया, जिससे उन्हें जल्दी ही आराम मिला। इसके लिए एक बाल्टी गर्म पानी में सरसों के बीज से बने पाउडर को मिक्स करके मरीज को उसमें पैर डालकर रखने को कहें (14)।

15. त्वचा के लिए सरसों के फायदे

एजिंग की समस्या से रोकथाम के लिए भी सरसों के फायदे देखे जा सकते हैं। सरसों में विटामिन-सी (एस्कॉर्बिक एसिड) होता है (16)। एस्कॉर्बिक एसिड को विभिन्न सौंदर्य उत्पादों में प्रयोग किया जाता है। इन उत्पाद में एंटी-एजिंग उत्पाद भी शामिल हैं, जो बढ़ती उम्र के साथ होने वाली एजिंग की समस्या से बचाने का काम कर सकते हैं (17)।

16. बालों के विकास के लिए सरसों के गुण

बालों में सरसों के तेल का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है। सरसों के तेल में विटामिन, प्रोटीन और फैटीसेड की मात्रा पाई जाती है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, इन सभी पोषक तत्व में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो बालों के विकास और बालों का गिरना कम करने में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं (11)।

आगे और जानें

आगे हम बता रहे हैं कि सरसों या राई में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं।

सरसों के पौष्टिक तत्व – Mustard Nutritional Value in Hindi

सरसों के औषधीय गुण उसमें पाए जाने वाले पौष्टिक तत्वों के कारण होते हैं। जानते हैं कि सरसों में कौन कौन से पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं (4):

पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 ग्राम
पानी5.27 ग्राम
कैलोरी508 kcal
प्रोटीन26.08 ग्राम
फैट36.24 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट28.09 ग्राम
फाइबर12.2 ग्राम
शुगर6.79 ग्राम
मिनरल्स
कैल्शियम266 मिलीग्राम
आयरन9.21 मिलीग्राम
मैग्नीशियम370 मिलीग्राम
फास्फोरस828 मिलीग्राम
पोटैशियम738 मिलीग्राम
सोडियम13 मिलीग्राम
जिंक6.08 मिलीग्राम
मैंगनीज2.448 मिलीग्राम
कॉपर0.645 मिलीग्राम
सेलेनियम208.1 माइक्रोग्राम
विटामिन
विटामिन सी7.1 मिलीग्राम
थायमिन0.805 मिलीग्राम
राइबोफ्लेविन0.261 मिलीग्राम
नियासिन4.733 मिलीग्राम
विटामिन-बी 60.397 मिलीग्राम
फोलेट162 माइक्रोग्राम
कोलीन122.7 मिलीग्राम
विटामिन-ए2 माइक्रोग्राम
बीटा कैरोटिन18 माइक्रोग्राम
विटामिन-ए IU31 IU
विटामिन-ई5.07 माइक्रोग्राम
विटामिन-के5.4 माइक्रोग्राम
लिपिड
फैटी एसिड टोटल सैचुरेटेड1.989 ग्राम
फैटी एसिड टोटल मोनोअनसैचुरेटेड22.518 ग्राम
फैटी एसिड टोटल पोलीअनसैचुरेटेड10.088 ग्राम

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इस भाग में जानते हैं कि सरसों का उपयोग और किस प्रकार से किया जा सकता है।

सरसों का उपयोग – How to Use Mustard in Hindi

सरसों में मौजूद पौष्टिक तत्व सरसों के बीज के लाभ और इसके उपयोग को लाभकारी बना सकते हैं। आप सरसों का उपयोग निम्न तरीकों से कर सकते हैं।

  • सरसों के तेल की कुछ बूंदों को सलाद में इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • भुने हुए चने के साथ भी सरसों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • सरसों को दाल या सब्जी में छौंका लगाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • इसके अलावा, सरसों के तेल को पकौड़ी व पापड़ आदि तलने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
  • त्वचा पर कहीं कोई लालिमा है, तो इसे प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं।
  • बालों में लगाने के लिए भी आप सरसों तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • शरीर में मालिश के लिए भी सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

नीचे और जानें

आइए, लेख के अगले भाग में जानते हैं कि सरसों या राई को लंबे समय तक कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

सरसों को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?

सरसों का तेल या राई के बीज आवश्यकतानुसार मात्रा में ही खरीदें। अगर तेल और बीज को अच्छी तरह स्टोर किया जाए, तो इसे लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। तेल व बीज को हमेशा एयरटाइट कंटेनर और घर के सामान्य तापमान में ही रखें।

बने रहें हमारे साथ

आइए, अब सरसों से होने वाले नुकसान के बारे में जानते हैं।

सरसों के नुकसान – Side Effects of Mustard in Hindi

सरसों को अगर सीमित मात्रा में प्रयोग किया जाए, तो सरसों खाने के फायदे अनेक हैं। वहीं, अगर वैज्ञानिक तथ्यों को नजरअंदाज कर सरसों का इस्तेमाल किया जाए, तो स्वास्थ्य के लिए सरसों के बीज के नुकसान हो सकते हैं। सरसों के दाने या राई के नुकसान इस प्रकार हैं।

  • तलने के लिए इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा प्रयोग में न लाएं, इससे लंग कैंसर का खतरा हो सकता है। इसमें सरसों का तेल भी शामिल है (18)।
  • सरसों को अधिक समय तक त्वचा पर लगाने से जलन की समस्या भी हो सकती है (15)।
  • सरसों के बीज में विटामिन-ई की भरपूर मात्रा होती है और इसके अधिक सेवन से दिमाग में ज्यादा खून बहने का खतरा भी हो सकता है (4) (19) ।
  • सरसों के तेल में इरुसिक एसिड की मात्रा मौजूद होती है, जिसका अधिक सेवन लिपोसिस (lipolysis) की समस्या उत्पन्न कर देता है, जो हृदय रोगों का मुख्य कारण बन सकता है। इस कारण अधिक मात्रा सरसों के तेल का सेवन करना सुरक्षित नहीं है (20)।
  • जानवरों पर किए गए कई प्रयोगों में यह साबित हुआ है कि सरसों का अधिक मात्रा में उपयोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के स्थान पर कम कर सकता है (21)।

अब तो आप सरसों के फायदे से परिचित हो चुके हैं। अगर कोई लेख में बताई गई किसी भी समस्या से पीड़ित है, तो सरसों के दाने और सरसों के तेल का इस्तेमाल औषधि के रूप में कर सकते हैं। वहीं, अधिक मात्रा में सेवन करने से सरसों के बीज के नुकसान भी हो सकते हैं। इसलिए, हमने लेख में इसके उपयोग संबंधी जरूरी टिप्स भी दिए हैं, जिन्हें आप सुविधानुसार अपना सकते हैं। अब जब आप अगली बार बाजार जाएं, तो साथ में सरसों का तेल जरूर लेकर आएं। आशा करते हैं सरसों का उपयोग और फायदों के बारे में जानकारी देता यह आर्टिकल आपके लिए लाभदायक रहा होगा।

अकसर पूछे जाने वाले सवाल

सरसों की तासीर कैसी होती है?

सरसों की तासीर गर्म होती है।

काली राई खाने से क्या फायदा हो सकता है?

काली राई का तेल सर्दी, मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों का दर्द और गठिया के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, काली सरसों के बीज का उपयोग कैंसर और मधुमेह की रोकथाम के लिए भी किया जा सकता है (22)।

सरसों के बीज से क्या फायदा हो सकता है?

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के अनुसार सरसों के गुण के कारण ही यह सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद होता है। सरसों के बीज सेहत, त्वचा व बालों के लिए किस प्रकार लाभदायक हैं, उस बारे में लेख में ऊपर विस्तार से बताया गया है।

क्या रोजाना सरसों खाना सेहत के लिए अच्छा है?

रोजाना सरसों के दाने खाने से सेहत के लिए कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर की रोजाना की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं (1)। फिर भी इसकी अधिक मात्रा से होने वाले नुकसान से बचने के लिए इसका सेवन सीमित मात्रा में या फिर डॉक्टर की सलाह पर करें। सरसों से होने वाले नुकसान के बारे में हमने ऊपर विस्तार से बताया है।

22 संदर्भ (Sources):

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Saral Jain

सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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